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पंजाब में दिवाली से पहले कर्मचारियों को राहत, मान सरकार देगी 10 हजार रुपये एडवांस

चंडीगढ़. पंजाब सरकार दिवाली से पहले अपने ग्रुप-डी कर्मचारियों को 10 हजार रुपये का ब्याज मुक्त त्योहार अग्रिम देगी। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शनिवार को इसकी घोषणा की। सरकार के इस फैसले से राज्य के करीब 34,604 कर्मचारियों को लाभ मिल सकेगा। कर्मचारी त्योहार मनाने के लिए यह राशि अग्रिम के रूप में ले सकेंगे और इसके लिए उन्हें कोई ब्याज नहीं देना होगा। वित्त मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यदि सभी पात्र कर्मचारी इस सुविधा का लाभ उठाते हैं तो सरकार पर कुल 34.60 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा। छह नवंबर तक निकालनी होगी राशि सरकार ने कर्मचारियों को दिवाली से पहले अग्रिम राशि उपलब्ध कराने के लिए छह नवंबर, 2026 तक कोषागार से पैसा निकलवाने की अनुमति दी है। इस राशि की वसूली पांच समान मासिक किस्तों में की जाएगी। कर्मचारियों के वेतन से कटौती दिसंबर 2026 से शुरू होगी। यानी 10 हजार रुपये के अग्रिम की प्रत्येक किस्त दो हजार रुपये होगी। कर्मचारी कल्याण के लिए उठाया कदम वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। त्योहार अग्रिम देने का उद्देश्य ग्रुप-डी कर्मचारियों को दिवाली के अवसर पर अपने परिवारों के साथ खुशियां मनाने में आर्थिक मदद देना है। सरकार ने इसे कर्मचारियों के हित में उठाए गए वित्तीय कदमों की कड़ी का हिस्सा बताया है।

दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे में पुलिस की एंट्री से मचा बवाल, मुख्यमंत्री मान ने उठाए सवाल

चंडीगढ़. दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में पुलिस के प्रवेश को लेकर पंजाब की सियासत गर्मा गई है। आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए भाजपा को घेरा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। वहीं, आप के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से मामले में हस्तक्षेप करने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगने की अपील की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि इतिहास गवाह है कि गुरु का घर हमेशा जरूरतमंदों को शरण देता आया है। यदि प्रदर्शन करने वाले युवा गुरुद्वारा साहिब में पहुंचे थे, तो गुरुघर की परंपरा के अनुसार सेवादार उन्हें शरण देते। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने नंगे सिर और जूते पहनकर गुरुद्वारा साहिब में प्रवेश किया, जिससे गुरुघर की मर्यादा को ठेस पहुंची है। मान ने कहा कि सिख कौम इस कथित अपमानजनक कार्रवाई को कभी माफ नहीं करेगी। बलतेज पन्नू ने उठाए कार्रवाई पर सवाल आप के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि गुरुद्वारा साहिब में किसी के भी आने और ठहरने पर सवाल नहीं होना चाहिए। यदि कुछ लोग वहां ठहरे हुए थे, तो कौन से अपराधी या आतंकवादी थे, जिन्हें बाहर निकालने के लिए पुलिस को इस तरह अंदर जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। पन्नू ने सवाल उठाया कि कार्रवाई के दौरान कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया या हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है और पुलिस को किसी भी कार्रवाई के दौरान इसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि घटना से संबंधित अलग-अलग वीडियो सामने आ रहे हैं, इसलिए केंद्र सरकार को पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अमित शाह से जवाब मांगने की अपील बलतेज पन्नू ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से विनम्र अपील की कि वे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और केंद्र सरकार के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करें। उन्होंने कहा कि सिख कौम की सर्वोच्च संस्था के जत्थेदार को यह जवाब मांगना चाहिए कि गुरुद्वारा बंगला साहिब में पुलिस को प्रवेश करने की जरूरत क्यों पड़ी और जूते पहनकर अंदर जाने की क्या वजह थी। अकाली दल की चुप्पी पर भी उठाए सवाल आप ने इस मामले में शिरोमणि अकाली दल की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि भाजपा के साथ गठबंधन के कारण अकाली दल इस मुद्दे पर खुलकर नहीं बोल रहा है। आप ने मांग की कि गुरुद्वारा साहिब में पुलिस की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार जवाब दे और यह स्पष्ट करे कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए ऐसी कार्रवाई क्यों करनी पड़ी।

बच्चों की पढ़ाई पर मोबाइल का असर, होमवर्क छोड़ रील्स-गेम्स में उलझ रहे बच्चे; पेरेंट्स रहें अलर्ट

चंडीगढ़ बच्चा स्कूल से आता है तो अभिभावक उसे होमवर्क करने के लिए मोबाइल थमा देते हैं। शुरुआत में बच्चा मोबाइल फोन पर पढ़ाई से जुड़ा काम देखता है, लेकिन कुछ ही देर में रील और गेम में उलझ जाता है। धीरे-धीरे मोबाइल फोन पर समय बिताने की आदत पढ़ाई से ध्यान हटाने लगती है। इसका असर बच्चों के टेस्ट और परीक्षा के अंकों पर भी पड़ सकता है। कम अंक आने पर बच्चे तनाव में आ जाते हैं। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) के अवसर पर विशेषज्ञों ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पढ़ाई के लिए मोबाइल का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है, लेकिन अभिभावकों को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है और कितना समय बिता रहा है। पीजीआई के डिपार्टमेंट आफ फिजिकल एंड रिहैबिलिटेशन मेडिसिन के डाॅ. भविंदर सिंह के अनुसार, सामान्य बच्चों में भी ध्यान भटकने की समस्या के मामले बढ़ रहे हैं। वहीं, व्यवहार संबंधी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों पर तेज रोशनी और आवाज वाले डिजिटल कंटेंट का असर पड़ सकता है। इससे कुछ बच्चों में चिड़चिड़ापन और आक्रामक व्यवहार बढ़ सकता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों और व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। डाॅ. सिंह के अनुसार, पढ़ाई में परेशानी, परीक्षा का दबाव और अभिभावकों की अपेक्षाएं भी बच्चों में तनाव बढ़ा सकती हैं। व्यवहार में देखे बदलाव तो बातचीत कर समझाएं बच्चों के व्यवहार में लगातार बदलाव दिखे तो उन्हें डांटने के बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए। यदि बच्चा लगातार उदास रहे, खुद को नुकसान पहुंचाने की बात करे या आत्महत्या जैसे विचार व्यक्त करे तो इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए उनकी दिनचर्या नियमित रखना जरूरी है। अभिभावक बच्चों को पर्याप्त नींद लेने दें। रोजाना शारीरिक गतिविधियों और खेलकूद के लिए समय निकालें। मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल सीमित रखें। बच्चों से खुलकर बातचीत करें, ताकि वे अपनी परेशानी बिना डर के बता सकें। मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में मददगार ऑक्यूपेशनल थेरेपी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास में ऑक्यूपेशनल थेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, देश में 10.6 से 15 प्रतिशत वयस्क मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं, जबकि 70 से 92 प्रतिशत लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। जागरूकता और विशेषज्ञों की कमी इसकी प्रमुख वजह हैं।  

अकाली दल किसके साथ लड़ेगा पंजाब चुनाव? सुखबीर बादल ने गठबंधन को लेकर साफ किया रुख

चंडीगढ़  शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने गठबंधन को लेकर किसान आंदोलन के बाद पहली बार खुलकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को छोड़कर सभी विकल्प खुले हैं। शिअद के लिए पंजाब व पंजाब के लोग प्राथमिकता हैं और उसी को केंद्र में रखकर गठबंधन का फैसला लिया जाएगा। सुखबीर बादल ने बीते दिन एक मीडिया प्लेटफार्म पर चर्चा के दौरान यह बात कही है। सुखबीर ने कहा कि जिस भी पार्टी के विचार शिअद से मिलेंगे और जो पंजाब के हितों के लिए काम करने का अपना एजेंडा साझा करेगी, उसके साथ गठबंधन पर विचार किया जा सकता है। गठबंधन के लिए उनके दरवाजे खुले हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि शिअद किसी भी हालत में सिखों के खिलाफ दंगों में लिप्त रही कांग्रेस और मौजूदा समय में पंजाब में सत्तासीन आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। सुखबीर बादल ने की थी पीएम मोदी से मुलाकात उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब में भाजपा और शिअद के रिश्तों में जमीं बर्फ पिघलने और दोनों में फिर से गठबंधन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। इन चर्चाओं को बल उस समय मिला था जब संसद के मानसून सत्र के दौरान सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बैठक हुई। उसके बाद संत लोंगोवाल की बरसी पर सांसद हरसिमरत कौर बादल ने अपने भाषण में गठबंधन के संकेत दिए। हालांकि, भाजपा के कई नेता लगातार आगामी विधानसभा चुनाव में सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात करते रहे हैं। लेकिन हाल ही में भाजपा की प्रदेश में निकाली गईं नशा मुक्त पंजाब यात्राओं के समापन के दौरान भाजपा के दिग्गज नेता व देश के गृहमंत्री अमित शाह की जालंधर में भी शिअद से गठबंधन के संकेत मिले थे। शाह ने अपने भाषण के दौरान जहां अन्य विपक्षी दलों पर कटाक्ष किया लेकिन अपने पूरे भाषण में उन्होंने शिअद पर चुप्पी बनाए रखी। इसके बाद भाजपा-शिअद में फिर से गठबंधन के लिए अंदरूनी तौर पर तैयारियों की चर्चाएं तेज हो गई थीं। बसपा और भाजपा से ही गठबंधन संभव  अब, भले ही सुखबीर बादल ने किसी पार्टी का नाम लेकर गठबंधन की घोषणा नहीं की, लेकिन यह सर्वविदित है कि शिअद के पास गठबंधन के लिए भाजपा और बसपा ही विकल्प मौजूद हैं। शिअद (मान), शिअद (पुनर-सुरजीत) और शिअद (वारिस पंजाब दे) को इस सूची में शामिल नहीं किया जा सकता क्योंकि यह दल भी उसी पंथक पिच पर राजनीति करते हैं, जिस पर शिअद (बादल)। बहुजन समाज पार्टी द्वारा पहले ही घोषणा की जा चुका है कि इस बार के पंजाब विधानसभा चुनाव वह शिअद के साथ गठबंधन नहीं करेगी। चर्चा यह भी है कि बसपा और शिअद (वारिस पंजाब दे) के बीच गठबंधन की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है, जोकि अन्य दलों का चुनावी समीकरण बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है। बहरहाल, 2027 के शुरुआती महीने में पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है और इसमें जल्द ही गठबंधन भी सामने आएंगे।

पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चा तेज, परगट सिंह बोले- मैं भी दावेदार

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस के नए प्रधान परगट सिंह ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। परगट सिंह ने कहा कि कांग्रेस में इतने चेहरे हैं कि हर कोई मुख्यमंत्री बनने की क्षमता रखता है। हालांकि, उन्होंने किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया और कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। परगट सिंह कल यानी रविवार (11 अक्टूबर) को पंजाब कांग्रेस प्रधान के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे। चंडीगढ़ में स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में उनके पदभार ग्रहण समारोह के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस कार्यक्रम में पार्टी के करीब 10 हजार कार्यकर्ताओं के जुटने की उम्मीद है। पदभार ग्रहण समारोह को लेकर प्रदेश संगठन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार, 11 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में होने वाले इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों के जुटने की उम्मीद है। पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित केंद्रीय नेतृत्व के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी अहम रहेगी। इस समारोह पर पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच सबकी नजरें पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी तथा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की मौजूदगी पर टिकी हैं। दोनों नेताओं की उपस्थिति को नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में संगठनात्मक एकजुटता के संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, समारोह में उनकी भागीदारी को लेकर अंतिम स्थिति पर नजर रहेगी। दिल्ली में डटे हैं दोनों सीनियर नेता चन्नी और वड़िंग इन दिनों दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ मतदाता सूची तथा कथित वोट चोरी के मुद्दे पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय हैं। ऐसे में चंडीगढ़ में होने वाले कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी कांग्रेस के भीतर आपसी तालमेल और नए नेतृत्व को समर्थन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रविवार को होने वाले कार्यक्रम में 8 से 10000 कांग्रेस समर्थकों के पहुंचने की उम्मीद है। हरमंदिर साहिब में माथा टेककर शुरू की नई पारी परगट सिंह ने गुरुवार को अमृतसर स्थित श्री गुरु हरमंदिर साहिब में सचिन पायलट और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ माथा टेककर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। इसके बाद अब चंडीगढ़ में औपचारिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने की तैयारी है। पार्टी के सामने इस आयोजन के जरिए कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करने की चुनौती भी है। समितियों की बैठकों का दौर होगा तेज प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक गतिविधियां पहले ही तेज हो चुकी हैं। चुनावी तैयारियों के तहत घोषणापत्र समिति की दो-तीन बैठकें हो चुकी हैं। अब अगले सप्ताह से पार्टी की अन्य समितियों की बैठकें आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। नए अध्यक्ष के कार्यभार संभालने के बाद इन गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है। अब देखना होगा कि परगट सिंह वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय स्थापित कर पार्टी को चुनावी तैयारी के लिए किस तरह एकजुट करते हैं। परगट सिंह की तीन बड़ी बातें…     परगट सिंह ने कहा कि चन्नी, राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुखपाल सिंह खैरा जैसे वरिष्ठ नेताओं के पास काफी अनुभव है। वह उनके अनुभव का लाभ उठाकर पार्टी को मजबूत करने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे।     पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी और आपसी मनमुटाव की चर्चाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सभी नेता एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। हर नेता की भूमिका तय की जाएगी और सभी को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा।     उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी एक व्यक्ति के बजाय सभी नेताओं को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम किया जाएगा। हॉकी के मैदान से राजनीति में आए परगट सिंह ने कहा कि वह राजनीति में स्ट्राइकर की भूमिका निभाएंगे, लेकिन फुल बैक के तौर पर भी खेलने के लिए तैयार हैं। सीएम पद पर परगट सिंह की दावेदारी के 4 कारण     प्रदेश प्रधान का पद: 2 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस हाईकमान ने परगट सिंह को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया प्रधान नियुक्त किया है। राजनीतिक परंपराओं के अनुसार, चुनाव से ठीक पहले प्रदेश प्रधान बनने वाला नेता स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हो जाता है।     गुटबाजी खत्म करने के लिए 'स्वीकार्य चेहरा': पंजाब कांग्रेस लंबे समय से चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग के गुटों के बीच खींचतान से जूझ रही थी। परगट सिंह की छवि एक साफ-सुथरे और विवादों से दूर रहने वाले नेता की है, जिन्हें सभी धड़े स्वीकार करते हैं। वह चन्नी और नए पंजाब प्रभारी सचिन पायलट दोनों के करीबी माने जाते हैं, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत हुई है।     संतुलित सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण: परगट सिंह जट्ट सिख समुदाय से आते हैं और दोआबा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें कमान सौंपकर कांग्रेस ने बिना किसी बड़े सामाजिक बदलाव के समीकरणों को संतुलित किया है, जो 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकता है।     तीन बार के विधायक रह चुके: वह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलंपिक खिलाड़ी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह पंजाब के खेल और शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं और तीन बार के विधायक हैं। उनकी बेदाग और मुखर राजनीतिक शैली के कारण उन्हें एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है। 2 अक्टूबर को बने प्रदेश अध्यक्ष जालंधर कैंट से विधायक और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह को 2 अक्टूबर 2026 को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह ली। पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी और वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चाओं के बीच कांग्रेस हाईकमान ने परगट सिंह पर भरोसा जताया। प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में विजय इंदर सिंगला का नाम भी चर्चा में था, लेकिन हाईकमान ने परगट सिंह को संगठन … Read more

पंजाब के DGP की बढ़ीं मुश्किलें? मोहनजीत शेरों मामले में आयोग ने मांगे सभी रिकॉर्ड, 14 अक्टूबर को पेशी

चंडीगढ़  राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने सिख युवक मोहनजीत सिंह शेरों से जुड़े कथित पुलिस हिरासत में उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को नई दिल्ली तलब किया है। इस संबंध में औपचारिक पत्र जारी करते हुए आयोग ने पंजाब के डीजीपी को 14 अक्तूबर 2026 की दोपहर 12 बजे नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में पेश होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, पंजाब पुलिस को इस पूरे मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड और दस्तावेज भी साथ लाने को कहा गया है। इस कार्रवाई की जानकारी भाजपा नेता दामन बाजवा और हरमनदेव सिंह बाजवा ने साझा की।  क्या है पूरा मामला पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के गांव शेरों में आयोजित 'लोक मिलनी' (जनसंवाद) कार्यक्रम के दौरान मोहनजीत सिंह शेरों ने विरोध स्वरूप काला कपड़ा दिखाया था और इलाके में बेधड़क चल रहे नशे के कारोबार का मुद्दा उठाया था। आरोप है कि इस घटना के बाद चार पुलिस अधिकारियों ने हिरासत के दौरान मोहनजीत सिंह के साथ बर्बरता की और उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। इसी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने पंजाब पुलिस के सर्वोच्च अधिकारी को तलब किया है। 

गमाडा का बड़ा प्लान: भूमि अधिग्रहण और विकास के लिए जुटाए जाएंगे ₹15 हजार करोड़, कंसल्टेंसी फीस पर विवाद

चंडीगढ़  चेंज आफ लैंड यूज (सीएलयू) को लेकर उठे विवादों के बीच ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) अब 15 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है।मोहाली और आसपास के क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण और विकास परियोजनाओं के लिए जुटाई जाने वाली इस बड़ी राशि में से 191.16 करोड़ रुपये गुजरात की कंपनी टिप्सन्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को फीस के रूप में दिए जाएंगे। कंपनी को कुल जुटाई जाने वाली राशि का 1.27 प्रतिशत अरेंजर फीस मिलेगी। गमाडा ने अपनी 14 विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण और विकास कार्यों पर 17,686 करोड़ रुपये की जरूरत बताई है। 14 विकास परियोजनाओं की वित्तीय जरूरत को बनाया आधार गमाडा की फंड जुटाने की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब मोहाली क्षेत्र में जमीन और रियल एस्टेट परियोजनाओं को लेकर चेंज ऑफ लैंड यूज की प्रक्रिया चर्चा में है। हालांकि, प्रस्तावित 15 हजार करोड़ रुपये के फंड और सीएलयू विवादों के बीच किसी सीधे संबंध का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। अथॉरिटी ने अपनी योजना के पीछे 14 विकास परियोजनाओं की वित्तीय जरूरत को आधार बनाया है। गमाडा के मुख्य प्रशासक की ओर से दिए गए विवरण के अनुसार, अथॉरिटी ने 14 विकास परियोजनाएं शुरू की हैं। इनके लिए चिह्नित जमीन का अधिग्रहण करने और उस पर विकास कार्य करवाने के लिए कुल 17,686 करोड़ रुपये की जरूरत है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए 15 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई गई है। पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1955 की धारा 51 के तहत जीमाडा कर्ज लेने, डिबेंचर जारी करने या बांड के माध्यम से धन जुटा सकता है। अथॉरिटी ने इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर फंड जुटाने की योजना को उचित ठहराया है। 191 करोड़ बतौर फीस दिए जाएंगे 15 हजार करोड़ रुपये जुटाने की प्रक्रिया में गुजरात की कंपनी टिप्सन्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 191.16 करोड़ रुपये अरेंजर फीस के रूप में दिए जाने हैं। यह सफलता आधारित फीस होगी और कुल प्रस्तावित राशि का 1.27 प्रतिशत है। जीमाडा ने इसके समर्थन में दूसरे राज्यों की संस्थाओं के उदाहरण दिए हैं, जिनमें हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी , आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन और केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड शामिल हैं। इन संस्थाओं ने भी बुनियादी ढांचा विकास के लिए बांड के जरिये धन जुटाया है। जमीन अधिग्रहण के लिए राज्य के खजाने में पहले से जमा राशि भी इस योजना का महत्वपूर्ण पहलू है। राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013 के तहत संबंधित विकास अथॉरिटियों ने राज्य के खजाने में 6,400 करोड़ रुपये जमा कराए हैं। इसमें गमाडा की ओर से जमा कराई गई राशि 6,210 करोड़ रुपये है। ऐसे में एक तरफ जमीन अधिग्रहण के लिए हजारों करोड़ रुपये जमा हैं, वहीं दूसरी तरफ विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए 15 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी है

चंडीगढ़ में 150 करोड़ के डंपिंग ग्राउंड प्रोजेक्ट पर CBI की नजर, खंगाला जाएगा पूरा हिसाब-किताब

चंडीगढ़ शहर के डंपिंग ग्राउंड में कचरे के पहाड़ के साथ अब करोड़ों रुपये के खर्च का हिसाब भी जांच के दायरे में आ सकता है। पिछले पांच वर्षों में कचरे के प्रबंधन और निस्तारण पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। अब इस रकम के इस्तेमाल, कंपनियों को काम आवंटित करने की प्रक्रिया और भुगतान के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायत में टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए गए हैं। मामले में सीबीआइ की जांच का फोकस सरकारी धन के इस्तेमाल और ठेकों की प्रक्रिया पर रहने की संभावना है। अब सीबीआई रखेगी पैनी नजर शहर में प्रतिदिन सैकड़ों टन कचरा डंपिंग ग्राउंड पहुंचता है। इसके निस्तारण, सेग्रीगेशन और प्रबंधन के लिए नगर निगम ने अलग-अलग कंपनियों को काम सौंप रखा है। इसके अलावा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का संचालन भी निजी कंपनी के माध्यम से किया जा रहा है। इन कार्यों के लिए कंपनियों को प्रति टन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। ऐसे में जांच का अहम बिंदु यह होगा कि ठेके की शर्तों के मुताबिक वास्तव में कितना काम हुआ और उसके बदले कितनी रकम जारी की गई। नगर निगम में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विंग भी बनाया गया है, जिसकी जिम्मेदारी इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी गई है। अब सवाल यह है कि इस व्यवस्था के तहत ठेकों की निगरानी किस स्तर पर हुई, काम की गुणवत्ता और मात्रा का सत्यापन कैसे किया गया और भुगतान से पहले किन दस्तावेजों के आधार पर मंजूरी दी गई। सैनेटरी इंस्पेक्टर का रिश्वत मामला भी गरमाया नगर निगम के सैनिटरी इंस्पेक्टर के पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़े जाने के मामले के बाद डंपिंग ग्राउंड से जुड़े ठेकों और भुगतान व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, रिश्वत मामले और अन्य ठेकों में अनियमितताओं के आरोपों की अलग-अलग जांच और तथ्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। एक ही काम के अलग-अलग रेट, भुगतान की जांच अहम डंपिंग ग्राउंड में कचरे के निस्तारण से जुड़े कार्यों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सबसे बड़ा सवाल अलग-अलग कंपनियों को दिए गए रेट पर है। आरोप हैं कि एक ही प्रकार के काम के लिए अलग-अलग दरों पर ठेके आवंटित किए गए। यदि काम की प्रकृति, मात्रा, तकनीकी शर्तों और अन्य परिस्थितियों में अंतर नहीं था, तो दरों में इस अंतर का आधार क्या था? जांच में यह देखा जाना जरूरी होगा कि कंपनियों ने निर्धारित अवधि में कितना काम पूरा किया, कितनी मात्रा में कचरे का निस्तारण किया गया और भुगतान वास्तविक काम के अनुपात में हुआ या नहीं। इसके लिए टेंडर दस्तावेज, वर्क ऑर्डर, बिल, माप पुस्तिकाएं, निरीक्षण रिपोर्ट और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड अहम होंगे। यदि किसी कंपनी को किए गए काम से अधिक भुगतान हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए दस्तावेजी साक्ष्य जरूरी होंगे। बिना अनुभव वाली कंपनियों को ठेके देने पर सवाल नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया पर दूसरा सवाल उन कंपनियों को काम सौंपने को लेकर है, जिनके पास कथित तौर पर कचरा प्रबंधन या निस्तारण का पर्याप्त अनुभव नहीं था। आरोप हैं कि कुछ कंपनियां काम अधूरा छोड़कर चली गईं। इसके बाद निगम को संबंधित कंपनियों पर पेनल्टी लगाने की कार्रवाई करनी पड़ी। ऐसे मामलों में जांच का विषय होगा कि टेंडर की पात्रता शर्तें क्या थीं, कंपनियों ने अनुभव और तकनीकी क्षमता से संबंधित कौन से दस्तावेज जमा किए और चयन के समय उनका सत्यापन किया गया या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि काम अधूरा छोड़ने वाली कंपनियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई हुई या नहीं और पेनल्टी की रकम वास्तव में वसूल की गई या नहीं। डंपिंग ग्राउंड में कचरे का लगातार जमा होना, उसके निस्तारण पर भारी खर्च और ठेकों को लेकर उठते सवाल नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करते हैं। यदि रिकॉर्ड की जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कंपनियों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही होगी।

TEDx Caledonian Conference: पठानकोट में जुटेंगे 14 देशों के प्रतिनिधि, पूर्व प्रधानमंत्रियों समेत कई दिग्गज होंगे शामिल

पठानकोट  पठानकोट में समाजसेवी और शिक्षाविद सृजल गुप्ता के प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन टेडएक्स कैलेडोनियन आयोजित होने जा रहा है। 'द वर्ल्ड कम्स टू पठानकोट' की थीम पर आधारित यह कार्यक्रम रविवार ढांगू रोड स्थित सरोवर होटल में आयोजित होगा। इस कार्यक्रम के मंच पर माल्टा, रोमानिया, मोल्दोवा और स्लोवाकिया के पूर्व प्रधानमंत्रियों सहित 14 देशों के मंत्री और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अधिकारी अपने विचार, विजन व प्रभाव साझा करेंगे। कार्यक्रम में सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना भी पहुंचेंगे।सृजल गुप्ता ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में 14 देशों के प्रतिनिधि और विश्वभर के दिग्गज नेता हिस्सा ले रहे हैं। पठानकोट की कहानी सुनानी पड़ी सृजल गुप्ता ने आयोजन के पीछे के संघर्ष को साझा करते हुए बताया कि जब मार्च-अप्रैल में इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई और विदेशी दिग्गजों को ईमेल या फोन किए गए, तो उनका पहला सवाल यही होता था कि 'पठानकोट कहां है?'। उन्हें पठानकोट की कहानी सुनानी पड़ी। दुनिया भर के दिग्गज यहां की धरती पर उतरेंगे इन वैश्विक नेताओं का यहां आना पठानकोट की जीत है। उन्होंने शाहरुख खान की फिल्म के गाने का जिक्र करते हुए कहा कि 11 अक्टूबर को पठानकोट का नजारा बिल्कुल वैसा होगा, जैसे 'जमीन पे उतरे सारे सितारे', क्योंकि दुनिया भर के दिग्गज यहां की धरती पर उतरेंगे। 14 देशों के राजनीतिज्ञ होंगे शामिल कार्यक्रम के मंच पर कई देशों के पूर्व प्रधानमंत्री, मंत्री और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अधिकारी अपने विचार, विजन और प्रभाव साझा करेंगे। सम्मेलन में माल्टा के पूर्व प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट, रोमानिया के पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर पोंटा, मोल्दोवा के पूर्व प्रधानमंत्री इयूरी लंका और स्लोवाकिया के पूर्व प्रधानमंत्री एडुआर्ड हेगर विशेष रूप से शामिल होंगे। इनके अलावा इटली के पूर्व उप-प्रधानमंत्री लुइगी डि माओ, यूके के पूर्व रक्षा मंत्री सर ग्रांट शाप्स, भारत से सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप राय और 'बिनांस' के राज टिमोथी नंदवानी सहित कई हस्तियां शामिल होंगी। 3 दिन पठानकोट में रहेंगे अतिथि अतिथियों के दौरे की जानकारी देते हुए सृजल गुप्ता ने बताया कि विदेशी मेहमानों का आना शुरू हो गया है। वे तीन दिन तक यहां रुकेंगे। मुख्य कार्यक्रम से एक दिन पहले, यानी आज, सभी मेहमान श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) और दुर्ग्याणा मंदिर में माथा टेकेंगे, जिसके बाद वे पठानकोट पहुंचेंगे। पठानकोट में वे मीडिया, व्यापार मंडल और इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी करेंगे। शहरवासी अपना पूरा समर्थन दें अंत में सृजल गुप्ता ने अपील करते हुए कहा कि उन्होंने इस कार्यक्रम को यहां लाने के लिए अपने 180 दिन-रात एक किए हैं, इसलिए शहरवासी इस एक दिन अपना पूरा समर्थन दें। जो वैश्विक नेता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, उनके विशेष वीडियो संदेश भी सरप्राइज के तौर पर दिखाए जाएंगे। इस अवसर पर साहब दयाल महाजन और रोहित गुप्ता भी उपस्थित थे।  

हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पंजाब में विश्वस्तरीय व्यवस्थाएं, 27 अक्टूबर को जालंधर में आगाज

चंडीगढ़  पंजाब में होने वाली एशियाई हाकी चैंपियंस ट्राफी के लिए पंजाब सरकार विश्वस्तरीय प्रबंध करेगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक में सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए। टूर्नामेंट का उद्घाटन समारोह 27 अक्टूबर को जालंधर में होगा, जबकि मुकाबले 27 अक्टूबर से पांच नवंबर तक खेले जाएंगे। चैंपियनशिप में भारत, चीन, मलेशिया, जापान, बांग्लादेश और दक्षिण कोरिया की टीमें भाग लेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की समृद्ध हॉकी विरासत को देखते हुए इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को यादगार बनाया जाना चाहिए। इससे प्रदेश को अपनी खेल उपलब्धियों, बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक परंपराओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। शहरों की सफाई और सौंदर्यीकरण पर जोर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तैयारियां केवल स्टेडियम तक सीमित नहीं रहेंगी। जालंधर और मोहाली में व्यापक सफाई अभियान चलाने, सार्वजनिक स्थानों का रखरखाव करने और स्टेडियम तक जाने वाली सड़कों की मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विदेशी खिलाड़ियों और प्रतिनिधिमंडलों के लिए बेहतर आवास, भोजन, सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था करने को भी कहा गया है। होटलों और मैच स्थलों के बीच सुचारु यातायात सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों की भागीदारी और ट्राफी टूर मुख्यमंत्री ने स्कूलों और कालेजों के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय मुकाबले दिखाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए, ताकि युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिले और वे पंजाब की हॉकी विरासत से जुड़ें। टूर्नामेंट के प्रचार के लिए विशेष रूप से तैयार एसयूवी में ट्रॉफी या उसके मॉडल को प्रदर्शित करते हुए प्रदेशभर में ट्राफी टूर निकालने की योजना भी बनाई जाएगी। आयोजन की तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के लिए विशेष समिति गठित की जाएगी।