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योगी सरकार की सौगात, यूपी के 18 शहरों में शुरू होगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसों की सेवा

योगी कैबिनेट का फैसला: 18 शहरों में चलेंगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसें जीसीसी मॉडल पर होगा संचालन, 12 साल की होगी अनुबंध अवधि 12 मीटर की बस पर 40 लाख और 9 मीटर की बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान आगरा, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी समेत 18 शहरों को मिलेगा लाभ लखनऊ और कानपुर को मिलेंगी 300-300 बसें, वाराणसी में 250 और गोरखपुर में चलेंगी 150 इलेक्ट्रिक बसें यूपी में निर्मित बसों की खरीद को मिलेगी वरीयता, रोजगार के नए अवसरों की खुली राह लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की नगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को व्यवस्थित करने के साथ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा (जेवर सहित) में बसें संचालित की जाएंगी। इनमें 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 वर्ष निर्धारित की गई है। लखनऊ और कानपुर को मिलेंगी 300-300 बसें नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रदेश के 18 शहरों में जल्द ही 1,725 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इनमें आगरा में 100, मथुरा-वृंदावन में 50, अलीगढ़ में 25, फिरोजाबाद में 25, गाजियाबाद में 100, मेरठ में 100, शाहजहांपुर में 25, बरेली में 25, मुरादाबाद में 25, सहारनपुर में 25, नोएडा (जेवर सहित) में 100, वाराणसी में 250, अयोध्या में 50, लखनऊ में 300, गोरखपुर में 150, कानपुर में 300, प्रयागराज में 50 और झांसी में 25 बसें चलाई जाएंगी। निजी ऑपरेटर करेंगे बसों का संचालन जीसीसी मॉडल के तहत निजी ऑपरेटर बसों की खरीद, चार्जिंग स्टेशन के लिए आवश्यक चार्जर की व्यवस्था, बस चालक एवं तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती तथा बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर ऑपरेटरों को संचालन एवं रखरखाव शुल्क (ओएंडएम फी) का भुगतान किया जाएगा। वहीं, टैरिफ/प्रयोक्ता शुल्क निर्धारण सरकार द्वारा किया जाएगा। बसों की खरीद पर मिलेगा अनुदान परियोजना के तहत 12 मीटर लंबी प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस के लिए 40 लाख रुपये और 9 मीटर लंबी बस के लिए 35 लाख रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। बसों के संचालन के लिए डिपो निर्माण हेतु संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण की ओर से आवश्यकतानुसार भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। निजी निवेश से सेवाओं में सुधार की उम्मीद सरकार के अनुसार, निजी निवेश के माध्यम से बस संचालन में सरकारी व्यय का बोझ कम होगा और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। निजी ऑपरेटर दक्षता, समयबद्धता एवं उपभोक्ता संतुष्टि पर विशेष ध्यान देंगे। निजी ऑपरेटरों को प्रतिस्पर्धा के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे नवीनतम तकनीक एवं सेवा सुधार लागू होंगे। निजी ऑपरेटर निविदा प्रक्रिया से चयनित होकर अनुबंधित किए जाएंगे और उपभोक्ताओं को सीधा लाभ प्राप्त होगा। प्रदेश में निर्मित बसों को मिलेगी वरीयता योजना के तहत नई इलेक्ट्रिक बसों के खरीद के संबंध में परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित नीति के क्रम में एल-1 के रेट पर उत्तर प्रदेश में निर्मित बसों के क्रय को वरीयता प्रदान किया जाना प्रस्तावित है। इससे प्रदेश में बस निर्माण और आपूर्ति से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।

योगी सरकार का मिशन शक्ति अभियान: गांव-गांव पहुंच रही महिला पुलिस, महिलाओं की सुरक्षा पर जोर

योगी सरकार के मिशन शक्ति अभियान से महिलाएं हुईं सशक्त, 99 हजार से अधिक गांवों तक पहुंची महिला बीट पुलिस  – अभियान के फेज-5 के द्वितीय चरण में 2.90 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों की जांच – 66 हजार से अधिक महिलाओं और बेटियों ने दौड़ में लिया भाग –  38.64 लाख से अधिक लोगों की हुई चेकिंग, 1,841 अभियोग किए गये दर्ज लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने के लिए चलाया जा रहा मिशन शक्ति अभियान के प्रभावी परिणाम सामने आये हैं। मिशन शक्ति अभियान ने जहां एक ओर आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाया, वहीं दूसरी ओर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराकर उन्हे सशक्त बनाया। अभियान के फेज-5 के द्वितीय चरण 19 मार्च-26 से 17 अप्रैल तक प्रदेशभर में करीब 3 लाख स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों की जाचं की गई। इसके अलावा महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन सेवाओं के प्रति जागरूक करने के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया।  66 हजार से अधिक महिलाओं और बालिकाओं ने दौड़ में लिया भाग  महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की नोडल अधिकारी एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि योगी सरकार प्रदेश में महिला सुरक्षा को कानून-व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए जागरूकता, संवाद और सख्त कार्रवाई पर एक साथ जोर दे रही है। इसी क्रम में मिशन शक्ति अभियान फेज-5 का द्वितीय चरण प्रदेश भर में संचालित किया गया। इस दौरान पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभागों ने समन्वित रूप से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। अभियान में महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा संबंधी जानकारी देने के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया। अभियान के तहत महिला सुरक्षा को लेकर जनपद स्तर पर 66,441 महिलाओं और बालिकाओं ने आयोजित दौड़ कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से 49,437 प्रचार-प्रसार सामग्री वितरित की गई। इनमें 1,930 जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और प्रेरणादायी महिलाओं ने भी भाग लिया। वहीं, धार्मिक स्थलों, मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित महिला चौपालों के माध्यम से 15,55,219 लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन सेवाओं से संबंधित जानकारी दी गई। इन प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और जरूरत के समय उपलब्ध सहायता तंत्र का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। 99 हजार से अधिक गांवों में पहुंची महिला बीट पुलिस अभियान के दौरान 1,593 मिशन शक्ति केंद्रों पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में 12,51,777 महिलाओं ने प्रतिभाग किया। इस दौरान 10,05,926 सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन से संबंधित पम्फलेट वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, विभिन्न ग्राम पंचायतों और वार्डों में बीट पुलिस अधिकारियों ने 45,040 कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, बीसी सखी, लेखपाल, एएनएम, आशा वर्कर, ग्राम पंचायत अधिकारियों और रोजगार सेवकों सहित अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों ने सहयोग किया। इन कार्यक्रमों में 72,820 लोगों सहित जनमानस को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। महिलाओं की समस्याओं को सीधे सुनने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने के लिए महिला बीट पुलिस अधिकारियों ने व्यापक स्तर पर भ्रमण किया। अभियान के दौरान महिला बीट अधिकारियों ने 99,377 ग्रामों और वार्डों का दौरा किया। इस दौरान घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता से जोड़ने पर जोर दिया गया। घरेलू विवाद, भरण-पोषण और अन्य समस्याओं से जुड़े मामलों में पीड़ितों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने तथा जरूरत के अनुसार संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने की पहल की गई। 2.90 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों की जांच महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की निगरानी और चेकिंग भी तेज की गई। 2,90,153 स्कूल-कॉलेजों तथा चौराहों, बाजारों, मॉल, पार्क और भीड़भाड़ वाले स्थानों की जांच की गई। इस कार्रवाई के दौरान 38,64,614 व्यक्तियों की चेकिंग की गई। वहीं 1,841 अभियोग पंजीकृत किए गए, 6276 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 16,85,263 व्यक्तियों को चेतावनी दी गई।  अभियान के दौरान 59,897 स्थानों पर पुलिस की गश्त और फुट पेट्रोलिंग की गई। इसके साथ ही महिला अपराधों से जुड़े संवेदनशील स्थलों और हॉटस्पॉट क्षेत्रों में 39,454 कैमरे अधिष्ठापित कराए गए। राजकीय रेलवे पुलिस ने भी मिशन शक्ति अभियान से संबंधित 4,893 रेलवे स्टेशनों पर 11,226 ट्रेनों में 1,69,201 प्रचार सामग्री वितरित की।

यूपी में ब्याज और अर्थदंड माफी योजना-2026 लागू, पुराने बकायेदारों को राहत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत विभिन्न कर कानूनों के अंतर्गत 31 दिसंबर 2025 तक सृजित बकायों पर ब्याज और अर्थदंड माफ करने का निर्णय लिया गया है। यह छूट 3 महीने तक लागू रहेगी। योजना के दायरे में बिक्री कर, केंद्रीय बिक्री कर, व्यापार कर, मूल्य संवर्धित कर (वैट) समेत कई कर कानूनों के अंतर्गत आने वाले पुराने बकाये शामिल होंगे। कई पुराने कर कानूनों के बकाये होंगे शामिल योजना के तहत उत्तर प्रदेश बिक्री कर अधिनियम-1948, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम-1956, उत्तर प्रदेश आमोद एवं पणकर अधिनियम-1979, उत्तर प्रदेश व्यापार कर अधिनियम-1995, उत्तर प्रदेश प्रवेश कर अधिनियम-2007 और उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम-2008 के अंतर्गत सृजित बकायों को शामिल किया गया है। इसके अलावा मनोरंजन कर से संबंधित नियमावली और उत्तर प्रदेश केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमावली-1997 से जुड़े मामलों को भी योजना के दायरे में रखा गया है। ब्याज और अर्थदंड से मिलेगी राहत वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि निर्धारित तारीख तक सृजित बकायों पर लगने वाले ब्याज और अर्थदंड को माफ करने के लिए यह योजना लागू की जा रही है। इससे संबंधित कर कानूनों के अंतर्गत बकाया रखने वाले करदाताओं को राहत मिलने का रास्ता खुलेगा। उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 के जरिए पुराने कर विवादों और बकायों के निस्तारण को प्रोत्साहित करने का अवसर मिलेगा।

योगी सरकार का आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तोहफा, अब हर साल मिलेंगी 3 साड़ियां

योगी सरकार अब आंगनबाड़ी कर्मियों को हर साल देगी तीन साड़ियां   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी   3.80 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मिलेगा लाभ   अब दो के बजाय तीन साड़ियां मिलेंगी, अतिरिक्त साड़ी का खर्च उठाएगी राज्य सरकार   प्रति साड़ी 500 रुपये की दर से 19.02 करोड़ रुपये होंगे खर्च लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को हर साल तीन साड़ियां देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अभी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को साल में दो साड़ियां मिलती हैं। नई व्यवस्था से प्रदेश की 3,80,290 कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को लाभ मिलेगा। इस पर राज्य सरकार करीब 19.02 करोड़ रुपये खर्च करेगी।   कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। इनके लिए 1,90,145 कार्यकत्रियों और इतनी ही सहायिकाओं के पद स्वीकृत हैं। सभी स्वीकृत पदों के आधार पर कुल 3,80,290 कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को एक-एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।   अतिरिक्त साड़ी का खर्च उठाएगी राज्य सरकार वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार की 60:40 की वित्तीय भागीदारी वाली योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो साड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं। अब तीसरी साड़ी राज्य सरकार अपने खर्च पर देगी। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपये निर्धारित किए गए हैं। कुल अनुमानित व्यय 19,01,45,000 रुपये होगा।   नियमित इस्तेमाल और धुलाई की परेशानी होगी दूर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को कार्यस्थल पर निर्धारित वेशभूषा में काम करना होता है। नियमित इस्तेमाल, धुलाई, प्रतिकूल मौसम और साड़ी के अचानक गंदा या खराब होने जैसी परिस्थितियों को देखते हुए एक अतिरिक्त साड़ी देने का फैसला किया गया है।   प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और आकांक्षात्मक जिलों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। इन सेवाओं के संचालन में कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की अहम भूमिका है।

सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स को मिलेगा बाजार, बनेगा यूपी स्टार्टअप ई-मार्केटप्लेस

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप क्रय योजना-2026 के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। योजना का उद्देश्य राज्य के पात्र स्टार्टअप्स के लिए बाजार तक पहुंच आसान करना और सरकारी विभागों व अन्य अभिकरणों में उनके नवोन्मेषी उत्पादों, सेवाओं और समाधानों के उपयोग को बढ़ावा देना है। योजना के तहत पात्र स्टार्टअप्स द्वारा विकसित नवोन्मेषी उत्पादों, सेवाओं और समाधानों की सूचीबद्धता तथा सरकारी खरीद के लिए समर्पित ‘यूपी स्टार्टअप ई-मार्केटप्लेस’ स्थापित किया जाएगा। इस माध्यम से सरकारी विभागों को स्टार्टअप्स के नवोन्मेषी उत्पादों और सेवाओं की खरीद का अवसर मिलेगा। क्रय करने वाले विभाग नवोन्मेषी उत्पादों और सेवाओं की खरीद अपनी स्वीकृत बजटीय व्यवस्थाओं से करेंगे। वहीं, यूपी स्टार्टअप ई-मार्केटप्लेस की स्थापना, संचालन और अनुरक्षण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन की होगी। इसके बाद निरंतर क्रियान्वयन किया जा सकेगा। इस योजना से राज्य के स्टार्टअप्स को सरकारी बाजार तक पहुंच मिलेगी और सरकारी विभागों में नवोन्मेषी उत्पादों, सेवाओं तथा तकनीकी समाधानों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। इन तकनीकी समाधानों के व्यापक उपयोग से सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता, दक्षता और सुगमता बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ आम लोगों को बेहतर, प्रभावी और सुलभ सेवा वितरण के रूप में मिलेगा। योजना के तहत उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति में पंजीकृत पात्र नवप्रवर्तनशील उद्यमों को सरकारी विभागों से कार्यादेश प्राप्त करने के अवसर भी मिलेंगे। सरकारी खरीद के अवसर उपलब्ध होने से स्टार्टअप्स के व्यवसायिक विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

पश्चिमी यूपी में 12 अक्टूबर से होगी धान खरीद

लखनऊ खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत 12 अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान खरीद शुरू होगी, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली नवंबर से धान खरीद होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 फरवरी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2027 तक धान खरीद होगी। केंद्र सरकार ने इस वर्ष धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि भी की है। धान (कॉमन) का एमएसपी 2441 और (ग्रेड ए) का 2461 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। 65 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य, खोले जाएंगे 4500 क्रय केंद्र खाद्य व रसद मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि उप्र ने पिछली बार भी सर्वाधिक 62 लाख मीट्रिक टन धान क्रय किया था। इस बार इसमें और वृद्धि की गई है। 8 क्रय एजेंसियों से 4500 क्रय केंद्रों के माध्यम से 65 लाख मीट्रिक टन खरीद होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसानों को 48 घंटे के भीतर खाते में भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। धान खरीद के लिए बोरे की कमी नहीं होगी। 80 हजार बोरे की व्यवस्था हो गई है। आज शाम तक एक लाख और बोरे की व्यवस्था हो जाएगी। पश्चिम उत्तर प्रदेश व लखनऊ के इन जनपदों में 12 अक्टूबर से होगी खरीद पश्चिम उत्तर प्रदेश के संभागों में 12 अक्टूबर से धान खरीद शुरू होगी, जो 15 फरवरी 2027 तक चलेगी। यह खरीद पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली,आगरा, अलीगढ़, झांसी संभाग में होगी। वहीं लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर जनपद में भी धान खरीद इसी अवधि में होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के इन जनपदों में पहली नवंबर से शुरू होगी खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली नवम्बर से धान खरीद शुरू होगी। यह खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर व प्रयागराज संभाग में होगी। इसके साथ ही लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में भी पहली नवंबर से खरीद होगी, जो 28 फरवरी 2026 तक चलेगी।   करीब 14 हजार किसानों ने करा लिया पंजीकरण सरकार की धान क्रय नीति पर विश्वास जताते हुए लगभग 14 हजार किसानों ने खरीद के लिए पंजीकरण करा लिया है। 9 अक्टूबर (दोपहर दो बजे) तक करीब 13,943 किसानों ने धान विक्रय के लिए पंजीकरण कर लिया है। वहीं किसानों की फॉर्मर आईडी (किसान पहचान पत्र) के आधार पर धान क्रय किया जाएगा

योगी कैबिनेट ने 39 प्रस्तावों पर लगाई मुहर, विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को दी नई रफ्तार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को लोकभवन में कैबिनेट की बैठक में विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि, रोजगार, तकनीक और जनकल्याण से जुड़े 39 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने कई महत्वपूर्ण फैसलों के साथ प्रदेश को ‘विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने के संकल्प को दोहराया। कैबिनेट ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। साथ ही भदोही का नाम संत रविदासनगर भदोही करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई। तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन (यूपी-एआईएम) की स्थापना को मंजूरी दी। इसके साथ ही प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप क्रय योजना-2026 को भी स्वीकृति प्रदान की गई। सरकार का उद्देश्य सरकारी खरीद में प्रदेश के स्टार्टअप्स को अवसर उपलब्ध कराते हुए नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है। कृषि क्षेत्र में कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान क्रय नीति निर्धारित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी। इससे आगामी धान खरीद व्यवस्था को निर्धारित नीति के अनुरूप संचालित किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। वहीं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल भवन विनियम-2026 लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में भवन निर्माण और विकास की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और मानकीकृत किया जा सकेगा। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 लागू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके अलावा मैनपुरी में राज्य मार्ग संख्या-84 को चार लेन में चौड़ा करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।

लखनऊ में 265 करोड़ से बनेगा आधुनिक इंटीग्रेटेड बस टर्मिनल, यात्रियों को मिलेगा एयरपोर्ट जैसा अनुभव

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में लखनऊ की वृन्दावन योजना स्थित पी-4 पार्किंग में एकीकृत सिटी बस टर्मिनल और वाणिज्यिक क्षेत्र सुविधाओं का पीपीपी मोड पर विकास कराए जाने का निर्णय लिया गया है। परियोजना की कुल लागत करीब 265 करोड़ रुपये होगी। इससे शहर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए अतिरिक्त टर्मिनल उपलब्ध होगा और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी। आधुनिक सुविधाओं से युक्त इस टर्मिनल को इस तरह विकसित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को एयरपोर्ट जैसा अनुभव मिल सके। 7.06 एकड़ में बनेगा समर्पित टर्मिनल नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि वर्तमान में लखनऊ में 116 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन दुबग्गा डिपो से किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 300 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रक्रिया भी चल रही है। प्रस्तावित बसों के संचालन के लिए अतिरिक्त समर्पित टर्मिनल की आवश्यकता को देखते यह निर्णय लिया गया है। परियोजना का क्रियान्वयन नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा किया जाएगा। परियोजना को डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत में 60 करोड़ रुपये बस टर्मिनल और 205 करोड़ रुपये वाणिज्यिक सुविधाओं के विकास पर खर्च होंगे। इसमें भूमि की लागत शामिल नहीं है। परियोजना का कुल क्षेत्रफल लगभग 7.06 एकड़ है। बस टर्मिनल में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं टर्मिनल में बस-वे, बस पार्किंग, इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मरम्मत सुविधाएं, कर्मचारियों के विश्राम कक्ष, प्रशासनिक कार्यालय और सुरक्षा कक्ष बनाए जाएंगे। यात्रियों के लिए टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र, प्रतीक्षालय और सामान रखने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा परिसर में रेस्तरां, कॉफी शॉप, फास्ट फूड आउटलेट, व्यावसायिक दुकानें, मेडिकल स्टोर, बैंक, एटीएम, सार्वजनिक शौचालय, वाटर एटीएम, टैक्सी स्टैंड और सार्वजनिक पार्किंग जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। अग्निशमन व्यवस्था भी परियोजना का हिस्सा होगी। निर्माण के बाद निदेशालय को निःशुल्क हस्तांतरण कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, विकासकर्ता को डिजाइन, ड्राइंग और स्पेसिफिकेशन की अंतिम मंजूरी नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा दी जाएगी। विकासकर्ता बस टर्मिनल का निर्माण करने के बाद उसे नगरीय परिवहन निदेशालय को निःशुल्क हस्तांतरित करेगा। हालांकि, टर्मिनल और सहायक सुविधाओं के संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी विकासकर्ता के पास रहेगी। बस टर्मिनल का रख-रखाव 35 वर्ष और वाणिज्यिक सुविधाओं से संबंधित अवस्थापना का रख-रखाव 90 वर्ष तक करना होगा। पारदर्शी प्रक्रिया के तहत परियोजना के लिए आमंत्रित निविदा में चार कंपनियों ने भाग लिया था। इनमें सबसे अधिक बोली लगाने वाली ओबेक्स लिमिटेड को परियोजना आवंटित करने का प्रस्ताव है।

सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना को कैबिनेट की मंजूरी

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र (एसवीपीएसटीपीजेड) विकास योजना को मंजूरी प्रदान की गई। इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश को ‘अल्टीमेट सोर्सिंग हब ऑफ स्किल्ड मैनपावर’ और ‘ग्लोबल मैनपावर हब’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जनपदों को आच्छादित करते हुए नौ जोन में कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। इससे युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर देश-विदेश में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ने में सहायता मिलेगी। उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप तैयार होगा कुशल कार्यबल उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई उद्यम हैं, जो देश के कुल लगभग 6.77 करोड़ उद्यमों का 14.2 प्रतिशत हैं। प्रदेश के औद्योगिक उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान लगभग 60 प्रतिशत तथा निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत है। इस क्षेत्र में तीन करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं। उद्योगों की बढ़ती मांग के अनुरूप कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और युवाओं को व्यापक स्तर पर रोजगार से जोड़ने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रथम चरण में पांच केंद्र, नौ जोन में हब एवं स्पोक मॉडल प्रदेश के सभी जनपदों को नौ जोन में विभाजित कर हब एवं स्पोक मॉडल पर कौशल विकास एवं रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। प्रत्येक जोन में स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों, बाजार की मांग और रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके माध्यम से विभिन्न उद्योगों, बाजार क्षेत्रों एवं विभागों की मानव संसाधन संबंधी आवश्यकताओं का आकलन कर रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाएगा। योजना के प्रथम चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा लखनऊ में, सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर कानपुर में, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) द्वारा गोरखपुर में, नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के संयुक्त सहयोग से गौतमबुद्ध नगर में तथा बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) द्वारा झांसी में एक-एक केंद्र स्थापित किया जाएगा। जोन-1: गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद एवं हापुड़। जोन-2: सहारनपुर मंडल तथा बुलंदशहर, बागपत एवं मेरठ। जोन-3: मुरादाबाद एवं बरेली मंडल। जोन-4: आगरा एवं अलीगढ़ मंडल। जोन-5: लखनऊ एवं अयोध्या मंडल। जोन-6: कानपुर एवं प्रयागराज मंडल। जोन-7: चित्रकूट, विंध्याचल एवं झांसी मंडल। जोन-8: वाराणसी एवं आजमगढ़ मंडल। जोन-9: गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडल। 10 से 25 एकड़ में विकसित होंगे केंद्र, मिलेगी फोर लेन सड़क संपर्क सुविधा प्रत्येक केंद्र की स्थापना के लिए 10 से 25 एकड़ तक की उपयुक्त एवं भारमुक्त भूमि की व्यवस्था की जाएगी। केंद्रों तक सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए निकटवर्ती राजमार्ग या एक्सप्रेसवे से दो वर्ष के भीतर चार लेन की सड़क संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। केंद्रों का विकास एवं संचालन सार्वजनिक-निजी सहभागिता आधारित डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल अथवा शासकीय संस्थाओं के माध्यम से किया जाएगा। देशी-विदेशी भाषाओं सहित तकनीकी एवं गैर-तकनीकी प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत मानविकी एवं वाणिज्य जैसे गैर-तकनीकी विषयों की पृष्ठभूमि वाले युवाओं को आधारभूत कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए तकनीकी कौशल उन्नयन की व्यवस्था होगी। देश के अन्य राज्यों तथा विदेशों में उपलब्ध रोजगार अवसरों के अनुरूप आवश्यकता आधारित भारतीय एवं विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा तथा परिसर में ही सेवायोजन कार्यालय एवं प्लेसमेंट सेल की व्यवस्था की जाएगी। देश और विदेश में नियोजन के क्षेत्र में कार्यरत मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। तीन वर्षों में होगा 1,725 करोड़ रुपये का व्यय परियोजना के तहत आगामी तीन वर्षों में कुल 1,725 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। निजी विकासकर्ताओं एवं प्रशिक्षण प्रदाताओं को आवश्यकता के अनुसार वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। योजना के पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला एवं परियोजना स्तर पर समन्वय और निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत परियोजनाओं की स्थापना, संचालन, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता तथा रोजगार संबंधी गतिविधियों का अनुश्रवण किया जाएगा। उद्योगों, संबंधित विभागों एवं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के बीच समन्वय स्थापित कर योजना के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कौशल प्रशिक्षण एवं सेवायोजन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकी सुविधाओं के उपयोग की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी भागीदार के चयन का प्रावधान किया गया है।

संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान को सम्मान देने के लिए निर्णय

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में जनपद भदोही का नाम परिवर्तित कर ‘संत रविदासनगर भदोही’ किए जाने का निर्णय लिया गया। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से यह फैसला किया गया है। हाल में मुख्यमंत्री ने भदोही में जनपद का नाम संत रविदासनगर जी के नाम पर रखने का एलान किया था, जिसे कैबिनेट के माध्यम से अमली जामा पहनाया गया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि भारतीय संत परंपरा के प्रमुख संत एवं समाज सुधारक गुरु रविदास जी की स्मृति और सम्मान में जनपद का नाम बदलकर संत रविदासनगर भदोही रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इस नाम परिवर्तन से जिले की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं ऐतिहासिक पहचान को अभिव्यक्ति मिलेगी। पहले भी जनपद भदोही का नाम संत रविदासनगर भदोही किए जाने का प्रयास किया गया था, लेकिन समाजवादी पार्टी की सरकार ने इसे बदल दिया था। नए नाम में संत रविदास जी का नाम भी रहेगा और भदोही की पहचान भी बरकरार रहेगी। राजस्व संहिता के तहत निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप है निर्णय वित्त मंत्री ने कहा कि नाम परिवर्तन की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप है। इस धारा के अंतर्गत राज्य सरकार को अधिसूचना जारी कर राजस्व क्षेत्रों की सीमाओं में परिवर्तन करने और उनका नामकरण करने का अधिकार प्राप्त है। इसके साथ ही प्रस्ताव भारत सरकार के 11 सितंबर 1953 के परिपत्र में उल्लिखित प्रावधानों के अनुरूप भी है। कैबिनेट के इस निर्णय के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत जनपद के नाम परिवर्तन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।