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चंडीगढ़ में यूटी कैडर के IAS अधिकारियों का वर्चस्व बढ़ने से पंजाब-हरियाणा का प्रभाव कम हुआ

 चंडीगढ़  केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन में अफसरशाही का संतुलन तेजी से बदलता नजर आ रहा है। यूटी कैडर के एक नए आईएएस अधिकारी डी. कार्तिकेयन ने वीरवार को प्रशासन में ज्वाइन किया। डी. कार्तिकेयन के ज्वाइन करने से यूटी कैडर के प्रशासन में आठ आईएएस हो गए, वहीं पंजाब और हरियाणा के दो-दो आईएएस प्रशासन में सेवाएं दे रहे हैं। केंद्रीय सेवा नियम लागू होने से पहले चंडीगढ़ प्रशासन में एडवाइजर को छोड़कर सभी विभागों में 60-40 के अनुपात से पंजाब और हरियाणा कैडर के आईएएस कार्यरत होते थे लेकिन अब यह परिस्थिति बदलती नजर आ रही है। डी. कार्तिकेयन को ज्वाइनिंग के बाद सेक्रेटरी आईटी, सेक्रेटरी विजिलेंस, सेक्रेटरी एग्रीकल्चर मार्केट बोर्ड और चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर (सीईओ) चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड का चार्ज दिया गया है। आईटी का हरियाणा और हाउसिंग बोर्ड सीईओ पद से पंजाब का खोया कब्जा : केंद्रीय सेवा नियम लागू होने से पहले प्रशासन के आईटी विभाग में सचिव पद का कार्यभार हरियाणा कैडर के आईएएस जो कि गृह सचिव पर आसीन होते थे, वह संभालते थे। वहीं, हाउसिंग बोर्ड के सीईओ का चार्ज पंजाब कैडर के आईएएस के पास होता था। इसी प्रकार शिक्षा विभाग सचिव का कार्यभार पंजाब कैडर से आए वित्त सचिव के पास होता था, जो कि आज यूटी कैडर की आईएएस प्रेरणा पुरी के पास है। अभिजीत हुए रिलीव तो कार्तिकेयन ने किया ज्वाइन चंडीगढ़ प्रशासन में अभी तक आठ आईएएस यूटी जबकि दो-दो पंजाब हरियाणा के ही हैं। वीरवार को स्पेशल सेक्रेटरी अभिजीत विजय चौधरी प्रशासन से रिलीव हुए, वह चंडीगढ़ में ही बीएसएफ में डिप्टी फाइनेंशियल एडवाइजर ज्वाइन करेंगे। वहीं, दानिक्स कैडर से प्रमोट हुए डी. कार्तिकेयन ने चंडीगढ़ में ज्वाइन किया। 60-40 के अनुपात पर इसलिए भी सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि बीते दिनों प्रशासन की तरफ से पंजाब के चार आईएएस का नाम केंद्र को भेजा था जिसे नकारा जा चुका है। ऐसे में इस समय यूटी कैडर का दबदबा बढ़ रहा है जबकि पंजाब-हरियाणा का वजूद कमजोर प्रतीत हो रहा है। पंजाब और हरियाणा सरकारें पहले भी चंडीगढ़ प्रशासन में अपने अधिकारियों की संख्या और अहम विभागों की जिम्मेदारी को लेकर मुद्दा उठाती रही हैं। अब यूटी कैडर के लगातार बढ़ते दखल और 60-40 फार्मूले के कमजोर पड़ने से यह विवाद फिर गहराने के संकेत हैं। यह है यूटी कैडर के आईएएस इस समय चंडीगढ़ में आठ आईएएस आफिसर हैं, जिसमें चीफ सेक्रेटरी राजेश प्रताप सिंह, कार्मिक विभाग में सचिव स्वप्निल एम. नाइक, शिक्षा सचिव प्रेरणा पुरी, फूड एंड सप्लाई सचिव मोहम्मद मंसूर, संस्कृति और पर्यटन सचिव डॉ. सैयद आबिद राशिद शाह, सीएसएस से अनुराधा चगती हैं। वहीं, हरियाणा कैडर से होम सेक्रेटरी मंदीप सिंह बराड़ और डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव और पंजाब कैडर से फाइनेंस दीप्रा लाकड़ा और नगर निगम में कमिश्नर अमित कुमार तैनात हैं। राधिका को रिलीव कर डॉ. पालिका को बनाया उच्चतर शिक्षा विभाग निदेशक वीरवार को हुए प्रशासनिक फेरबदल में डी. कार्तिकेयन की ज्वाइनिंग के साथ निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग का कार्यभार भी बदला गया। निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग का कार्यभार डॉ. राधिका से लेकर डॉ. पालिका को दिया गया है।  

पलक तिवारी ने गोल्डन टेंपल में माथा टेका, सिर ढककर गुरबाणी सुनी, अनुभव किया साझा

अमृतसर  अभिनेत्री पलक तिवारी इन दिनों आगामी वेब सीरीज 'लुक्खे' को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। पलक तिवारी ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में माथा टेका और आशीर्वाद लिया। इसकी कुछ तस्वीरें उन्होंने  इंस्टाग्राम पर पोस्ट की। पोस्ट की गई तस्वीरों में वे बेहद सादगी में नजर आ रही हैं। उन्होंने नीला और गुलाबी रंग का एक सुंदर पारंपरिक सूट पहना हुआ है। उन्होंने अपने सिर पर दुपट्टा रखा हुआ है। तस्वीरों में उन्हें स्वर्ण मंदिर के पवित्र सरोवर के किनारे हाथ जोड़कर खड़े और परिसर की सुंदरता को निहारते हुए देखा जा सकता है। अपनी पोस्ट के जरिए पलक ने बताया कि यह स्वर्ण मंदिर में उनका पहला आगमन है। अभिनेत्री ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा, "स्वर्ण मंदिर में यह मेरा पहली बार जाना था। यह अनुभव सच में वैसा ही था, जैसा मैंने सोचा था। अत्यंत शांतिपूर्ण और जादुई।" फिल्मों के बाद अब अभिनेत्री पलक तिवारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धमाल मचाने के लिए तैयार हैं। उनकी आगामी वेब सीरीज 'लुक्खे' को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। इस फिल्म के जरिए जहां, पलक ओटीटी डेब्यू कर रही हैं, तो मशहूर रैपर किंग अभिनय की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। सीरीज में पलक 'सनोबर' नामक किरदार निभा रही हैं, जो इमोशनल, प्यार और आंतरिक संघर्ष से भरा हुआ है। यह सीरीज पंजाब की पृष्ठभूमि में रैप संगीत, क्राइम और प्रतिशोध की कहानी है। सीरीज की कहानी लकी (लक्ष्यवीर) नाम के एक एथलीट के इर्द-गिर्द घूमती है, जो ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश करने के लिए पंजाब की अंडरग्राउंड रैप दुनिया में प्रवेश करता है। यह सीरीज रैपर्स के बीच के टकराव, प्यार, भाईचारे और बदले की कहानी है। सीरीज में रैपर किंग के खास गानों और संगीत का अहम रोल है, जो मुंबई में एक लाइव कॉन्सर्ट में रिलीज किया गया था। सीरीज में किंग (एमसी बदनाम), राशि खन्ना, पलक तिवारी (सनोबर), लक्ष्यवीर सिंह सरन (लकी), और शिवंकित परिहार अहम भूमिका में नजर आएंगे। परिक्रमा में बैठकर गुरबाणी कीर्तन सुना जानकारी के अनुसार, पलक तिवारी ने गोल्डन टेंपल पहुंचकर करीब आधे घंटे तक परिक्रमा में बैठकर गुरबाणी कीर्तन सुना और आध्यात्मिक वातावरण को महसूस किया। अपनी पोस्ट के कैप्शन में पलक ने लिखा कि यह उनका गोल्डन टेंपल का पहला दौरा था, लेकिन जैसा उन्होंने सोचा था, वैसा ही अनुभव उन्हें जहां आकर महसूस हुआ। सलमान खान की फिल्म से किया था डेब्यू पलक तिवारी ने साल 2023 में सलमान खान स्टारर 'किसी का भाई किसी की जान' सेडेब्यू किया था। फिल्म में पूजा हेगड़े, वेंकटेश, भूमिका चावला, जगपति बाबू, विजेंदर सिंह, राघव जुयाल, जस्सी गिल, सिद्धार्थ निगम, शहनाज गिल, पलक तिवारी, विनाली भटनागर और सतीश कौशिक भी नजर आए थे।

पंजाब में फ़्लोर टेस्ट की तैयारियां: अमन अरोड़ा पेश करेंगे प्रस्ताव, 6 BJP सांसदों के शामिल होने से टूट का खतरा

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा का आज 11 बजे विशेष सत्र बुलाया गया है। सरकार की ओर से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके साथ ही AAP के 6 राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने के बाद सरकार पर भी खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में सरकार आज फ्लोर टेस्ट करवा सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, AAP ने अपने सभी विधायकों को विधानसभा में हाजिर रहने के लिए व्हिप भी जारी कर दी है। यही नहीं पार्टी ने सभी विधायकों को तय समय से एक घंटा पहले विधानसभा में बुला लिया था। दरअसल, पार्टी में टूट की सुगबुगाहट के बीच दो दिन पहले सभी सांसदों व विधायकों को जालंधर में बुलाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उस बैठक में 65 ही विधायक पहुंचे जबकि बाकी नदारद रहे। वहीं तीनों लोकसभा सांसद भी बैठक में नहीं पहुंचे। AAP के पास अभी 117 में से कुल 94 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिए 59 विधायक जरूरी होते हैं। भगवंत मानने खुद दी थी जानकारी सीएम भगवंत मान ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में जानकारी देते हुए बताया था कि पंजाब कैबिनेट द्वारा लिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले में यह तय किया गया है कि 1 मई को ‘मजदूर दिवस’ के अवसर पर विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा। यह एक दिवसीय सत्र उन मेहनती मजदूरों और कारीगरों को समर्पित होगा, जो देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में अहम योगदान देते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा सत्र के समय पर सवाल उठाया है। क्या बोले सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा सत्र के समय पर आपत्ति जताते हुए कहा किइसे मजदूर दिवस के दिन बुलाया गया है। उन्होंने इसे सरकार की जल्दबाज़ी और संभावित विश्वास प्रस्ताव की तैयारी से जोड़ते हुए कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने दावा किया है कि AAP सरकार पहले ही अपना बहुमत खो चुकी है। उनका आरोप है कि जालंधर में हुई एक अहम बैठक में कई विधायक अनुपस्थित रहे और जो पहुंचे वो कथित तौर पर प्रशासनिक दबाव में थे। बीजेपी ने बताया फिजूलखर्ची बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने बुधवार को 1 मई को होने वाले पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र को फिजूलखर्ची और सरकारी खजाने पर बोझ बताया। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार विधानसभा जैसी संवैधानिक संस्था का दुरुपयोग न केवल अपनी कमजोर होती पार्टी और अस्थिर विधायकों को संभालने के लिए कर रही है, बल्कि पंजाब में अपनी नाकामियों, अक्षमता, टूटे वादों, माफिया राज, गुंडागर्दी और जबरन वसूली के जाल से उपजे बढ़ते जन आक्रोश से ध्यान भटकाने के लिए भी कर रही है। चुघ ने कहा कि इस तरह का सत्र बुलाने से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान को जनता को बताना होगा कि उनके तथाकथित ‘परिवर्तन’ ने चार वर्षों में क्या हासिल किया है। भ्रष्टाचार, अराजकता और आंतरिक कलह ने उनकी अपनी पार्टी को गहरे अविश्वास में धकेल दिया है। वड़िंग का दावा- 50 विधायक पार्टी छोड़ेंगे राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद लगातार कयास लगाए जा रहे हैं कि 30 से 35 विधायक राघव चड्‌ढा व संदीप पाठक के संपर्क में हैं। कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग भी AAP के 50 विधायकों के पार्टी छोड़ने का दावा कर चुके हैं। अकाली दल के नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया भी आप में टूट की बार-बार बात कर रहे हैं।

पठानकोट में ट्रैफिक एडवाइजरी लागू, खाली ट्रकों को रात 9 बजे तक प्रवेश की अनुमति नहीं

पठानकोट  गर्मी के मौसम में शाम के समय बाजारों में बढ़ती भीड़ और भारी वाहनों की आवाजाही को देखते हुए पठानकोट पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। पुलिस का कहना है कि गर्मी के चलते लोग देर शाम को खरीदारी के लिए बाजारों में पहुंच रहे हैं, जिससे ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में भारी वाहन जिनमें ट्रक, टिप्पर, ट्राला, ट्रैक्टर-ट्राली और कैंटरों के शहर से गुजरने से हादसे बढ़ सकते हैं। इस कारण बड़े वाहनों के लिए शहर में एंट्री का समय निर्धारित किया गया है। पुलिस ने खाली ट्रक, टिप्पर और ट्रैक्टर-ट्रॉली जो वाहन परमानंद और सुंदरचक साइड से कीड़ी मंगियाल व अन्य क्षेत्रों की ओर रेत, बजरी या अन्य खनिज सामग्री लेने जाते हैं, वे रात 9 बजे से पहले शहर की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे। लोड वाहन 10 बजे से शहर में नहीं होंगे एंटर जिला पुलिस की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि जो वाहन क्रशरों से खनिज सामग्री लेकर निकलते हैं, उन्हें रात 10 बजे से पहले शहर से निकलने की अनुमति नहीं होगी। अगर कोई वाहन नियमों के खिलाफ शहर में दिखा तो कार्रवाई की जाएगी। दुर्घटनाओं को रोकना पुलिस का मुख्य उद्देश्य पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। सभी वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या दुर्घटना से बचा जा सके। नियम ना माने को होगी सख्त कानूनी कार्रवाई पठानकोट पुलिस ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले चालकों और ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और अपनी यात्रा के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

पंजाब में कमर्शियल सिलेंडर महंगा, इंडेन ने बढ़ाए दाम; ढाबों पर दाल-रोटी के दाम होंगे ऊंचे

लुधियाना  पंजाब में कमर्शियल सिलेंडर का रेट बढ़ गया है। 19 किलो के सिलेंडर का रेट 1 हजार रुपए तक बढ़ाया गया है। अलग-अलग कंपनियों के रेट में 7 से लेकर 10 रुपए तक का अंतर है। इसी तरह इंडियन ऑयल की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया कि इंडेन का 19 किलोग्राम वाला सिलेंडर पर 993 रुपए महंगा मिलेगा। बता दें कि, तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है। राजधानी दिल्ली में अब यह सिलेंडर 3071.50 का हो गया है, जो पहले 2078.50 में मिलता था। इसका सबसे बड़ा असर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग बिजनेस पर पड़ेगा। बढ़ती लागत के कारण खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। चाय, नाश्ता, थाली और शादी-विवाह के खाने का खर्च बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। आज सुबह कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में करीब एक हजार रुपये के उछाल की खबर आई ही थी कि अब 'छोटू' यानी 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर ने भी बजट बिगाड़ दिया है। सूत्रों के मुताबिक, 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में ₹261 प्रति सिलेंडर की भारी बढ़ोतरी की गई है। महंगाई का यह दोहरा वार सीधे तौर पर उन लोगों की जेब पर पड़ा है, जो रोज कमाते और रोज खाते हैं। कीमतों में हुई इस बेतहाशा वृद्धि के बाद 5 किलो वाले सिलेंडर के दाम अब आसमान छूने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जो सिलेंडर कल तक ₹549 में मिलता था, उसकी कीमत अब बढ़कर ₹810 हो गई है। एक साथ ₹261 का इजाफा छोटे उपभोक्ताओं के लिए बहुत बड़ा झटका है। इससे पहले सुबह ही 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में ₹993 की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर ₹2,078.50 की बजाय अब ₹3,071.50 का मिलेगा। छात्रों और मजदूरों पर बढ़ेगा सबसे ज्यादा बोझ 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर का इस्तेमाल सबसे ज्यादा वो लोग करते हैं जिनके पास स्थाई ठिकाना नहीं होता या जो अकेले रहते हैं। अपना गांव-घर छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वाले लोग इसी सिलेंडर पर निर्भर हैं। वहीं, पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में रहने वाले छात्रों के मासिक खर्च में अब बड़ी बढ़ोत्तरी होगी। डेली वेज वर्कर्स और छोटे दुकानदार: रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे ढाबा चलाने वालों के लिए अब चूल्हा जलाना महंगा हो जाएगा। ईरान संकट का दिख रहा है असर गैस की कीमतों में इस आग के पीछे वैश्विक परिस्थितियां जिम्मेदार बताई जा रही हैं। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी (LPG) का संकट गहरा गया है। भारत में इसका असर पहले से ही दिख रहा था, जिसकी वजह से दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे बड़े शहरों से प्रवासी मजदूरों का पलायन भी शुरू हो चुका है। अब कीमतों में इस ताजा बढ़ोतरी ने स्थिति को और भी दयनीय बना दिया है।

अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी का नया समय, आज से लागू: अब शाम 6:30 बजे तक

अमृतसर  अटारी-वाघा बॉर्डर पर रोज़ाना आयोजित होने वाली मशहूर रिट्रीट सेरेमनी के समय में बदलाव किया गया है। प्रशासन के नए फैसले के अनुसार, अब यह देशभक्ति से भरपूर समारोह शाम 6:00 बजे शुरू होगा और 6:30 बजे तक चलेगा। पहले यह कार्यक्रम शाम 5:30 बजे शुरू होकर 6:00 बजे समाप्त होता था। अधिकारियों के मुताबिक, यह बदलाव मौसम और दिन के समय में हो रहे परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। साथ ही, इसका उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर अनुभव देना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुचारू बनाना भी है। हर दिन बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं। अब इस नए शेड्यूल पर होगा आयोजन नया समय आज यानी 1 मई से लागू कर दिया गया है, इसलिए यहां आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अब इस नए शेड्यूल के अनुसार अपनी योजना बनानी होगी। भारत और पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा किया जाने वाला यह बीटिंग रिट्रीट समारोह अनुशासन, जोश और देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है। दर्शकों में गूंज उठता है ‘वंदे मातरम्’ का नारा हर शाम हजारों दर्शकों की मौजूदगी में “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों से पूरा माहौल गूंज उठता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय से पहले पहुंचें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके और इस शानदार समारोह का पूरा आनंद लिया जा सके। मौसम और दिन की घटती-बढ़ती रोशनी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि दर्शकों को बेहतर अनुभव देने और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए समय में यह बदलाव जरूरी था। अटारी-वाघा बॉर्डर पर हर रोज होने वाली इस देशभक्ति से भरपूर सेरेमनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। देशभक्ति की झलक देखने को मिलती है यह नया समय आज यानी 1 मई से लागू कर दिया गया है। यानी अब जो भी पर्यटक या स्थानीय लोग इस सेरेमनी को देखने की योजना बना रहे हैं, उन्हें नए समय के अनुसार ही पहुंचना होगा। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी भारत और पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा की जाने वाली एक विशेष परंपरा है, जिसमें जोश, अनुशासन और देशभक्ति की झलक देखने को मिलती है। हजारों लोग बनते हैं आयोजन का हिस्सा हर दिन हजारों लोग इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम जैसे नारों से माहौल देशभक्ति से गूंज उठता है। इस बदलाव के बाद उम्मीद है कि लोग समय से पहुंचकर इस अद्भुत दृश्य का आनंद ले पाएंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय का विशेष ध्यान रखें और निर्धारित समय से पहले ही पहुंचकर अपनी सीट सुनिश्चित करें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

राघव चड्ढा की एंट्री के बावजूद पंजाब में BJP को फायदा नहीं, जानें क्या है वजह

लुधियाना  आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्य सभा सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इसको लेकर राज्य सभा सचिवालय ने भी अधिसूचना जारी कर दी है। इसी के साथ उच्च सदन में भाजपा की ताकत भी बढ़ी है और सांसदों की संख्या 113 हो गई है। जिन सात सांसदों ने बीजेपी का दामन थामा है, उनमें से 6 पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं और स्वाती मालिवाल दिल्ली से है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य सभा सांसदों का बीजेपी में जाना अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, दिल्ली हारने के बाद अब आम आदमी पार्टी की पंजाब में ही सरकार है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली चुनाव हारने के बाद पूरा ध्यान पंजाब पर लगा दिया है। AAP के बागी सांसदों के शामिल होने से बीजेपी खुश नजर आ रही है। दरअसल, राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने विधासनभा चुनाव 2022 में AAP की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। जो सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं उनमें- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजिंदर गुप्ता और स्वाति मालीवाल शामिल है।  क्या बीजेपी को मिलेगा फायदा?  AAP के सातों राज्य सभा सांसदों के विलय के बाद उच्च सदन में भले ही बीजेपी का संख्या बल बढ़ा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर फायदा कम होता नजर आ रहा है। अपनी रणनीति से 2022 में राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने AAP को जीत दिलाई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नेताओं का कोई जनाधार नहीं है। ऐसे में बीजेपी के लिए इनका कितना उपयोगी साबित होना संभव है, यह आने वाला समय बताएगा। पंजाब में चड्ढा का इस्तेमाल करेगी बीजेपी वहीं पंजाब में बीजेपी अब राघव चड्ढा का इस्तेमाल करेगी, क्योंकि प्रदेश में कायदे से पार्टी अपनी उपस्थिति भी दर्ज नहीं करा पाई है। इसके अलावा बीजेपी पर पंजाब में किसान विरोधी होने का आरोप भी लगता है। खासकर केंद्र के कृषि कानूनों के विवाद के बाद। संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने बीजेपी पर किसानों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इसलिए अकाली दल भी अब बीजेपी के साथ नहीं है। चड्ढा के सामने भी होगी चुनौती राघव चड्ढा AAP की तरफ से राज्य सभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते थे, लेकिन अब बीजेपी में जाने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां होगी। दरअसल, इससे पहले तक वे बीजेपी के मुखर विरोधी रहे है और कई मौके पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। खासतौर पर कृषि कानूनों को लेकर। ऐसे में प्रदेश की जनता और बीजेपी में अपनी जगह कैसे बनाते है, यह आने वाला समय बताएगा। उन्हें न केवल पार्टी की विचारधारा के साथ तालमेल बैठाना होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा भी जीतना होगा। 

हरभजन सिंह ने हाईकोर्ट में की सुरक्षा बहाल करने की मांग, HC ने केंद्र और पंजाब सरकार को दिया नोटिस

लुधियाना  राज्यसभा सांसद और क्रिकेटर हरभजन सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सुरक्षा वापिस बहाल करने की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है कि जिस भीड़ ने उनके घर के बाहर गद्दार लिखा था, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट ने याचिका पर केंद्र सहित पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही सरकार को आदेश दिए हैं कि हरभजन सिंह और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी।  इसके बाद पंजाब सरकार और केंद्र सरकार दोनों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।अदालत ने पंजाब सरकार को आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक हरभजन सिंह और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी। गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने शनिवार को हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस ले ली थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें CRPF सुरक्षा प्रदान की. अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी, जहां सरकार को अपना पक्ष विस्तार से रखना होगा।  हरभजन सिंह का राजनीतिक करियर 2022 में शुरू हुआ. क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी जॉइन की. मार्च 2022 में AAP ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा के लिए नामित किया. वे बिना विरोध के निर्वाचित हुए और 18 जुलाई 2022 को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली. AAP में उनकी पारी चार सालों की रही. सीएम भगवंत मान को 24 अप्रैल को जब पता चला कि कुछ सांसद पार्टी छोड़ने वाले हैं तो उन्होंने सबसे पहले हरभजन सिंह को फोन लगाया, लेकिन सूत्र बताते हैं कि कई बार कॉल लगाने के बावजूद हरभजन ने सीएम का कॉल नहीं उठाया. हरभजन सिंह आईपीएल के लिए कमेंट्री कर रहे हैं और इस वक्त वे मुंबई में हैं।  अब सुनवाई के दौरान क्या हुआ, पांच प्वाइंटों में जानिए – 1. किस आधार पर सिक्योरिटी वापस ली हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा कि आखिर किस “थ्रेट परसेप्शन” (खतरे के आकलन) के आधार पर अचानक सुरक्षा वापस ली गई। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सुरक्षा प्रदान करना राज्य का कर्तव्य है, खासकर तब जब किसी व्यक्ति के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहे हों। 2. सरकार ने रूटीन प्रक्रिया बताया पंजाब सरकार की ओर से पेश वकील ने सुरक्षा वापस लेने के फैसले का बचाव करते हुए इसे रूटीन प्रक्रिया बताया। हालांकि, कोर्ट ने राजनीतिक बदलाव (AAP से BJP में जाने) और उसके तुरंत बाद सुरक्षा हटाए जाने के समय पर सवाल उठाए। 3. केंद्र की तरफ से सिक्योरिटी दी गई कोर्ट को बताया गया कि राज्य पुलिस की सुरक्षा हटने के बाद केंद्र सरकार ने हरभजन सिंह को CRPF का सुरक्षा कवर दिया है, जो फिलहाल उनके जालंधर स्थित निवास पर तैनात है। 4. गद्दार लिखने का संज्ञान भी लिया कोर्ट ने हरभजन सिंह के घर के बाहर आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शनों और उनकी दीवार पर “गद्दार” लिखे जाने की घटनाओं का भी संज्ञान लिया। 5. विस्तार से हलफनामा देना होगा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें सुरक्षा समीक्षा की पूरी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।

Sri Guru Granth Sahib सत्कार कानून पर बवाल, चर्च ने उठाई सेक्युलरिज्म पर चिंता

चंडीगढ़. पंजाब सरकार के बहुचर्चित “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026” के खिलाफ अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक और संवैधानिक चुनौती पहुंच गई है। एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया (सीआईपीबीसी) ने इस संशोधन कानून को धर्म-विशेष आधारित, भेदभावपूर्ण और संविधान विरोधी बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसके क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने तथा इसे रद्द घोषित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि पंजाब सरकार ने एक विशेष धार्मिक ग्रंथ को पृथक और अधिक कठोर दंडात्मक संरक्षण देकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन किया है। चर्च का तर्क है कि राज्य किसी एक धर्म या उसके पवित्र प्रतीक को ऐसा विशिष्ट विधायी संरक्षण नहीं दे सकता, जिससे अन्य धार्मिक समुदायों के बीच असमानता की भावना उत्पन्न हो। याचिका में इसे संविधान की मूल संरचना में शामिल धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कदम बताया गया है। अन्य धर्म भी प्रभावित हो सकते हैं इंडियन चर्च एक्ट, 1927 के तहत गठित धार्मिक निकाय होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पंजाब सरकार स्वयं अपने पूर्व प्रस्तावित “पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ऑफेंसेज अगेंस्ट होली स्क्रिप्चर्स बिल, 2025” में स्वीकार कर चुकी थी कि पवित्र ग्रंथों के अपमान की घटनाएं केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब तक सीमित नहीं, बल्कि गीता, कुरान और अन्य धार्मिक ग्रंथ भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में 2026 के संशोधन के जरिए केवल एक धार्मिक ग्रंथ के लिए पृथक कठोर आपराधिक ढांचा तैयार करना राज्य की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। प्रावधानों पर विशेष आपत्ति याचिका में संशोधन कानून के उन प्रावधानों पर विशेष आपत्ति जताई गई है, जिनमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की प्रिंटिंग, प्रकाशन, भंडारण और वितरण पर कड़ा नियामक नियंत्रण, एसजीपीसी के माध्यम से केंद्रीय रजिस्टर, अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाना तथा गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा शामिल है। चर्च का कहना है कि इस प्रकार का विशेष दंड विधान अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों को तुलनात्मक रूप से कमतर कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। एसआर बोम्मई, केशवानंद भारती और शायरा बानो जैसे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि राज्य धार्मिक तटस्थता से विचलित नहीं हो सकता। एक धर्मग्रंथ को कानून संरक्षण साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 सहित मौजूदा केंद्रीय कानून धार्मिक भावनाओं से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं, इसलिए पृथक राज्य कानून विधायी संतुलन और संवैधानिक वैधता दोनों पर सवाल खड़े करता है। चर्च की जनरल काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि वह सभी धर्मग्रंथों के सम्मान और अंतर-धार्मिक सौहार्द के पक्ष में है, लेकिन किसी एक धर्मग्रंथ को विशिष्ट कानूनी संरक्षण देकर अन्य आस्थाओं को अपेक्षाकृत कमतर दर्जा देना संवैधानिक समानता के विरुद्ध है।

बॉर्डर पर सुरक्षा में सेंध! सोलर कैमरों के जरिए सेना की जासूसी, एक गिरफ्तारी के बाद कई लोग रडार पर

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस जालंधर यूनिट को एक बड़ी कामयाबी मिली है। एजेंसी ने आईएसआई समर्थित जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए फिरोजपुर निवासी सुखविंदर सिंह उर्फ सुखा को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में जो खुलासे सामने आए हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस के अनुसार आरोपित और उसके साथी राज्य के विभिन्न इलाकों में चीन निर्मित सोलर सीसीटीवी कैमरे लगा रहे थे। ये कैमरे 4जी कनेक्टिविटी से लैस थे, जिनके जरिए संवेदनशील ठिकानों की लाइव फुटेज सीधे पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों तक भेजी जा रही थी। खास बात यह है कि जिन स्थानों को निगरानी के लिए चुना गया, उनमें सेना से जुड़े प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। कपूरथला से बरामद किए गए उपकरणों ने इस पूरे नेटवर्क की गंभीरता को उजागर किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक सुनियोजित साजिश के तहत किया जा रहा था, जिसमें तकनीक का इस्तेमाल कर संवेदनशील जानकारियां जुटाई जा रही थीं। कैमरों की सच्चाई जानने में जुटी पुलिस पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन कैमरों को किन-किन स्थानों पर लगाया गया और कितनी अवधि से यह गतिविधि चल रही थी। इस मामले में अमृतसर स्थित स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस आरोपित के नेटवर्क के ‘फॉरवर्ड’ और ‘बैकवर्ड’ लिंक खंगाल रही है, ताकि इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि कुछ और गिरफ्तारियां भी संभव हैं। सूत्रों के मुताबिक, आरोपित मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए लाइव फीड साझा करता था, जिससे हैंडलर रियल टाइम में गतिविधियों पर नजर रख सकें। विदेशी एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी जांच इस पूरे मामले में विदेशी एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं इस नेटवर्क का संबंध सीमा पार से होने वाली अन्य गतिविधियों से तो नहीं है। पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में सक्रिय किसी भी तरह के जासूसी नेटवर्क को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस तरह के मॉड्यूल को जड़ से खत्म किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के जरिए जासूसी के तरीकों में बदलाव आया है, जिससे सतर्कता और बढ़ाने की जरूरत है। फिलहाल, इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है।