samacharsecretary.com

पटना को मिलेगा ₹8,456 करोड़ का एलिवेटेड कॉरिडोर, नीचे 4 लेन-ऊपर 6 लेन का होगा निर्माण

पटना. राजधानी पटना के न्यू बाईपास पर जाम की समस्या से स्थायी निजात दिलाने की दिशा में बड़ी पहल होने जा रही है। अनीसाबाद से दीदारगंज तक करीब 13.14 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड एट-ग्रेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह बिहार का पहला ऐसा कॉरिडोर होगा, जिसमें मौजूदा सड़क के ऊपर छह लेन की एलिवेटेड सड़क होगी।रियोजना पर करीब 8,456 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस हिसाब से प्रति किलोमीटर निर्माण लागत करीब 643 करोड़ रुपये होगी। परियोजना पूरी होने के बाद दक्षिणी पटना के करीब 150 मोहल्लों की 10 लाख आबादी को न्यू बाईपास पर भारी वाहनों के कारण लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। नीचे चार लेन, ऊपर छह लेन की सड़क अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच वर्तमान चार लेन सड़क को यथावत रखते हुए उसके ऊपर छह लेन की एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारी वाहनों और स्थानीय यातायात को अलग-अलग कर दिया जाएगा। भारी वाहन एलिवेटेड सड़क से सीधे गुजरेंगे। स्थानीय वाहन नीचे की सड़क और सर्विस रोड का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे न्यू बाईपास पर बार-बार लगने वाले जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है। 22 किमी सर्विस रोड, 10 रैंप और चार अंडरपास परियोजना सिर्फ एलिवेटेड सड़क तक सीमित नहीं होगी। इसके तहत सड़क के दोनों ओर कुल 22 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा यातायात को सुगम बनाने के लिए 10 रैंप, दो फ्लाईओवर, तीन छोटे पुल और चार अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। पटना-गया रेललाइन पर आठ लेन का रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) भी बनाया जाएगा। न्यू बाईपास और आसपास के इलाकों में जलजमाव की समस्या दूर करने के लिए पांच किलोमीटर से अधिक लंबी आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली भी विकसित की जाएगी। इन प्रमुख जगहों पर खत्म होगा जाम कॉरिडोर बनने के बाद अनीसाबाद, सरिस्ताबाद, 90 फीट, पुराना बस अड्डा, अशोक नगर, कंकड़बाग-अशोक रोड, भूतनाथ, पहाड़ी, गुरु गोविंद सिंह लिंक पथ, कर्मलीचक और दीदारगंज जैसे प्रमुख इलाकों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। अभी इन क्षेत्रों में स्थानीय वाहनों के साथ बड़ी संख्या में ट्रक और दूसरे भारी वाहन भी गुजरते हैं। दोनों तरह के ट्रैफिक के एक ही मार्ग पर होने के कारण बाईपास पर अक्सर जाम की स्थिति बनती है। कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु से जुड़ेगा कॉरिडोर कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन महासेतु के चालू होने के बाद इस कॉरिडोर की उपयोगिता और बढ़ जाएगी। उत्तर बिहार से आने-जाने वाले भारी वाहनों को पटना शहर के भीतर प्रवेश किए बिना आगे बढ़ने का बेहतर मार्ग मिलेगा। कोइलवर-बिहटा क्षेत्र से आने वाले बालू और निर्माण सामग्री से लदे ट्रकों के लिए भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण होगा। इससे गांधी सेतु और आरा-छपरा सेतु पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। उत्तर बिहार तक माल ढुलाई होगी आसान कॉरिडोर के बनने से वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय और दरभंगा समेत उत्तर बिहार के कई जिलों तक माल ढुलाई आसान और तेज हो सकती है। इससे पटना के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को फायदा मिलने की उम्मीद है। परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) पर प्रस्तावित है। इसमें परियोजना की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 60 प्रतिशत राशि निर्माण एजेंसी की ओर से लगाए जाने का प्रावधान है। सरकार निर्धारित अवधि में एजेंसी को भुगतान करेगी। अब तैयार होगी डीपीआर परियोजना के लिए अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसके बाद निर्माण से जुड़े अगले चरणों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेन्द्र के अनुसार, यह परियोजना केवल एक एलिवेटेड सड़क का निर्माण नहीं है, बल्कि भविष्य के ग्रेटर पटना की बढ़ती यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही बड़ी योजना है। इसका उद्देश्य भारी और स्थानीय यातायात को अलग कर पटना के न्यू बाईपास पर जाम, दुर्घटना और जलजमाव जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान करना है। परियोजना से क्या बदलेगा? भारी वाहनों का अलग कॉरिडोर: ट्रक और दूसरे भारी वाहन छह लेन की एलिवेटेड सड़क से गुजर सकेंगे। स्थानीय यातायात को राहत: नीचे की सड़क और सर्विस रोड का इस्तेमाल स्थानीय वाहन कर सकेंगे। जाम में कमी: अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच प्रमुख जाम प्वाइंट पर यातायात सुगम होगा। सुरक्षित आवागमन: मोहल्लों से मुख्य सड़क पर आने-जाने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था सुरक्षित होगी। जलजमाव से राहत: पांच किलोमीटर से अधिक लंबी आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली विकसित होगी। पुलों पर दबाव कम: कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु के चालू होने के बाद गांधी सेतु समेत अन्य प्रमुख पुलों पर वाहनों का दबाव घट सकता है। व्यापार को रफ्तार: उत्तर बिहार के प्रमुख शहरों तक माल की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।

सहायक आचार्य भर्ती में B.Ed धारकों को राहत, झारखंड HC ने नियुक्ति पर पुनर्विचार के दिए आदेश

रांची. हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सहायक आचार्य नियुक्ति बीएड की डिग्री को लेकर उम्मीदवारी खारिज किए गए अभ्यर्थियों को राहत मिली है। अदालत ने शिल्पा कुमारी एवं अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए जेएसएससी को उनकी उम्मीदवारी पर विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप दोबारा विचार करने और नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मामले में याचिकाकर्ताओं को जेएसएससी की ओर से नोटिस जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि उनके द्वारा प्राप्त बीएड की डिग्री विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता की शर्तों के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर उनकी उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा और अधिवक्ता ज्ञानदेव राज ने अदालत को बताया कि प्रार्थी ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के प्रविधानों के अनुरूप बीएड की डिग्री हासिल की है। उनके पास झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) का प्रमाणपत्र भी है। ऐसे में वे विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अन्य आवश्यक शर्तें पूरी करते हैं। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि केवल बीएड की अवधि या उसकी प्रकृति के आधार पर अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज नहीं की जा सकती। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने विप्लव दत्ता एवं अन्य के मामले में पारित आदेश के आलोक में याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने जेएसएससी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी पर विज्ञापन की शर्तों के अनुसार विचार करे और उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने के संबंध में उचित निर्णय ले। माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से संबंधित जनहित याचिका निष्पादित झारखंड हाई कोर्ट में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से संबंधित जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने जनहित याचिका निष्पादित कर दी। सुनवाई के दौरान जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार से अनुशंसा कर दी गई है। 204 पदों के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिल सके हैं। वहीं, 292 अभ्यर्थियों के दस्तावेज के सत्यापन के दौरान कुछ त्रुटियां पाई गई हैं। इन अभ्यर्थियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। आयोग की ओर से अदालत को नियुक्ति प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अदालत से माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करने का आग्रह किया गया। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर पुनर्परीक्षा कराए जाने को गलत माना है। एकल पीठ ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का भी आदेश दिया है। जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि खंडपीठ और एकल पीठ के आदेश के बाद मामले की परिस्थितियां अलग हो गई हैं। इस पर खंडपीठ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय-सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है। जेएसएससी का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने जनहित याचिका निष्पादित कर दी।

370 संवेदनशील प्रतिष्ठानों की ड्रोन निगरानी, CISF-DFI की साझेदारी; बहरोड़ में बनेगा ट्रेनिंग हब

रांची. देश के महत्वपूर्ण और अति-संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को ड्रोन खतरों से मजबूत करने की दिशा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने बड़ा कदम उठाया है। सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) के बीच सीआईएसएफ मुख्यालय में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और परिचालन क्षमता को बढ़ाया जाएगा। समझौते पर सीआईएसएफ की ओर से डीआइजी एवं एमपीआरटीसी बहरोड़ के प्रिंसिपल डाॅ. सीडी नायक और डीएफआई के अध्यक्ष स्मित शाह ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन समेत बल के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बहरोड़ में बनेगा उत्कृष्ट केंद्र समझौते के तहत सीआईएसएफ के रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर (आरटीसी), बहरोड़ को ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणाली के लिए उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह केंद्र गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत काम करेगा। यहां ड्रोन से उत्पन्न संभावित खतरों से निपटने के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर रहेगा। भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप के साथ होगा अनुसंधान डीएफआई भारतीय ड्रोन स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों के सहयोग से सीआईएसएफ की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। इसके तहत व्यावहारिक अनुसंधान, नई तकनीकों के परीक्षण और परिचालन तैयारियों को मजबूत किया जाएगा। सुरक्षा प्रतिष्ठानों की जरूरत के अनुसार मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और प्रायोगिक परियोजनाएं भी तैयार की जाएंगी। संदिग्ध ड्रोन की जांच के लिए स्वदेशी तकनीक समझौते के तहत संदिग्ध ड्रोन की पहचान और जांच के लिए स्वदेशी फोरेंसिक उपकरण विकसित करने पर भी काम होगा। इसके साथ ही रेड-टीमिंग अभ्यास और संयुक्त ड्रिल आयोजित की जाएंगी, ताकि वास्तविक परिस्थितियों में सुरक्षा बलों की तैयारियों को परखा जा सके। 370 से अधिक अति-संवेदनशील प्रतिष्ठान सीआईएसएफ देश के 370 से अधिक अति-संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कर रहा है। इनमें परमाणु संयंत्र, हवाई अड्डे, अंतरिक्ष केंद्र समेत अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे शामिल हैं। बल के 3,000 से अधिक जवानों को ड्रोन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 80 सीआईएसएफ इकाइयां निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं। बदलती हवाई चुनौतियों से निपटने में मिलेगी मदद सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि यह समझौता गृह मंत्रालय के लक्ष्यों को पूरा करने के साथ बदलती हवाई चुनौतियों के खिलाफ बल की तैयारियों को परखने और मजबूत करने में मदद करेगा। वहीं, डीएफआई के अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा कि भारतीय ड्रोन उद्योग देश की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। स्वदेशी नवाचार के माध्यम से आत्मनिर्भर सुरक्षा ढांचा तैयार करने में उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पटना में बारिश ने बढ़ाई मुसीबत, सड़क-गली से स्कूल-मंडी तक जलभराव

पटना. अनुमंडल क्षेत्र में मंगलवार की शाम से रात तक वर्षा हुई। उमस भरी असहनीय गर्मी झेल रहे लोगों को जहां राहत मिली वहीं जगह-जगह जल जमाव के कारण लोगों की परेशानियां बढ़ी रही। अशोक राजपथ, कई महत्वपूर्ण सड़कें, स्कूल परिसर, गलियों से लेकर मंडी तक जलमग्न हो गया। बरसात में जल जमाव की स्थिति उत्पन्न होने देने के लिए नगर निगम की तमाम प्रयासों पर पानी फिर गया। नाला उड़ाही और सफाई के नाम पर महीनों की मेहनत और करोड़ों रुपये बरसात की बारिश में बह गए। एक बार फिर जनता परेशानियों से घिर गई। श्री गुरु गोविंद सिंह पथ पर जल जमाव, गड्ढों में वाहन खा रहे हिचकोले श्री गुरु गोविंद सिंह पथ पर वर्षा के समय लगभग 6 इंच तक पानी जम गया। पथ के सटे दीरापर मोहल्ला का मार्ग जलमग्न हो गया । इसी पथ से पैदल व साइकिल से श्री गुरु गोविंद सिंह स्कूल जाने वाले बच्चों को परेशानी हुई। मोहल्ले के नागरिक घरों में कैद हो गए हैं । नगर निगम की गाड़ी मोहल्ले के नालों से पानी निकाल कर दूसरी जगह फेंक रहे हैं। छात्र-छात्राएं बुधवार की सुबह नाले के जमे पानी से होकर आते-जाते रहे। गायघाट से दीदारगंज जाने वाले मार्ग पर जमा हुआ दो फीट पानी गंगा किनारे निर्मित गायघाट से दीदारगंज सड़क पर कई स्थानों पर जल जमाव से वाहनों का परिचालन बाधित हो रहा है। भद्रघाट और महावीर घाट के पास घुटने भर से अधिक जल जमाव होने गुजरने वाले वाहन बंद हो जा रहे हैं। कंगन घाट की 30 सीढ़ियां डूब गई हैं और चबूतरा पर गंगा का पानी आने से सुबह में व्यायाम करने वाले लोगों को परेशानी हुई। इस मार्ग में सड़क पर पानी जम जाने के कारण रास्ता खतरनाक हो गया। रेलवे लाइन के दक्षिण के कई हिस्सों में भी रास्ते पर पानी भरा गया है। मंडियों पर भी वर्षा का असर पटना सिटी के मारूफगंज, मंसूरगंज, गुलजारबाग, मीनाबाजार, दलहट्टा, हाजीगंज, मुसल्लहपुर बाजार समिति क्षेत्र की मंडियों में भी जल जमाव से लोगों की परेशानी बढ़ी। चौकशिकारपुर स्थित पटना सिटी स्कूल के खेल मैदान में भी वर्षा का पानी जमा होने से मैदान में जलजमाव का स्तर बढ़ा है । नागरिकों ने बताया कि इस खेल मैदान में लगभग 100 दिनों से जल जमाव है। वहीं बेगमपुर स्थित रघुनाथ हिंदू विद्यालय परिसर में भी जलजमाव के कारण विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

वंदे भारत से भी तेज रफ्तार! दिल्ली-पटना बुलेट ट्रेन से बदलेगा बिहार-UP का सफर

पटना / नई दिल्ली देश के कई हिस्‍सों में हाई-स्‍पीड यानी बुलेट ट्रेन का जाल बिछाने का काम पूरे जोरशोर से चल रहा है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच देश में पहली बुलेट ट्रेन दौड़ाने की तैयारी अपने चरम पर है. साल 2027 में इस रूट के कुछ हिस्‍सों पर हाई-स्‍पीड ट्रेन ऑपरेट करने का प्रयास है. भारत सरकार ने बिहार और उत्‍तर प्रदेश में भी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई है. अब दिवाली-छठ से पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने इसपर बड़ा अपडेट दिया है. उन्‍होंने बताया कि दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. बता दें कि दिल्‍ली से पटना का रेल रूट सबसे व्‍यस्‍ततम रेल मार्गों में से एक है, ऐसे में इस सेक्‍शन में बुलेट ट्रेन चलने से हजारों-लाखों लोगों को काफी राहत मिलेगी. रेल मंत्री ने बताया कि हाई-स्‍पीड ट्रेन से दिल्‍ली से पटना महज 4.5 घंटे में पहुंचा जा सकेगा. फिलहाल यह सफर 12 घंटों का है. इस तरह जो काम राजधानी, वंदे भारत और दुरंतो जैसी प्रीमियम सुपरफास्‍ट ट्रेनें नहीं कर सकीं वो बुलेट ट्रेन से संभव हो सकेगा. साथ ही बिहार-यूपी वालों का सपना भी पूरा होगा।  बिहार-यूपी वालों का सपना साकार करने की दिशा में मोदी सरकार लगातार काम कर रही है. आने वाले कुछ सालों में दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन के दौड़ने का सपना साकार होने वाला है. देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना को उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने की योजना पर काम चल रहा है. इस हाई-स्‍पीड रेल कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली से लखनऊ का सफर करीब दो घंटे और राष्ट्रीय राजधानी से पटना की यात्रा महज साढ़े चार घंटे में पूरी की जा सकेगी. दिल्‍ली से पटना की दूरी 1000 किलोमीटर है. इस तरह बुलेट ट्रेन की संभावित रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहने की संभावना है. प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली को उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा।  बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कौन से बड़े शहर रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहर शामिल होंगे. इससे दिल्ली और इन शहरों के बीच मौजूदा रेल यात्रा समय में भारी कमी आने की उम्मीद है. वैष्णव के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना के तहत दिल्ली से आगरा की करीब 200 किलोमीटर दूरी केवल 58 मिनट में तय की जा सकेगी. वहीं 455 किलोमीटर दूर कानपुर पहुंचने में करीब 1 घंटे 50 मिनट लगेंगे. दिल्ली से लखनऊ की करीब 495 किलोमीटर दूरी 2 घंटे 12 मिनट में पूरी होने का अनुमान है. इसी तरह 750 किलोमीटर दूर प्रयागराज तक पहुंचने में लगभग तीन घंटे और 945 किलोमीटर दूर वाराणसी तक करीब 3 घंटे 33 मिनट लग सकते हैं. दिल्ली से पटना की करीब 1,170 किलोमीटर की दूरी लगभग 4.5 घंटे में पूरी करने का लक्ष्य होगा।  हाई-स्‍पीड रेल नेटवर्क का बढ़ता दायरा बुलेट ट्रेन का दायरा लगातार बढ़ रहा है. रेल मंत्री ने कहा कि परियोजना के साकार होने पर यह मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के बाद देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क का अगला बड़ा चरण होगा. साथ ही यह राष्ट्रीय राजधानी को उत्तर प्रदेश और बिहार के कई प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला पहला व्यापक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बन सकता है. इससे दिल्ली-उत्तर प्रदेश-बिहार बेल्ट में रहने वाले लाखों यात्रियों को तेज और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है. आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और पटना जैसे धार्मिक और पर्यटन केंद्रों तक तेज कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है. इसके अलावा कारोबार, निवेश और रीजनल इकोनोमिक एक्टिविटीज में भी तेजी आने की उम्मीद है।  180 किलोमीटर वाली सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन फिलहाल भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन स्पीड वाली सेमी हाई स्पीड सर्विसेज ऑपरेट हो रही हैं. इसके मुकाबले मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे और परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित है. इस परियोजना के तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय घटकर करीब 1 घंटे 58 मिनट होने की उम्मीद है. देश की पहली हाई स्पीड रेल सेवा अगस्त 2027 में शुरू होने की संभावना है और शुरुआती चरण में सूरत-वापी सेक्शन खोले जाने की योजना है। 

बिहार-झारखंड में सोन नदी जल बंटवारे पर समझौता, इंद्रपुरी परियोजना का रास्ता साफ

पटना  आखिरकार बिहार और झारखंड के बीच 25 सालों से चला आ रहा सोन नदी जल बंटवारा विवाद (Sone River Dispute) समाप्त हो गया। दोनों ही राज्यों के बीच दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौता कराया। 31 अगस्त को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने सोन नदी बंटवारे को लेकर हुए करार पर हस्ताक्षर किए। इस विवाद के सुलझने से मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के 10 जिलों को लाभ मिलेगा। चलिए समझते हैं कि आखिरसोन नदी जल विवाद क्या है और इससे किन-किन जिलों को लाभ मिलेगा? क्या है सोन नदी जल बंटवारा विवाद? सोन नदी जल बंटवारा विवाद मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के अधिकार और उसके उपयोग को लेकर चला आ रहा अंतर-राज्यीय जल विवाद था। विवाद की मुख्य कड़ी: 1973 का बाणसागर समझौता दरअसल, सोन नदी के जल प्रबंधन के लिए 1973 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तत्कालीन अविभाजित बिहार के बीच 'बाणसागर समझौता' हुआ था। इस एग्रीमेंट के मुताबिक, बिहार को सोन नदी से 7.75 मिलियन एकड़-फीट (MAF) जल आवंटित किया गया था। यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन फिर जब साल 2000 में झारखंड बिहार से अलग होकर नया राज्य बना तो इस विवाद ने फिर तूल पकड़ लिया। झारखंड का पक्ष: 15 नवंबर, 2000 को बिहार से अलग होने वाले झारखंड का कहना था कि सोन नदी का उद्गम (जहां से नदी निकलती है), इसका जलग्रहण क्षेत्र (जिस इलाके का पानी नदी में आता है) और इसके बहाव का एक बड़ा हिस्सा गढ़वा और पलामू जैसे झारखंड के इलाकों में पड़ता है। इसी वजह से बिहार को मिले कुल 7.75 MAF पानी में से झारखंड को भी उसका जायज हिस्सा मिलना चाहिए। बिहार का पक्ष: दूसरी ओर, बिहार का कहना था कि 1973 का बाणसागर समझौता अंतिम है और दक्षिण बिहार के कृषि आधारित जिलों जैसे कि भोजपुर, बक्सर, रोहतास, औरंगाबाद और पटना की सिंचाई व्यवस्था सोन नदी पर पूरी तरह निर्भर है, इसलिए 7.75 MAF पानी पर बिहार का ही अधिकार है। इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट पर पड़ा असर, योजना अटकी अब बिहार और झारखंड के बीच सालों चले इस विवाद के कारण रोहतास जिले में प्रस्तावित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना पिछले कई दशकों से रुकी हुई थी। क्या है इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट? इंद्रपुरी जलाशय परियोजना सोन नदी पर प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण और जल संसाधन परियोजना है। यह परियोजना बिहार के रोहतास जिले और झारखंड के गढ़वा जिले की सीमा पर स्थित है। अब चूंकि बिहार और झारखंड के बीच विवाद खत्म हो गया है कि इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट को भी अंतिम मंजूरी मिल गई है। सोन नदी जल आवंटन राज्य     आवंटित सोन जल बिहार     5.75 MAF झारखंड     2.00 MAF कुल     7.75 MAF किन-किन जिलों को मिलेगा लाभ? बिहार के 8 जिले: इस जलाशय से सोन नहर प्रणाली को निर्बाध पानी मिलेगा, जिससे दक्षिण बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जिलों की लगभग 10 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की गारंटी मिलेगी। झारखंड के 2 जिले: पलामू और गढ़वा जैसे गंभीर जल-संकट वाले जिलों को सिंचाई और पीने के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। बिहार और झारखंड में कहां-कहां से गुजरती है सोन नदी? झारखंड की सीमा पार कर सोन नदी बिहार के मैदानों में प्रवेश करती है। यह बिहार के 6 मुख्य जिलों से होकर गुजरती है।     रोहतास (डेहरी ऑन सोन, इंद्रपुरी बराज)     औरंगाबाद (दाउदनगर)     अरवल     भोजपुर (आरा) (कोइलवर)     पटना (मनेर के पास गंगा नदी में विलय)     बक्सर (रोहतास व भोजपुर के पास का सीमावर्ती क्षेत्र) अंत में सोन नदी पटना जिले के मनेर (दानापुर के पास) में जाकर गंगा नदी में मिल जाती है। झारखंड में कहां-कहां से गुजरती है सोन नदी? झारखंड के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सोन नदी राज्य में प्रवेश करती है और मुख्य रूप से गढ़वा तथा पलामू जिलों की सीमा बनाते हुए गुजरती है।

39 हजार लोगों ने नहीं कराया जीवन प्रमाणित, सिवान में सामने आया बड़ा मामला

सिवान. जिले के 39 हजार हजार पेंशनधारकों का जीवन प्रमाणीकरण अभी भी लंबित (पेंडिंग) है। इस कारण इन लाभुकों की पेंशन की राशि का भुगतान अटक गया है। सामाजिक सुरक्षा विभाग ने सभी लंबित पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण कराने को निर्देशित किया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल तीन लाख 57 हजार 147 लाभार्थियों में से तीन लाख आठ हजार 987 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा हो चुका है। वहीं, अभी भी 39012 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन लंबित है। इसके अलावा इसमें 3015 लाभार्थी ऐसे हैं, जिनका आधार अब तक मैप नहीं हुआ है। प्रखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बरहरिया में सबसे अधिक 32 हजार 838 लाभार्थी दर्ज हैं। इनमें 28 हजार 108 का बायोमेट्रिक सत्यापन हो चुका है, जबकि 4085 लाभार्थियों का सत्यापन अभी बाकी है। वहीं, सिवान सदर प्रखंड में कुल 27 हजार 247 लाभार्थियों में से 22 हजार 540 का सत्यापन हुआ है। यहां 4323 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन लंबित है। इसी प्रकार भगवानपुर हाट में 26 हजार 717 में 23057 का सत्यापन पूर्ण व 2197 का सत्यापन नहीं हुआ है। गोरेयाकोठी में कुल 25 हजार 546 में से 22 हजार 367 का सत्यापन पूर्ण व 2432 का लंबित, दारौंदा में 23193 में से 19023 और महाराजगंज में 23075 में से 19362 लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, आंदर में 13481 में से 12259, बसंतपुर में 12509 में से 10829, दरौली में 17586 में से 15747, गुठनी में 13156 में 12032 और हसनपुरा में 16154 में से 14625 लाभार्थियों का सत्यापन पूर्ण किया है। सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक मो. मिनहाजुद्दीन ने कहा कि सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 400 रूपये से बढ़ाकर 1100 रूपये प्रतिमाह कर दिया है। यह राशि सीधे लाभुकों के बैंक खाते में ऑनलाइन भेजी जा रही है, लेकिन जीवन प्रमाणीकरण नहीं कराने वाले लाभुकों को पेंशन की राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने सभी पेंशनधारकों से यह अपील की है कि वे जल्द से जल्द जीवन प्रमाणीकरण सत्यापन कार्य पूर्ण करा लें।

पटना में डेंगू की रफ्तार तेज, 31 अगस्त तक 167 मरीजों की पुष्टि

पटना  पटना में डेंगू के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। दस दिनों में 40 तो पांच दिनों में 18 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। 31 अगस्त तक पटना में इस साल डेंगू के कुल 167 मरीज मिल चुके हैं। अगस्त में 97 मरीज मिले हैं। जनवरी से जून तक डेंगू के 44 मरीज मिले थे। जुलाई में 26 नए मामले सामने आए थे। अगस्त में संक्रमण की रफ्तार तेज हो गई है। अगस्त में मिले मरीजों की संख्या जुलाई के मुकाबले कई गुना है। सात अगस्त तक जिले में कुल मामलों की संख्या 89 पहुंच चुकी थी। पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने बताया कि इस वर्ष अबतक 167 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सरकारी अस्पतालों और लैब के साथ-साथ निजी अस्पतालों एवं पैथोलॉजी लैब में जांच के दौरान भी मरीजों की पहचान हुई है। उन्होंने बताया कि नगर निगम के सहयोग से प्रभावित इलाकों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा अभियान चलाया जा रहा है। डेंगू मरीज मिलने पर उसके आसपास के क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्रोतों की जांच और लार्वीसाइडल छिड़काव की कार्रवाई भी की जानी है। ये अंचल और मोहल्ले हॉटस्पॉट बांकीपुर और पाटलिपुत्र अंचल में डेंगू के मरीज अधिक पाए गये हैं। इसमें कंकड़बाग, हनुमान नगर, पत्रकार नगर, अशोक नगर, पाटलिपुत्र, पोस्टल पार्क, अजीमाबाद, योगीपुर, जक्कनपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाके शामिल है। इन इलाकों में संक्रमण बढ़ने के प्रमुख कारण बारिश के बाद जलजमाव, खाली प्लॉटों और निर्माण स्थलों पर जमा पानी, नालियों की समस्या तथा घरों के आसपास छोटे-छोटे जलस्रोत माने जा रहे हैं। रुकनपुरा में आज कटी रहेगी बिजली रुकनपुरा में सड़क किनारे दो विशाल पेड़ काटे जाएंगे। इसे देखते हुए काटेगा। इसे देखते हुए मंगलवार की रात 11 बजे से 1 बजे तक रुकनपुरा क्षेत्र, बीकानेर स्वीट्स और मुशहरी के आसपास बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक लोटस अपार्टमेंट, पाटलिपुत्र, इमारत अपार्टमेंट, विकास विहार की बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। सुबह 7 बजे से 9 बजे तक ईस्ट बोरिंग कैनाल रोड, सुर सुधा लेन और रामसूचित मिश्रा पथ की आपूर्ति प्रभावित रहेगी। सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक आईओबी नगर, सर्वोयोनि सिटी, सरारी, शिवाला, भगवतीपुर में बिजली बाधित रहेगी।

झारखंड में बारिश का कहर, सोन और कोयल नदी उफान पर, गांवों में बढ़ा खतरा

रांची  झारखंड में मानसून की सक्रियता के बीच सोमवार सुबह से राजधानी रांची में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कहीं घरों में पानी घुस गया है तो कहीं पुल-पुलियों के ऊपर से पानी का तेज बहाव देखने को मिल रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश से जलजमाव मेदिनीनगर समेत पूरे पलामू में सोमवार से रिमझिम बारिश जारी है। कई सड़कों पर जलजमाव से आम लोगों की परेशानी बढ़ी है। ग्रामीण सड़कों पर बढ़ा दबाव कई प्रखंडों में ग्रामीण सड़क और पुलिया पर पानी का दबाव बढ़ गया है। आवागमन प्रभावित होने की आशंका है। सोन नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा अपस्ट्रीम के बराज और जलाशयों से करीब 2 लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी सोन नदी में पहुंचने के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। हुसैनाबाद में प्रशासन का अलर्ट नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है। कई गांवों में कटाव जारी सोनपुरवा, देवरी खुर्द, देवरी कला, बुधुआ, बड़ेपुर और दंगवार समेत कई गांवों में सोन नदी के किनारे कटाव जारी है। तटबंध निर्माण की मांग कटाव से परेशान ग्रामीण लंबे समय से तटबंध निर्माण की मांग कर रहे हैं। ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। नदी के बीच खेती करने वालों को सलाह सोन नदी के बालू के टीलों पर किसान परवल, खीरा समेत मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं। कुछ लोग मवेशी भी रखते हैं। सुरक्षित स्थानों पर लौटने की अपील जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नदी के बीच और किनारे रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर लौटने की सलाह दी है। मलय डैम पर भी बढ़ा पानी सतबरवा में मलय डैम का स्पीलवे मंगलवार सुबह ओवरफ्लो के करीब पहुंच गया। कोयल नदी में बाढ़ की स्थिति लगातार बारिश के कारण कोयल नदी में भी बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

वन भूमि विवाद पर हाई कोर्ट सख्त, सबूतों के अभाव में CBI जांच की मांग खारिज

 रांची झारखंड हाई कोर्ट ने कथित 450 एकड़ वन भूमि की अवैध बिक्री और कब्जे के मामले में दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए सीबीआइ और ईडी से जांच कराने की मांग ठुकरा दी। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता शिव शंकर शर्मा के आरोप अधिकांशतः अतिरंजित और अपुष्ट है। साथ ही उनकी विश्वसनीयता पर भी पहले से सवाल उठ चुका है। इसलिए केवल आरोपों के आधार पर सीबीआई या ईडी जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि वन विभाग और अन्य सक्षम प्राधिकारियों ने याचिका दायर होने से पहले ही कथित अतिक्रमण और वन भूमि के हस्तांतरण की जांच शुरू कर दी थी तथा जहां अनियमितताएं मिली, वहां कार्रवाई भी की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता द्वारा 450 एकड़ वन भूमि के अवैध हस्तांतरण का दावा सही नहीं है। खंडपीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता वन अधिकारियों और अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोपों का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि कथित बिक्री विलेखों में वन विभाग द्वारा कोई एनओसी जारी नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि इस मामले में जांच एजेंसियों की निष्क्रियता या पक्षपात का कोई प्रमाण नहीं है, इसलिए सीबीआइ या ईडी जांच का कोई औचित्य नहीं बनता। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश किसी भी आरोपित को क्लीन चिट नहीं है और लंबित कानूनी कार्रवाई कानून के अनुसार जारी रहेगी। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की साख और मंशा पर गंभीर सवाल उठाया है। सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान नहीं होने पर मांडर कालेज के प्राचार्य तलब झारखंड हाई कोर्ट ने व्याख्याता की मृत्यु के पांच वर्ष बाद भी मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मांडर कालेज की ओर से लगातार दो सुनवाई में कोई पक्ष नहीं रखे जाने और भुगतान संबंधी जानकारी नहीं देने पर कॉलेज के प्राचार्य को सात अगस्त को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि उनके पति मांडर कालेज में व्याख्याता थे और वर्ष 2021 में उनका निधन हो गया था। हाई कोर्ट ने वर्ष 2024 में पंचम, छठे और सप्तम वेतनमान सहित सभी बकाया लाभ देने का आदेश दिया था। बाद में उच्च शिक्षा विभाग ने वेतनमान संबंधी बकाया राशि का भुगतान कर दिया, लेकिन मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ अब तक नहीं दिया गया। इस पर अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए प्राचार्य की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया।