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रांची समेत कई जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, 60 किमी रफ्तार से चलेंगी हवाएं

रांची झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है. प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने और झारखंड में मॉनसून की बेरुखी के बाद गुरुवार से एक बार फिर मॉनसून के सक्रिय होने की संभावना बढ़ गई है. मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार और शुक्रवार को राज्य के कई हिस्सों में मौसम बदलने की संभावना है.   18-19 जून का मौसम गुरुवार और शुक्रवार यानी 18 और 19 जून को रांची सहित 17 जिलों में दोपहर के बाद मौसम बदलने की संभावना है. इनमें खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ शामिल हैं. इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आंधी चलने तथा मेघ गर्जन के साथ वज्रपात होने की आशंका है. मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. बाकी सात जिलों में भी तेज हवा के साथ मेघ गर्जन, वज्रपात और कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक रांची में 18 जून और 19 जून को रांची का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. 20 जून का मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 20 जून को राज्य में आंशिक बादल छाए रहेंगे. कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है. राज्य के कुछ हिस्सों में वज्रपात होने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है. जून में हुई कम बारिश मौसम विभाग के अनुसार, इस साल एक जून से 17 जून के बीच झारखंड में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है. एक जून से 17 जून तक झारखंड में सामान्य से 56 प्रतिशत कम बारिश हुई है. इस अवधि में सामान्य बारिश 67 मिमी होनी चाहिए थी.

सहरसा, पूर्णिया, कैमूर में उद्योगों को बढ़ावा, खिलाड़ियों को मिलेगी बेहतर नौकरी

पटना सम्राट चौधरी कैबिनेट ने बिहार के विकास के लिए कई एजेंडों पर अपनी मुहर लगाई है। बिहार की तीन जिलों सहरसा, पूर्णिया और कैमूर में अब औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाएंगे। सहरसा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए वनगांव और देवनागोपाल मौजा में करीब 420.63 एकड़ भूमि अधिग्रहण के लिए 88.01 करोड़ रुपये खर्च की स्वीकृति दी है। इस भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा। इसी प्रकार पूर्णिया 1.25 अरब की लागत पर औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव स्वीकृत। राज्य कैबिनेट ने बुधवार को इसकी मंजूरी दी। केन्द्र सरकार की ओर से प्रस्तावित वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के समीप कैमूर जिला में अंचल चांद और चैनपुर में 781.18 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस पर दो अरब तीस करोड़ 64 लाख 95 हजार नौ रुपये खर्च होंगे। बैठक के बाद कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गई है। इसके तहत राज्य के सभी कार्य विभागों के लिपिकों का अब एक संवर्ग होगा। इसमें पथ निर्माण विभाग, पीएचईडी, भवन निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, योजना एवं विकास विभाग और नगर विकास एवं आवास विभाग शामिल हैं। पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत मूल कोटि के पद (शोध सहायक) पर चयन परीक्षा बीपीएससी के स्थान पर बिहार तकनीकी सेवा आयोग के स्तर से ली जाएगी। वहीं, जल संसाधन विभाग के 217 विभागीय निरीक्षण भवन आधुनिक गेस्ट हाउस और ईको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित होंगे। मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया है। इसके तहत बांधों, बराजों और जलाशयों के पास स्थित भवनों को पर्यटकों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा। विधानसभा निदेशक राजीव कुमार की संविदा अवधि बढ़ी विधानसभा के निदेशक राजीव कुमार की संविदा अवधि बढ़ा दी गयी है। उनकी संविदा अवधि 30 जून 2026 को समाप्त होने वाली थी। इसका विस्तार एक जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक किया गया है। वित्त विभाग में भविष्य निधि निदेशालय के सहायक आयुक्त राजीव कुमार के खिलाफ सेवाच्युति (जो सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता नहीं होगी) का दंड लगाया गया है। संविदा अभियंताओं को बोनस अंक का फायदा अब सिर्फ एक बार मिलेगा मंत्रिमंडल ने अभियंत्रण सेवा भर्ती नियमावली में संशोधन किया है। अभी संविदा पर कार्यरत सहायक अभियंताओं को नियमित भर्ती परीक्षा में बोनस अंक दिये जाते हैं। इसके कारण कई अभियंता एक से अधिक विभागों में चयनित हो जाते थे, जबकि वे अंततः केवल एक विभाग में ही नियुक्ति लेते थे। इससे अन्य विभागों की सीटें खाली रह जाती थीं और दूसरे अभ्यर्थियों के अवसर कम हो जाते थे। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई संविदा सहायक अभियंता अधिमानता अंक का लाभ लेकर किसी एक विभाग में चयनित हो जाता है, तो भविष्य में उसे दोबारा इस लाभ का अधिकार नहीं होगा। हालांकि वह सामान्य अभ्यर्थी के रूप में अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में भाग ले सकेगा। यह नियम उन भर्ती प्रक्रियाओं पर भी लागू होगा जो वर्तमान में चल रही हैं। आशुलिपिक की उम्रसीमा अब 18 वर्ष मंत्रिमंडल ने बिहार नागरिक सुरक्षा क्षेत्रीय आशुलिपिक संवर्ग नियमावली में संशोधन को मंजूरी दे दी। अब इंटरमीडिएट उत्तीर्ण 18 वर्ष के युवा भी आशुलिपिक पद पर सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। आपदा प्रबंधन विभाग के नागरिक सुरक्षा निदेशालय के प्रस्ताव को राज्यमंत्रिपरिषद ने सहमति दे दी। इसके तहत आशुलिपिक पद पर सीधी नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई है। शोध सहायक भर्ती में इंटरव्यू खत्म मंत्रिमंडल ने पथ निर्माण विभाग में शोध सहायक पद की भर्ती प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। अब इस पद पर चयन के लिए 100 अंकों का इंटरव्यू नहीं होगा। साथ ही न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और प्रतियोगिता परीक्षा के विषयों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा, ताकि जल संसाधन की नियमावली के अनुरूप एकरूपता स्थापित हो सके। खिलाड़ियों को उच्च वेतनमान की नौकरी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों में पदक जीतने और भाग लेने वाले राज्य के खिलाड़ियों को उच्च वेतनमान स्तर की नौकरी दी जाएगी। इसको लेकर बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति (संशोधन) नियमावली, 2026 की मंजूरी राज्य कैबिनेट ने दे दी है। नई नियमावली के तहत ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले, ओलंपिक में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले, क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले तथा एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को वेतन स्तर-09 (ग्रेड पे 5400 रुपये) में नियुक्ति की जाएगी। इसी प्रकार, एशियाई खेल एवं राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल खेल विधाओं के किसी भी प्रारूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों तथा रजत एवं कांस्य पदक विजेता खिलाड़ियों को वेतन स्तर-07 (ग्रेड पे 4600 रुपये) में नियुक्ति दी जाएगी। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य और उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। पत्थर भूखंडों की ई-नीलामी होगी राज्य में चिह्नत पत्थर भूखंडों की ई-नीलामी प्रक्रिया को तेज करने के लिए राज्य खनन निगम लिमिटेड को खनन योजना तैयार कराने और पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए नामित किया गया है। खनन निगम नीलामी से पहले आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करेगा। नीलामी के बाद खनन योजना और पर्यावरणीय स्वीकृति सफल बोलीदाता को हस्तांतरित की जाएगी। पांच प्रमुख नदियों के गाद का अध्ययन अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य की प्रमुख पांच नदियों सोन, किऊल, फल्गू, मोरहर और चानन का पुनर्भरण अध्ययन किया जाएगा। इन नदियों में बालू के जमा होने के स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। यह कार्य सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआई) से कराया जाएगा, जिस पर दो करोड़ 32 लाख रुपये खर्च होंगे।

झारखंड राज्यसभा चुनाव में नथवानी फैक्टर! जीत का रिकॉर्ड बरकरार रहेगा या हेमंत सोरेन की रणनीति पड़ेगी भारी?

 नई दिल्ली झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. इन राज्यसभा दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं, जिसके चलते गुरुवार को वोटिंग होगी. बीजेपी के समर्थित प्रत्याशी परिमल नाथवानी के उतरने से मुकाबला रोचक बन गया है. इसके साथ ही क्रॉस वोटिंग का खतरा भी बन गया है।  कारोबारी और सांसद के रूप में पहचान रखने वाले नथवानी की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनके चुनावी जीत का रिकॉर्ड है. नथवानी अब तक तीन चुनाव जीत चुके हैं और कोई चुनाव नहीं हारे हैं. चौथी बार राज्यसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरे हैं, लेकिन जीत के लिए बीजेपी का समर्थन ही काफी नहीं है।  झारखंड की सियासत में सीएम हेमंत सोरेन के अगुवाई में जेएमएम और कांग्रेस ने दोनों राज्यसभा सीटें जीतने की रणनीति बनाई है. जेएमएम-कांग्रेस के चक्रव्यूह को तोड़कर क्या परिमल नथवानी एक बार फिर इतिहास रच पाएंगे?  झारखंड की दो सीट पर 3 प्रत्याशी झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में है. जेएमएम से बैजनाथ राम और कांग्रेस से प्रणव झा चुनाव लड़ रहे हैं तो निर्दलीय तौर पर परिमल नथवानी किस्मत आजमा रहे हैं. नथवानी को बीजेपी का समर्थन है, जिसके चलते मुकाबला रोचक हो गया है. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 28 विधायकों का प्रथम वरीयता के आधार पर वोट चाहिए।  झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिनमें जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और लेफ्ट के दो विधायक हैं. वहीं, एनडीए के पास 24 विधायक है, जिसमें बीजेपी से 21, आजसू 1, जेडीयू 1, एलजेपी के 1 विधायक हैं. इस तरह से परिमल नथवानी को जीत दर्ज करने के लिए 4 अतरिक्त वोटों की जरूरत है।  क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा विधानसभा में नंबर गेम के लिहाज से जेएमएम की जीत तय है, लेकिन कांग्रेस के लिए महागठबंधन को एकजुट रखना होगा. विधानसभा में महागठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन है, जिसके लिहाज से दोनों ही सीटें जीत सकती है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवानी के उतरने व बीजेपी के समर्थन से मुकाबला रोचक हो गया है. इसके साथ ही क्रॉस वोटिंग का खतरा बनता दिख रहा है।  राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए महागठबंधन के पास नंबर पूरे हैं, लेकिन परिमल नथवानी को बीजेपी के समर्थन करने के बाद भी 4 अतरिक्त वोटों की जरूरत है. ऐसे में क्रॉस वोटिंग का खतरा साफ नजर आ रहा है. नथवानी अपनी जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी है तो कांग्रेस और जेएमएम अपने खेमे को बचाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है।  परिमल नथवानी कभी चुनाव नहीं हारे  परिमल नथवानी का झारखंड के साथ पुराना और गहरा नाता है और मंझे हुए सियासी खिलाड़ी हैं. नथवानी मुख्य तर पर कारोबारी हैं और रिलाइंस से जुड़े हुए हैं, लेकिन सियासी पिच पर उतरे तो अपना पहला राज्यसभा चुनाव 2008 में झारखंड से लड़ा. परिमल नथवानी ने निर्दलीय उम्मीदवार को रूप में किस्मत आजमाया था,  लेकिन उन्हें विभिन्न दलों के विधायकों का समर्थन मिला. उस समय क्रॉस वोटिंग ने उनकी राह आसान की और वे राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे. आरजेडी के विधायकों का समर्थन उन्हें मिला था, जिसके दम पर जीतने में सफल रहे।  जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती से जूझ रहा है. नथवानी की उम्मीदवारी को लेकर एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि वे झारखंड की राजनीति में दलगत सीमाओं से ऊपर स्वीकार्यता रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं. ऐसे में सवाल यही है कि क्या परिमल नथवानी अपने अजेय चुनावी रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए चौथी बार राज्यसभा पहुंचेंगे, या फिर झारखंड की बदलती राजनीतिक गणित उनके विजय अभियान पर विराम लगाएगी।  2014 में नथवानी ने दूसरी बार झारखंड से राज्यसभा का चुनाव लड़ा. भाजपा और आजसू के समर्थन से उन्होंने नामांकन दाखिल किया और निर्विरोध निर्वाचित हो गए. इस जीत ने उन्हें झारखंड से लगातार दूसरी बार राज्यसभा पहुंचाने का रिकॉर्ड दिया. वे झारखंड से दूसरी बार राज्यसभा पहुंचने वाले एकलौते निर्दलीय सांसद बने।  परमिल नथवानी का तीसरा बड़ा चुनाव 2020 में हुआ, लेकिन इस बार मैदान झारखंड नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश को चुनाव. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थन से वे राज्यसभा के लिए चुने गए और संसद के उच्च सदन में अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया. इस तरह लगातार तीसरी बार राज्यसभा सांसद बने।    नथवानी क्या चौथी बार जीत दर्ज करेंगे अब 2026 के राज्यसभा चुनाव में परिमल नथवानी ने झारखंड से लड़ने का फैसला किया. एक बार फिर निर्दलीय प्रत्याशी उतरे, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन हासिल है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा की रणनीति केवल सीट जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष में संभावित क्रॉस वोटिंग की संभावना को भी भुनाने की है। 

झारखंड राज्यसभा चुनाव: विधायकों की गतिविधियों पर स्पेशल ब्रांच की नजर

रांची झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार, 18 जून 2026 को मतदान होना है. चुनाव को लेकर राज्य की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं. इसी को देखते हुए पुलिस मुख्यालय की ओर से हाई अलर्ट जारी किया गया है. चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था की गई है. बताया जा रहा है कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए राजधानी रांची में चप्पे-चप्पे पर सादी वर्दी में स्पेशल ब्रांच के कर्मचारी और पदाधिकारी, सीआईडी के कर्मचारी और इनकम टैक्स के कर्मचारियों को तैनात किया गया है. स्पेशल ब्रांच के 20 अधिकारी और कर्मचारी रांची में तैनात सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्यसभा चुनाव से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखने के लिए स्पेशल ब्रांच के करीब 20 पदाधिकारियों और कर्मचारियों को रांची में तैनात किया गया है. इन अधिकारियों और कर्मचारियों को महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों पर जिम्मेदारी सौंपी गई है. बताया जा रहा है कि ये सभी कर्मी सादे लिबास में रहकर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं. उनकी ओर से समय-समय पर मुख्यालय को रिपोर्ट भी भेजी जा रही है. होटल रेडिशन से लेकर विधानसभा तक निगरानी सूत्रों के मुताबिक, स्पेशल ब्रांच के अधिकारियों और कर्मचारियों को होटल रेडिशन, झारखंड विधानसभा, मुख्यमंत्री आवास, प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यालयों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया गया है. इन स्थानों पर चुनाव से संबंधित गतिविधियों के अलावा सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष नजर रखी जा रही है. राजनीतिक दलों के नेताओं की आवाजाही और चुनावी गतिविधियों से जुड़े हर घटनाक्रम की जानकारी लगातार एकत्र की जा रही है. इसके साथ ही किसी भी असामान्य स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सूचनाएं तत्काल मुख्यालय तक पहुंचाई जा रही हैं. विधायकों की गतिविधियों और राजनीतिक हलचलों पर नजर सूत्र बताते हैं कि राज्यसभा चुनाव की निगरानी की पूरी जिम्मेदारी स्पेशल ब्रांच को सौंपी गई है. इसी कारण चुनाव से जुड़े सभी पहलुओं पर नजर रखी जा रही है. इसमें विधायकों की गतिविधियां, राजनीतिक दलों की रणनीति और चुनावी माहौल से जुड़े अन्य घटनाक्रम भी शामिल हैं. खुफिया इकाई के अधिकारी लगातार सूचनाएं जुटा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें. चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक जारी रहेगी निगरानी जानकारी के अनुसार, मतदान और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया संपन्न होने तक स्पेशल ब्रांच के अधिकारी और कर्मचारी सादे लिबास में अपनी ड्यूटी करते रहेंगे. उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या असामान्य घटनाक्रम की सूचना तुरंत मुख्यालय को दी जाए, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके. राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी यह चौकसी बताती है कि लोकतंत्र का यह पर्व अब सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं रह गया है. इसके साथ सुरक्षा और निगरानी का ऐसा तंत्र भी सक्रिय हो जाता है, जिसकी मौजूदगी आम लोगों को दिखाई कम देती है, लेकिन उसकी गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं.

रांची में चावल महंगा, थोक-खुदरा में 4–6 रुपये तक अंतर

रांची  झारखंड की राजधानी रांची के खुदरा और थोक बाजार में चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कृषि उत्पादन बाजार समिति (एपीएमसी) पंडरा की ओर से 17 जून 2026 को रिपोर्ट जारी की गई है. एपीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार, रोजमर्रा की अधिकांश वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुए हैं. हालांकि, खुदरा और थोक बाजार में कई उत्पादों की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला. खुदरा बाजार में लखीभोग चावल सबसे महंगा पीएमसी पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक खुदरा बाजार में लखीभोग चावल की कीमत 55 रुपये प्रति किलो रही. वहीं परिमल चावल 38 रुपये और मंसूरी चावल 35 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है. तीनों किस्मों का औसत खुदरा मूल्य 42.67 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. इसके मुकाबले थोक बाजार में लखीभोग चावल 49.50 रुपये प्रति किलो, परिमल 34 रुपये और मंसूरी 31 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. थोक बाजार में चावल का औसत मूल्य 38.17 रुपये प्रति किलो रहा. दालों के दाम में ज्यादा बदलाव नहीं दैनिक आवश्यक वस्तुओं की रिपोर्ट के अनुसार चना दाल, अरहर दाल, उड़द दाल, मूंग दाल और मसूर दाल के दाम सामान्य स्तर पर बने हुए हैं. बाजार में इन वस्तुओं की उपलब्धता पर्याप्त होने के कारण कीमतों में कोई उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल आपूर्ति की स्थिति बेहतर रहने से दालों के दाम नियंत्रित हैं. हालांकि मानसून की स्थिति और परिवहन लागत आने वाले दिनों में कीमतों को प्रभावित कर सकती है. खाद्य तेलों की कीमतें भी स्थिर रिपोर्ट में मूंगफली तेल, सरसों तेल, वनस्पति तेल, सोया तेल, सूरजमुखी तेल और पाम तेल के मूल्य भी शामिल किए गए हैं. इन उत्पादों के दाम में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया है. खुदरा और थोक बाजार में तेलों की कीमतों में कुछ अंतर जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में स्थिरता बनी हुई है. यह उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात मानी जा रही है. सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बरकरार एपीएमसी के आंकड़ों के अनुसार आलू, प्याज और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है. मंडी में सब्जियों की आवक नियमित रूप से हो रही है, जिससे कीमतों पर दबाव नहीं बढ़ा है. व्यापारियों के अनुसार, मौसम अनुकूल रहने और आपूर्ति श्रृंखला सुचारु होने के कारण बाजार में फिलहाल किसी तरह की कमी नहीं है. इसी वजह से उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुएं सामान्य कीमतों पर उपलब्ध हो रही हैं. खुदरा और थोक बाजार में कीमतों का अंतर स्वाभाविक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से देखा गया कि थोक बाजार की तुलना में खुदरा बाजार में कीमतें अधिक हैं. इसका कारण परिवहन खर्च, भंडारण, पैकेजिंग और खुदरा विक्रेताओं का मार्जिन माना जाता है. विशेष रूप से चावल की तीन प्रमुख किस्मों में खुदरा और थोक बाजार के बीच चार से छह रुपये प्रति किलो तक का अंतर दर्ज किया गया. इससे साफ है कि बड़ी मात्रा में खरीद करने वाले व्यापारियों को कम कीमत का लाभ मिलता है, जबकि अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते वही उत्पाद महंगा हो जाता है. नियंत्रण में हैं कीमतें रिपोर्ट के अनुसार, रांची और आसपास के इलाकों में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं. चावल, दाल, खाद्य तेल और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुए हैं. यदि आने वाले दिनों में मौसम और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रहती है, तो बाजार में कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम दिखाई देती है. फिलहाल रसोई का बजट किसी आपदा प्रबंधन योजना जैसा नहीं लग रहा, जो अपने आप में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है.

जमीन की नापी अब पड़ेगी महंगी, बिहार सरकार ने मापी शुल्क में की बड़ी बढ़ोतरी

सुपौल. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा रैयती जमीन की मापी शुल्क में हाल ही में की गई वृद्धि का असर अब आम भू-धारकों की जेब पर पड़ने लगा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन की मापी कराने के लिए लोगों को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी होगी। विभाग ने मापी शुल्क की नई दरें निर्धारित कर दी हैं, जिसके तहत सामान्य और तत्काल मापी दोनों के लिए शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। जानकारी के अनुसार, पहले रैयत अपेक्षाकृत कम शुल्क देकर अपनी जमीन की मापी करा लेते थे, लेकिन अब उन्हें लगभग दोगुना शुल्क अदा करना पड़ेगा। विभाग का कहना है कि नई शुल्क व्यवस्था से भूमि मापी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकेगा। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नई दरों के तहत शहरी क्षेत्रों में स्थित रैयती भूमि की सामान्य मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि अधिकतम शुल्क 8000 रुपये रखा गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती भूमि की मापी के लिए प्रति खेसरा 1000 रुपये शुल्क तय किया है तथा अधिकतम शुल्क 4000 रुपये निर्धारित किया गया है। विभाग ने तत्काल मापी की सुविधा के लिए भी अलग शुल्क निर्धारित किया है। नई व्यवस्था के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में तत्काल मापी कराने के लिए प्रति खेसरा 4000 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि अधिकतम शुल्क 16 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये शुल्क देय होगा और इसके लिए अधिकतम शुल्क 8000 रुपये तय किया गया है। स्थानीय स्तर पर नई शुल्क दरों को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कई भू-धारकों का कहना है कि भूमि विवादों के निपटारे, दाखिल-खारिज, बंटवारे एवं अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए मापी आवश्यक होती है। ऐसे में शुल्क बढ़ने से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि यदि बढ़े हुए शुल्क के बदले समय पर और पारदर्शी तरीके से मापी कार्य पूरा होता है तो इससे लोगों को लाभ भी मिलेगा। नई शुल्क दरें राज्यभर में लागू – विभाग द्वारा निर्धारित नई शुल्क दरें राज्यभर में लागू की गई हैं। शुल्क संशोधन का उद्देश्य भूमि मापी सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है। भू-धारकों से अपील की कि वे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ऑनलाइन आवेदन करें तथा किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर संबंधित राजस्व कार्यालय से संपर्क करें। – राकेश कुमार, राजस्व पदाधिकारी

रांची का शहरी विकास तेज, पांच फ्लाईओवर से ट्रैफिक व्यवस्था होगी मजबूत

रांची राजधानी रांची में लगातार बढ़ते वाहनों और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए राज्य सरकार और पथ निर्माण विभाग ने पांच नई फ्लाईओवर परियोजनाओं की तैयारी शुरू कर दी है इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर के प्रमुख मार्गों पर जाम की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। साथ ही रांची का शहरी स्वरूप और सौंदर्य भी नए स्तर पर पहुंचेगा। अरगोड़ा से चापूटोली तक बनेगा फ्लाईओवर अरगोड़ा चौक से कटहल मोड़ होते हुए चापूटोली तक लगभग 1.75 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर प्रस्तावित है। इसके निर्माण से इस व्यस्त मार्ग पर यातायात का दबाव कम होगा। फ्लाईओवर के नीचे सड़क चौड़ीकरण, ड्रेनेज और सौंदर्यीकरण का भी कार्य किया जाएगा। हरमू में बनेगा तीन किलोमीटर लंबा वन-वे फ्लाईओवर कार्तिक उरांव चौक से एलपीएन शाहदेव चौक तक करीब तीन किलोमीटर लंबा वन-वे फ्लाईओवर बनाया जाएगा। यह परियोजना हरमू, रातू रोड और कांके रोड क्षेत्र में ट्रैफिक को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फ्लाईओवर के नीचे बिजली और संचार के तारों को भूमिगत किया जाएगा। करमटोली से साइंस सिटी तक एलिवेटेड कारिडोर करमटोली चौक से मोराबादी होते हुए साइंस सिटी तक 2.2 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर प्रस्तावित है। इसके साथ साइंस सिटी से रिंग रोड तक फोरलेन सड़क का भी निर्माण किया जाएगा, जिससे शहर और बाहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा। स्वर्णरेखा और हरमू नदी किनारे बनेगा रिवर फ्रंट फ्लाईओवर स्वर्णरेखा नदी के दोनों किनारों पर वन-वे फ्लाईओवर और रिवर फ्रंट विकसित करने की योजना है। वहीं हरमू मुक्तिधाम से रेडिसन ब्लू होटल तक हरमू नदी के दोनों किनारों पर लगभग 2.2 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इन परियोजनाओं से कडरू, अशोक नगर, हिनू और आसपास के क्षेत्रों को राहत मिलेगी। महानगरीय स्वरूप की ओर बढ़ रहा रांची हाल ही में कार्तिक उरांव (सिरमटोली-मेकान) फ्लाईओवर और कांटाटोली फ्लाईओवर जैसी परियोजनाओं ने शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया है। रातू रोड फ्लाईओवर भी तैयार है। अधिकारियों का मानना है कि प्रस्तावित पांच नए फ्लाईओवर रांची को ट्रैफिक जाम से राहत देने के साथ-साथ एक आधुनिक और सुव्यवस्थित महानगर के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

रांची में अंग एवं ऊतक दान पर कार्यशाला, मुख्यमंत्री ने इसे जनआंदोलन बनाने की अपील की

रांची मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बारियातू रोड स्थित एक होटल में मोहन फाउंडेशन की ओर से आयोजित 'अंग एवं ऊतक दान में श्रेष्ठ कार्यप्रणालियां' विषयक कार्यशाला में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अंग एवं ऊतक दान का विषय बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए लोगों में जागरूकता की आवश्यकता है। इसके कानूनी पहलुओं को भी समझना जरूरी है। राज्य सरकार भी अंग एवं ऊतक दान को बढ़ावा देने के लिए पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि अंगदान कई अन्य व्यक्तियों के जीवन की नई शुरुआत बन सकता है और लोगों के जीवन में नई उम्मीद तथा खुशियां ला सकता है। अंगदान को जनआंदोलन बनाने की जरूरत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों, सामाजिक संगठनों तथा आम लोगों को मिलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सामूहिक प्रयास ही सकारात्मक परिणाम ला सकते हैं। मुख्यमंत्री कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में अहम पहल मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यशाला का आयोजन कर संस्थान ने एक अच्छी पहल की है। राज्य सरकार भी स्वस्थ समाज के निर्माण को लेकर गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में किसी व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत उनके परिवारजनों से अंगदान के संबंध में बातचीत की जानी चाहिए, ताकि अधिक लोगों को जीवनदान मिल सके। मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है अंगदान मुख्यमंत्री ने कहा कि अंगदान मानवता, संवेदनशीलता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। यह ऐसा कार्य है जो किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। आधुनिक चिकित्सा में बढ़ रही तकनीक की भूमिका मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक आधारित चिकित्सा प्रणाली का है। चिकित्सा जगत में बड़े पैमाने पर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। रोबोटिक शल्यक्रियाएं की जा रही हैं। यकृत और गुर्दा प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार भी स्वस्थ झारखंड निर्माण की दिशा में सकारात्मक कार्य कर रही है। कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद कार्यक्रम में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, मणिपाल अंग साझाकरण के राष्ट्रीय प्रमुख कर्नल अवनीश, मोहन फाउंडेशन की राष्ट्रीय प्रमुख ललिता रघुराम, मणिपाल गहन चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार मिश्रा, कश्यप मेमोरियल नेत्र चिकित्सालय के संस्थापक निदेशक डॉ. बी. कश्यप सहित कई गणमान्य अतिथिगण उपस्थित थे।  

गढ़वा–पलामू क्षेत्र को बड़ी सौगात, 261 किमी रेल परियोजना से विकास को मिलेगी रफ्तार

जागरण (गढ़वा)  गढ़वा एवं पलामू प्रमंडल के लाखों लोगों के लिए बहुप्रतीक्षित बरवाडीह–गढ़वा रोड–रामानुजगंज–अंबिकापुर नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है। रेल मंत्रालय द्वारा 26 मई 2026 को भारत के राजपत्र (संख्या-2568) में प्रकाशित अधिसूचना के माध्यम से 261.838 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को झारखंड एवं छत्तीसगढ़ में 'विशेष रेल परियोजना' घोषित कर दिया गया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर द्वारा जारी अधिसूचना संख्या का.आ. 2660(अ) के अनुसार रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 2(37A) के तहत यह निर्णय लिया गया है। अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही यह प्रभावी हो गई है। परियोजना के अंतर्गत अंबिकापुर, रामानुजगंज, गढ़वा रोड तथा बरवाडीह के बीच नई सिंगल रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। निर्माण कार्य में आएगी तेजी विशेष रेल परियोजना का दर्जा मिलने से भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति सहित विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है। इससे लंबे समय से लंबित इस परियोजना के निर्माण कार्य में गति आने की उम्मीद जगी है। गढ़वा जिला अंतर्गत भंडरिया एवं बड़गड़ प्रखंड सहित गढ़वा जिले के लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि रेल लाइन बनने से आवागमन की सुविधा बढ़ेगी, व्यापार एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। साथ ही झारखंड और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। गौरतलब है कि बरवाडीह–अंबिकापुर रेल लाइन की मांग कई दशकों से उठती रही है। अब परियोजना को विशेष रेल परियोजना घोषित किए जाने के बाद लोगों को उम्मीद जगी है कि निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा और क्षेत्र का वर्षों पुराना रेल संपर्क का सपना साकार हो सकेगा। बरवाडीह–अंबिकापुर रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना घोषित किया जाना क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी आएगी और वर्षों से लंबित लोगों की मांग पूरी होने का मार्ग प्रशस्त होगा। यह निर्णय गढ़वा, पलामू और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। – आनंद प्रसाद सोनी, सांसद प्रतिनिधि बड़गड़। केंद्र सरकार का यह निर्णय क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी सौगात है। रेल लाइन बनने से आवागमन आसान होगा और व्यापार, शिक्षा तथा रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इससे झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच संपर्क और मजबूत होगा तथा क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। – कुंवर सिंह, सांसद प्रतिनिधि, भंडरिया। विशेष रेल परियोजना का दर्जा मिलने से बरवाडीह–अंबिकापुर रेल लाइन निर्माण का सपना अब साकार होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री एवं रेल मंत्रालय के इस निर्णय से क्षेत्र के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। यह परियोजना विकास, रोजगार और बेहतर परिवहन व्यवस्था का नया अध्याय लिखेगी। – बजरंग प्रसाद, भाजपा मंडल अध्यक्ष दशकों से क्षेत्र की जनता इस रेल परियोजना की प्रतीक्षा कर रही थी। विशेष रेल परियोजना घोषित होने से लोगों में नई उम्मीद जगी है कि अब निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होगा। यह रेल लाइन क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ युवाओं के लिए भी नए अवसर लेकर आएगी। – मनोज कुमार राज, सामाजिक कार्यकर्ता  

रोपवे यात्रियों के लिए राहतभरी खबर, झारखंड में सिंफर वैज्ञानिक कर रहे सुरक्षा का परीक्षण

धनबाद. जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में रोपवे में आयी खराबी से तकरीबन 300 सैलानी घंटों हवा में लटके रहे थे। पिछले माह हुई घटना से लोगों में रोपवे की सवारी को लेकर डर बने रहने की संभावना थी। उस डर को केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान-सिंफर(CIMFR) के विज्ञानी ने दूर करने की कोशिश की है। सिंफर के रोपवे टेस्टिंग विभाग के वरिष्ठ विज्ञानी डा. पीके मिश्रा ने देशभर के प्रमुख रोपवे का परीक्षण किया है। शेष बचे रोपवे की टेस्टिंग की प्रक्रिया अब भी जारी है। इन स्थानों की कर चुके रोप टेस्टिंग मैहर रोपवे, चंडी देवी रोपवे, नैनीताल रोपवे, उदयपुर के नीमच माता मंदिर रोपवे, दार्जिलिंग रोपवे, मध्यप्रदेश के देवास में चामुंडा देवी रोपवे, चित्रकूट के हनुमान धारा रोपवे, मनाली, धर्मशाला और मंडी रोपवे के साथ मध्यप्रदेश के भेड़ाघाट रोपवे की टेस्टिंग हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक भीड़ मैहर रोपवे में होती है। इसे ध्यान में रख कर रोप परीक्षण किया गया है। हालांकि रोप की स्थिति सही पाई गई है। पिछले साल वैष्णोदेवी रोपवे के रोप का भी परीक्षण कर चुके हैं। वैष्णोदेवी रोपवे की फिर से परीक्षण को जाएंगे। रोप टेस्टिंग कर चुके सिंफर विज्ञानी ने ज्यादातर रोप की स्थिति सही पाया है। हालांकि इसके बावजूद रोपवे संचालक एजेंसी को सुरक्षा मानकों का ध्यान रख कर हर दिन क्लोज मानीटरिंग का सुझाव दिया है। रोपवे के साथ अन्य संवेदनशील स्थान व उपकरणों की नियमित जांच और आंशिक गड़बड़ी होने पर भी तत्काल सेवा रोक कर उसे ठीक करने की सिफारिश की है। क्या कहते हैं विज्ञानी डा. पीके मिश्रा ने बताया कि सिंफर रोप टेस्टिंग करता है। बीआइएस मानक के अनुसार उसके डायमीटर और घिसने वाली जगह का अध्ययन किया जाता है। डायमीटर में घिसाव या क्षरण आया हो तो बदलने का परामर्श दिया जाता है। अब तक जितने भी रोपवे टेस्टिंग की गई है उन्हें सुरक्षा मानकों की विशेष और हर दिन निगरानी का सुझाव दिया गया है।