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Bihar News: बिहार में 2 नेताओं को ‘बड़ा आदमी’ बनाएगी भाजपा

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election) के दौरान भाजपा के दिग्गज नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार भाजपा के दो नेताओं के लिए जब चुनाव प्रचार में पहुंचे तो उन्होंने प्रचंड बहुमत से जीत दिलाने की अपील उन क्षत्रों की जनता से की थी। इसके बदले में उन्होंने इन दोनों नेताओं के 'बड़ा आदमी' बनाने का वादा उन विधानसभा क्षेत्रों की जनता से किया था। इनमें पहला नाम बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का है। वहीं, दूसरा नाम सीतमढ़ी से चुनाव लड़ रहे सुनील कुमार पिंटू का है। तारापुर से विधानसभा चुनाव लड़ रहे सम्राट चौधरी के पक्ष में जब मुंगेर पहुंचे थे तो उन्होंने लोगों से भाजपा के पक्ष में वोट डालने की अपील की थी। इस दौरान उन्होंने कहा, 'आप भरोसा रखिए। सम्राट चौधरी को प्रचंड बहुमत से जिताइए। मोदी जी सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाएं।' इसके अलावा उन्होंने मुंगेर के लिए किए गए विकास कार्यों का भी हिसाब किताब दिया। साथ ही बताया कि कैसे डबल इंजन की सरकार का फायदा बिहार को मिल रहा है। वहीं, सीतामढ़ी से चुनाव लड़ रहे सुनील कुमार पिंटू के पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए पहुंचे अमित शाह ने उन्हें अपना दोस्त बताया था। लोगों से अपील करते हुए कहा था, "सुनील कुमार पिंटू मेरा दोस्त है। आप इसे प्रचंड बहुमत से जिताओ। हम इसे बड़ा आदमी बनाएंगे।' आपको बता दें कि तारापुर में सम्राट चौधरी ने आरजेडी के अरुण कुमार को 45843 मतों से चुनाव हराया। भाजपा को यहां 122480 मत मिले थे। वहीं, अरुण कुमार के खाते में 76637 मत गए। सीतामढ़ी की बात करें तो यहां भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ रहे सुनील कुमार पिंटू को 104226 मत मिले। उन्होंने आरजेडी प्रत्याशी सुनील कुमार को 5562 मतों से हराया।

NDA की जीत के बाद जनता की नजर इन 10 बड़े वादों पर, जिन्हें पूरा करना जरूरी

पटना /नई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव के दो चरणों में हुए मतदान के बाद अब मतगणना हो रही है. अभी तक के रुझानों में एनडीए ने बढ़त बनाए रखते हुए 199 सीटें बरकरार रखी हैं. वहीं विरोधी महागठबंधन 38 सीटों पर ही सिमटी हुई है. एनडीए ने बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया. बीजेपी 90 सीटों पर आगे है, जेडीयू 81, एलजेपी 21 और अन्य ने 7 सीटों पर बढ़त बनाई हुई है. अभी तक के रुझानों में एनडीए ही जीत की तरफ बढ़ती नजर आ रही है.  अब जब एनडीए की जीत साफ-साफ दिखने लगी है तो इस पर भी बात होना लाजिमी है कि गठबंधन यानी नीतीश-मोदी की जोड़ी ने ऐसे कौन से वादे किए थे जिसने जनता को लुभाया और उसने अपने विश्वास को वोट के जरिए जीत में बदला. नजर डालते हैं उन 10 वादों पर जिन्हें बंपर जीत के बाद नीतीश-मोदी को पूरा करना होगा.  बता दें कि पहले चरण की वोटिंग से करीब हफ्तेभर पहले सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपना घोषणा पत्र जारी किया था. एनडीए के घोषणा पत्र में शिक्षा और रोजगार से लेकर महिलाओं और गरीब-किसान, सामाजिक न्याय तक, हर वर्ग के लिए लुभावने वादे शामिल किए गए थे. 1. पंचामृत गारंटी: सत्ताधारी एनडीए ने अपने घोषणा पत्र में गरीबों के लिए 'पंचामृत गारंटी' का वादा किया है. इसके तहत वादा किया गया है कि गरीबों को मुफ्त राशन, 125 यूनिट मुफ्त बिजली, पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देंगे.  2. 50 लाख नए पक्के मकान और सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी दी जाएगी. 3. एक करोड़ से अधिक नौकरी और रोजगार का वादा किया है. यह वादा किया गया है कि हर युवा को नौकरी और रोजगार देंगे.  4. हर जिले में अत्याधुनिक मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने, 10 नए औद्योगिक पार्क विकसित करने, कौशल जनगणना कराकर कौशल आधारित रोजगार देने का वादा भी एनडीए ने किया है.  5. हर जिले में मेगा स्किल सेंटर से बिहार को ग्लोबल स्किलिंग सेंटर के रूप में स्थापित किया जाएगा. 6. कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को 3000 रुपये वार्षिक दिया जाएगा. सभी प्रमुख फसलों की पंचायत स्तर पर एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित की जाएगी और प्रखंड स्तर पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के साथ ही एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर में एक लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा. दुग्ध मिशन शुरू कर चिलिंग और प्रोसेसिंग सेंटर प्रखंड स्तर पर स्थापित किए जाएंगे. 7. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को दो लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी. एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य लेकर काम करेंगे. मिशन करोड़पति के जरिये चिह्नित उद्यमियों को करोड़पति बनाने की दिशा में काम करेंगे. 8. केजी से पीजी तक मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देंगे. स्कूलों में मिड-डे-मिल के साथ पौष्टिक नाश्ता और स्कूलों में आधुनिक स्किल लैब की व्यवस्था करेंगे. गरीबों को पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देंगे. 9. सात एक्सप्रेसवे बनाए जाएंगे. 3600 किलोमीटर रेल ट्रैक का आधुनिकीकरण किया जाएगा. चार नए शहरों में मेट्रो सेवा शुरू की जाएगी. अमृत भारत एक्सप्रेस और नमो रैपिड रेल सेवा का विस्तार करेंगे.  10. 10 नए शहरों से घरेलू उड़ानें भी शुरू की जाएंगी. पटना के करीब ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने के साथ ही दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाया जाएगा.

जदयू ऑफिस के बाहर महिलाओं की खुशी का धमाका, कहा– अब बदलाव नहीं, विकास का दौर शुरू

पटना पटना में शुक्रवार को जदयू कार्यालय के बाहर माहौल बेहद रंगीन और उत्साह भरा रहा। ढोल की थाप पर महिला कार्यकर्ता नाचती-गाती दिखीं। चुनावी रुझानों में एनडीए को जबरदस्त बढ़त से खुश महिलाओं ने नतीजे घोषित होने से पहले ही जश्न मानना शुरू कर दिया। चुनाव आयोग ने जैसे ही मतगणना के रुझान देने शुरू किए, वैसे ही महिला समर्थक बड़ी संख्या में पार्टी कार्यालय पहुंचने लगीं। उन्होंने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी। महिला समर्थकों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब राजनीति में समीकरण बदल चुके हैं। एक महिला ने आईएएनएस से कहा, "लालू राज में 'एमवाई' का मतलब मुस्लिम और यादव था, लेकिन अब बिहार में 'महिला और युवा' फैक्टर चलता है। आज ये जीत इसी बदले हुए माहौल की पहचान है।" एक अन्य महिला समर्थक ने कहा, "आज की जीत विकास की जीत है। यह जीत हर उस महिला की है जिसे नीतीश कुमार ने सशक्त बनाया।" जदयू कार्यालय में मौजूद एक महिला ने कहा, "हम सभी यहां एक-दूसरे को बधाई देने आए हैं। आज हमारे लिए होली भी है और दीपावली भी। यह पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार की नेतृत्व क्षमता का परिणाम है।" एक महिला ने कहा, "नीतीश कुमार रोजमर्रा के जीवन को छूने वाली योजनाएं लेकर आए। महिलाओं को सम्मान मिला, उन्हें सशक्त बनाया गया। युवाओं को रोजगार मिला। बिहार का जो भी विकास हुआ है, वह नीतीश कुमार के कारण हुआ है।" उन्होंने आगे कहा, "नीतीश कुमार वोट की चिंता नहीं करते, वे वोटर्स की चिंता करते हैं। वह सच में विकास पुरुष हैं।" एक महिला समर्थक ने कहा, "हम इसलिए ज्यादा खुश हैं क्योंकि बिहार से जंगल राज का अंत हो चुका है।" वहीं एक महिला समर्थक ने कहा, "बिहार की बहनों ने जंगल राज को खत्म किया है। अब बिहार में सिर्फ विकास की गंगा बहेगी। यह जीत एनडीए की एकता का प्रतीक है।" इस दौरान कई महिलाएं जीत के गीत गाती नजर आईं।

कैद में रहते अनंत सिंह का राजनीतिक दबदबा कायम, इतने वोटों से मिली जीत

मोकामा बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बीच मोकामा विधानसभा सीट ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं। पांच बार के विधायक और JDU (NDA) उम्मीदवार अनंत सिंह ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करते हुए 28 हजार से अधिक वोटों से शानदार जीत दर्ज की है। अनंत सिंह ने RJD उम्मीदवार और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को बड़े अंतर से हराया। मोकामा की लड़ाई शुरू से ही हाई-प्रोफाइल और टक्कर वाली मानी जा रही थी, क्योंकि दोनों ओर बाहुबली परिवार थे।  इतने वोटों से जीते अनंत सिंह इलेक्शन डेटा के अनुसार:     अनंत सिंह (JDU) → 91,416 वोट     वीणा देवी (RJD) → 63,210 वोट     प्रियदर्शी पियूष (जन सुराज) → 19,365 वोट इस तरह अनंत सिंह ने 28,206 वोटों की विशाल बढ़त के साथ विजय हासिल की। जेल में रहते हुए भी ‘छोटे सरकार’ का जलवा कायम मोकामा की सबसे बड़ी चर्चा यही रही कि अनंत सिंह इस समय पटना बेऊर जेल में बंद हैं। वे दुलार चाँद यादव मर्डर केस में न्यायिक हिरासत में हैं। इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता और संगठन की मजबूती ने चुनावी समीकरण को पूरी तरह उनके पक्ष में कर दिया। मोकामा की ये जंग सिर्फ दो उम्मीदवारों की नहीं थी, बल्कि साख, सत्ता और प्रभाव की लड़ाई मानी जा रही थी। मोकामा सीट—हमेशा से रहा है राजनीतिक हॉटस्पॉट मोकामा विधानसभा को बिहार की सबसे चर्चित सीटों में गिना जाता है। यहां मुकाबला हमेशा हाई-प्रोफाइल रहता है, और इस बार भी दो बाहुबलियों के बीच टक्कर ने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।  

बीजेपी का झंडा ऊँचा: नगरोटा में राणा ने झटका दिया, डम्पा में मिजो फ्रंट ने बाजी, बाकी सीटों पर ताज़ा हाल

पटना   बिहार विधानसभा चुनाव के साथ-साथ देश के 7 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की 8 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों की गिनती भी आज परवान चढ़ रही है। भाजपा ने जम्मू-कश्मीर की नगरोटा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारी मतों से जीत हासिल की है। यहां भाजपा की दिव्यरानी राणा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के उम्मीदवार हर्ष देव सिंह को 24647 मतों से पराजित किया। श्रीमती राणा को कुल 42350 मिले, जबकि श्री सिंह ने कुल 17703 मत हासिल किये। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस यहां पर तीसरे नवंबर पर रही है और उसकी उम्मीदवार शमीम बेगम ने कुल 10872 मत प्राप्त किये। गौरतलब है कि 11 नवंबर को नगरोटा में शांतिपूर्ण ढंग तरीके से मतदान हुआ था। पिछले साल 31 अक्टूबर को भाजपा विधायक देवेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद नगरोटा में उपचुनाव कराया गया है।  मिजोरम – डम्पा से डॉ. ललथंगलियाना बड़ी बढ़त से जीते डम्पा में सबसे अधिक उत्साह देखने को मिला, जहां 82.34% मतदान दर्ज किया गया। डॉ. आर. ललथंगलियाना ने 6,981 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो उनके पिछले प्रदर्शन से 562 वोट अधिक है। वे मिज़ो नेशनल फ्रंट (MNF) के प्रत्याशी थे। इनके नतीजे आना अभी बाकी है:-  झारखंड उपचुनाव : घाटशिला सीट पर झामुमो के सोमेश सोरेन आगे  : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार को मतगणना के रुझानों में झामुमो उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन भाजपा के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बाबूलाल सोरेन से 20,807 मतों से आगे हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। दसवें चरण की मतगणना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) उम्मीदवार को 53,096 वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को 32,289 वोट मिले। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के उम्मीदवार रामदास मुर्मू 7,811 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर हैं।   पंजाब – तरनतारन से AAP के हरमीत संधू जीते तरनतारन उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने धमाकेदार जीत दर्ज की। AAP के हरमीत सिंह संधू ने शिरोमणि अकाली दल की सुखविंदर कौर रंधावा को शिकस्त दी, जबकि सांसद अमृतपाल की पार्टी वारिस पंजाब के उम्मीदवार मनदीप सिंह तीसरे स्थान पर रहे। राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर कांग्रेस विजयी  राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने उपचुनाव में जीत हासिल की है। कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया ने भाजपा के मोरपाल सुमन को 15,612 मतों के बड़े अंतर से हराया। इस चुनाव में प्रमोद जैन भाया को कुल 69,571 वोट मिले, जबकि मोरपाल सुमन ने 53,959 वोट प्राप्त किए। ओडिशा – नुआपाड़ा नुआपाड़ा में  बीजेपी के जय ढोलकिया 93 हज़ार से ज्यादा वोट हासिल कर रहे है और 62 हज़ार वोटों से लीड बनाए हुए। तेलंगाना – जुबली हिल्स  जुबली हिल्स से कांग्रेस के नवीन यादव 24 हज़ार वोटों से लीड कर रहे है।  जम्मू-कश्मीर –   बड़गाम बडगाम विधानसभा क्षेत्र में पीडीपी उम्मीदवार आगा मेहदी 5200 वोटों से आगे चल रहे है।  

चुनाव हार पर पप्पू यादव की पहली प्रतिक्रिया: “जनता से शिकायत नहीं, पर इतना जरूर कहूंगा…”

पटना  बिहार में एक बार फिर NDA की बहार की संभावना अब प्रबल होती जा रही है। राज्य में चुनावी तस्वीर धीरे-धीरे स्पष्ट हो रही है। विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले शुरुआती रुझानों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन भारी बहुमत की ओर बढ़ता दिख रहा है जिसके बाद दोनों दलों के कार्यालयों में जश्न शुरू हो गया है। वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन के खेमे में मायूसी का माहौल है। पूर्णिया के सांसद रह चुके पप्पू यादव भी दुखी नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ये नतीजे बिहार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं। रुझानों में स्थिति काफी हद तक स्पष्ट होने के बाद मीडिया के बातचीत के दौरान जन अधिकार पार्टी के प्रमुख ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, “नतीजा स्वीकार करना पड़ेगा, लेकिन ये बिहार के लिए दुर्भाग्य होगा।” उन्होंने आगे कहा, “जनता को मैं कुछ नहीं कह सकता लेकिन बिहार के लिए ये दुर्भाग्य होगा।” प्रचंड जीत की ओर NDA फिलहाल NDA राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से 180 से अधिक पर बढ़त हासिल करते हुए प्रचंड जीत की ओर बढ़ रहा है। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर दोपहर तक उपलब्ध रुझानों के अनुसार, भाजपा 101 विधानसभा सीटों में से 80 से अधिक सीटों पर बढ़त के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती दिख रही है। ऐसे में भाजपा का यह प्रदर्शन उसे राजनीतिक रूप से और मजबूत करेगा और पिछले साल के लोकसभा चुनाव में मिले झटके की बहुत हद तक भरपाई करेगा। वहीं इस चुनाव में JDU को भी काफी फायदा मिलता दिख रहा है। साल 2020 के चुनाव में केवल 43 सीटें जीतने वाली नीतीश की पार्टी इस बार 70 से अधिक सीटों पर आगे है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 20 से अधिक सीटों पर आगे है। महागठबंधन का बुरा हाल महागठबंधन का हाल बुरा है। पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी का तमगा हासिल करने के बावजूद प्रमुख विपक्षी पार्टी रही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक दिख रहा है और वह 40 से कम सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। राजद ने इस चुनाव में 140 से भी अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसके अलावा 61 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस दहाई के आंकड़े तक पहुंचने में विफल होती दिख रही है।  

आधी आबादी ने बदला समीकरण—नीतीश कुमार को मिला महिला वोटरों का ज़बरदस्त साथ

  नई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रुझानों में एनडीए बहुमत के आंकड़े से काफी आगे निकल चुका है। तमाम एग्जिट पोल ने साफ इशारा किया था कि एनडीए को महिलाओं, ओबीसी और ईबीसी वर्ग का बंपर समर्थन मिला है। रुझान भी इस बात पर मुहर लगा रहे हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार बिहार में दोनों चरणों में कुल मतदान 66.91 फीसदी रहा था। मतदान के दोनों ही चरणों में पुरुषों के मुकाबले में महिलाओं ने ज्यादा वोटिंग की। आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6 फीसदी रहा था। वहीं पुरुषों का मतदान प्रतिशत 62.8 फीसदी ही रहा। इन आंकड़ों से साफ हो जाता है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने करीब 10 फीसदी ज्यादा मतदान किया। रुझानों में एनडीए को 190, महागठबंधन को 49 और अन्य के खाते में 4 सीटें जाने के संकेत मिल रहे हैं। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं तो एनडीए बिहार में इतिहास रच देगा। जीविका दीदी योजना ने बदल डाला सियासी माहौल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार की सरकार ने राज्य में जीविका दीदी योजना के तहत 1.30 करोड़ महिलाओं को दस-दस हजार रूपये दिए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 सितंबर को नीतीश सरकार की इस योजना की शुरुआत महिलाओं को दस-दस हजार रुपये देकर की थी। तीन अक्तूबर को 25 लाख नई महिलाओं को दस-दस हजार रुपये दिए गए। शराबबंदी के फैसले ने नीतीश को बनाया महिलाओं का 'लाडला' मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया। इसकी वजह से महिलाओं में नीतीश कुमार को काफी लोकप्रियता मिली। 2006 की ये योजना भी बनी भविष्य की गेमचेंजर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2006 में मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत लड़कियों को साइकिल और स्कूल की पोशाक दी जाती है। इस योजना ने बिहार की उन बेटियों को काफी मजबूत किया, जो स्कूल दूर होने की वजह से पढ़ाई छोड़ देती थीं।  

PK का आगे क्या होगा राजनीतिक सफ़र? उनकी हार के 5 बड़े कारण हुए उजागर

पटना बिहार विधानसभा चुनावों में प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज पार्टी (जेएसपी) की उम्मीदें धराशायी हो गईं। शुरुआती रुझानों में न केवल उन्हें कोई सीट नहीं मिली, बल्कि उनके सबसे मजबूत उम्मीदवार भी किसी मुकाबले में दिखाई नहीं दिए। चुनावी मैदान में किशोर न तो एनडीए को चुनौती दे पाए, न ही महागठबंधन को प्रभावित कर पाए -मतलब कि वे उम्मीद के मुताबिक वोटकटवा भी नहीं बन सके। अब सवाल यह उठता है कि जो उन्होंने जोर-शोर से कहा था- अगर जनता दल यूनाइटेड 25 से अधिक सीटें जीत गया तो मैं संन्यास ले लूंगा- क्या किशोर उस वादे पर कायम रहेंगे? बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजों ने प्रशांत किशोर और उनकी नई राजनीतिक मुहिम जनसुराज पार्टी (जेएसपी) के लिए उम्मीदों के बुलंद पंखों को तोड़ दिया है। शुरुआती रुझानों में पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी, जबकि एग्जिट पोल्स ने 0-5 सीटों का अनुमान लगाया था। खास बात यह रही कि पार्टी के सबसे मजबूत उम्मीदवार भी किसी मुकाबले में नजर नहीं आए। जनसुराज पार्टी के जमावड़े और सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ ने शुरुआती तौर पर यह भरोसा दिया था कि किशोर किसी न किसी रूप में बिहार की राजनीति में सेंध लगाने में सक्षम हैं। लेकिन चुनाव परिणाम यह साबित करते हैं कि जमीन पर उनकी पकड़ लगभग शून्य रही। अब सवाल उठता है कि प्रशांत किशोर अपने चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों पर खरे उतरेंगे या नहीं। संन्यास का वादा और विफलता चुनाव प्रचार के दौरान किशोर ने नेशनल टीवी पर दावा किया था कि अगर जनता दल यूनाइटेड 25 से अधिक सीटें जीतता है तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे। यह वादा इतनी आत्मविश्वास के साथ किया गया था कि उन्होंने पत्रकार से कहा कि यह रिकॉर्डिंग रख लें। अब परिणाम सामने हैं और किशोर के वादे के पालन पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। हार के पीछे पांच प्रमुख कारण:- 1 तेजस्वी यादव को चुनौती देने से पीछे हटना जेएसपी की हार का सबसे बड़ा कारण प्रशांत किशोर का तेजस्वी यादव को चुनौती न देना रहा। शुरुआती घोषणा में उन्होंने राघोपुर से मैदान में उतरकर तेजस्वी की ‘परिवारवाद’ और वादों की पोल खोलने की बात कही थी। लेकिन आखिरकार यह मुकाबला नहीं हुआ, जिससे उनका वैकल्पिक नेता बनने का मौका गंवा गया। 2- मोदी और शाह के खिलाफ खुलकर नहीं बोले किशोर ने केंद्रीय नेताओं नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ सीधे तौर पर हमला नहीं किया। विपक्ष के कई नेता चुनावी मुद्दों पर उनके विरोध में जहर उगल रहे थे, लेकिन किशोर इस लहर का हिस्सा नहीं बने। जनता ने यह महसूस किया कि जेएसपी बीजेपी की ‘बी टीम’ जैसी भूमिका निभा रही है। 3 – शराबबंदी के खिलाफ विवादास्पद रुख किशोर ने शराबबंदी समाप्त करने की घोषणा कर महिलाओं और परिवारों की नाराजगी झेली। बिहार में महिलाओं के लिए यह नीति सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता का प्रतीक मानी जाती है। किशोर का यह कदम युवाओं को लुभाने की कोशिश में महिलाओं के विरोध को जन्म देने वाला साबित हुआ। 4- जाति और धर्म के आधार पर टिकट वितरण किशोर ने चुनाव से पहले घोषणा की थी कि उनकी पार्टी जाति और धर्म से ऊपर उठकर राजनीति करेगी। लेकिन टिकट वितरण में वही पैटर्न अपनाया गया, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हुआ। 5- NDA नेताओं के खिलाफ माहौल नहीं बना पाए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बावजूद किशोर ने इसे केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रखा। जनता तक इस मुद्दे का प्रभाव नहीं पहुंच पाया।

बिहार चुनाव परिणाम: BJP को मिला नया रास्ता, नीतीश पर निर्भरता खत्म!

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सारे एग्जिट पोल्स को फेल कर दिया है। कुल 11 एग्जिट पोल आए थे, जिनमें से एक पोल डायरी ने ही एनडीए को 184 से 206 तक सीटें मिलने का अनुमान जताया था। अब आंकड़ा 200 पहुंच गया है तो इस एग्जिट पोल की चर्चा है। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के प्रदर्शन को लेकर है। भाजपा ने कुल 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 91 पर जीत हासिल हो गई है। इस आंकड़े के साथ भाजपा बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा ने 2010 में इतनी ही सीटें पाई थीं, लेकिन तब सबसे बड़ी पार्टी जेडीयू थी। इस बार हालात अलग हैं।   जेडीयू ने भी शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन 79 सीटें लेकर भाजपा से 12 सीट पीछे है। इस तरह भाजपा की स्थिति ऐसी बन रही है कि उसके लिए जेडीयू के बिना भी बिहार की सत्ता में पहुंचने के रास्ते खुल रहे हैं। यह रास्ता चिराग पासवान की लोजपा-आर, जीतनराम मांझी की HAM और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोकमोर्चा को साथ लेकर बनता है। दरअसल बिहार विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है। अब अकेले भाजपा के पास 91 है तो खुद को पीएम मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग पासवान के पास भी 21 सीटें हैं। दोनों मिलकर 112 हो जाते हैं। फिर HAM की 5 और RLM की 4 सीटों को मिलाकर 121 नंबर होते हैं। बसपा का भी एक कैंडिडेट जीतता दिख रहा है। यदि बसपा का समर्थन मिल जाए तो बहुमत ही हासिल हो जाएगा। यही नहीं दूसरे दलों के कुछ विधायकों को सदन से गैर-हाजिर कराकर भी बहुमत के नंबर हासिल किए जा सकते हैं। हालांकि यह सिर्फ एक विकल्प है और भाजपा शायद ही ऐसा करना चाहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि नीतीश कुमार अब भी बिहार में एक फैक्टर हैं। इसके अलावा यदि वह चाहें तो वह भी सरकार बनाने का दम रखते हैं। यही नहीं ऐसी सरकार में वह कंफर्ट में भी होंगे क्योंकि यदि भाजपा को छोड़कर वह निकले तो कम ताकत वाली आरजेडी उनके साथ होगी। नीतीश कुमार के पास क्या हैं रास्ते, क्या कहता है आंकड़ा उनकी सीटों के साथ यदि आरजेडी की 28, कांग्रेस की 5, ओवैसी की 5 और अन्य की 9 सीटों को मिला लिया जाए तो वह भी अलग होकर सरकार बना सकते हैं। इस तरह यह नतीजा बेहद रोचक है और आंकड़ा मजेदार हो गया है। हालांकि फर्क यह है कि नीतीश कुमार को कई ऐसे दलों को साधना होगा, जो अतिवादी हैं और नीतीश की उदार विचारधारा से मेल नहीं खाते, जैसे असदुद्दीन ओवैसी।  

NDA की जीत में चिराग का बड़ा योगदान, बिहार चुनाव में साबित हुए ‘फिनिशर’

पटना  शुक्रवार दोपहर तक जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव के रुझान सामने आते गए, सोशल मीडिया पर चर्चा का माहौल गर्म होता गया. वजह साफ थी, NDA भारी बहुमत की ओर बढ़ रहा था और चिराग पासवान की LJP(RV) ने एक ऐसे फिनिशर की भूमिका निभाई, जिसने सबका ध्यान खींच लिया. ठीक वैसे ही जैसे क्रिकेट में रविंद्र जडेजा आख़िरी ओवरों में ताबड़तोड़ पारी खेलकर मैच को अपने नाम कर लेते हैं, चिराग पासवान ने भी NDA के लिए वैसा ही प्रदर्शन कर दिखाया. 29 सीटों पर चुनाव लड़ी पार्टी LJP(RV) इस चुनाव में 29 सीटों पर लड़ रही थीं, जबकि बीजेपी और जेडीयू 101–101 सीटों पर चुनाव लड़ रहे थे. बड़ी पार्टियों ने ओपनिंग बैट्समैन की तरह मजबूत शुरुआत की, लेकिन फिनिशिंग टच चिराग की पार्टी को देना था और उन्होंने यह काम शानदार तरीके से किया. 2024 में 5 सीटों पर जीत दर्ज की 2024 लोकसभा चुनाव में 5 सीटों पर 5 जीत दर्ज कर चुके चिराग को प्रधानमंत्री मोदी ने 'हनुमान' कहा था, वे 2025 में फिर से सुर्खियों में आ गए हैं. 29 में से 23 सीटों पर बढ़त, यानी लगभग परफेक्ट स्ट्राइक रेट. मगध, सीमांचल और पाटलिपुत्र क्षेत्रों में पार्टी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है, और 5% से ज्यादा वोट शेयर हासिल किया है. NDA के वोट का ट्रांसफर चिराग की पार्टी को मिला सबसे बड़ी बात यह रही कि NDA के वोट का बेहतरीन ट्रांसफर चिराग की पार्टी को मिला. बीजेपी और जेडीयू के समर्थकों ने LJP(RV) के उम्मीदवारों पर भरोसा जताया और चिराग ने भी वोट ट्रांसफर के मामले में गठबंधन को पूरा समर्थन दिया. 2020 के मुकाबले चौंकाने वाला प्रदर्शन यह प्रदर्शन 2020 के मुकाबले चौंकाने वाला है. तब 137 सीटों पर चुनाव लड़कर LJP(RV) सिर्फ एक जीत पाई थी और उसकी ‘एंटी-नीतीश’ मुहिम ने जेडीयू को बड़ा नुकसान पहुंचाया था. लेकिन इस बार NDA के साथ रहते हुए चिराग ने न सिर्फ अपनी पार्टी को मजबूत किया, बल्कि नीतीश कुमार और पूरे NDA की सीटों में भी इजाफा कर दिया. चिराग पासवान ने खुद को 'हनुमान' साबित किया इस तरह चिराग पासवान ने खुद को सचमुच 'हनुमान' साबित कर दिया जो गठबंधन को मजबूती देते हुए जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं. इस जीत के बाद NDA में चिराग का कद और बढ़ेगा, और बिहार की राजनीति में समीकरण भी बदलेंगे. जेडीयू और LJP(RV) के बीच लंबे समय से चली आ रही खटास के बीच यह नतीजे चिराग के लिए राजनीतिक पूंजी का काम करेंगे. अब चिराग के लिए भी 'जडेजा स्टाइल' में जश्न मनाने का वक्त है. बैट उठाने और तलवार घुमाने का अंदाज वाला.