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विकसित यूपी के लिए प्रदेश के युवा दे रहे सबसे अधिक सुझाव

विकसित यूपी @2047: शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास बने जनसुझावों के शीर्ष विषय अब तक 32 लाख से अधिक लोगों ने दिए सुझाव, ग्रामीण इलाकों से मिले 25 लाख से ज्यादा फीडबैक  विकसित यूपी के लिए प्रदेश के युवा दे रहे सबसे अधिक सुझाव  शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास बने जनसुझावों के शीर्ष विषय संभल, जौनपुर और सोनभद्र जिले फीडबैक में सबसे आगे – बलिया से कृषि में वैज्ञानिक तकनीक अपनाने का सुझाव – हाथरस से जिला अस्पतालों में हाईटेक सुविधाओं की मांग – वाराणसी से पशुधन संरक्षण और डेयरी विकास पर जोर – अभियान के तहत नोडल अधिकारी और प्रबुद्ध जन कर रहे संवाद – मुख्यमंत्री योगी की पहल से जनता बनी नीति निर्माण की सहभागी लखनऊ  उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में चल रहा 'समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047 अभियान' आम जनता की भागीदारी से नई ऊंचाइयां छू रहा है। प्रदेश के 75 जिलों में नोडल अधिकारियों और प्रबुद्ध जनों द्वारा छात्रों, शिक्षकों, व्यवसायियों, उद्यमियों, किसानों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संघटनों, मीडिया और आम जनमानस के साथ संवाद स्थापित कर विकास यात्रा पर चर्चा की जा रही है। इस अभियान के तहत अब तक 32 लाख से अधिक सुझाव और फीडबैक प्राप्त हुए हैं, जो सरकार की 'जनभागीदारी से जनविकास' की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इन सुझावों में से 25 लाख से अधिक राय ग्रामीण क्षेत्रों से और करीब 7 लाख सुझाव नगरीय क्षेत्रों से आए हैं। वहीं युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही  है, करीब 15 लाख सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग के युवाओं ने दिए हैं, जबकि लगभग इतने ही सुझाव मध्यम आयु वर्ग (31 से 60 वर्ष) के लोगों से प्राप्त हुए हैं। वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास शीर्ष प्राथमिकताएं बनीं अभियान के दौरान मिले सुझावों में शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास सबसे प्रमुख विषय रहे। शिक्षा क्षेत्र से करीब 9 लाख, कृषि क्षेत्र से 7.5 लाख, और ग्रामीण विकास से लगभग 6 लाख सुझाव आए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य, समाज कल्याण, उद्योग, पशुधन, डेयरी, आईटी और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सुझाव प्राप्त हुए हैं। सर्वाधिक सक्रिय जिले- संभल, जौनपुर और सोनभद्र फीडबैक के मामले में संभल, जौनपुर, सोनभद्र, महाराजगंज, बिजनौर और गोरखपुर शीर्ष जिलों में रहे हैं। वहीं फिरोजाबाद, महोबा, इटावा, बुलंदशहर और ललितपुर जैसे जिलों से अपेक्षाकृत कम सुझाव प्राप्त हुए हैं। जनसुझावों में उभरे नए विचार बलिया के त्रिपाठी पांडेय ने कृषि में वैज्ञानिक तकनीकों, जैविक खेती और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के विस्तार का सुझाव दिया है। हाथरस के अवनेंद्र सिंह राठौर ने जिला अस्पतालों में अत्याधुनिक जांच सुविधाओं और बायोमेडिकल वेस्ट प्लांट की स्थापना पर जोर दिया। वहीं वाराणसी की शोभा चौहान ने पशुधन संरक्षण, डेयरी विकास और मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। सुझावों के आधार पर तैयार होगा विजन डॉक्युमेंट बता दें कि इस अभियान का उद्देश्य न केवल जनता के विचार जानना है, बल्कि जनता को नीति निर्माण का सक्रिय भागीदार बनाना भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह अभियान जनसहभागिता के माध्यम से उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक सशक्त प्रयास साबित हो रहा है। सुझावों के आधार पर प्रदेश का विजन डॉक्युमेंट तैयार किया जाएगा। वहीं प्रदेश और जनपद स्तर पर अच्छे सुझावों को सम्मानित भी किया जाएगा।     

दीपों और भजन-कीर्तन के बीच घाट पर गूंजा भक्तिमय वातावरण

मां सरयू की भव्य आरती में शामिल हुईं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दीपों और भजन-कीर्तन के बीच घाट पर गूंजा भक्तिमय वातावरण सरयू तट पर पावन आरती में वित्त मंत्री ने किया दीप प्रज्ज्वलन  श्रद्धा और सादगी का संदेश देती नजर आईं केंद्रीय वित्त मंत्री अयोध्या में आरती के माध्यम से सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संगम का अनुभव अयोध्या  अयोध्या के पावन सरयू तट पर भव्य आरती का दृश्य देखते ही बन रहा था, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने श्रद्धा भाव से इसमें भाग लिया। सूर्यास्त के समय घाट पर जब दीपों की कतारों में प्रकाश झिलमिलाया और जल पर मंद झिलमिलाती रौशनी में मां सरयू की आरती आरंभ हुई, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। निर्मला सीतारमण ने हाथ जोड़कर आरती में भाग लिया और दीपों की रोशनी में तट पर बजते शंख और घुंघरू की ध्वनि के बीच भक्ति और शांति का अनुभव किया।  उन्होंने हाथ में थाली उठाकर दीपों का संचालन किया और गंगा-जैसे पावन सरयू के जल में दीपों को प्रवाहित करते हुए मन की शुद्धि और आशीर्वाद की कामना की। आरती के दौरान घाट पर उपस्थित श्रद्धालु भी मंत्रोच्चारण और भजन-कीर्तन में सम्मिलित हुए, जिससे सरयू तट पर एक दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण बन गया। इस दौरान सीतारमण के माता-पिता भी मौजूद रहे, जिससे यह पल और भी भावनात्मक हो गया। निर्मला सीतारमण ने इस अवसर पर कहा कि अयोध्या न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी सम्पूर्ण भारत के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनकी उपस्थिति ने आरती के इस पावन आयोजन को और भी गौरवपूर्ण बना दिया। हर श्रद्धालु की नजरें निर्मला सीतारमण पर थीं, जब उन्होंने पूर्ण श्रद्धा भाव से मां सरयू की आरती की और घाट पर उपस्थित लोगों के बीच सादगी और भक्ति का संदेश दिया।

अयोध्या के बृहस्पति कुंड पर तीन दक्षिण भारतीय संतों की प्रतिमाओं के भव्य अनावरण में बोलीं केंद्रीय वित्त मंत्री

राम केवल उत्तर भारत में नहीं, दक्षिण के हर घर में विराजते हैं : निर्मला सीतारमण अयोध्या के बृहस्पति कुंड पर तीन दक्षिण भारतीय संतों की प्रतिमाओं के भव्य अनावरण में बोलीं केंद्रीय वित्त मंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित प्रदेश कैबिनेट के मंत्रिगण और दक्षिण से आए भक्तगण रहे उपस्थित – जिन संतों के हर श्वास में ‘राम’, उनकी प्रतिमाओं को अयोध्या में स्थान मिलना केवल योग से नहीं, श्रीराम की इच्छा से संभव हुआ : निर्मला सीतारमण – पहले दक्षिण भारत में भाषाई भेदभाव नहीं था, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, संस्कृत सभी भाषाओं में कर्नाटक संगीत गाया जाता था – त्यागराज स्वामी ने गरीबी में भी केवल श्रीराम के लिए गाये गीत : निर्मला सीतारमण – लोग कहते है कि हनुमान जी ने ही कवि त्यागराज के रूप में लिया था जन्म : वित्त मंत्री  – केरल में पूरे अषाढ़ मास हर घर में शाम को दीप जलाकर होती है श्रीराम की आराधना : निर्मला सीतारमण – रामभक्ति भारत की अमूर्त आत्मा, जो हर भाषा में झलकती है : निर्मला सीतारमण  – तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम हर भाषा में श्रीराम की महिमा का गान हुआ है : वित्त मंत्री  – अयोध्या का यह आयोजन उत्तर-दक्षिण की एकता का सजीव उदाहरण : निर्मला सीतरमण अयोध्या अयोध्या के पवित्र बृहस्पति कुंड पर बुधवार को आयोजित ऐतिहासिक समारोह में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ दक्षिण भारत के तीन महान संगीत संतों श्री त्यागराज स्वामीगल, श्री पुरंदरदास और श्री अरुणाचल कवि की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। इस अवसर पर निर्मला सीतारमण का उद्बोधन भावनाओं और भक्ति से ओतप्रोत रहा। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में श्रीराम भक्ति केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा है। पहले दक्षिण भारत में भाषाई भेदभाव नहीं था निर्मला सीतारमण ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दक्षिण भारत के संतों के बारे में जिस विस्तार से बताया, वह अद्भुत है। उन्होंने कहा कि पहले दक्षिण भारत में भाषाई भेदभाव नहीं था, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और संस्कृत, सभी भाषाओं में कर्नाटक संगीत गाया जाता था, जो एकता का प्रतीक है। त्यागराज जी के हर गीत में श्रीराम की ऊर्जा प्रवाहित होती थी वित्त मंत्री ने कहा कि त्यागराज स्वामी ने जीवनभर गरीबी में रहते हुए भी श्रीराम भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया। उन्होंने राजा के श्रेय में गीत गाने से इनकार कर केवल श्रीराम के लिए गीत गाये। उनकी भक्ति ऐसी थी कि हर गीत में श्रीराम की ऊर्जा प्रवाहित होती थी। लोग कहते हैं कि शायद हनुमान जी ने ही त्यागराज के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने बताया कि त्यागराज स्वामी का गीत 'सीता कल्याण' दक्षिण भारत में हर विवाह समारोह में गाये जाते हैं। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी की शादी में भी वही गीत गाये गये थे। केरल में पूरे अषाढ़ मास में होता है वाल्मीकि रामायण का पाठ  निर्मला सीतारमण ने कहा कि “रामभक्ति केवल हिन्दी भाषी क्षेत्रों की नहीं है। केरल में आज भी पूरे सिंह मास (अषाढ़) में हर घर में शाम के समय दीप जलाकर भगवान श्रीराम की आराधना की जाती है। पूरे महीने वाल्मीकि रामायण पढ़ी जाती है। यह मूर्त रूप नहीं, बल्कि अमूर्त भक्ति की परंपरा है। यह  हमारे देश की सच्ची आत्मा है। उन्होंने तमिल कवि अरुणाचल कवि का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने प्रसिद्ध तमिल काव्य रामनाटकम् में माता सीता के प्रति गहरा सम्मान प्रकट किया। उन्होंने कहा था, एक लाख आंखों से सीता माता को देखो, उनसे सुंदर कोई नहीं। तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम हर भाषा में श्रीराम की महिमा का गान हुआ है निर्मला सीतारमण ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी राम जन्मभूमि के लोकार्पण से पहले दक्षिण भारत के श्रीराम से जुड़े मंदिरों की यात्रा की थी। वे श्रीरंगम मंदिर में गए, जहां कंबरामायणम् की रचना हुई थी। यही नहीं, अरुणाचल कवि को भी श्रीराम ने सपने में आदेश दिया था कि वे श्रीरंगम में रामनाटकम् प्रस्तुत करें। वित्त मंत्री ने कहा कि दक्षिण भारत में न केवल पुरुष संत ही नहीं बल्कि एक कुम्हार समुदाय की महिला ने भी तेलुगु में मोल्लरामायणम् लिखकर भक्ति की मिसाल कायम की। 'तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम हर भाषा में श्रीराम की महिमा का गान हुआ है। यही भारत की आत्मा है। हमें लगा ही नहीं कि हम उत्तर भारत में हैं, ऐसा लगा जैसे अपने घर में समारोह कर रहे हों अपने उद्बोधन के अंत में निर्मला सीतारमण ने कहा कि आज का दिन अत्यंत पवित्र है। जिन संतों की हर श्वास में ‘राम’ था, उनकी प्रतिमाओं को अयोध्या में स्थान मिलना केवल योग से नहीं, श्रीराम की इच्छा से संभव हुआ है। उत्तर और दक्षिण भारत के बीच यह भक्ति से जुड़ी एकता का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया और कहा कि हमें लगा ही नहीं कि हम उत्तर भारत में हैं, ऐसा लगा जैसे अपने घर में समारोह कर रहे हों।

शंकराचार्य, रामानंदाचार्य, माधवाचार्य और रामानुजाचार्य के नाम पर होंगे श्रीराममंदिर के चारों महत्वपूर्ण द्वार

महान संतों के नाम पर जाने जाएंगे श्रीराममंदिर के चारो द्वार : योगी आदित्यनाथ  शंकराचार्य, रामानंदाचार्य, माधवाचार्य और रामानुजाचार्य के नाम पर होंगे श्रीराममंदिर के चारों महत्वपूर्ण द्वार श्रीराममंदिर परिसर स्थित बृहस्पति कुंड पर तीन दक्षिण भारतीय संतों की प्रतिमाओं का मुख्यमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री ने किया अनावरण दक्षिण के महाकवि त्यागराज, पुरंदरदास और अरुणाचल कवि ने श्रीराम भक्ति का दक्षिण में किया विस्तार, स्थापित हुईं मूर्तियां   कार्यक्रम में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का संदेश हुआ प्रतिध्वनित, हजारों श्रद्धालुओं ने मूर्तियों के अनावरण का किया साक्षी भाव से स्वागत – हमारे संतों ने उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने का कार्य किया : सीएम योगी  – प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में साकार हो रहा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का सपना : मुख्यमंत्री – राममंदिर आंदोलन में अग्रणी रहे दक्षिण भारत के श्रद्धालु, काशी तमिल संगमम उत्तर-दक्षिण की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक : सीएम योगी – जीएसटी रिफॉर्म से अर्थव्यवस्था को मिली ऊर्जा, वित्त मंत्री को यूपी की जनता की ओर से बधाई : योगी आदित्यनाथ – रामेश्वरम से लेकर अयोध्या तक श्रीराम की भक्ति ने देश को जोड़ा, हर भारतवासी को अपने पूज्य संतों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए : सीएम योगी अयोध्या  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अयोध्या के पवित्र बृहस्पति कुंड पर दक्षिण भारत के तीन महान संगीत संतों श्री त्यागराज स्वामीगल, श्री पुरंदरदास और श्री अरुणाचल कवि की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। इस अवसर पर उनके साथ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में संतों की भक्ति परंपरा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान का सशक्त संदेश गूंजता रहा।  चार प्रमुख द्वार अब भारत के चार महान संतों के नाम पर मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राममंदिर के चार प्रमुख द्वार अब भारत के चार महान संतों के नाम पर समर्पित होंगे, दक्षिण दिशा का द्वार जगद्गुरु शंकराचार्य जी, दक्षिण-पूर्व द्वार (गेट नंबर तीन) जगद्गुरु माधवाचार्य जी, उत्तर दिशा का द्वार जगद्गुरु रामानुजाचार्य जी और सुग्रीव किला मार्ग से प्रवेश द्वार जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के नाम पर जाना जाएगा। भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक हैं तीनों संत मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह अवसर न केवल उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय एकता और समरसता की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम भी है। उन्होंने कहा कि इन तीन पूज्य संतों ने 15वीं से 18वीं सदी के बीच श्रीराम भक्ति में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया और आज उनकी प्रतिमाएं उनके आराध्य श्रीरामचरणों में स्थापित होना पूरे भारत के लिए गौरव की बात है। त्यागराज महास्वामी को कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि यह स्थल देवगुरु बृहस्पति जी का पवित्र कुंड है और यहां आने वाले कोटि-कोटि श्रद्धालु अब हर वर्ष इन संतों के दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि त्यागराज महास्वामी को कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने तेलुगु भाषा में हजारों भक्ति गीतों के माध्यम से भगवान श्रीराम की आराधना को जन-जन तक पहुंचाया। श्री पुरंदरदास महास्वामी हरिदास सम्प्रदाय के प्रमुख संत मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि श्री पुरंदरदास महास्वामी को 1434 से 1564 तक कर्नाटक संगीत का जनक कहा जाता है। उन्होंने व्यापारी जीवन त्यागकर हरिदास सम्प्रदाय के प्रमुख संत के रूप में कन्नड़ भाषा में लगभग साढ़े चार लाख से अधिक भक्ति गीतों की रचना की। वहीं, श्री अरुणाचल कवि महास्वामी ने ‘रामनाटकम्’ जैसे तमिल काव्य के माध्यम से श्रीराम के आदर्शों का प्रसार किया। दक्षिण के रामभक्त भी कहते थे, 'राम लला हम आएंगे…' सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या में पहले ही जगद्गुरु रामानुजाचार्य की प्रतिमा और लता मंगेशकर चौक की स्थापना की जा चुकी है। अब यह कार्यक्रम उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाली नई कड़ी बन गया है। उन्होंने स्मरण कराया कि रामजन्मभूमि आंदोलन के समय दक्षिण भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे थे और नारा लगाते थे “राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।” काशी तमिल संगमम एक सांस्कृतिक पुल सीएम योगी ने अपने भाषण में कहा कि काशी और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक पुल का निर्माण प्रधानमंत्री मोदी ने “काशी तमिल संगमम” के माध्यम से किया। संस्कृत और तमिल दोनों भाषाओं की समृद्ध धरोहर को जोड़ना भारत की आत्मा को एक सूत्र में पिरोने जैसा कार्य है। नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म ने नागरिकों को दी राहत  कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की भी सराहना करते हुए योगी ने कहा कि उन्होंने शारदीय नवरात्रि की प्रथम तिथि से देशभर में “नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म” लागू कर 140 करोड़ नागरिकों को राहत दी है, जिससे बाजार में नया उत्साह और मजबूती आई है। इस अवसर पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, सूर्य प्रताप शाही, जयवीर सिंह, रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र, श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विधायकगण वेद प्रकाश गुप्ता, डॉ अमित सिंह चौहान, चंद्र भानु पासवान, रामचंद्र यादव, अभय सिंह सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे। इसके अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश राज्यों से बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

सेंटर ऑफ इन्वेंशन, इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड ट्रेनिंग (CIIIT) का हुआ भूमि पूजन एवं शिलान्यास

सीएम योगी की दूरदर्शी पहल से मुजफ्फरनगर में तकनीकी शिक्षा का नया अध्याय शुरू सेंटर ऑफ इन्वेंशन, इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड ट्रेनिंग (CIIIT) का हुआ भूमि पूजन एवं शिलान्यास टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से बनेगा अत्याधुनिक संस्थान, युवाओं को मिलेगी आधुनिक तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसर योगी सरकार ने दी तकनीकी शिक्षा को नई दिशा, युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया मार्ग प्रशस्त लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की दूरदर्शी सोच और विशेष प्रेरणा से बुधवार को जनपद मुजफ्फरनगर में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई। इस पहल के तहत जनपद में सेंटर ऑफ इन्वेंशन, इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड ट्रेनिंग (CIIIT) का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया गया। इस पहल ने प्रदेश में रोजगारपरक शिक्षा को नई गति दी है और युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया मार्ग प्रशस्त किया है। शारदेन स्कूल में हुआ भव्य आयोजन व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने “सेंटर ऑफ इन्वेंशन, इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड ट्रेनिंग (CIIIT)” का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ हुए इस धार्मिक और औपचारिक समारोह ने पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना दिया। शिलान्यास कार्यक्रम शारदेन स्कूल, मेरठ रोड, मुजफ्फरनगर में आयोजित हुआ। भूमि पूजन के बाद राज्यमंत्री और मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने वृक्षारोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।  टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से बनेगा अत्याधुनिक CIIIT संस्थान कार्यक्रम में टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड, पुणे के विशेषज्ञ अधिकारियों ने सीआईआईआईटी परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बताया कि यह संस्थान युवाओं को ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों में प्रशिक्षण देगा। 226.52 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह संस्थान राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) मुजफ्फरनगर के पास 10,000 वर्ग मीटर भूमि पर स्थापित होगा। जिलाधिकारी की देखरेख में भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई गई है और निर्माण कार्य फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगारपरक शिक्षा से आत्मनिर्भर होंगे युवा राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को तकनीकी और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह संस्थान उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी तकनीकी शिक्षा और रोजगार शक्ति के रूप में स्थापित होगा। आईटीआई प्रशिक्षार्थियों को मिला सम्मान राज्यमंत्री, प्रमुख सचिव, मण्डलायुक्त और निदेशक ने प्रदेश के 21 आईटीआई संस्थानों के श्रेष्ठ प्रशिक्षार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। युवाओं के कौशल और परिश्रम की सराहना की गई और उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं। समारोह में प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम (IAS), मण्डलायुक्त अटल कुमार राय (IAS), निदेशक अभिषेक सिंह (IAS), जिलाधिकारी उमेश मिश्रा (IAS), मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमल किशोर देशभूषण (IAS) तथा टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड, पुणे से यतेन्द्र कुमार और श्री रजनीकांत उपाध्याय सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने लिया राम मंदिर निर्माण की प्रगति का जायजा, ट्रस्ट पदाधिकारियों से की चर्चा

हनुमानगढ़ी में सीएम योगी ने टेका मत्था, श्रीरामलला के दरबार में की आरती मुख्यमंत्री ने लिया राम मंदिर निर्माण की प्रगति का जायजा, ट्रस्ट पदाधिकारियों से की चर्चा श्रीरामलला के चरणों में शीश नवाकर सीएम योगी ने मांगी प्रदेश की सुख-शांति की कामना – “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठी अयोध्या, मुख्यमंत्री ने आमजन का किया अभिवादन – अक्टूबर महीने में सीएम योगी का पहला अयोध्या दौरा, हुआ भव्य स्वागत अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या बुधवार को एक बार फिर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठी, जब प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ एक दिवसीय दौरे पर पावन धरा पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अपने अयोध्या प्रवास की शुरुआत संकट मोचन हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन से की, जहां उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। हनुमानगढ़ी से निकलने के बाद मुख्यमंत्री योगी सीधे श्रीरामलला के दरबार पहुंचे। आरती उतारकर उन्होंने प्रभु श्रीराम के चरणों में शीश नवाया और परिक्रमा करते हुए मंदिर निर्माण कार्यों की प्रगति का गहराई से अवलोकन किया। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उन्हें मंदिर के निर्माण की वर्तमान स्थिति और आगामी चरणों की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने श्रीरामलला के दर्शन-पूजन के उपरांत मंदिर प्रांगण से बाहर निकलते समय श्रद्धालुओं और आमजन का हाथ जोड़कर अभिवादन भी स्वीकार किया। पूरा परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इससे पूर्व, अयोध्या आगमन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रामकथा पार्क स्थित हेलीपैड पर भव्य स्वागत किया गया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। गौरतलब है कि अक्टूबर माह में यह मुख्यमंत्री योगी का पहला अयोध्या दौरा रहा, जिसमें उन्होंने न केवल धार्मिक आस्था प्रकट की, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के कार्यों की प्रगति पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया। हेलीपैड पर भव्य स्वागत में उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही,पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह व महापौर गिरीशपति त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, विधायकगण वेद प्रकाश गुप्ता, अमित सिंह चौहान, रामचंद्र यादव, अभय सिंह, चंद्रभानु पासवान, बीजेपी जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव, सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

उत्तर-दक्षिण संस्कृति का संगम बना बृहस्पति कुंड, भक्ति और संगीत की बिखरी अनोखी छटा

अयोध्या में गूंजी दक्षिण की भक्ति स्वर लहरियां   वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया दक्षिण के तीन संतों की मूर्तियों का अनावरण  उत्तर-दक्षिण संस्कृति का संगम बना बृहस्पति कुंड, भक्ति और संगीत की बिखरी अनोखी छटा  निर्मला सीतारमण बोलीं अयोध्या भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक योगी आदित्यनाथ ने कहा अयोध्या बन रही सांस्कृतिक पुनर्जागरण की केंद्रस्थली  त्यागराज, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की मूर्तियों से अयोध्या में बसा कर्नाटक का संगीत भाव अयोध्या उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम बुधवार को अयोध्या की पावन भूमि पर देखने को मिला। दो दिवसीय दौरे पर पहुंचीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर दक्षिण भारत के तीन महान संगीत संतों त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की मूर्तियों का बृहस्पति कुंड में भव्य अनावरण किया। भक्ति और संगीत की मधुर लहरों में डूबा बृहस्पति कुंड टेढ़ी बाजार स्थित बृहस्पति कुंड का वातावरण उस समय भक्तिरस और संगीत की पवित्र भावना से सरोबार हो उठा जब केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर अनावरण समारोह की शुरुआत की। इस दौरान सीतारमण के माता-पिता भी मौजूद रहे, जिससे यह पल और भी भावनात्मक हो गया। अयोध्या की परंपरा में हुआ भव्य स्वागत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय वित्त मंत्री का पुष्पगुच्छ भेंट कर पारंपरिक अयोध्या शैली में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बृहस्पति कुंड केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक है, जहां उत्तर भारत की श्रद्धा और दक्षिण भारत की भक्ति का संगम होता है। तीनों संतों के योगदान को किया नमन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अयोध्या केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। उन्होंने तीनों संतों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और भक्ति परंपरा को विश्व पटल पर स्थापित किया। उनके काव्य और रचनाओं ने समाज को प्रेम, भक्ति और एकता के सूत्र में पिरोया। कर्नाटक और अयोध्या के सांस्कृतिक रिश्ते को मिला नया आयाम सीतारमण ने बृहस्पति कुंड की भव्यता और शांति देखकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अयोध्या और कर्नाटक के सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं। आज इन संतों की मूर्तियों के अनावरण के माध्यम से भारत की उत्तर-दक्षिण परंपरा एक सूत्र में बंधी है। सीएम योगी ने बोल अयोध्या बन रही सांस्कृतिक पुनर्जागरण की धुरी इस अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम की नगरी अयोध्या अब केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की केंद्रस्थली बन रही है। उन्होंने कहा कि निर्मला सीतारमण का यह दौरा भारत की सांस्कृतिक एकता और समरसता का सशक्त प्रतीक है। बृहस्पति कुंड की शांति में खोए सीएम योगी, मंत्रियों संग पत्थर की बेंच पर लिया सौंदर्य का आनंद बृहस्पति कुंड परिसर में स्थापित सुंदर पत्थर की बेंचों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह कुछ देर के लिए विराम लेते हुए बैठे। शांत सरोवर, मधुर वातावरण और सुव्यवस्थित परिसर को निहारते हुए तीनों जनप्रतिनिधियों ने उस पल में अयोध्या की सौंदर्य व सांस्कृतिक गरिमा का आनंद अनुभव किया। मुख्यमंत्री ने बेंचों की कलात्मक बनावट और परिसर के सौंदर्यीकरण की सराहना करते हुए कहा कि बृहस्पति कुंड अब श्रद्धा और सौंदर्य का आदर्श संगम बन चुका है।

काशी दर्शन का नया अंदाज़: नमो घाट से उड़ान भरेंगे हेलिकॉप्टर, दिखेगा दिव्य देव दीपावली दृश्य

वाराणसी काशी के घाटों, मंदिरों और गंगा आरती का नजारा अब आसमान से भी देखने को मिलेगा। देव दीपावली से पहले वाराणसी में पर्यटकों, श्रद्धालुओं के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू हो जाएगी। सर्वे, सुरक्षा सहित परीक्षण के दूसरे काम पूरे हो गए हैं। हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने वाली कंपनी के अफसरों ने मंजूरी के लिए बाबतपुर एयरपोर्ट अथॉरिटी से संपर्क कर सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है। इस सेवा के तहत श्रद्धालु और पर्यटक 7-8 मिनट की हवाई यात्रा में काशी के प्रमुख स्थलों के अद्भुत दर्शन कर सकेंगे। कंपनी के एक अफसर के अनुसार नमो घाट पर बने हेलिपैड से उड़ान शुरू की जाएगी। यहां से तीन सीटर और छह-सीटर हेलिकॉप्टर उड़ान भरेंगे। करीब 7-8 मिनट की इस यात्रा में पर्यटक काशी के हवाई दर्शन कराएंगे। नमो घाट से श्री काशी विश्वनाथ धाम, मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र सहित सभी घाट, गोदौलिया क्षेत्र, चौक, काल भैरव मंदिर और रामनगर पुल दिखाए जाएंगे। हेलिपैड के बाद एचटी लाइन सहित कुछ अन्य दिक्कतें थीं जिसे दूर कर लिया गया है। हेलिकॉप्टर संचालन का प्रस्ताव स्मार्ट सिटी, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग को दिया गया था। हरी झंडी मिलने के बाद इस दिशा में काम शुरू किया गया। अधिकारी ने बताया कि हेलिकॉप्टर सेवा का किराया अभी नहीं तय किया गया है लेकिन बुकिंग ऑनलाइन ही होगी। इसी सप्ताह विभागीय अफसरों के साथ बैठक होगी। इसमें किराया तय कर उसकी घोषणा की जाएगी। स्काई टूरिज्म का मिलेगा लाभ पर्यटन विभाग से जुड़े एक अफसर ने कहा कि यह पहल वाराणसी को ‘स्काई टूरिज्म’ के नए केंद्र के रूप में पहचान दिलाएगी। इससे स्थानीय रोजगार और पर्यटन कारोबार को बड़ा लाभ मिलेगा। क्या बोले अधिकारी हेलिकॉप्टर सेवा का प्रस्ताव मिला है। परीक्षण कराया जा रहा है। हेलिकॉप्टर सेवा शुरू होती है तो जरूर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटकों को काशी का एक नया और अद्भुत अनुभव मिलेगा। -सत्येंद्र कुमार, डीएम  

त्योहारों की भीड़ में राहत: पूर्वोत्तर रेलवे की इन ट्रेनों में मिल रही है आसान बुकिंग

बरेली त्योहारी सीजन में रेलवे और रोडवेज दोनों ही विभागों पर भार है। इसी बीच पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर की ओर से ट्रेनों की सूची जारी की गई है, जिसमें विशेष ट्रेनों में सीट की उपलब्ध अलग-अलग तिथियों पर है। इसमें बरेली से होकर गुजरने वाली छह ट्रेनें भी शामिल हैं। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह की ओर से इसकी सूचना सार्वजनिक की गई है। इन ट्रेनों में सीटों की है उपलब्धता – 05049 छपरा-अमृतसर पूजा विशेष ट्रेन… 10 अक्तूबर को एसी तृतीय इकोनॉमी में 686 बर्थ और 17 अक्तूबर को एसी तृतीय इकोनॉमी श्रेणी में 773 सीट उपलब्ध है। – 04607 छपरा-अमृतसर पूजा विशेष ट्रेन… 13 अक्तूबर को एसी द्वितीय श्रेणी में 497 सीट, 20 अक्तूबर को एसी तृतीय में 536 व स्लीपर में 324 सीट और 27 अक्तूबर को एसी तृतीय श्रेणी में 491 व स्लीपर में 242 बर्थ उपलब्ध है। – 05301 मऊ-अम्बाला कैंट पूजा विशेष ट्रेन… नौ अक्तूबर को एसी प्रथम में 06, एसी द्वितीय में 102, एसी तृतीय श्रेणी में 314, एसी तृतीय इकोनॉमी श्रेणी में 105 सीट उपलब्ध हैं। इसके अलावा 16 अक्तूबर को एसी प्रथम में 06, एसी द्वितीय में 100, वातानुकूलित तृतीय में 328, एसी तृतीय इकोनॉमी में 124 व स्लीपर में 231 सीट हैं। 23 अक्तूबर को एसी द्वितीय में 73, एसी तृतीय में 300 और वातानुकूलित तृतीय इकोनॉमी में 101 सीट और 30 अक्तूबर को एसी प्रथम में एक एवं एसी द्वितीय में 12 सीट उपलब्ध है। – 05005 बढ़नी-अमृतसर पूजा विशेष ट्रेन… 15 अक्तूबर को स्लीपर में 363, 22 अक्तूबर को स्लीपर में 329 तथा 29 अक्तूबर को स्लीपर में 366 सीट उपलब्ध हैं। – 05023 गोमती नगर-खातीपुरा पूजा विशेष ट्रेन… 14 अक्तूबर को एसी द्वितीय में 25, एसी तृतीय में 125 स्लीपर श्रेणी में 384, 21 अक्तूबर एसी द्वितीय में 21, एसी तृतीय में 118 और स्लीपर में 351 सीट तथा 28 अक्तूबर को एसी द्वितीय श्रेणी में 21, एसी तृतीय श्रेणी में 118 एवं स्लीपर में 304 सीट उपलब्ध है। – 04021 गोरखपुर-नई दिल्ली पूजा विशेष ट्रेन…11 अक्तूबर एसी प्रथम श्रेणी में 17, एसी द्वितीय श्रेणी में 77, एसी तृतीय श्रेणी में 338, स्लीपर में 224 सीट उपलब्ध हैं। 18 अक्तूबर को एसी प्रथम में 17, एसी द्वितीय में 76, एसी तृतीय श्रेणी में 339, स्लीपर में 303 और 25 अक्तूबर को एसी द्वितीय में 22, एसी तृतीय में 162 सीट उपलब्ध हैं।

एसआईआर प्रक्रिया पूरी, चुनाव में नए नियमों के तहत हर मतदाता की होगी भागीदारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बिहार की तरह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके तहत प्रदेश में हर मतदाता को गणना फॉर्म भरकर साइन करना होगा। चुनाव आयोग से तिथियां जारी होते ही यह गणना फॉर्म लेकर बीएलओ घर-घर जाएंगे। इस संबंध में यूपी के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी संबंधित अधिकारियों को ट्रेनिंग दे दी है। एसआईआर के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची वेबसाइट ceouttarpradesh.nic.in पर अपलोड करने का काम चल रहा है। यह वो मतदाता सूची हैं, जिनका प्रयोग विधानसभा व लोकसभा चुनाव में होता है। उसके बाद बीएलओ प्रि-प्रिंटेड (पहले से भरे) गणना फॉर्म दो प्रतियों में मतदाताओं को देंगे। इसमें से एक प्रति मतदाता के साइन करवाकर अपने पास रख लेंगे। अगर मतदाता का नाम वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट में है, तो वह सत्यापन के दौरान उसकी डिटेल बीएलओ को दे देगा। आयोग का प्रयास है कि बीएलओ खुद ही 2003 की वोटर लिस्ट की डिटेल निकालकर संबंधित मतदाताओं के गणना फॉर्म के साथ लगा दें, ताकि मतदाताओं को कोई असुविधा न हो। 2003 की मतदाता सूची से पुष्ट मतदाताओं के नाम फाइनल सूची मे शामिल कर लिए जाएंगे।   देनी होगी ये डिटेल जिन मतदाताओं के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है और उनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, उन्हें आयोग की ओर से मान्य 11 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज बीएलओ को देना होगा। इसी तरह से तीसरी श्रेणी में वे मतदाता होंगे, जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है, उन्हें अपना कोई एक मान्य दस्तावेज और अपने माता या पिता में से किसी एक का मान्य दस्तावेज देना होगा। अगर इस अवधि में जन्म लेने वाले मतदाता के माता या पिता का नाम 2003 की मतदाता सूची में है, तो उसका ब्योरा भी प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। चौथी श्रेणी में दो दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वाले मतदाता होंगे। उन्हें अपने और अपने माता-पिता दोनों का कोई एक मान्य दस्तावेज देना होगा। जन्म की अवधि की ये तिथियां नागरिकता संबंधी अधिनियम में समय-समय पर हुए संशोधनों को ध्यान में रखते हुए तय की गई हैं। यहां बता दें कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में करीब 15 करोड़ 42 लाख मतदाता हैं। माना जा रहा है कि करीब 70 प्रतिशत मतदाताओं का सत्यापन 2003 की मतदाता सूची के आधार पर हो जाएगा।