samacharsecretary.com

सुकमा: जहाँ सड़कों का अंत होता है, वहीं से शुरू होती है उम्मीद की नई किरण

सुकमा जहाँ सड़कें खत्म होती हैं, वहाँ से शुरू होती है उम्मीद की नई किरण मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है रायपुर छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला, जो कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत वनांचल के उन हिस्सों तक डॉक्टर और दवाइयां पहुँच रही हैं, जहाँ पहुँचना कभी नामुमकिन सा लगता था। यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर की पहाड़ियों में बसने वाले आदिवासियों के लिए जीवन का नया उजाला बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान आज सुकमा के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है। दहलीज पर डॉक्टर- घर-घर जांच और उपचार            इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पहुँच है। स्वास्थ्य कर्मी अब केवल अस्पतालों में मरीजों का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि खुद पैदल चलकर दुर्गम गांवों तक पहुँच रहे हैं। मलेरिया, टीबी और कुष्ठ जैसी बीमारियों की मौके पर जांच कर रहे हैं। जीवनशैली बीमारियां, बीपी, शुगर, सिकलसेल और कैंसर जैसे गंभीर रोगों की पहचान कर उपचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। संकल्प की शक्ति- 310 किलोमीटर का जीवन सफर              हाल ही में पुटेपढ़ गांव से एक मरीज को जिला अस्पताल तक पहुँचाने की घटना स्वास्थ्य विभाग के समर्पण का जीवंत उदाहरण है। कलेक्टर सुकमा के मार्गदर्शन में पोटकपल्ली की टीम ने मरीज को किस्टाराम से होते हुए सुकमा जिला अस्पताल पहुँचाया। 310 किलोमीटर की यह चुनौतीपूर्ण यात्रा केवल एक रेफरल नहीं था, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग, समय पर निर्णय और मजबूत फॉलो-अप का परिणाम था, जिसने एक अनमोल जीवन बचा लिया। आयुष्मान भारत- आर्थिक बेड़ियों से आजादी              मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के अनुसार आयुष्मान भारत योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 5 लाख रूपए तक का मुफ्त इलाज अब ग्रामीणों को इलाज के लिए जमीन बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। हाल ही में किस्टाराम और मरईगुड़ा के 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर दिए गए, ताकि इलाज में एक क्षण की भी देरी न हो। आयुर्वेद और आधुनिकता का संगम             छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र औषधीय गुणों का खजाना है। मुख्यमंत्री ने श्री साय ने पद्मश्री हेमचंद मांझी के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे पारंपरिक आयुर्वेद से कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार संभव हो रहा है। राज्य सरकार अब आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ इन प्राकृतिक संसाधनों को भी बढ़ावा दे रही है।  जमीनी स्तर पर व्यापक प्रभाव            अभियान के अंतर्गत केवल गंभीर रोगों का ही नहीं, बल्कि सामान्य विकारों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है कोंटा क्षेत्र के 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरण और मोतियाबिंद का परामर्श, अस्थमा और पैरों में सूजन जैसी समस्याओं के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित कर उपचार किया गया।             पोटकपल्ली और मरईगुड़ा जैसे अंदरूनी इलाकों से आती सफलता की ये कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि जब प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मी सेवा भाव से जुटते हैं, तो भूगोल की बाधाएं छोटी पड़ जाती हैं।

अवैध तोता कारोबार पर छापा पड़ा भारी, जगदलपुर में वन विभाग की टीम पर हमला

जगदलपुर. जिले में तोतों की अवैध खरीद-फरोख्त के खिलाफ की गई कार्रवाई के दौरान बड़ा बवाल हो गया। नवजात तोता बच्चों की बिक्री की शिकायत पर पहुंची फ्लाइंग स्क्वॉड टीम को मौके पर ही विरोध का सामना करना पड़ा, जो बाद में हिंसा में बदल गया। मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। जानकारी के अनुसार, टीम ने मौके पर नवजात तोता बच्चों की अवैध बिक्री होते हुए पाया, जिसके बाद कार्रवाई शुरू की गई। इसी दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और स्थिति ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि फ्लाइंग स्क्वॉड प्रभारी अक्षय कश्यप और उनके साथ मौजूद रेंजर पर तोता बेचने वाले व्यक्ति और कुछ अन्य लोगों ने हमला कर दिया। इतना ही नहीं, रेंजर को खंभे से बांधकर मारपीट करने का गंभीर आरोप भी सामने आया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और वन्यजीव तस्करी, सरकारी कार्य में बाधा और हिंसा के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस ने शासकीय कर्मचारी से मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। जिनमें धारा 296, 351, 3, 121, 132, 221, 3(5) बीएनएस शामिल हैं। इलाके में तनाव, जांच जारी घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अवैध वन्यजीव व्यापार से जुड़े नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

सुशासन तिहार और जनगणना के लिए प्रशासन ने पूरी की तैयारियां

सुशासन तिहार और जनगणना को लेकर प्रशासन पूरी तरह तैयार  30 अप्रैल तक लंबित प्रकरण निपटाने के निर्देश 1 मई से दो बड़े अभियान शुरू : 73 शिविरों के साथ सुशासन तिहार टीएल बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल की समीक्षा, प्रशासनिक तैयारियों को दिया अंतिम रूप बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने टीएल बैठक लेकर आगामी 1 मई से शुरू हो रहे सुशासन तिहार और जनगणना कार्य की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को 30 अप्रैल तक सभी लंबित मामलों के निराकरण के निर्देश देते हुए दोनों महत्वपूर्ण अभियानों को सफल बनाने के लिए पूरी मुस्तैदी से कार्य करने को कहा।       कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मंगलवार को आयोजित टीएल बैठक में जिले में शुरू होने जा रहे दो बड़े अभियानों—सुशासन तिहार और जनगणना—की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सुशासन तिहार प्रारंभ होने से पहले सभी लंबित प्रकरणों का निराकरण कर लिया जाए, ताकि शिविरों में आमजन को त्वरित राहत मिल सके। कलेक्टर ने बताया कि जिले में सुशासन तिहार के दौरान कुल 73 शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 31 शिविर ग्रामीण क्षेत्रों और 42 शिविर शहरी क्षेत्रों में लगाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में शिविरों के संचालन की जिम्मेदारी जनपद पंचायत के सीईओ तथा शहरी क्षेत्रों में निगम आयुक्त एवं संबंधित सीएमओ को सौंपी गई है। शिविर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित स्थलों पर आयोजित होंगे। उन्होंने अधिकारियों को समय पर उपस्थित रहने तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर शिविरों की जानकारी देने के निर्देश दिए।           बैठक में 1 मई से शुरू हो रही जनगणना की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने नागरिकों से 30 अप्रैल तक स्व-गणना फॉर्म भरने की अपील करते हुए कहा कि जनगणना में जानकारी देना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। जानकारी न देने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना से प्राप्त जानकारी का उपयोग केवल नीति निर्माण के लिए किया जाएगा तथा जनगणना अधिनियम 1948 के तहत डेटा की गोपनीयता पूर्णतः सुरक्षित रखी जाएगी। 1 मई से प्रगणक घर-घर जाकर 34 बिंदुओं पर जानकारी एकत्रित करेंगे। कलेक्टर ने जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद के अंतर्गत आगामी 5 वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा। ऐसे कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया, जिनसे अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके और जिनके लिए अन्य स्रोतों से पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है।           प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने शेष पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिले में वर्तमान में 1.02 लाख किसान इस योजना का लाभ ले रहे हैं, जबकि लगभग 25 हजार और किसानों को इससे जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा, खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए खाद और बीज की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अग्रिस्टेक पोर्टल में पंजीकृत किसानों को ही खाद उपलब्ध कराया जाएगा और 1 मई से सॉफ्टवेयर शुरू होने पर वितरण प्रक्रिया प्रारंभ होगी। बैठक में आगामी 9 मई को आयोजित होने वाली लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरण प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने टीएल, जनदर्शन, मुख्यमंत्री घोषणाओं, पीएम पोर्टल तथा उच्च न्यायालय से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

कांग्रेस ने किया बड़ा कदम, पदस्थ बड़े नेता को सस्पेंड किया, गंभीर आरोप लगे; पूरी कहानी जानें

रायपुर  छत्तीसगढ़ के इस जिले में कांग्रेस ने बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने अपने ही नेता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू पर चोरी का पैसा छिपाने का आरोप लगा है। मामले की जानकारी पर जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाला है। कहा- कानून से ऊपर कोई नहीं है।   जानकारी के अनुसार, एक कारोबारी से करीब 50 लाख रुपये की लूट हुई थी। आरोपी चालक कृष्णा साहू कारोबारी से लाखों रूपए लेकर फरार हो गया था। मामले में कारोबारी ने पुलिस को शिकायत सौंपी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी चालक कृष्णा साहू द्वारा चोरी के पैसों को छिपाने में ओम प्रकाश साहू की भूमिका सामने आई है। ओम प्रकाश साहू की पहचान बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद के रूप में हुई है। जिसके बाद पार्टी ने सख्त कार्रवाई करते हुए पार्षद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बिरगांव के अध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जिला अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने यह कार्रवाई की। वहीं, पुलिस ने बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू को चोरी का पैसा छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। ऐसे में मामला केवल आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इधर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री (संगठन) मलकीत सिंह गेंदू को भेज दी गई है, ताकि आगे जरूरी कार्रवाई की जा सके। इससे साफ है कि पार्टी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इसमें कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

15 साल बाद उसलापुर रेलवे साइडिंग फिर शुरू, ट्रक मालिकों में उत्साह

15 साल बाद उसलापुर रेलवे साइडिंग फिर शुरू, ट्रक मालिकों में उत्साह आंधी-तूफान के बीच सैकड़ों ट्रक मालिकों की ऐतिहासिक बैठक, संचालन तत्काल शुरू करने का निर्णय वरिष्ठ नेताओं ने संभाला संरक्षक दायित्व, 1 मई को श्रमिक दिवस भव्य रूप से मनाने का ऐलान बिलासपुर  उसलापुर गुड्स शेड वेलफेयर ट्रक ओनर एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक उसलापुर रेलवे साइडिंग में आयोजित हुई, जिसमें खराब मौसम और धूल भरी आंधी के बावजूद सैकड़ों ट्रक मालिकों एवं श्रमिकों ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया। बैठक में 15 वर्षों से बंद पड़ी रेलवे साइडिंग को पुनः शुरू करने का सर्वसम्मति से ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। बैठक में वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल, गुलशन ऋषि, प्रशांत नारंग एवं अशोक श्रीवास्तव ने एसोसिएशन के संरक्षक का दायित्व स्वीकार करते हुए संगठन को मजबूती प्रदान करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि ट्रक मालिकों और श्रमिकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। निर्णय अनुसार, उसलापुर रेलवे साइडिंग पर कार्य तत्काल प्रभाव से प्रारंभ किया जाएगा। सभी ट्रक मालिक एवं श्रमिक अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए नियमित संचालन शुरू करेंगे। यह पहल क्षेत्र के व्यापार और परिवहन व्यवस्था को नई गति देने वाली मानी जा रही है। बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ट्रक मालिक, ड्राइवर और श्रमिक देश की आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ हैं, जो दिन-रात सेवाएं देकर अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, एसोसिएशन द्वारा आगामी 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस को भव्य रूप से मनाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर श्रमिकों के योगदान को सम्मानित करते हुए एकजुटता का प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में नरेश अग्रवाल, गुलशन ऋषि, प्रशांत नारंग, अशोक श्रीवास्तव, ईश्वर सिंह चंदेल, तेजिंदर सिंह बाली, राशिद अली, जीत सिंह, शाहनवाज, इस्माइल, महावीर सिंह, हरजिंदर सिंह, गुरमीत सिंह राणा, समीम, गुड्डू झा, बलजीत सिंह, विनोद पांडे, धीरज यादव, मनजीत सिंह, शिवकुमार, गुरजीत सिंह बाली एवं लेबर अध्यक्ष राजेश टंडन सहित बड़ी संख्या में ट्रक मालिक एवं श्रमिक उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ ने बनाया रिकॉर्ड: मनरेगा श्रमिकों की 97.11% ई-केवाईसी पूरी, देश में अव्वल

रायपुर. छत्तीसगढ़ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए) के तहत श्रमिकों के ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) सत्यापन में भारत में पहले स्थान पर है, जिससे डिजिटल शासन और ग्रामीण पारदर्शिता को बढ़ावा मिल रहा है। भारत सरकार द्वारा 27 अप्रैल (सोमवार) को जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने सक्रिय श्रमिकों के लिए 97.11 प्रतिशत की शानदार पूर्णता दर हासिल की है।  इस प्रदर्शन ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे औद्योगिक दिग्गजों के साथ-साथ केरल जैसे उच्च साक्षरता दर वाले राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया, जो 97.06% के साथ दूसरे स्थान पर रहा। छत्तीसगढ़ ने छोटे और बड़े दोनों राज्यों को पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की। छत्तीसगढ़ में एमएनआरईजीए के तहत 56.87 लाख से अधिक श्रमिकों का डिजिटल सत्यापन (ई-केवाईसी) सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, जो मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को खत्म करने में मदद करती है और यह सुनिश्चित करती है कि मजदूरी सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित हो। इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में वर्तमान सरकार द्वारा प्रभावी निगरानी, ​​रणनीतिक योजना और नेतृत्व के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि एक सुनियोजित राज्यव्यापी अभियान के माध्यम से ई-केवाईसी प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सिस्टम से जुड़ने में मदद मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव ने कहा, “राज्य सरकार गरीब और श्रमिक समुदायों के हितों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का पारदर्शी लाभ मिले। ई-केवाईसी समय पर वेतन भुगतान और श्रमिकों को सीधे लाभ पहुंचाने में मदद कर रहा है।” “यह उपलब्धि अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर काम करने वाली टीमों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। ई-केवाईसी ने न केवल हाजिरी रजिस्टरों में फर्जी उपस्थिति को रोकने में मदद की है, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने में अधिक पारदर्शिता भी लाई है,” उपमुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने दावा किया। राज्य सरकार ने आगे निर्देश दिया कि लंबित मामलों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि राज्य 100 प्रतिशत ई-केवाईसी कवरेज हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके। अधिकारियों ने कहा कि यह उपलब्धि राज्य भर में चलाए गए विशेष अभियानों, ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग का परिणाम है।

खनिज व्यापार में बड़ा सुधार: छत्तीसगढ़ सरकार ने शुरू किया ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ सिस्टम

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने खनिज कारोबार को पारदर्शी बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल लागू होने के बाद अब खदान संचालकों को रॉयल्टी पर्ची के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। ई-रॉयल्टी और ई-ट्रांजिट पास की सुविधा 24 घंटे ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी और मानवीय हस्तक्षेप कम होने से गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी। खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद के अनुसार, नई व्यवस्था से खदानों की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो गई है। इससे अवैध उत्खनन, ओवरलोडिंग और बिना परमिट खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। अब हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिसे कभी भी जांचा जा सकेगा। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) फंड की निगरानी को भी डिजिटल किया गया है। ‘DMF 2.0’ पोर्टल के जरिए अब सभी प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां ऑनलाइन होंगी, जिससे यह स्पष्ट रहेगा कि पैसा किस योजना में और किस उद्देश्य से खर्च किया गया। हर साल करीब 2 हजार करोड़ रुपए के इस फंड में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की गई है। रेत खदानों को लेकर भी सरकार ने ‘वन स्टेट-वन पॉलिसी’ लागू की है। अब खदानों का आबंटन ई-टेंडरिंग के जरिए किया जा रहा है और अब तक करीब 200 नई खदानों की नीलामी हो चुकी है। इससे रेत की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर नियंत्रण की उम्मीद है। बस्तर संभाग में आदिवासी परिवारों को राहत देते हुए टिन की खरीदी दर 640 रुपए से बढ़ाकर 2800-2900 रुपए प्रति किलो कर दी गई है। साथ ही अब भुगतान सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में किया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और आय में सीधा फायदा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर लागू इस डिजिटल सिस्टम से खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।

रेगाकठेरा जलाशय योजना के कार्यों के लिए 2.07 करोड़ रूपए स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखण्ड-अम्बागढ़ चौकी की रेगाकठेरा जलाशय जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 2 करोड़ 7 लाख 82 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने के उपरांत रूपांकित सिंचाई क्षमता 80 हेक्टेयर के विरुद्ध 60 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्य अभियंता महानदी गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग रायपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

सीतारामपुर जलाशय निर्माण कार्य के लिए 6.33 करोड़ रुपये स्वीकृत

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा, बलरामपुर रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड-बलरामपुर जलाशय (बांध) निर्माण कार्य के लिए 6 करोड़ 33 लाख 89 हजार रुपये की राशि स्वीकृत किये गये हैं। योजना के निर्माण से 150 हेक्टेयर में खरीफ और 50 हेक्टेयर में रबी सहित कुल 200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अम्बिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।

प्रोजेक्ट धड़कन’ ने 2 साल की पारूल को दिया नया जीवन, जानें पूरी कहानी

‘प्रोजेक्ट धड़कन’ से 2 साल की पारूल को मिला नया जीवन  ब्रेहबेड़ा की नन्हीं बच्ची की सफल हार्ट सर्जरी, अबूझमाड़ से रायपुर तक पहुंची उम्मीद की धड़कन रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ने नारायणपुर के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा को नया जीवन दिया है। जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त पारूल की रायपुर के सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है।‘प्रोजेक्ट धड़कन’ अब नारायणपुर जिले में योजना भर नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद का नाम बन चुका है जिनके लिए हर नन्हीं धड़कन सबसे कीमती है। थकान से जूझती थी नन्हीं पारूल             अबूझमाड़ अंचल के ब्रेहबेड़ा गांव की पारूल कुछ समय पहले तक जल्दी थक जाती थी और सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी। सीमित संसाधनों के बीच माता-पिता को उसकी गंभीर बीमारी का पता ही नहीं था। फरवरी 2026 में शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट धड़कन’             नारायणपुर जिले में बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए फरवरी 2026 में ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों की हृदय संबंधी जांच कर गंभीर मामलों की शुरुआती पहचान करना है। यह पहल उन सुदूर क्षेत्रों तक पहुंची जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं बेहद सीमित थीं। 3000 बच्चों की स्क्रीनिंग, तीन में मिली बीमारी             अभियान के पहले चरण में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर 3000 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की। तीन बच्चों में हृदय रोग के लक्षण मिले, जिनमें पारूल भी शामिल थी। जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत इलाज की व्यवस्था की। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने इन बच्चों को रायपुर स्थित सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के लिए रवाना किया। 10 अप्रैल को हुई सफल सर्जरी            रायपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद पारूल के हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि की। 10 अप्रैल 2026 को उसकी सफल हार्ट सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में देखभाल हुई। आज पारूल स्वस्थ है, खेल रही है और परिवार की गोद में नई ऊर्जा के साथ पल रही है।  मील का पत्थर साबित हो रही पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’               कलेक्टर नारायणपुर ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ का उद्देश्य सिर्फ बीमारी की पहचान नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार दिलाना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के किसी भी बच्चे को स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में कठिनाई न हो, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों और मैदानी कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। बदलाव की कहानी               पारूल की कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जहां जंगलों-पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक संवेदनशील शासन पहुंच रहा है। यह उस भरोसे की कहानी है जिसमें दूरस्थ परिवारों को भी विश्वास है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।