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यूपी पंचायत चुनाव से पहले इटियाथोक को नगर पंचायत बनाने की प्रक्रिया तेज

गोंडा  यूपी के गोंडा जिले में इटियाथोक कस्बे को फिर नगर पंचायत का दर्जा देने की कवायद शुरू हुई है। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने इटियाथोक को नगर पंचायत का दर्जा देने लिए इटियाथोक ब्लॉक को पत्र भेजकर सूचना मांगी गई है। डीएम के निर्देश पर ब्लॉक कार्यालय में इस सबंध में तेजी देखने को मिली है। सूत्रों की माने तो इटियाथोक को केन्द्र मानकर ग्राम पंचायत हरैया झूमन, तेलियानी कानूनगो, करुवापारा, आंशिक पारासराय सहित अन्य ग्राम पंचायतों को शामिल किया जा सकता है। इस संबंध में खण्ड विकास अधिकारी विजय कुमार मिश्रा ने बताया जिलास्तर से मांगी गई रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है। तहसील स्तर से भी नक्शा बनाने की भी प्रकिया शुरू हो चुकी है। बीडीओ ने बताया इटियाथोक को केन्द्र मानकर उसके परिधि में आने वाले अगल-बगल की ग्राम पंचायतों को इसमें शामिल किया जायेगा ताकि आबादी का मानक पूरा हो सके। नगर पंचायत का दर्जा मिलने के लिए आबादी 20 हजार होनी चाहिए। इटियाथोक नगर पंचायत गठन के लिए काफी दिनों से मांग चल रही थी। दो वर्ष बाद जिलास्तर से दूसरी बार शासन को प्रस्ताव भेजने की कवायद शुरू हुई है। तत्कालीन डीएम डॉ उज्जवल कुमार ने शासन को इटियाथोक, तरबगंज, धानेपुर और बेलसर को नगर पंचायत का दर्जा देने लिए प्रस्ताव भेजा गया था। नगरीय दर्जा पाने का मानक पूरा करता है इटियाथोक गोण्डा-बलरामपुर मार्ग पर स्थित कस्बा इटियाथोक नगरीय दर्जा पाने के लिए कई मानक पूरे करता है। कस्बे में रेलवे स्टेशन, विकास खण्ड कार्यालय, पशु चिकित्सालय, सीएचसी, कोतवाली, आंगनबाड़ी कार्यालय, कृषि विभाग, दो डिग्री कॉलेज, आधा दर्जन से अधिक इण्टर कालेज संचालित है। यहां की आबादी भी करीब 20 हजार के आसपास है।

बरेली हादसा: तेज रफ्तार ट्रक ने ऑटो को मारी टक्कर, महिला व बच्चा मृत, मां समेत तीन घायल

बरेली बरेली के फरीदपुर थाना क्षेत्र में नवादावन गांव के समीप गलत दिशा से आ रही कार से बचने के लिए चालक ने अपना ऑटो को बचाया, तभी पीछे से आ रहे ट्रक की टक्कर लगने से ऑटो आगे वाले ट्रक में जा घुसा। हादसे में ऑटो चालक की पत्नी और मासूम बेटे की मौत हो गई। तीन लोग गंभीर घायल हुए हैं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जानकारी के मुताबिक शाहजहांपुर के कटरा थाना क्षेत्र के गांव कपूर नगला निवासी जसवीर ऑटो चलाते हैं। उनकी बहन के घर ढकिया तिवारी गांव में शनिवार को बच्चे का नामकरण कार्यक्रम है। जिसमें छोछक (एक रस्म) ले जाने के लिए जसवीर अपने गांव से फरीदपुर कपड़े खरीदने आ रहे थे। ऑटो में वह उनकी मां रामसनेही, पत्नी पिंकी (24 वर्ष), बेटा राघव (एक वर्ष) सवार थे। उन्होंने रास्ते में खुदागंज से दो अन्य सवारियां बैठा लीं।   नवादावन गांव के समीप हुआ हादसा नेशनल हाईवे पर फरीदपुर थाना क्षेत्र के नवादावन गांव के समीप गलत दिशा से कार आ रही थी। जसवीर ने कार से बचने के लिए ऑटो बचाया। इसी दौरान पीछे से आए ट्रक ने ऑटो को टक्कर मार दी। जिससे ऑटो आगे चल रहे ट्रक से जा टकराया। हादसे में जसवीर की पत्नी पिंकी और बेटे राघव की मौत मौके पर ही हो गई। मां रामसनेही समेत अन्य दो सवारियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे के बाद दोनों ट्रक व कार चालक मौके से फरार हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को निजी एंबुलेंस से अस्पताल भिजवाया। मृतकों के शवों का पंचनामाभर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ऑटो चालक जसवीर को मामूली चोट आई है। हादसे में पत्नी-बेटे की मौत से उसका रो-रोकर बुरा हाल है।  

बीजेपी कार्यकर्ता की निर्मम हत्या: हमलावरों ने मारीं 8 गोलियां, चेहरा छलनी

अलीगढ़ तालानगरी क्षेत्र के गांव कोंडरा निवासी पेशे से प्रॉपर्टी डीलर तथा भाजपा कार्यकर्ता की गांव 200 मीटर आगे निकलते ही ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। हत्यारे मृतक के खास परिचित थे जिन्होंने हत्या से पूर्व कई मिनट तक बातचीत की थी। परिजन शव को लेकर अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एसएसपी ने घटना स्थल का निरीक्षण कर थाना पुलिस समेत एसओजी की आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं। कोंडरा गांव निवासी 45 वर्षीय सोनू चौधरी पुत्र सरदार सिंह प्रॉपर्टी डीलर का काम करते थे साथ ही भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे। इनके बड़े भाई देवेंद्र चौधरी ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे वह अपनी क्रेटा कार लेकर घर से अकेले निकले थे, गांव से करीब 200 मीटर आगे निकलते ही बाइक सवार दो लोगों ने मृतक सोनू को रोक लिया, एक अंदर जाकर सोनू की बगल वाली सीट पर बैठ गया जबकि दूसरा ड्राइवर साइड में खड़ा रहा। इस दौरान मृतक का पारिवारिक भतीजा सुमित वहां से गुजरा जिसने दोनों को देखा और सामान्य बातचीत समझकर गांव की ओर बढ़ गया। वहीं, कुछ देर बाद ही मौका देखकर बाहर खड़े व्यक्ति ने सोनू को निशाना बनाकर चार गोलियां दाग दी, साथ ही अंदर बैठे हमलावर ने भी करीब 7-9 गोलियां दागी और बाहर निकलकर बाइक लेकर फरार हो गए। इधर, गोलियों की तड़तड़ाहट सुनकर निकटवर्ती लोग घटना स्थल की ओर दौड़े, पहचानकर सोनू के घर सूचना दी। आनन-फानन में परिजन निजी वाहन से मृतक सोनू को लेकर क्वार्सी क्षेत्र के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने सोनू को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने फील्ड यूनिट की टीम को मौके पर बुला लिया तथा साक्ष्य संकलित कराए। एसएसपी संजीव सुमन भी मौके पर पहुंचे तथा लगभग आधा घंटे तक जानकारी लेने व कार का परीक्षण करने के बाद थाना पुलिस समेत एसओजी की टीम को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।  घटना स्थल पर पुलिस कारवाई के दौरान मृतक के सबसे बड़े भाई देवेंद्र चौधरी मौजूद रहे लेकिन हत्याकांड की वजह को लेकर वह कुछ बता नहीं सके। गांव के सीसीटीवी कैमरे खंगालने में जुटी पुलिस… घटना के बाद मौके पर पहुंचे एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि घटना के बाद गोलियों की आवाज सुनकर जब वह कार की ओर गया तो देखा दो लोग बाइक लेकर गांव की ओर भाग रहे थे। इस जानकारी के आधार पर पुलिस की एक टीम गांव में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगालकर घटना की जांच पड़ताल में जुट गई है। हत्याकांड में किसी खास परिचित का हाथ मान रहा परिवार… जिस तरह से सोनू की हत्या की गई उस परिस्थिति को देखकर परिवारीजन हत्याकांड में किसी खास परिचित की भूमिका मान रहे हैं। गांव से कुछ दूरी पर ही बाइक सवार युवक को मृतक सोनू ने कार में बैठाया, कार को न्यूटल (बिना गियर के) में खड़ा करके गाड़ी और एसी भी चालू रखा, जबकि सोनू काफी तेज तर्रार था। यदि कोई अपरिचित हत्यारा होता तो शायद वह उसे कार में नहीं बैठाता। हालांकि, घटना के पीछे किसी से पुरानी रंजिश को परिवार फिलहाल नहीं मान रहा है। बाकी पुलिस को भी तहरीर का इंतजार है।

ऊर्जा विभाग की कार्यशैली पर मंथन, सीएम योगी करेंगे बिजली कटौती की समीक्षा

लखनऊ राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग की बैठक बुलाई है। वह अपने आवास पर दोपहर 3:30 बजे ऊर्जा विभाग की समीक्षा करेंगे। बैठक में विभाग के सभी बड़े अधिकारी बुलाए गए हैं। सीएम को बिजली कटौती की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसको लेकर वह समीक्षा करेंगे। बताते चलें कि एक दिन पहले ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का एक वीडियो सामने आया था, इसमें वह बिजली विभाग के अफसरों से नाराज दिख रहे हैं। दरअसल, प्रदेश में बिजली कटौती की समस्या कम होते नहीं दिख रही है।

रामपुर: कांवड़ खंडित होने पर बवाल, स्टेशन के पास रास्ता जाम

 मुरादाबाद हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे रामपुर मिलक के भक्तों की कांवड़ एक बस से टक्कर लगने के बाद खंडित हो गई। मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के पास हुई इस घटना के बाद आक्रोशित कांवड़ियों ने सड़क पर जाम लगा दिया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइंस और थाना कटघर की पुलिस माैके पर पहुंची। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कांवड़ियों को शांत कराया और उन्हें समझा-बुझाकर जाम खुलवाया। स्थिति को नियंत्रण में लेने के बाद पुलिस ने कांवड़ियों को दूसरी बस की व्यवस्था कर आगे रवाना कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है। कांवड़ियों की आवाजाही लगातार जारी है।

नई गाइडलाइन से बदलेगा सामाजिक ढांचा: धर्मांतरण और फिजूल खर्च पर कड़ा रुख

वाराणसी काशी विद्वत परिषद ने हिंदू परंपराओं और सामाजिक व्यवहार में सुधार के लिए एक नई हिंदू आचार संहिता जारी की है। 400 पन्नों के इस दस्तावेज को देश भर के विद्वानों, शंकराचार्यों, महामंडलेश्वरों और संतों के साथ लंबे विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। नई संहिता में दहेज पर पूर्ण प्रतिबंध, शादियों में फिजूलखर्ची पर रोक और दिन में वैदिक तरीके से विवाह करने की सलाह दी गई है। ब्रह्मभोज में शामिल होंगे केवल 13 लोग अंतिम संस्कार के बाद होने वाले भोज में केवल 13 लोगों को शामिल करने की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही प्री-वेडिंग शूट और सगाई जैसी आधुनिक प्रथाओं को भी हतोत्साहित किया गया है। संहिता में हिंदू धर्म में वापसी की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। जिन लोगों ने किसी दबाव में धर्म परिवर्तन कर लिया था, वे लोग अपने गोत्र और नाम सहित हिंदू धर्म में वापस लौट सकेंगे। इसके साथ ही मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए मंदिरों के गर्भगृह में केवल पुजारियों और संतों के प्रवेश की अनुमति होगी। अक्तूबर 2025 में आधिकारिक तौर पर होगी लागू काशी विद्वत परिषद के महासचिव राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि इस संहिता को 70 विद्वानों द्वारा विकसित किया गया है। ये विद्वान 11 टीमों और तीन उप-टीमों में विभाजित थे। प्रत्येक टीम में उत्तरी और दक्षिणी भारत के पांच विद्वान शामिल थे। संहिता को अंतिम रूप देने के लिए 40 से ज्यादा बैठकें आयोजित की गईं। उन्होंने बताया कि इस संहिता की 5 लाख प्रतियां पूरे देश में बांटी जाएंगी। इस संहिता को तैयार करने में मनुस्मृति, पराशर स्मृति, देवल स्मृति के साथ-साथ गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों के अंशों को शामिल किया गया है। अक्टूबर 2025 में शंकराचार्यों, रामानुजाचार्यों और प्रमुख संतों की स्वीकृति के बाद इस संहिता को आधिकारिक तौर पर लागू किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में कृषि श्रमिकों को मिलेगा नियमित भत्ता, सरकार देगी ₹6552 प्रति माह

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कृषि श्रमिकों को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया है. राज्य सरकार ने कृषि से जुड़े श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा. अब कृषि श्रमिकों को प्रतिदिन 252 रुपये या मासिक 6552 रुपये का वेतन मिलेगा. सरकार के इस फैसले की खास बात यह है कि अब पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन जैसे कार्यों को भी कृषि श्रम की कैटेगरी में रखा गया है. इससे ऐसे श्रमिकों को भी न्यूनतम मजदूरी के तहत सुरक्षा और लाभ मिल सकेगा, जो पहले असंगठित क्षेत्र में आते थे. मजदूरी का भुगतान अब सिर्फ कैश तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल माध्यम में भी मजदूरी भुगतान करने का फैसला लिया है. इससे लेनदेन पारदर्शी होगा और श्रमिकों को समय पर मजदूरी मिल सकेगी. अब श्रमिकों को प्रति घंटे के हिसाब से भी न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी. यह व्यवस्था खास तौर से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो पूरे दिन की बजाय कुछ घंटों के लिए काम करते हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो श्रमिक पहले से इस नई दर से अधिक मजदूरी पा रहे हैं, उन्हें उनका पुराना लाभ मिलता रहेगा. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल सरकार का मानना है कि इस ऐतिहासिक फैसले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. सरकार ने इसे सिर्फ आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि श्रमिकों को सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने वाला कदम बताया है. प्रदेशभर में सभी प्रकार की खेती, बागवानी, सिंचाई, फसल कटाई और कृषि सहायक कार्यों पर ये नई मजदूरी दरें लागू होंगी. माना जा रहा है कि यह फैसला श्रमिकों के कल्याण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा.

भयानक सड़क हादसा: आमने-सामने टकराए ट्रक, चालक व खलासी की मौके पर ही मौत

भदोही भदोही जिले के ऊंज थाना क्षेत्र के नवधन गांव के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो ट्रकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे में एक ट्रक चालक और खलासी की मौत हो गई। इससे दक्षिणी लेन पर जाम लग गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से वाहनों को हटाकर जाम खुलवाया। दोनों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सावन के कारण हाईवे का उत्तरी लेन कावड़ियों के लिए आरक्षित किया गया है। दक्षिणी लेन से वाहनों का आवागमन हो रहा है। बृहस्पतिवार की देर रात विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक आपस में टकरा गए। इसमें चालक इंद्रजीत नट पुत्र महेंद्र नाथ (40) निवासी ग्राम भभौरा चकिया चंदौली तथा खलासी देवेंद्र यादव (45) पुत्र श्याम बिहारी निवासी मंगला विहार कॉलोनी कानपुर की मौत हो गई। एक ट्रक पर बैटरी तो दूसरे में प्याज लदा हुआ था। टक्कर इतनी तेज थी कि एक ट्रक का अगला हिस्सा ही ध्वस्त हो गया। दूसरे ट्रक का चालक और खलासी फरार हो गए। घटना के बाद हाईवे पर जाम लग गया। सूचना पर मौके पर पहुंचकर क्षेत्राधिकार ज्ञानपुर प्रभारी निरीक्षक ऊंज रमाकांत यादव ने जाम को हटाया और दोनों शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिए हैं।    

लव-जिहाद का संगठित खेल? पूछताछ में सामने आया युवतियों को फंसाने और धर्म बदलवाने का बड़ा राज

 आगरा आगरा में अवैध धर्मांतरण गिरोह के गंदे खेल की परतें दिन व दिन खुलती जा रही हैं। पुलिस ने दिल्ली के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के दो बेटों अब्दुल्ला, अब्दुल रहीम और रोहतक की दलित युवती से जबरन निकाह करने वाले जुनैद को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरोह ने न जाने कितनी युवतियों की जिंदगी को बर्बाद कर दिया। अब सवाल ये भी उठता है कि आखिर ये गिरोह युवतियों को जाल में फंसाता कैसे है। आइये बताते हैं पूरी कहानी…  अवैध धर्मांतरण गिरोह के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान का पूरा परिवार ही इस घिनौने खेल का हिस्सा है। अब्दुल रहमान की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी भी सामने आई थी। वह धर्मांतरण के लिए युवतियों को लेकर आने की बात कर रही थी। उसका एक वीडियो वायरल हुआ था। पुलिस ने आरोपी अब्दुल रहमान के घर दोबारा दबिश दी थी मगर उसकी पत्नी नहीं मिली। वह लापता हो गई।  एसबी कृष्णा ने किया खुलासा  गोवा की रहने वाली एसबी कृष्णा भी इस्लाम कबूल कर आयशा बनी थी। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि वह पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थी। तभी कश्मीरी छात्राओं ने उसे जाल में फंसाया। शबा नाम की छात्रा उसे कश्मीरी लेकर गई थी। परिजन ने दिल्ली में अपहरण का केस दर्ज करा दिया। वह कश्मीर में रह रही थी। वह पांच बार की नमाज पढ़ा करती थी। स्थानीय लोग भी नमाज पढ़ने आते थे। फिर करने लगी ये काम  मगर, उसके साथ वो व्यवहार नहीं होता था जो स्थानीय लोगों से किया जाता था। इस दाैरान उसे जिस घर में रखा गया था, वहां काम भी कराया जाता था। दो महीने बाद उसका मन वापस आने के लिए हुआ। तब वह दिल्ली आ गई। मगर, उसके मित्र मुस्तफा को जेल भेज दिया गया। वह धर्मांतरण कर चुकी थी इसलिए एक बार फिर गिरोह के संपर्क में आ गई। उसे कोलकाता बुला लिया गया। इसके बाद वह धर्मांतरण के लिए आने वाले लोगों के लिए रुपये मुहैया कराने का काम करने लगी। बंधक बनाकर रखी गई थी युवती  पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के घर से रोहतक की युवती को बरामद किया। वह बंधक बनाकर रखी गई थी। उसका धर्मांतरण और निकाह भी कराया गया था। उसने भी पुलिस को कई अहम जानकारियां दीं। बताया कि उसे मुस्लिम धर्म के बारे में बताया गया। फिर धर्म परिवर्तन कराया गया। उसकी मदद की गई। उसे रुपयों से लेकर आवास तक दिया गया। बाद में वह धोखे का शिकार हो गई। जिस जुनैद नाम के युवक ने दोस्ती की थी। उसने पहले ही शादी कर ली थी। इसके बावजूद वो उसे अपने साथ रखना चाहता था। बाद में तलाक दे दिया। तब उसे अब्दुल रहमान ने रख लिया। गिरोह का है चरणबद्ध तरीका 1- पुलिस की पूछताछ में पता चला कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों के शिक्षण संस्थान में फैले हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में युवतियां भी शामिल हैं। वह छात्राओं को फंसाने का काम करती हैं। वह मिलकर और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें इस्लाम धर्म के बारे में बताती हैं। अपने धर्म से अलग और सहूलियत के बारे बताया जाता है। जन्नत में जाने का रास्ता दिखलाया जाता है। संसार में सबके एक सामान होने की बात कही जाती थी। इससे प्रभावित होकर ही लोग जाल में फंस जाते थे। 2- एक बार किसी के राजी होने पर धन भी उपलब्ध कराया जाता था। बताया जाता था कि उनकी मदद की जाएगी। रहने और खाने की दिक्कत नहीं होगी। काम भी मिलता रहेगा। बताया जाता था कि किसी तरह की समस्या होने पर धर्म के लोग आपकी मदद करेंगे। सदर की सगी बहनों को भी दिल्ली ले जाने के बाद रुपये दिए गए थे। कोलकाता में कमरा भी दिलाया गया था। गिरोह के सदस्य उनके धर्मांतरण और निकाह से संबंधित कागजात भी तैयार करा रहे थे।   3- धर्मांतरण होने के बाद युवतियों को बुर्के में रखा जाता था। उनसे पांच बार की नमाज अदा कराई जाती थी। इस दाैरान उन्हें धार्मिक पुस्तकें भी पढ़वाई जाती थी, जिससे वो अपनी आस्था को कम नहीं कर सकें। सदर की एक युवती को इतना प्रभावित किया गया था वह मुजाहिद बनने के लिए भी तैयार हो गई थी। वह हथियार हाथ में लेना चाहती थी। सारे दस्तावेज बनने के बाद अगर, कोई वापस भी जाना चाहता है, तो वह नहीं जा सकता। खासकर युवतियों का घर वापसी करना आसान नहीं होता है। 4- धर्मांतरण और निकाह होने के बाद युवतियों को धोखा मिलता था। उन्हें अपना तो लिया जाता था लेकिन अपनों जैसा व्यवहार नहीं होता था। धर्मांतरण से पहले आवास और धन दिया जाता था, मगर हर तरफ से जाल में फंसने के बाद ऐसा कुछ नहीं होता था। ऐसे में निकाह करने वाली युवतियां का वापस जा पाना भी आसान नहीं होता था। वह गिरोह से जुड़ी होने के कारण पुलिस से भी मदद नहीं मांग पाती थीं।  

लव-जिहाद का संगठित खेल? पूछताछ में सामने आया युवतियों को फंसाने और धर्म बदलवाने का बड़ा राज

 आगरा आगरा में अवैध धर्मांतरण गिरोह के गंदे खेल की परतें दिन व दिन खुलती जा रही हैं। पुलिस ने दिल्ली के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के दो बेटों अब्दुल्ला, अब्दुल रहीम और रोहतक की दलित युवती से जबरन निकाह करने वाले जुनैद को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरोह ने न जाने कितनी युवतियों की जिंदगी को बर्बाद कर दिया। अब सवाल ये भी उठता है कि आखिर ये गिरोह युवतियों को जाल में फंसाता कैसे है। आइये बताते हैं पूरी कहानी…  अवैध धर्मांतरण गिरोह के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान का पूरा परिवार ही इस घिनौने खेल का हिस्सा है। अब्दुल रहमान की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी भी सामने आई थी। वह धर्मांतरण के लिए युवतियों को लेकर आने की बात कर रही थी। उसका एक वीडियो वायरल हुआ था। पुलिस ने आरोपी अब्दुल रहमान के घर दोबारा दबिश दी थी मगर उसकी पत्नी नहीं मिली। वह लापता हो गई।  एसबी कृष्णा ने किया खुलासा  गोवा की रहने वाली एसबी कृष्णा भी इस्लाम कबूल कर आयशा बनी थी। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि वह पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थी। तभी कश्मीरी छात्राओं ने उसे जाल में फंसाया। शबा नाम की छात्रा उसे कश्मीरी लेकर गई थी। परिजन ने दिल्ली में अपहरण का केस दर्ज करा दिया। वह कश्मीर में रह रही थी। वह पांच बार की नमाज पढ़ा करती थी। स्थानीय लोग भी नमाज पढ़ने आते थे। फिर करने लगी ये काम  मगर, उसके साथ वो व्यवहार नहीं होता था जो स्थानीय लोगों से किया जाता था। इस दाैरान उसे जिस घर में रखा गया था, वहां काम भी कराया जाता था। दो महीने बाद उसका मन वापस आने के लिए हुआ। तब वह दिल्ली आ गई। मगर, उसके मित्र मुस्तफा को जेल भेज दिया गया। वह धर्मांतरण कर चुकी थी इसलिए एक बार फिर गिरोह के संपर्क में आ गई। उसे कोलकाता बुला लिया गया। इसके बाद वह धर्मांतरण के लिए आने वाले लोगों के लिए रुपये मुहैया कराने का काम करने लगी। बंधक बनाकर रखी गई थी युवती  पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के घर से रोहतक की युवती को बरामद किया। वह बंधक बनाकर रखी गई थी। उसका धर्मांतरण और निकाह भी कराया गया था। उसने भी पुलिस को कई अहम जानकारियां दीं। बताया कि उसे मुस्लिम धर्म के बारे में बताया गया। फिर धर्म परिवर्तन कराया गया। उसकी मदद की गई। उसे रुपयों से लेकर आवास तक दिया गया। बाद में वह धोखे का शिकार हो गई। जिस जुनैद नाम के युवक ने दोस्ती की थी। उसने पहले ही शादी कर ली थी। इसके बावजूद वो उसे अपने साथ रखना चाहता था। बाद में तलाक दे दिया। तब उसे अब्दुल रहमान ने रख लिया। गिरोह का है चरणबद्ध तरीका 1- पुलिस की पूछताछ में पता चला कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों के शिक्षण संस्थान में फैले हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में युवतियां भी शामिल हैं। वह छात्राओं को फंसाने का काम करती हैं। वह मिलकर और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें इस्लाम धर्म के बारे में बताती हैं। अपने धर्म से अलग और सहूलियत के बारे बताया जाता है। जन्नत में जाने का रास्ता दिखलाया जाता है। संसार में सबके एक सामान होने की बात कही जाती थी। इससे प्रभावित होकर ही लोग जाल में फंस जाते थे। 2- एक बार किसी के राजी होने पर धन भी उपलब्ध कराया जाता था। बताया जाता था कि उनकी मदद की जाएगी। रहने और खाने की दिक्कत नहीं होगी। काम भी मिलता रहेगा। बताया जाता था कि किसी तरह की समस्या होने पर धर्म के लोग आपकी मदद करेंगे। सदर की सगी बहनों को भी दिल्ली ले जाने के बाद रुपये दिए गए थे। कोलकाता में कमरा भी दिलाया गया था। गिरोह के सदस्य उनके धर्मांतरण और निकाह से संबंधित कागजात भी तैयार करा रहे थे।   3- धर्मांतरण होने के बाद युवतियों को बुर्के में रखा जाता था। उनसे पांच बार की नमाज अदा कराई जाती थी। इस दाैरान उन्हें धार्मिक पुस्तकें भी पढ़वाई जाती थी, जिससे वो अपनी आस्था को कम नहीं कर सकें। सदर की एक युवती को इतना प्रभावित किया गया था वह मुजाहिद बनने के लिए भी तैयार हो गई थी। वह हथियार हाथ में लेना चाहती थी। सारे दस्तावेज बनने के बाद अगर, कोई वापस भी जाना चाहता है, तो वह नहीं जा सकता। खासकर युवतियों का घर वापसी करना आसान नहीं होता है। 4- धर्मांतरण और निकाह होने के बाद युवतियों को धोखा मिलता था। उन्हें अपना तो लिया जाता था लेकिन अपनों जैसा व्यवहार नहीं होता था। धर्मांतरण से पहले आवास और धन दिया जाता था, मगर हर तरफ से जाल में फंसने के बाद ऐसा कुछ नहीं होता था। ऐसे में निकाह करने वाली युवतियां का वापस जा पाना भी आसान नहीं होता था। वह गिरोह से जुड़ी होने के कारण पुलिस से भी मदद नहीं मांग पाती थीं।