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ओबीसी छात्रों के लिए वरदान बनी पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना, 8.8 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला लाभ

योगी सरकार की छात्रवृत्ति योजना से लाखों छात्रों को मिला सहारा, प्रयागराज रहा प्रदेश में अव्वल ओबीसी छात्रों के लिए वरदान बनी पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना, 8.8 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला लाभ आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर और कुशीनगर भी टॉप-5 जिलों में शामिल कक्षा 9 और 10 के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिल रही सीधी वित्तीय सहायता पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था से सीधे बैंक खातों में पहुंच रही छात्रवृत्ति राशि लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। सरकार की छात्रवृत्ति योजनाएं लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी हैं। पिछड़ा वर्ग पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या के मामले में प्रयागराज जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है। यहां 39,892 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। यह संख्या प्रदेश में सर्वाधिक है और दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर पात्र विद्यार्थियों तक पहुंच रहा है। जौनपुर में 31 हजार से ज्यादा छात्रों को मिली छात्रवृत्ति प्रदेश में प्रयागराज के बाद आजमगढ़ दूसरे स्थान पर रहा, जहां 35,785 छात्र-छात्राओं के खातों में छात्रवृत्ति की राशि पहुंची है। इसी तरह गाजीपुर में 32,872 छात्र-छात्राओं को लाभ मिला, जबकि जौनपुर में 31,475 और कुशीनगर में 26,137 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। इस तरह वर्ष 2025-26 में पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 8.88 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। इसमें 4 लाख 58 हजार से ज्यादा छात्राएं, 4 लाख 30 हजार से अधिक छात्र और 3 ट्रांसजेंडर शामिल है। छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक होना इस बात का संकेत है कि प्रदेश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।  कक्षा 9 और 10 के छात्रों को मिल रही छात्रवृत्ति योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को 150 रुपये प्रतिमाह की दर से अधिकतम 10 माह तक छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त 750 रुपये वार्षिक अनुदान भी दिया जाता है। इस प्रकार एक छात्र को कुल 2,250 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। योगी सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया है। छात्र छात्रवृत्ति प्रबंधन प्रणाली की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करते हैं। पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना मुख्य रूप से कक्षा 9 और 10 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए है।  हर पात्र छात्र को समय पर सहायता उपलब्ध हो- निदेशक, पिछड़ा वर्ग इस योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों के बच्चों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, जिनकी वार्षिक आय दो लाख रुपये या उससे कम है। आर्थिक तंगी के कारण कई बार प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो जाती है। प्रदेश सरकार की यह योजना ऐसे छात्रों के लिए संबल का काम कर रही है और उन्हें शिक्षा से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजनाएं पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक अभाव किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने और हर पात्र छात्र को समय पर सहायता उपलब्ध हो।

30 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं आंधियां

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मौसम अचानक बदल गया है। रायबरेली जिले में शनिवार की सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह करीब 08:15 बजे आसमान में बादल छा गए। तेज हवाओं के साथ धूल का गुबार उठा, और देखते ही देखते बूंदाबांदी झमाझम बारिश में बदल गई। लगभग डेढ़ घंटे तक हुई इस तेज बारिश ने जहां एक तरफ लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी निजात दिलाई है। वहीं दूसरी तरफ शहर की रफ्तार पर कुछ देर के लिए ब्रेक भी लगा दिया। वर्षा ऋतु की इस पहली अच्छी बारिश का बच्चों ने जमकर लुत्फ उठाया। वे सड़कों और छतों पर भीगते नजर आए। वहीं, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के 30 जिलों में आंधी-बारिश, मेघगर्जन और वज्रपात की संभावना जताई है। नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी और प्रयागराज समेत 40 जिलों के लिए यलो अलर्ट भी जारी किया गया है। किसानों के चेहरे खिले, आम-जामुन की फसल को संजीवनी रायबरेली में हुई यह बारिश कृषि क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो रही है। खासकर धान की नर्सरी (बैरन) डाल रहे किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। इसके अलावा, इस बारिश को आम और जामुन के फलों के लिए भी बेहद लाभदायक माना जा रहा है, जिससे फसलों में चमक और मिठास बढ़ेगी। पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते कई जिलों में अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार सबसे ज्यादा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के इलाकों में देखने को मिल सकता है। वहां हवाओं की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 80 किलोमीटर प्रति घंटे के तूफानी झोकों में बदल सकती है। मौसम विभाग ने प्रदेश के तीन अलग-अलग कैटेगरी में बांटकर आंधी की रफ्तार का आकलिया है। इसके मुताबिक फिरोजाबाद, मैनपुरी, आगरा, एटा, इटावा, कासगंज अलीगढ़, मथुरा, औरैया, जालौन, हाथरस, महोबा, हमीरपुर, ललितपुर और झांसी में सबसे भीषण अंधड़ चलने की आशंका है। यहां हवा की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। हीट डोम क्षेत्र से छिटक रहे बादल जून में भी उत्तरी पाकिस्तान से आए पश्चिमी विक्षोभों का प्रदेश के कई जिलों में असर पड़ा लेकिन हीट डोम वाले क्षेत्रों से बादल छिटक गए। यहां या तो बारिश हुई नहीं और हुई भी तो नाममात्र। इसके विपरीत पश्चिमी यूपी के जनपदों में भारी बारिश हुई। आईएमडी के शुक्रवार सुबह 08:30 बजे के आंकड़ों के अनुसार मेरठ 62 मिमी, मुरादाबाद 66 मिमी, मुजफ्फरनगर 57 मिमी, शाहजहांपुर 18 मिमी, हरदोई 09 मिमी, झांसी 01 मिमी, इटावा 10 मिमी, बरेली 19 मिमी, आगरा 18 मिमी और गाजियाबाद में 6.5 मिमी बारिश हुई। अन्य जनपदों में ज्यादातर में बूंदाबांदी या एक से दो मिली बारिश ही हुई। लेकिन बुंदेलखंड के जनपदों व कानपुर नगर समेत आसपास के जनपदों में जहां तापमान 40 के पार रहा वहां बारिश नाममात्र ही हुई। पिछले 48 घंटों से ऑरेंज अलर्ट के बावजूद केवल तेज हवाएं चलीं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जो हीट डोम का क्षेत्र है वहां बारिश ऐसे में मुश्किल होती है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ सशक्त था जिसका असर आगे भी पड़ेगा। देश के मध्य हिस्से के राज्यों में अभी आंधी-पानी जारी रहेगा लेकिन शनिवार से यूपी में यह सीमित हो जाएगा। 30 जिलों में ऑरेन्ज अलर्ट, 40 में यलो अलर्ट प्रदेश में चक्रवातीय प्रणालियों और पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम का मिजाज आक्रामक बना हुआ है। अमौसी स्थित यूपी-उत्तराखंड के मौसम मुख्यालय ने अगले 24 घंटों यानी शनिवार की सुबह तक के लिए 30 जिलों में तेज आंधी-बारिश, और वज्रपात का ऑरेन्ज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा 40 जिलों के लिए यलो अलर्ट है। मौसम विभाग के मुताबिक, सबसे ज्यादा प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के इलाकों में देखने को मिलेगा। जहां हवाओं की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 80 किलोमीटर प्रति घंटे के तूफानी झोंकों में तब्दील हो सकती है।

सेना के जवानों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा यूपी की देसी गायों के दूध से बना स्कॉयर फ्रीज ड्राइड योगर्ट पाउडर

डेनिश डेयरी टेक्नोलॉजी से देसी गायों के दूध के उत्पाद बना यूपी बना देश का 'धुरंधर'  सेना के जवानों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा यूपी की देसी गायों के दूध से बना स्कॉयर फ्रीज ड्राइड योगर्ट पाउडर मुख्यमंत्री योगी की प्रेरणा से देसी नस्ल की गायों के संरक्षण से राष्ट्रशक्ति और आर्थिक समृद्धि का नया मॉडल तैयार देसी गाय के दूध के विशेष उत्पाद से और फुर्तीले होंगे सेना के जवान, दुश्मनों के दांत खट्टे करने में मिलेगी नई ताकत  लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण अब राष्ट्रशक्ति, सैनिक सामर्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला नया मॉडल बनकर उभरा है। योगी सरकार के कुशल प्रबंधन से प्रदेश की देसी नस्ल की गायों का दूध अब भारतीय सेना के जवानों की ताकत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डेनमार्क और आइसलैंड की अत्याधुनिक डेयरी तकनीक से तैयार हो रहा विशेष डेयरी उत्पाद स्कॉयर (Skyrrup) सेना के जवानों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करने में उपयोगी साबित हो रहा है। उत्तर प्रदेश की देसी गायों के दूध से तैयार यह प्रीमियम सप्लीमेंट अब भारतीय सेना में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, कम फैट और प्राकृतिक पोषक तत्वों से भरपूर यह उत्पाद जवानों को अधिक फिट, ऊर्जावान और सक्षम बनाने में मदद करेगा। पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित हो रही गो आधारित अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर भारत की नई ताकत बनती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश का मॉडल अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है। देश का पहला मॉडल, जहां गो सेवा से बढ़ रही सेना की शक्ति प्रयागराज के रहने वाले इंजीनियर एस.एन. द्विवेदी ने नोएडा में रोजगार, गो संरक्षण और आधुनिक डेयरी तकनीक को जोड़कर एक अनूठा मॉडल विकसित किया है। उनकी डेयरी में गिर, साहीवाल समेत 250 से अधिक देसी नस्ल की गायों की देखरेख की जा रही है। इन गायों के दूध में प्राकृतिक रूप से उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हीं गुणों के कारण भारतीय सेना में इनके दूध से बने उत्पाद की मांग लगातार बढ़ रही है।  देसी गायों के दूध से तैयार स्कॉयर जवानों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा देने तथा मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक माने जा रहे हैं। आधुनिक प्रोसेसिंग और अल्ट्रा फिल्टर तकनीक के कारण इन उत्पादों की गुणवत्ता काफी बढ़ जाती है। डेनमार्क की अल्ट्रा फिल्टर तकनीक से तैयार होता है स्कॉयर स्कॉयर आइसलैंड का एक पारंपरिक डेयरी उत्पाद है, जिसे दही और चीज के बीच की श्रेणी का माना जाता है। इसका स्वाद हल्का खट्टा होता है और करीब 1000 साल पहले उत्तरी यूरोप के समुद्री योद्धा वाइकिंग्स (Vikings) खाते थे। इसमें सामान्य डेयरी उत्पादों की तुलना में अधिक प्रोटीन और बेहद कम फैट होता है। इसमें स्कॉयर, ग्रीक योगर्ट, जिलेटो आइसक्रीम, स्कॉयर पाउडर, योगार्ट पाउडर, पनीर और घी सभी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में पहली बार डेनमार्क की अत्याधुनिक अल्ट्रा फिल्टर डेयरी तकनीक और आइसलैंड की प्रोसेसिंग पद्धति का उपयोग कर इसे तैयार किया जा रहा है। यही कारण है कि प्रदेश में तैयार हो रहे प्रीमियम दूध और उससे बने उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। इससे प्रदेश की देसी गाय आधारित डेयरी अर्थव्यवस्था को नया बाजार और नई पहचान मिल रही है। गो संरक्षण से रोजगार और आर्थिक समृद्धि की नई राह इंजीनियर एस.एन. द्विवेदी अब अलीगढ़ में 500 देसी गायों की क्षमता वाली अत्याधुनिक गोशाला विकसित कर रहे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिली प्रेरणा ने उन्हें गो सेवा और गो संरक्षण के कार्य को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने का संकल्प दिया। उन्होंने गो सेवा को रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि से जोड़ते हुए ऐसा मॉडल विकसित किया है जिसकी चर्चा अब देशभर में हो रही है। आधुनिक तकनीक और भारतीय संस्कृति के समन्वय से उन्होंने साबित किया है कि गौ संरक्षण केवल परंपरा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है। योगी सरकार में राष्ट्रनिर्माण का आधार बन रहा गो संरक्षण उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि योगी सरकार द्वारा गो संरक्षण को लेकर किए गए प्रयास अब बड़े परिणामों के रूप में सामने आ रहे हैं। आधुनिक गोशालाएं, उन्नत डेयरी तकनीक, डिजिटल मार्केटिंग और मूल्य संवर्धित गो उत्पादों ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि गो सेवा के माध्यम से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं, वहीं भारतीय सेना तक पौष्टिक गो उत्पाद पहुंचाकर इसे राष्ट्रसेवा से भी जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित हो रही गो आधारित अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर भारत की नई ताकत बनती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में औरैया का वृद्धाश्रम बना आत्मनिर्भरता का केंद्र

सेवा, सम्मान और स्वाभिमान का संगम: योगी सरकार की पहल से वृद्धाश्रम बना आत्मनिर्भरता का केंद्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में औरैया का वृद्धाश्रम बना आत्मनिर्भरता का केंद्र आराध्या वृद्ध महिला स्वयं सहायता समूह की माताएं पूजा सामग्री, गुलाब जल और मुंगौड़ी बनाकर बढ़ा रहीं स्वावलंबन की राह वृद्ध पुरुष स्वयं सहायता समूह के सदस्य गोसेवा और ऑर्गेनिक खेती के जरिए पेश कर रहे मिसाल लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में वृद्धाश्रम केवल बेघर और निराश्रित बुजुर्गों के लिए आश्रय स्थल भर नहीं रह गए हैं, बल्कि सेवा, सम्मान और स्वाभिमान के साथ आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में भी नई पहचान बना रहे हैं। इसका सबसे प्रेरणादायक उदाहरण औरैया जिले का वृद्धाश्रम है, जहां बुजुर्ग अपने अनुभव, हुनर और श्रम के बल पर स्वावलंबन की नई कहानी लिख रहे हैं। बुजुर्ग अपने कार्यों के माध्यम से दे रहे आत्मविश्वास और स्वाभिमान का संदेश  औरैया वृद्धाश्रम में गठित आराध्या वृद्ध महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी माताएं पूजा सामग्री, गुलाब जल और मुंगौड़ी तैयार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। जीवन के उस पड़ाव में, जब अक्सर लोग स्वयं को समाज से अलग-थलग महसूस करने लगते हैं, ये महिलाएं अपने कार्यों के माध्यम से आत्मविश्वास और स्वाभिमान का संदेश दे रही हैं। वहीं, वृद्धाश्रम में गठित वृद्ध पुरुष स्वयं सहायता समूह के सदस्य गोसेवा और ऑर्गेनिक खेती के जरिए समाज के सामने प्रेरणादायक मिसाल पेश कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए वे न केवल उत्पाद तैयार कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश भी दे रहे हैं। योगी सरकार में मिल रहा 6316 बुजुर्गों को सुरक्षा और सहारा   मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में समाज कल्याण विभाग का उद्देश्य बुजुर्गों को केवल संरक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वो अपनी क्षमताओं के अनुरूप सक्रिय भूमिका निभा सकें। प्रदेश के 75 जिलों में 6316 बुजुर्गों को सुरक्षा और सहारा मिल रहा है। इन सभी वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों को सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही योग, भजन-कीर्तन, मनोरंजन और सामूहिक संवाद जैसी गतिविधियों के माध्यम से उन्हें मानसिक रूप से भी सक्रिय बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के प्रयासों से वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जो बुजुर्ग कभी उपेक्षा और असहाय का जीवन जीने को विवश थे, वे आज सम्मान और आत्मविश्वास के साथ समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। बुजुर्गों के जीवन में आशा, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का होता है संचार  योगी सरकार की पहल केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बुजुर्गों  के जीवन में आशा, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का संचार भी करती है। औरैया का यह मॉडल इस बात का प्रमाण है कि अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर बुजुर्ग भी समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इसके अलावा वृद्धाश्रमों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर निरीक्षण, समीक्षा और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।    संजीव सिंह, निदेशक, समाज कल्याण विभाग

CM का बड़ा ऐलान: हर शहर और गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगे

हर शहर, गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगेः मुख्यमंत्री सीएम योगी ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट तक संचालित होने वाली 45 इलेक्ट्रिक व 3 हाइड्रोजन बसों को किया फ्लैग ऑफ नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी किया शुभारंभ किया सीएम योगी ने 15 जून तक 110 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, मांग के अनुरूप 500 तक बढ़ाई जाएगी इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ग्रीन मोबिलिटी व सस्टेनेबल डेवलपमेंट का विजन दिया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार आने वाले समय में हर शहर-गांव को पेट्रोल-डीजल मुक्त ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेगी। हर व्यक्ति को बेहतर, आरामदायक व पर्यावरण अनुकूल परिवहन सेवा मिलने पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि प्रदेश में परिवहन विभाग का बेड़ा बड़ा हो रहा है, उनके कार्य भी बड़े दिखने चाहिए। सीएम योगी ने शुक्रवार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट तक संचालित होने वाली उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की 45 इलेक्ट्रिक बसों व 3 हाइड्रोजन बसों को लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये फ्लैग ऑफ किया। उन्होंने इस अवसर पर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी शुभारंभ किया। 15 जून से संचालित होने जा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट  अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे गतिरोध बड़ी चुनौतियां हैं। इनके कारण दुनिया वायु प्रदूषण, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, ओलावृष्टि का सामना कर रही है। दुनिया पर थोपे गए युद्धों की कीमत पूरी मानवता चुका रही है। पीएम के विजन को धरातल पर उतारने के लिए 15 जून से भारत के सबसे बड़े हवाई अड्डे (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) का संचालन प्रारंभ होने जा रहा है। देश के सबसे बड़े आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक हब तथा सुचारु वायुसेवा की दृष्टि से यात्रियों, नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीनों अथॉरिटी (नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा) ने परिवहन निगम के माध्यम से यह सेवा प्रारंभ की है। यह नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरे नोएडा, ग्रेनो व यीडा  मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना अथॉरिटी आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, स्टार्टअप्स, सेमीकंडक्टर समेत अन्य औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में उभरी हैं। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों को वहां लाने के साथ ही पर्यावरण अनुकूल परिवहन समय की मांग है। वहां कुछ क्षेत्रों में मेट्रो का संचालन भी हो रहा है, लेकिन लास्ट माइल कनेक्टिविटी की दृष्टि से इलेक्ट्रिक बस का संचालन मील का पत्थऱ साबित होने जा रहा है। 15 जून तक तीनों अथॉरिटी द्वारा 110 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रारंभ होगा। मांग के अनुरूप इसमें क्रमिक बढ़ोतरी कर 500 बसों का संचालन भी तीनों अथॉरिटी के माध्यम से किया जाएगा।  नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में दिख रहा परिवर्तन सीएम योगी ने 2017 के पहले और इससे बाद के उत्तर प्रदेश का फर्क समझाया। कहा कि नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में परिवर्तन दिख रहा है और 9 वर्ष में यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार ने किया है। 2017 से पहले टूटी सड़कें, नदारद बिजली, असुरक्षा, अराजकता व अव्यवस्था के वातावरण में नागरिकों के सामने पहचान का संकट खड़ा था, तब उत्तर प्रदेश में निवेश की बात दिवास्वप्न थी। 2017 के बाद का उत्तर प्रदेश विश्वस्तरीय रोड, एयर कनेक्टिविटी के लिए जाना जाता है। यूपी के पास हाईवे, एक्सप्रेसवे समेत 4 लाख किमी का रोड नेटवर्क है। इंटर स्टेट कनेक्टिविटी सबसे बेहतरीन है। 9 वर्ष पहले जो यूपी बदहाल सड़कों के लिए जाना जाता था, आज उसने एक्सप्रेसवे प्रदेश के रूप में पहचान बनाई है।  सीएम ने कहा कि 2019 में प्रयागराज कुंभ के दौरान सरकार ने कैबिनेट में गंगा एक्सप्रेसवे की घोषणा की थी। मेरठ से प्रयागराज के बीच देश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों को आश्चर्य होता है कि यह वही उत्तर प्रदेश है, जहां कभी सड़क व गड्ढे में अंतर का पता नहीं लगता था। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक, दिल्ली-मेरठ 12 लेन एक्सप्रेसवे और शीघ्र ही लोकार्पित होने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे नए यूपी की नई पहचान बने हैं।  अब यूपी में 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट सीएम ने यूपी की बेहतर एयर कनेक्विटी का जिक्र करते हुए कहा कि प्रयागराज में 11 महीने में एयरपोर्ट बनकर तैयार हुआ। जेवर में देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन गया है। कभी त्रेतायुग में भगवान श्रीराम पुष्पक विमान से अयोध्या आए थे, लेकिन इसके बाद अयोध्यावासियों को कभी वायुसेवा प्राप्त नहीं हुई। अयोध्या हजारों वर्ष तक उपेक्षित और आजादी के बाद भी अपमानित रही। आज वहां महर्षि वाल्मीकि को समर्पित एयरपोर्ट संचालित हो रहा है। उप्र में लखनऊ, अयोध्या, काशी, कुशीनगर व नोएडा समेत 5 इंटरनेशनल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। नोएडा एयरपोर्ट यात्रियों के साथ ही कार्गो-एमआरओ हब के रूप में खुद को स्थापित करने जा रहा है।  17 नगर निगमों में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन सीएम ने कहा कि देश के 20 में से यूपी के 7 शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। 17 नगर निगमों में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित कर रहे हैं। नोएडा में सरकार आज यह सुविधा प्रारंभ कर रही है। पहले इलेक्ट्रिक बसें बाहर से मंगानी पड़ती थीं, लेकिन अब टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड हिंदुजा ग्रुप ने लखनऊ में इलेक्ट्रिक बस के दो-दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर यह सुविधा देनी प्रारंभ की है। यीडा में 3 हाइड्रोजन बसों का भी होगा संचालन  मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से यमुना अथॉरिटी में तीन अन्य हाइड्रोजन बसें भी संचालित करने जा रहे हैं। यीडा को ये बसें एनटीपीसी ने उपलब्ध कराई हैं। इनमें ग्राउंड या सरफेस वाटर नहीं, बल्कि सीवर वाटर का इस्तेमाल कर हाइड्रोजन का निर्माण होगा। ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी अभिनव अवधारणा बन चुकी है। इन बसों का संचालन भी जेवर एयरपोर्ट के पास करेंगे। वायु प्रदूषण को कम करने, जहरीले वातावरण से बच्चों, बुजुर्गों, बीमारों को बचाने में इनकी बड़ी भूमिका होगी।  नेट जीरो लक्ष्य के प्रति समर्पित सरकार सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने के लिए विश्व बैंक की मदद से 2741 करोड़ रुपये से उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट … Read more

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को दिया स्वीकृति पत्र, चेक व चाबी

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को दिया स्वीकृति पत्र, चेक व चाबी प्रदर्शनी व फूड कार्ट का शुभारंभ भी किया सीएम योगी ने वाराणसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल चौकाघाट में आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। यहां कृषि, उद्यान, समाज कल्याण, पर्यटन, पंचायती राज, मत्स्य, एपीडा, खादी व ग्रामोद्योग समेत अनेक विभागों ने उपलब्धियों पर प्रदर्शनी लगाई। इस आयोजन में 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ओडीओसी) योजना के तहत बनारसी लस्सी, तिरंगा बर्फी, लौंगलता व पान आदि को भी प्रदर्शित किया गया। विशेष चिकित्सा शिविर भी लगाया गया। सीएम योगी ने यहां जनकल्याण शिविर, स्ट्रीट वेंडर तथा कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र प्रदान किया।  मुख्यमंत्री ने किया फूड कार्ट का शुभारंभ  मुख्यमंत्री ने ओडीओसी के अंतर्गत फूड कार्ट का शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट व आमजन में मिष्ठान वितरित किया। सीएम योगी ने यहां स्वास्थ्य परीक्षण करा रहे लोगों से भी संवाद किया।  मुख्यमंत्री के हाथों इन्हें मिला चेक, चाबी, प्रमाण पत्र  👉 प्रमिला देवी- स्ट्रीट वेंडर- पथ विक्रय प्रमाण पत्र  👉 राजू- स्ट्रीट वेंडर- पथ विक्रय प्रमाण पत्र 👉 दीपक बरनवाल- स्ट्रीट वेंडर- पथ विक्रय प्रमाण पत्र 👉 बेबी मौर्या- पीएम स्वनिधि योजना- 50 हजार रुपये का चेक  👉 कन्हैया- पीएम स्वनिधि योजना- क्रेडिट कार्ड  👉 रोशनी कुमारी- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान- 5 लाख का चेक  👉 याशिका सिंह- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान- 2.50 लाख का चेक   👉 ललिता- विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना- सिलाई मशीन व प्रमाण पत्र   👉 खुशबू जायसवाल- विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना- सिलाई मशीन व प्रमाण पत्र

कौशल विकास मिशन की नई पहल: Skill के साथ Financial Intelligence पर जोर

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के यूपीएसडीएम और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDUGKY) के अंतर्गत प्रदेश भर में 1000 से अधिक ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 1.5 लाख से अधिक युवाओं को अगले हफ्ते से फाइनेंशियल स्किल्स की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। योगी सरकार ने पहल की है। प्रदेश के युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ना ही अब उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का लक्ष्य नहीं है। मिशन ने अपनी प्राथमिकताओं का दायरा बढ़ाते हुए युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, जागरूक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार नागरिक बनाने का निर्णय लिया है। यह पहल मिशन निदेशक श्री पुलकित खरे के निर्देशन और दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उनके इसी विज़न को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बीच शुक्रवार को एमओयू हुआ। मिशन निदेशक की पहल पर पहली बार कौशल प्रशिक्षण को वित्तीय शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। MoU से पहले मिशन मुख्यालय स्थित सभागार में Financial Literacy & Awareness Workshop का आयोजन किया गया, जिसमें विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों को वित्तीय जागरूकता एवं आर्थिक निर्णय क्षमता का महत्व बताया गया । मिशन निदेशक भी वर्कशॉप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाओं और वित्तीय अनिश्चितताओं के दौर में युवाओं को वित्तीय शिक्षा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने फाइनेंशियल स्किलिंग की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है । एक्सपर्ट्स ने बताए वित्तीय सफलता के 12 मूल मंत्र प्रेसेंटेशन के माध्यम से एनएसई के अधिकारियों ने फाइनेंशियल सक्सेस के 12 मूल मंत्र बताए। उन्होंने बताया पहले खुद के भविष्य के लिए बचत करें। इनकम से कम खर्च करें। आपातकालीन फंड तैयार रखें। हाई इंटरेस्ट पर लोन लेने से बचें, रेगुलर इन्वेस्टमेंट करें। इन्वेस्टमेंट में विविधता रखें, रिस्क और रिटर्न की समझ रखें, टैक्स को देखते हुए निवेश करें, आवश्यक बीमा करवाएं, लॉन्ग टर्म एसेट्स लें, समय-समय पर इन्वेस्टमेंट की समीक्षा करें। ऐप बनेगा युवाओं का डिजिटल वित्तीय मार्गदर्शक वर्कशॉप में कर्मचारियों को SaaRthi App के बारे में भी विस्तार से बताया गया । यह इन्वेस्टमेंट एजुकेशन के लिए बनाया गया एक उपयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो उपयोगकर्ताओं को इन्वेस्टमेंट संबंधी शैक्षणिक वीडियो, वित्तीय योजना के टूल्स, कैलकुलेटर और Financial Health Check-up जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। कौशल के साथ आर्थिक समझ भी जरूरी यह MoU प्रदेश के युवाओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा। कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार पाने वाले युवा अब केवल आय अर्जित नहीं करेंगे, बल्कि यह भी समझेंगे कि पहली सैलरी का सही उपयोग कैसे करें, बजट और बचत कैसे शुरू करें, इन्वेस्टमेंट कब और कहाँ करना चाहिए, लोन से कैसे बचना है, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा कैसे तैयार करनी है। यह ट्रेनिंग युवाओं को घर खरीदने, व्यवसाय शुरू करने, परिवार की आर्थिक सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवानिवृत्ति जैसे जीवन के बड़े निर्णय लेने में भी सक्षम बनाएगी । साथ ही वित्तीय जागरूकता उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाओं और आर्थिक जोखिमों से सुरक्षित रहने में भी मदद करेगी। युवाओं को “Skill + Financial Intelligence” के माध्यम से रोजगार से आगे बढ़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। वर्कशॉप में अपर मिशन निदेशक श्रीमती पूजा मिश्रा, जॉइंट डायरेक्टर श्री मयंक गंगवार, वित्त नियंत्रक श्री संदीप कुमार, असिस्टेंट डायरेक्टर श्री एम के सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर श्रीमती पवित्रा टंडन व मिशन के अन्य कर्मचारी मौजूद रहें । वहीं, NSE से चीफ रेग्युलेटरी ऑफिसर श्री अंकित शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट श्री जोगिंदर सिंह और यूपी रीजन की सीनियर इंचार्ज श्रुति शर्मा भी वर्क शॉप में मौजूद रहीं । आर्थिक रूप से सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि कौशल विकास का वास्तविक उद्देश्य तब तक अधूरा है, जब तक हमारे युवा अपनी कमाई का सही उपयोग और मैनेजमेंट करना न सीखें। आज रोजगार पाना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है वित्तीय रूप से समझदार बनना। एनएसई के साथ यह साझेदारी युवाओं को Skill + Financial Intelligence के मॉडल पर तैयार करेगी, जिससे वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि आर्थिक रूप से सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।

योगी आदित्यनाथ ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां, 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के मौके पर शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों ने भारत की विकास यात्रा की सराहना की है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने अपनी शक्ति और सामर्थ्य का परिचय पूरे विश्व को दिया है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज का भारत बिना रुके, बिना डिगे और बिना थके आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक देश में लोगों को जाति, धर्म, भाषा और संप्रदाय के नाम पर बांटने की राजनीति हुई, लेकिन मोदी सरकार ने सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की भावना के साथ काम किया है। मोदी सरकार ने 25 करोड़ आबादी को गरीबी रेखा से निकाला उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता संभालने के समय देश की आबादी लगभग 120 करोड़ थी। इन 12 वर्षों में सरकार की योजनाओं के माध्यम से 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने में सफलता मिली है। योगी ने कहा कि दुनिया में बहुत कम ऐसे देश हैं जिनकी आबादी 25 करोड़ से अधिक है और भारत ने इतनी बड़ी आबादी को गरीबी से बाहर निकालकर ऐतिहासिक कार्य किया है। सीएम योगी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री की जनकल्याणकारी योजनाओं का सबसे अधिक लाभ उत्तर प्रदेश को मिला है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 65 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर मिले हैं। यूपी के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन का लाभ वहीं देशभर में बने 12 करोड़ शौचालयों में से करीब 3 करोड़ शौचालय उत्तर प्रदेश में बनाए गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत देश में जारी 60 करोड़ कार्डों में से 15 करोड़ लाभार्थी उत्तर प्रदेश के हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन योजना का लाभ मिल रहा है। जनधन खाते, उज्ज्वला योजना, स्वास्थ्य बीमा और अन्य योजनाओं ने गरीबों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। योगी ने कहा कि सरकार ने कभी वोट बैंक की राजनीति नहीं की, बल्कि गरीबों के उत्थान को प्राथमिकता दी। बेटियों को जन्म से स्नातक तक शिक्षा सहायता योजना का लाभ महिलाओं के सशक्तिकरण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बेटियों को जन्म से लेकर स्नातक तक शिक्षा सहायता की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। सेना, अंतरिक्ष और उद्योग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में ड्रॉपआउट दर कम हुई है और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके सफल नेतृत्व और 12 वर्षों के कार्यकाल के लिए बधाई भी दी। 2027 में 2017 से बड़ी जीत होगी- पंकज चौधरी वहीं इस मौके पर यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर सरकार बनाएगी और जीत की हैट्रिक लगाएगी। उन्होंने कहा कि 2027 में पार्टी को 2017 से भी बड़ी जीत हासिल होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जो विकास यात्रा शुरू हुई थी, वह अब विकसित भारत के संकल्प में बदल चुकी है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य किया गया है, जिससे जनता का भरोसा भाजपा के प्रति लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता ने बीते वर्षों में बदलते भारत को देखा है। देश ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल की हैं।

वन विभाग ने हटाया अवैध निर्माण, इटावा सफारी के पास जमीन पर किया वृक्षारोपण

इटावा इटावा में एक ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जिसकी चर्चा शहर से लेकर सोशल मीडिया तक हो रही है. वजह सिर्फ एक ध्वस्तीकरण अभियान नहीं, बल्कि वह तस्वीर है जिसने लोगों को चौंका दिया. जिन लोगों ने रात तक एक मजार देखा था, सुबह जब वे उसी स्थान पर पहुंचे तो पूरा दृश्य बदल चुका था. जहां पहले मजार दिखाई देती थी, वहां अब पेड़-पौधे और हरियाली नजर आ रही थी. मामला इटावा सफारी पार्क के पीछे बीहड़ क्षेत्र में स्थित सैयद बाबा की मजार से जुड़ा है. वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में इस मजार से जुड़े निर्माण को हटाकर जमीन को खाली कराया गया. इसके बाद उसी स्थान पर वृक्षारोपण कर दिया गया. बताया जा रहा है कि कार्रवाई इतनी गोपनीय और शांतिपूर्ण तरीके से की गई कि आसपास के अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी तब हुई, जब काम पूरा हो चुका था. रात में चला अभियान, सुबह बदली तस्वीर स्थानीय लोगों के अनुसार देर रात प्रशासनिक गतिविधियां तेज हुईं. सुरक्षा व्यवस्था के बीच सबसे पहले मजार परिसर में मौजूद सामग्री और अवशेषों को हटाया गया. इसके बाद बुलडोजर की मदद से वहां बने कमरे और अन्य निर्माण को ध्वस्त किया गया. कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया. प्रशासन ने कोशिश की कि प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे और किसी तरह की अव्यवस्था न हो. सुबह जब लोगों ने इलाके का रुख किया तो वहां का नजारा बदल चुका था. ध्वस्तीकरण के बाद मलबा भी हटा दिया गया था और जमीन को समतल कर वन विभाग की ओर से वृक्षारोपण शुरू कर दिया गया था. कई बड़े पौधों के साथ सैकड़ों छोटे पौधे भी लगाए गए. इसी बदलाव ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. सोशल मीडिया पर भी तस्वीरें और वीडियो साझा किए जाने लगे, जिनमें रात और सुबह के दृश्य का अंतर साफ दिखाई दे रहा था. आखिर क्यों हुई कार्रवाई? जानकारी के अनुसार वन विभाग काफी समय से इस मामले की जांच कर रहा था. विभाग का कहना था कि जिस भूमि पर मजार और उससे जुड़े निर्माण मौजूद थे, वह वन विभाग की भूमि है. ऐसे में निर्माण की वैधता से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे. वन विभाग की ओर से मजार के केयरटेकर फजले इलाही को नोटिस जारी किया गया था. नोटिस में भूमि और निर्माण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था. सूत्रों के अनुसार कई महीनों तक सुनवाई चलती रही. इस दौरान अलग-अलग तारीखों पर पक्षकारों को दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया. लेकिन वन विभाग का दावा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके. यहीं से मामला आगे बढ़ा और विशेष वन न्यायालय तक पहुंच गया. तीन महीने चली प्रक्रिया बताया जा रहा है कि कार्रवाई अचानक नहीं हुई. इसके पीछे करीब तीन महीने तक चली प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया रही. वन विभाग की ओर से लगातार यह पूछा जाता रहा कि जिस भूमि पर निर्माण है, उसके स्वामित्व और वैधता से जुड़े कागजात प्रस्तुत किए जाएं. विभाग का कहना था कि यदि निर्माण वैध है तो संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं. सुनवाई के दौरान कई अवसर दिए गए, लेकिन कथित तौर पर कोई ऐसा दस्तावेज सामने नहीं आया जो निर्माण को वैध साबित कर सके.  इसके बाद विशेष वन विभाग की अदालत ने मामले में आदेश जारी किया, जिसके आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ. मीडिया से दूर रखी गई पूरी कार्रवाई इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि कार्रवाई को मीडिया की नजरों से काफी हद तक दूर रखा गया. आमतौर पर इस तरह के अभियानों के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के बयान सामने आते हैं और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जाती है. लेकिन इस मामले में अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए. ध्वस्तीकरण के बाद भी जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया. यही वजह है कि कार्रवाई को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई. स्थानीय स्तर पर चर्चा यह भी रही कि प्रशासन किसी भी प्रकार के विवाद या तनाव से बचना चाहता था. इसलिए पूरे अभियान को बेहद शांत और नियंत्रित तरीके से अंजाम दिया गया. रेंजर ने पहले ही दिए थे संकेत इस मामले में पहले बढ़पुरा वन रेंज के रेंजर अशोक शर्मा ने बातचीत के दौरान संकेत दिए थे कि विभाग भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है. उन्होंने बताया था कि संबंधित पक्ष से लगातार कागजात मांगे जा रहे हैं और वन भूमि पर अनधिकृत निर्माण को लेकर नोटिस भी जारी किया गया है. रेंजर के अनुसार यदि वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं तो नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी. उस समय यह बयान सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना गया था, लेकिन अब ध्वस्तीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया कि विभाग कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा था. वृक्षारोपण बना चर्चा का विषय ध्वस्तीकरण के बाद जिस तेजी से वृक्षारोपण किया गया, वह भी चर्चा का विषय बना हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई पूरी होते ही वन विभाग की टीम ने क्षेत्र को हरित स्वरूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी. बड़े पौधों के साथ-साथ बड़ी संख्या में नए पौधे रोपे गए. वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि भूमि को उसके मूल स्वरूप में विकसित करने की योजना के तहत यह कदम उठाया गया. चूंकि क्षेत्र सफारी पार्क और वन क्षेत्र के नजदीक स्थित है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को प्राथमिकता दी गई. यही वजह है कि जिस स्थान पर कुछ घंटे पहले तक निर्माण मौजूद था, वहां अब हरियाली दिखाई दे रही है. लोगों के बीच चर्चा तेज कार्रवाई के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. कुछ लोग इसे वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं. हालांकि प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार कार्रवाई न्यायालय के आदेश और विभागीय प्रक्रिया के बाद की गई है. इसलिए अधिकारियों का जोर कानूनी … Read more

गैस सिलेंडर में गड़बड़ी का खुलासा, संदिग्ध उपभोक्ताओं की सूची तैयार

लखनऊ घरेलू सिलेंडरों की हर रीफिल पर चेक लगाने के बाद तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल की दिशा में कदम बढ़ाया है। सभी कनेक्शन धारकों का बीती अवधि का उपयोग का विवरण तैयार किया जा रहा है। जिन कनेक्शन धारकों ने नाम मात्र को रीफिल ली है, उनको संदिग्ध की सूची में डाला जा रहा है। वहीं अत्यधिक उपयोग वाले उपभोक्ता भी चिन्हित किए जा रहे हैं। इनका ऑडिट कराकर उपयोग की वास्तविक स्थिति जानी जाएगी। बीती अवधि में प्रबंधन के पास गैस कटिंग की शिकायतें पहुंची हैं। इसमें सस्ती घरेलू गैस से कॉमर्शियल की रीफिलिंग की शिकायत प्रमुख है। गैस कटिंग से तैयार किए गए इस सिलेंडर को कॉमर्शियल के उपयोगकर्ता को सरकारी रेट से कम पर उपलब्ध कराए जाने का आरोप है। इसको संज्ञान में लेकर तेल कंपनियों ने संबंधित कनेक्शन धारक का ब्योरा तलब कर उसके अधिकतम एवं न्यूनतम उपयोग का विवरण तैयार किया है। इस विवरण में इस बात का उल्लेख है कि एक रीफिल से दूसरी रीफिल के बीच कितना अंतर है। बीती अवधि में कितने अंतर से रीफिल ली गईं। इस समय यह अंतर कितना है। बिगड़ सकती है आपूर्ति वितरण से जुड़े लोगों ने बताया कि एक बड़ा वर्ग किसी भी तरह घरेलू गैस को हासिल करने की जुगत में लग गया है। किल्लत के समय में गैस की बुकिंग का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे हालातों में वास्तविक जरूरतमंद घरों तक समय से गैस पहुंचाने की दिक्कत हो गई है। जो वितरक एक से दो दिन के अंदर अपने उपभोक्ताओं के यहां रीफिल पहुंचा देते थे, एक से अधिक का समय लेने लग गए हैं। वहीं तेल कंपनियां गैस की सीमित आपूर्ति दे रही हैं। जांच की वजह इस समय घरेलू उपयोग की एलपीजी खरीदार को 67.22 रुपये प्रति किलो पड़ रही है। जबकि कॉमर्शियल उपयोगकर्ता को एक किलो गैस के लिए 166.71 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। दोनों मदों में अंतर 99.69 रुपये किलो के स्तर तक पहुंच गया है। इस अंतर के चलते बड़े पैमाने पर कॉमर्शियल के 19 किलो के सिलेंडर में घरेलू गैस को भर कर बेचा जा रहा है। खरीदार को 300 रुपये की छूट देकर यह सिलेंडर 2800-2900 रुपये का दिया जा रहा है। आगरा संभाग, इंडेन वितरक संघ के अध्यक्ष, विपुल पुरोहित ने कहा कि कुछ ऐसे हलवाई चिन्हित किए गए हैं जिनका एलपीजी उपयोग सामान्य नहीं है। त्योहार के समय अधिक मांग की संभावना होने के बावजूद इनके द्वारा अपेक्षित रीफिल नहीं ली गई। कुछ रेस्टोरेंट भी चिन्हित किए गए हैं। इनका भी यही हाल है। पूरे एक महीने में नाममात्र की रीफिल ली गईं। जब कॉमर्शियल की किल्लत चल रही थी, उस समय इनकी तरफ से लगातार मांग थी। संदेह है कि इनके द्वारा अन्य स्रोतों से गैस हासिकल करने का प्रयास चल रहा है।