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नई सरकार का मंत्रिमंडल फाइनल? इस मंत्रालय पर बढ़ी खींचतान, BJP-JDU में मंथन तेज

पटना  बिहार में नई सरकार बनने से पहले जेडीयू–बीजेपी गठबंधन में मंत्रिमंडल के स्वरूप और विभागों के बंटवारे को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। दिल्ली में जेडीयू नेताओं राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ करीब ढाई घंटे लंबी बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में मंत्रालयों के बंटवारे, विधानसभा अध्यक्ष पद और दोनों दलों की भूमिकाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। गृह मंत्रालय पर अटका मामला बीजेपी इस बार गृह मंत्रालय और शिक्षा विभाग अपने पास चाहती है और इसके बदले स्वास्थ्य व वित्त मंत्रालय छोड़ने के लिए तैयार है। जेडीयू शिक्षा विभाग छोड़ने पर सहमत दिख रही है, लेकिन गृह मंत्रालय को लेकर स्थिति जस की तस बनी हुई है। साल 2005 से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गृह मंत्रालय अपने पास रखते आए हैं। कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण पर सीधी पकड़ की वजह से वे इसे छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में गृह मंत्रालय को लेकर सहमति बनना अभी मुश्किल माना जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष पद पर बनी सहमति विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर चली खींचतान अब खत्म हो गई है। बीजेपी के खाते में विधानसभा अध्यक्ष और जेडीयू के खाते में उपाध्यक्ष पद तय कर दिया गया है। इसके बाद मंत्रिमंडल की संभावित संरचना पर बातचीत और तेज हो गई है। संभावित विभागीय बंटवारा   बीजेपी के खाते में संभावित प्रमुख विभाग: राजस्व सहकारिता पशु एवं मत्स्य संसाधन विधि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण उद्योग पर्यटन पथ निर्माण (बीजेपी गृह और शिक्षा विभाग भी चाहती है; बदले में स्वास्थ्य और वित्त छोड़ने की पेशकश) जेडीयू के खाते में संभावित प्रमुख विभाग: कृषि खान एवं भूतत्व जल संसाधन संसदीय कार्य ऊर्जा योजना एवं विकास विज्ञान एवं प्रावैधिकी तकनीकी शिक्षा ग्रामीण विकास खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण अंतिम सहमति का इंतजार दोनों दलों के बीच कुल हिस्सेदारी लगभग तय मानी जा रही है। फिलहाल सबसे बड़ा मतभेद गृह मंत्रालय को लेकर है, जिसे नीतीश कुमार अपने पास रखने पर अडिग हैं। विधानसभा अध्यक्ष पद पर सहमति के बाद उम्मीद है कि आज देर रात एक और बैठक होगी, जिसमें सरकार की अंतिम रूपरेखा स्पष्ट होने की संभावना है।  

कैबिनेट विस्तार की आहट: BJP–JDU के इन नेताओं को मिल सकता है मंत्री पद

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद अब नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है। नीतीश कैबिनेट में भाजपा, जदयू, लोजपा-रामविलास, हम और आरएलएम से कितने और कौन-कौन मंत्री होंगे इस पर भी मंथन जारी है। पटना से दिल्ली तक एनडीए नेताओं की बैठकों का दौर चल रहा है। अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, नई नीतीश कैबिनेट में 8 से 10 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। इनमें नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से अधिकतर पुराने चेहरों को ही मौका दिया जाएगा। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी लगभग आधे मंत्री बदल सकती है।   विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कई दावे किए जा रहे हैं। इनमें बताया जा रहा है कि 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ डिप्टी सीएम समेत 20 मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। फिर कुछ दिन बाद कैबिनेट का विस्तार करके अन्य मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह कराया जाएगा। बिहार चुनाव 2025 के नतीजों में एनडीए को कुल 243 में से 202 सीटों पर जीत मिली। भाजपा ने 89, जदयू ने 85, लोजपा-आर ने 19, हम ने 5 और आरएलएम ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की। फॉर्मूले के अनुसार 6 विधायक पर एक मंत्री बनाया जाना है। इस हिसाब से भाजपा से सर्वाधिक 15 बन सकते हैं। जबकि जदयू से 13-14 नेताओं को मंत्रि परिषद में जगह दी जा सकती है। वहीं, चिराग पासवान की पार्टी लोजपा-आर से 3 और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा एवं उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री बनाया जा सकता है। जदयू में अधिकतर पुराने चेहरे रिपीट होंगे? नीतीश कुमार की पार्टी में पुराने चेहरों को ही कैबिनेट में रिपीट किए जाने की चर्चा चल रही है। हालांकि, पिछली बार मंत्री रहे सुमित कुमार सिंह जेडीयू के टिकट पर चुनाव हार गए हैं, उनकी जगह किसी नए चेहरे को शामिल किया जा सकता है। वहीं, एक-दो मौजूदा मंत्रियों का भी पत्ता कट सकता है। उनकी जगह नए नेताओं को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। जदयू से चर्चा में ये नए चेहरे जेडीयू से जिन नए नामों की चर्चा चल रही है, उनमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशावाहा का नाम रेस में सबसे आगे है। इस चुनाव में सबसे बड़ी जीत दर्ज करने वाले रूपौली से विधायक बने कलाधर मंडल को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। उनके अलावा, राहुल कुमार सिंह, सुधांशु शेखर, पन्ना लाल सिंह पटेल का नाम भी चर्चा में है। भाजपा से ये नए चेहरे बन सकते हैं मंत्री नीतीश कैबिनेट में भाजपा से ज्यादा नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। भाजपा से जिन नए चेहरों के मंत्री बनने की चर्चा है, उनमें राणा रणधीर, गायत्री देवी और विजय कुमार खेमका का नाम शामिल है। उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान की पार्टी से भी पहली बार नए मंत्री बनाए जाएंगे। वहीं, जीतनराम मांझी की पार्टी से उनके बेटे संतोष सुमन के ही दोबारा मंत्री बनने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी पिछली बार की तरह स्पीकर का पद भी अपने पास रख सकती है। हालांकि, जेडीयू की नजर भी विधानसभा अध्यक्ष के पद पर है। दूसरी ओर, नई नीतीश सरकार में कितने डिप्टी सीएम होंगे, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है। अटकलों के अनुसार, भाजपा से दो डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। चिराग की पार्टी से भी एक चेहरा डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा है, लेकिन इसकी संभावना कम नजर आ रही है।  

लालू यादव का संदेश: परिवार विवाद के बीच विधायकों को समझाया, दिया विश्वास

नई दिल्ली  लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार के दौर में अपने राजनीतिक करियर के शीर्ष पर थे। करीब दो दशकों तक उनका जलवा कायम रहा, लेकिन अब वह अपनी पार्टी आरजेडी की खराब हालत देखने को विवश हैं। आरजेडी का नेतृत्व भले ही वह राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कर रहे हैं, लेकिन कामकाज तेजस्वी यादव ही संभालते हैं। इस बीच बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार मिली है तो पार्टी से लेकर परिवार तक कलह मच गई है। बेटी रोहिणी आचार्य, बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने खुलकर तेजस्वी पर निशाना साधा है और उन्हें हार का जिम्मेदार बताया है। वहीं सोमवार को आरजेडी के विधायकों की मीटिंग में तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुन लिया गया।   यह मीटिंग भी घटनापूर्ण रही और कई मसले उठे। सबसे पहले तो तेजस्वी यादव ही भावुक हो गए और उन्होंने विधायकों से नेतृत्व से हटने तक की पेशकश कर दी। तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि विधायक चाहते हैं कि मैं हट जाऊं तो मैं इसके लिए तैयार हूं और किसी अन्य व्यक्ति को नेता चुना जा सकता है। इस दौरान लालू यादव खुद सामने आए और उन्होंने विधायकों से कहा कि वे तेजस्वी को नेता बने रहने के लिए मनाएं। इसके बाद लालू यादव ने विधायकों से यह भी कहा कि वे पार्टी को मजबूत करने पर फोकस करें। उन्होंने कहा कि परिवार का झगड़ा आंतरिक मसला है और इसे वह सुलझा लेंगे। लालू यादव ने नेताओं से कहा कि परिवार का विवाद आतंरिक मसला है और मैं इसे सुलझा लूंगा। उन्होंने विधायकों से कहा कि वे फिलहाल संगठन को मजबूत करने पर फोकस करें। बता दें कि बिहार चुनाव की हार ने आरजेडी के आतंरिक झगड़े को सरेआम कर दिया है। तेजस्वी यादव के करीबियों पर बहन रोहिणी आचार्य ने ही हमला बोला है। रोहिणी के अलावा बेटे तेजप्रताप भी खिलाफ, तेजस्वी पर क्या कहा था उन्होंने संजय यादव और रमीज नेमत खान पर हमला किया था। उनका कहना था कि मैंने पार्टी और परिवार को छोड़ने का फैसला किया है। ऐसा ही करने के लिए मुझसे संजय यादव और रमीज खान ने कहा था। इसके साथ ही रोहिणी ने खुद पर चप्पल उछालने का भी आरोप लगाया था। वहीं इस मामले में हमला करते हुए तेजप्रताप ने तो अपने छोटे भाई को फेलस्वी करार दिया।

तेजस्वी-रमीज पर घिरा नया विवाद: रोहिणी आचार्य के आरोपों से UP में हलचल

कौशांबी (मंझनपुर)  बिहार चुनाव-2025 के परिणामों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के परिवार का विवाद के साथ बलरामपुर के पूर्व सांसद रिजवान जहीर के दामाद रमीज खान का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया। रमीज अब तक लाइम लाइट में नहीं थे लेकिन लालू यादव को अपनी किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य ने रमीज खान पर गंभीर आरोप लगाए तो बिहार से यूपी तक उनकी चर्चा होने लगी। रोहिणी आचार्य का बयान आने के बाद से ही यूपी में भी रमीज की असलियत खंगाली जा रही है। कौशाम्बी में अचानक रमीज खान की क्रिमिनल हिस्ट्री खंगाली गई है। डीजीपी कार्यालय ने रविवार की रात इसका ब्यौरा तलब किया। कौशाम्बी के कोखराज थाना में रमीज के खिलाफ केस दर्ज है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के करीबी रमीज खान पुत्र नियामत खान निवासी भंगहा कला, शीतलपुर, जिला बलरामपुर की रविवार की रात अचानक जिले में क्रिमिनल हिस्ट्री खंगाली जाने लगी। डीजीपी कार्यालय ने रमीज खान के बारे में रिपोर्ट मांगी थी। रमीज खान के खिलाफ कोखराज थाना में दो केस दर्ज है। पहला केस हत्या का है। रमीज खान ने प्रतापगढ़ के जेठवारा के प्रापर्टी डीलर शकील की 25 लाख रुपये के लेनदेन में हत्या कर रोही बाईपास के समीप सड़क किनारे लाश फेंकी थी। फरारी के दौरान भी पुलिस ने एक और केस दर्ज किया था। इसके बाद आरोपी को पुलिस ने वर्ष 2023 में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। रमीज पर आरोप है कि बिहार चुनाव के दौरान उसने आरजेडी के नेताओं के साथ मिलकर सनातन धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार किया था। इसके अलावा कई राजनेताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी भी की थी। अब चुनाव खत्म होने के बाद यूपी सरकार ने शिकंजा कसते हुए रमीज खान की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है। रविवार की देर रात ही डीजीपी कार्यालय को कौशाम्बी में दर्ज मुकदमों की सूचना भेज दी गई थी। लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी लगाए हैं आरोप तेजस्वी यादव के करीबी बलरामपुर के पूर्व सांसद रिजवान जहीर का दामाद रमीज खान चुनाव खत्म होने के बाद से चर्चित नाम हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मतगणना परिणाम आने के बाद आरजेडी के अगुवा लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने रमीज खान के ही खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। रोहिणी आचार्य का बयान आने के बाद से ही रमीज की असलियत खंगाली जा रही है। युवाओं की टोली ले गया था रमीज खान कहा जा रहा है कि बिहार चुनाव में भाजपा और सनातन धर्म के खिलाफ हेट कैम्पेनिंग चलाने के लिए रमीज खान ने ही पूरी रणनीति बनाई थी। आरोप है कि वह इसके लिए पश्चिमी यूपी के युवाओं की एक बड़ी टोली लेकर बिहार गया था। बिहार चुनाव का परिणाम आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ तो उसकी चर्चा एक ‘खलनायक’ के तौर पर होने लगी। क्या बोली पुलिस एएसपी राजेश कुमार ने कहा कि बिहार में सनातन धर्म के खिलाफ हेट कैम्पेनिंग चलाने के आरोपी रमीज खान के खिलाफ डीजीपी आफिस ने रिपोर्ट मांगी थी। कोखराज थाना में उसको खिलाफ दो केस दर्ज हैं, इसकी रिपोर्ट डीजीपी कार्यालय को भेज दी गई है।  

बैठक में भावुक हुए तेजस्वी यादव, कहा— अगर मैं बोझ हूँ तो हटा दीजिए

नई दिल्ली  बिहार विधानसभा चुनाव की हार को पचाना लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी के लिए मुश्किल हो रहा है। उनके बेटे तेजस्वी यादव भले ही आरजेडी विधायक दल के फिर से नेता चुन लिए गए हैं, लेकिन पार्टी में सब कुछ सहज नहीं है। यहां तक कि तेजस्वी यादव सोमवार को विधायक दल की मीटिंग के दौरान भावुक हो गए। उन्होंने अपनी तरफ से ही यहां तक कह दिया कि यदि विधायक चाहें तो नेतृत्व छोड़ने को तैयार हूं। उन्होंने कहा कि विधायकों की राय हो तो वे अपनी ओर से किसी अन्य व्यक्ति को अपना नेता चुन सकते हैं। उन्होंने साथी विधायकों से कहा कि यदि उन्हें लगता है कि मेरे स्थान पर किसी और के आने से संगठन मजबूत हो सकता है तो ऐसा कर सकते हैं।   मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक विधायक ने कहा कि तेजस्वी यादव टिकट बंटवारे और हार को लेकर लगे आरोपों से आहत थे। मीटिंग के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आखिर मैं क्या करूं। परिवार को देखूं या फिर पार्टी को देखूं। बहन रोहिणी आचार्य की ओर से लगाए आरोपों के चलते तेजस्वी यादव फिलहाल दबाव की स्थिति में दिख रहे हैं। हालांकि अब तक उन्होंने खुलकर कुछ भी कहा नहीं है। उनके सलाहकार और करीबी संजय यादव एवं रमीज नेमत खान पर भी आरोप लग रहे हैं कि तेजस्वी यादव सिर्फ उनकी ही सुनते हैं और कार्यकर्ताओं से दूर हो गए हैं। भावुक हुआ माहौल, लालू यादव को खुद देना पड़ा दखल तेजस्वी यादव की ओर से अचानक ऐसे ऑफर से माहौल भावुक दिखा। वहां मौजूद तमाम विधायक आग्रह करने लगे कि आप ही हमारे नेता रहें। इस बीच खुद लालू यादव ने दखल दिया और उन्होंने विधायकों से कहा कि वे राजी करें। इसके बाद विधायकों ने सर्वसम्मति से तेजस्वी यादव को अपना नेता चुन लिया। इस दौरान राबड़ी देवी, मीसा भारती और तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव भी मौजूद थे। बता दें कि मीसा भारती को भी असंतुष्ट बताया जा रहा है, लेकिन वह खुलकर कुछ भी नहीं कह रही हैं। दरअसल आरजेडी को इस चुनाव में 25 सीटें ही मिली हैं, जबकि वह 143 पर उतरी थी। वह तीसरे नंबर का दल बन गई है, जिसे पार्टी के लिए करारा झटका माना जा रहा है। मीटिंग में EVM पर उठे सवाल, बोले- ऐसे नतीजे गड़बड़ी करके ही आए इससे पहले 2010 में ही ऐसा हुआ था, जब आरजेडी को महज 22 सीटें मिली थीं। तब नेता विपक्ष का पद भी नहीं मिल पाया था, लेकिन इस बार नेता विपक्ष बनने में तेजस्वी यादव कामयाब रहे हैं। तेजस्वी यादव को नेता चुने जाने वाली मीटिंग में जगदानंग सिंह ने कहा कि हमारी यह हार ईवीएम के चलते हुई है। उन्होंने कहा कि इन मशीनों का बेजा इस्तेमाल हुआ है। उनकी इस दलील को विधायक भाई वीरेंद्र ने भी सही ठहराया। उन्होंने कहा कि हमें ईवीएम के खिलाफ लड़ना होगा। हमें डिमांड करनी चाहिए कि इलेक्शन सिर्फ बैलेट पेपर से ही हो।  

नीतीश कुमार के शपथ ग्रहणों का सफ़र: पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर मिली थी CM जिम्मेदारी

पटना बिहार में हुए विधानसभा चुनावों में NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। कुल 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए को 202 सीटें मिली हैं, जो उसे दो-तिहाई से भी ज्यादा बहुमत दिलाती है। एनडीए की इतनी बड़ी जीत के बाद, नीतीश कुमार की बिहार में मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। अगर ऐसा हुआ इस बार नीतीश कुमार 10 वीं बार सीएम पद की शपथ लेंगे। बात करें 2000 के विधानसभा चुनाव की तो उस समय किसी एक पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था। चुनाव के बाद अटल बिहारी लाल जी के पर भाजपा के समर्थन से ही नीतीश ने पहली बार 3 मार्च 2000 को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। तब नीतीश अटल सरकार में कृषि मंत्री थे। लेकिन, बहुमत नहीं होने के कारण उन्होंने 7 दिन में ही इस्तीफा दे दिया था।

झारखंड में बढ़ी सर्दी: 11 जिलों में शीतलहर की चेतावनी, तापमान में गिरावट

रांची हिमालयी राज्यों में जारी बफर्बारी का सीधा असर अब झारखंड के मौसम पर दिखने लगा है। इस बार दिसंबर में महसूस होने वाली कड़ाके की ठंड नवंबर की शुरुआत से ही दस्तक दे चुकी है। कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। मैक्लुस्कीगंज में बीते रविवार को पारा गिरकर 6 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे न्यूनतम तापमान है। राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में भी सुबह-शाम ठिठुरन काफी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में घना कोहरा छाया है, जिससे आवागमन में परेशानी हो रही है। मौसम विभाग ने राज्य के 11 जिलों-गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा और लातेहार के लिए शीतलहर की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में अगले 24 घंटों तक यलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। घने कोहरे और तेज ठंडी हवा का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम बाहर रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि अचानक तापमान गिरने से सर्दी, खांसी, सांस की दिक्कत और ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। सदर अस्पताल में ब्रेन स्ट्रोक मरीजों की संख्या 30 प्रतिशत बढ़ गई है। रिम्स में रोज छह से सात मरीज पहुंच रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, 18 नवंबर से न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे हल्की राहत मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि हिमालय में जारी बफर्बारी आगे भी झारखंड के मौसम को प्रभावित करेगी। अगले 3-4 दिनों तक हल्की राहत के बाद तापमान फिर से गिर सकता है। लोगों को ठंड से बचाव के आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।  

बीजेपी और जेडीयू में मंत्रिपद साझा करने को लेकर चर्चा, पुराने फार्मूले को किया जाएगा बदल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। चुनाव से पहले बीजेपी और जेडीयू ने बराबर सीटों (101) पर अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला किया था। ऐसे में दोनों ही दलों को बराबर मंत्रिपद भी मिल सकते हैं। सरकार गठन के फार्मूले पर बात करें तो चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को दो मंत्रिपद और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को 01 वह उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा पार्टी को एक मंत्रिपद दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि एनडीए के घटक दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर बातचीत चल रही है और कई पहले के मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदलने पर भी विचार हो रहा है।  सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को बीजेपी के विधायक दल की बैठक संभावित है। बता दें कि 243 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने अकेले 89 सीटें जीती हैं। दूसरे नंबर पर जेडीयू के खाते में 85 सीटें गई हैं। एलजेपी (आरवी) को 19, HAM (S) को पांच और आरएमएम को चार सीटें मिली हैं। 2020 की बात करें तो बीजेपी को 74 सीटें मिली थीं और जेडीयूके पास 43 सीटें थीं। वहीं सरकार में बीजेपी के 22 और जेडीयू के 12 मंत्री थे। बता दें कि बिहार की मौजूदा विधानसबा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे मे बुधवार या फिर गुरुवार को ही शपथ ग्रहण हो सकता है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को बिहार चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव बीएल संतोष के बीच संक्षिप्त बैठक हुई थी जिसमें सरकार बनाने पर चर्चा की गई थी। जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। वहीं उपमुख्यमंत्रियों को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भ्रष्टाचारा के आरोपों और फिर नामांकन पेपर में गड़बड़ी के बाद सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा या नहीं, इसपर अभी असमंजस की स्थिति है। बता दें कि गांधी मैदान में बिहार की नई सरकार का शपथ ग्रहण कार्यक्रम हो सकता है। 2015 में नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में ही शपथ ली थी। 17 से 20 नवंबर तक गांधी मैदान को आम लोगों के लिए बंद किया गया है। माना जा रहा है कि गांधी मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा शपथ ग्रहण के लिए भव्य मंच तैयार किया जाएगा।

विपक्ष का नया चेहरा तेजस्वी यादव, बैठक में हुआ बड़ा निर्णय

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं, चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए RJD ने आज समीक्षा बैठक की। बैठक मे तेजस्वी के साथ -साथ  लालू-राबड़ी व मीसा भी शामिल हुए । बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। आरजेडी विधायक दल का नेता तेजस्वी यादव को घोषित किया गया है। बैठक में हार के कारणों पर भी समीक्षा की गई है। बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद)  महज 25 सीटों पर सिमट गई। इसके बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने परिवार से नाता तोड़ने के साथ राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया है। रोहिणी आचार्य ने एक चौंकाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे यही करने को कहा था। मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।'

झारखंड के रामगढ़ में हाथियों का हमला, महिला की दर्दनाक मौत

रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले के जगेश्वर ओपी क्षेत्र अंतर्गत खरकंडा गांव में रविवार देर रात हाथियों के एक बड़े झुंड ने भारी उत्पात मचा दिया। करीब आधी रात को अचानक गांव में घुसे इस झुंड ने न केवल कई घरों को तहस-नहस किया, बल्कि 45 वर्षीय सांझो देवी की कुचलकर हत्या भी कर दी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश व्याप्त है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बोकारो सीमा से लगे इस गांव में देर रात हाथियों के झुंड के प्रवेश की भनक लगते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। अपनी सुरक्षा के लिए अधिकांश ग्रामीण घरों की छतों पर चढ़कर छिप गए, लेकिन सांझो देवी समय पर सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंच सकीं और हाथियों के हमले का शिकार हो गईं। हाथियों ने कई कच्चे और पक्के मकानों को तोड़ दिया तथा घरों में रखे धान सहित अन्य खाद्यान्न भी खा लिए। ग्रामीणों का कहना है कि झुंड करीब दो घंटे तक गांव में डेरा जमाए रहा, जिसके चलते भारी नुकसान हुआ। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम देर रात गांव पहुंची, लेकिन तब तक हाथी काफी तबाही मचा चुके थे। विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सुबह तक झुंड को गांव से बाहर खदेड़ने की कोशिशें जारी रखीं। अधिकारियों के अनुसार झुंड अभी भी गांव के आसपास ही मौजूद है, जिससे सभी को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सोमवार सुबह घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने लालपनिया रोड को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी मृतका के परिजनों को उचित मुआवजा, परिवार के लिए स्थायी सहायता और क्षतिग्रस्त घरों की भरपाई की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन पर समय पर कार्रवाई न करने और गांव में हाथियों की बढ़ती आवाजाही पर रोक नहीं लगाने का आरोप भी लगाया है। फिलहाल प्रशासन और वन विभाग स्थिति को नियंत्रित करने और ग्रामीणों को राहत देने के प्रयास में जुटे हुए हैं।