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मूर्ति तोड़ने पर बिहार में बवाल, हालात काबू करने पहुंचे सिटी SP और DSP

भागलपुर बिहार के भागलपुर जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां  मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र के मनोहरपुर मोड़ स्थित बजरंगबली मंदिर में देर रात असामाजिक तत्वों ने मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और ग्रामीणों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। मंदिर की मूर्ति तोड़ने की घटना स्थानीय लोगों ने बताया कि मंदिर परिसर में स्थापित मूर्ति पूरी तरह टूट चुकी थी। ग्रामीण इसे धार्मिक आस्था पर हमला मान रहे हैं। युवा सोनू कुमार ने कहा कि वे प्रतिदिन सुबह यहां फिजिकल ट्रेनिंग के लिए आते हैं, लेकिन आज मूर्ति टूटी देखकर सभी स्तब्ध रह गए। मुरारी यादव ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि “यह हमारी आस्था पर हमला है, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।” पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज लिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। सिटी एसपी शुभांक मिश्रा और सिटी डीएसपी राकेश कुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसपी ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है और जल्द ही अपराधियों को गिरफ्तार किया जाएगा। वर्तमान में गांव में पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है।

बड़ौत में विकास की दोहरी खुशी: नई ट्रेन को हरी झंडी, कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन आज

बागपत उत्तर रेलवे ने पश्चिमी यूपी के यात्रियों को बड़ा तोहफा देते हुए बड़ौत–दिल्ली शाहदरा के बीच दो नई मेमू ट्रेनों का संचालन शुरू करने की घोषणा की है। सोमवार से ट्रेन संख्या 04496 बड़ौत से दिल्ली शाहदरा के लिए और 04495 शाहदरा से बड़ौत के लिए चलेगी। दोनों ट्रेनों में 12 कोच होंगे, जिससे यात्रियों की भीड़ को बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सकेगा। ट्रेन संख्या 04496 बड़ौत से दोपहर 1:43 बजे चलेगी और शाम 4:10 बजे दिल्ली पहुंचेगी। इसका ठहराव बागपत रोड, खेकड़ा, नोली और गोकुलपुर साबोली में होगा। वहीं ट्रेन संख्या 04495 शाहदरा से 2:16 बजे रवाना होकर 4:38 बजे बड़ौत पहुंचेगी, जिसका ठहराव शामली, कांधला और कासिमपुर खेरी में होगा। यात्रियों को मिलेगा बड़ा लाभ नई ट्रेनों के शुरू होने से बड़ौत, बागपत, खेकड़ा, शामली और आसपास के कस्बों के यात्रियों को दिल्ली के लिए सस्ती और सीधी कनेक्टिविटी मिल सकेगी। अब तक दिल्ली जाने के लिए यात्रियों को घंटों का सफर और अधिक खर्च उठाना पड़ता था। रेलवे अधिकारियों के अनुसार नई ट्रेनों के संचालन से प्रतिदिन हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी। कौशल विकास केंद्र का भी होगा उद्घाटन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के दौरे के दौरान कौशल विकास केंद्र का शुभारंभ भी किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के बेहतर अवसर मिलेंगे। इस दौरान कौशल विकास राज्यमंत्री चौधरी जयंत सिंह शामिल होंगे।

मेरठ में हवा ‘बेहद खराब’, सुबह-सुबह AQI 349 से बढ़ी सांसों की तकलीफ़

मेरठ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से रविवार को जारी देश के 248 शहरों की सूची में वायु प्रदूषण में मेरठ सातवें स्थान पर रहा। एनसीआर में वायु प्रदूषण के मामले में पांचवें नंबर पर सूचीबद्ध किया गया है। खतरनाक स्तर पर प्रदूषित हवा में सांस लेने में लोगों को दिक्कतें हो रही हैं।   सोमवार सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स 349 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। सुबह की हल्की धूप भी प्रदूषण कम नहीं कर पा रही। पल्लवपुरम शहर का सबसे ज्यादा प्रदूषित एरिया रहा, जहां AQI 366 मापा गया। शहर में पिछले एक महीने से वायु गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है। न सुबह की हवा साफ है, न रात की। प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सीने में भारीपन और आंखों में जलन की समस्याएं बढ़ रही हैं। महीने भर से मेरठ समेत आसपास के जिलों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार खराब श्रेणी में चल रहा है। वायु प्रदूषण को देखते हुए जो ग्रेप सिस्टम के दावे किए गए थे, वह फेल साबित होते दिखाई दे रहे हैं।     धीमी हवा और बारिश न होने से बढ़ रहा प्रदूषण पिछले 10 दिन से हवा की रफ्तार बेहद धीमी है, जिसके कारण प्रदूषण और भी ज्यादा बढ़ गया है। बारिश न होने से हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक नीचे नहीं बैठ रहे। मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार, जब तक हवा तेज और साफ दिशा में नहीं चलेगी, तब तक प्रदूषण में कोई सुधार नहीं होगा। अगले दो-तीन दिनों में तापमान में 1–2 डिग्री की गिरावट की संभावना है, लेकिन इससे प्रदूषण के स्तर पर खास असर नहीं पड़ेगा।   मेरठ और आसपास में अभी तक कहीं पर भी वायु प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। जगह-जगह कूड़े जलाए जा रहे हैं और ग्रेप सिस्टम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खराब हवा से लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। सुबह बाहर टहलने वालों को दिक्कत हो रही है। मेरठ यह रहा प्रदूषण का हाल गंगानगर        324 जय भीम नगर    356 पल्लवपुरम      366 अन्य शहरों में यह रहा प्रदूषण का हाल बागपत        345 बुलंदशहर      368 दिल्ली        395 गाजियाबाद     429 ग्रेटर नोएडा    396 हापुड़        433 मेरठ        349 नोएडा        414 मुजफ्फरनगर   388 वायु प्रदूषण रोकने के उपाय -वाहन का उपयोग कम करें पैदल चलें और साइकिल चलाएं या सार्वजनिक परिवहन जैसे बस या मेट्रो का उपयोग करें। -अगर आपको गाड़ी चलानी ही है तो कारपूलिंग करें और अपनी गाड़ी का सही रखरखाव करें। -स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करें। जीवाश्म ईंधन से बनने वाली बिजली की जगह सौर या पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करें। घरों और उद्योगों में सोलर पैनल लगवाएं। -अधिक पौधे लगाएं। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन छोड़ते हैं, इससे हवा साफ होती है। पौधरोपण में भाग लें या अपने आसपास पेड़ लगाएं। मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच बढ़ी ठंड मौसम में उतार- चढ़ाव के बीच ठंड में बढोतरी हो रही है। रविवार को दिन में मौसम सर्द रहा और धूप ने राहत दी। चौधरी चरण सिंह विवि की मौसम वेधशाला में दिन का अधिकतम तापमान 26.2 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 11.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि तीन -चार दिन तक मौसम में उतार- चढ़ाव बना रहेगा। फिलहाल अभी प्रदूषण के स्तर में सुधार के आसार नहीं है। प्रदूषण का लेवल अभी लाल श्रेणी में ही रहेगा।  

प्रदेश भर से आए फरियादी, हर पीड़ित से स्वयं मिले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर ‘जनता दर्शन’ किया। ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश भर से 52 से अधिक फरियादी पहुंचे। सीएम योगी हर फरियादी के पास स्वयं पहुंचे, उनकी समस्याएं सुनीं और निराकरण के निर्देश दिए। सीएम ने सभी जिलाधिकारियों और एसएसपी को निर्देशित किया कि वह पीड़ितों की शिकायतें सुनकर जनपद में ही उनका निस्तारण कराएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिभावकों के साथ आए बच्चों को दुलारा, उन्हें चॉकलेट दी और कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करो।  *पीड़ितों की शिकायतें सुनकर निर्धारित समयावधि में कराएं समाधान * मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान आर्थिक सहायता, अवैध कब्जे, बिजली, शिक्षा, पुलिस आदि से जुड़ी शिकायतों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों सहित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि वह जनपद स्तर पर सभी फरियादियों की शिकायतें सुनकर उनका निराकरण कराएं। जिलाधिकारी देखें कि जनपदों में सभी विभागों के द्वारा पीड़ितों की शिकायतें सुनकर निर्धारित समयावधि में समाधान कराया जाए।  आमजन की सेवा-सुरक्षा ही सरकार का संकल्प  ‘जनता दर्शन’ में गोरखपुर, शामली, झांसी, कन्नौज आदि जनपदों से पीड़ित पहुंचे थे। सभी ने अपनी समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। जिस पर सीएम योगी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन की सेवा और सुरक्षा ही सरकार का संकल्प है। सरकार हर जरूरतमंद की सहायता के लिए खड़ी है। सरकार के स्तर पर प्रदेशवासियों की हर उचित परेशानी का निरंतर निदान कराया जा रहा है और आगे भी कराया जाता रहेगा।  बच्चों को दी चॉकलेट, पढ़ाई के बारे में भी पूछा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिभावकों के साथ आए बच्चों से भी मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने सभी से नाम पूछा, चॉकलेट दी और मन लगाकर पढ़ने करने को कहा। सीएम ने बच्चों को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद भी दिया।

छठा साल लगातार बिना बढ़ोतरी के बिजली दरें, यूपी का ऊर्जा मॉडल बना पूरे देश के लिए उदाहरण

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने लगातार छठे वर्ष बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी न करके देश के सामने एक बड़ा उदाहरण पेश किया है। यह दिखाता है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी योजना और वित्तीय अनुशासन मिलकर जनता को वास्तविक लाभ पहुंचा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में हुए सुधारों का परिणाम है कि यूपी आज देश का पहला ऐसा राज्य है जहां छह वर्षों से बिजली दरें समान हैं। अन्य राज्यों में बिजली महंगी, यूपी ने दी राहत जब कई राज्यों में बढ़ती लागत की वजह से बिजली दरें बढ़ रही हैं, उसी समय यूपी ने गरीबों, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और मध्यम वर्ग को राहत दी है। सरकार का साफ उद्देश्य है कि जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और घरेलू बजट स्थिर रहे। राजस्व अधिशेष और मजबूत वित्तीय प्रबंधन का असर इस निर्णय के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुव्यवस्थित योजना काम कर रही है। बिजली वितरण कंपनियों ने पिछले वर्षों में ₹15,000 करोड़ से ज्यादा का राजस्व अधिशेष हासिल किया है। यह अचानक नहीं हुआ, बल्कि आर्थिक अनुशासन, बिजली चोरी पर नियंत्रण, तकनीक आधारित बिलिंग, लाइन लॉस में कमी, समय पर मेंटेनेंस तथा ढांचागत सुधारों का परिणाम है। ऊर्जा उत्पादन और ट्रांसमिशन में बड़े सुधार नई विद्युत उत्पादन परियोजनाएं, ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा में बढ़ता निवेश भी लागत नियंत्रण में बेहद उपयोगी साबित हुआ है। बढ़ते शहरीकरण, उद्योग विस्तार और माइग्रेशन के बावजूद सब्सिडी को प्रभावी बनाकर सरकार ने व्यवस्था को संतुलित रखा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मजबूत बिजली व्यवस्था ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ओवरलोडिंग कम करने, केबलिंग को भूमिगत करने, पुराने तार और ट्रांसफॉर्मर बदलने जैसे कार्यों ने बिजली आपूर्ति प्रणाली को मज़बूत किया है। ऊर्जा बचत अभियानों और स्मार्ट मीटरों के बड़े पैमाने पर उपयोग से बिलिंग और खपत पारदर्शी हुई, जिससे राजस्व बढ़ा और लीकेज कम हुआ। स्थिर बिजली दरों का उद्योग और निवेश पर सकारात्मक असर स्थिर बिजली दरें उपभोक्ताओं को राहत देती हैं और उद्योगों की उत्पादन लागत भी नियंत्रित करती हैं। इससे निवेश माहौल बेहतर होता है। निवेशक ऐसे राज्यों को प्राथमिकता देते हैं जहाँ ऊर्जा कीमतें स्थिर हों, आपूर्ति सुरक्षित हो और नीति पारदर्शी हों। यूपी ने इन तीनों क्षेत्रों में भरोसे का माहौल बनाया है, जिससे यह उभरते औद्योगिक राज्यों में शामिल हो गया है। गरीबों, किसानों और व्यापारियों के लिए बड़ा लाभ योगी सरकार का स्थिर बिजली मॉडल दिखाता है कि जनहित और अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूत किया जा सकता है। गरीब परिवारों की जेब सुरक्षित है, किसानों पर सिंचाई का अतिरिक्त बोझ नहीं आता, मजदूरों और कामगारों पर अतिरिक्त खर्च नहीं बढ़ता और छोटे व्यापारियों का बजट संतुलित रहता है। उद्योगों को भी प्रतिस्पर्धी माहौल मिलता है। सौर ऊर्जा में यूपी की तेज प्रगति उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। खासकर रूफटॉप सोलर और ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। शहरों और गांवों में लग रहे सोलर पैनल न सिर्फ बिजली पैदा कर रहे हैं बल्कि पर्यावरण सुरक्षा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बिजली आवश्यकता और उद्योग विस्तार के साथ सोलर ऊर्जा एक महत्वपूर्ण समाधान बनकर उभरी है। रूफटॉप सोलर योजनाओं में यूपी का राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा स्थान प्रदेश में कुल 13,46,040 आवेदन मिले थे, जो दर्शाते हैं कि लोग बदलाव के लिए उत्सुक थे। सिर्फ 18 महीने में 2,81,769 रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए गए और पिछले 4.5 महीनों में 1,30,000 संयंत्रों की स्थापना ने यूपी को महाराष्ट्र और गुजरात के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य बना दिया है। रोजगार सृजन में भी सौर ऊर्जा का बड़ा योगदान सौर ऊर्जा ने न केवल ऊर्जा बढ़ाई बल्कि रोजगार भी दिया। अकेले यूपी में 54,000 से अधिक युवाओं को सीधा रोजगार मिला है। देशभर में सोलर मॉड्यूल निर्माण, इन्वर्टर, वायरिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के क्षेत्र में लाखों नए रोजगार बने हैं। UP बिजली टैरिफ 2025–26: प्रमुख तथ्य यूपी में लगातार छठे साल बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ग्रीन एनर्जी टैरिफ में राहत देते हुए HV उपभोक्ताओं के लिए दर ₹0.36 से घटाकर ₹0.34 प्रति यूनिट और LV उपभोक्ताओं के लिए ₹0.17 प्रति यूनिट तय की गई है। डिस्ट्रीब्यूशन लॉस में मध्यांचल और पश्चिमांचल ने लक्ष्य हासिल किया, जबकि पूर्वांचल का प्रदर्शन कमजोर रहा। ऊर्जा नियामक आयोग के वित्तीय अनुमोदन FY 2023–24 के लिए 85,082.83 करोड़ रुपये का ARR और 1,246.55 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी सरप्लस मंजूर हुआ। FY 2025–26 के लिए 1,10,993.33 करोड़ रुपये का ARR और 13.35% डिस्ट्रीब्यूशन लॉस मंजूर किए गए हैं। राज्य सरकार 17,100 करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी। रेगुलेटरी गैप और सरप्लस के आंकड़े इस वर्ष 7,710.04 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी गैप दर्ज हुआ, जबकि 1 अप्रैल 2025 तक यूपीपीसीएल के पास 18,592.38 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी सरप्लस उपलब्ध रहेगा। औसत सप्लाई कॉस्ट ₹8.18 और औसत बिलिंग रेट ₹7.61 प्रति यूनिट तय की गई है। PAN अपडेट, TDS सर्टिफिकेट, क्रॉस-सब्सिडी समायोजन और TOD टैरिफ पूर्ववत रखने के निर्देश दिए गए हैं। मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग व टाउनशिप से जुड़े मुद्दों पर अलग कंसल्टेशन पेपर जारी होगा।

अयोध्या में फूलों का समंदर, राम मंदिर धर्म ध्वज समारोह के लिए तैयार शहर

अयोध्या  25 नवंबर को श्री राम जन्मभूमि मंदिर में होने वाले भव्य ध्वजारोहण समारोह की तैयारी में, मंदिर और शहर को फूलों से सजाया जा रहा है। इस पवित्र कार्यक्रम के लिए अयोध्या को चमकाने के लिए लगभग 100 टन फूलों का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर के एक पुजारी ने कहा कि तैयारियाँ पूरे ज़ोरों पर चल रही हैं। "राम मंदिर में धर्म ध्वज समारोह की तैयारियाँ पूरे ज़ोरों पर हैं। सजावट की एक खास बात फूलों का इस्तेमाल है, जो भगवान राम को बहुत प्यारे हैं। आज, अयोध्या फूलों की सजावट से चमक रही है, जिसमें सबसे पहले भगवान गणेश और भगवान राम के लिए गेंदे के फूल लगाए गए हैं। मंदिर और शहर को सजाने के लिए लगभग 100 टन फूलों का इस्तेमाल किया गया है।" खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहे अयोध्या को सजाने में लगे मजदूर सजावट के काम में लगे मजदूरों ने कहा कि वे इस ऐतिहासिक पल में योगदान देकर खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। एक मजदूर ने बताया, "राम मंदिर को सजाया जा रहा है, और मंदिर का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। यह ध्वज समारोह का समय है। प्रधानमंत्री मोदी 25 तारीख को आएंगे। कई तरह के फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, और हमें संतों का पूरा सहयोग मिल रहा है।" एक अन्य सजावट कर्मी ने कहा, “हम बहुत भाग्यशाली महसूस कर रहे हैं कि हमें भगवान राम के दर्शन हुए। तीन दिन पहले जब से हम आए हैं, तब से दिन-रात काम चल रहा है, और यह बहुत सुंदर दिख रहा है।”  ललित मिश्रा की खोज ने अयोध्या के प्राचीन ध्वज को दिलाया स्थान अयोध्या 25 नवंबर को एक ऐतिहासिक पल की तैयारी कर रहा है, जब श्री राम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में ध्वजारोहण समारोह इसके मुख्य निर्माण के पूरा होने का प्रतीक होगा। खास बात यह है कि भारतविद ललित मिश्रा की खोज ने अयोध्या के प्राचीन ध्वज को उसका सही स्थान दिलाया है। मिश्रा ने मेवाड़ की सचित्र रामायण की एक पेंटिंग का अध्ययन करते समय इस ध्वज की पहचान की, बाद में वाल्मीकि रामायण के अयोध्या कांड में इसके उल्लेख की पुष्टि की। फहराए जाने वाले ध्वज में तीन प्रतीक हैं: ॐ, सूर्य और कोविदार वृक्ष। कोविदार वृक्ष मंदार और पारिजात वृक्षों का एक संकर है, जिसे ऋषि कश्यप ने बनाया था, जो प्राचीन पौधों के संकरण को दिखाता है। सूर्य भगवान राम के सूर्यवंश का प्रतिनिधित्व करता है, और ॐ शाश्वत आध्यात्मिक ध्वनि है। समारोह से पहले, इस कार्यक्रम के लिए आने वाले भक्तों और आगंतुकों का स्वागत करने के लिए पूरे अयोध्या में एक बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान शुरू किया गया है।

अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर कार्यक्रम के लिए जताई भक्ति, कहा—‘नंगे पैर ही शामिल होऊंगा’

अयोध्या  रामनगरी अयोध्या एक बार फिर भव्य और दिव्य स्वरूप में सजने को पूरी तरह तैयार है। 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या आएंगे और राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराकर ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह का शुभारंभ करेंगे। इस बीच राम मंदिर ध्वजारोहण को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। दो दिन पहले जहां सत्य सनातन धर्म प्रचारक दिवाकराचार्य महाराज ने अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद पर सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई नहीं देने का आरोप लगाया था वहीं अब सांसद ने कहा है कि उन्हें अभी तक राम मंदिर ध्वजारोहण समारोह का न्योता नहीं मिला है। यदि मुझे न्योता मिला तो सारा काम धाम छोड़कर मैं नंगे पैर ही वहां जाऊंगा। एक निजी चैनल से बातचीत में सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि तुलसीदास जी ने लिखा भी है-दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा। यह मान्यता थी लेकिन भाजपा की सरकार ने जो प्रभु श्रीराम के राज की मान्यताएं थीं उन मान्यताओं को बिगाड़ दिया है। उधर, इटावा से सपा सांसद जितेंद्र दोहरे ने भी तंज कसते हुए कहा कि राम मंदिर के ध्वजारोहण जैसे धार्मिक कार्यक्रम में पीएम के जाने का क्या मतलब है। यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम थोड़े है। वहीं भाजपा प्रवक्ता एसएन सिंह ने कहा कि सपा नेताओं को अयोध्या की भव्यता चुभती है। वे अनर्गल प्रलाप करते हैं। अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद ने दावा किया कि स्थानीय सांसद और अयोध्या का नागरिक होने के नाते वह कार्यक्रम की तैयारियों पर भी नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि वह तैयारियां देखने गए भी थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के चलते तैयारियां सरकारी लोगों के ऊपर है। प्रदेश और देश के तमाम सुरक्षा कर्मी आए हैं। कहा कि स्थानीय सांसद होने के नाते, अयोध्या में पैदा होने नाते मेरी भी नैतिक जिम्मेदारी और सोच है। इसीलिए कल भी गया था। आज भी जाऊंगा। सपा सांसद ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं। मेरे ऊपर प्रभु श्रीराम, हनुमान जी, मां सीता और सरयू माई की कृपा है। जब मैं बीए पार्ट वन का छात्र था तो सीता रसोई देखने जाता था।

रामनगरी में बड़ा उत्सव: पीएम मोदी करेंगे ध्वजारोहण समारोह में विशेष उपस्थिति

अयोध्या रामनगरी अयोध्या एक बार फिर अपने भव्य और ऐतिहासिक उत्सव के लिए पूरी तरह तैयार है। 25 नवंबर को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह होने वाला है और इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद शामिल होंगे। वे राम मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराएंगे। वहीं, कार्यक्रम को लेकर पूरे मंदिर परिसर और शहर में तैयारियों का उत्साह देखने लायक है। संत समाज में भी इस अवसर को लेकर खासा उत्साह है। कई संतों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राम मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराया जाना करोड़ों राम भक्तों के लिए गर्व का पल है। उनका मानना है कि पीएम मोदी के प्रयासों से अयोध्या का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव नई ऊंचाई पर पहुंचा है। यहां हुए विकास कार्य लोगों की सोच से परे हैं और लोग बेहद खुश हैं।  जगत गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने खास बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या को सिर्फ निखारा ही नहीं, बल्कि इसे त्रेतायुग जैसा स्वरूप दिया है। जो लोग आज अयोध्या आ रहे हैं, उन्हें और जो पहले आते थे, उन्हें इसका अंतर साफ दिखाई दे रहा है। वेदों, पुराणों और शास्त्रों में जैसे अयोध्या का वर्णन है, उसी तरह अब वास्तविक अयोध्या दिख रही है। यह जगह केवल भगवान श्रीराम की जन्मभूमि ही नहीं, बल्कि मानवता और सभ्यता का केंद्र भी है। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन में हमें भाईचारे, प्रेम, पिता-पुत्र के संबंध और समाज व देश के प्रति जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया। राम मंदिर का भूमि पूजन, शिलान्यास और अब 25 नवंबर को होने वाली धर्मध्वज स्थापना भी प्रधानमंत्री मोदी के हाथों संपन्न हो रही है। इसे लेकर अयोध्यावासी और देश के साधु-संत बहुत उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि इस धर्मध्वज की स्थापना एक तरह से अघोषित रूप में हिंदू राष्ट्र की घोषणा है। हिंदू राष्ट्र का मतलब है रामराज और मानवता की स्थापना। वे बताते हैं कि हिंदुत्व का अर्थ केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए सोचना है। यही संदेश इस ध्वज स्थापना के माध्यम से दिया जा रहा है। पूरी दुनिया में इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देगा। इससे नफरत का माहौल कम होगा और प्रेम, भाईचारे और मानवता की भावना लोगों में मजबूत होगी। यह सिर्फ अयोध्या या भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में सकारात्मक बदलाव लाएगा। एक अन्य संत ने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जो अयोध्या कई बार आए हैं। यह काबिल-ए-तारीफ है। संत ने आगे कहा कि हम सब खुश हैं कि उनके कार्यकाल में इतने बड़े और महत्वपूर्ण काम हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे ही और कई पहल जारी रहेंगी। संत ने बताया कि राम मंदिर का भूमि पूजन पीएम मोदी ने किया, इसका उद्घाटन भी उन्होंने किया और अब 25 नवंबर को धर्मध्वज की स्थापना भी उनके हाथों होगी। लोगों में इसे देखने की बेहद उत्सुकता है और पूरा शहर इस ऐतिहासिक पल का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। एक और संत ने बताया कि यह अवसर बहुत ही हर्ष और उल्लास का है। सिर्फ पूरे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में इसको लेकर खुशी और उत्साह का माहौल है। संतों के अनुसार, इस मौके पर भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के सुनहरे शिखर पर ध्वज फहराने वाला क्षण हर किसी के लिए गर्व और आनंद का है। पूरे अयोध्या शहर में सजावट और तैयारियां जोरों पर हैं और भक्तों की भीड़ इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए तैयार है। वहीं, इकबाल अंसारी ने कहा कि पीएम मोदी के प्रयासों की वजह से आज अयोध्या इतनी सुंदर बन गई है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में हर धर्म और समुदाय के देवता मौजूद हैं और भगवान राम खुद इस शहर की रक्षा कर रहे हैं। अंसारी का कहना है कि पीएम मोदी बहुत ही भाग्यशाली हैं कि मंदिर के ध्वज फहराने का मौका मिल रहा है। इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। यह शहर गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है।

माघ मेला 2026: 44 दिनों तक चलेगा आयोजन, श्रद्धालुओं के लिए प्रयागराज में शुरू हुई शटल बस सेवा

प्रयागराज  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले के सभी प्रमुख काम 15 दिन में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सीएम के प्रयागराज आगमन पर अफसरों ने उन्हें अब तक की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। इस बार माघ मेला तीन जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। यानी मेले की कुल अवधि 44 दिनों की होगी।   मेला क्षेत्र में इस बार 4900 संस्थाओं के आने का अनुमान है। बेहतर भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 2.8 किलोमीटर लंबे घाट बनाए जाएंगे। समतलीकरण का काम 60 फीसदी पूरा हो चुका है। मुख्य मार्गों का चिह्नांकन कर दिया गया है। शौचालयों व टेंटों के लिए काम प्रगति पर है। भूमि आवंटन व बसावट का काम 15 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। माघ मेला में भी शटल बस सेवा की सुविधा महाकुम्भ की तर्ज पर माघ मेला 2026 में भी श्रद्धालुओं के लिए रोडवेज शटल बस सेवा उपलब्ध रहेगी। बाहर से आने वाले श्रद्धालु चारों दिशाओं धूमनगंज, नैनी, झूंसी और फाफामऊ से सीधे मेला क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे। इसके लिए अस्थायी बस अड्डों सहित सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन से शटल बसों का संचालन किया जाएगा। माघ मेला में 75 इलेक्ट्रिक बसों को इस सेवा में लगाया जाएगा। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सिविल लाइंस बस स्टेशन के निर्माणकार्य के चलते यहां से नियमित बस संचालन बंद करने की तैयारी है। ऐसे में शहर से मेला क्षेत्र के बीच आवागमन सुचारु रखने के लिए नए रूट तैयार किए जा रहे हैं। उधर, रेलवे ने भी अपनी कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन प्रयागराज जंक्शन की जगह सूबेदारगंज, फाफामऊ और छिवकी स्टेशनों से शुरू कर दिया है। 75 हजार कैमरों में देंगे कनेक्शन इस बार बिजली विभाग 75 हजार शिविरों में कनेक्शन देगा। जबकि 25 हजार एलईडी स्ट्रीट लाइट लागई जाएगी। जिसमें 755 लाइट लगाई जा चुकी है। 500 हाईब्रिड सोलर एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी। जिसमे 25 का काम प्रगति पर है। पार्किंग के पास होगी भंडारे की व्यवस्था पार्किंग के पास भंडारों का संचालन कराया जाएगा। जिससे थके हारे श्रद्धालु परेशान न हों। दिशा सूचकों की संख्या और आकार को और अधिक बढ़ाया जाएगा। जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। वो आसानी से देख सकें। 17 नलकूप और 10 वाटर एटीएम लगाए जाएंगे मेला क्षेत्र में जल निगम नगरीय की ओर से कुल 17 नलकूप लगाए जाएंगे। जिसमें से दो नलकूल स्थापित हो चुके हैं। अफसरों ने बताया कि 10 वाटर एटीएम लगाने का प्रस्ताव है, जिसमें से तीन लगाए जा चुके हैं। एक एसटीपी रहेगी। जिसका काम प्रगति पर है। इस बार माघ मेले में 2.8 किलोमीटर का घाट बनाया जाएगा। 4900 संस्थाएं आएंगी। संगम क्षेत्र में समतलीकरण का कार्य 60 फीसदी पुरा हो चुका है। बिजली के खंभों पर होगा क्यूआर कोड महाकुम्भ की तरह इस बार माघ मेला 2026 में भी बिजली विभाग पूरे क्षेत्र के बिजली खंभों और आरएमयू पर क्यूआर कोड लगा रहा है। इससे श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा। क्यूआर कोड को स्कैन करते ही उसकी सटीक लोकेशन मोबाइल पर दिखाई दे जाएगी। इससे यदि कोई व्यक्ति मेला क्षेत्र में रास्ता भटक जाता है, तो वह कोड स्कैन कर अपनी स्थिति तुरंत जान सकेगा। दूसरा बड़ा लाभ यह होगा कि बिजली से संबंधित किसी खराबी या समस्या की शिकायत भी उसी क्यूआर कोड को स्कैन कर सीधे दर्ज की जा सकेगी। शिकायत मिलते ही विभाग को उस स्थान की लोकेशन मिल जाएगी और टीम तत्काल मौके पर भेजी जा सकेगी। मुख्य अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि इस बार माघ मेला क्षेत्र में कुल 21,917 बिजली खंभे लगाए जा रहे हैं।

घुसपैठ पर यूपी का बड़ा एक्शन प्लान: अभियान तेज, सभी शहर हाई-अलर्ट पर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में नेपाल सीमा के साथ ही बड़े शहरों में खुफिया एजेन्सियां, एटीएस और अन्य सुरक्षा से जुड़े संगठन तेजी से सक्रिय हो गए है। डीएम और कप्तान ने मातहतों को विदेशी नागरिकों के हर दस्तावेज की गम्भीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं।   पिछले कुछ वर्षों में सीमा पर स्थित जिलों में फर्जी पहचान पत्र के जरिए घुसपैठ की घटनाएं काफी बढ़ गई। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश में भी दिखाई पड़ा। इस पर यूपी में अवैध घुसपैठियों को कानून व्यवस्था के लिए चुनौती न बनने देने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। केन्द्र सरकार के निर्देश पर संदिग्ध गतिविधियों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। 2016 में दो करोड़ बांग्लादेशी भारत में थे वर्ष 2016 में तत्कालीन केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद को बताया था कि लगभग दो करोड़ अवैध बांग्लादेशी भारत के अंदर रह रहे हैं। इसी तरह अवैध रोहिंग्यां प्रवासियों की संख्या भी 40 हजार से अधिक बताई गई थी। जांच में पाया गया कि यूपी के लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी और तेजी से विकसित हो रहे अन्य शहरों पर भी इनका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही सभी जिलों में अस्थायी डिटेंशन सेन्टर बनाए जाने लगे हैं। अफसरों का कहना है कि घुसपैठियों के खिलाफ यह अभियान कानून-व्यवस्था, सामाजिक सदभाव और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने के साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।