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मोदी की गारंटी दम तोड़ चुकी — PCC चीफ बैज का PM मोदी से 21 सवालों वाला हमला

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर 1 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर के एकदिवसीय दौरे पर आने वाले हैं। उनके आगमन से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री से 21 सवालों की सूची जारी करते हुए कहा कि मोदी सरकार की गारंटी दम तोड़ चुकी है। क्या राज्योत्सव में इसका जवाब देंगे। इसके अलावा कांग्रेस ने रोजगार, किसानों, महिलाओं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी जवाब मांगा है। कांग्रेस के 21 सवाल पीएम मोदी से     मोदी की गारंटी दम तोड़ चुकी है क्या आप राज्योत्सव में इसका जवाब देंगे?     आपने 1 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा था, दो साल में 40 हजार नौकरी भी मिली नहीं।     संविदा कर्मचारियों को 100 दिन में नियमितीकरण करने का वादा कब पूरा होगा?     हर विवाहित महिला को महतारी वंदन के तहत 1000 रुपये प्रतिमाह देने का वादा था, काफी महिलाओं के नाम काटे गए, आपने 500 रुपये में सिलेंडर देने की बात कही थी?     आपके राज में हत्या, लूट, बलात्कार, आगजनी बढ़ी, कानून-व्यवस्था चरमराई?     छत्तीसगढ़ में बांग्लादेशी घुसपैठी आ रहे, पाकिस्तान से ड्रग्स आ रहे, इस पर लगाम क्यों नहीं?     सेंट्रल पुल में चावल क्यों नहीं खरीदा जा रहा, सोसाइटियों में आज भी धान का उठाव नहीं?     आपकी सरकार में साढ़े 18 लाख पीएम आवास दिए जाने की बात कही गई थी। शहरी और ग्रामीण कितने आवास स्वीकृत हुए? डिटेल बताएं?     किसानों को यूरिया-DAP की किल्लत क्यों?     प्रदेश में कितने स्कूल खोले गए, आपके राज में 10,000 से ज्यादा स्कूल बंद क्यों किए?     महादेव सट्टा ऐप चल रहा, शराब माफिया बेलगाम – कार्रवाई क्यों नहीं?     कोल माइंस बेचा जा रहा, अवैध रूप से पेड़ भी काटे जा रहे?     आपने हॉफ बिजली बिल योजना बंद कर, बिजली के दाम चार गुना बढ़ाए, लेकिन बिहार में 125 यूनिट फ्री बिजली ऐसा क्यों?     बस्तर बाढ़ पीड़ितों को केंद्र सरकार ने राहत पैकेज क्यों नहीं दिया?     छत्तीसगढ़ की यात्री ट्रेनें ही क्यों रद्द होती हैं?     नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेशीकरण क्यों?     एनएमडीसी मुख्यालय बस्तर में कब खुलेगा?     बस्तर के खनिज संसाधनों को बेचा जा रहा?     रायपुर के इकलौते मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भटक रहे लोग, एक ही बेड पर दो प्रसूताएं क्यों?     सरकारी अस्पतालों में दवाएं और इलाज क्यों नहीं?     2 करोड़ नौकरी और लोगों के खाते में 15 लाख खाते में कब देंगे? भाजपा पर हमला कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा के बयान “कांग्रेस दिल्ली से नहीं, इटली से चलने वाली पार्टी” पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि भाजपा में पर्ची से मुख्यमंत्री बनते हैं, वे पसंदीदा मंत्री तक नहीं चुन पाते, दिल्ली से पर्ची आती है। भाजपा नेता कांग्रेस के लिए भी वही सपना देख रहे हैं। घुसपैठियों पर बैज का पलटवार घुसपैठियों को लेकर डिप्टी CM विजय शर्मा के बयान पर PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि आप गृह मंत्री हैं, सारे अधिकार आपके पास हैं। पाकिस्तान से ड्रग्स आ रहा है, बांग्लादेशी घुसपैठिए आ रहे हैं, कार्रवाई कौन करेगा? राज्योत्सव में बाहरी कलाकारों पर सवाल राज्योत्सव में बाहरी कलाकारों को बुलाने पर दीपक बैज ने कहा कि हम पहले दिन से कह रहे, स्थानीय कलाकारों को भी बाहरी कलाकारों जितना ही सम्मान और मंच मिलना चाहिए। ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान है जारी – दीपक बैज ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान को लेकर दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस का हस्ताक्षर अभियान जारी है। 10 से 12 लाख हस्ताक्षर फॉर्म आएंगे, जिन्हें हम AICC को भेजेंगे, चुनाव आयोग को भेजेंगे। चुनाव आयोग द्वारा यह बात कही जा रही थी कि राहुल गांधी को हलफनामा देना चाहिए। आम जनता इस पर सवाल उठा रही है।

रामभक्ति का सफर शुरू: विधायक धरमलाल कौशिक ने दिखाई हरी झंडी, श्रद्धालुओं से भरी ट्रेन अयोध्या के लिए रवाना

 बिलासपुर ‘श्री राम दर्शन योजना’ के तहत बिलासपुर से अयोध्या धाम के लिए श्रद्धालुओं की विशेष भारत गौरव ट्रेन रवाना की गई. इस धार्मिक यात्रा में संभाग के 850 और जिले के 225 श्रद्धालु शामिल हुए हैं. बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया गया. यात्रा का शुभारंभ बिल्हा विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने हरी झंडी दिखाकर किया. इस अवसर पर महापौर पूजा विधानी और जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी भी उपस्थित रहे. श्रद्धालु इस यात्रा के दौरान अयोध्या धाम के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर के भी दर्शन करेंगे. प्रशासन द्वारा यात्रियों के लिए यात्रा, भोजन, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो.   विधायक धरमलाल कौशिक ने कहा कि आज अयोध्या के लिए श्री राम लला दर्शन तीर्थ यात्री ट्रेन को बिलासपुर से रवाना किया गया है. इस ट्रेन में लगभग 850 यात्री उसमें बैठे हुए हैं. पहले श्री काशी विश्वनाथ जी का दर्शन करेंगे और उसके बाद अयोध्या जाएंगे राम जी के दर्शन के लिए. यात्रियों में इस बात को लेकर काफी उत्साह है कि  जीवन में हमें यह सौभाग्य मिला है कि भगवान राम लाल का दर्शन होगा. इसके साथ ही श्रद्धालुओ ने प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  का आभार उन्होंने व्यक्त किया है. यह पीएम मोदी की योजना है कि एक-एक गांव से लोगों को लेकर स्टेशन तक लाना और स्वागत कर उन्हें काशी विश्वनाथ जी और अयोध्या दर्शन के लिए भेजना है. उन्होंने कहा कि घर में जवान बेटे के रहते जो काम नहीं हो पाता है, उस काम का बीड़ा सीएम साय ने उठाया है.

दलित हत्या पर भड़का जनाक्रोश: समाज ने दी चेतावनी, बोले– कार्रवाई नहीं तो आंदोलन

महासमुंद पतेरापाली गांव में केबल वायर चोरी के आरोप में दलित कौशल सहिस (50) की पीट-पीटकर हत्या के मामले ने अब सामाजिक रंग ले लिया है। पुलिस की जांच और कार्रवाई से असंतुष्ट समाज के लोगों ने बुधवार शाम सिटी कोतवाली पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग की। समाजजनों ने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। बुधवार शाम करीब 6 बजे छत्तीसगढ़ घासी, घसिया, सहिस, सारथी समाज कल्याण समिति, छत्तीसगढ़ सर्व अनुसूचित जाति समाज और छत्तीसगढ़ प्रगतिशील सतनामी समाज के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में कोतवाली पहुंचे। इस दौरान जिलाध्यक्ष तुलेन्द्र सागर, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील सतनामी समाज के जिलाध्यक्ष विजय बंजारे, लेखराज बघेल सहित अन्य पदाधिकारियों ने डीएसपी अजय शंकर त्रिपाठी से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। समाजजनों ने कहा कि पतेरापाली में कौशल सहिस को हाथ बांधकर बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद भी पुलिस ने मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि शव मिलने के बाद उसकी सूक्ष्म जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन पुलिस ने जल्दबाजी में शव को लावारिस हालत में दफना दिया। समाज प्रमुखों ने डीएसपी से सवाल किया कि इतनी बड़ी घटना जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर हुई, फिर भी पुलिस को भनक तक क्यों नहीं लगी? उन्होंने यह भी पूछा कि साइबर सेल और अन्य जांच इकाइयाँ क्या कर रही थीं, जबकि घटना के पांच दिन बाद भी किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। समाज ने आरोप लगाया कि यदि यही घटना किसी प्रभावशाली या संपन्न व्यक्ति के साथ होती तो पुलिस तत्काल कार्रवाई करती। लेकिन एक गरीब दलित व्यक्ति की हत्या पर पुलिस कछुआ गति से जांच कर रही है। समाजजनों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस पर डीएसपी अजय शंकर त्रिपाठी ने समाज प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा, और जैसे ही ठोस सबूत मिलेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने क्षेत्र में जातीय और सामाजिक असंतोष को हवा दे दी है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

अमित बघेल के खिलाफ कार्रवाई की मांग, अग्रवाल समाज ने जताया विरोध

खैरागढ़ छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने महाराजा अग्रसेन के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की है, जिसके बाद अग्रवाल समाज ने कड़ा रुख अपनाया है। समाज ने इस बयान को अपने आराध्य देव के प्रति सीधा अपमान बताते हुए खैरागढ़ पुलिस थाने में आवेदन देकर अमित बघेल के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार, अमित बघेल ने हाल ही में समाज के पूज्य महाराजा अग्रसेन के प्रति आपत्तिजनक और अशोभनीय शब्दों का प्रयोग किया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही अग्रवाल समाज के लोगों में आक्रोश है। समाज के लोगों ने इसे धार्मिक और सामाजिक आस्था पर हमला बताया है। खैरागढ़ में अग्रवाल समाज के प्रतिनिधिमंडल ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि महाराजा अग्रसेन न केवल अग्रवाल समाज बल्कि समूचे व्यापारी वर्ग के आराध्य देव हैं। उनके विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाज ने मांग की है कि अमित बघेल पर धार्मिक भावनाएं भड़काने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के गंभीर आरोपों के तहत सख्त धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया जाए और उनकी तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी अग्रवाल समाज ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो समाज चरणबद्ध आंदोलन करने पर विवश होगा। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि इस मामले में प्रशासन को निष्पक्ष और त्वरित कदम उठाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी धर्म या समाज के पूज्य व्यक्तित्व के प्रति इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग करने का दुस्साहस न कर सके। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी अमित बघेल के खिलाफ व्यापक विरोध देखा जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने इसे समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मनेंद्रगढ़ में भी अग्रवाल समाज में आक्रोश मनेन्द्रगढ़ में भी महाराजा अग्रसेन पर अभद्र टिप्पणी से अग्रवाल समाज आक्रोशित है। समाज के लोगों ने सिटी कोतवाली मनेन्द्रगढ़ पहुंचकर आवेदन दिया और आरोपी छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: फसल सर्वे और गिरदावरी सत्यापन की डेडलाइन में बढ़ोतरी

रायपुर छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के समस्त जिलों के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी के मोबाईल PV ऐप के माध्यम से सत्यापन की समय सीमा को एक माह के लिए बढ़ा दिया है। अब यह प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2025 की बजाय 30 नवंबर 2025 तक की जा सकेगी। बता दें कि इस संबंध में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा आज सभी कलेक्टरों को पत्र जारी किया गया है। विभाग ने पत्र में अपने 11 सितंबर 2025 के आदेश का संदर्भ देते हुए बताया कि पूर्व में यह प्रावधान किया गया था कि गिरदावरी एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे के संशोधन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2025 तक रहेगी। इसके बाद केवल PV ऐप के माध्यम से भौतिक सत्यापन के बाद ही प्रविष्टियों में संशोधन किया जा सकेगा। यह ऐप 15 सितंबर 2025 से Go Live किया गया था, जिसके माध्यम से 31 अक्टूबर 2025 तक प्रविष्टियों में बदलाव करने की अनुमति थी। अब शासन ने किसानों की सुविधा और प्रशासनिक कार्यों को ध्यान में रखते हुए इस अवधि को 30 नवंबर 2025 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस अवधि में संबंधित अधिकारी PV ऐप के जरिए भौतिक सत्यापन उपरांत डेटा संशोधन कर सकेंगे। गौरतलब है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी का यह ऑनलाइन सत्यापन अभियान राज्य में कृषि डेटा के डिजिटलीकरण और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम है। इससे फसलों के वास्तविक रकबे का सटीक आंकलन किया जा सकेगा, जो आगे धान खरीदी, बीमा, एवं अन्य कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा।

हिमालय में गूँजी जशपुर की गूंज: आदिवासी युवाओं ने जगतसुख पीक पर खोला नया मार्ग

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री साय की पहल के सम्मान में दिया गया विष्णु देव रूट नाम रायपुर  छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले के आदिवासी युवाओं के एक दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर ऊँची जगतसुख पीक पर एक नया आल्पाइन रूट खोला, जिसे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया है। टीम ने यह चढ़ाई बेस कैंप से केवल 12 घंटे में पूरी की — वह भी आल्पाइन शैली में, जो तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन मानी जाती है। यह ऐतिहासिक अभियान सितंबर 2025 में आयोजित हुआ, जिसका आयोजन जशपुर प्रशासन ने पहाड़ी बकरा एडवेंचर के सहयोग से किया। इस अभियान को हीरा ग्रुप सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस दल के पाँचों पर्वतारोही पहली बार हिमालय की ऊँचाइयों तक पहुँचे थे। सभी ने “देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया” में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो जशपुर प्रशासन द्वारा विकसित भारत का पहला प्राकृतिक एडवेंचर खेलों के लिए समर्पित प्रशिक्षण क्षेत्र है। विश्वस्तरीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को जोड़ा, जिनमें बिलासपुर के पर्वतारोही एवं मार्गदर्शक स्वप्निल राचेलवार, न्यूयॉर्क (USA) के रॉक क्लाइम्बिंग कोच डेव गेट्स, और रनर्स XP के निदेशक सागर दुबे शामिल रहे। इन तीनों ने मिलकर तकनीकी, शारीरिक और मानसिक दृष्टि से युवाओं को तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाया। दो महीनों की कठोर तैयारी और बारह दिनों के अभ्यास पर्वतारोहण के बाद टीम ने यह चुनौतीपूर्ण चढ़ाई पूरी की। अभियान प्रमुख स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जगतसुख पीक का यह मार्ग नए पर्वतारोहियों के लिए अत्यंत कठिन और तकनीकी था। मौसम चुनौतीपूर्ण था, दृश्यता सीमित थी और ग्लेशियरों में छिपी दरारें बार-बार बाधा बन रही थीं। इसके बावजूद टीम ने बिना फिक्स रोप या सपोर्ट स्टाफ के यह चढ़ाई पूरी की — यही असली आल्पाइन शैली है। यह अभियान व्यावसायिक पर्वतारोहण से अलग था, जहाँ पहले से तय मार्ग और सहायक दल पर निर्भरता होती है; इस दल ने पूरी तरह आत्मनिर्भर रहते हुए नई मिसाल कायम की। अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। स्पेन के प्रसिद्ध पर्वतारोही टोती वेल्स, जो इस अभियान की तकनीकी कोर टीम का हिस्सा थे और स्पेन के पूर्व वर्ल्ड कप कोच रह चुके हैं, ने कहा कि “इन युवाओं ने, जिन्होंने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी, हिमालय में नया मार्ग खोला है। यह साबित करता है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ये पर्वतारोही विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।” “विष्णु देव रूट” के अलावा दल ने दूहंगन घाटी में सात नई क्लाइम्बिंग रूट्स भी खोले। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही एक अनक्लाइम्ब्ड (पहले कभी न चढ़ी गई) 5,350 मीटर ऊँची चोटी की सफल चढ़ाई, जिसे टीम ने ‘छुपा रुस्तम पीक’ नाम दिया। इस पर चढ़ाई के मार्ग को ‘कुर्कुमा (Curcuma)’ नाम दिया गया — जो हल्दी का वैज्ञानिक नाम है और भारतीय परंपरा में सहनशक्ति और उपचार का प्रतीक माना जाता है। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा, अवसर और संसाधन मिलें तो भारत के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से भी विश्वस्तरीय पर्वतारोही तैयार हो सकते हैं। बिना किसी हिमालयी अनुभव के इन युवाओं ने आल्पाइन शैली में जो उपलब्धि हासिल की है, उसने भारतीय साहसिक खेलों को नई दिशा दी है। इस पहल ने तीन बातों को सिद्ध किया — आदिवासी युवाओं में प्राकृतिक शक्ति, सहनशीलता और पर्यावरण से जुड़ी सहज समझ उन्हें एडवेंचर खेलों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है; “देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर” जैसे स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र पेशेवर पर्वतारोही तैयार करने की क्षमता रखते हैं; और हिमालय की अनदेखी चोटियाँ भारत में सतत एडवेंचर पर्यटन की नई संभावनाएँ खोल सकती हैं। अभियान का नेतृत्व स्वप्निल राचेलवार ने किया, उनके साथ राहुल ओगरा और हर्ष ठाकुर सह-नेता रहे। जशपुर के पर्वतारोही दल में रवि सिंह, तेजल भगत, रुसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल थे। अभियान को प्रशासनिक सहयोग डॉ. रवि मित्तल (IAS), रोहित व्यास (IAS), शशि कुमार (IFS) और अभिषेक कुमार (IAS) से मिला। तकनीकी सहायता डेव गेट्स, अर्नेस्ट वेंटुरिनी, मार्टा पेड्रो (स्पेन), केल्सी (USA) और ओयविंड वाई. बो (नॉर्वे) ने दी। पूरे अभियान का डॉक्यूमेंटेशन और फोटोग्राफी ईशान गुप्ता की कॉफी मीडिया टीम ने किया। प्रमुख सहयोगी और प्रायोजक संस्थानों में पेट्ज़ल, एलाइड सेफ्टी इक्विपमेंट, रेड पांडा आउटडोर्स, रेक्की आउटडोर्स, अडवेनम एडवेंचर्स, जय जंगल प्राइवेट लिमिटेड, आदि कैलाश होलिस्टिक सेंटर, गोल्डन बोल्डर, क्रैग डेवलपमेंट इनिशिएटिव और मिस्टिक हिमालयन ट्रेल शामिल रहे। यह अभियान केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है कि भारत के गाँवों और आदिवासी क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “भारत का भविष्य गाँवों से निकलकर दुनिया की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।” इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ अब जशपुर को एक सतत एडवेंचर एवं इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

स्थिति बेहद खराब — मेकाहारा अस्पताल पर भड़का हाईकोर्ट, एक बेड पर दो प्रसूताओं का मामला गंभीर

बिलासपुर रायपुर के मेकाहारा अस्पताल के गायनिक वार्ड में दो प्रसूताओं को एक ही बेड पर भर्ती किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं इस मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने कहा, स्थिति बेहद ही खराब है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और 6 नवंबर तक एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को शपथ पत्र में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की बेंच ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, अगर राजधानी के प्रमुख अस्पताल की यह स्थिति है तो प्रदेश के अन्य जिलों में हालात की कल्पना की जा सकती है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) को 6 नवंबर तक शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाएं मानव गरिमा के विपरीत है और प्रशासन को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। सरकारी सिस्टम पर उठे सवाल इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जनता अब यह सवाल उठा रही है कि जब राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का यह हाल है तो ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में मरीजों का क्या हाल होगा?

33 साल बाद मिला इंसाफ: ‘बाबा’ टॉकीज की तालाबंदी पर आखिरकार मिला मुआवजा

अंबिकापुर सरगुजा राजपरिवार के स्वामित्व वाले अलखनंदा टॉकीज का लाइसेंस दुर्भावनापूर्ण तरीके से निरस्त करने के 33 साल पुराने बहुचर्चित मामले में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल को दोषी माना है. न्यायालय ने आदेश दिया है कि छतवाल राजपरिवार को ब्याज सहित 34,795 की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करें. यह मामला वर्ष 1992 का है, जब टीएस सिंहदेव द्वारा संचालित अलखनंदा टाकीज का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था. सरगुजा राजपरिवार के अरुणेश्वर शरण सिंहदेव के भाई की स्वामित्व वाली अलखनंदा टाकीज को नियमानुसार मार्च को सिनेमा संचालन का लाइसेंस जारी किया गया था. टॉकीज का संचालन उनके बड़े भाई टीएस सिंहदेव कर रहे थे. इसी दौरान आदिवासी परिवार की भूख से मौत की घटना ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी थी. इस मुद्दे को टीएस सिंहदेव की मां पूर्व मंत्री वरिष्ठ कांग्रेस नेता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव ने उठाते हुए तत्कालीन कलेक्टर के निलंबन की मांग की थी. इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को अप्रैल 1992 में स्वयं वाड्रफनगर आकर स्थिति का जायजा लेना पड़ा था. उस समय प्रदेश में भाजपा के सुंदरलाल पटवा की सरकार थी. बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच 19 अप्रैल 1992 को तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल ने अलखनंदा टॉकीज का लाइसेंस निरस्त करने के लिए नोटिस जारी किया. नोटिस का जवाब देने की अंतिम तिथि 23 अप्रैल थी, लेकिन 24 अप्रैल को जबलपुर हाईकोर्ट ने सिंहदेव परिवार के पक्ष में स्थगन आदेश जारी कर दिया. सिंहदेव के अधिवक्ता ने उसी दिन शपथपत्र सहित यह आदेश कलेक्टर को देने की कोशिश की, परंतु कलेक्टर ने मिलने से इन्कार कर 24 अप्रैल की दोपहर अलखनंदा टाकीज का लाइसेंस निरस्त कर टाकीज का संचालन रोक दिया, जिससे 24 एवं 25 अप्रैल के चार शो नहीं चल सके. सिंहदेव ने आठ हजार रुपये की क्षति की जानकारी देते हुए क्षतिपूर्ति की मांग की. न्यायालय में आबकारी आयुक्त ने बताया कि उनके कार्यालय में अलकनंदा टॉकीज के लाइसेंस निरस्तीकरण से संबंधित कोई फाइल उपलब्ध नहीं है. उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल को दोषी पाते हुए ब्याज सहित 34,795 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि राजपरिवार को देने का आदेश दिया. यह राशि न्यायालय में जमा करा दी गई है.

18 लाख आवासों की योजना पिछली सरकार ने रोकी, हमारी सरकार बना रही रोज़ 18 हज़ार मकान: गृह मंत्री

रायपुर छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 18 लाख आवास रोक कर रखे थे, जबकि हमारी सरकार ने आते ही पहले ही कैबिनेट में इसे स्वीकृत कर दिया। गृह मंत्री ने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन 18 हज़ार आवासों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछली बार बिलासपुर आए थे, तब ग्रामीण आवास योजना के तहत तीन लाख लोगों को गृह प्रवेश कराया गया था, इस बार यह संख्या और बड़ी होगी, यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या होगी।”

रिश्वतखोरों पर एसीबी का शिकंजा, एसडीएस कार्यालय में रंगेहाथ पकड़े गए तीन कर्मचारी

जांजगीर एसीबी /ईओडब्ल्यू ने आज चांपा एसडीएम कार्यालय में छापा मारकर भू-अर्जन शाखा के अमीन पटवारी और एक कंप्यूटर ऑपरेटर को किसान से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा. भू-अर्जन की राशि भुगतान के एवज में किसान से रिश्वत के तौर पर 1 लाख 80 हजार रुपए ले रहे थे. जानकारी के अनुसार, जिला सक्ती के ग्राम रायपुरा निवासी बुधराम धीवर ने बिलासपुर एसीबी इकाई में 16 अक्टूबर को शिकायत की थी. उसने बताया कि उसकी तथा उसके बहन के नाम की ग्राम कोसमंदा, जिला जांजगीर स्थित जमीन का नेशनल हाइवे निर्माण के लिए अधिगृहण किया गया था. उन्हें कुल 35 लाख 64 हजार 099 रुपए मुआवजा के रूप में चांपा एसडीएम कार्यालय से भू-अर्जन अधिकारी द्वारा उसके तथा उसके बहन के संयुक्त बैंक खाते में अगस्त 2025 में भुगतान किया गया था. राशि भुगतान के बाद एसडीएम कार्यालय चांपा के भू-अर्जन शाखा के अमीन पटवारी बाबू बिहारी सिंह और ऑपरेटर राजकुमार उससे मुआवजा राशि निकलवाने में मदद के नाम पर 1 लाख 80 हजार रुपए रिश्वत की मांग की जा रही है, जो वह उन लोगों को नहीं देना चाहता, बल्कि उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़वाना चाहता है. शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी ट्रैप की योजना तैयार की, जिसके बाद आज प्रार्थी को रिश्वती रकम 180000 रुपए आरोपीगण को देने भेजा गया. रिश्वत राशि हाथ में लेते ही बिलासपुर एसीबी डीएसपी अजितेश सिंह के नेतृत्व में आसपास तैनात एसीबी बिलासपुर की टीम द्वारा अमीन पटवारी बिहारी सिंह और ऑपरेटर राजकुमार देवांगन को पकड़ लिया गया. अचानक हुई कार्यवाही से आसपास हड़कंप सा मच गया. पकड़े गए आरोपी से रिश्वत की रकम 1लाख 80 हजार रुपए जप्त कर एसीबी ने दोनों आरोपी के विरुद्ध धारा 7, 12 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई की जा रही है. एसीबी इकाई बिलासपुर की पिछले 1.5 साल में यह लगातार 36 वीं ट्रैप की कार्रवाई है.