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झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में AI की एंट्री, शिक्षक दिवस पर हेमंत सोरेन ने बताया भविष्य का रोडमैप

रांची शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षा के तरीके में भी बदलाव जरूरी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समेत नई तकनीक विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के मुताबिक बेहतर शिक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। डॉ. राधाकृष्णन को किया नमन मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार दिया। शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर सरकार का फोकस हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर स्तर पर मौजूद कमियों को दूर करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी सुधार लाकर विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। AI से बदलेगा पढ़ाने का तरीका मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में AI और आधुनिक तकनीक शिक्षण प्रक्रिया को ज्यादा सहज और प्रभावी बना सकती है। तकनीक के इस्तेमाल से विद्यार्थियों की जरूरत और क्षमता के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक शिक्षा के साथ मूल्यों से जुड़ाव जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है। नई पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उसे अपने मूल्यों, संस्कृति और जड़ों से जोड़े रखना भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि समाज और नई पीढ़ी के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

झारखंड के 4 बड़े NH होंगे NHAI के हवाले, केंद्र ने ट्रैफिक के आधार पर लिया फैसला

 रांची  झारखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों को लेकर अब व्यवस्था बदलने वाली है। राज्य के जिन हाईवे पर ज्यादा ट्रैफिक रहता है, उनके रखरखाव और निर्माण कार्य राज्य सरकार से हटाकर केंद्र की एजेंसी एनएचएआई को दी जाएगी। इन सड़कों का निर्माण, रखरखाव और विस्तार एनएचएआई की निगरानी में होगा। केंद्र के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों की ट्रैफिक के आधार पर समीक्षा की। 10 हजार से ज्यादा वाहन गुजरने वाले एनएच को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया। इसी समीक्षा के बाद मंत्रालय ने 21 अगस्त को राज्य के मुख्य सचिव और एनएचएआई चेयरमैन को पत्र भेजकर नई व्यवस्था की जानकारी दी। पहले चरण में चार एनएच को एनएचएआई के को देने का फैसला हुआ है। इनमें एनएच-139, एनएच-522 और एनएच-114A को तुरंत एनएचएआइ को सौंपा जाएगा, क्योंकि इन मार्गों पर फिलहाल कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा है। एनएच-20 का एक हिस्सा राज्य के पास रहेगा। इसके 116 से 176 किलोमीटर के बीच चल रहे काम को पूरा कराया जाएगा और उसके बाद इस हिस्से की जिम्मेदारी भी एनएचएआई को दे दी जाएगी। हालांकि, सभी सड़कों की जिम्मेदारी अभी नहीं बदली है। एनएच-220 को फिलहाल झारखंड के पथ निर्माण विभाग के पास ही रखा गया है। वहीं, एनएच-419 के 49 से 65 किलोमीटर और एनएच-133 के 93 से 131 किलोमीटर वाले हिस्सों पर काम धनबाद स्थित सड़क परिवहन मंत्रालय के परियोजना कार्यान्वयन इकाई के जरिए जारी रहेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि केंद्र की नजर अब पूरे झारखंड के एनएच नेटवर्क पर है। मंत्रालय इस विकल्प पर भी विचार कर रहा है कि राज्य के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को राज्य सरकार की व्यवस्था से हटाकर सड़क परिवहन मंत्रालय के परियोजना कार्यान्वयन इकाई के जरिए संचालित किया जाए।

शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: इंजीनियरिंग-पॉलीटेक्निक का रिजल्ट 24 घंटे में, मैट्रिक परिणाम 7 दिन में

पटना बिहार में मैट्रिक की परीक्षा का परिणाम एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर जारी करने का लक्ष्य तय किया गया है। राज्य के करीब सात लाख से अधिक शिक्षकों के प्रशिक्षण और गुणवत्ता में सुधार के लिए एक अलग से विशेष विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी ये घोषणा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में की। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, मंत्री शीला कुमारी मौजूद रहीं। 24 घंटे में इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक का रिजल्ट मुख्यमंत्री ने परीक्षा प्रणाली में लेटलतीफी पर चिंता जताते हुए कहा कि इंजीनियरिंग व पाॅलिटेक्निक का परिणाम 24 घंटे में जारी करने की व्यवस्था खड़ी की जाएगी। यदि किसी छात्र के अंक कम आते हैं, तो उसके लिए 15 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा देकर तुरंत परिणाम पाने का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। परीक्षा सुधार को लेकर पटना उच्च न्यायालय के एक 'सिटिंग जज' की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से आग्रह किया कि कॉपियों के मूल्यांकन को पूरी तरह से विकेंद्रीकृत कर सेंटर वाइज रिजल्ट जारी करने की दिशा में काम किया जाए नए विश्वविद्यालय में शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षा तक राज्य में लगभग सात लाख से अधिक शिक्षक हैं। इनकी गुणवत्ता और सहूलियत के लिए सरकार एक नया विश्वविद्यालय बनाएगी, जो विशेष रूप से शिक्षकों के प्रशिक्षण का काम करेगा। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए स्थानांतरण नीति को भी बेहद आसान बनाया गया है। अब महिला शिक्षक यदि अपनी वर्तमान पोस्टिंग से हटना चाहती हैं, तो उन्हें बगल की पंचायत में पोस्टिंग दी जाएगी। वहीं, पुरुष शिक्षक भी अपने पंचायत या प्रखंड के बगल में तबादला ले सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बिहार के लाखों बच्चे कोटा जाकर तैयारी कर रहे हैं या एमिटी और लवली जैसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बाहर जाकर पढ़ रहे हैं। इस पलायन को रोकने के लिए सरकार ने बिहार में ही प्राइवेट विश्वविद्यालयों को खोलने का रास्ता साफ कर दिया है। अभी चार प्राइवेट यूनिवर्सिटी को खोलने की अनुमति दी गई है। मदरसा और वित्त रहित शिक्षकों को मिला आश्वासन मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों का लंबित वेतन इसी सितंबर में भुगतान कर दिया जाएगा। वित्त रहित शिक्षकों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि संस्था के आंतरिक स्रोत और सरकारी अनुदान को मिलाकर उनके लिए एक नया वेतनमान तय करने की व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि उन्हें न्याय मिल सके। उन्होंने बताया कि राज्य में बीपीएससी के माध्यम से 33 हजार से अधिक शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया जारी है। सरकार परीक्षा प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए गूगल, माइक्रोसाफ्ट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों का सहयोग लेने से भी पीछे नहीं हटेगी।

सरकारी स्कूल को बनाया मॉडल, नवाचारों से बदली बच्चों की पढ़ाई; मुनमुन भट्टाचार्य को मिला राष्ट्रपति सम्मान

धनबाद शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने धनबाद के राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। देश के 48 चयनित शिक्षकों में शामिल मुनमुन को प्रशस्ति पत्र, शाल एवं 50 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई। सीमित संसाधनों और सरकारी व्यवस्था की पुरानी छवि में सुधार लाते हुए मुनमुन भट्टाचार्य ने शिक्षा के क्षेत्र में इतिहास रचा है। उनके नवाचारों और अथक प्रयासों ने इस साधारण से सरकारी स्कूल को राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ट शिक्षण संस्था के रूप में स्थापित कर दिया है। धनबाद से विज्ञान भवन तक का सफर धनबाद से विज्ञान भवन तक का सफर तय करने के लिए मुनमुन के नवाचारों ने मुख्य भूमिका निभाई। अंग्रेजी की शिक्षिका के रूप में कक्षा से निरंतर जुड़ाव रखते हुए बच्चों के मन से अंग्रेजी भाषा का भय समाप्त किया। बच्चों की भाषा दक्षता और अभिव्यक्ति क्षमता बढ़ाने के लिए इंग्लिश अराउंड मी जैसी अनूठी गतिविधि शुरू की गई है। बच्चे अपने दैनिक जीवन और आसपास के माहौल की कहानियों के माध्यम से अंग्रेजी बोलने, पढ़ने और अपनी बात बेझिझक रखने का अभ्यास करते हैं। रीडिंग बडी सिस्टम से वरिष्ठ बच्चे छोटे सहपाठियों के पठन-पाठन में मदद करते हैं। आधुनिक तकनीक और डिजिटल संसाधनों का समावेश किया। स्मार्टफोन, शैक्षणिक वीडियो, दीक्षा पोर्टल और ई-कंटेंट का उपयोग कर बच्चों को सीखने के अतिरिक्त अवसर दिए गए। साउंड वाल, शब्द भंडार, बिग बुक, फ्लैश कार्ड, स्थानीय व अनुपयोगी सामग्रियों से तैयार खिलौनों के माध्यम से पढ़ाई को बोझिल होने से बचाया गया गणित विषय को सरल और रुचिकर बनाने के लिए विद्यालय में सभी बच्चों के लिए वैदिक गणित और अबेकस की शिक्षा अनिवार्य की गई। बालिका सशक्तिकरण के लिए स्थानीय मार्शल आर्ट प्रशिक्षकों के सहयोग से बालिकाओं के लिए नियमित आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं। विद्यालय के शिक्षक नियमित गृह भ्रमण करते हैं, ताकि ड्रापआउट बच्चों की पहचान कर दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। मध्य विद्यालय बरमसिया पूरे जिले के स्कूलों के लिए उत्कृष्ट माडल है। नवाचार से बच्चों की संख्या बढ़ी है। बहुत कुछ सीखने को भी मिल रहा है। राष्ट्रपति पुरस्कार मिलना धनबाद के लिए गर्व की बात है। अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। अभिषेक झा, जिला शिक्षा पदाधिकारी धनबाद

पटना पर मंडराया बाढ़ का संकट, गंगा का जलस्तर HFL पार; रविवार सुबह तक और बढ़ने का अलर्ट

पटना बिहार में बाढ़ हाहाकारी रूप अख्तियार करता जा रहा है। राजधानी पटना के शहरी इलाके पर बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। जल संसाधन विभाग से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि गांधीघाट पर गंगा नदी के जलस्तर में मात्र चार घंटे में 10 सेंटीमीटर की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। रविवार सुबह 8 बजे तक संकट और गहराने की आशंका है। जल संसाधन विभाग ने राज्य के सभी डीएम और एसपी को बाढ़ के खतरे से निपटने की तैयारी करने के लिए चौबीसों घंटे अलर्ट पर रहने को कहा है। जल संसाधन विभाग की ओर से बताया गया है कि पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी के जलस्तर में पिछले 4 घंटे में 10 सेंटीमीटर की अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। सुबह 10 बजे जलस्तर 50.53 सेंटीमीटर पाया गया है। यह उच्चतम जल स्तर (HFL) 50.52 मीटर से 1 सेंटीमीटर अधिक है। नए पूर्वानुमान के मुताबिक कल रविवार को सुबह 8 बजे तक यह 50.62 सेमी तक जा सकता है। विभाग की ओर से आवश्यक सतर्कता बरतने का परामर्श दिया जाता है। राजधानी थोड़ा दबाव बढ़ेगा। गंगा के दियारा क्षेत्र में इस बढ़ोतरी का विशेष प्रभाव रहेगा। पटना में गंगा नदी पर अन्य घाटों पर भी जलस्तर में बढ़ोतरी का ट्रेंड देखा जा रहा है। शनिवार के दीघा इलाके में गंगा नदी का जलस्तर 51.77 मीटर दर्ज किया गया। हथीदह में यह 43.37 मीटर पाया गया तो मुंगेर में नदी का जलस्तर 39.58 मीटर, भागलपुर में 34.16 मीटर और कहलगांव में 32.31 मीटर रिकॉर्ड किया गया। इन स्थितियों को देखते हुए जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख की ओर से सभी जिलों के डीएम और पुलिस अधीक्षक को चेतावनी संवाद भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि नदी के प्रवाह क्षेत्र विशेषकर दियारा क्षेत्रों में दबाव बढ़ सकता है, जिस हेतु आवश्यक सतर्कता बरतें और संकट की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएं। आसन्न खतरे के मद्देनजर बाढ़ आपदा के दृष्टिकोण से सभी आवश्यक ऐहतियाती कदम उठायी जाय, तथा तटबंध के नदी भाग में रहने वाले परिवारों को इसकी सूचना देते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाय। साथ ही बाढ़ आपदा के लिए जिलास्तर पर गठित दल की लगातार गश्ती सुनिश्चित कराई जाय।  

CBI लोक अभियोजक शिवकांत श्रीवास्तव को झटका, हाई कोर्ट ने सेवा समाप्ति के आदेश में दखल से किया इनकार

 रांची  हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सीबीआई के लोक अभियोजक शिवकांत श्रीवास्तव की सेवा समाप्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि सीबीआइ ने तय नियमों के तहत एक महीने का नोटिस देकर उनकी सेवा समाप्त की है। इसलिए इस आदेश में न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। शिवकांत श्रीवास्तव ने आठ जुलाई को जारी उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी लोक अभियोजक के रूप में सेवा समाप्त कर दी गई थी। उन्होंने कहा था कि सेवा समाप्त करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कार्रवाई को भेदभावपूर्ण और दुर्भावना से प्रेरित बताया था।सीबीआइ की ओर से अदालत को बताया गया कि 30 जनवरी 1997 की केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत अधिवक्ता की नियुक्ति एक महीने के लिखित नोटिस पर समाप्त की जा सकती है। किसी एक अधिवक्ता की सेवाएं जारी रखने के लिए सरकार को बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने पाया कि आठ जुलाई के आदेश में श्रीवास्तव को स्पष्ट रूप से एक महीने का नोटिस दिया गया था और उनकी सेवा नौ अगस्त से समाप्त हुई। अदालत ने कहा कि जब सेवा समाप्ति निर्धारित नियम के मुताबिक की गई है तो इसे मनमाना नहीं माना जा सकता। अदालत ने पशुपालन घोटाले से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। शिवकांत श्रीवास्तव की ओर से कहा गया था कि वे इन मामलों को देख रहे थे और वर्ष 2013 के एक पत्र के कारण अधिवक्ता बदलने के लिए हाई कोर्ट की अनुमति जरूरी थी। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि पशुपालन घोटाले से जुड़े मुकदमों की सुनवाई पहले ही पूरी हो चुकी है। दुर्भावना के आरोप पर भी अदालत ने कहा कि केवल आरोप लगाने से बात साबित नहीं होती। इसके लिए ठोस सामग्री या प्रमाण जरूरी है। अदालत ने कहा कि इस मामले में दुर्भावना के आरोप के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण रिकार्ड पर नहीं है।

मतदाता सूची से नाम हटने पर ऐसे साबित करें नागरिकता, 200 मतदाताओं को सुनवाई का मौका

रांची मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान प्रारंभिक सूची से नाम हटाए गए मतदाताओं को संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) की ओर से नोटिस जारी किया गया है।नोटिस में नाम हटाए जाने की तिथि और स्थान का उल्लेख किया गया है। जिसके बाद लोग अंचल कार्यालय में उपस्थित हो रहे है। मतदाताओं को निर्धारित तिथि पर अंचल कार्यालय पहुंचकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखना है। जिला उपनिर्वाचन पदाधिकारी विवेक कुमार सुमन ने बताया कि जिन मतदाताओं के माता-पिता उपलब्ध नहीं हैं और जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में भी नहीं है, वे वंशावली के माध्यम से अपने माता पिता, के व रिश्तेदार की ट्रैकिंग, कर अपनी नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत कर सकते हैं। सुनवाई के लिए 200 मतदाताओं को समय दिया गया दूसरे राज्य से झारखंड में बसने वाले लोग पूर्व राज्य का स्थायी प्रमाण पत्र, राशन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं। वर्तमान स्थायी निवासी प्रमाण पत्र सीओ के माध्यम से बनवाकर वंशावली के साथ जमा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं की संख्या पिछले दिनों की तुलना में कम हुई है। गुरुवार को सुनवाई के लिए 200 मतदाताओं को समय दिया गया था, जिनमें 140 उपस्थित हुए। तीन माह तक ऑनलाइन व्यवस्था की गई इसके लिए जाति, आय, स्थानीय निवासी और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तीन माह तक ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। जिससे ग्रामीण इलाकों के मतदाता अपना आय प्रमाण पत्र बना सकते हैं। कार्मिक, प्रशासनिक विभाग की ओर से जिलों में इन प्रमाण पत्रों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आने के कारण लंबित आवेदनों का दबाव बढ़ रहा था। इसे देखते हुए आवेदकों की सुविधा और समय पर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए आफलाइन प्रक्रिया को भी मंजूरी दी गयी है।

सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा फैसला: बिहार के लोकसेवकों की CBI जांच अब सरकार की मंजूरी के बाद

पटना बिहार सरकार के लोकसेवकों या राज्य सरकार के स्वामित्व वाले किसी संस्थान की सीबीआई जांच को लेकर सम्राट चौधरी सरकार ने नया गाइडलाइन जारी किया है। इनमें आपराधिक जांच से पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बिहार सरकार से अनुमति लेनी होगी। सरकार के नये नियम के मुताबिक सीबीआई से मिले प्रस्ताव के आधार पर राज्य सरकार हर मामले पर अलग-अलग विचार कर जांच की शक्ति देने पर निर्णय लेगी। बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने प्रधान सचिव कुंदन कुमार के हस्ताक्षर से इससे संबंधित निर्णय की अधिसूचना जारी कर दी गई है। हालांकि, राज्य की सीमा में संचालित भारत सरकार या भारत सरकार के अधीनस्थ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मियों और निजी व्यक्तियों के संबंध में अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। नई अधिसूचना के मुताबिक, इस विषय पर पूर्व की सभी अधिसूचनाओं को हटा दिया गया है। केंद्र सरकार या उसके अधीनस्थ कर्मियों और निजी व्यक्तियों द्वारा किये जाने अपराध के मामले में जांच को लेकर सीबीआई को दी गयी शक्तियां व उनके अधिकार क्षेत्र में विस्तार पर सहमति दी गयी है। सीबीआई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), भारतीय साक्ष्य अधिनियम और आईटी एक्ट से जुड़े अपराध के साथ ही साइबर अपराध एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े कांडों में जांच कर सकेगी। लेकिन, जब यह अपराध बिहार सरकार के कार्य से संबंधित नियुक्त लोकसेवकों, बिहार सरकार द्वारा नियंत्रित कोई निगम, कंपनी या बैंक, बिहार सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर चुके संस्थान द्वारा किया जाता है तो ऐसे मामलों में सीबीआई को जांच से पहले बिहार सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए सीबीआई को प्रस्ताव भेजना होगा। समीक्षा के बाद सरकार से अनुमति मिलने पर ही सीबीआई कोई ऐक्शन ले पाएगी। सरकार ऐसे मामलों में केस टू केस अलग-अलग फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। सीबीआई भारत सरकार की सर्वोच्च और सर्वाधिक विश्वसनीय मानी जाने वाली जांच एजेंसी है। इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1963 में गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर की गयी थी। सीबीआई का संचालन गृह मंत्रालय द्वारा ही किया जाता है। सीबीआई का मुख्यालय दिल्ली में है। राज्यों के मुख्यालय में इसकी इकाई होती है। यह एजेंसी भ्रष्टाचार या अपराध के गंभीर व सनसनीखेज मामलों में कार्रवाई करती है। कई बार सुप्रीम कोर्ट या राज्यों के हाईकोर्ट के आदेश पर भी मामलों की सीबीआई जांच होती है।

बिहार में बाढ़ से हाहाकार: 200 से अधिक सड़कें डूबीं, 120 स्कूल बंद, हजारों एकड़ फसल बर्बाद

पटना   बिहार के 13 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार 52 प्रखंडों की 270 पंचायतों की करीब 28 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है। हालांकि, आपदा प्रबंधन विभाग ने लगभग 8 लाख आबादी को ही बाढ़ से प्रभावित माना है। गंगा, गंडक, सोन, कोसी समेत अन्य नदियां उफान पर हैं। पटना, भोजपुर, सारण, बेगूसराय और वैशाली जिले में कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। बक्सर, जहानाबाद, अरवल, रोहतास, नालंदा और कैमूर में भी गांवों और खेतों में पानी फैल गया है। उत्तर बिहार के दरभंगा, समस्तीपुर और पश्चिम चंपारण में बाढ़ का प्रकोप जारी है। 200 सड़कों पर आवागमन बाधित है। कई जगह नाव ही आवाजाही का सहारा बनी हुई है। हजारों एकड़ में धान समेत अन्य फसलें डूब गई हैं। भोजपुर और बेगूसराय में 120 स्कूलों को बंद कर दिया गया है। भागलपुर शहर में बाढ़ का पानी घुस गया है। सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ मंदिर में भी पानी फैल गया है। पटना सहित जिले के अन्य 14 स्थानों पर नदियों का पानी खतरे के निशान को पार कर गया है। इसमें केवल गंगा नदी ही 7 स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ की भयावहता को देखते हुए 693 नावें चलाई जा रही हैं। साथ ही सामुदायिक किचन को भी शुरू कर दिया गया है। 7107 पॉलीथीन शीट का वितरण किया गया है। पटना, पश्चिमी चम्पारण एवं वैशाली जिले में 1764 ड्राई राशन पैकेट का वितरण किया गया है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से पटना के 9 प्रखंडों में दो लाख 32 हजार से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। भोजपुर में 25 रोड और 60 स्कूल बंद भोजपुर जिले के 6 प्रखंडों की 45 पंचायतें बाढ़ से जलमग्न हैं। करीब दो लाख आबादी प्रभावित है। दो हजार एकड़ से अधिक में धान और करीब 500 एकड़ में भदई फसल एवं सब्जियां डूब गई हैं। 25 मुख्य एवं ग्रामीण सड़कों पर पानी के तेज बहाव के कारण आवागमन बंद है। 60 से अधिक स्कूल बंद किए गए हैं। 20 सामुदायिक रसोई में छह हजार से अधिक लोगों को भोजन दिया जा रहा है। छपरा में डेढ़ लाख आबादी प्रभावित सारण जिले के छपरा सदर, दिघवारा, रिविलगंज और सोनपुर की करीब 25 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। लगभग डेढ़ लाख आबादी पर बाढ़ का असर है। कई लोगों ने ऊंचे बांध और रिश्तेदारों के यहां शरण ली है। ग्रामीण सड़कों पर पानी आने से यातायात प्रभावित है। अकिलपुर-दिघवारा संपर्क भी बाधित है और कई जगह नाव से आवागमन हो रहा है। दो दर्जन से अधिक स्कूलों को दूसरे विद्यालयों से टैग किया गया है। बेगूसराय में भी 60 स्कूल बंद गंगा के बढ़ते जलस्तर से बेगूसराय के मटिहानी, साहेबपुर कमाल, बखरी और बलिया की 20 पंचायतों की करीब दो लाख आबादी प्रभावित है। प्रशासन 87 नावें चला रहा है। फिलहाल बड़े पैमाने पर विस्थापन नहीं हुआ है। जलभराव और आवागमन की परेशानी के कारण 60 से अधिक स्कूलों में पढ़ाई बंद है। वैशाली में हालात गंभीर वैशाली के छह प्रखंडों की 26 पंचायतें और हाजीपुर नगर परिषद के छह वार्ड प्रभावित हैं। राघोपुर की 12, सहदेई-देसरी की छह और बिदुपुर की चार सड़कों पर पानी चढ़ा है। यानी कम से कम 22 सड़कों पर आवागमन प्रभावित है। राघोपुर की कई सड़कों पर नाव चल रही है। गनियारी जाने वाली दो सड़कें डूब गई हैं। प्रभावित लोग गांधी सेतु के पुराने टोल प्लाजा सहित ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। बक्सर में फसलें बर्बाद इसी तरह बक्सर में गंगा खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। चार अंचलों के कई गांवों में करीब दस हजार आबादी प्रभावित है। 1761 हेक्टेयर फसल बाढ़ की चपेट में है। दो प्राथमिक स्कूलों में पानी घुस गया है। प्रशासन ने 33 नाव और राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। जहानाबाद शहर में आफत जहानाबाद में मोरहर, दरधा और बलदइया नदियों का पानी निचले इलाकों में फैल गया है। तीन प्रखंडों की 15 पंचायतें प्रभावित हैं। शहर की तीन सड़कों—हवाई अड्डा-एसएस कॉलेज रोड, सट्टी मोड़-जाफरगंज रोड और जहानाबाद-शकूराबाद मुख्य मार्ग पर पानी है। दो पुलों पर भी पानी चढ़ा है अरवल में पुनपुन की बाढ़ अरवल में पुनपुन नदी के उफान से तीन प्रखंडों की 12 पंचायतों के बधार प्रभावित हैं और करीब दो हजार एकड़ फसल को नुकसान की आशंका है। रोहतास में दो दर्जन घर टूटे रोहतास जिले में लगातार बारिश से संझौली, रोहतास, नौहट्टा और चेनारी प्रभावित हैं। कृषि विभाग ने करीब एक से डेढ़ हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित होने का अनुमान जताया है। नौहट्टा की 9 पंचायतों में करीब 10 हजार एकड़ धान डूबने की सूचना है। चेनारी में करीब 50 एकड़ फसल बर्बाद हुई है और दो दर्जन मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। नालंदा में कटाव से दहशत नालंदा जिले के अस्थावां में जिरायन नदी के तटबंध का 25 फीट कटाव बढ़कर करीब 70 फीट हो गया है। पांच गांवों में पानी फैलने से ढाई हजार बीघे में धान, मक्का और सब्जियों की फसल डूब गई है। बिहारशरीफ के सोहसराय अड्डापर में छिलका के ऊपर से करीब डेढ़ फीट पानी बह रहा है। कैमूर में सड़कें और स्कूल डूबे कैमूर में दुर्गावती, कर्मनाशा और कुदरा नदियों के उफान से दुर्गावती, रामपुर, नुआंव और रामगढ़ प्रभावित हैं। 10 से 12 हजार आबादी परेशान है। कई सड़कें और स्कूल परिसर जलमग्न हैं। कुछ इलाकों में पानी कम होने से जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है। गंगा, कोसी, सोन उफान पर केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा नदी दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जबकि गंडक नदी डुमरियाघाट, हाजीपुर, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला, बूढ़ी गंडक खगड़िया, पुनपुन नदी श्रीपालपुर तो घाघरा नदी दरौली में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मुंगेर में बाढ़ में डूबा मंदिर सोन नदी का डिस्चार्ज पांच लाख 23 हजार क्यूसेक रहा। सोन के जलस्तर में आने वाले दिनों में कमी आने की संभावना है। गंगा नदी के जलस्तर में भी कमी का रुझान रहने का अनुमान है। प्रयागराज में गंगा के जलस्तर में कमी शुरू हो गई है, जिसका असर … 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कम विस्थापन, कम पर्यावरणीय नुकसान और हजारों रोजगार, झारखंड के लिए विंजिंहम पोर्ट से बड़ी सीख

रांची  झारखंड की ही तरह केरल भी हरे भरे जंगलों से भरा है। अरब सागर के किनारे केरलम के शहर त्रिवेंद्रम से 40 किलोमीटर की दूरी पर अडानी विंजिंहम समुद्र परिवहन परियोजना एक रोल मॉडल है। झारखंड में खनन और उद्योग दोनों में पर्यावरण और विस्थापन का सवाल उभर कर सामने आता है। लेकिन विंजिंहम सी पोर्ट यानि बंदरगाह के निर्माण में कम से कम विस्थापन हुआ और समुद्र के आसपास की पारिस्थितिकी को बग़ैर कोई नुकसान पहुंचाए तीन किलोमीटर लंबी दीवार खड़ी कर दी गई। इसका परिणाम यह है कि भारत आने वाले बड़े जहाजों को अब सामान उतारने के लिए दुबई, कोलंबो, सिंगापुर या एमस्टडर्म नहीं जाना पडता है। देश को हजारों करोड़ का राजस्व मिलता है और 20 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। झारखंड में नए लगने वाले उद्योगों को इस मॉडल के जरिए पर्यावरण ऑडिट के जरिए अर्थव्यवस्था में योगदान करने वाला बनाया जा सकता है। कोयला परिवहन में परिवहन का माडल है उपयोगी झारखंड में कोयला, लौह और बाक्साइट खनन के बाद उनका परिवहन वन क्षेत्र से ही होता है। विंजिंहम सी पोर्ट ऐसे तो समुद्र में संचालित होता है लेकिन 18 मीटर की गहराई होने की वजह से जल के अंदर एक पूरा वनस्पति और जीव तंत्र रहता है। इसकी डिजिटल मैपिंग कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी वनस्पति और जीव जंतु को नुकसान नहीं पहुंचे। इसी तरह खनिजों के परिवहन में भी डिजिटल सेंसिंग उपकरणों का प्रयोग हो सकता है। 2028 तक समुद्री व्यापार को तीन गुणा बढ़ाएगा विंजिंहम 1विंजिंहम सी पोर्ट अभी पहले ही चरण में है। तीन किलोमीटर के बैक वाटर में अभी 40 मीटर तक के जहाज पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा ये इस बंदरगाह की दूरी मात्र 10 नाटिकल मील है। लेकिन बंदरगाह बन जाने के बाद यहां अंतरराष्ट्रीय और भारतीय जहाज आधे घंटे में पहुंच सकते हैं। 2028 तक बैक वाटर की लंबाई चार किलोमीटर तक हो जाएगी। इससे यहां एक समय में एक लाख तक कंटेनर रखे जा सकेंगे। अभी यहां 35 हजार कंटेनर रखे जा रहे हैं। पूरी तरह ऑटोमैटिक है कंटेनर का उतार-चढ़ाव विंजिंहम सी पोर्ट पर तीस से अधिक उच्च क्षमता के क्रेन लगे हैं। इनका संचालन पूरी तरह से ऑटोमैटिक है जो कंट्रोल रूम में एक सॉफ्टवेयर सिस्टम के जरिए होता है। कोयला और लौह अयस्क परिवहन में कन्वेयर बेल्ट को इस तकनीक से संचालित करने पर प्रदूषण की संभावना कम होगी। पहले भारत का 75 प्रतिशत कंटेनर देश गये बाहर उतरता था विंजिंहम सी पोर्ट के संचालित होने से पहले भारत का 75 प्रतिशत समुद्री कंटेनर परिवहन दूसरे देशों से होता था। देश में 17 मीटर से अधिक गहराई को कोई बड़ा पोर्ट नहीं था। अब देश में भी इतनी गहराई की क्षमता का पोर्ट बन जाने से कंटेनर यहीं उतर रहे हैं।