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सौर ऊर्जा से बिजली बिल में राहत, छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा को संबल और स्वरोजगार से खुल रहे आर्थिक उन्नति के नए रास्ते

रायपुर  विकास की वास्तविक पहचान केवल सड़कों, भवनों और अधोसंरचनाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव से होती है। जब किसी परिवार का बिजली खर्च कम होने लगे, आर्थिक कठिनाइयों के बीच विद्यार्थी उच्च शिक्षा जारी रख सके, कोई महिला स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर परिवार की जिम्मेदारियां संभाले और एक उद्यमी उद्योग लगाकर रोजगार के अवसर विकसित करे, तब जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित परिवारों की कहानियां ऐसे ही बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर संचालित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहलों से नागरिकों को शिक्षा, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलें जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी क्षमताओं को विकसित करने में भी सहायक बन रही हैं। सरगुजा के पांच हितग्राहियों के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का लाभ जब लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को नई दिशा मिलती है। पीएम सूर्य घर योजना: कभी चार से पांच हजार रुपये आता था बिजली बिल, अब सौर ऊर्जा से मिल रही राहत बढ़ती घरेलू बिजली जरूरतों के बीच सौर ऊर्जा नागरिकों के लिए बिजली खर्च कम करने का उपयोगी विकल्प बन रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अम्बिकापुर के बिलासपुर रोड स्थित मठपारा निवासी  पंकज साहू ने इस योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराया है। पंकज साहू बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच जाता था। घरेलू बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से उन्होंने योजना के पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया और सोलर सिस्टम लगवाया। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस प्रकार कुल एक लाख आठ हजार रुपये की आर्थिक सहायता से सोलर सिस्टम स्थापित करने का खर्च कम हुआ। सोलर सिस्टम लगने के बाद उनके बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है। पंकज साहू के अनुसार, कई बार घरेलू आवश्यकता से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजे जाने के कारण उनका बिजली खाता क्रेडिट में भी दिखाई देता है। पहले जहां बिजली बिल परिवार के नियमित खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा था, वहीं अब घर की छत पर स्थापित सोलर सिस्टम बिजली खर्च में राहत देने के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बन गया है। पंकज साहू का अनुभव दर्शाता है कि सौर ऊर्जा के उपयोग से परिवार अपनी बिजली जरूरतों का एक हिस्सा स्वयं पूरा कर सकते हैं। इससे घरेलू खर्च कम करने के साथ पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को भी प्रोत्साहन मिलता है। छात्रवृत्ति बनी कृष्णा यादव की उच्च शिक्षा का सहारा, किताबों और कॉलेज आने-जाने के खर्च में मिली मदद शिक्षा किसी भी परिवार की सामाजिक और आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन सीमित आय वाले परिवारों के लिए उच्च शिक्षा से जुड़े खर्चों की व्यवस्था करना आसान नहीं होता। ऐसे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं पढ़ाई जारी रखने का महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। अम्बिकापुर के राजीव गांधी पीजी कॉलेज में बीएससी प्रथम सेमेस्टर के छात्र कृष्णा यादव की कहानी इसका उदाहरण है। कृष्णा के पिता कृषि कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। खेती से प्राप्त सीमित आय में परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ कॉलेज की पढ़ाई का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण होता है। किताबें, कॉपियां, अध्ययन सामग्री और कॉलेज आने-जाने पर होने वाला खर्च परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को बढ़ा देता है। ऐसे में छात्रवृत्ति से मिलने वाली सहायता कृष्णा की शिक्षा को निरंतर जारी रखने में उपयोगी साबित हो रही है। कृष्णा छात्रवृत्ति की राशि का उपयोग पढ़ाई से संबंधित आवश्यक सामग्री खरीदने और आवागमन के खर्च में करते हैं। इससे उनके परिवार पर आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल रही है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त करने का उनका प्रयास दर्शाता है कि छात्रवृत्ति योजनाएं जरूरतमंद विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा विकसित करने और भविष्य के लिए बेहतर अवसर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। पीएमईजीपी से हर्षिता खत्री बनीं उद्यमी, 25 लाख रुपये के ऋण से स्थापित किया फर्नीचर निर्माण उद्योग आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में स्वरोजगार और उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से इच्छुक उद्यमियों को स्वयं का उद्योग या व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलता है। अम्बिकापुर की मती हर्षिता खत्री ने इस योजना के अंतर्गत 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर फर्नीचर निर्माण उद्योग स्थापित किया है। मती हर्षिता खत्री  साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट की प्रोपराइटर हैं। उनके पति  दिलीप खत्री उद्योग के संचालन और प्रबंधन में सहयोग करते हैं। परिवार लंबे समय से स्वयं का व्यवसाय स्थापित करना चाहता था, लेकिन पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा था। जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालय से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद हर्षिता खत्री के नाम से ऋण के लिए आवेदन किया गया। ऋण स्वीकृत होने पर फर्नीचर निर्माण इकाई की स्थापना संभव हो सकी। इस इकाई में पार्टिकल बोर्ड से टेबल, ऑफिस टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार किए जाते हैं। उद्योग स्थापना से हर्षिता खत्री के परिवार को स्वरोजगार का अवसर मिला है, वहीं इकाई से जुड़े कर्मचारियों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है। हर्षिता की सफलता बताती है कि उद्यमिता के लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध होने पर लोग अपने व्यावसायिक विचारों को वास्तविक उद्योग में … Read more

छत्तीसगढ़ शक्तिपीठ परियोजना से बदलेगी मंदिरों की तस्वीर, पांच प्रमुख शक्तिपीठों का होगा कायाकल्प

विशेष लेख छत्तीसगढ़ की शक्तिपीठ परियोजना पांच प्रमुख शक्तिपीठों का होगा विकास  धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क रायपुर पर्यटन एक ऐसी यात्रा या भ्रमण है, जो मनोरंजन या फुर्सत के क्षणों का आनंद उठाने के उद्देश्य से किया जाता है। अतिथि देवो भवः भारतीय परंपरा प्राचीन काल से रही है। छत्तीसगढ़ में लगभग 138 स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के आधार पर पर्यटन स्थल के रूप में प्राथमिकता दी गई है, जिसमें 58 स्मारकों को 11 अभ्यारण 03 राष्ट्रीय उद्यान को संरक्षित घोषित किया गया है। पर्यटन मानव की प्राचीन एवं मौलिक प्रवृत्ति है। पर्यटन धरातलीय तथा मानवीय विभिन्नताओं विविधताओं का अवलोकन कर ज्ञान की बढ़ोतरी एवं मनोरंजन करता है। छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का एक प्रमुख गंतव्य है। यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर ने इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने उत्तराखंड के चार धाम की तर्ज पर राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए शक्तिपीठ परियोजना की शुरुआत की है। इस परियोजना के तहत लगभग 1,000 किलोमीटर लंबे आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शक्तिपीठों एवं महत्वपूर्ण पूजा स्थलों का विकास, सौंदर्याकरण तथा आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच मार्ग, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, विश्राम स्थल एवं सुरक्षा व्यवस्था जैसी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।   छत्तीसगढ़ आस्था पथ (शक्तिपीठ भ्रमण) योजना प्रारंभ करने जा रहे हैं, जिसमें पांचों शक्तिपीठों का भ्रमण एवं दर्शन कराया जाएगा, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के  बजट में 5 करोड़ का  प्रावधान किया है। प्रदेश के पांच शक्तिपीठों कुदरगढ़, डोगरगढ़, रतनपुर, चन्द्रपुर एवं दंतेवाड़ा को शक्तिपीठ सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए बजटीय प्रावधान किया है। इस परियोजना के तहत रतनपुर स्थित मां महामाया, चंद्रपुर की मां चंद्रहासनी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी और सूरजपुर के कुदरगढ़ मंदिर को एक धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जाना था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरकार गठन के बाद बजट में इसके लिए पांच करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था, जिससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद थी। इन पाँचों शक्तिपीठों को बेहतर सड़कों, यात्री सुविधाओं, विश्राम स्थलों और सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ना। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और जिला प्रशासन द्वारा इन मंदिरों में सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का काम तेजी से किया जा रहा है। केंद्र सरकार की प्रसाद (PRASHAD)योजना के तहत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले स्थित माँ महामाया मंदिर, रतनपुर के समग्र विकास के लिए 200 करोड़ की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसे केन्द्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय को प्रेषित की गई है। उक्त कार्य योजना को स्वीकृति मिलते ही एंजेसी तय कर कार्य प्रारंभ की जाएगी। यह मंदिर 11वीं-12वीं शताब्दी के दौरान कलचुरी राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा बनवाया गया था और यह माँ महालक्ष्मी एवं माँ महासरस्वती को समर्पित है। यह दक्षिण कोशल क्षेत्र की आराध्य देवी और रतनपुर राज्य की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं। इसके अलावा डोंगरगढ़, कुदरगढ़, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा की शक्तिपीठों के लिए सीपीआर तैयार करने प्रक्रियाधीन है। प्रसाद योजना के तहत केंद्र सरकार ने प्रथम चरण में देश के 26 धार्मिक तीर्थ स्थलों का चयन किया है। इन्हें पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा रहा है ताकि देश-विदेश के पर्यटक यहां पहुंच सकें। पर्यटन को बढ़ावा मिले। इन स्थलों की प्रसिद्धी का विस्तार हो। हमारे प्रमुख देवी तीर्थ स्थल महामाया मंदिर और दंतेश्वरी मंदिर को प्रसाद योजना में शामिल करवाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाकर केंद्र सरकार को भेजा गया है। यह सुविधाएं की जानी है विकसित पांचों शक्तिपीठों में गार्डन, ठहने की व्यवस्था, लाइटिंग, हवन-पूजन स्थल, रेलिंग, पानी, सामुदायिक शौचालय, बैठने की व्यवस्था, रोप-वे, पर्यटन मंडल का केंद्र, सीसीटीवी कैमरा, सुरक्षा व्यवस्था और होम स्टे आदि की सुविधाएं विकसित की जानी है। इन स्थलों में बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, सुव्यवस्थित पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता के साथ विकसित किया जाएगा। इन पर्यटन स्थलों की विशिष्टता को ध्यान में रखते हुए उनके विकास में स्थानीय वास्तुकला, संस्कृति और प्राकृतिक परिवेश के संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। 1.    मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में स्थित डोंगरगढ़ की सुरम्य पहाड़ियों की गोद में विराजी माँ बम्लेश्वरी देवी इस क्षेत्र की ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का मुख्य केंद्र हैं। समुद्र तल से लगभग 1600 फीट की ऊँचाई पर पहाड़ी पर स्थित यह पवित्र मंदिर माँ शक्ति के पावन रूपों में विशेष स्थान रखता है। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में स्थित माँ बम्लेश्वरी मंदिर का इतिहास लगभग 2200 वर्ष पुराना है। यह एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। 2200 वर्ष पहले यहाँ कामाख्या नगरी (वर्तमान डोंगरगढ़) थी, जहाँ राजा वीरसेन का शासन था। निःसंतान होने पर उन्होंने शिव और दुर्गा की आराधना की। देवी की कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसके बाद उन्होंने इस मंदिर की स्थापना करवाई। 11वीं शताब्दी में कलचुरी राजा कर्णदेव ने इस मंदिर को पुनर्विकसित किया। बाद में 15वीं-16वीं शताब्दी में गोंड राजाओं ने इस क्षेत्र और मंदिर का विस्तार किया। मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ ही नहीं देश-विदेशों में भक्तों के लिए आस्था का केंद्र हैं। मां बम्लेश्वरी मंदिर का इतिहास 2500 वर्ष से भी प्राचीन बताया जाता है। केंद्र सरकार ने यहां प्रसाद योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर की परियोजना की घोषणा की है। 2.    मां महामाया मंदिर रतनपुर रतनपुर महामाया मंदिर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रतनपुर में स्थित एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक सिद्ध शक्तिपीठ है। बिलासपुर-कोरबा मार्ग पर महामाया देवी का यह मंदिर 1050 ईसवी में बना बताया जाता है। राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा स्थापित मंदिर क्षेत्र को कलचुरियों की राजधानी माना जाता है। यह कलचुरी राजाओं की कुलदेवी का ऐतिहासिक मंदिर है, जहाँ माता का कंधा गिरने की मान्यता है। इस मंदिर का निर्माण 11वीं-12वीं शताब्दी (लगभग 12-13वीं शताब्दी) में कलचुरी वंश के राजा रतनदेव प्रथम द्वारा कराया गया था। बाद में 1492 ईस्वी (विक्रम संवत 1552) में राजा बहार साईं ने वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार व निर्माण कराया। गर्भगृह में माँ महामाया की दुर्लभ दोहरी (ड्यूअल) … Read more

सारसमाल में कर्मा पूजा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, मांदर की थाप पर समाजजनों के साथ किया पारंपरिक कर्मा नृत्य

रायगढ़ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का गौरवशाली इतिहास है। हमारी जनजातीय संस्कृति में प्रकृति केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि आराध्य है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की जो सीख आदिवासी समाज ने सदियों से अपने जीवन और परंपराओं के माध्यम से दी है, वह आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। कर्मा पर्व इसी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है। मुख्यमंत्री  साय आज रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल स्थित माध्यमिक शाला के खेल मैदान में उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने भगवान करम देव तथा आराध्य देव भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की। कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति की जीवंत छटा उस समय और मनोहारी हो उठी, जब कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री  साय स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे। मांदर की थाप और पारंपरिक लोकधुनों के बीच मुख्यमंत्री ने महिला-पुरुषों के साथ कर्मा नृत्य किया। मुख्यमंत्री की आत्मीय और सहज सहभागिता से समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। जनजातीय महापुरुषों का संघर्ष हमारी अमूल्य विरासत मुख्यमंत्री  साय ने कर्मा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने देश की संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर सहित अनेक जनजातीय महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनके त्याग, तपस्या और बलिदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय  अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के कल्याण और विकास को विशेष प्राथमिकता देते हुए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। इससे जनजातीय समाज के विकास के प्रयासों को संस्थागत आधार और नई गति मिली। आज प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सम्मान के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल, आजीविका और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए व्यापक स्तर पर कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु विराजमान हैं। छत्तीसगढ़ में भी जनजातीय समाज के एक बेटे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। यह जनजातीय समाज के बढ़ते सम्मान और भागीदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नया रायपुर में स्थापित जनजातीय संग्रहालय हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यहां जनजातीय समाज के इतिहास, जीवनशैली, परंपराओं, संस्कृति और वीर महापुरुषों के योगदान को जानने-समझने का अवसर मिलता है। हमारी सरकार जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए समाज को विकास के आधुनिक अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। कर्मा पर्व हमारी जड़ों और प्रकृति से जुड़ाव का उत्सव मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आदिवासी समाज मूल रूप से प्रकृति का उपासक है। प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण हमारी परंपराओं में रचा-बसा है। कर्मा पर्व नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन की भावना को अभिव्यक्त करता है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ते हैं। उन्होंने समाजजनों से अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए शिक्षा और आधुनिक अवसरों को अपनाकर समाज तेजी से आगे बढ़ सकता है। संस्कृति हमारी पहचान है और शिक्षा हमारे उज्ज्वल भविष्य का आधार है। शिक्षा से खुलेगा प्रगति का मार्ग, युवा ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करें मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। आज हमारे युवाओं के सामने अवसरों की कमी नहीं है। आवश्यकता है कि वे अपना लक्ष्य निर्धारित करें, परिश्रम करें और उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। नालंदा परिसर जैसी आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक संसाधन मिल सकें। मुख्यमंत्री ने युवाओं से राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए भी प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है, जिससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि समाज तभी तेजी से आगे बढ़ेगा, जब हमारी नई पीढ़ी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक, उद्योग, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगी। युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार खुल रहे नए अवसर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। शासकीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं के साथ रोजगार मेलों और उद्योगों के माध्यम से युवाओं के लिए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का उद्देश्य भी स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, रोजगार मेलों और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी रखें तथा इनका अधिकतम लाभ उठाएं। शिक्षा और रोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने वाला प्रत्येक युवा अपने परिवार के साथ पूरे समाज की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। जनजातीय अंचलों में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही विकास की योजनाएं मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में … Read more

33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन से 16 गांवों को मिलेगी बेहतर बिजली आपूर्ति, लो वोल्टेज की समस्या से मिलेगी राहत

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल से नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा आम नागरिकों को बेहतर विद्युत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री  साय के गृह जिले जशपुर के नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात मिली है। जिले के फरसाबहार तहसील अंतर्गत ग्राम समडमा में 2 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। इस सब स्टेशन के शुरू होने से क्षेत्र के 16 गांवों के बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति का लाभ मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही लो वोल्टेज की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। नागलोक क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से लो वोल्टेज और बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने के कारण घरेलू विद्युत उपकरणों के संचालन, कृषि कार्यों और अन्य दैनिक गतिविधियों में कठिनाइयां होती थीं। क्षेत्र की इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर समडमा में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कराया जा रहा है। इसके पूर्ण होने से स्थानीय विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी तथा बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार होगा। समडमा सहित 16 गांवों के हजारों ग्रामीणों को मिलेगा बेहतर बिजली व्यवस्था का लाभ समडमा में निर्माणाधीन 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन से समडमा, सांको, साहिलता, बांसाझाल, छरला, मांझापारा, कोरचिकानी, लावाकेरा, जूनाडीह, जगदमपुर, रेंगारमुण्डा, जाडामल, बेलडीपा, चालडीह, जामडांड और रंगीयाडीपा सहित आसपास के क्षेत्रों के विद्युत उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। विद्युत सब स्टेशन के शुरू होने से इन गांवों में बिजली वितरण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी। इससे उपभोक्ताओं को पर्याप्त वोल्टेज के साथ बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की गुणवत्ता में सुधार होने से लोगों के दैनिक जीवन में सहूलियत बढ़ेगी। कृषि, शिक्षा और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा समडमा में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे क्षेत्र की कृषि, शिक्षा, छोटे व्यवसाय और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर विद्युत आपूर्ति से किसानों को सिंचाई पंप और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन में सुविधा होगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के संचालन में भी सहूलियत मिलेगी। इसके साथ ही घरों में विद्युत उपकरणों का उपयोग अधिक सुगम होगा और विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। विद्युत अधोसंरचना के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और स्थानीय विकास को गति देने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय की पहल से दूरस्थ अंचलों में मजबूत हो रही विद्युत अधोसंरचना मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समडमा में 2.91 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन विद्युत सब स्टेशन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके शुरू होने से नागलोक क्षेत्र में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। लंबे समय से बिजली संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे क्षेत्रवासियों ने विद्युत सब स्टेशन के निर्माण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। ग्रामीणों ने इस महत्वपूर्ण सुविधा के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि सब स्टेशन के शुरू होने से क्षेत्र में लो वोल्टेज की समस्या दूर होगी और बिजली आपूर्ति व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

कभी बरसात में टपकती थी छत, अब पक्के घर में सुरक्षित जीवन बिता रहे पहाड़ी कोरवा दिलबंधु

रायपुर  कभी बरसात शुरू होते ही घर की टपकती छत की चिंता सताने लगती थी। मिट्टी के कच्चे मकान में रहने के कारण बारिश के दिनों में परिवार को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। छत से पानी टपकने पर बार-बार खपरा लगाकर मरम्मत करनी पड़ती थी, लेकिन अब वे दिन बीते समय की बात हो गए हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मानिकप्रकाशपुर निवासी विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के  दिलबंधु के जीवन में प्रधानमंत्री जनमन योजना ने महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। योजना के अंतर्गत पक्का आवास मिलने से उनका परिवार अब सुरक्षित और बेहतर वातावरण में रह रहा है। इसके साथ ही गांव में सड़क, पेयजल, गैस चूल्हा और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से उनके दैनिक जीवन की परेशानियां भी कम हुई हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रारंभ प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को आवास सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में भी इन सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई जा रही है। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सामने आई दिलबंधु की कहानी दर्शाती है कि पक्के आवास और गांव में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार से जनजातीय परिवारों के जीवन में किस प्रकार सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। बरसात में खपरा लगाकर करनी पड़ती थी छत की मरम्मत, अब मिली स्थायी राहत दिलबंधु बताते हैं कि पहले उनका परिवार मिट्टी के बने कच्चे मकान में रहता था। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकना सबसे बड़ी परेशानी थी। बारिश के पानी से बचने के लिए उन्हें बार-बार खपरा लगाकर छत की मरम्मत करनी पड़ती थी। कच्चे मकान की स्थिति के कारण परिवार को हर वर्ष बारिश के दिनों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीमित संसाधनों के कारण स्वयं का पक्का घर बनाना आसान नहीं था, इसलिए परिवार लंबे समय से बेहतर आवास की आवश्यकता महसूस कर रहा था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत पक्का आवास मिलने से दिलबंधु के परिवार की यह परेशानी दूर हो गई है। अब उन्हें बरसात के समय छत से पानी टपकने या बार-बार मरम्मत करने की चिंता नहीं रहती। पक्के मकान ने परिवार को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के साथ रहने की बेहतर व्यवस्था भी प्रदान की है। दिलबंधु के लिए यह केवल मकान का निर्माण नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही कठिनाइयों से मुक्ति और सम्मानजनक जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। सड़क और स्ट्रीट लाइट से आवागमन हुआ सुगम, पेयजल और गैस चूल्हे से मिली सुविधा दिलबंधु के जीवन में बदलाव केवल पक्के आवास तक सीमित नहीं है। गांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से भी उनके परिवार को राहत मिली है। वे बताते हैं कि पहले गांव में झाड़ी-झंखाड़ अधिक थे और सड़कों की स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण आवागमन में परेशानी होती थी। विशेष रूप से दैनिक जरूरतों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। अब सड़क निर्माण होने से ग्रामीणों का आवागमन पहले की तुलना में आसान हुआ है। इसके साथ ही सड़क पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था होने से प्रकाश की सुविधा उपलब्ध हुई है। गांव में पेयजल और परिवार को गैस चूल्हे की सुविधा मिलने से भी दैनिक जीवन अधिक सुगम हुआ है। इन सुविधाओं ने परिवार की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद की है। दिलबंधु बताते हैं कि पहले की तुलना में अब गांव में रहने की व्यवस्था बेहतर हुई है और रोजमर्रा के कामकाज में होने वाली परेशानियां कम हुई हैं। पीएम जनमन से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को मिल रहा बेहतर जीवन का अवसर प्रधानमंत्री जनमन योजना का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों तक आवास और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले इन परिवारों के लिए पक्का आवास, सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं जीवन स्तर में सुधार का महत्वपूर्ण आधार हैं। इन सुविधाओं के विस्तार से परिवारों को सुरक्षित आवासीय वातावरण मिलने के साथ दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सुविधा होती है। मानिकप्रकाशपुर निवासी दिलबंधु का अनुभव इस बदलाव का उदाहरण है। पहले उनका परिवार कच्चे मकान और खराब सड़क जैसी परेशानियों का सामना करता था, जबकि अब पक्के आवास और गांव में विकसित सुविधाओं से जीवन अधिक सुविधाजनक हुआ है। विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को योजनाओं से जोड़ने के प्रयास उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और बेहतर रहन-सहन के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। पक्का घर मिलने पर दिलबंधु ने जताई खुशी, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति व्यक्त किया आभार प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत पक्का आवास मिलने पर दिलबंधु ने खुशी व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि पहले मिट्टी के कच्चे मकान में बरसात के दौरान काफी कठिनाइयां होती थीं। छत से पानी टपकने के कारण बार-बार मरम्मत करनी पड़ती थी, लेकिन अब पक्का घर बनने से परिवार को इन परेशानियों से राहत मिली है। गांव में सड़क, पेयजल, गैस चूल्हा और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से उनका रहन-सहन भी बेहतर हुआ है। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत दिलबंधु की यह कहानी विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के जीवन में शासकीय योजनाओं से आ रहे सकारात्मक बदलाव को सामने लाती है। कभी बारिश के दिनों में कच्चे मकान की टपकती छत से परेशान रहने वाला उनका परिवार आज पक्के आवास में सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहा है। इसके साथ ही गांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार ने दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाया है। दिलबंधु का अनुभव दर्शाता है कि आवास और मूलभूत सुविधाओं की पहुंच ग्रामीण एवं जनजातीय परिवारों को बेहतर और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

डिजिटल क्रॉप सर्वे के भुगतान संबंधी शिकायत पर कृषि विभाग ने की कार्यवाही

डिजिटल क्रॉप सर्वे के भुगतान संबंधी शिकायत पर कृषि विभाग ने की कार्यवाही वित्तीय वर्ष 2026-27 में सर्वेयरों के मानदेय के लिए 2,333.33 लाख रुपये का आवंटन जारी रायपुर,  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों से संबंधित कृषि गतिविधियों के संचालन एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्यों के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे में संलग्न सर्वेयरों के मानदेय भुगतान के संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर प्राप्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को प्रकरण का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।           कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एग्रीस्टैक परियोजना के अंतर्गत डिजिटल क्रॉप सर्वे कार्य में संलग्न सर्वेयरों के मानदेय भुगतान के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में दो किस्तों में राशि आवंटित की गई है। इनमें प्रथम किस्त के रूप में 1,399.99 लाख रुपये तथा द्वितीय किस्त के रूप में 933.33 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार कुल 2,333.33 लाख रुपये का आवंटन उपलब्ध कराया गया है। विभागीय पत्र में उल्लेखित विवरण के अनुसार, उक्त आवंटन में से 1,109.16 लाख रुपये व्यय किया जाना प्रतिवेदित है, जो कुल आवंटन का 47.54 प्रतिशत है। शेष राशि के व्यय एवं भुगतान की स्थिति का नियमानुसार परीक्षण किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायत पर विभागीय कार्रवाई       जिला बालोद के डौंडीलोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम रेंगाडबरी निवासी सत्यानंद नायक द्वारा डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्य के मानदेय का भुगतान नहीं होने के संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आवेदक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में किए गए डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्य का भुगतान अब तक प्राप्त नहीं होने की बात कही थी।         प्राप्त शिकायत का कृषि विभाग ने उपलब्ध अभिलेखों एवं आवंटित राशि के विवरण के आधार पर प्रकरण का परीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। शासकीय अभिलेखों के अनुसार, शिकायत का निराकरण संबंधित विभागीय प्रक्रिया के अंतर्गत अपेक्षित है। विभाग को निर्देशित किया गया है कि शिकायत में उल्लेखित तथ्यों की जांच करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा प्रकरण के निराकरण की स्थिति सुनिश्चित की जाए। पारदर्शिता के साथ शिकायतों के निराकरण पर जोर         मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके परीक्षण एवं निराकरण की प्रक्रिया अपनाई जाती है। डिजिटल क्रॉप सर्वे के मानदेय भुगतान से संबंधित इस प्रकरण में भी संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है। इससे शिकायतों के परीक्षण, विभागीय जवाबदेही तथा लंबित प्रकरणों के नियमानुसार निराकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

सरगुजा संभाग में फसल विविधीकरण और सहायक आजीविका गतिविधियों के विस्तार पर विशेष जोर

रायपुर किसानों की आय बढ़ाने कृषि के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा सरगुजा संभाग में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए परंपरागत खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, कुक्कुटपालन, बकरीपालन और उद्यानिकी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को खेती के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा उपलब्ध कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संभाग स्तर पर समन्वित कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसी क्रम में सरगुजा संभागायुक्त  नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने खरीफ 2026 एवं रबी 2026-27 की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को योजनाओं का प्रभावी और समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अम्बिकापुर स्थित कमिश्नर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर एवं सूरजपुर जिलों के कृषि, पशुधन विकास, उद्यानिकी और मत्स्य पालन विभाग सहित कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी उपस्थित थे। संभागायुक्त ने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए केवल फसल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कृषि के साथ सहायक आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाएं। फसल विविधीकरण और पड़ती भूमि के उपयोग से बढ़ेगा कृषि उत्पादन संभागायुक्त  दुग्गा ने खरीफ 2026 के क्षेत्राच्छादन, फसल विविधीकरण और रबी मौसम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए पड़ती भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि रबी मौसम में उपलब्ध नमी और सिंचाई संसाधनों का उपयोग कर अतिरिक्त क्षेत्र में खेती के लिए उपयुक्त फसलों का चयन किया जाए। धान आधारित फसल पद्धति में दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों को शामिल करने तथा किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के अंतर्गत चयनित उपार्जन केंद्रों के कैचमेंट क्षेत्रों में फसलवार संभावित आवक का आकलन करने और किसानों को योजना के संबंध में जागरूक करने की रणनीति तैयार करने पर चर्चा हुई। संभागायुक्त ने प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के निर्धारित संकेतकों की प्रगति, एकीकृत किसान पोर्टल पर किसानों के पंजीयन तथा ग्रीष्मकालीन धान का रकबा शून्य करने के लिए तैयार कार्ययोजना की भी समीक्षा की। उन्होंने नील-हरित काई, हरी खाद और अन्य वैकल्पिक माध्यमों से पोषण प्रबंधन को बढ़ावा देने तथा कृषि में उन्नत तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया। रबी सीजन में बीज और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश संभागायुक्त ने रबी 2026-27 के लिए बीज एवं उर्वरकों की मांग, उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जिलेवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक उपलब्ध हों तथा वितरण प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित रहे। बैठक में पायलट प्रोजेक्ट वाले जिलों में फर्टिलाइजर सेल फ्रेमवर्क (एफएफएस) के माध्यम से उर्वरक वितरण के अनुभवों की जानकारी ली गई। साथ ही रबी 2026-27 से इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की गई। कृषि आदानों की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं में जिलेवार व्यय तथा खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयलसीड और आत्मनिर्भरता दलहन मिशन की प्रगति की भी समीक्षा हुई। संभागायुक्त ने ऑयल पाम एवं अन्य फलदार पौधों के रोपण क्षेत्रों में अंतरवर्तीय फसलों की संभावनाएं तलाशने और किसानों को उद्यानिकी आधारित खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से ग्रामीण परिवारों को मिलेंगे अतिरिक्त आय के अवसर पशुधन विकास विभाग की समीक्षा के दौरान संभागायुक्त ने दुग्ध उत्पादन, कुक्कुटपालन और बकरीपालन जैसी गतिविधियों को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) एवं पीपीआर टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, वत्सोत्पादन, गौधाम एवं गौशालाओं के संचालन तथा दुग्ध सहकारी समितियों के गठन की प्रगति की जानकारी ली। दुधारू पशु प्रदाय पायलट प्रोजेक्ट, मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट की गतिविधियों और विभागीय योजनाओं के अंतर्गत हितग्राही चयन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। बैठक में स्थानीय निकायों द्वारा स्थापित एबीसी सेंटरों के कार्यों के साथ राज्य बजट 2026-27 एवं वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत पशु चिकित्सालय और पशु औषधालय भवनों के निर्माण से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। संभागायुक्त ने पशुपालकों को विभागीय योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और पशु चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मत्स्य पालन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और झींगा पालन की संभावनाएं तलाशने पर जोर संभागायुक्त  दुग्गा ने मत्स्य पालन विभाग की समीक्षा करते हुए तालाबों, जलाशयों और अमृत सरोवरों का उपयोग मत्स्य उत्पादन एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन के लिए करने पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, राज्य योजनाओं, किसान क्रेडिट कार्ड तथा नेशनल फिशरमेन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीयन की प्रगति की जानकारी ली। साथ ही तालाबों एवं जलाशयों के पट्टा आवंटन और फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने मत्स्य पालन गतिविधियों में महिलाओं और महिला समूहों की भागीदारी बढ़ाने तथा सरगुजा संभाग में झींगा पालन की संभावनाओं का आकलन करने के निर्देश दिए। मत्स्य पालन को कृषि के साथ अतिरिक्त आय के प्रभावी साधन के रूप में विकसित करने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। संभागायुक्त  दुग्गा ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन अलग-अलग गतिविधियों के बजाय समन्वित आजीविका विकास के दृष्टिकोण से किया जाए। किसानों को फसल विविधीकरण, उन्नत कृषि तकनीकों और सहायक व्यवसायों के लिए प्रोत्साहित करने के साथ योजनाओं की नियमित निगरानी की जाए, ताकि सरगुजा संभाग के अधिक से अधिक किसान और ग्रामीण परिवार इनका लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

दुर्ग न्यायालय में तकनीक से सिमट रही दूरी: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जमानत आवेदन का निराकरण, मुंबई और चेन्नई के गवाहों के बयान दर्ज

रायपुर न्याय पाने के लिए दूरी बाधा न बने और न्यायिक प्रक्रिया समय तथा संसाधनों के लिहाज से अधिक सुगम हो – इसी उद्देश्य से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक जमानत आवेदन पर सुनवाई कर उसका निराकरण किया गया, वहीं मुंबई और चेन्नई में मौजूद महत्वपूर्ण गवाहों के बयान एवं प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही भी पूरी कराई गई। यह पहल न्यायिक कार्यों में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने तथा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। *जब न्यायालयीन कार्यवाही में दूरी बाधा नहीं बनी*          एक प्रकरण में अधिवक्ताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जमानत आवेदन पर अपना पक्ष रखा। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आवेदन का विधिवत निराकरण किया। इस व्यवस्था से अधिवक्ताओं को वर्चुअल माध्यम से कार्यवाही में भाग लेने की सुविधा मिली और आवागमन में लगने वाले समय एवं संसाधनों की बचत में सहायता मिली। *मुंबई और चेन्नई से जुड़े गवाहों के दुर्ग न्यायालय में दर्ज हुए साक्ष्य*           एक अन्य विचारणाधीन प्रकरण में मुंबई और चेन्नई में निवासरत महत्वपूर्ण गवाहों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायिक कार्यवाही से जोड़ा गया। निर्धारित तकनीकी एवं विधिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उनके बयान दर्ज किए गए तथा प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही पूरी कराई गई। इससे लंबी दूरी की यात्रा से जुड़ी कठिनाइयों को कम करने और साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सुविधा मिली। *डिजिटल न्याय के साथ जनजागरूकता पर भी जोर*           न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक का वास्तविक लाभ तभी व्यापक रूप से सामने आता है, जब नागरिकों और संबंधित हितधारकों को इसकी उपलब्ध सुविधाओं तथा उपयोग के तरीकों की जानकारी हो। इसी दृष्टिकोण के तहत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में प्राधिकरण द्वारा डिजिटल माध्यमों और तकनीकी संसाधनों के उपयोग के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं।             इन प्रयासों के अंतर्गत आम नागरिकों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों तथा अन्य संबंधित हितधारकों तक विभिन्न माध्यमों से पहुँचकर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य नागरिकों को न्यायिक एवं विधिक सेवाओं की उपलब्ध सुविधाओं से परिचित कराना, तकनीक के प्रभावी उपयोग के प्रति जागरूक बनाना तथा पात्र व्यक्तियों को विधिक सहायता और न्याय तक पहुँचने के उपलब्ध माध्यमों की जानकारी देना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग का यह प्रयास न्यायिक संस्थाओं और आम नागरिकों के बीच संवाद को मजबूत करने तथा डिजिटल न्याय व्यवस्था के लाभों को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण : अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ में पत्रकारों के सवालों के जवाब में धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताया है। रायगढ़ में मीडिया से चर्चा के दौरान इस संबंध में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलने को लेकर यह निर्णय दूरगामी महत्व रखता है  और इससे निश्चित रूप से अवैध धर्मांतरण पर भी रोक लगेगी। मुख्यमंत्री  साय आज रायगढ़ में कोलता समाज द्वारा आयोजित नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने आमंत्रण के लिए समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी समाजजनों को नुआखाई और शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलता समाज शिक्षित, संगठित और प्रगतिशील समाज है। समाज के लोग शिक्षा, कृषि और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी कोलता समाज की महत्वपूर्ण भागीदारी है। मुख्यमंत्री  साय ने समाज की गतिविधियों को और सुदृढ़ करने के लिए नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के भवन हेतु 50 लाख रुपए तथा ग्राम कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपए देने की घोषणा की। मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के आयोजन पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों से प्रदेश में महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन मिलेगा और हमारी बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इन मुकाबलों में पहुंचकर महिला खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।

छत्तीसगढ़ के दुर्गम गांवों में बदली तस्वीर, दंतेवाड़ा-सुकमा सीमा पर 228 घरों तक पहुंचा नल का पानी

सेवा संकल्प की कहानी घने जंगलों के बीच दंतेवाड़ा-सुकमा सीमा पर बसे 228 घरों तक पहुंचा नल से जल एडपाल और डोडपाल बने ‘हर घर जल ग्राम’, परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी हुई आसान रायपुर,  दंतेवाड़ा और सुकमा जिले की सीमा पर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे एडपाल और डोडपाल गांवों के 228 परिवारों को अब घर पर ही नल से पेयजल मिल रहा है। जल जीवन मिशन से इन दूरस्थ गांवों में वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या दूर हुई है। पहले ग्रामीणों को पेयजल के लिए हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ता था। अब घर-घर नल कनेक्शन मिलने से विशेष रूप से महिलाओं की दिनचर्या आसान हुई है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण जीवन में आए बदलाव की यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  एडपाल के 137 और आश्रित ग्राम डोडपाल के 91 घरों में नल से  शुद्ध पेयजल उपलब्ध          दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर कटेकल्याण विकासखंड की ग्राम पंचायत एडपाल के 137 और उसके आश्रित ग्राम डोडपाल के 91 घरों में जल जीवन मिशन के तहत नल से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। दोनों गांवों को ‘हर घर जल ग्राम’ का दर्जा भी मिल चुका है। पानी लाने की मशक्कत से मिली मुक्ति        घर तक पानी पहुंचने का सबसे अधिक लाभ महिलाओं को मिला है। पहले गर्मी और बरसात के दिनों में भी उन्हें पानी के लिए घर से दूर जाना पड़ता था। इसमें सुबह का काफी समय बीत जाता था। अब पानी लाने की मशक्कत से राहत मिलने के साथ घरेलू कामकाज, बच्चों की देखभाल और आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए अधिक समय मिल रहा है। पानी की चिंता हुई दूर          एडपाल की वार्ड पंच बुदरी मंडावी और ग्रामीण महिला जोगी मरकाम बताती हैं कि घर में नल लगने से पानी की चिंता दूर हुई है। महिलाएं अब सब्जी बाड़ी, वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी के कामों में अधिक समय दे पा रही हैं। बच्चों को भी पानी लाने में समय लगाने के बजाय पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है। पानी की शुद्धता भी जांच रही गांव की महिलाएं        इन गांवों में पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी महिलाओं ने संभाली है। इसके लिए गठित ‘जल वाहिनी’ समूह की प्रशिक्षित महिलाएं फील्ड टेस्ट किट से पानी की नियमित जांच कर रही हैं। इससे ग्रामीणों में स्वच्छ पेयजल के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ जलजनित बीमारियों से बचाव के प्रयासों को भी बल मिल रहा है। पूरे परिवार की रोजमर्रा जिंदगी हुई आसान         डोडपाल में आयोजित ‘ग्राम जल उत्सव’ में ग्रामीणों ने घर-घर पेयजल सुविधा मिलने पर खुशी जताई। जल जीवन मिशन से दूरस्थ वनांचल के गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचने से महिलाओं और बच्चों सहित पूरे परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो रही है।