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JSSC भर्ती प्रक्रिया तेज, मई में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र वितरण की तैयारी

रांची झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से अनुशंसित 329 सहायक आचार्यों को मई के पहले सप्ताह में नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में सभी को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का अनुरोध मुख्यमंत्री से किया है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद तिथि की घोषणा कर दी जाएगी। फिलहाल उन 329 अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति पत्र दिया जाएगा, जिनकी अनुशंसा आयोग ने दिसंबर 2025 में की थी। इनकी काउंसिलिंग जिला स्तर पर हो चुकी है, जिसमें इनके सभी प्रमाणपत्र वैध पाए गए हैं। इधर, विभाग को आयोग से लगभग एक हजार अन्य अभ्यर्थियों की भी नियुक्ति की अनुशंसा प्राप्त हुई है। इन अभ्यर्थियों के फोल्डर सोमवार को जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय के प्रतिनिधियों को सौंप दिए जाएंगे। इसके बाद जिला स्तर पर इनकी काउंसिलिंग होगी। काउंसिलिंग को लेकर जिलों को दिशा-निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। काउंसिलिंग में प्रमाणपत्रों की जांच के बाद योग्य अभ्यर्थियों को बाद में आयोजित होनेवाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह में इन्हें भी नियुक्ति पत्र मिल सकता है। अभी तक 10,213 अभ्यर्थियों की हो चुकी है नियुक्ति अभी तक सहायक आचार्य के पदों पर कुल 10,213 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है। आयोग ने कुल 11,300 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा की थी, जिनमें इतने अभ्यर्थियों की नियुक्ति काउंसिलिंग के बाद हुई। ये सभी सहायक आचार्य स्कूलों में पठन-पाठन का कार्य करा रहे हैं। बता दें कि आयोग द्वारा आयोजित झारखंड प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा, 2023 के माध्यम से कुल 26,001 पदों पर नियुक्ति होनी थी, लेकिन योग्य अभ्यर्थी नहीं होने से बड़ी संख्या में पद रिक्त रह गए हैं। अधिसंख्य पद पारा शिक्षक श्रेणी में रिक्त रहे हैं।

धनबाद CSIR विवाद,1 लाख से 16 लाख किराया बिल, हाईकोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन का आदेश

रांची झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (सीएसआइआर), धनबाद के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के सरकारी आवास के किराया बिल में छह माह के भीतर एक लाख रुपये से बढ़कर 16 लाख रुपये हो जाने के मामले सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए CSIR के निदेशक से पूछा कि आखिर इतनी कम अवधि में हाउस रेंट की राशि में इतना बढ़ोतरी कैसे हो गई। खंडपीठ ने CSIR के निदेशक को निर्देश दिया कि सेवानिवृत्त कर्मी गोपाल चंद्र लोहार के 16 लाख रुपये के हाउस रेंट बिल का पुनर्मूल्यांकन कर नए सिरे से गणना की जाए। मामले की अगली सुनवाई एक मई को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में सीएसआइआर के निदेशक, सेक्शन अफसर और प्रशासनिक अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने अगली सुनवाई में निदेशक को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी, लेकिन सेक्शन अफसर और प्रशासनिक अधिकारी को उपस्थित रहने का निर्देश दिया। प्रार्थी गोपाल चंद्र लोहार वर्ष 1989 में सीएसआइआर धनबाद में टेक्नीशियन पद पर नियुक्त हुए थे। वह 31 दिसंबर 2021 को सेवानिवृत्त हुए। आरोप है कि सेवानिवृत्ति के बाद करीब आठ माह तक उन्हें सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान नहीं किया गया। संस्थान की ओर से उन्हें पत्र देकर सूचित किया गया था कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें आवंटित आवास का किराया 9,995 रुपये प्रतिमाह देना होगा। 17 अप्रैल 2023 को संस्थान ने उन्हें आवास किराया का बकाया 1,06,403 रुपये बताया। इसके बाद नवंबर 2023 में उन्होंने आवास खाली कर दिया। बाद में संस्थान ने आवास किराया बकाया राशि बढ़ाकर 16,11,163 रुपये बता दिया। प्रार्थी का आरोप है कि ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट मद में बकाया लगभग 23 लाख रुपये में से 16 लाख रुपये काटने की मंशा से यह राशि बढ़ाई गई। ट्रिब्यूनल के आदेश पर भी सवाल प्रार्थी ने सरकारी क्वार्टर के किराया एवं दंडात्मक शुल्क की गणना को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि ट्रिब्यूनल ने बिना उचित कारण बताए उनकी याचिका खारिज कर दी और आदेश अत्यंत संक्षिप्त दिया। हाई कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में टिप्पणी करते हुए था कि 17 अप्रैल 2023 को 1,06,403 रुपये और 22 अप्रैल 2024 को 16,11,163 रुपये की गणना के बीच भारी अंतर है, जबकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इतनी वृद्धि किस आधार पर हुई। अदालत ने यह भी कहा था कि पहली गणना प्रशासनिक अधिकारी ने की थी, जबकि बाद की गणना उससे निम्न स्तर के सेक्शन अफसर द्वारा की गई। ट्रिब्यूनल ने बिना जवाब मांगे ही मामले का निपटारा कर दिया, जो प्रथम दृष्टया उचित नहीं प्रतीत होता।

असरगंज में जनसभ,सम्राट चौधरी बोले—बिहार में 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

 मुंगेर  तारापुर विधानसभा के असरगंज पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनसभा को संबोधित करते हुए विकास और निवेश को लेकर बड़ा विजन पेश किया। मन की बात कार्यक्रम के बाद आयोजित सभा में उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जिस धरती पर उनका जन्म हुआ, वहीं पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि यह अवसर जनता के प्यार और समर्थन का परिणाम है और अब क्षेत्र के हर अधूरे सपने को पूरा करना उनकी प्राथमिकता होगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार विकास कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ेगी। नीतीश के काम को आगे बढ़ाने की बात मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक नीतीश कुमार ने बिहार को संवारने का काम किया है। अब उसे समृद्धि की ओर ले जाना एक बड़ी चुनौती है, जिस पर सरकार ने काम शुरू कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के लिए वित्त की कोई कमी नहीं है। सभी लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा और नई योजनाओं को भी तेजी से जमीन पर उतारा जाएगा। महिलाओं, युवाओं और शिक्षा पर फोकस सम्राट चौधरी ने कहा कि महिलाओं को उद्योग से जोड़ना, बच्चियों की शिक्षा को मजबूत करना और युवाओं को रोजगार से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने जीविका योजना के तहत महिलाओं को सहायता राशि जल्द उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। साथ ही युवाओं को राज्य में ही रोजगार के अवसर देने की दिशा में तेजी से काम करने की बात कही। प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूत मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीएमओ स्तर से लेकर ब्लाक, अंचल और थाना तक की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। हर माह दो दिन विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों का निपटारा किया जाएगा। एक माह से अधिक आवेदन लंबित रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इको-टूरिज्म से बढ़ेगा पर्यटन असरगंज में ढोल पहाड़ी पर 12.49 करोड़ रुपये की लागत से इको-टूरिज्म परियोजना की आधारशिला रखी गई। मुख्यमंत्री ने इसे प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को फोरलेन सड़क से जोड़कर सुल्तानगंज तक सीधी कनेक्टिविटी दी जाएगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। देवघरा पहाड़ के विकास को मंजूरी मुख्यमंत्री ने देवघरा पहाड़ के विकास के लिए 26 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देंगी और पर्यटन के जरिए आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। 2026 तक 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार ने 2026 तक पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने बताया कि पीरपैंती पावर प्लांट में ही 1.36 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस निवेश से राज्य में उद्योगों का विस्तार होगा और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीन ड्राइव परियोजना के जरिए गंगा के पानी को नियंत्रित किया जाएगा। इससे बाढ़ की समस्या में कमी आएगी और सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी। हनुमाना डैम, खड़गपुर झील और फूलीडूमर तक पानी पहुंचाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, जिससे किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। सोलर ऊर्जा और बिजली पर फोकस उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा के माध्यम से हर घर को एक किलोवाट बिजली उपलब्ध कराने की योजना है। इससे ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और लोगों को सस्ती बिजली मिल सकेगी। जमीन अधिग्रहण पर सख्त रुख मुख्यमंत्री ने जमीन अधिग्रहण को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए जमीन की जरूरत होती है और इसमें किसी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं होगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर, असरगंज की सभा में मुख्यमंत्री ने विकास, निवेश और प्रशासनिक सुधार को लेकर सरकार का स्पष्ट रोडमैप सामने रखा और क्षेत्र के लोगों को तेजी से बदलाव का भरोसा दिलाया।  

भाजपा-जदयू में नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा, पुराने मंत्रियों की हो सकती है वापसी

पटना बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा तेज है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरण का नया स्वरूप दिख सकता है। अगड़ी, पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति तीनों के संदर्भ में यह बात कही जा रही है। वहीं, जदयू अपने कुछ पूर्व मंत्रियों के नाम पर यथास्थिति मोड में हैं। भाजपा कुछ पुराने चेहरे पर दृढ़ तो है ही, लेकिन क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरण को ध्यान में रख कई नए नाम काे मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद है। क्षेत्रीय समीकरण को साधेगी बीजेपी भाजपा में क्षेत्रीय समीकरण के मामले को सामाजिक समीकरण से जोड़ा जा रहा। मगध क्षेत्र से भाजपा ने अति पिछड़ी जाति को महत्वपूर्ण पद पर जगह दिया हुआ है। इसलिए यह कहा जा रहा कि मगध क्षेत्र से किसी सवर्ण जाति के विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है। जिस जिले में भाजपा ने 2025 के विधानसभा चुनाव में बेहतर उपलब्धि हासिल की है, वहां से किसी सवर्ण विधायक को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। इसी तरह तिरहुत प्रमंडल के बारे में भी बात की जा रही। तिरहुत इलाके से पिछली सरकार में अति पिछड़ा वर्ग से एक महिला मंत्री थीं भाजपा कोटे से। इसलिए तिरहुत से भी किसी सवर्ण विधायक को भाजपा कोटे से मंत्री बनाया जा सकता है। दरभंगा इलाके से किसी ब्राह्मण विधायक को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। पूर्व में भाजपा ने दो बार अपने कोटे से ब्राह्मण समाज के विधायक को मंत्री बनाया था। एक महिला विधान पार्षद को भी सम्राट सरकार में जगह मिल सकती है। अभी तक वह मंत्री नहीं रही हैं। जदयू में कुछ नए चेहरे को पहली बार मिलेगा मौका जदयू कोटे से सम्राट सरकार में कौन-कौन मंत्री बनेंगे? इस बारे में यह कहा जा रहा कि कई नामों पर यथास्थिति रहेगी। जिन नामों पर यथास्थिति की बात कही जा रही उनमें वे लोग शामिल हैं, जो नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में कई बार मंत्री रह चुके हैं। इनकी संख्या 8 से 9 के बीच रह सकती है। वहीं, जदयू कोटे से कई युवा विधायक जो पहली बार चुनाव जीतकर आए हैं, उनको इस बार मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की चर्चा है। इस क्रम में वैसे विधायकों का नाम लिया जा रहा, जिन्होंने बड़े संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। लाेजपा (रामविलास), रालोमो व हम में बदलाव की गुंजाइश नहीं मंत्रिमंडल विस्तार के तहत एनडीए के तीन अन्य घटक दल लोजपा (रामविलास) रालोमो व हम की सूची में किसी तरह के बदलाव की गुंजाइश नहीं दिख रही। लोजपा (रामविलास) से पूर्व की सरकार में मंत्री रहे एक विधायक को जगह नहीं मिलने की बात चर्चा में जरूर है, लेकिन लोजपा नेतृत्व इसे अफवाह बता रहा।  

सम्राट चौधरी का अल्टीमेटम, अवैध कब्जों पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू

मुंगेर  बिहार में अब योगी मॉडल की तर्ज पर सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराया जाएगा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम दे दिया है। आज रविवार को तारापुर पहुंचे सीएम सम्राट चौधरी ने साफ लफ्जों में कहा कि बिहार में अब कानून का राज चलेगा। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ 'बुलडोजर' कार्रवाई की जाएगी। तारापुर में मेरे घर पर भी प्रशासन कार्रवाई कर रहा: सम्राट चौधरी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी, चाहे वह किसी का भी घर क्यों न हो। उन्होंने यह भी बताया कि तारापुर में उनके अपने घर पर भी प्रशासन की कार्रवाई हो रही है। कानून सभी के लिए समान है। इससे कोई नहीं बचेगा। तारापुर में सम्राट चौधरी ने सुनी पीएम मोदी के 'मन की बात' सम्राट चौधरी अपने विधानसभा क्षेत्र तारापुर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम को सुना। यहां पर लोगों को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला है, जो उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र की सेवा करने का अवसर मिला है। और वे अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए आए हैं। नीतीश कुमार ने लंबे समय तक बिहार को सजाने और विकास करने का काम किया। अब उसी कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। फाइल लटकाई तो अधिकारी पर होगी कार्रवाई: सम्राट चौधरी उन्होंने अधिकारियों को सख्ती के संकेत देते हुए कहा कि अब मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से ब्लॉक और अंचल स्तर तक मॉनिटरिंग की जाएगी। अगर कोई पदाधिकारी एक महीने से अधिक किसी फाइल को लंबित रखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। फाइल लटकाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं: CM मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है। सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। उन्होंने हर घर तक एक किलोवाट सोलर बिजली पहुंचाने की योजना की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य में लोगों को बिजली के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।  

वैशाली टॉप पर, मधुबनी दूसरे स्थान पर; टॉप-10 जिलों की सूची जारी

पटना बिहार में जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। 17 अप्रैल से शुरू हुई जनगणना की प्रक्रिया में अब तक 24 लाख 35 हजार 105 लोगों ने स्व-गणना किया है। भारतीय जनगणना निदेशालय की ओर से टॉप 10 जिलों की सूची भी जारी कर दी है। इसके अनुसार, वैशाली जिला 4,12,716 स्व-गणना के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि मधुबनी 3,97,059 के साथ दूसरे स्थान पर है। सूची में तीसरे स्थान पर खगड़िया (1,28,813), चौथे पर गोपालगंज (1,26,194), पांचवें पर भोजपुर (1,26,113) और छठे स्थान पर पटना (1,25,944) शामिल हैं। औरंगाबाद में 97383, पश्चिम चंपारण में 79722, दरभंगा में 77223 और रोहतास में लोगों ने 66311 स्व-गणना करवाया। सभी 38 जिलों को मिलाकर कुल 24,35,105 लोगों ने स्व-गणना पूरी की है। नगणना निदेशालय की ओर से कहा गया कि 17 अप्रैल से एक मई तक स्व-गणना का काम चलेगा। बिहारवासी आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से OTP सत्यापन करके खुद अपने परिवार और घर से संबंधित जानकारी दर्ज कर सकते हैं। बिहारवासी घर बैठे ही स्व-गणना कर सकते हैं। स्व-गणना करने की अंतिम तिथि एक मई रात 12 बजे तक है। यह प्रक्रिया आसान और पूरी तरह से सुरक्षित है। परिवार के मुखिया के नाम से पंजीकरण करना होगा जनगणना निदेशालय की डायरेक्टर रंजिता ने कहा कि स्व-गणना के लिए परिवार के मुखिया के नाम और किसी एक सदस्य के मोबाइल नंबर से पंजीकरण करना होगा। स्व-गणना पूरी होने के बाद नागरिकों को एक स्व-गणना आईडी प्राप्त होगी, जिसे सुरक्षित रखना आवश्यक होगा और गणनाकर्मी के घर आने पर उसे दिखाना होगा। यह प्रक्रिया सुरक्षित, सरल और समय की बचत करने वाली है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो लोग मोबाइल से अपनी गणना नहीं कर सकते हैं, वह घबराएं नहीं। दो मई से प्रगणक आपके घर आएंगे, वह गणना का काम कर कसते हैं। साथ ही जो लोग बिहार से बाहर रहते हैं वह भी नहीं घबराएं। आपके जिस राज्य में रह रहे हैं वहां जब जनगणना की प्रकिया शुरू होगी तब आप इसमें शामिल हो सकते हैं। आपकी गणना मान्य वैद्य मानी जाएगी। आपके डाटा को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और डिजिटल माध्यम में एन्क्रिप्टेड सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इस बार पूरी तरह अलग है जनगणना 2027 जनगणना 2027 के लिए कागजी फॉर्म और रजिस्टरों की जगह अब इलेक्ट्रोनिक डिवाइस, जियो-टैगिंग मैपिंग टूल और एक केंद्रीकृत वेब आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। सरकार ने साल 2027 की जनगणना को देश की पहली डिजिटल जनगणना बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। मोबाइल एप के जरिए डेटा इकट्ठा किया जाएगा। ऐप हिंदी, अंग्रेजी और सभी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। इसके अलावा सेंसस मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएमएस) नाम का एक केंद्रीय पोर्टल बनाया गया है, जो पूरी प्रक्रिया की रियल टाइम निगरानी करेगा। हर घर और इलाके का जियो-टैगिंग भी किया जाएगा

ताराचंडी धाम तक पहुंच रही फूलों की खुशबू, सरकारी मदद की उठी मांग

 गढ़वा जहां भीषण गर्मी और 43 डिग्री के टॉर्चर से आम जनजीवन बेहाल है और खेतों में फसलें दम तोड़ रही हैं, वहीं झारखंड के गढ़वा जिले के एक किसान ने अपनी मेहनत से गुल खिला दिए हैं. मझिआंव नगर पंचायत के पृथ्वी चक्र गढ़ौटा गांव के रहने वाले रमाशंकर माली फूलों की खेती के जरिए न केवल अपनी किस्मत बदल रहे हैं, बल्कि आज पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गए हैं. ताराचंडी धाम तक पहुंच रही खुशबू रमाशंकर के खेतों की खुशबू सात समंदर पार तो नहीं, लेकिन पड़ोसी राज्य बिहार के प्रसिद्ध मां ताराचंडी धाम (सासाराम) तक जरूर पहुंच रही है. रमाशंकर ने बताया कि हर दूसरे दिन करीब 400 से 500 गेंदे के फूलों की मालाएं बिहार के सासाराम भेजी जाती हैं. साधन न होने पर रमाशंकर खुद बाइक से सासाराम तक फूल पहुंचाने जाते हैं जिससे कि भक्तों को ताजे फूल मिल सकें. पारंपरिक खेती छोड़ अपनाई नई राह पारंपरिक खेती छोड़ फूलों की राह चुनने वाले रमाशंकर ने बताते हैं  कि यह मुनाफे का सौदा है. एक बीघा खेत में बीज, खाद और सिंचाई मिलाकर करीब 25,000 रुपये खर्च होते हैं. सीजन के अंत तक करीब 2 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है. गर्मी में फूलों को बचाना बड़ी चुनौती रमाशंकर कहते हैं कि 43 डिग्री तापमान में फूलों को बचाना आसान नहीं है. पौधों को हर दो दिन में सींचना पड़ता है जिससे कि वे मुरझाएं नहीं. सरकारी सहायता की कमी रमाशंकर अपने तीन बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च इसी खेती से चला रहे हैं. हालांकि, उन्हें मलाल है कि इतनी मेहनत के बाद भी अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली. इधर क्षेत्र के अन्य किसान और करुआ कला के फूल उत्पादक बृजेश तिवारी भी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि गढ़वा को ‘बागवानी मिशन’ से जोड़ा जाए. किसानों का कहना है कि गढ़वा की भौगोलिक स्थिति (बिहार, यूपी और छत्तीसगढ़ की सीमा) इसे फूलों के व्यापार का बड़ा केंद्र बना सकती है, बस जरूरत है तो सरकार के थोड़े से सहयोग की. रामाशंकर का कहना है कि अगर सरकार आर्थिक या तकनीकी मदद दे, तो हम इस काम को और बड़े स्तर पर ले जा सकते हैं. पारंपरिक खेती के मुकाबले फूलों की खेती ने मुझे पहचान और बेहतर आजीविका दी है. 

भामाशाह जयंती पर नीतीश ने दिया संदेश, ‘काम बोलता है’ पर दिया जोर

पटना मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के 12 दिन बाद जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार अपनी पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचे। यहां पर जदयू के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। नीतीश कुमार के समर्थकों ने जमकर उनके समर्थन में नारेबाजी की। इसी बीच कुछ कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार पर बनाए गए गीतों को बजाया। इन गीतों को सुनकर नीतीश कुमार ताली बजाने लगे और मंच पर बैठे लोगों से ताली बजवाई। नीतीश कुमार के साथ दोनों डिप्टी सीएम विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव भी मौजूद थे। भामाशाह जयंती पर नीतीश कुमार के पांच संदेश बताया जा रहा कि रविवार यानी 26 अप्रैल को भामाशाह जयंती पर जदयू दफ्तर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें ही नीतीश कुमार शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान जदयू कार्यालय में एक पंपलेट भी बांटा गया। इसमें भामाशाह के परिचय के अलावा नीतीश कुमार का संदेश भी लिखा था। इसमें नीतीश कुमार के हवाले से लिखा गया था कि मैं काम करता हूं, मेरा काम ही बोलता है। राजनीति सेवा के लिए है, मेवा के लिए नहीं। न्याय के साथ विकास यानी हर क्षेत्र और हर तबके का विकास। आधे मन से कोई बड़ा काम नहीं होता है। बिहार को मैं उस ऊंचाई पर ले जाना चाहता हूं, जहां से चाहकर कोई भी नीचे नहीं जा सकता है। निशांत कुमार और मंत्रिमंडल विस्तार पर विजय चौधरी ने क्या कहा? इधर, नीतीश कुमार और अन्य नेताओं की भी जदयू समर्थक निशांत कुमार को भी खोज रहे थे। वह निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी देने की मांग कर रहे थे। कुछ कार्यकर्ता तो उन्हें बिहार का अगला मुख्यमंत्री तक बता रहे थे। इसी बीच डिप्टी सीएम विजय चौधरी से कुछ पत्रकारों और निशांत कुमार और मंत्रिमंडल विस्तार पर सवाल पूछ लिया। उन्होंने कहा कि निशांत पार्टी में आ चुके हैं। वह काफी सक्रिय भी हैं। जदयू की पूरी टीम उन्हें पसंद करती है। मंत्रिमंडल विस्तार पर उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है। एनडीए में सबकुछ ठीक है। जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। 

धुर्वा में फेज-2 विकास की तैयारी, आधुनिक आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्र का होगा विस्तार

रांची रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन ने अपना दायरा बढ़ाने की तैयारी की है। राज्य सरकार ने धुर्वा स्थित एचईसी से 500 एकड़ अतिरिक्त जमीन लेने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस अतिरिक्त जमीन में स्मार्ट सिटी फेज 2 के रूप में विकसित किया जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य स्मार्ट सिटी का क्षेत्रफल बढ़ाकर आधुनिक आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र का विस्तार करना है। यह प्रस्तावित जमीन मौजूदा 656 एकड़ के प्रोजेक्ट के अलावा होगी। रांची स्मार्ट सिटी 656 एकड़ में धुर्वा क्षेत्र में विकसित की जा रही है, जो पूरी तरह से आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। अतिरिक्त जमीन मिलने से स्मार्ट सिटी का दायरा बढ़ने के साथ यहां कई अत्याधुनिक सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी। भारी उद्योग मंत्रालय प्रस्ताव पर कर रहा विचार अतिरिक्त जमीन लेने से राज्य सरकार ने एचईसी से बातचीत भी शुरू की है। बीते कुछ माह पहले रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने नई दिल्ली में केंद्र सरकार से इसे लेकर चर्चा की थी। अब भारी उद्योग मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। जानकारी के अनुसार अब एचईसी जमीन चिन्हित कर रहा है। इसके तहत एचईसी को बड़ी राशि मिलने की संभावना है, जो लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहे निगम के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। इसके अलावा मिलने वाली राशि से कर्मचारियों के बकाया भुगतान और मशीनों के आधुनिकीकरण का रास्ता खुलेगा। एचईसी के पास बड़ी मात्रा में अप्रयुक्त जमीन है, जहां अतिक्रमण की समस्या भी बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि इस जमीन का स्मार्ट सिटी में उपयोग कर इसे व्यवस्थित विकास में बदला जा सकता है। शहर के विकास का नया मॉडल होगा तैयार प्रस्तावित अतिरिक्त 500 एकड़ जमीन में एक ही स्थान पर आवासीय, व्यावसायिक या संस्थागत उपयोगों वाली गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी है। इससे छोटे कैफे, बुटीक, कंसल्टेंसी फर्म व रिटेल आउटलेट्स के लिए नए मौके खुलेंगे। स्मार्ट सिटी के विस्तार से धुर्वा, हटिया व जगन्नाथपुर क्षेत्र में संरचनात्मक ढांचे में भी सुधार होगा। चौड़ी सड़कें, 24 घंटे बिजली व हाईटेक ड्रेनेज सिस्टम से आसपास के क्षेत्रों को भी फायदा मिलेगा। अतिरिक्त जमीन में स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन द्वारा विकास का नया मॉडल भी तैयार करने का प्रस्ताव है। यानी छोटे-छोटे प्लॉट तैयार होंगे, जिससे रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। वर्तमान में जिस 656 एकड़ जमीन में स्मार्ट सिटी विकसित हो रही है, उसकी सबसे बड़ी बाधा जमीन का दाखिल-खारिज थी। वर्षों पहले एचईसी को मिली जमीन का म्यूटेशन नहीं कराया गया था, जिससे वर्ष 2016 में प्रोजेक्ट शुरू होने के बावजूद प्लॉट आवंटन और निर्माण कार्य ठप पड़ा था। पिछले माह ही नामकुम अंचल में इस तकनीकी खामी को दूर करते हुए 656 एकड़ में से करीब 450 एकड़ जमीन का म्यूटेशन पूरा कर लिया है। शेष जमीन पर भी प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

नीतीश से मुलाकात के बाद सीएम सम्राट ने ललन और बिजेंद्र से की बातचीत, कैबिनेट विस्तार की संभावना पर चर्चा

 पटना बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पास करने बाद  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पूर्व सीएम और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने मु्लाकात की। एक अणे मार्ग पर स्थित सीएम आवास पहुंचे। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय मंत्री और जदयू सांसद ललन सिंह भी मौजूद रहे। ये मुलाकात करीब 20 मिनट से ज्यादा चली। हालांकि क्या बात हुई। इसकी जानकारी सामने नहीं है। इस भेंट को शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है। हालांकि कैबिनेट विस्तार को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। सम्राट से पहले बिजेंद्र यादव से मिले नीतीश इससे पहले आज सुबह से डिप्टी सीएम बिजेंद्र यादव से मिलने उनके आवास नीतीश कुमार पहुंचे थे। इन मुलाकातों को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई। और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। आपको बता दें शुक्रवार को सम्राट चौधरी ने विधानसभा में बहुमत साबित किया है। फ्लोर टेस्ट से पहले हुई चर्चा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार को कोई नहीं हटा सकता, न तो कुर्सी से न दिल से। उनके बताए रास्ते पर चलते हुए हम बिहार को विकसित राज्य बनाएंगे। नीतीश कुमार यात्रा के दौरान ही हम लोगों की तरफ दिखलाकर कहते थे कि अब बिहार यही लोग देखेंगे। हम हैरान होते। बाद में उन्होंने हमें कहा भी कि हम दिल्ली में रहकर बिहार का हक दिलवाएंगे। बिहार की 20 सालों से नीतीश सेवा कर रहे- सम्राट सीएम ने कहा कि नीतीश कुमार 20 वर्षों से बिहार की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने सुशासन स्थापित किया, किसान, मजदूर, गरीबों को मुख्य धारा में लाया। उनके कारण सरकारी नौकरियों की बहार आई। ऐतिहासिक शराबबंदी हुई। महिला सशक्तीकरण के लिए अद्भुत काम किये। सीएम ने कहा कि भाजपा ने मुझे नेता, विपक्ष का नेता, प्रदेश अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री और फिर मुख्यमंत्री बनाया। लालू प्रसाद की पाठशाला से नहीं, उनके अत्याचारों से सीएम बना। ऐसे में वे गलतफहमी में न रहें। यह कुर्सी किसी की बपौती नहीं है।  पुनौराधाम मंदिर जाएंगे सम्राट चौधरी सीएम सम्राट चौधरी आज सीतामढ़ी स्थित पुनौराधाम मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। पूजा करने के बाद मुख्यमंत्री जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य से आशीर्वाद भी लिया । आपको बता दें 8 अगस्त 2025 को बिहार चुनाव से पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पुनौराधाम मंदिर की पहली ईंट रखी थी। भूमिपूजन के लिए 21 तीर्थों की मिट्टी और 11 नदियों का जल मंगवाया गया था। अयोध्या के हनुमानगढ़ी से ईंट भी लाई गई थी। कार्यक्रम के दौरान PM मोदी की अयोध्या में पूजा की तस्वीरें भी दिखाई गई थीं।करीब 50 एकड़ में 882 करोड़ रुपए की लागत से मां जानकी के भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा। मंदिर की ऊंचाई 156 फीट होगी, जो अयोध्या के राम मंदिर से लगभग 5 फीट कम है।