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पावरकॉम की बढ़ी टेंशन, बारिश के बीच बिजली की डिमांड 16,000 MW के पार; टूटा दो साल का रिकॉर्ड

अमृतसर  पंजाब में शुक्रवार को बारिश से भी पावरकाॅम की मुश्किलें कम नहीं हुईं। शुक्रवार को बिजली की मांग ने पिछले दो साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह मांग 16182 मेगावाट तक पहुंच गई। पावरकाॅम के पास बिजली की भारी कमी रही। विभिन्न थर्मल और जलविद्युत परियोजनाओं के सात यूनिट बंद होने से कुल 1275 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप रहा। इस कमी के कारण उद्योगों और कृषि क्षेत्र को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। पावरकाॅम के पास अपने सभी स्रोतों से केवल 4114 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। शुक्रवार को तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट की तीन नंबर यूनिट बंद रही। रोपड़ प्लांट की 210 मेगावाट की पांच नंबर यूनिट भी ठप रही। लहरा मुहब्बत थर्मल की 210 मेगावाट की एक नंबर यूनिट भी बंद रही। इसके अलावा, रणजीत सागर बांध की 150 मेगावाट की एक नंबर यूनिट और यूबीडीसी के 45 मेगावाट की तीन यूनिट भी बंद रहीं। इस स्थिति के कारण पावरकाॅम को बाहर से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। तलवंडी साबो थर्मल प्लांट की 660 मेगावाट की तीन नंबर यूनिट बॉयलर ट्यूब में लीकेज के कारण वीरवार को बंद हुई थी। इसके रविवार तक ही दोबारा चलने की संभावना है। बिजली की कमी के चलते उद्योगों में पौने चार घंटे के रोटेशन में कट लगाए जा रहे हैं। खेतीबाड़ी क्षेत्र को भी आठ घंटे की पूरी बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है। किसानों को ट्यूबवेल के लिए पांच से सात घंटे ही बिजली मिल रही है, जिससे उनमें सरकार के प्रति रोष है। थर्मल संयंत्रों में कोयला संकट भी बना हुआ है। तलवंडी साबो में मात्र छह दिन का, राजपुरा प्लांट में सात दिन का और गोइंदवाल में 13 दिन का कोयला शेष है। लहरा मुहब्बत थर्मल में 15 दिन का कोयला बचा है, जबकि रोपड़ थर्मल में 29 दिन का कोयला स्टॉक नियमानुसार पर्याप्त है। थर्मल संयंत्रों में शिविर कार्यालय स्थापित होंगे  बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए पावरकाॅम ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष (सीएमडी) तथा निदेशक तुरंत साइटों का दौरा करेंगे। वे थर्मल संयंत्रों में शिविर कार्यालय स्थापित करेंगे। इसके अतिरिक्त, मुख्य अभियंता और संयंत्र प्रभारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने-अपने स्टेशनों पर लगातार मौजूद रहें। उन्हें संयंत्र की अधिकतम क्षमता पर बिना रुकावट बिजली उत्पादन बनाए रखने के लिए काम करना होगा।  फैसले के अनुसार, राजपुरा थर्मल प्लांट में प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष डॉ. बसंत गर्ग शिविर कार्यालय लगाएंगे। वाणिज्यिक निदेशक इंजीनियर हरशरण कौर त्रेहन गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट में जिम्मेदारी संभालेंगी। वितरण निदेशक इंजीनियर इंद्रपाल सिंह गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल पावर प्लांट रोपड़ में मौजूद रहेंगे। वित्त निदेशक चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरिंदर कुमार बेरी तलवंडी साबो पावर स्टेशन में शिविर कार्यालय स्थापित करेंगे। वितरण निदेशक इंजीनियर पुनरदीप सिंह बराड़ गुरु हरगोबिंद साहिब थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत में अपनी सेवाएं देंगे। 

पंजाब चुनाव के लिए AAP का मेगा प्लान, बादल-कैप्टन के गढ़ में सेंधमारी की तैयारी

बठिंडा  पंजाब की राजनीति में कभी बेहद मजबूत रहे दो सियासी घरानों बादल परिवार और कैप्टन अमरिंदर सिंह- के प्रभाव वाले इलाकों में मुख्यमंत्री भगवंत मान की लगातार सक्रियता ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। मुख्यमंत्री मान दो दिनों में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पैतृक गांव घुद्दा और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पैतृक गांव महराज में ‘लोक मिलनी’ कर रहे हैं। इसे महज सरकारी कार्यक्रम के बजाय 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों गांव पंजाब की उस पारंपरिक सियासत के प्रतीक माने जाते हैं, जिसने लंबे समय तक राज्य की राजनीति की दिशा तय की। प्रकाश सिंह बादल का नाम शिरोमणि अकाली दल की सियासत और मालवा क्षेत्र में पार्टी के प्रभाव से जुड़ा रहा है, जबकि कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस की पंजाब राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री मान का दोनों दिग्गज़ों के पैतृक गांवों में पहुंचना राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। घुद्दा में पहुंचकर अकाली राजनीति को संदेश प्रकाश सिंह बादल का पैतृक गांव घुद्दा बठिंडा जिले की सियासत में खास महत्व रखता है। बादल परिवार का मालवा क्षेत्र में लंबे समय तक मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री की ‘लोक मिलनी’ के लिए घुद्दा का चयन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आप के लिए यह कार्यक्रम अकाली दल के पुराने गढ़ में अपनी मौजूदगी और स्वीकार्यता दिखाने का मौका भी है। मुख्यमंत्री यहां लोगों की समस्याएं सुनने के साथ-साथ सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए यह संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं कि पंजाब की राजनीति अब पुराने सियासी परिवारों के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि आम लोगों के मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। महराज में कैप्टन के प्रभाव को चुनौती इसके अगले दिन मुख्यमंत्री का कैप्टन अमरिंदर सिंह के पैतृक गांव महराज पहुंचना कांग्रेस के पुराने प्रभाव क्षेत्र में आप की राजनीतिक पैठ का संकेत माना जा रहा है। कैप्टन लंबे समय तक पंजाब कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं और मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में उनके पैतृक गांव में ‘लोक मिलनी’ को कांग्रेस के पुराने सियासी आधार को चुनौती देने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की नजर में मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल विकास कार्यों और जनसमस्याओं तक सीमित नहीं है। आप लगातार मालवा क्षेत्र को अपने मजबूत आधार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। घुद्दा और महराज जैसे प्रतीकात्मक स्थानों पर पहुंचकर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह पुराने राजनीतिक गढ़ों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। 2027 की तैयारी का ट्रेलर पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का गांव-गांव पहुंचकर सीधे लोगों से संवाद करना आप की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ‘लोक मिलनी’ के जरिए सरकार एक तरफ प्रशासन को जनता के दरवाजे तक ले जाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक तौर पर उन इलाकों में अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी है, जहां कभी बादल और कैप्टन जैसे दिग्गज़ों का दबदबा रहा। अब सवाल यह है कि घुद्दा और महराज में मुख्यमंत्री की दस्तक क्या सिर्फ जनसुनवाई है या फिर 2027 के चुनावी मुकाबले का राजनीतिक संदेश। दो दिग्गज़ों के पैतृक गांवों का लगातार चयन इस बात के संकेत जरूर दे रहा है कि आप अब पंजाब की पारंपरिक सियासी विरासत को सीधे चुनौती देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में वार्ड आरक्षण का ड्रॉ 11 को, कई पार्षदों के समीकरण बिगड़ने के आसार

चंडीगढ़  नगर निगम चुनाव के लिए 11 सितंबर को होने वाले वार्ड आरक्षण ड्राॅ से पहले सबसे ज्यादा नजर उन वार्डों पर है, जो अनुसूचित जाति (एससी) और महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकते हैं। 2011 की जनगणना में वार्डवार एससी आबादी के प्रतिशत और पिछले आरक्षण की रोटेशन व्यवस्था को आधार मानें तो वार्ड नंबर-1, 3, 4, 9, 15, 29 और 32 एससी आरक्षण के लिए संभावित वार्डों की सूची में सबसे आगे हैं। सात एससी वार्डों में से तीन को 11 सितंबर के ड्रा में एससी महिला के लिए आरक्षित किया जाएगा, जबकि बाकी चार एससी वर्ग की महिला-पुरुष के लिए ओपन रहेंगे। इसलिए इन वार्डों के आरक्षित होने की संभावना अधिक वार्ड-1, 3, 4, 9, 15, 29, 32 इन सात वार्डों को संभावित एससी वार्डों के तौर पर इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि 2021 में एससी के लिए आरक्षित रहे सात वार्डों को रोटेशन के तहत इस बार बाहर रखा गया है। 2021 में वार्ड-7, 16, 19, 24, 26, 28 और 31 एससी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे। इनमें वार्ड-16, 19 और 28 एससी महिला के लिए आरक्षित थे। आरक्षण के तय फार्मूले के अनुसार एक चुनाव में एससी के लिए आरक्षित वार्डों को अगले चुनाव में दोबारा उसी श्रेणी में आरक्षित करने के बजाय एससी आबादी के प्रतिशत के आधार पर अगले वार्डों को मौका दिया जाता है। महिलाओं के लिए भी 12 वार्ड आरक्षित होंगे 35 में से कुल 12 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इनमें तीन एससी महिला और नौ सामान्य महिला वार्ड होंगे। कई पुरुष नेताओं को अपनी पत्नी को चेहरा बनाना होगा। पहले भी देवेंद्र बबला जैसे नेता ने महिला आरक्षण के बाद पत्नी हरप्रीत कौर बबला को चुनाव लड़ाया था। इन पार्षदों को तलाशना पड़ सकता है नया वार्ड वार्ड-1 में अभी आप पार्षद जसविंद्र कौर सामान्य वर्ग श्रेणी से हैं। वार्ड-3 पर भाजपा पार्षद दलीप शर्मा के सामने आरक्षण तीसरी बार जीत का क्रम रोकेगा। उन्हें नई राजनीतिक जमीन तलाशनी होगी। वार्ड-4 में आप से भाजपा में शामिल होने के बाद डिप्टी मेयर की कुर्सी पर पहुंची सुमन शर्मा काबिज हैं। उनको भी अब नए वार्ड से टिकट लेने के लिए लड़ाई लड़नी होगी। वार्ड-9 में भाजपा पार्षद बिमला दुबे हैं। 2021 में वार्ड-7 आरक्षित होने के कारण उन्होंने वार्ड-9 से चुनाव लड़ा था। अब वार्ड-9 छोड़ना पड़ सकता है। वह वापस वार्ड-7 लौट सकते हैं। वार्ड-15 में आप पार्षद रामचंद्र यादव की मुश्किल बढ़ने वाली है। उन्हें टिकट के लिए नई जगह तलाशनी पड़ सकती है। वार्ड-29 से आप की टिकट पर पार्षद बने मुन्नवर अब कांग्रेस में जा चुके हैं। आरक्षण को देखते हुए ही नई जगह टिकट की तलाश में उनके पार्टी बदलने की बात कही जा रही है। वहीं अंतिम वार्ड-32 में भाजपा पार्षद एवं सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह हैं। अगर वार्ड रिजर्व होता है तो उन्हें भी टिकट के लिए दूसरी जगह तलाशनी होगी।

85 हजार सरकारी कर्मचारियों को बड़ी सौगात, पंजाब में DA बढ़कर हुआ 60 फीसदी

चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर एक अहम घोषणा की है। पंजाब सरकार के मंत्री अमन अरोड़ा द्वारा किए गए इस एलान से राज्य के हजारों कर्मचारियों के वेतन में सीधा इजाफा होगा। डीए में भारी बढ़ोतरी 17 जुलाई 2020 के बाद ड्यूटी जॉइन करने वाले सभी कर्मचारियों को अब 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) दिया जाएगा। वर्तमान में इन कर्मचारियों को केवल 42 प्रतिशत डीए मिल रहा था, जिसमें अब सीधे 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। किन 85 हजार कर्मियों को मिलेगा 60%  DA/ महंगाई भत्ता  पंजाब कैबिनेट सब-कमेटी ने साल 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर DA देने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मान सरकार मंजूरी देने वाली है. कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 17 जुलाई 2020 के बाद जितने कर्मी बहाल हुए हैं उन्‍हें केंद्र के पे-स्‍केल पर बहाल किया गया था, लेकिन उन्‍हें राज्‍य के मुताबिक, 42% महंगाई भत्ता ही दिया जा रहा था. इनकी संख्‍या राज्‍य में करीब 85 हजार है. अब इन्‍हें मान सरकार, केंद्र के बराबर यानी 60 फीसदी महंगाई भत्ता देने जा रही है।  केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर सैलरी मिलेगी  कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि पंजाब सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए करीब 85,000 नए कर्मचारियों को राहत देते हुए उनके महंगाई भत्ते (DA) को 42% से बढ़ाकर 60% करने की सिफारिश की गई है. इस संबंध में कैबिनेट सब-कमेट्री की मीटिंग में फैसला लिया गया है ताकि इन कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर सैलरी दी जा सके।  अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि पिछली सरकार ने 17 जुलाई 2020 को फैसला लिया था कि उसके बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों को पंजाब के वेतनमान की बजाय केंद्रीय वेतनमान पर रखा जाएगा. मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार का रुख बिल्कुल साफ है कि नए कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में कम सैलरी नहीं मिलनी चाहिए।  मंजूरी के लिए मुख्‍यमंत्री के पास भेजी गई फाइल  उन्‍होंने बताया कि कैबिनेट सब-कमेट्री के इस अहम फैसले को अब मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के पास भेज दिया गया है और उम्मीद है कि इस पर जल्द ही अंतिम मुहर लग जाएगी. मंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्य राज्यों की सरकारों को भी अपने कर्मचारियों को पंजाब की तर्ज पर बेहतर वेतन देना चाहिए।  85,000 कर्मचारियों को सीधा लाभ सरकार के इस कदम से पंजाब के करीब 85,000 कर्मचारियों को फायदा होगा और उनके वेतन में अच्छी-खासी वृद्धि देखने को मिलेगी। केंद्रीय कर्मियों के बराबर मिलेगा हक मंत्री अमन अरोड़ा ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर वेतन और महंगाई भत्ता (डीए) देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह कदम कर्मचारियों के लिए एक बड़ी सौगात माना जा रहा है, जिससे आगामी त्योहारों से पहले उन्हें बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।     

पंजाब-चंडीगढ़ में मौसम रहेगा मेहरबान, तापमान 1.6 डिग्री गिरा; 6 जिलों में यलो अलर्ट

अमृतसर पंजाब में शनिवार पांच जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद बारिश का दायरा लगातार कम होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार कल, 6 सितंबर को केवल पठानकोट में भारी बारिश का अलर्ट रहेगा, जबकि सात और आठ सितंबर को पूरे राज्य में कोई चेतावनी नहीं है। इसके अलावा शुक्रवार को राज्य के औसत अधिकतम तापमान में 1.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई। इसके बावजूद तापमान सामान्य के आसपास रहा। सबसे अधिक तापमान बठिंडा हवाई अड्डे पर 36.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मानसून सीजन में अब तक 34 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज पंजाब के 22 जिलों में बारिश की संभावना है। पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, नवांशहर और मोहाली में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, फिरोजपुर, फरीदकोट, मोगा, लुधियाना, संगरूर और फतेहगढ़ साहिब में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। वहीं, फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला और मानसा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हिमाचल से सटे जिलों में बारिश के बने आसार 5 सितंबर: पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में भारी बारिश की संभावना है। इन जिलों के अलावा मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में भी कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, बरनाला और बठिंडा में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। फाजिल्का, मुक्तसर और फरीदकोट में छिटपुट बारिश हो सकती है। 6 सितंबर: केवल पठानकोट में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली और पटियाला में कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। मध्य और पश्चिमी पंजाब के कुछ जिलों में छिटपुट बारिश हो सकती है। 7 सितंबर: किसी भी जिले के लिए मौसम चेतावनी नहीं है। पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर और रूपनगर में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। वहीं फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, फरीदकोट, मोगा, फिरोजपुर, बरनाला और मानसा में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा। 8 सितंबर: पूरे पंजाब में कोई चेतावनी नहीं है। उत्तरी जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश संभव है, जबकि दक्षिण-पश्चिमी पंजाब के अधिकांश हिस्से शुष्क रहेंगे। मध्य पंजाब में भी बारिश की संभावना बहुत कम है। डैम खतरे के निशान से नीचे भाखड़ा डैम में पानी का स्तर 1,641.2 फीट है, जबकि इसकी एफआरएल सीमा 1,680 फीट है। पोंग डैम का जलस्तर 1,371.16 फीट है और इसकी एफआरएल सीमा 1,390 फीट है। दोनों डैम में जलस्तर अभी निर्धारित सीमा से नीचे है। बिजली की डिमांड हुई कम बारिश होने से बिजली की मांग में कमी आई है। शुक्रवार रात पंजाब में बिजली की मांग 12,296 मेगावाट रही। इस दौरान राज्य ने 8,004 मेगावाट बिजली बाहर से ली, जबकि राज्य ने खुद 3,799 मेगावाट बिजली पैदा की। शुक्रवार को तापमान में गिरावट दर्ज राज्य के औसत अधिकतम तापमान में 1.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई। इसके बावजूद तापमान सामान्य के आसपास रहा। सबसे अधिक तापमान बठिंडा हवाई अड्डे पर 36.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शुक्रवार को पटियाला में 24.6 मिलीमीटर, जालंधर में 15.5 मिलीमीटर, फतेहगढ़ साहिब में 12.5 मिलीमीटर, रूपनगर के श्री आनंदपुर साहिब में 9 मिलीमीटर और अमृतसर में 8 मिलीमीटर बारिश हुई। होशियारपुर में 7 मिलीमीटर और संगरूर में 4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।  

शिक्षा में नवाचार का कमाल, पंजाब-चंडीगढ़ के 2 टीचरों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार

चंडीगढ़ शिक्षक दिवस के मौके पर देशभर के 48 चुनिंदा शिक्षकों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। इनमें पंजाब और चंडीगढ़ के दो शिक्षक भी शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई को किताबों से आगे निकला।  चंडीगढ़ के रवि जयसवाल ने स्कूल में 3D गुंबद थिएटर और मौसम केंद्र बनाकर बच्चों को अंतरिक्ष और विज्ञान का सीधा अनुभव दिया। वहीं, पटियाला के डॉ. दिनेश कुमार ने वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा जीरो-कॉस्ट मॉडल तैयार कर छात्रों के मन से फिजिक्स का डर दूर किया। दोनों शिक्षकों की ये पहल अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गई है। अब दोनों टीचरों के बारे में विस्तार से पढ़िए… स्कूल में एक 3D गुंबद थिएटर बनाया रवि जयसवाल चंडीगढ़ के मलोया कॉलोनी के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल में साइंस टीचर हैं। उन्होंने विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों को बच्चों के लिए आसान और रोचक बनाने के लिए स्कूल में एक 3D गुंबद थिएटर बनाया है। इसके लिए उन्होंने स्कूल के हॉल में टिन और थर्मोकोल जैसी बेकार चीजों का इस्तेमाल किया। इस गुंबद पर छात्रों को अंतरिक्ष और विज्ञान से जुड़े वीडियो और तस्वीरें दिखाई जाती हैं। इससे बच्चे विषयों को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय देखकर और समझकर सीखते हैं। कपूरथला की साइंस सिटी से आया आइडिया जायसवाल ने बताया कि स्कूल के स्टूडेंट्स अकसर उनसे कपूरथला की साइंस सिटी घूमने की इच्छा जताते थे। इसी से उन्हें स्कूल में ही बच्चों को ऐसा अनुभव देने का विचार आया। उन्होंने सबसे पहले अपने स्कूल में गुंबद थिएटर तैयार कराया। बाद में उनके इस प्रयोग को चंडीगढ़ के छह अलग-अलग सरकारी स्कूलों में भी शुरू किया गया। स्कूल के हॉल में टिन और थर्मोकोल की मदद से गुंबदनुमा ढांचा बनाया गया। इस पर अंतरिक्ष और दूसरे वैज्ञानिक विषयों से जुड़े वीडियो और तस्वीरें दिखाई जाती हैं। इससे स्टूडेंट्स विज्ञान के कठिन विषयों को भी आसानी से समझ पाते हैं। 20 छात्रों ने राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनियों में लिया हिस्सा जायसवाल ने मालोया स्कूल में स्टूडेंट्स के लिए एक मौसम केंद्र भी बनाया है। यहां बच्चे मौसम से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। इसके अलावा वे वर्षामापी यंत्र की मदद से बारिश की मात्रा भी मापते हैं। इस तरह स्टूडेंट विज्ञान को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उसे अपने आसपास की चीजों से जोड़कर समझते हैं। जायसवाल के स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रदर्शनियों में भी हिस्सा लिया है। उनके अनुसार करीब 20 स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल का नाम रोशन किया है। जरूरतमंद विद्यार्थियों की आर्थिक मदद भी करते हैं जायसवाल खुद चंडीगढ़ में पढ़ाई कर चुके हैं। जरूरत पड़ने पर उन्होंने अपने स्टूडेंट्स को आर्थिक मदद भी दी है, ताकि पैसे की कमी के कारण उनकी पढ़ाई न रुके। उन्होंने बताया कि उनके दो पूर्व स्टूडेंट्स इस समय पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में पीएचडी कर रहे हैं। खुद की अधूरी पढ़ाई को छात्रों के सपनों से जोड़ते हैं जायसवाल ने बताया कि उनके पढ़ाने का तरीका उनके खुद के छात्र जीवन से भी जुड़ा है। उनका मानना है कि पढ़ाई के दौरान जो अवसर उन्हें नहीं मिल सके, वे अवसर आज के स्टूडेंट्स को उपलब्ध होने चाहिए। सहकर्मी से मिली पुरस्कार की जानकारी जायसवाल ने बताया कि उन्हें अपने चयन की जानकारी एक सहकर्मी से मिली। उनके सहकर्मी ने शुक्रवार को पुरस्कार के लिए चुने गए शिक्षकों की सूची देखी थी। इसके बाद जायसवाल को ईमेल मिला, जिसमें उनके चयन की पुष्टि की गई। आधिकारिक सूची में उनका नाम चंडीगढ़ के मालोया कॉलोनी स्थित गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल के शिक्षक के रूप में शामिल है। पंजाब से अकेले शिक्षक, राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित पटियाला के सरकारी विक्टोरिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल के फिजिक्स लेक्चरर डॉ. दिनेश कुमार को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चुना गया है। वे पूरे पंजाब से इस सम्मान के लिए चयनित होने वाले एकमात्र शिक्षक हैं। करीब 25 वर्षों से शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय डॉ. कुमार पिछले 10 से अधिक वर्षों से इसी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं। वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा मॉडल डॉ. दिनेश कुमार ने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की मदद से वर्चुअल फिजिक्स लैब तैयार की है। इसके जरिए छात्र बिना महंगे लैब उपकरणों के डिजिटल माध्यम से फिजिक्स के प्रयोगों को समझ सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने रोजमर्रा की बेकार और कम लागत वाली वस्तुओं से 100 से ज्यादा जीरो-कॉस्ट मॉडल तैयार किए हैं। इनका इस्तेमाल कठिन वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के लिए किया जाता है। सरकारी स्कूलों की छात्राओं को सीधा फायदा वर्चुअल लैब का सबसे बड़ा फायदा उन सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को होता है, जहां पर्याप्त प्रयोगशाला उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। इंटरैक्टिव विजुअल्स और डिजिटल प्रयोगों के जरिए छात्र फिजिक्स की अवधारणाओं को आसानी से समझ पाते हैं। डॉ. कुमार का प्रयास है कि स्टूडेंट्स के मन से फिजिक्स का डर दूर हो और वे इसे प्रयोग करके सीखें। पीएचडी की, 2020 में मिला स्टेट अवॉर्ड 52 वर्षीय डॉ. दिनेश कुमार ने फिजिक्स में पीएचडी की है। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पटियाला के सरकारी मोहिंद्रा कॉलेज और एमएससी पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से की। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 2020 में पंजाब सरकार के स्टेट टीचर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. कुमार स्कूल समय के बाद और छुट्टियों में जरूरतमंद छात्राओं को मुफ्त अतिरिक्त कक्षाएं और मार्गदर्शन देते हैं।

पंजाब में नशे पर सियासत जारी, अकाली-कांग्रेस से AAP तक बदली सरकारें; 2027 चुनाव में भी बनेगा मुद्दा

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में नशा करीब दो दशक से ऐसा मुद्दा है जो सरकार बदलने के साथ खत्म नहीं हुआ। 2007 के बाद अकाली-भाजपा सरकार फिर 2017 में कांग्रेस और 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार आई। तीनों सरकारों ने नशे के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सवाल फिर वही है कि इतने वर्षों की कार्रवाई के बाद नशे की जड़ कितनी कमजोर हुई और युवा इससे कितना दूर हुआ। उपलब्ध सरकारी पुलिस एनसीआरबी एनसीबी और केंद्रीय जांच एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार आप सरकार के दौरान कार्रवाई का पैमाना सबसे बड़ा दिखता है। हालांकि अधिक मामले और गिरफ्तारियां नशे की खपत का सीधा पैमाना नहीं हैं। ये पुलिस की अधिक सक्रियता और मामलों के ज्यादा पंजीकरण का नतीजा भी हो सकते हैं। अब बहस सिर्फ गिरफ्तारियों और बरामदगी की नहीं बल्कि सप्लाई लाइन और बड़े नेटवर्क को तोड़ने की है। अकाली-भाजपा सरकार : 6,000 करोड़ के नेटवर्क ने बढ़ाई सियासी तपिश 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार रही। एनसीआरबी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2007 से 2011 के बीच एनडीपीएस मामलों में 30,422 गिरफ्तारियां हुईं। 2012 से 2015 के बीच 58,511 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। 2012 में 11,715 2013 में 16,821 2014 में 17,084 और 2015 में 12,171 गिरफ्तारियां हुईं। एनसीबी के अनुसार 2015 में पंजाब में 601.88 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई। इसी दौर में पूर्व डीएसपी और अर्जुन पुरस्कार विजेता पहलवान जगदीश भोला को 2013 में सिंथेटिक ड्रग तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने नेटवर्क का आकार करीब 6,000 करोड़ रुपये बताया। बाद में कई बड़े नाम जांच के दायरे में आए। 2019 में भोला को सजा हुई और 2024 में धनशोधन मामले में भोला समेत 17 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए करीब 12.37 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त करने का आदेश दिया गया। कांग्रेस से आप तक : कार्रवाई का दायरा बढ़ा पर सवाल कायम 2017 में कांग्रेस सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स बनाई। 2017 से 2021 के उपलब्ध आंकड़ों में 52,255 एनडीपीएस मामले और 68,064 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। करीब 2,412-2,415 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई। दिसंबर 2021 में अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस कानून के तहत मामला दर्ज हुआ। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और बाद में जमानत मिली। मार्च 2022 में भगवंत मान के नेतृत्व में आप सरकार आई और ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान शुरू किया। 2022 से 2026 तक सरकार के अनुसार 73,541 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए और 98,596 लोग गिरफ्तार हुए। करीब 5,979 किलोग्राम हेरोइन 93 किलो आईसीई 3,583 किलो अफीम और 8.7 करोड़ फार्मा गोलियां-कैप्सूल जब्त किए गए। 772 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त या ध्वस्त करने और 54.47 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद करने का दावा है। दोषसिद्धि दर करीब 89 प्रतिशत बताई गई है। तस्करों से पुलिस और नेताओं तक पहुंची जांच 2012 में रंजीत सिंह कंडोला उर्फ राजा कंडोला गिरफ्तार हुआ। उसकी सहयोगी वानिया खन्ना को 2 किलो हेरोइन के साथ पकड़ा गया और उसे 10 साल की सजा हुई। 2013 में एनआरआई अनूप सिंह काहलो 540 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर 16 किलो और सहयोगी की कार से 10 किलो हेरोइन मिली। इसी जांच से भोला नेटवर्क सामने आया। भोला के साथ फार्मा कारोबारी जगजीत सिंह चहल और पूर्व अकाली नेता मनिंदर सिंह ‘बिट्टू’ औलख के नाम भी सामने आए। 2017 में पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसके सरकारी क्वार्टर से 4 किलो हेरोइन 3 किलो स्मैक हथियार और नकदी मिली। उस पर ड्रग आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। 2023 में एसएसपी राजजीत सिंह हुंदल को सेवा से बर्खास्त किया गया। वह ड्रग और भ्रष्टाचार मामलों में फरार हैं और घोषित अपराधी हो चुके हैं। नेता, पुलिसकर्मी भी धरे गए 2020 में पूर्व एसएसबी सदस्य और अकाली नेता अनवर मसीह गिरफ्तार हुए। उनके मकान से 188-194 किलो हेरोइन और ड्रग प्रोसेसिंग लैब का सामान मिलने का मामला सामने आया। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को 2021 में ईडी और 2023 में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। मूल मामले में 2 किलो हेरोइन गुरदेव सिंह से मिली थी। 2024 में खैरा को हाईकोर्ट से जमानत मिली। उन्होंने आरोपों से इनकार किया। 2022 में मजीठिया ने एनडीपीएस मामले में आत्मसमर्पण किया। 2025 में आय से अधिक संपत्ति के कथित 540 करोड़ रुपये के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2024 में पूर्व विधायक सतकार कौर गेहरी को 128 ग्राम हेरोइन के मामले में गिरफ्तार किया गया और भाजपा ने निष्कासित किया। 2025 में पुलिस कांस्टेबल अमनदीप कौर 17 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ी गईं और सेवा से बर्खास्त हुईं।  खैरा के पूर्व पीएसओ जोगा सिंह को 2015 के मामले में 2025 में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। मार्च 2026 में तरनतारन के सरपंच परमजीत सिंह उर्फ पम्मा से 18 किलो हेरोइन बरामद होने का मामला सामने आया। इसे सीमा-पार नेटवर्क से जोड़ा गया।   

पंजाब में 82 लाख से ज्यादा बैंक खाते निष्क्रिय, ₹3,111 करोड़ फंसे; ऐसे बचाएं अपनी जमा पूंजी

चंडीगढ़  पंजाब के 82.68 लाख बैंक खातों में 3111 करोड़ रुपये ऐसी रकम है, जिसके असली हकदार या तो खातों से दूर हो चुके हैं या फिर उन्हें अपनी जमा राशि की याद ही नहीं रही। लंबे समय तक लेन-देन नहीं होने के कारण इनमें से बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय हो गए और नियमों के तहत बैंकों ने जमा रकम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के डिपॉजिटर एंड अवेयरनेस फंड (डीईए) में ट्रांसफर कर दी गई।  हैरानी की बात यह है कि बैंकों की तमाम कोशिशों के बावजूद महज 0.48 फीसदी खाताधारकों तक ही पहुंच बनाई जा सकी और उनकी रकम लौटाई गई। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की हालिया बैठक में पेश रिपोर्ट ने बैंक खातों में जमा इस लावारिस धन की तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार बैंकों की तरफ से विशेष अभियान के तहत 39,918 बैंक खातों में 130 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। पंजाब सरकार ने ओडिशा की तर्ज पर सिंगल नोडल अकाउंट तैयार किया है ताकि खातों में जमा राशि के भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो लेकिन बावजूद इसके अधिकतर बैंक इस खाते में राशि जमा नहीं करवा रहे हैं। जानकारी के अनुसार अधिकतर खाते ऐसी परिस्थितियों में निष्क्रिय हुए जब खाताधारक स्थानांतरित हो गए या फिर उनका बैंक बदल गया। समिति के अनुसार बैंक खाताधारकों को ढूंढ रहे हैं जिसके लिए लगातार बैंकों को उचित दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। इस तरह निष्क्रिय हो जाता है खाता जब किसी खाते में दो साल से ज्यादा कोई लेनदेन या गतिविधि नहीं होती है तो उसे निष्क्रिय कर दिया जाता है। वहीं अगर खाता 10 साल से ज्यादा समय तक निष्क्रिय रहता है तो बैंक उस खाते की राशि को आरबीआई के विशेष फंड में जमा करवा देता है। 2.49 लाख खाते निष्क्रिय  रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न बैंकों में इस समय 2.49 लाख बचत खाते निष्क्रिय हैं जिनमें करोड़ों रुपये जमा हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुले 33.50 लाख खाते निष्क्रिय हो गए हैं और इनमें 435 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे खाते शामिल हैं जिन्हें लोगों ने न तो अपडेट करवाया और न ही पिछले काफी समय से लेन-देन किया है जिस कारण यह निष्क्रिय हो रहे हैं। निष्क्रिय होने से बचाने के लिए यह सावधानी जरूरी      अपने खाते में कुछ महीनों में एक बार लेन-देन जरूर करें।     नियमित रूप से अपने सभी बैंक खातों की समीक्षा करें, उपयोग में नहीं आने वाले खाते बंद कर दें     बैंकों में संपर्क के लिए अपनी नवीनतम जानकारी अपडेट करवाएं।     पासबुक, नेट बैंकिंग से समय-समय पर खाता जांचें     बैंक के किसी भी अलर्ट और नोटिस को अनदेखा न करें।  

पंजाब के 85 हजार सरकारी कर्मचारियों को राहत, DA 42% से बढ़ाकर 60% करने की सिफारिश

चंडीगढ़  पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. पंजाब सरकार ने राज्‍य के 85 हजार कर्मचारियों को जन्‍माष्‍टमी का बड़ा तोहफा दिया है. कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि पंजाब के 85 हजार कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता मिलेगा. अभी इन कर्मचारियों को बेसिक पे यानी मूल वेतन का 42% महंगाई भत्ता दिया जाता है. भगवंत मान सरकार के नए फैसले के मुताबिक, अब 85,000 सरकारी कर्मियों को केंद्र के बराबर यानी मूल वेतन का 60 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा।    किन 85 हजार कर्मियों को मिलेगा 60%  DA/ महंगाई भत्ता  पंजाब कैबिनेट सब-कमेटी ने साल 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर DA देने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मान सरकार मंजूरी देने वाली है. कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 17 जुलाई 2020 के बाद जितने कर्मी बहाल हुए हैं उन्‍हें केंद्र के पे-स्‍केल पर बहाल किया गया था, लेकिन उन्‍हें राज्‍य के मुताबिक, 42% महंगाई भत्ता ही दिया जा रहा था. इनकी संख्‍या राज्‍य में करीब 85 हजार है. अब इन्‍हें मान सरकार, केंद्र के बराबर यानी 60 फीसदी महंगाई भत्ता देने जा रही है।     चीमा ने यह भी दावा किया कि राज्य अपने कर्मचारियों को देश में सबसे अधिक वेतन देता है। उन्होंने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते को लेकर विपक्षी दलों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा बलजीत कौर के साथ मौजूद चीमा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पंजाब के कई प्रमुख श्रेणियों के कर्मचारी पहले से ही अधिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं।कैबिनेट मंत्री अरोड़ा ने कर्मचारी संगठनों से अपील की कि वे टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय सरकार के साथ बातचीत के माध्यम से अपनी बात रखें। उन्होंने कहा, ‘‘कर्मचारी सुशासन की रीढ़ हैं। हम कर्मचारी संगठनों से अपील करते हैं कि वे विपक्षी दलों के राजनीतिक अवसरवाद को समझें, जिन्होंने चुनाव से पहले बिना आवश्यक वित्तीय प्रावधान किए वादे किए थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ बातचीत की मेज पर सभी लंबित मुद्दों का समाधान करने के लिए तैयार हैं, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो सके और पंजाब की जनता पर असहनीय वित्तीय बोझ भी न पड़े।’’ मंत्रियों का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का बकाया पैसा दो हफ़्ते के अंदर देने को कहा गया था। सरकार की दलील है कि इतने कम समय में कुल 14,191 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने का आदेश संवैधानिक रूप से असंभव है। चीमा ने करीब 14,000 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान नहीं किए जाने के लिए पिछली सरकारों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने अब तक 4,500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान कर दिया है।सरकारी कर्मचारी, जिन्होंने 27 अगस्त को राज्यव्यापी हड़ताल की थी, लंबित डीए जारी करने समेत अपनी विभिन्न मांगों को स्वीकार करने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बना रहे हैं। चीमा ने कहा कि पंजाब के कर्मचारियों का मूल वेतन और डीए मिलाकर मिलने वाली राशि हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अन्य राज्यों के कर्मचारियों से अधिक है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में सरकारी कर्मचारियों का वेतन पंजाब सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन से 28 प्रतिशत कम है।चीमा ने यह भी दावा किया कि राज्य के कुल राजस्व में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर 51 प्रतिशत राशि खर्च होती है, जबकि अन्य राज्यों में यह औसतन 38 प्रतिशत है।उन्होंने पंजाब में क्लर्क, ड्राइवर, शिक्षक और स्टेनोग्राफर के वेतन की तुलना केंद्र सरकार में इन्हीं पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन से भी की।उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तुलना में अधिक मूल वेतन दे रही है। वित्त मंत्री ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद उसने अपने कर्मचारियों का डीए 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया।उन्होंने कहा, ‘‘जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी, तब कर्मचारियों को 28 प्रतिशत डीए मिल रहा था। हमने इसे अक्टूबर 2022 में बढ़ाकर 34 प्रतिशत, दिसंबर 2023 में 38 प्रतिशत और 2024 में 42 प्रतिशत कर दिया।’’ उन्होंने विपक्षी दलों पर यह दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया कि आप सरकार ने अपने कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं किया है।

सास की अंतिम विदाई बनी मिसाल, लुधियाना में बहुओं ने दिया अर्थी को कंधा; आंखें-शरीर किए दान

लुधियाना  लुधियाना में महिला की मौत के बाद जब घर से उनकी अर्थी निकाली गई तो बहुओं ने एक नई मिसाल कायम की। दोनों बहुओं ने अपनी सास की अर्थी को आगे से अपने कंधों पर उठाया, जबकि दोनों बेटों ने पीछे से कंधा लगाकर मां को अंतिम विदाई दी। घर से कुछ दूर तक बहुओं ने सास की अर्थी को कंधा दिया और उसके बाद शव हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर की मैनेजमेंट के हवाले कर दिया। शव लेकर अस्पताल की मैनेजमेंट फिरोजपुर के लिए रवाना हुई। मेडिकल कॉलेज में अब उनके शव पर स्टूडेंट्स प्रैक्टिकल करेंगे। अंतिम यात्रा से पहले महिला सुखदेव कौर की आंखें भी दान की गई। आंखें डॉ रमेश सुपरस्पेशिलिटी आईएंड लेजर सेंटर को दी गई। उनकी आंखें भी किसी दृष्टिहीन को लगाई जाएंगी और वो भी दुनियां देख सकेंगे। महिला अपने दो बेटों व बहुओं के साथ लुधियाना के प्रताप सिंह वाला में रहती थी। उन्होंने 10 साल पहले मरणोपरांत शरीर दान करने का फैसला किया था। उन्होंने बाकायदा इसके लिए फॉर्म भर दिया था। परिवार ने भी एफिडेविट दिया था कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। परिवार व रिश्तेदारों ने ऐसे दी सुखदेव कौर को अंतिम विदाई…     मौत होते ही आई हॉस्पिटल को किया फोन: सुखदेव कौर ने 10 साल पहले शरीर व आंखें दान करने का संकल्प लिया था। बुधवार शाम को जैसे ही सुखदेव कौर की हार्ट अटैक से मौत हुई तो बेटों यादविंदर सिंह व गुरविंदर सिंह ने डॉ रमेश सुपरस्पेशलिटी आई एंड लेजर सेंटर को फोन किया और मां की आंखों को ले जाने के लिए कहा। आई अस्पताल की टीम आई और उनकी आंखें लेकर चली गई।     शरीर के लिए डेरे की टीम से किया संपर्क: सुखदेव कौर ने एक सत्संग के दौरान डेरे में शरीर दान का संकल्प लिया था। जब उनकी मौत हुई तो बेटों ने डेरे की टीम से संपर्क किया। हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर को शव लेने के लिए कहा। गुरुवार को अस्पताल की टीम शव लेने लुधियाना पहुंची।     बहुओं ने दिया अर्थी को कांधा: धार्मिक रीति रिवाज निभाने के बाद अंतिम यात्रा की शुरुआत में समाज की पुरानी मान्यताओं को दरकिनार करते हुए सुखदेव कौर की दोनों बहुओं मनप्रीत कौर और राजवीर कौर ने अपनी सास की अर्थी को आगे से अपने कंधों पर उठाया, जबकि बेटे यादविंदर सिंह और गुरविंदर सिंह पीछे से सहारा बने।     फूलों से सजी एंबुलेंस को दी हरी झंडी: पार्थिव शरीर को एंबुलेंस में सम्मानपूर्वक रखा गया और पूरे वाहन को फूलों से सजाया गया। गांव प्रताप सिंह वाला के सरपंच गुरमेज सिंह ने हरी झंडी दिखाकर एम्बुलेंस को फिरोजपुर के मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया। अंतिम विदाई के दौरान उपस्थित परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने उनकी इस अंतिम सेवा और त्याग को नमन किया। मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और शोध में आएगा काम गांव प्रताप सिंह वाला के सरपंच गुरमेज सिंह कामरेड ने कहा कि इंसानी शरीर मृत्यु के बाद मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन सुखदेव कौर का यह शरीर अब अमर हो गया है। वे बेहद सहृदय और मीठे स्वभाव की महिला थीं, जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहती थीं। उनके जाने से गांव को अपूरणीय क्षति हुई है, लेकिन उनके परिवार ने शरीरदान करके पूरे समाज को एक मिसाल दी है। उन्होंने आगे कहा कि शरीरदान की मुहिम बेहद सराहनीय है। इस पार्थिव देह पर हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर के छात्र प्रैक्टिकल करेंगे और बीमारियों पर शोध करेंगे, जो भविष्य में मानव जाति के इलाज के काम आएगा। शरीर दान की प्रक्रिया जानिए…     जीवनकाल में संकल्प व पंजीकरण: जब कोई व्यक्ति जीवित रहते हुए शरीरदान का फैसला करता है, तो उसे किसी नजदीकी मेडिकल कॉलेज या अधिकृत संस्थान में जाकर बॉडी डोनेशन फॉर्म भरना होता है, जिसमें उसकी स्पष्ट सहमति दर्ज होती है। इस आवेदन पत्र में परिवार के सदस्यों या नॉमिनी का विवरण भी लिया जाता है, जिसके बाद संस्थान आवेदक को एक औपचारिक पंजीकरण या शपथ पत्र जारी कर देता है।     परिवार को सूचित करना: शरीरदान की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि व्यक्ति अपने फैसले की जानकारी अपने निकटतम परिजनों को पहले से दे दे। व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद परिवार के सदस्यों को ही संबंधित मेडिकल कॉलेज या संस्थान से संपर्क करके दान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होता है।     मृत्यु के बाद संस्थान को सूचना: डॉक्टर द्वारा मृत्यु की पुष्टि किए जाने के बाद परिजनों को बिना किसी देरी के मेडिकल कॉलेज को तुरंत सूचित करना चाहिए। इसके बाद संस्थान के विशेषज्ञ यह जांचते हैं कि क्या शरीर उनके निर्धारित मानकों और स्वीकार्यता की शर्तों के अनुसार सही स्थिति में है।     जरूरी दस्तावेजों की पूर्ति: प्रक्रिया को कानूनी रूप से पूरा करने के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र, पहले से भरा हुआ संकल्प-पत्र, मृतक व उनके निकट संबंधी के पहचान पत्र और संस्थान का निर्धारित सहमति फॉर्म तैयार रखना होता है।     मेडिकल कॉलेज को शव सौंपना: सभी कागजी प्रक्रियाएं और प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद पार्थिव देह को सम्मानपूर्वक मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी डिपार्टमेंट को सौंप दिया जाता है, जहां इसका उपयोग मेडिकल छात्रों के प्रैक्टिकल, अध्ययन और जटिल बीमारियों पर शोध के लिए किया जाता है।     अंतिम संस्कार की प्रक्रिया: शोध व अध्ययन का कार्य पूरा हो जाने के बाद संबंधित संस्थान अपनी नीतियों के तहत शव का अंतिम संस्कार करता है। कई मामलों में परिजनों की इच्छा अनुसार उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाता है।