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प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से सुरक्षित मातृत्व को दिया जा रहा बढ़ावाः मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मातृ वंदन योजना में छत्तीसगढ़ ने ऐसे ही नहीं मारी बाजी शिकायतों का तेज निराकरण और मंजूरी पर फोकस कर हासिल किया देश में पहला स्थान प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से सुरक्षित मातृत्व को दिया जा रहा बढ़ावाः मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय  आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों ने सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की उपलब्धि रायपुर प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना को लाभार्थियों तक पहुंचाने में छत्तीसगढ़ अव्वल रहा है। इससे एक बार फिर साबित हुआ है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में  डबल इंजन की सरकार न सिर्फ जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से अमल में लाती है, बल्कि प्रशासनिक सक्रियता से उसे हर तबके तक समय पर पहुंचाने के अपने वादे को पूरा करती है।  गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रोत्साहित करने की इस केंद्रीय योजना के तेजी से क्रियान्वयन और शिकायतों का त्वरित निपटान कर छत्तीसगढ़ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह सिर्फ एक सरकारी योजना का राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वयन भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर पर्यवेक्षक, परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर के अधिकारियों तक के सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की गई उपलब्धि है। जच्चा एवं बच्चा का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान इस दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। ऐसे मिली उपलब्धि प्रशासनिक अमले द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लगातार मॉनिटरिंग की गई और लाभार्थियों के पंजीयन पर मुख्य रूप से फोकस किया गया। इस योजना का लाभ लेने के लिए वर्ष 2023-24 में जहां 1,75,797 गर्भवती महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, वहीं वर्ष 2024-25 में 2,19,012 रजिस्ट्रेशन किए गए। इसे ही लक्ष्य मानते हुए वर्ष 2025-26 में  फरवरी तक 2,04,138 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया जो लक्ष्य का 93.3 प्रतिशत है। रजिस्ट्रेशन के बाद इसे तुरंत मंजूरी देने पर फोकस किया गया। तय प्रक्रिया के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा फार्म भरने, पर्यवेक्षक द्वारा इसके सत्यापन और परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर पर मंजूरी देने में तेजी लाई गई। भरे गए  आवेदनों के 83 प्रतिशत का परीक्षण कर इसे भुगतान के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से छत्तीसगढ़ को मिली स्वीकृति की दर भी सबसे ज्यादा 83.87 रही है। इसके बाद तीसरी कैटेगरी शिकायतों के निराकरण के संबंध में आंकड़ों का परीक्षण किया गया। लाभार्थियों की ज्यादातर शिकायतें भुगतान न होने को लेकर थी। इस पर तत्काल ध्यान दिया गया और कोई कमी थी तो उसे दूर किया गया। हालांकि राज्य सरकार ने सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया गया, लेकिन केंद्र सरकार के आंकड़ों में 30 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतों की संख्या 7 प्रतिशत पाई गई है। इसके बावजूद 93 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण कर राज्य पहले स्थान पर रहा।  यदि तीन वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत कुल 5,98,947 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया, जिनमें से 5,40,624 को स्वीकृति दे दी गई।  गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और उससे पूर्व पौष्टिक आहार व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार इस योजना के तहत 5 हजार रुपये और दूसरी बेटी के जन्म पर एकमुश्त 6 हजार रुपये देती है। यह राशि तीन किस्तों में दी जाती है। गर्भवती महिलाओं के रजिस्ट्रेशन के समय 1,000 रुपये, 6 माह बाद 2,000 रुपये और बच्चे के जन्म, पंजीकरण और टीकाकरण के बाद 2,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसका मकसद संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और शिशु मृत्यु दर को कम करना है।

नई दिल्ली में बस्तर की प्रसिद्ध मांदरी नृत्य की प्रस्तुति देंगे कलाकार

रायपुर  राज्य स्तरीय शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति लोक कला महोत्सव में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला कोण्डागांव जिले का लिंगो घोटुल मांदरी नृत्य दल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला का प्रदर्शन करेगा। यह दल नई दिल्ली में आयोजित भारत ट्राइब फेस्ट-2026 में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व करेगा।      उल्लेखनीय है कि जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर अंबिकापुर में आयोजित राज्य स्तरीय शहीद वीर नारायण सिंह स्मृति लोक कला महोत्सव में इस दल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया था। इस उपलब्धि के लिए देश की राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु के हाथों दल को सम्मानित भी किया गया था।     कलेक्टर कोंडागांव मती पन्ना ने जिले के मांदरी नृत्य दल के कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह कोण्डागांव जिले के लिए गर्व का विषय है कि यहां के लोक कलाकारों का दल राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कलाकार अपनी प्रस्तुति से बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति को देशभर में पहचान दिलाते हुए छत्तीसगढ़ राज्य और कोण्डागांव जिले का नाम रोशन करेंगे।  सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग ने बताया कि भारत ट्राइब फेस्ट का आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज द्वारा 18 मार्च से 21 मार्च 2026 तक सुंदर नर्सरी, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित 7 राज्यों के कलाकार विभिन्न जनजातीय कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कोण्डागांव जिले के ग्राम राहटीपारा, बालेंगा के मांदरी नृत्य दल द्वारा किया जाएगा।  

महतारी वंदन योजना: हर किस्त के साथ बढ़ा भरोसा, महिलाओं की जिंदगी में आया बड़ा सकारात्मक बदलाव

रायपुर  छोटे-छोटे सहयोग से बड़े बदलाव की तस्वीर आज शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक देखने को मिल रही है।  कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड के ग्राम रमपुरा, सेक्टर गोछिया में रहने वाली मती भारती वैष्णव के जीवन में महतारी वंदन योजना ने नई उम्मीद और आत्मविश्वास लाया है। महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें अब तक 25 किस्तों के माध्यम से कुल 25 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। यह राशि उनके लिए किसी सहारे से कम नहीं रही। पहले जहां घर के छोटे-छोटे खर्चों को संभालना चुनौतीपूर्ण था, वहीं अब योजना से मिली नियमित सहायता ने उनकी आर्थिक स्थिति को काफी हद तक स्थिर किया है। भारती वैष्णव बताती हैं कि इस राशि का सबसे बड़ा लाभ उनके बच्चों की पढ़ाई में मिल रहा है। अब वे बच्चों के लिए समय पर किताबें, कॉपी और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करा पा रही हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी हुई है और उनका भविष्य बेहतर दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही यह राशि घर के दैनिक खर्चों जैसे राशन, दवाई और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में भी मददगार साबित हो रही है। अब उन्हें छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है। भारती वैष्णव ने शासन की इस योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी है। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करती है। यदि महिलाओं को समय पर सहयोग और अवसर मिले, तो वे न केवल अपने परिवार की स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

अब कॉपी मूल्यांकन में नहीं चलेगा मोबाइल: बोर्ड का सख्त कदम, पारदर्शिता पर जोर

जगदलपुर. बोर्ड परीक्षा के बाद अब कॉपियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता पर जोर है। जगदलपुर के बस्तर हाईस्कूल में मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। शुरुआत से पहले शिक्षकों को नियमों और सावधानियों की विस्तृत ब्रीफिंग दी गई। अब मूल्यांकन के दौरान मोबाइल और स्मार्ट गैजेट्स पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। शिक्षकों को रोजाना कम से कम 40 उत्तर पुस्तिकाएं जांचना अनिवार्य किया गया है। दो पालियों में मूल्यांकन होगा, बीच में आधे घंटे का ब्रेक मिलेगा। पहले दिन शिक्षकों को 5-5 कॉपियों से प्रक्रिया की शुरुआत कराई गई। करीब 1.25 लाख कॉपियों का मूल्यांकन 9 अप्रैल तक पूरा करना लक्ष्य है। पहली खेप में 65 हजार कॉपियां स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखी गई हैं। बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी सख्ती से रोक लगाई गई है। इस बार शिक्षकों की ड्यूटी रद्द करने का अधिकार स्थानीय स्तर पर नहीं है। प्रशासन का फोकस—समयबद्ध और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करना है। टैलेंट हंट आयोजित जगदलपुर. बस्तर की प्रतिभाएं अब स्थानीय मंच तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान की ओर कदम बढ़ा रही हैं। इसी सोच के साथ शिक्षा प्रकाश पुंज संस्थान ने टैलेंट हंट आयोजित किया। गायन, नृत्य, मॉडलिंग और अभिनय में युवाओं ने दमदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रतिभाओं का आकलन किया। आत्मविश्वास और प्रस्तुति के आधार पर 40 से ज्यादा युवाओं का चयन हुआ। इन चयनित प्रतिभाओं को अब मुंबई में खुद को साबित करने का मौका मिलेगा। संस्थान ने सिर्फ मंच ही नहीं, बल्कि आगे की मार्गदर्शन व्यवस्था भी की है। संस्थान प्रमुख ने कहा—बस्तर में प्रतिभा की कमी नहीं, मंच की जरूरत है। कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षणिक और कला क्षेत्र के 80 लोगों को सम्मानित किया गया। इस आयोजन ने युवाओं में नई उम्मीद और दिशा दोनों जगाई है। विजेताओं में मिस बस्तर, मिस्टर जगदलपुर सहित कई प्रतिभाएं शामिल रहीं। बस्तर के युवाओं का यह आत्मविश्वास अब बड़े मंच पर नजर आएगा।

नक्सल कनेक्शन का सुराग: मंगेश के ठिकाने से मिला पत्र, सरेंडर को लेकर उठे सवाल

मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी. जिले के औंधी थाना क्षेत्र में महाराष्ट्र और बस्तर की सीमा से लगे ग्राम कोहकाटोला के जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन चलाया। जवानों के पहुंचने की भनक लगते ही नक्सली घने जंगल का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। हालांकि सर्चिंग के दौरान पुलिस को नक्सल ठिकाने से हथियार, गोला-बारूद और नक्सली मंगेश द्वारा अपने शीर्ष नेता को लिखा गया एक पत्र भी बरामद किया गया है। जानकारी के मुताबिक, घटना बीते रविवार शाम की बताई जा रही है। ऑपरेशन के बाद सोमवार को पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह ने प्रेस वार्ता में पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीआरजी, सीएएफ और औंधी थाना पुलिस की संयुक्त टीम नक्सल ठिकाने पर दबिश देने निकली थी, जबकि बस्तर के कांकेर जिले से भी बैकअप लगाया गया था। इलाके में संदिग्ध गतिविधियां देखकर जब जवानों ने घेराबंदी की, तो सिविल ड्रेस में मौजूद नक्सली भागने लगे। जवानों ने पीछा किया, लेकिन घने जंगल का फायदा उठाकर वे बच निकले। मंगेश के ठिकाने से मिला हथियार और पत्र सर्चिंग के दौरान पुलिस ने नक्सल ठिकाने से एक इंसास राइफल, 15 जिंदा कारतूस और अन्य नक्सली सामग्री बरामद की। जानकारी के अनुसार, यह राइफल वर्ष 2010 में कांकेर जिले के दुर्गुकोंदल थाना क्षेत्र के भुस्की गांव से पुलिस से लूटी गई थी, जिसे महिला नक्सली हिड़मे के पास रखा गया था। पुलिस के मुताबिक मौके पर एसीएम स्तर के तीन नक्सली मंगेश, उसकी पत्नी हिड़मे और एक अन्य महिला नक्सली राजे मौजूद थे। उनकी तस्वीरें पुलिस के पास उपलब्ध है और जवानों ने भागते समय उनकी पहचान भी की है। सबसे अहम बरामदगी मंगेश द्वारा अपने शीर्ष नक्सली नेतृत्व को लिखा गया एक पत्र है। इस पत्र में उसने आत्मसमर्पण को लेकर दिशा-निर्देश मांगे हैं। पत्र में लिखा गया है कि “सभी साथी आत्मसमर्पण कर रहे हैं, हमारे लिए क्या आदेश है?” इससे नक्सली संगठन के भीतर बढ़ते दबाव और असमंजस के संकेत मिल रहे हैं। इलाके में गिने-चुने नक्सली बचे पुलिस अधीक्षक के अनुसार, मोहला-मानपुर क्षेत्र में अब केवल 6 सक्रिय नक्सली ही शेष बचे हैं। उन्होंने शेष नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने की अपील की है। पूर्व में मारे जा चुके स्पेशल जोनल कमेटी के नक्सली विजय रेड्डी के बाद आरकेबी डिवीजन लगभग कमजोर पड़ चुका है, लेकिन हिड़मे, राजे और अन्य कुछ नक्सलियों की मौजूदगी की सूचनाएं समय-समय पर मिलती रही हैं। नक्सल मुक्त होने पर सवाल गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय डेडलाइन में अब करीब एक पखवाड़ा ही बचा है। इसके बावजूद मोहला-मानपुर क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई हैं। पुलिस लगातार अभियान चला रही है, लेकिन न तो सभी नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं और न ही गिरफ्तार हो पा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या तय समय सीमा में यह इलाका पूरी तरह नक्सल मुक्त हो पाएगा।

प्रदेश में अव्वल कोरिया: e-KYC में शानदार प्रदर्शन, गांवों के विकास को मिली गति

कोरिया. ग्रामीण विकास को नई गति देने के उद्देश्य से लागू की गई वीबीजी रामजी योजना के तहत कोरिया जिले ने तकनीकी पारदर्शिता की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले में मनरेगा के अंतर्गत पंजीकृत सभी श्रमिकों का ई-केवाईसी कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। इसके साथ ही कोरिया प्रदेश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जिसने निर्धारित समय में यह लक्ष्य हासिल किया है। कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन और पंचायत अमले के समन्वित प्रयासों से जिले की सभी ग्राम पंचायतों के पंजीकृत श्रमिक परिवारों के प्रत्येक सदस्य का आधार आधारित ई-केवाईसी कार्य पूरा किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश स्तर पर अभी औसत ई-केवाईसी लगभग 92 प्रतिशत है, जबकि कोरिया जिले ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर नई मिसाल पेश की है। ‘G RAM G’ के विरोध में कांग्रेस शून्यकाल में लाई स्थगन प्रस्ताव रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को मनरेगा को ‘जी राम जी’ किए जाने के विरोध में कांग्रेस ने शून्यकाल में स्थगन प्रस्ताव लाई. आसंदी के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने से नाराज विपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए सदन से निकले. विधानसभा शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जी राम जी की तुलना में पहले के मनरेगा को बेहतर बताते हुए स्थगन को ग्राह्य कर चर्चा कराने की मांग की. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि सदन विपक्ष की राजनीति का अड्डा नहीं, ये सदन कांग्रेस का राजनीति का मंच नहीं, ये जनता का मंच है. सदन का समय कीमती है. कल ही इन्होंने बता दिया था कि इस मुद्दे पर सदन में नहीं रहेंगे. इसके साथ ही पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई. पक्ष-विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि जनता के मुद्दे पर राजनीति करनी हो तो हम करेंगे. आखिरकार सत्ता पक्ष और विपक्ष के हंगामे के बीच आसंदी ने सदन की कार्यवाही 5 मिनट स्थगित कर दी. 5 मिनट के बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने स्थगन सूचना पर बोलते हुए कहा कि मामला सिर्फ नीति बदलने का नहीं है, नियत का भी है. गरीबों से जुड़ा हुआ मामला है. इस पर स्थगन प्रस्ताव ग्राह्य कर चर्चा होनी चाहिए. कवासी लखमा और विपक्ष के अन्य कई सदस्यों ने कहा कि गरीबों से जुड़ा मामला है, इस पर चर्चा होनी चाहिए. लेकिन आसंदी के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने पर विपक्षी सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए सदन से बहिर्गमन किया.

मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना: BPL परिवारों को मूल बकाया में छूट, जल्द उठाएं लाभ

गरियाबंद. जिले के 56,102 बीपीएल बिजली कनेक्शनधारकों पर कुल 43 करोड़ रुपये का बकाया है, जिनके पास राहत पाने का सुनहरा मौका है। दरअसल, बकायादार बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना शुरू की है। योजना के तहत निर्धारित समय में पंजीयन कर अंतर की राशि का भुगतान करने पर जिले के बकायादार उपभोक्ताओं को कुल 36.50 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। इसका मतलब यह है कि बीपीएल कनेक्शनधारकों को केवल 6 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। योजना का सबसे अधिक लाभ देवभोग, झाखरपारा और गोहरापदर वितरण केंद्र के ग्रामीणों को मिलेगा। सरकार की ओर से जारी विवरण के अनुसार, योजना से निष्क्रिय बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया में 75 प्रतिशत और अधिभार में 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल बकाया में अधिकतम 50 प्रतिशत और अधिभार में 100 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। बचत राशि का भुगतान अधिकतम 6 किस्तों में किया जा सकेगा, लेकिन किस्तों में छूट का प्रतिशत कम होता जाएगा। विभाग के कार्यपालन अभियंता हेमंत ठाकुर ने बताया कि भुगतान की अंतिम तिथि 30 जून 2026 तक है। पंजीयन के लिए केवल बीपी और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी। इसे ‘मोर बिजली’ एप या नजदीकी बिजली स्टेशन पर कराया जा सकता है। जागरूकता बढ़ाने के लिए विभाग प्रत्येक वितरण केंद्र क्षेत्र में साप्ताहिक बाजार और बड़े गांवों में शिविर आयोजित करेगा। साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की गई है कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। देवभोग में सर्वाधिक उपभोक्ता जिले के 12 वितरण केंद्रों में सबसे अधिक 14,715 बीपीएल उपभोक्ता देवभोग केंद्र में हैं। सहायक अभियंता हेमंत कुमार नागवंशी के अनुसार, इन पर 12.93 करोड़ रुपये का बकाया है। तय समय में 1.69 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर उन्हें सीधे 11.23 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। झाखरपारा वितरण केंद्र में 7,818 उपभोक्ताओं पर 6.85 करोड़ रुपये का बकाया है, जिनमें केवल 92 लाख रुपये का भुगतान करने पर 5.93 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। अधिकांश बकायादार कनेक्शनधारकों ने बिजली मीटर लगाने के बाद एक बार भी बिल का भुगतान नहीं किया है। योजना के अनुसार, उन्हें अधिकतम 30 यूनिट प्रति माह खपत की छूट दी गई थी, लेकिन इससे अधिक खपत पर बिल का भुगतान नहीं किया गया। बीपीएल कनेक्शन मूल रूप से बुनियादी घरेलू सुविधाओं के लिए दिए जाते हैं, लेकिन कई कनेक्शन पर पंखा, कूलर और सबमर्सिबल पंप का भी इस्तेमाल हुआ। जिले के किन इलाकों में BPL कनेक्शन को मिलेगी कितनी छूट ? गोहरापदर: 7,940 उपभोक्ता, 1 करोड़ रुपये भुगतान पर 6.12 करोड़ छूट। अमलीदपर: 7,215 उपभोक्ता, 86 लाख भुगतान पर 5.24 करोड़ छूट। बिन्द्रानवागढ़: 3,291 उपभोक्ता, 35 लाख भुगतान पर 2.31 करोड़ छूट। मैनपुर: 3,365 उपभोक्ता, 31 लाख भुगतान पर 1.75 करोड़ छूट। मड़ेली: 3,178 उपभोक्ता, 23 लाख भुगतान पर 1.31 करोड़ छूट। रसेला: 2,896 उपभोक्ता, 24 लाख भुगतान पर 1.27 करोड़ छूट। छुरा: 1,907 उपभोक्ता, 12 लाख भुगतान पर 54 लाख छूट। पाण्डुका: 933 उपभोक्ता, 1.86 करोड़ भुगतान पर 6.95 करोड़ छूट। गरियाबंद ग्रामीण: 2,103 उपभोक्ता, 13 लाख भुगतान पर 5.7 करोड़ छूट। नहीं चुकाया बिल तो प्रीपेड योजना लागू होते ही कट जाएगा कनेक्शन ? गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना सीमित समय के लिए है। इसके बाद प्रीपेड स्कीम लागू की जाएगी, जिसमें बकायादार कनेक्शनधारक वंचित रह सकते हैं। इसलिए लाभ पाने के लिए समय रहते पंजीयन कर योजना का लाभ उठाना ही फायदेमंद रहेगा।

किसानों से लेकर सोलर योजना तक, हर मोर्चे पर तेजी के निर्देश : संजय अग्रवाल

वित्तीय वर्ष की अंतिम दौड़ : 15 दिन में लक्ष्य पूरा करने कलेक्टर के सख्त निर्देश किसानों से लेकर सोलर योजना तक, हर मोर्चे पर तेजी के निर्देश : संजय अग्रवाल टीएल बैठक में सख्त संदेश: समय पर काम, तभी बेहतर एसीआर : कलेक्टर बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित टीएल (समय-सीमा) बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के शेष लक्ष्य पूर्ति  की विभागवार गहन समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि वित्तीय वर्ष के समापन में अब मात्र दो सप्ताह शेष हैं, ऐसे में सभी विभाग युद्धस्तर पर कार्य करते हुए लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) कार्य प्रदर्शन और लक्ष्य पूर्ति के आधार पर ही लिखी जाएगी।            बैठक में वन भूमि अधिकार के तहत लगभग 3 हजार तैयार पट्टों के शीघ्र वितरण के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल मिलने वाली 6 हजार रुपये की सहायता को महत्वपूर्ण बताते हुए सभी पात्र किसानों का ई-केवाईसी पूर्ण कराने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देशित किया कि मृत किसानों के वारिसों को भी योजना का लाभ दिलाने हेतु उनका नाम रिकॉर्ड दर्ज किया जाए। वर्तमान में जिले के 25 से 30 हजार किसान अभी भी सम्मान निधि योजना से वंचित हैं।        कलेक्टर ने बताया कि इस वर्ष लगभग 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गर्मी धान का रकबा कम हुआ है। इस क्षेत्र में वैकल्पिक एवं लाभकारी फसलों को बढ़ावा देने, किसानों को आदान सहायता उपलब्ध कराने और उन्हें प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिले में अब तक 2,692 सोलर प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जबकि 7 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। योजना को गति देने के लिए कलेक्टर ने संबंधित विभागों और हाउसिंग सोसाइटियों की संयुक्त बैठक बुधवार को आयोजित करने के निर्देश दिए।         शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया कि सभी स्कूलों में बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जहां यह सुविधा नहीं है, वहां सर्वे कर नए निर्माण के प्रस्ताव भेजे जाएं तथा पुराने जर्जर शौचालयों की मरम्मत कराई जाए। पीएचई विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि 635 हैंडपंपों का जलस्तर नीचे चला गया है, जिनमें राइजिंग पाइप बढ़ाने का कार्य जारी है। कलेक्टर ने निर्माण विभागों को सूखे तालाबों की गहराई बढ़ाने हेतु मिट्टी-मुरूम निकालने के प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि जल संग्रहण क्षमता बढ़ाई जा सके।      इसके साथ ही निर्माण एजेंसियों को स्वीकृत कार्यों में तेजी लाने, सड़कों का निर्माण  चौड़ाई में करने तथा अर्जित भूमि का 15 दिनों के भीतर शासन के पक्ष में नाम पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने यह भी कहा कि माननीय हाई कोर्ट के निर्देशों और निर्णयों का समय-सीमा में पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि अवमानना की स्थिति उत्पन्न न हो। बैठक में मुख्यमंत्री जनदर्शन, सीएम की घोषणा, पीएम पोर्टल, विभिन्न आयोगों और वरिष्ठ कार्यालयों से प्राप्त पत्रों के निराकरण की समीक्षा की गई। बैठक में निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

सरकार का बड़ा फैसला: धर्म स्वातंत्र्य विधेयक लौटाकर नए संशोधनों के साथ सर्वसम्मति से पारित

रायपुर. विधानसभा बजट सत्र के दौरान मंगलवार को गृह मंत्री विजय शर्मा ने राज्यपाल द्वारा लौटाए गए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006 पर विचार का प्रस्ताव प्रस्तुत किया. विचार के उपरांत आसंदी ने सरकार को विधेयक वापस लेने की अनुमति दी. विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006 को वापस लेने के अलावा राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया. जिसे विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया. इसके साथ मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन का प्रस्ताव और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया. विधानसभा में दोनों प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ. एक के बाद एक प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों के स्वीकार होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभागों से सम्बंधित अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू हुआ. विपक्ष ने चर्चा में भाग नहीं लिया. क्या है छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विधेयक? छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण स्वातंत्रय विधेयक 2026 के फॉर्मेट का अनुमोदन किया गया है. इस विधेयक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण नीति और साधनों पर सही तरीके से रोक लगाना है. अब अगर छत्तीसगढ़ में रहने वाले किसी व्यक्ति को कोई दूसरा इंसान जबरन दबाव डालकर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो उसे दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अगर नियम के बाहर कोई व्यक्ति धर्म बदलता है, तो उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी. विधेयक साफ तौर पर यह कहता है कि धर्म परिवर्तन किसी भी व्यक्ति की इच्छा से होना चाहिए. दबाव या लालच से नहीं. छत्तीसगढ़ में पहले से ही धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, जो 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्व में आया था. सार्वजनिक की जाएगी धर्मांतरण की जानकारी छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विधेयक के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का नियम होगा. विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा.     जबरन धर्मांतरण करवाने पर है सजा का प्रावधान     कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान किया गया है.     विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे. मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है. दूसरे राज्यों से कैसे अलग है छत्तीसगढ़ का कानून छत्तीसगढ़ से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्म बदलने के खिलाफ कानून मौजूद हैं. सभी राज्यों में लगभग कानून एक जैसा ही है, लेकिन उसकी सजा और जुर्माने में अंतर है. जबकि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की एक बड़ी आबादी है और उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है. इसके अलावा सामूहिक धर्मांतरण ना हो इस पर जोर दिया गया है और सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन की आईं खबरें छत्तीसगढ़ के बस्तर और जशपुर क्षेत्र में कई बार आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तन की खबरें आई थीं. कई बार ऐसा भी पता चला है कि आदिवासियों और धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के बीच भी विवाद हुआ था. अब धर्मांतरण विधेयक के बाद ऐसे मामलों में रोक लगने की उम्मीद होगी. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई FIR भी दर्ज हुई हैं और पुलिस को शिकायत भी मिली है. उपमुख्यमंत्री ने कही ये बात धर्मांतरण विधेयक पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 1968 का धर्म स्वतंत्र विधेयक लागू है. अब परिस्थितियां बदल गई हैं, तो नई परिस्थितियों के तहत धर्म स्वतंत्र विधेयक लाया गया है.

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का त्याग और बलिदान देश की अमूल्य धरोहर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का त्याग और बलिदान देश की अमूल्य धरोहर: मुख्यमंत्री  साय रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को 23 मार्च को बेमेतरा जिले में आयोजित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री  साय ने आमंत्रण के लिए संस्था के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का योगदान देश के इतिहास में अमूल्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों का सम्मान करना हम सभी का दायित्व है। यह केवल कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को देशभक्ति, समर्पण और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देने का भी सशक्त माध्यम है।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं और स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष  प्रहलाद रजक, संस्था के अध्यक्ष डॉ. शिरीष शर्मा, डॉ. शिवेन्द्र त्रिपाठी,  ललित मिश्रा,  विनायक दीवान सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।