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योगी आदित्यनाथ का बयान: नरेंद्र मोदी हैं कर्मयोगी और साधक की मिसाल

लखनऊ  इतिहास साक्षी है कि यह देश जब-जब चुनौतियों से घिरा, तब-तब इस धरती ने ऐसे महामानव दिए, जिन्होंने समय की धारा मोड़ दी. बीसवीं सदी के अंत और इक्कीसवीं सदी के आरंभ में जब भारत संक्रमण और असंतुलन से जूझ रहा था. ठीक इसी दौर में वडनगर से एक साधारण परिवार का संतति उभरी, जिसने संघर्ष को शक्ति और अवसर में बदला. राजनीति में भारतीय मूल्यों व जनभावनाओं को प्रतिष्ठा दी और भारत को वैश्विक मंच पर नई गरिमा और आत्मविश्वास दिलाया. आज पूरा देश उस यशस्वी नेतृत्व के जीवन की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है. वास्तव में, आज उनके पचहत्तर वर्ष का यह जीवन केवल व्यक्ति मात्र की यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक चेतना का जागरण है. मोदी जी का जीवन संघर्षों से संकल्प और संकल्प से सिद्धि की अनुपम गाथा है. बाल्यकाल की कठिनाइयों और वंचनाओं ने उनके भीतर ऐसा आत्मबल, संवेदनशीलता और अटूट संकल्प गढ़ा, जिसने उन्हें राष्ट्र निर्माण की महान यात्रा के लिए तैयार किया.  जीवन के संघर्षों से शिक्षित और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला में दीक्षित नरेंद्र मोदी जी ने कठिन परिस्थितियों में धैर्य, अनुशासन और समाज के प्रति समर्पण का पाठ ग्रहण किया. उनकी जीवन यात्रा केवल राजनीतिक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि एक प्रेरक गाथा है, जिसमें प्रत्येक अनुभव राष्ट्रसेवा की सीख बनकर आगे आया. अपने सुदीर्घ सामाजिक जीवन में मोदी जी शुचिता, पारदर्शिता और प्रतिबद्धता का पर्याय बनकर उभरे हैं. “राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय, इदं न मम” उनके हर कार्य के मूल में निहित है. 'संघर्षों का अनुभव…' वर्ष 2014 में भारत ने उन्हें प्रधानमंत्री चुना. यह चुनाव केवल सरकार का परिवर्तन नहीं था, बल्कि लोकचेतना के उदय का प्रतीक था. जनता ने एक ऐसे नेता को राष्ट्र की बागडोर सौंपी, जिसने स्वयं संघर्षों का अनुभव किया था और जो साधारण जन के जीवन की पीड़ा को समझता था. प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने शासन को नई परिभाषा दी. उन्होंने नीति और कार्यक्रमों की आत्मा में ‘वंचित को वरीयता’ का भाव भरा. यही भाव ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र में प्रकट हुआ. दशकों तक योजनाओं से वंचित लोगों को सम्मान और अवसर देना ही उनके शासन का मूल बन गया. यही कारण है कि करोड़ों गरीब परिवारों को घर, शौचालय, गैस, बिजली और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं वास्तविकता बनीं. 'प्रत्येक नागरिक की जीवन गुणवत्ता में सुधार…' प्रधानमंत्री मोदी जी ने दीनदयाल उपाध्याय जी के ‘एकात्म मानववाद’ के दर्शन को अपने नीति निर्माण में आधार बनाया है. उनका मानना है कि विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मानविक दृष्टि से भी होना चाहिए. इसी दृष्टि से योजनाएं गरीब और वंचित तक पहुंचती हैं, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाती हैं, और अंतिम नागरिक तक लाभ सुनिश्चित करती हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, डिजिटल क्रांति, और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलें इसी दर्शन का जीवंत प्रमाण हैं. मोदी जी का नेतृत्व यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक सुधार केवल आंकड़े और नीतियां न रहें, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जीवन गुणवत्ता में वास्तविक सुधार लाएं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदृष्टि ने भारतीय अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन की राह प्रशस्त की है. करों के संजाल से मुक्ति दिलाकर जीएसटी लागू करना, न केवल ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की संकल्पना को साकार करता है, बल्कि पूरे देश में आर्थिक एकता, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा की नई संस्कृति लेकर आया. इसके माध्यम से भारत का राष्ट्रीय बाज़ार एकीकृत हुआ, स्थानीय उत्पादों और उद्योगों को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिला. यह केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से समावेशी विकास का साधन भी बना और अब तो जीएसटी-नेक्स्ट जेनेरेशन रिफॉर्म ने तो व्यवसाय के लिए सरल और सुगम कर ढांचा प्रस्तुत किया, राज्य और केंद्र के राजस्व को संतुलित किया और निवेशकों का विश्वास बढ़ाया. आम भारतीय इन कर सुधारों का प्रत्यक्ष लाभार्थी है. 'भारत स्व से साक्षात्कार कर रहा…' मोदी जी का योगदान केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं है. 'विकास भी-विरासत भी' के मंत्र के साथ मोदी जी के नेतृत्व में पूरा भारत में एक नवीन सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी और सहभागी बन रहा है. भारत स्व से साक्षात्कार कर रहा है. कुत्सित राजनीति के कारण अपने ही देश में उपेक्षा और तुष्टीकरण का दंश झेलने को विवश सनातन आस्था गौरवान्वित हो रही है. कौन भूल सकता है 22 जनवरी 2024 का वह ऐतिहासिक अवसर जब पांच शताब्दियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला के भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प पूर्ण हुआ. आखिर भारत को इसी दिन की तो प्रतीक्षा थी. इस चिरप्रतीक्षा के पूरा होने का श्रेय आदरणीय मोदी जी को ही है. इसी प्रकार काशी-विश्वनाथ धाम का पुनरुद्धार, महाकाल लोक, केदारधाम पुनरोद्धार, काशी-तमिल संगमम जैसे आयोजनों के माध्यम से उत्तर और दक्षिण की सांस्कृतिक धाराओं को जोड़ना और सुनियोजित उपेक्षा और तिरस्कार से आहत पूर्वोत्तर को विकास की मुख्यधारा में लाना, ये सभी प्रयास भारत की एकात्म चेतना के पुनर्जागरण के प्रतीक बने हैं. 2014 में मोदी जी के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने के साथ ही भारत की विदेश नीति में क्रांतिकारी परिवर्तन को दुनिया ने देखा और सराहा है. 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प के साथ भारत ने वैदेशिक संबंधों में बहुपक्षीय नीति को अपनाया है. सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और हाल में ऑपरेशन सिंदूर जैसी निर्णायक कार्रवाइयों ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति अडिग है. मोदी जी के नेतृत्व में देश के अंदर आर्थिक नीतियों ने भी एक नई कथा लिखी जा रही है. आधार, जनधन और मोबाइल की ट्रिनिटी ने डिजिटल क्रांति को जन्म दिया. आज भारत में UPI लेन-देन की नई परिभाषा गढ़ रहा है. मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान ने युवाओं को नयी उड़ान दी. ग्रामीण भारत में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों ने आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखा. कृषि, उद्योग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सभी क्षेत्रों में भारत ने अभूतपूर्व गति प्राप्त की. विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने अंतरिक्ष में चंद्रयान और गगनयान जैसे अभियानों के माध्यम से नित नए इतिहास रचे हैं. डिजिटल इंडिया के अंतर्गत भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल डेटा उपभोक्ता देश बन चुका … Read more

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से किया सेवा पखवाड़ा 2025 का शुभारंभ

पीएम मोदी के नेतृत्व में नया भारत बना दुनिया के लिए प्रेरणाः सीएम योगी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से किया सेवा पखवाड़ा 2025 का शुभारंभ सीएम योगी बोले- पीएम मोदी के नेतृत्व में बदला भारत का चेहरा, विरासत, विकास और सेवा का दिख रहा संगम  गरीबी से विरासत तक और महामारी प्रबंधन से कूटनीति तक मोदी मॉडल बना मिसालः मुख्यमंत्री  अयोध्या से काशी, केदारनाथ से महाकाल तक, धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार ने दुनिया में दिलाई नई पहचानः योगी  गरीबों की प्राथमिकता, महापुरुषों का सम्मान और वैश्विक नेतृत्व मोदी युग की विशेषताएंः योगी आदित्यनाथ  मुख्यमंत्री ने कहा- पीएम मोदी के नेतृत्व में गरीबों को मिली प्राथमिकता: 11 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए कोविड काल में भारत ने दुनिया को दिखाया बेहतरीन मॉडल, 9 महीने में वैक्सीन निर्माण कर दर्जनों देशों को दी मददः सीएम लखनऊ   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के अवसर पर लखनऊ से सेवा पखवाड़ा 2025 का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें 25 करोड़ प्रदेशवासियों की ओर से जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा और इसमें समाज को जोड़ने वाले विविध रचनात्मक कार्य शामिल होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह हम सबका सौभाग्य है कि सेवा पखवाड़ा का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पावन जन्मदिन से हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी केवल भारत के ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे दूरदर्शी और लोकप्रिय नेता हैं। आज पूरी दुनिया प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नए भारत का दर्शन कर रही है। जो भारत कभी पिछलग्गू माना जाता था, लेकिन आज अपने आत्मविश्वास से दुनिया को प्रेरित कर रहा है। 11 वर्षों की उपलब्धियां गढ़ रहीं हर क्षेत्र में नए प्रतिमान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलताएं हासिल की हैं। अर्थव्यवस्था, विरासत, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, नियुक्तियां, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि विकास, जल संसाधन जैसे तमाम क्षेत्रों में नए प्रतिमान स्थापित हुए हैं। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब, किसान, नौजवान, महिलाएं, दलित और वंचित समाज को प्राथमिकता देने की वजह से हर नागरिक के जीवन में व्यापक परिवर्तन आया है। यही वजह है कि बीते 11 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ पाए हैं। रामलला से महाकाल लोक तक आस्था और विरासत का सम्मान  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विरासत का सम्मान आज केवल घोषणा नहीं, बल्कि हकीकत है। अयोध्या में 500 वर्षों के बाद रामलला का भव्य मंदिर बना। काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्निर्माण वैश्विक जगत को आकर्षित कर रहा है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम का कायाकल्प हुआ है। महाकाल लोक का निर्माण और अन्य धार्मिक स्थलों का सुंदरीकरण नए भारत की पहचान बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि जैसे महापुरुषों की स्मृतियों से जुड़े अनेक रचनात्मक कार्य किए गए हैं, जो सामाजिक न्याय और सामाजिक उत्थान की दिशा में मील का पत्थर साबित हुए हैं। कोविड प्रबंधन में भारत बना वैश्विक मॉडल मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कोविड काल के प्रबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया महामारी के सामने असहाय थी, तब भारत ने सबसे बेहतरीन कोविड प्रबंधन का उदाहरण प्रस्तुत किया। जहां 100 वर्षों में कोई वैक्सीन भारत तक नहीं पहुंच पाई, वहीं मोदी जी के नेतृत्व में सिर्फ 9 महीनों में कोविड वैक्सीन विकसित की गई। उन्होंने बताया कि न केवल भारतवासियों को मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध कराई गई, बल्कि दुनिया के दर्जनों मित्र देशों को भी फ्री में वैक्सीन देकर भारत ने बेहतरीन कूटनीतिक उदाहरण प्रस्तुत किया। इससे भारत संकट के समय सहयोगी के रूप में दुनिया के सामने मिसाल बनकर उभरा। स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में बड़ा अभियान मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा पखवाड़ा का पहला चरण "स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार" अभियान है। इसके अंतर्गत महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, पोषण संबंधी कार्यक्रम और जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। लखनऊ से इसका शुभारंभ करते हुए इसे पूरे प्रदेश में आगे बढ़ाया जा रहा है। भारतीय जनता युवा मोर्चा हर जिले में रक्तदान शिविर आयोजित कर रहा है। आने वाले दिनों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, पीएचसी, सीएचसी, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य शिविर तथा जांच से जुड़े कार्यक्रम होंगे। इससे जरूरतमंदों को निशुल्क सुविधाओं का लाभ मिलेगा और आमजन को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता भी प्राप्त होगी। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश, आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश—ये सभी आपस में जुड़े हुए लक्ष्य हैं। इन्हें हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का विजन 2047 हमें मार्गदर्शन देता है। उन्होंने कहा कि इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर में प्रबुद्ध जन सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। 19 और 20 सितंबर को होने वाले ये सम्मेलन हर जनप्रतिनिधि, मंत्री, सांसद और विधायक की सहभागिता से आगे बढ़ेंगे। युवाओं के लिए नमो मैराथन मुख्यमंत्री ने बताया कि 21 सितंबर को व्यापक जनजागरण के लिए "नमो मैराथन" का आयोजन उत्तर प्रदेश के 17 बड़े नगरों में किया जाएगा। इसमें हजारों युवा हिस्सा लेंगे। यह आयोजन फिट इंडिया मूवमेंट और विकसित भारत अभियान को मजबूती देगा। अंत्योदय से गांधी-शास्त्री जयंती तक मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 सितंबर को अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती बूथ स्तर पर पूरी भव्यता से मनाई जाएगी। इसके बाद यह कार्यक्रम निरंतर आगे बढ़ते हुए 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के साथ संपन्न होगा। इस अवसर पर खादी के प्रचार-प्रसार के कार्यक्रम होंगे और खादी वस्त्र को उपहार में देने की परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री के "वोकल फॉर लोकल" अभियान को भी बल मिलेगा। एमएसएमई और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत प्रदर्शनी और टूलकिट वितरण कार्यक्रम आयोजित होंगे। समाज को साथ लेकर सफलता की ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सेवा पखवाड़ा से जुड़े सभी संस्थान समाज को साथ लेकर इसे सफलता की ओर अग्रसर … Read more

अवैध ‘नॉनवेज’ होटल पर बुलडोजर, विरोध में उतरा मालिक बोला – लाठीचार्ज कर लो, नहीं हटूंगा

संभल  उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने एक अवैध रूप से संचालित 'नॉनवेज' होटल को ध्वस्त कर दिया. मोहम्मद सईदुद्दीन का यह होटल बिना नक्शा पास कराए चलाया जा रहा था. प्रशासन ने पहले नोटिस दिया था, लेकिन जब अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, तो बुलडोजर से इसे गिरा दिया गया. इस दौरान होटल संचालक और स्थानीय लोग विरोध करने के लिए इकट्ठा हो गए, जिससे मौके पर तनाव फैल गया.  क्यों चला बुलडोजर? बताया जा रहा है कि हयातनगर के सरायतरीन में मोहम्मद सईदुद्दीन द्वारा संचालित इस होटल का नक्शा पास नहीं था. संबंधित विभाग ने 12 जुलाई 2025 को होटल संचालक को अवैध निर्माण हटाने का नोटिस जारी किया था. इसके बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो नायब तहसीलदार और विनिमय क्षेत्र कार्यालय के अधिकारी बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे. उन्होंने आरबी एक्ट की धारा 10 के तहत कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया.  संचालक और प्रशासन में हुई तीखी बहस जब प्रशासन ने बुलडोजर से कार्रवाई शुरू की, तो होटल संचालक और वहां मौजूद भीड़ ने विरोध करना शुरू कर दिया. संचालक ने आरोप लगाया कि प्रशासन सत्ता के दबाव में काम कर रहा है और उनकी दुकान का मामला अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है. उसने यह भी कहा कि वह पुलिस से पिटने, मरने और जेल जाने के लिए तैयार है, लेकिन अपनी जगह नहीं छोड़ेगा. इसके बाद हयातनगर थाने की पुलिस और पीएसी को बुलाया गया ताकि हालात को संभाला जा सके.  प्रशासन ने दी कार्रवाई की जानकारी संभल के एसडीएम विकास चंद्र ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी है. उन्होंने कहा कि आरबी एक्ट की धारा 10 के तहत अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया है. एसडीएम ने यह भी बताया कि नोटिस पहले ही जारी कर दिया गया था और सुनवाई के बाद ही यह कदम उठाया गया. वहीं, होटल संचालक का आरोप है कि 50 साल से उस जमीन पर उसका कब्जा है और प्रशासन उसे पलायन करने के लिए मजबूर कर रहा है.  होटल संचालक का बयान  होटल संचालक ने कहा कि 50 साल से मेरा इसी जमीन पर कब्जा है. प्रशासन के द्वारा गलत तरीके से सत्ता के दबाव में जाकर कार्रवाई की गई है, जबकि मेरी दुकान का मुकदमा भी कोर्ट में विचार अधीन है. मौके पर मेरा जायज कब्जा है. नाजायज तरीके से बुलडोजर लेकर यहां पर अधिकारी आए हैं. लेकिन अब मैं पुलिस से पिटने के लिए, मरने के लिए और जेल जाने के लिए तैयार हूं, मगर यह जगह नहीं छोडूंगा.

मुख्यमंत्री ने की गड्ढामुक्ति, सड़क मरम्मत अभियान की विभागवार समीक्षा

मुख्यमंत्री का निर्देश, त्योहारों से पहले सभी सड़कें दुरुस्त हो जाएं मुख्यमंत्री ने की गड्ढामुक्ति, सड़क मरम्मत अभियान की विभागवार समीक्षा मुख्यमंत्री ने रेस्टोरेशन व विशेष मरम्मत में 2,750 किमी सड़कें चिन्हित, काम में तेजी के निर्देश गड्ढामुक्ति अभियान में अब तक 21.67% प्रगति, 44,196 किमी सड़कों का है लक्ष्य मुख्यमंत्री की चेतावनी, नगरीय अवस्थापना के कार्य समय पर और पारदर्शिता के साथ हों, अन्यथा महापौर के अधिकारों पर होगा पुनर्विचार उत्तर-दक्षिण कॉरीडोर की रूपरेखा पर भी हुआ विमर्श, बोले मुख्यमंत्री, बेहतर होगी कनेक्टिविटी और आर्थिकी को भी मिलेगा बल सड़क नवीनीकरण में पीडब्ल्यूडी ने 84.82% प्रगति दर्ज की, अन्य विभागों को भी गति बढ़ाने के निर्देश रेस्टोरेशन व विशेष मरम्मत में 2,750 किमी सड़कें चिन्हित, काम में तेजी के निर्देश त्योहारों के दृष्टिगत 114 मार्ग असंतोषजनक स्थिति में पाए गए, मुख्यमंत्री ने तुरंत सुधार कर सुचारु यातायात सुनिश्चित करने को कहा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मॉनसून वर्षा के कारण खराब हुईं सड़कों की मरम्मत और आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण के लिए जारी कार्यवाही को तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि हाई-वे हों या एक्सप्रेस-वे, ग्रामीण सड़कें हों या नगरीय क्षेत्र की सड़कें, दुर्गा पूजा, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे आगामी प्रमुख पर्वों से पहले सभी महत्वपूर्ण मार्ग पूरी तरह अच्छी स्थिति में होनी चाहिए, ताकि आमजन को असुविधा न झेलनी पड़े। मुख्यमंत्री, मंगलवार को विभिन्न विभागों के साथ महत्वपूर्ण बैठक में सड़कों की मररमत, गड्ढामुक्ति अभियान आदि की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में अधिकारियों ने गड्ढा मुक्ति अभियान की कार्ययोजना के संबंध में अवगत कराया कि प्रदेश की कुल 6,78,301 सड़कों (लंबाई 4,32,989 किमी) में से 44,196 किमी को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में औसतन 21.67 प्रतिशत प्रगति दर्ज हुई है। मुख्यमंत्री ने एनएचएआई, मंडी परिषद, पीडब्ल्यूडी, ग्राम विकास, पंचायती राज, नगर विकास, सिंचाई, गन्ना एवं चीनी विकास सहित विभिन्न विभागों से अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए निर्देश दिया कि सभी विभाग लक्ष्य की प्राप्ति में समान गति बनाएं और कमजोर प्रगति वाले विभाग और बेहतर कार्य करें। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कों की मरम्मत में तेजी की अपेक्षा जताई।  नगर विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगमों में अवस्थापना संबंधी कार्यों की धनराशि का समय से और सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए। कार्य का आवंटन पारदर्शिता के साथ हो और कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। अन्यथा की स्थिति में महापौरों के अधिकारों पर पुनर्विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिस भी नगर निगम में ईईएसएल का बकाया है, उसका तत्काल भुगतान करा दिया जाए।    सड़क नवीनीकरण कार्यों की समीक्षा में बताया गया कि 31,514 किमी लंबाई की सड़कों को इसमें शामिल किया गया है। लोक निर्माण विभाग ने इसमें 84.82 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने कहा किया कि नवीनीकरण कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करना सभी विभागों की जिम्मेदारी है, इसमें कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। बैठक में अवगत कराया गया कि रेस्टोरेशन एवं विशेष मरम्मत के अंतर्गत 2,750 किमी सड़कें चिन्हित की गई हैं। अधिकारियों ने जानकारी दी कि ग्रामीण विकास विभाग ने इसमें 62.99 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है, नगर विकास विभाग ने 35.50 प्रतिशत और अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने 48.77 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 30 सितम्बर तक लोक निर्माण विभाग द्वारा सर्वे पूरा कर कार्ययोजना शासन को प्रस्तुत की जाए। त्योहारों को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि 649 मार्ग संतोषजनक स्थिति में हैं, जबकि 114 मार्ग असंतोषजनक स्थिति में पाए गए हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन मार्गों को तत्काल सुधार कर सुचारु यातायात सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय सड़कों की स्थिति प्रदेश की छवि से जुड़ी होती है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान प्रदेशवासियों की सुविधा और सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा है। इसलिए सभी विभागीय अधिकारी पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कार्यों की प्रगति की दैनिक निगरानी हो तथा शासन स्तर पर नियमित रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के विकास की रूपरेखा पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में अधिकांश राजमार्ग और एक्सप्रेसवे पूर्व-पश्चिम दिशा में केंद्रित हैं, ऐसे में अब आवश्यकता है कि नेपाल सीमा से लेकर प्रदेश के दक्षिणी छोर तक फैले जिलों को जोड़ने वाला एक सुदृढ़ उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर तैयार किया जाए। इस उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में एनएचएआई का सहयोग लिया जाए और शेष मार्गों का निर्माण, सुदृढ़ीकरण तथा चौड़ीकरण राज्य स्तर पर कराया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां ग्रीनफील्ड रोड परियोजनाएं प्रस्तावित की जाएं।

मतदाता सूची में नाम जोड़ने का आह्वान: नवदीप रिणवा ने दिया संदेश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम), लखनऊ में उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों में प्रत्येक जनपद से एक सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं एक बूथ लेवल अधिकारी को निर्वाचक नामावली से संबंधित विधिक प्राविधानों, ईआरओ नेट, बीएलओ ऐप, विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण की प्रक्रियाओं के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।     मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर पात्र नागरिक का नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज हो, यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि निर्वाचक नामावली को त्रुटिरहित बनाये रखने के साथ समावेशी पंजीकरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। प्रशिक्षण में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों एवं बूथ लेवल अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम-1960, मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल-2023 में उल्लिखित विधिक दायित्वों, बीएलओ और सुपरवाइजरों के साथ समन्वय, निर्वाचक नामावली में दावे-आपत्तियों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, ईआरओ नेट और बीएलओ ऐप के तकनीकी पक्षों तथा फील्ड अनुश्रवण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।      मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण प्राप्त एईआरओ तथा बीएलओ मास्टर टेªनर के रूप में अपने-अपने विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में अपने समकक्ष एवं अधीनस्थ एईआरओ, बीएलओ और सुपरवाइजरों को भी छोटे-छोटे समूहों में प्रशिक्षित करें, ताकि प्रत्येक स्तर पर प्रक्रिया की गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने मतदाताओं की सुविधा हेतु मतदेय स्थलों में नए अनुभागों के गठन के संबंध में परीक्षण कराते हुए नियमानुसार कार्यवाही किये जाने के भी निर्देश दिए।     आगामी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के संबंध में अवगत कराते हुए विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के दृष्टिगत वर्ष 2003 की निर्वाचक नामावली को वर्ष 2025 की निर्वाचक नामावली के साथ मैपिंग किए जाने से संबंधित प्रक्रिया से अवगत कराया गया। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना-प्रपत्र वितरित करने, भरने में सहयोग करने/एकत्रित करने/मतदाता का सत्यापन तथा उसे बीएलओ ऐप पर अपलोड करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।      पूर्व में प्रदेश के 75 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं समस्त 403 विधानसभाओं के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को विभिन्न चरणांे में प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। आज के प्रशिक्षण सत्र के प्रत्येक जनपद में से एक एईआरओ तथा एक बीएलओ को मास्टर टेªनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जो अपने जनपद में अन्य समस्त एईआरओ तथा बीएलओ को प्रशिक्षण प्रदान करेगें। सम्पर्क सूत्रः सी0एल0 सिंह ——————-

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो से पहले 19 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में सीएम योगी की समीक्षा बैठक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी 19 सितंबर को ग्रेटर नोएडा दौरे पर आएंगे। वह इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने जा रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2025 की तैयारियों का समीक्षा बैठक के माध्यम से निरीक्षण करेंगे। बैठक में प्रदेश के सभी विभागों के प्रमुख सचिव, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। 25 सितंबर से शुरू होगा ट्रेड शो इंडिया एक्सपो सेंटर में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाला यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2025 प्रदेश का एक प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और व्यापारिक आयोजन है। इस बार यह ट्रेड शो अपने तीसरे संस्करण में प्रवेश कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस भव्य आयोजन का उद्घाटन कर सकते हैं। अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन आयोजन की तैयारियां पीएम के संभावित आगमन को ध्यान में रखते हुए की जा रही हैं। यदि प्रधानमंत्री का दौरा तय होता है तो मुख्यमंत्री 24 सितंबर को दोबारा ग्रेटर नोएडा आएंगे। 1500 से अधिक पुलिसकर्मियों पर रहेगी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बेहद चाक-चैबंद रखी जाएगी। सूत्रों के अनुसार 1500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। सुरक्षा बलों में डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी, निरीक्षक, उपनिरीक्षक और कांस्टेबल शामिल होंगे। 7 कंपनियां भी सुरक्षा ड्यूटी में लगाई जाएंगी। प्रधानमंत्री के हेलीकॉप्टर से आने की संभावना है, लेकिन सड़क मार्ग से आने के विकल्प को लेकर भी तैयारियां पूरी कर ली गई है।   सरकार और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद प्रदेश सरकार और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण साथ ही जिला प्रशासन इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। ट्रेड शो के दौरान देश-विदेश के हजारों उद्यमी, निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधि ग्रेटर नोएडा आएंगे जिसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही है।

परिवहन विभाग का फैसला: लाखों लोगों के पुराने चालान रद्द, मिलेगी बड़ी राहत

लखनऊ यूपी के परिवहन विभाग ने बड़ा फैसला करते हुए 2017 से 2021 के बीच काटे गए लाखों ई-चालान माफ कर दिए हैं। इससे सीधे तौर पर लाखों वाहन मालिकों को राहत मिली है। अब इन चालानों को पोर्टल पर “Disposed – Abated” (यदि मामला कोर्ट में लंबित था) और “Closed – Time-Bar” (यदि कार्यालय में लंबित था और समय-सीमा निकल चुकी है) की श्रेणी में दिखाया जाएगा। साथ ही इन चालानों से जुड़े फिटनेस, परमिट, वाहन ट्रांसफर और एचएसआरपी (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) जैसे अवरोध भी स्वतः हट जाएंगे। हालांकि, टैक्स से जुड़े चालान इस राहत के दायरे से बाहर रहेंगे। परिवहन विभाग के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच कुल 30, 52,090 ई-चालान काटे गए थे। इनमें से 12,93,013 लंबित थे जबकि 17,59, 077 पहले ही निस्तारित हो चुके हैं। इस निर्णय के बाद अब ये ई-चालान खुद ही निरस्त हो जाएंगे। इसके साथ ही एक महीने के भीतर सभी चालानों की स्थिति पोर्टल पर अपडेट कर दी जाएगी। जहां वाहन मालिक चालान का स्टेटस देख सकेंगे। ये करें वाहन मालिक – यदि आपका चालान 2017–2021 का है और पोर्टल पर अभी भी लंबित या कोई ब्लॉक दिखा रहा है, तो एक महीने बाद ई-चालान/परिवहन पोर्टल पर जाकर स्थिति जांचें। – अगर मामला कोर्ट में पेंडिंग था, तो “Disposed – Abated” दिखेगा और सभी अवरोध हट जाएंगे। – टैक्स वाले मामलों में यह राहत लागू नहीं होगी और वे केवल टैक्स कानून के तहत ही निस्तारित होंगे। – मदद के लिए हेल्पलाइन 149 या नजदीकी RTO/ARTO से संपर्क किया जा सकता है। इसलिए लिया गया यह निर्णय इस फैसले के तहत केवल उन्हीं चालानों को माफ किया जाएगा जो 31 दिसंबर 2021 तक कोर्ट में लंबित थे। वहीं, जो चालान कभी कोर्ट नहीं भेजे गए और अब समय-सीमा पार कर चुके हैं, उन्हें भी प्रशासनिक रूप से बंद किया जाएगा। टैक्स से जुड़े चालान, गंभीर अपराध, दुर्घटना या आईपीसी से जुड़े मामले इस राहत से बाहर रहेंगे। यह निर्णय कानून का पालन सुनिश्चित करने, जनता को अनावश्यक चालानों और ब्लॉकों से राहत देने, सेवाओं को समय पर उपलब्ध कराने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लिया गया है। हर हफ्ते डैशबोर्ड पर दिखेगी प्रगति रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर सभी पेंडिंग चालानों का पोर्टल पर निपटारा दिखेगा। इसके लिए हर हफ्ते एक डैशबोर्ड पर प्रगति रिपोर्ट डाली जाएगी। एनआईसी पोर्टल में जरूरी बदलाव कर रहा है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित रहे। टैक्स से जुड़ी देनदारियां, पहले से जमा जुर्माना और कोर्ट आदेश यथावत रहेंगे।

अयोध्या की दिवाली होगी इस बार अनोखी, गाय के गोबर से बने दीप करेंगे रोशनी

अयोध्या इस बार की अयोध्या की दीवाली एक अनोखे और ऐतिहासिक नजारे की साक्षी बनेगी. दरअसल, श्रीराम जन्मभूमि नगरी इस वर्ष 26 लाख दीपों की अद्वितीय रोशनी से जगमगाने वाली है. इन दीपों में सबसे खास रहेंगे जयपुर से आए पांच लाख गोमय दीपक. ये दीपक अपनी अनोखी संरचना और महक से पूरी रामनगरी को आध्यात्मिक और पर्यावरणीय ऊर्जा से आलोकित करेंगे. ये साधारण मिट्टी के दीपक नहीं, बल्कि गाय के गोबर और दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार किए गए खास दीपक हैं. इनमें गोबर के साथ जटामासी, अश्वगंधा, रीठा, देसी घी, काली हल्दी, मोरिंगा पाउडर, नीम, तुलसी और अन्य कई प्राकृतिक तत्वों का समावेश है. इन विशेष तत्वों की वजह से जब ये दीपक जलेंगे तो केवल रोशनी ही नहीं देंगे, बल्कि हवन सामग्री जैसी दिव्य सुगंध भी फैलाएंगे. महिलाओं की आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं ये दीपक जयपुर की पांच स्वैच्छिक सेवा संस्थाओं से जुड़ी लगभग 50 महिलाएं दिन-रात इन दीपकों के निर्माण में जुटी हुई हैं. टोंक रोड स्थित पिंजरापोल गौशाला के वैदिक पादप अनुसंधान केंद्र में रोजाना हजारों दीपक तैयार किए जाते हैं. माता रानी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं प्रतिदिन लगभग 5 हजार दीपक बनाती हैं. और इन्हें एक दीपक तैयार करने में सिर्फ डेढ़ मिनट का समय लगता है. यह काम महिलाओं को आजीविका और आत्मनिर्भरता दोनों दे रहा है. साथ ही ग्रामीण कारीगरों और गौशालाओं को भी जोड़ रहा है. गोमय दीपकों की खासियत इन दीपकों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये बेहद हल्के हैं और गिरने पर टूटते नहीं हैं. यह एक बार इस्तेमाल होने वाले दीपक नहीं हैं, बल्कि इन्हें कई बार जलाया जा सकता है. जलने के बाद इन्हें मिट्टी या पौधों के पास डाल दिया जाए तो ये उर्वरक (फर्टिलाइजर) की तरह काम करते हैं. इस प्रकार ये दीपक न केवल रोशनी और सुगंध देंगे बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, बल्कि उसे पोषण देंगे. यह प्रयोग भारतीय परंपराओं में वर्णित “पंचगव्य” की भावना को दर्शाता है, जो यह संदेश देता है कि आधुनिक युग में भी स्वदेशी और पर्यावरण-संरक्षण आधारित नवाचारों को अपनाया जा सकता है. जब 3 अक्टूबर को जब पांच लाख गोमय दीपक अयोध्या में जलेंगे, तो वह दृश्य न सिर्फ दिव्य और भव्य होगा, बल्कि यह दर्शाएगा कि भारतीय संस्कृति किस तरह विज्ञान, प्रकृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है. महिलाओं की मेहनत, स्वदेशी सामग्रियों का उपयोग और पर्यावरण के प्रति यह सजगता मिलकर इस बार की “अयोध्या दीपावली” को एक नई पहचान और ऊंचाई देने जा रही है. यह पहल साबित करती है कि यदि हम चाहें तो पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक सोच को जोड़कर त्योहारों को और भी अर्थपूर्ण और प्रेरक बना सकते हैं.

ऊर्जा क्षेत्र में ओबरा की वापसी, 2320 मेगावाट उत्पादन के साथ फिर बना ‘पावर किंग’

ओबरा यूपी में ऊर्जा के क्षेत्र में ओबरा तापीय परियोजना का स्वर्णिम इतिहास रहा है। परियोजना के स्थापना के बाद यहां स्थापित तापीय बिजली इकाईयों से होने वाले उत्पादन से सूबे के कई हिस्से रोशन हुए।धीरे-धीरे इसकी क्षमता में वृद्धि होने के बाद इसका नाम देश के पटल पर भी जाना पहचाना जाने लगा। यह यूपी की पुरानी बिजली परियोजनाओं में शामिल है। जिससे निर्माण के इतने वर्षों बाद आज भी यहां की पुरानी इकाईयों से बदस्तूर उत्पादन जारी है। हालांकि ओबरा डैम के संकुल में स्थापित इस परियोजना के आसपास नई परियोजनाओं को लगाने के लिए आज भी अनुकूल व पर्याप्त जगह होने के साथ ही उससे जुड़े सभी संसाधन भी उपलब्ध होने के कारण इसके विस्तारीकरण पर भी काफी काम किया गया। जिसके फलस्वरूप इस परियोजना के विस्तार के रूप में ओबरा ''''सी'''' तापीय परियोजना ने अपना मुकाम हासिल कर उत्पादन के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 60 के दशक में वजूद में आया था ओबरा तापीय परियोजना 60 के दशक में वजूद में आये ओबरा तापीय परियोजना की 50 मेगावाट क्षमता की पांच इकाइयों का निर्माण कार्य शुरू हुआ। परियोजना की पहली इकाई से 15 अगस्त 1968 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। इसके अलावा दूसरी इकाई से 11 मार्च 1968 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। इसके बाद तीसरी इकाई से 13 अक्टूबर 1968, चौथी इकाई से 16 जुलाई 1969 और पांचवी इकाई से लगभग दो साल बाद 30 जुलाई 1971 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। जिसके बाद ओबरा तापीय परियोजना का नाम देश के पटल पर जाने जाना लगा। इसके बाद तापीय परियोजना का विस्तार करते हुए 70 के दशक में ओबरा तापीय परियोजना में 100 मेगावाट क्षमता वाली तीन इकाइयों का निर्माण हुआ। जिनमें 100 मेगावाट वाली छठवीं इकाई से चार अक्टूबर 1973 को कामर्शियल उत्पादन शुरू कर उसे ग्रिड से जोड़ा गया। सातवीं से 14 दिसम्बर 1974 और आठवीं से एक जनवरी 1976 को कामर्शियल उत्पादन शुरू कर एक स्वर्णिम इतिहास लिखा गया। 1979 से 82 तक 200 मेगावाट की पांच इकाई का निर्माण प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ती गयी ओबरा तापीय परियोजना का विस्तार होता रहा है। पानी और कोयला उपलब्ध होने पर 1979 से लेकर 1982 के बीच 200 मेगावाट वाली पांच इकाइयों का निर्माण हुआ। जिसके बाद ओबरा तापीय परियोजना देश की सबसे बड़ी परियोजना में शुमार हो गया। लेकिन समय के साथ 50 मेगावाट की पांच इकाइयों और 100 मेगावाट की तीन इकाइयों का समय सीमा पूरी होने के बाद इन इकाइयों को उत्पादन से बाहर कर दिया गया। सरकार ने 1320 मेगावाट वाली ओबरा सी परियोजना की घोषणा की। जिसके बाद दिसंबर 2016 में ओबरा सी परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ। जिसका नौ फरवरी 2024 को सीओडी प्रक्रिया पूरी कर कामर्शियल उत्पादन पर ले लिया गया। पहली इकाई से उत्पादन शुरू होने के उपरान्त प्रबंधन ने दूसरी इकाई से भी जल्द से जल्द उत्पादन शुरू करने के लिए निर्माण कार्य में तेजी लाना शुरू कर दिया। जिसके परिणाम स्वरुप अगले 16 महीनों बाद 16 जून 2025 को दूसरी इकाई की सीओडी प्रक्रिया पूरी कर उक्त इकाई से कार्शियल उत्पादन शुरू कर दिया गया। परियोजना के एटीपीएस में आठ इकाइयां हो चुकीं हैं डिस्मेंटल 60 से लेकर 70 के दशक के बीच लगी परियोजना की 50 मेगावाट क्षमता वाली पांच इकाईयां और 100 मेगावाट क्षमता वाली तीन इकाईयां अपनी परिचालन की समय से सीमा से अधिक समय तक उत्पादन करतीं रहीं। एक समय ऐसा आया कि यह इकाईयां काफी पुरानी होने की वजह से इनसे होने वाला उत्पादन अपेक्षा से अधिक महंगा होने की वजह से इन इकाईयों को पूरी तरह से बंद करने के निर्णय लिया गया। जिसके बाद इन इकाईयों को बंद करने के साथ ही प्रबंधन ने उसे पूरी तरह से डिस्मेंटल करने का निर्णय लिया। जिसके लिए निविदा प्रक्रिया को पूरा कर प्रबंधन ने सभी आठों इकाईयों को पूरी तरह से डिस्मेंटल करा दिया। लेकिन इन सबके बावजूद 70 से लेकर 80 के दशक के बीच लगाई गयीं 200 मेगावाट क्षमता वाली पांच इकाईयों से आज भी निरंतर उत्पादन जारी है। साथ ही ओबरा सी परियोजना की दोनों इकाईयों से कामर्शियल उत्पादन शुरू होने के पश्चात परियोजना की क्षमता बढ़कर 2320 मेगावाट हो गयी है।  

निर्वाचक नामावली को त्रुटिरहित बनाये रखने के साथ समावेशी पंजीकरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक: मुख्य निर्वाचन अधिकारी

लखनऊ  आज उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम), लखनऊ में उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों में प्रत्येक जनपद से एक सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं एक बूथ लेवल अधिकारी को निर्वाचक नामावली से संबंधित विधिक प्राविधानों, ईआरओ नेट, बीएलओ ऐप, विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण की प्रक्रियाओं के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।     मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर पात्र नागरिक का नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज हो, यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि निर्वाचक नामावली को त्रुटिरहित बनाये रखने के साथ समावेशी पंजीकरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। प्रशिक्षण में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों एवं बूथ लेवल अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम-1960, मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल-2023 में उल्लिखित विधिक दायित्वों, बीएलओ और सुपरवाइजरों के साथ समन्वय, निर्वाचक नामावली में दावे-आपत्तियों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, ईआरओ नेट और बीएलओ ऐप के तकनीकी पक्षों तथा फील्ड अनुश्रवण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।      मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण प्राप्त एईआरओ तथा बीएलओ मास्टर टेªनर के रूप में अपने-अपने विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में अपने समकक्ष एवं अधीनस्थ एईआरओ, बीएलओ और सुपरवाइजरों को भी छोटे-छोटे समूहों में प्रशिक्षित करें, ताकि प्रत्येक स्तर पर प्रक्रिया की गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने मतदाताओं की सुविधा हेतु मतदेय स्थलों में नए अनुभागों के गठन के संबंध में परीक्षण कराते हुए नियमानुसार कार्यवाही किये जाने के भी निर्देश दिए।     आगामी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के संबंध में अवगत कराते हुए विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के दृष्टिगत वर्ष 2003 की निर्वाचक नामावली को वर्ष 2025 की निर्वाचक नामावली के साथ मैपिंग किए जाने से संबंधित प्रक्रिया से अवगत कराया गया। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना-प्रपत्र वितरित करने, भरने में सहयोग करने/एकत्रित करने/मतदाता का सत्यापन तथा उसे बीएलओ ऐप पर अपलोड करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।      पूर्व में प्रदेश के 75 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं समस्त 403 विधानसभाओं के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को विभिन्न चरणांे में प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। आज के प्रशिक्षण सत्र के प्रत्येक जनपद में से एक एईआरओ तथा एक बीएलओ को मास्टर टेªनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जो अपने जनपद में अन्य समस्त एईआरओ तथा बीएलओ को प्रशिक्षण प्रदान करेगें।