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सुरक्षाबलों की सफलता, घने जंगलों में मुठभेड़ में नक्सली ढेर

 चाईबासा/गुवा  झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले अंतर्गत टोंटो और गोइलकेरा के सीमावर्ती घने जंगलों में बुधवार की सुबह सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है. प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के दौरान कोबरा 209 बटालियन के जवानों ने एक नक्सली को मार गिराया है. मारे गए नक्सली के पास से आधुनिक हथियार और कई संदिग्ध सामग्रियां बरामद हुई हैं. हालांकि, अभी तक मारे गए नक्सली की आधिकारिक पहचान नहीं हो पाई है, जिसे लेकर पुलिस पड़ताल कर रही है. इनामी नक्सली मिसिर बेसरा की सूचना पर शुरू हुआ था अभियान पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली थी कि भाकपा माओवादी का शीर्ष नेता और एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा अपने दस्ते के साथ रुटुगुटू, बोरोई और तूनबेड़ा के पहाड़ी क्षेत्रों में शरण लिए हुए है. इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कोबरा बटालियन, झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त दलों ने इलाके की घेराबंदी शुरू की. पिछले दो दिनों से इस दुर्गम क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा चप्पे-चप्पे पर बारीकी से तलाशी अभियान चलाया जा रहा था. जंगलों में छिपे नक्सलियों ने की अंधाधुंध फायरिंग जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह जब सुरक्षाबल जंगल के भीतर तलाशी अभियान चला रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे माओवादियों ने जवानों को देखते ही उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. जवानों ने भी तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई की. घंटों चली इस मुठभेड़ के बाद नक्सली घने जंगलों और झाड़ियों का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे, लेकिन घटनास्थल की तलाशी के दौरान एक माओवादी का शव बरामद हुआ. सुरक्षाबलों का मानना है कि इस फायरिंग में कुछ अन्य नक्सली भी घायल हुए हैं. पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी, बढ़ाई गई सुरक्षा मुठभेड़ के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है. चाईबासा एसपी ने बताया कि नक्सलियों के खिलाफ यह अभियान थमेगा नहीं और मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी तक जंगलों में घेराबंदी जारी रहेगी. सुरक्षाबलों ने आसपास के ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील की है और घायलों की तलाश में डॉग स्क्वायड की भी मदद ली जा रही है.

Bihar MSP Hike: रबी फसलों के दाम बढ़े, सूरजमुखी की कीमत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी

समस्तीपुर. किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने रबी विपणन मौसम 2026-27 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की है। दरभंगा प्रमंडल के संयुक्त निदेशक ने इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश जारी कर व्यापक प्रचार-प्रसार का आदेश दिया है। गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (Wheat MSP Hike) में 160 रुपये की वृद्धि कर इसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसके साथ ही मसूर, चना, जौ, सरसों एवं सूरजमुखी (कुसुम) के दाम भी बढ़ाए गए हैं, जिससे किसानों को विविध फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। खास बात यह है कि सूरजमुखी के एमएसपी (Sunflower MSP Hike) में सबसे अधिक 600 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस कदम से दलहन व तिलहन उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी। सरकार का प्रयास किसानों को मसूर, चना और तेलहन जैसी फसलों की खेती के लिए भी प्रेरित करने का है। इसके लिए चना, मसूर, जौ, सरसों एवं कुसुम का भी समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है। मसूर और सरसों जैसी फसलें भी किसानों को आकर्षित कर सकती हैं, क्योंकि इनके दाम लागत से काफी ऊपर तय किए गए हैं। सूरजमुखी के एमएसपी में हुई सबसे अधिक बढ़ोतरी दाम बढ़ने से दलहन और तिलहन उत्पादन को बल मिलेगा। इसके साथ ही आयात पर निर्भरता घटेगी। गेहूं और चना जैसी फसलों की खरीद पर सरकार का ज्यादा ध्यान रहता है। ऐसे में किसानों को इनकी पैदावार बेचने में कोई परेशानी नहीं होगी। मसूर और कुसुम में भी उत्पादन बढ़ाने के लिए यह प्रोत्साहन वाला कदम माना जा रहा है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम यानी सूरजमुखी के एमएसपी में हुई है, जिसकी कीमत 600 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 6540 रुपये कर दिया गया है। सूरजमुखी का पुराना एमएसपी 5940 रुपया था। इसमें 10.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरसों के एमएसपी में 250 रुपये की बढ़ोतरी मसूर का एमएसपी (Masoor MSP) 300 रुपये बढ़कर 7000 रुपये हो गया है। सरसों (Mustard MSP) में 250 रुपये, चना (Gram MSP) में 225 रुपये, जौ (Barley MSP) में 170 रुपये और गेहूं में 160 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह वृद्धि 2018-19 के बजट प्रविधानों के अनुरूप है, जिसमें लागत मूल्य का कम से कम डेढ़ गुना दाम सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित – रबी विपणन मौसम 2026-27 की रबी फसलों के लिए भारत सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। कृषि विभाग किसानों के बीच नया एमएसपी का प्रचार प्रसार कर रही है। इसमें गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके अलावा जौ का 2150 रुपये, चना 5875 रुपये, मसूर 7000 रुपये, सरसो 6200 रुपये एवं सूरजमुखी 6540 रुपये प्रति क्विंटल है। – डॉ. सुमित सौरभ, जिला कृषि पदाधिकारी, समस्तीपुर।

हरमू से चिरौंदी तक सफर होगा आसान, करोड़ों की लागत से बनेंगे फ्लाईओवर

रांची  राजधानी रांची में लंबे समय से लोगों को परेशान कर रही ट्रैफिक जाम की समस्या अब काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। सरकार ने दो महत्वपूर्ण फ्लाईओवर परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इसके निर्माण के बाद शहर के प्रमुख मार्गों पर आवागमन तेज, सुगम और समय बचाने वाला हो जाएगा। खासतौर पर हरमू–अरगोड़ा – डिबडीह और करमटोली–साइंस सिटी–चिरौंदी रूट पर लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। हरमू से अरगोड़ा चौक होते हुए डिबडीह ब्रिज तक   हरमू से अरगोड़ा चौक होते हुए डिबडीह ब्रिज तक 3.804 किमी लंबा फ्लाईओवर बनाया जाएगा, जिसकी लागत करीब 469.62 करोड़ रुपये है। यह फ्लाईओवर कटहल मोड़(चापुटोली) और अशोक नगर तक भी जुड़ेगा। करमटोली से साइंस सिटी होते हुए चिरौंदी तक वहीं, करमटोली से साइंस सिटी होते हुए चिरौंदी तक 3.216 किमी लंबा फ्लाईओवर बनेगा, जिस पर लगभग 351.14 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके साथ मोरहाबादी को जोड़ने के लिए लिंक रोड भी तैयार किया जाएगा। छह महीनों से चल रहा था लगातार सर्वे इन परियोजनाओं को लेकर पिछले छह महीनों से लगातार सर्वे किया जा रहा था। इस दौरान ट्रैफिक लोड, सड़क की स्थिति, जमीन अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और भविष्य की जरूरतों जैसे कई पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। इसके बाद डीपीआर तैयार कर मंजूरी के लिए भेजा गया, जिसे स्वीकृति भी मिल गई। यह वीडियो भी देखें तीन फ्लाईओवर के बनने से मिली है बड़ी राहत राजधानी में पहले बने कांटाटोली, सिरमटोली-मेकान और रातू रोड फ्लाईओवर ने ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया है। अब इन नई परियोजनाओं से शहर को और राहत मिलने की उम्मीद है। कांटाटोली और मेकान सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके बनने से कांटाटोली फ्लाईओवर से वाहन चढ़ने के बाद मेकान चौक पर उतरेगी। समय की बचत में बड़ा बदलाव इन फ्लाईओवर के बनने के बाद अरगोड़ा से कडरू-हरमू तक पहुंचना आसान होगा। काव से डिबडीह ब्रिज तक करीब 15 मिनट की बचत होगी, जबकि चिरौंदी से करमटोली की दूरी 30 मिनट के बजाय सिर्फ 5 से 10 मिनट में तय हो सकेगी। जाम से मिलेगी राहत अरगोड़ा रोड, हरमू, कडरू, कटहल मोड़, बरियातू और मोरहाबादी जैसे इलाकों में रोजाना लगने वाले जाम से निजात मिलेगी। ट्रैफिक का दबाव कम होगा और वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारू होगी। स्कूल, कालेज और आफिस जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। आपातकालीन सेवाओं की रफ्तार भी बढ़ेगी और शहर की कुल यातायात व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बन सकेगी।

Delhi Murder Case: सम्राट चौधरी ने पीड़ित परिवार के लिए 8 लाख की सहायता घोषित की

पटना. दिल्ली के द्वारका में पुलिस के एक कांस्टेबल में बिहार के दो युवकों को गोली मार दी थी। इसमें एक युवक की मौत हो गई थी। इस मामले बिहार में सियासत गरमाई हुई है। इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतक के परिवार को 8 लाख के मुआवजे का एलान किया है। मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए कहा, "दिल्ली के द्वारका में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना में खगड़िया निवासी, श्रमिक पांडव कुमार की मौत अत्यंत ही पीड़ादायक है। शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। प्रशासन न्यायपूर्ण कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।" सम्राट चौधरी ने आगे लिखा, "हम इस विकट घड़ी में पीड़ित परिवार की मदद के लिए हर स्तर से प्रयासरत हैं। मृतक के आश्रितों को ₹8 लाख अनुग्रह अनुदान (₹4 लाख श्रम संसाधन विभाग से एवं ₹4 लाख मुख्यमंत्री राहत कोष से) देने का निर्देश दिया है।" मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा को शांति देने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और कहा कि ईश्वर परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य व संबल प्रदान करें। क्या पूरा मामला? जाफरपुर कलां थाना क्षेत्र में शनिवार रात दोस्त के बेटे की जन्मदिन की पार्टी से लौट रहे दो दोस्तों को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात हेड कॉन्स्टेबल ने गोली मार दी थी। मृतक की पहचान पांडव कुमार और घायल की पहचान कृष्ण के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, वारदात के दौरान हेड कॉन्स्टेबल नशे में था। उसने युवकों से भीड़ लगाने का कारण पूछा और गाली गलौज करने लगा, लोगों ने विरोध किया तो गोली चला दी। जिसमें एक की मौत हो गई। वहीं, दूसरा घायल हो गया। पुलिस के मुताबिक पांडव कुमार उत्तम नगर की प्रजापति कॉलोनी में रहते थे और जोमैटो में डिलीवरी ब्वॉय थे। शनिवार वह जाफरपुरकलां में दोस्त रूपेश के दो साल के बेटे की जन्मदिन की पार्टी में गए थे। देर रात करीब दो बजे पार्टी खत्म होने के बाद रुपेश सभी के साथ मेन रावता रोड पर गए।

केंद्र सरकार की नई योजना, दलहन खेती पर ₹4500 प्रति क्विंटल तक प्रोत्साहन

साहिबगंज  केंद्र सरकार दलहन की खेती को बढ़ावा देगी। इसके तहत खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। यह 1800 रुपये प्रति क्विंटल से लेकर 4500 रुपये प्रति क्विंटल तक होगी। केंद्र सरकार ने दाल की आयात पर निर्भरता को देखते हुए दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ किया है। यह अभियान 2030-2031 तक चलेगा। इन छह वर्षो में केंद्र सरकार 11440 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस दौरान किसानों को उच्च उत्पादन के लिए आधार बीज दिए जाएंगे। किसानों को जागरूक व प्रशिक्षण देकर अधिक से अधिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला कृषि विभाग, केवीके, बीज मुहैया कराने वाली कंपनी ने बैठक कर लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अभियान के तहत केंद्र सरकार प्रति हैक्टेयर दलहन के लिए तीन हजार से लेकर 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि देगी। सरकार किसान के बीज पर टैग लगाकर खरीदेगी या किसान चाहें सरकार का टैग मिलने के बाद बाजार में बेच सकते हैं। मॉनिटरिंग टीम जांच करेगी: किसानों को आधार बीज (फाउंडेशन सीड) उपलब्ध कराने के बाद कृषि विभाग की मॉनिटरिंग टीम किसानों के खेत में जाकर जांच करेगी। इस दौरान फसल की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। यदि किसान का बीज मानक के अनुरूप हुआ तो विभाग किसान को मदद करेगी। साथी पोर्टल पर निबंधन कराना होगा। गुणवत्तापूर्ण बीज होने पर सरकार भी उसे खरीद लेगी। खरीदे हुए दलहन का एमएसपी के दरों पर भुगतान भी करेगी साथ ही अलग से प्रोत्साहन राशि भी देगी। किसान चाहे तो खुले बाजार में अपनी फसल को बेच भी सकते हैं। किस दाल में कितना लक्ष्य: जिले में अरहर, केलाई, मूंग, चना, मसूर आदि की खेती होती है। कृषि विभाग ने 2026-2027 में 40 क्विंटल अरहर उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें प्रति क्विंटल किसान को 4500 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए चार हेक्टेयर भूमि की जरूरत पड़ेगी। इसी तरह 20 हेक्टेयर में उड़द या केलाई को लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें प्रति क्विंटल तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 10 हेक्टेयर में मूंग की खेती का लक्ष्य है। इसमें प्रति क्विंटल तीन हजार रुपये दिया जाएगा। 220 क्विंटल चना के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें प्रति क्विंटल 1800 रुपये सरकार प्रोत्साहन राशि देगी। 90 क्विंटल मसूर के उत्पादन का लक्ष्य है। इसमें प्रति क्विंटल तीन हजार रुपये दिया जाएगा। 28 क्विंटल रागी उत्पादन का लक्ष्य है। प्रति क्विंटल तीन हजार रुपये दिया जाएगा   दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ केंद्र सरकार ने किया है। पल्स मिशन कृषि निदेशालय, झारखंड रांची के आदेशानुसार दलहन के क्षेत्र में झारखंड भी आत्मनिर्भर बने इस दिशा में लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को अधिक से अधिक जागरूक कर उत्पादन कराया जाएगा। सरकार दो तरह से किसान की आय बढ़ाने जा रही है। 50 फीसद अनुदान पर आधार बीज मुहैया कराएगी साथ ही किसान का बीज भी खरीदेगी और अलग से प्रोत्साहन राशि भी देगी। किसान भाईयों से अनुरोध है कि कृषि कार्यालय आकर संपर्क करे और दलहन की खेती करें। – प्रमोद एक्का, जिला कृषि पदाधिकारी, साहिबगंज  

टोंटो-गोइलकेरा जंगल में ऑपरेशन तेज, हथियार और संदिग्ध सामग्री बरामद

 चाईबासा  पश्चिम सिंहभूम जिला के टोंटो-गोइलकेरा क्षेत्र के घने जंगलों में चल रहे अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। CoBRA 209 बटालियन के साथ हुई मुठभेड़ में एक माओवादी मारा गया है। फिलहाल उसकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। घटनास्थल से शव के साथ हथियार और अन्य संदिग्ध सामग्री भी बरामद की गई है, जिन्हें जांच के लिए सुरक्षित किया गया है। जानकारी के अनुसार, रूटुगुटू, बोरोई और तूनबेड़ा के आसपास के जंगलों में पिछले दो दिनों से लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा था। यह अभियान विशेष रूप से एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा की तलाश में तेज किया गया था। बुधवार तड़के करीब साढ़े चार बजे सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों का माओवादियों से आमना-सामना हो गया, जिसके बाद दोनों ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। अजय महतो के दल का सदस्य मारा गया सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती मुठभेड़ के बाद भी इलाके में रुक-रुक कर गोलीबारी जारी रही। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने एक माओवादी को मार गिराया। अधिकारियों के अनुसार, मारा गया माओवादी कमांडर अजय महतो के दस्ते का सदस्य बताया जा रहा है, हालांकि उसकी आधिकारिक पहचान की पुष्टि अभी की जा रही है। पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेनू ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि ऑपरेशन अभी जारी है और सुरक्षा बल हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि बरामद हथियार और अन्य सामग्री की गहन जांच की जा रही है, जिससे माओवादी संगठन के नेटवर्क, मूवमेंट और भविष्य की योजनाओं के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। एक माओवादी की हत्या के बाद बढ़ी थी गतिविधि गौरतलब है कि हाल ही में गोइलकेरा थाना क्षेत्र में एक पूर्व माओवादी की हत्या की घटना सामने आई थी। इसके बाद से ही सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिल रहे थे कि माओवादी सारंडा के जंगलों से निकलकर कोल्हान और आसपास के क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही संकेत दिए थे कि माओवादियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। ताजा मुठभेड़ इसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है और जंगल इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

बोकारो डिपो की तकनीकी खराबी से प्रभावित हुई सप्लाई, धीरे-धीरे हालात सामान्य

 रांची राजधानी में मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की अचानक किल्लत से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर के कई पेट्रोल पंपों पर या तो तेल सीमित मात्रा में दिया गया या फिर पूरी तरह स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन गई। हालांकि कुछ पंपों पर स्थिति सामान्य भी रही, लेकिन कई इलाकों में उपभोक्ताओं को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। कोकर स्थित चड्डा पेट्रोल पंप में पेट्रोल और डीजल कटौती कर दिया जा रहा है। पंप प्रबंधन के अनुसार, डिपो से पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलने के कारण सीमित मात्रा में ही तेल उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं डोरंडा के तिवारी बेचर पेट्रोल पंप पर पेट्रोल खत्म होने के कारण ‘पेट्रोल नहीं है’ का बोर्ड लगा दिया गया। खुखरी पेट्रोल पंप में भी दोपहर 12 बजे के बाद पेट्रोल खत्म हो गया, जिससे लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ा। डीजल पर भी लगाई गई सीमा कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल की आपूर्ति भी सीमित कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, कई जगहों पर एक बार में अधिकतम 300 लीटर तक ही डीजल दिया जा रहा है। इससे खासकर ट्रांसपोर्ट और व्यवसाय से जुड़े लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। शहर के साथ-साथ हाईवे पर स्थित कई पेट्रोल पंप भी मंगलवार को ड्राई नजर आए। पेट्रोल नहीं होने के कारण कुछ पंपों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जिससे लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। क्या है वजह, क्या कहते हैं डीलर्स पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन झारखंड के प्रवक्ता प्रमोद कुमार ने बताया कि रविवार को बोकारो स्थित डिपो में तकनीकी खराबी आने के कारण सप्लाई प्रभावित हुई थी। इसी वजह से कुछ पेट्रोल पंपों पर कुछ घंटों के लिए किल्लत देखने को मिली। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कोई बड़ी कमी नहीं है और स्थिति सामान्य हो रही है। डीलर्स का कहना है कि जल्द ही सभी पंपों पर आपूर्ति पूरी तरह बहाल हो जाएगी। हालांकि, इस अस्थायी किल्लत ने एक बार फिर आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Sultanganj Shootout: किताब के अंदर पिस्टल लेकर पहुंचा आरोपी, मुठभेड़ में ढेर

भागलपुर. भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद की राजनीति में पिछले पांच वर्षों के भीतर सत्ता, ठेके और बंदोबस्त पर नियंत्रण को लेकर चल रही वर्चस्व की लड़ाई धीरे-धीरे हिंसा और खूनी संघर्ष का रूप ले चुकी है। यही वजह है कि स्थानीय राजनीति में शह-मात का खेल अब सीधे अपराध और हमलों तक पहुंच गया है। इसी संघर्ष की परतें मंगलवार को हुए चर्चित शूटआउट और उससे जुड़ी पुरानी घटनाओं में साफ दिखाई देती हैं। तीन साल पुरानी रंजिश से शुरू हुई थी कहानी जानकारी के अनुसार, उप सभापति नीलम देवी के पति रामधनी यादव और उनके विरोधी गुट के बीच वर्चस्व की लड़ाई लंबे समय से चल रही थी। इस लड़ाई में रंजीत यादव उर्फ कनबुच्चा और सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू के बीच भी अंदरूनी राजनीतिक समीकरण बनते-बिगड़ते रहे। बताया जाता है कि इसी राजनीतिक खींचतान ने तीन साल पहले बड़े हमले की पृष्ठभूमि तैयार की थी। 2023 का जानलेवा हमला बना टर्निंग प्वाइंट 23 फरवरी 2023 को मुंगेर से आए शूटर प्रशांत मंडल और आनंद ने रामधनी यादव पर जानलेवा हमला किया था। यह हमला उस समय उनके घर के पास स्थित गिट्टी-छर्री बिक्री के प्लाट के पास हुआ था। बताया जाता है कि हमलावरों ने गणित की किताब में छिपाकर पिस्टल लाई थी। इस हमले में रामधनी यादव को गोली लगी थी, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई थी। शूटर की गिरफ्तारी से खुला था राज हमले के तुरंत बाद शूटर प्रशांत मंडल की गिरफ्तारी हुई थी। पूछताछ में उसने कई अहम खुलासे किए थे, जिससे हमले की साजिश की परतें खुलने लगी थीं। कहा जाता है कि इसी दौरान रामधनी यादव गुट ने सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू और कनबुच्चा यादव पर भी संलिप्तता के आरोप लगाए थे। इसके बाद से ही राजनीतिक तनाव और गहरा गया। बढ़ती दुश्मनी और बदलते समीकरण सूत्रों के अनुसार, रामधनी यादव गुट को यह आशंका थी कि उनके खिलाफ साजिश में स्थानीय स्तर पर बड़े राजनीतिक गठजोड़ शामिल हैं। वहीं, दूसरी ओर राजकुमार उर्फ गुड्डू ने नगर परिषद की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी। धीरे-धीरे बंदोबस्त और ठेका व्यवस्था पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष और तेज हो गया। कनबुच्चा यादव पर भी हुआ था हमला पांच नवंबर 2023 को रंजीत यादव उर्फ कनबुच्चा यादव पर भी जानलेवा हमला हुआ था। यह हमला उनके घर में घुसकर किया गया था, जिसमें उन्हें गोली मारकर हत्या का प्रयास किया गया। हालांकि वह किसी तरह बच निकले थे। स्थानीय स्तर पर इस हमले को भी रामधनी यादव से जुड़ी पुरानी रंजिश से जोड़कर देखा गया। नगर परिषद की सत्ता में बढ़ता संघर्ष नगर परिषद सुल्तानगंज में राजकुमार उर्फ गुड्डू के अध्यक्ष बनने के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले। उस समय परिषद की राजनीति में राजकुमार, कनबुच्चा और रामधनी यादव के बीच त्रिकोणीय संघर्ष बन गया था। बंदोबस्त और ठेके के आवंटन को लेकर वर्चस्व की लड़ाई लगातार तेज होती गई, जिसने राजनीतिक विवाद को आपराधिक घटनाओं में बदल दिया। मंगलवार की वारदात का पूरा घटनाक्रम मंगलवार को नगर परिषद कार्यालय में हुई गोलीबारी में कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की मौत हो गई, जबकि सभापति राजकुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जाता है कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ कार्यालय पहुंचे थे और उन्हें पहले से जानकारी थी कि दोनों अधिकारी मौजूद हैं। हमले के दौरान कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारी किसी तरह बचकर बाहर निकल गए। हमले में केवल सभापति थे निशाने पर सूत्रों के अनुसार, हमलावरों का मुख्य निशाना केवल सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू थे। कार्यपालक पदाधिकारी ने जब विरोध करने की कोशिश की तो उन्हें भी गोली लग गई। बताया जाता है कि हमलावरों ने किसी और कर्मचारी को निशाना नहीं बनाया, जिससे यह साफ होता है कि हमला योजनाबद्ध और टारगेटेड था। हमलावरों की रणनीति और भागने का तरीका वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर कार्यालय से पैदल भागे और मुख्य सड़क पर पहले से खड़ी बाइक पर सवार होकर फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें भागते हुए देखा, लेकिन किसी ने रोकने की हिम्मत नहीं की। पुलिस को आशंका है कि हमलावर दियारा इलाके की ओर भागे हैं। 2023 की घटना में भी मिला था अहम सुराग 23 फरवरी 2023 के हमले में जब रामधनी यादव को गोली मारी गई थी, तब हमलावरों में से एक को स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया था। पूछताछ में उसने कई अहम जानकारियां दी थीं, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ था। बाद में मामले की जांच के लिए एसआइटी का गठन भी किया गया था। पुलिस जांच में सामने आ रहे नए एंगल पुलिस अब पूरे मामले को पुराने हमलों और राजनीतिक रंजिश से जोड़कर जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि नगर परिषद की राजनीति में ठेके और बंदोबस्त को लेकर चल रही लड़ाई ने ही इस पूरे घटनाक्रम को जन्म दिया है। फिलहाल पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

जनसेवा और सादगी की मिसाल रामेश्वर पासवान अब नहीं रहे

 सिकंदरा सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति के मजबूत स्तंभ और सात बार विधायक रहे रामेश्वर पासवान का बुधवार सुबह हृदयाघात से निधन हो गया। 92 वर्षीय पासवान ने पटना स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही बिहार की राजनीति में सादगी, सौम्यता और जनसेवा की एक लंबी परंपरा का अंत हो गया। स्वजनों के अनुसार, वे रोज की तरह अपने दैनिक कार्यों के बाद विश्राम कर रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और दिल की धड़कन अनियंत्रित हो गई। परिवार के लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक उनका निधन हो चुका था। उनके बड़े पुत्र जयप्रकाश पासवान ने बताया कि गुरुवार को जमुई जिले के पैतृक गांव नौआडीह में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। जनसेवा और सादगी की मिसाल रामेश्वर पासवान सात बार सिकंदरा से विधायक चुने गए और उन्होंने समाज कल्याण मंत्री व पीडब्ल्यूडी मंत्री जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। उनका पूरा राजनीतिक जीवन आम लोगों, खासकर गरीबों और किसानों के हितों के लिए समर्पित रहा। वे अपनी सादगी, शालीनता और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे, जिसने उन्हें हर वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया। शोक की लहर, नेताओं ने दी श्रद्धांजलि उनके निधन की खबर मिलते ही सिकंदरा, जमुई और पटना सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक दलों, बुद्धिजीवियों और आम लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सर्वदलीय नेताओं ने उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया। स्थानीय लोगों द्वारा शोक सभा आयोजित कर उनके राजनीतिक जीवन और योगदान को याद किया गया। बताया कि रामेश्वर पासवान हमेशा अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए प्रयासरत रहते थे। उनके निधन से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

ESIC Update: ड्यूटी के दौरान मौत पर परिवार को पेंशन और बकाया रकम मिलेगी

पटना. कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने रोजगार दुर्घटना में जान गंवाने वाले एक बीमित कर्मी के आश्रितों को आर्थिक राहत प्रदान करते हुए आश्रित हितलाभ का भुगतान किया है। बिहार क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक सीए. निरंजन कुमार ने सुमन कुमार सिंह की पत्नी आशा देवी तथा उनके दो पुत्रों चंदन कुमार सिंह और सोनू कुमार सिंह को यह लाभ सौंपते हुए संवेदना व्यक्त की। सुमन कुमार सिंह सहरसा के सोनवर्षा में मेसर्स अनुपम कंस्ट्रक्शन के अंतर्गत नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एनबीपीडीसीएल) में मानव बल के पद पर कार्यरत थे। 21 अक्टूबर 2022 को कार्य के दौरान हुई दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। वे परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और पूरा परिवार उन्हीं पर आश्रित था। नियोजक द्वारा दुर्घटना रिपोर्ट भेजे जाने के बाद ईएसआइसी ने मामले की जांच कर आश्रितों के लिए मासिक पेंशन स्वीकृत की। इसके तहत 276 रुपये प्रतिदिन की दर से प्रति माह 8,280 रुपये की पेंशन दी जाएगी। साथ ही, दुर्घटना की तिथि से अब तक का लगभग 3,47,760 रुपये का बकाया भुगतान भी आश्रितों के खाते में हस्तांतरित किया जा रहा है। किसे कहते हैं रोजगार चोट ईएसआइसी अधिकारियों ने बताया कि कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के तहत कार्यस्थल पर या कार्यस्थल और निवास के बीच आवागमन के दौरान हुई दुर्घटना को ‘रोजगार चोट’ माना जाता है। ऐसे मामलों में बीमित कर्मचारी की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को वेतन का 90 प्रतिशत तक मासिक पेंशन देने का प्रावधान है। इस अवसर पर सहायक निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) अभिषेक कुमार भी उपस्थित रहे।