samacharsecretary.com

मध्यप्रदेश के शिक्षकों को राहत या झटका? अंग्रेजी अनिवार्यता मामले में हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय

ग्वालियर  एमपी में मिडिल स्कूल टीचर्स बनने के लिए अंग्रेजी जरूरी हो गई है। इस संबंध में हाईकोर्ट का अहम फैसला आया है। कोर्ट ने कहा है कि स्नातक में अंग्रेजी विषय अनिवार्य है तभी मिडिल स्कूल शिक्षक बन सकेंगे। मप्र उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। खंडपीठ ने शिक्षक भर्ती को लेकर यह अहम फैसला सुनाया है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अभ्यर्थी के पास स्नातक स्तर पर संबंधित विषय की डिग्री नहीं है, तो केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता के आधार पर उसे मिडिल स्कूल शिक्षक पद पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती। इसी के साथ हाईकोर्ट में दायर याचिका भी खारिज कर दी। हाईकोर्ट का यह मामला माध्यमिक शिक्षक परीक्षा- 2018 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता पवन कुमार मिश्रा ने शिक्षक भर्ती के प्रावधानों को चुनौती दी थी। उन्होंने उच्च योग्यता के आधार पर नियुक्ति पर विचार करने की मांग की थी पर सरकार ने कोर्ट में इसे नियमों के विपरीत बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने लोक शिक्षण आयुक्त को नियमों के विपरीत कोई निर्देश देने से स्पष्ट तौर पर इंकार कर दिया। याचिकाकर्ता पवन कुमार मिश्रा माध्यमिक शिक्षक परीक्षा- 2018 की भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे। उन्होंने अंग्रेजी विषय के शिक्षक पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन चयन प्रक्रिया के दौरान विभाग ने नियुक्ति इस आधार पर निरस्त कर दी कि उनके पास स्नातक स्तर पर अंग्रेजी विषय नहीं था। पवन कुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि वे अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर हैं। उनकी उच्च योग्यता को पात्रता मानते हुए नियुक्ति पर विचार किया जाए। इधर सरकार ने इसे भर्ती नियमों के विपरीत बताया। ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के तर्क पर सहमति जताई। इसी के साथ कोर्ट ने 'खेल के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते' सिद्धांत को दोहराते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट- नियमों के विपरीत नहीं दे सकते निर्देश डबल बेंच ने कहा कि भर्ती नियम वैधानिक और बाध्यकारी होते हैं। यदि बाद में नियमों में ढील दी जाती है तो उन हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने विज्ञापन की शर्तों के कारण आवेदन ही नहीं किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा कोई नियम प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसमें पोस्ट ग्रेजुएशन को ग्रेजुएशन के समकक्ष माना गया हो। इसलिए लोक शिक्षण आयुक्त को नियमों के विपरीत कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता।

निजी विद्यालयों में नि:शुल्क प्रवेश के लिए द्वितीय चरण की ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया संपन्न

भोपाल  शिक्षा का अधिकार अधिनियम अंतर्गत द्वितीय चरण की ऑनलाइन लॉटरी की प्रकिया बुधवार को संपन्न हो गई। इसमें 11 हजार 485 बच्‍चों को उनकी पसंद के निजी विद्यालयों में नि:शुल्‍क प्रवेश मिला। इस लॉटरी प्रक्रिया में उन बच्‍चों को शामिल किया गया था, जिन्‍हें प्रथम चरण की लॉटरी में उनकी पसंद के स्‍कूल आवंटित नहीं हो सके थे। ऐसे बच्‍चों को निजी विद्यालयों की रिक्‍त सीटों के अनुरूप द्वितीय चरण की लॉटरी के लिए अपनी वरीयता अंकित करते हुए आवेदन करने का एक और अवसर प्रदान किया गया था। द्वितीय चरण की लॉटरी में बच्‍चों को उनकी चुनी गई वरीयता के आधार पर निजी विद्यालयों में सीट का आवंटन  20 मई को ऑनलाइन लॉटरी की स्वचालित कंप्यूटर प्रक्रिया द्वारा किया गया। संचालक राज्‍य शिक्षा केंद्र  हरजिंदर सिंह द्वारा द्वितीय चरण की ऑनलाइन लॉटरी का बटन क्लिक किया गया। नर्सरी कक्षा में 7 हजार 599, केजी 1 में 2 हजार 747 और कक्षा 1 में 1 हजार 139 बच्‍चों का दाखिला हुआ। इस अवसर पर संचालक राज्‍य शिक्षा केंद्र  हरजिंदर सिंह ने लॉटरी में चयनित बच्चों को उनकी पसंद का स्कूल आवंटित होने पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्‍होंने पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था निर्मित करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग और मध्‍यप्रदेश स्‍टेट इलेक्‍ट्रानिक्‍स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन टीम की प्रशंसा भी की। इस वर्ष आरटीई के तहत लॉटरी के लिए दस्तावेज सत्यापन के उपरांत 1 लाख 80 हजार 875 बच्चे पात्र चयनित हुए थे, जिनमें से 1 लाख 6 हजार से अधिक बच्‍चों को शाला आवंटन प्राप्‍त हुआ था। इसके उपरांत 97 हजार 052 बच्‍चों के द्वारा चयनित स्‍कूलों में प्रवेश लिया जा चुका है। आज आयोजित हुई द्वितीय चरण की लॉटरी में 11 हजार 485 और बच्‍चों को उनकी पसंद के निजी विद्यालयों में प्रवेश आवंटन प्राप्‍त हुआ है। इस प्रकार इस वर्ष सत्र 2026-27 में आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में नि:शुल्‍क प्रवेश आवंटन प्राप्‍त करने वाले विद्यार्थियों की संख्‍या 1 लाख 17 हजार 400 से अधिक हो गई है। पोर्टल पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं आवंटन पत्र द्वितीय चरण की लॉटरी में जिन बच्‍चों को निजी विद्यालयों में नि:शुल्‍क प्रवेश प्राप्‍त हुआ है, उनके अभिभावक आरटीई पोर्टल www.rteportal.mp.gov.in पर जाकर आवंटन पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।ऑनलाइन लॉटरी में जिनके स्कूलों का आवंटन हुआ है, उन्हें उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस माध्‍यम से भी सूचना दी जा रही है। बच्चे उन्‍हें आवंटित स्कूलों में 20 मई से 10 जून, 2026 तक जाकर प्रवेश ले सकेंगे। इन बच्चों की फीस सरकार द्वारा नियमानुसार सीधे स्कूल के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर की जाएगी। इस अवसर पर राज्‍य शिक्षा केंद्र की आरटीई नियंत्रक किरण कुशवाह, प्रशासक डॉ. राकेश दुबे और तकनीकी सहयोगी विभाग मध्‍यप्रदेश स्‍टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि  नितीन तुरकर,  राम यादव सहित अन्‍य अधिकारी उपस्थित थे। 

मध्यप्रदेश उभर रहा है मध्य भारत के इनोवेशन एवं स्टार्ट-अप हब के रूप में

भोपाल  मध्यप्रदेश शासन के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने इंदौर में आयोजित ब्रिक्स यूथ इन्ट्रेप्रेन्योरशिप वर्किंग ग्रुप मीटिंग-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि आज ब्रिक्स राष्ट्र विकासशील देशों की आकांक्षाओं, ऊर्जा, नवाचार क्षमता एवं आर्थिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत सरकार की युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री मती रक्षा खडसे, युवा कार्यक्रम विभाग की सचिव मती पल्लवी जैन गोविल, अतिरिक्त सचिव  नितेश कुमार मिश्रा, ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि, स्टार्टअप लीडर्स, नीति निर्माता, शिक्षाविद् एवं युवा उद्यमी उपस्थित रहे। प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए  सारंग ने कहा कि भारत सदैव शांति, साझेदारी, मानवीय मूल्यों एवं वैश्विक सहयोग में विश्वास रखने वाला देश रहा है। उन्होंने “वसुधैव कुटुम्बकम् – विश्व एक परिवार है” की भारतीय अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत विश्व को सद्भाव, समावेशी विकास एवं सामूहिक कल्याण की दिशा प्रदान करती रही है। मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत नवाचार, उद्यमिता, युवा सशक्तिकरण, जलवायु उत्तरदायित्व एवं ग्लोबल साऊथ के विकास के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में भारत सहित चार देशों से प्रारंभ हुआ ब्रिक्स समूह आज 11 सदस्य देशों तक विस्तारित हो चुका है, जो विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है तथा वैश्विक जीडीपी में लगभग 35–40 प्रतिशत योगदान देता है। मंत्री  सारंग ने कहा कि ब्रिक्स केवल एक आर्थिक गठबंधन नहीं, बल्कि व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं सतत विकास के भविष्य को दिशा देने वाला परिवर्तनकारी वैश्विक मंच है। मंत्री  सारंग ने कहा कि विश्व अब “सूचना युग” में प्रवेश कर चुका है, जहाँ डेटा, तकनीक एवं ज्ञान नवाचार और उद्यमिता की सबसे बड़ी शक्ति बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब मानव मस्तिष्क को जानकारी, तकनीक एवं ज्ञान से सशक्त किया जाता है, तब वही विचार स्टार्टअप, उद्यमिता और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की शक्ति बनते हैं। मंत्री  सारंग ने 20 मई के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी दिन वर्ष 1498 में पुर्तगाली खोजकर्ता वास्को-डी-गामा समुद्री मार्ग से भारत पहुँचे थे, जिसने वैश्विक व्यापार एवं अंतरराष्ट्रीय संपर्क का नया अध्याय प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि सदियों बाद आज विश्व पुनः भारत में एकत्रित हुआ है, लेकिन इस बार उद्देश्य व्यापार मार्गों की खोज नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता, तकनीक एवं वैश्विक सहयोग के नए मार्ग निर्मित करना है। मंत्री  सारंग ने 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस एवं अंतर्राष्ट्रीय मानव संसाधन दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार मधुमक्खियाँ टीमवर्क, समन्वय एवं सतत पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक हैं, उसी प्रकार मानव संसाधन किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी एवं कुशल मानव संसाधन क्षमता है, जो नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकती है। मध्यप्रदेश के विषय में बोलते हुए  सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश नवाचार, निवेश, औद्योगिक विकास एवं स्टार्टअप ग्रोथ का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने राज्य की उत्कृष्ट कनेक्टिविटी, औद्योगिक कॉरिडोर, निवेश-अनुकूल वातावरण एवं आईटी, एग्रीटेक, रिन्यूएबल एनर्जी तथा इनोवेशन क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंदौर, जो भारत का सबसे स्वच्छ शहर एवं मध्य भारत का इनोवेशन हब है, आधुनिक भारत की स्वच्छता, उद्यमिता, संस्कृति एवं आतिथ्य भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंत्री  सारंग ने प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं प्रसिद्ध व्यंजनों, विशेष रूप से इंदौरी पोहा एवं जलेबी का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया। पवित्र धार्मिक ग्रंथ मद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए  सारंग ने कहा कि भारत की 18वीं ब्रिक्स समिट की अध्यक्षता का विशेष सांकेतिक महत्व है, क्योंकि मद्भगवद्गीता के भी 18 अध्याय हैं, जो मानवता को कर्तव्य, निष्काम कर्म एवं विश्व कल्याण का संदेश देते हैं। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास सदैव मानव-केंद्रित, समावेशी एवं समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के प्रति समर्पित होना चाहिए। मंत्री  सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि ब्रिक्स यूथ एन्ट्रेप्रेन्योरशिप वर्किंग ग्रुप मीटिंग-2026 ब्रिक्स देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को सुदृढ़ करेगी तथा भारत एवं मध्यप्रदेश को नवाचार, निवेश, उद्यमिता एवं युवा-नेतृत्व वाले विकास के महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्रों के रूप में स्थापित करेगी। अंत में उन्होंने सभी प्रतिनिधियों का अभिनंदन करते हुए आशा व्यक्त की कि भारत एवं मध्यप्रदेश की उनकी यात्रा नवाचार, संस्कृति, सहयोग एवं मित्रता का अविस्मरणीय अनुभव बनेगी।  

पुलिस आयुक्त श्री संजय कुमार ने ली दीक्षांत परेड की सलामी

भोपाल  स्वाभिमान से ऊँचा मस्तक, अनुशासित कदम, अदम्य साहस से भरा सीना और देशभक्ति के जज्बेा के साथ जब आर्कषक दीक्षांत परेड आगे बढ़ी तो सभी रोमांचित हो गए। मौका था पुलिस प्रशिक्षण शाला भौंरी भोपाल में चतुर्थ नव आरक्षकों के भव्य दीक्षांत समारोह का। पुलिस आयुक्त नगरीय पुलिस भोपाल  संजय कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि दीक्षांत परेड की सलामी ली और खुली जिप्सी में सवार होकर परेड का निरीक्षण किया। दीक्षांत परेड समारोह के बाद 521 आरक्षक विधिवत रूप से मध्यप्रदेश पुलिस की मुख्य धारा में शामिल हो गए। जिनमें 322 महिला नव आरक्षक एवं 199 पुरूष आरक्षक शामिल हैं। समारोह को संबोधित करते हुए पुलिस आयुक्त  संजय कुमार ने कहा कि “Passing Out Parade अर्थात दीक्षांत परेड पुलिस विभाग में भर्ती प्रत्येक पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण होता है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात एक पुलिसकर्मी पूर्ण रूप से तैयार होकर फील्ड में जाता है, जहां उसे समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होता है।” उन्होंने कहा कि पुलिस ऐसा विभाग है, जिससे जनसामान्य की अपेक्षाएं अत्यधिक होती हैं। कमजोर एवं पीड़ित व्यक्ति के लिए विषम परिस्थितियों में पुलिस ही उम्मीद की किरण बनती है। आपराधिक न्याय प्रणाली में पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रथम सोपान पुलिस है। किसी दुर्घटना या अनहोनी के समय वर्दीधारी पुलिस जवान घायल एवं पीड़ित व्यक्तियों को साहस और भरोसा प्रदान करता है।  संजय कुमार ने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे पुलिस विभाग का प्रतिनिधित्व करती है। एक पुलिसकर्मी के आचरण एवं कार्यशैली से ही विभाग की छवि निर्मित होती है। अतः सभी नव आरक्षकों को ईमानदारी, संवेदनशीलता, अनुशासन एवं जनसेवा की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। उप निदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान नव आरक्षकों को आधुनिक पुलिसिंग की अवधारणा एवं व्यवहारिक दक्षताओं के अनुरूप तैयार किया गया, जिससे वे भविष्य में कुशल एवं जनसेवा के प्रति समर्पित पुलिसकर्मी के रूप में अपनी भूमिका निभा सकें। उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं को शपथ दिलाई। पुलिस प्रशिक्षण शाला भौंरी में चतुर्थ नव आरक्षक बैच का प्रशिक्षण 30 जून 2025 से प्रारंभ हुआ था, जो दीक्षांत परेड के साथ पूर्ण हुआ। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रशिक्षुओं को पुलिस कार्य प्रणाली, कानून व्यवस्था, साइबर अपराध, सामुदायिक पुलिसिंग एवं व्यवहारिक पुलिस कार्यों से संबंधित थाना प्रबंधन जैसे विषयों का व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त बाह्य प्रशिक्षण के अंतर्गत शारीरिक दक्षता, आर्म्स प्रशिक्षण, यूएसी, योगा तथा हार्टफुलनेस का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे प्रशिक्षुओं में अनुशासन, मानसिक संतुलन एवं सेवा भावना का विकास हो सके। अंत में मुख्य अतिथि एवं उप निदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवालने प्रशिक्षण में उत्कृष्ट रहे प्रशिक्षु नवआरक्षकोंको शील्ड व प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में इनकी भी रही मौजूदगी पुलिस महानिरीक्षक मती रूचिवर्धन मिश्र, उप पुलिस महानिरीक्षक (पीएसओटू डीजीपी) डॉ. विनीत कपूर, उप पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण  मनीष कुमार अग्रवाल, कमाण्डेंट सशस्त्र सीमा बल  देवानन्द, सहायक निदेशक प्रशिक्षण मती रश्मि पाण्डेय, एसपी पीटीएस मती यास्मीन ज़हरा, सहायक निदेशक बाह्य प्रशिक्षण मती ज्योति उमठ एवं संस्थान के स्टाफ सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गरिमामयी दीक्षांत समारोह के साक्षी बने। साथ ही प्रशिक्षु नव आरक्षकों के परिजन भी उत्साहवर्धन के लिए पहुंचे थे। इन्हें मिले पुरस्कार मुख्य अतिथि ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षणार्थी का पुरस्कार नव आरक्षक रामनिवास मिश्रा को प्रदान किया। इसके अलावा बाह्य प्रशिक्षण में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु का पुरस्कार नव आरक्षक  मनीष राठौर तथा आंतरिक प्रशिक्षण में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु का पुरस्कार महिला नव आरक्षक सु माधुरी को प्रदान किया गया।  

सिंहस्थ:2028 के लिए एआई आधारित ट्रैफिक और आपात सेवा प्रणाली पर हुई चर्चा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बुधवार को मंत्रालय में गूगल क्लाउड इंडिया के पदाधिकारियों ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पदाधिकारियों के साथ प्रदेश में प्रशासनिक दक्षता संवर्धन, एआई आधारित सुशासन और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में एआई आधारित तकनीकी सहयोग के संबंध में राउंड टेबल मीटिंग की। मीटिंग में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  एम. सेल्वेन्द्रन, गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर)  आशीष वत्तल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक  मदन ओबरॉय,  पंकज शुक्ला,  लोकेश लोहिया, डॉ. श्रुति गाडगिल,  विजय गुंजाटे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव  मंडलोई ने बताया कि राज्य सरकार और गूगल क्लाउड इंडिया के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोग स्थापित किया जा रहा है। इसमें इंदौर में “सेंटर फॉर एक्सीलेंस” स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए शीघ्र ही एमओयू होगा। यह सेंटर एआई आधारित नवाचार, अनुसंधान, स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी समाधान विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा। सेंटर से 10 हजार से अधिक एआई डेवलपर्स को जोड़ा जाएगा, जो मध्यप्रदेश सहित देश और साउथ ग्लोबल की आवश्यकताओं के अनुरूप रियल टाइम तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएंगे। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के पश्चात हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया ने “समृद्ध मध्यप्रदेश” की अवधारणा के अनुरूप एआई आधारित विकास और सुशासन के लिए एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। बैठक में सिंहस्थ-2028 को स्मार्ट और तकनीक-सक्षम आयोजन के रूप में विकसित करने पर विशेष चर्चा हुई। गूगल द्वारा प्रस्तुत एआई फ्रेमवर्क में रियल टाइम भीड़ प्रबंधन, प्रेडिक्टिव ट्रैफिक एवं सुरक्षा विश्लेषण, एआई आधारित इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम और डिजिटल ट्विन मॉडल जैसी अत्याधुनिक व्यवस्थाएं शामिल हैं। बैठक में “सहायक” नामक बहुभाषीय एवं वॉइस-सक्षम एआई एप्लिकेशन की अवधारणा भी प्रस्तुत की गई, जो सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को भीड़ की स्थिति, मार्गदर्शन, ट्रैफिक व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की रियल टाइम जानकारी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराएगा। इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और आयोजन प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार होगा। गूगल क्लाउड इंडिया के पदाधिकारियों ने बताया कि एआई समिट के दौरान मध्यप्रदेश शासन से मिले अभूतपूर्व समर्थन और सहयोग से गूगल क्लाउड द्वारा राज्य की प्राथमिकताओं अनुसार कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, महिला एवं बाल विकास और अन्य विभागों में एआई आधारित समाधान विकसित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में “ओजस एआई” फ्रेमवर्क के माध्यम से दूरस्थ क्लीनिकल निर्णय सहायता, उच्च जोखिम गर्भावस्था की पूर्व पहचान और रियल टाइम स्वास्थ्य डैशबोर्ड विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया।कृषि क्षेत्र में किसानों को स्थानीय सलाह, बाजार मूल्य जानकारी एवं वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के लिए जेमिनी संचालित ओपन एआई नेटवर्क विकसित करने की योजना प्रस्तुत की गई। शिक्षा क्षेत्र में एआई आधारित वर्चुअल ट्यूटर, व्यक्तिगत शिक्षण प्रणाली और शिक्षक सहायता उपकरण विकसित कर 5 लाख से अधिक विद्यार्थियों और एक लाख शिक्षकों को बहुभाषीय एवं अनुकूलित शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तुत की गई। वहीं पुलिसिंग और जन-सुरक्षा के क्षेत्र में प्रेडिक्टिव लॉ एनफोर्समेंट, बिहेवियरल एनालिटिक्स और डिजिटल फॉरेंसिक्स आधारित एआई समाधान प्रस्तुत किए गए, जिससे जाँच और प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके। बैठक में शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए संवादात्मक नागरिक सेवा प्लेटफॉर्म, स्वचालित शिकायत निवारण प्रणाली, इंटेलिजेंट डॉक्यूमेंट प्रोसेसिंग, एकीकृत नागरिक डेटा प्रणाली जैसे एआई सक्षम समाधानों पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त वन्य जीव संरक्षण और मानव-वन्य जीव संघर्ष कम करने के लिए कंप्यूटर विजन एवं रियल टाइम अलर्ट सिस्टम आधारित समाधान प्रस्तुत किए गए। गूगल ने प्रदेश में “एआई फॉर ऑल” स्किलिंग कार्यक्रम, उन्नत क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर एवं एआई/एमएल आधारित पायलट परियोजनाओं, स्टार्ट-अप इको सिस्टम संवर्धन और साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। बैठक में आगामी कार्य योजना, विभागवार प्राथमिकताओं, विस्तृत क्रियान्वयन रणनीति और नियमित समीक्षा तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी। राज्य सरकार और गूगल ने इस साझेदारी को रणनीतिक विचार विमर्श से आगे बढ़ाकर जमीनी स्तर पर लागू करने और राज्यभर में नागरिक केंद्रित परिणाम सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। गूगल के साथ यह साझेदारी प्रदेश में एआई आधारित सुशासन, सेवा वितरण और समावेशी विकास को नई दिशा देगी।  

जंबूरी मैदान, भोपाल में हुआ ग्राम रोजगार सहायकों का राज्य स्तरीय महासम्मेलन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्राम रोजगार सहायक ग्रामीण विकास और ग्राम को आत्मनिर्भर बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी भूमिका हनुमान की तरह होती है। राज्य सरकार ग्राम रोजगार सहायकों के हित संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में हुए ग्राम रोजगार सहायकों के राज्य स्तरीय महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रोजगार सहायक प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकास की मुख्य धुरी है। प्रधानमंत्री  मोदी के डिजिटल भारत के स्वप्न को साकार करने ग्राम रोजगार सहायकों की महत्वपूर्ण भूमिका हैं। ग्राम रोजगार सहायक इस महत्वपूर्ण कार्य के सारथी हैं। सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में आगे हैं ग्राम सहायक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। उन्होंने ग्राम स्वराज का सपना देखा था। हमारे प्रधानमंत्री  मोदी ने डीबीटी व्यवस्था को लागू कर इसे लोकप्रिय बनाया है। हितग्राहियों तक योजनाओं की राशि पहुंचाने का कार्य इस पद्धति से हो रहा है। जिसका श्रेय रोजगार सहायकों और पंचायत सचिवों को जाता है। शासन और जनता के लिए कार्य करते हुए यही वर्ग अपनी बुद्धि, पराक्रम, पुरूषार्थ और कुशलता से समाज को आदर्श रूप में दिखाई देता है। अनेक असंभव कार्य भी वे कर दिखाते हैं। इस नाते जमीनी स्तर पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। समाज के निर्धन और जरूरतमंद व्यक्ति जो समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े हैं, उन्हें लाभान्वित करने में अपनी भूमिका निभाते है। महिला, किसान, युवा और गरीब कल्याण में ग्राम सहायकों की महत्वपूर्ण है भूमिका मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी महिला, किसान, युवा और गरीबों के हित को प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रहे हैं। ग्राम सहायकों की भूमिका भी इन वर्गों के विकास में पुरुषार्थ के रूप में समाज को आदर्श रूप में दिखाई देती है। ग्राम सहायक और पंचायत सचिव युक्ति और बुद्धि का उपयोग कर शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे- वीबी जी-राम-जी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन) के क्रियान्वयन और जनता की विभिन्न समस्याओं का समाधान का रास्ता निकालते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर गेहूं उपार्जन कार्य में भी ग्राम सहायकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए घोषणा की कि प्रदेश में जिन किसानों के उपार्जन के लिए स्लॉट 23 मई तक बुक थे। उन किसानों के लिये आवश्यकतानुसार उपार्जन कार्य 28 मई तक बढ़ाने का प्रबंध किया जायेगा। जल गंगा संवर्धन के अच्छे परिणाम लाने में जुटे हैं ग्राम सहायक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण और संवर्धन के कार्यो में अग्रणी है। प्रदेश को ग्राम सहायकों के परिश्रम से इस कार्य में प्रथम स्थान आने का यश मिला है। कुओं, बावड़ियों, तालाबों और नदियों को उपयोगी बनाने, आम जनता को पानी बचाने और जल स्त्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे ग्राम सहायक निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। ग्राम सहायकों की चिंता करेगी राज्य सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्राम सचिवों के मानदेय बढ़ाने और उन्हें अन्य सुविधायें प्रदान करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार पूरी चिंता करते हुए आवश्यक कदम उठाएगी। पूर्व में भी पारिश्रमिक दोगुना करने का निर्णय लिया जा चुका है। ग्राम सहायकों के हित में जनप्रतिनिधियों के साथ और संगठन के पदाधिकारियों के परामर्श से बैठक में विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिया जायेगा। दुर्घटना का शिकार हुए रोजगार सहायकों के परिवारों को आर्थिक सहायता की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस महासम्मेलन के लिए भोपाल आ रहे दो ग्राम सहायक  मीणा और  लखन के दुर्घटना में असामयिक देवलोक गमन का समाचार पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए, दोनों के परिजन को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की राशि प्रदान करने की घोषणा की। इसके साथ ही गंभीर घायल को 1 लाख रुपये और अन्य सामान्य घायलों को समुचित उपचार के लिए 50-50 हजार रुपये की राशि देने की घोषणा की। सम्मेलन में मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष  रमेशचंद्र शर्मा, भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री  कुलदीप गुर्जर के अलावा  रवि भट्ट,  राकेश पंडया और अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।  

कैबिनेट स्वीकृति :स्थानान्तरण नीति वर्ष-2026 का अनुमोदन: 1 जून से 15 जून तक हो सकेंगे तबादले

प्रदेश के विकास और जन-कल्याण को गति देने के लिए 30,055 करोड़ रूपये की कैबिनेट स्वीकृति स्थानान्तरण नीति वर्ष-2026 का अनुमोदन: 1 जून से 15 जून तक हो सकेंगे तबादले किसानों के हक में बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 11,608.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के लिए 156 करोड़ रूपये की स्वीकृति लोक सेवा गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए 360 करोड़ रूपये की स्वीकृति श्रमिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं के लिए 1779.07 करोड़ रूपये की स्वीकृति अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के लिए 373 करोड़ 38 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के विकास और जन-कल्याण को गति देने के लिए कुल 30,055 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां दी गई। मंत्रि-परिषद ने राज्य के कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति -2026 को भी मंजूरी दी है। राज्य के विभिन्न वर्गों के हित में कई बड़े निर्णय लिए गए। इसमें वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रुपये के साथ ही विभिन्न आपदाओं में किसानों को संबल देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के निरंतर क्रियान्वयन के लिए 11,608.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके साथ ही श्रमिक कल्याण की योजनाओं के लिए 1,779.07 करोड़ रुपये, सिवनी और देवास की समूह जल प्रदाय योजनाओं के लिए 593 करोड़ 24 लाख रुपये, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के संचालन के लिए 373 करोड़ 38 लाख रुपये, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए 360 करोड़ रुपये तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित शौर्य दल और चाइल्ड हेल्पलाइन योजनाओं के लिए 156 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। स्थानान्तरण नीति वर्ष 2026 का अनुमोदन मंत्रि-परिषद ने "राज्य एवं जिला स्तर पर अधिकारियों/कर्मचारियों की स्थानान्तरण नीति वर्ष 2026" का अनुमोदन किया है। स्वीकृति अनुसार इस वर्ष 01 जून 2026 से 15 जून 2026 तक की अवधि के लिये स्थानांतरण से प्रतिबंध शिथिल किया जायेगा। नीति में लिपिकीय त्रुटि सुधार, स्पष्टीकरण अथवा अन्य संशोधन करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को अधिकृत किया गया है। पद एवं संवर्ग संख्या के आधार पर अधिकतम स्थानांतरण की संख्या का निर्धारण स्थानांतरण नीति में स्पष्ट किया गया है। पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ किये जाने तथा स्वयं की गंभीर बीमारियों के प्रकरण में स्थानांतरण को विभागों के निर्धारित प्रतिशत या संख्या के अतिरिक्त रखा गया है। जिला एवं राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिले के भीतर स्थानांतरण प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से किया जायेगा। सभी विभागों के विभागाध्यक्ष तथा शासकीय उपक्रमों एवं संस्थाओं में पदस्थ प्रथम श्रेणी के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों का स्थानांतरण समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद किया जायेगा। किसानों के हक में बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 11,608.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने किसानों को फसल हानि या क्षति होने पर वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आगामी 05 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31) तक निरंतर क्रियान्वयन के लिए 11 हजार 608.47 करोड़ रूपये की वित्तीय स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार पात्र कृषकों को प्रति कृषक प्रत्येक मौसम में न्यूनतम दावा राशि 1,000 रूपये का भुगतान करने के लिए दावा राशि और राशि 1000 के अंतर की राशि का भुगतान राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक नियम/दिशा-निर्देश जारी करने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग को अधिकृत किया गया है। वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग अंतर्गत वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15 हजार 184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एन.एस.ए.पी.) योजना अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के 1 अप्रैल 2026 से आगामी 05 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 2,123 करोड़ 42 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई। योजना अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली 40 वर्ष से अधिक आयु की कल्याणी महिलाओं को पात्रतानुसार प्रतिमाह 600 रूपये पेंशन राशि का भुगतान किया जाता है। राज्य शासन की समग्र सामाजिक सुरक्षा योजना अन्तर्गत समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना को 1 अप्रैल 2026 से आगामी 05 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 13,061 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। योजना अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के निराश्रित वृद्ध, 18 वर्ष से अधिक आयु की कल्याणी (विधवा) महिलाएं एवं 06 वर्ष से अधिक आयु के दिव्यांग जिनकी निशक्तता 40 प्रतिशत या उससे अधिक है एवं 50 वर्ष या अधिक आयु की अविवाहिता को योजना के अंतर्गत पात्रतानुसार 600 रूपये प्रतिमाह पेंशन राशि का भुगतान किया जाता है। सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए कुल 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार सिवनी की बंडोल समूह जल प्रदाय योजना की मूल स्वीकृत लागत राशि 232 करोड़ 57 लाख रूपये के स्थान पर पुनरीक्षित योजना लागत राशि 266 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना की मूल स्वीकृत लागत राशि 237 करोड़ रूपये के स्थान पर 327 करोड़ 07 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। बंडोल समूह जल प्रदाय योजना के क्रियान्वयन में 04 ग्रामों एवं 30 बसाहटों को तथा नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के क्रियान्वयन में 21 ग्रामों और 11 छूटी हुई बसाहटों को अतिरिक्त रूप से सम्मिलित करने के साथ ही जल जीवन मिशन की गाइडलाइन अनुसार ग्रामीण परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन से जोड़ने करने के लिए जल … Read more

कौशल प्रशिक्षण से बेटियों को मिल रही नई उड़ान, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ा आत्मविश्वास

कौशल प्रशिक्षण से बढ़ रहा बेटियों का आत्मविश्वास, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे कदम भोपाल  प्रदेश की बेटियां अब आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की योजनाएं उन्हें कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के बेहतर अवसर दे रही हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अब तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ रही हैं। कौशल प्रशिक्षण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। प्रदेश में 934 आईटीआई हैं। इनमें 290 शासकीय और 644 निजी आईटीआई शामिल हैं। इन संस्थानों में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सत्र 2025 में शासकीय आईटीआई में 94.55 प्रतिशत प्रवेश हुआ। यह अब तक का सर्वाधिक प्रवेश प्रतिशत है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए शासकीय आईटीआई में 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। इसका अच्छा परिणाम दिखाई दे रहा है। प्रदेश की आईटीआई में वर्तमान में 71 आधुनिक ट्रेड्स में 15 हजार से अधिक महिला प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। “कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (कोपा)”, “स्टेनोग्राफर हिन्दी” और “इलेक्ट्रिशियन” जैसे ट्रेडों में बड़ी संख्या में बेटियाँ प्रशिक्षण ले रही हैं। यह बदलते माहौल और बेटियों के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। अब बेटियां नए क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने भविष्य को मजबूत बना रही हैं। महिलाओं को सुरक्षित और बेहतर वातावरण देने के लिए प्रदेश में 7 शासकीय महिला आईटीआई संचालित की जा रही हैं। वहीं 56 शासकीय आईटीआई में महिला छात्रावास सुविधा उपलब्ध है। इनमें 3400 से अधिक सीटें हैं। इससे दूर-दराज क्षेत्रों की बेटियों को भी प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का फोकस केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। विभाग महिलाओं को रोजगार से जोड़ने पर भी लगातार काम कर रहा है। विशेष महिला प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 777 महिला प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार मिला है। इंदौर स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट द्वारा 509 महिलाओं को निःशुल्क वाहन संचालन प्रशिक्षण दिया गया। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता का भाव और मजबूत हुआ है। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और निर्धन वर्ग की 13 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को छात्रवृत्ति मिल रही है। इससे बड़ी संख्या में बेटियों को प्रशिक्षण जारी रखने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना भी बेटियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना के अंतर्गत हजारों बेटियों को उद्योगों में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग का अवसर मिला है। प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके अभ्यर्थियों में 5660 बेटियाँ शामिल हैं। सागर की सुस्नेहा रजक और रायसेन की सुलिया जैसी युवतियां प्रशिक्षण के बाद रोजगार प्राप्त कर चुकी हैं। अब वे अपने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर रही हैं। महिलाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से भी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। “जीवन तरंग” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिवर्ष लगभग 3000 बेटियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं "यूएन वीमेन" के सहयोग से बेटियों को "स्टेम और सॉफ्ट स्किल्स" का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे बेटियाँ एडवांस तकनीक और नए कार्यक्षेत्रों से जुड़ रही हैं। परम फाउंडेशन के माध्यम से संचालित आईटीआई कौशल कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में बेटियाँ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। धार जिले के सरदारपुर आईटीआई में संचालित कार्यक्रमों में प्रशिक्षणार्थियों का शत-प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ है। इससे बेटियों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हुए हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत भी 64 हजार से अधिक बेटियों को कौशल प्रशिक्षण का लाभ मिला है। प्रदेश की बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। शासकीय महिला आईटीआई बैतूल की प्रशिक्षणार्थी सुत्रिशा तावड़े ने राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद परीक्षा में सेंट्रल ज़ोन में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित कौशल दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सम्मानित किया गया। ऑल इंडिया ट्रेड टॉपर्स में मध्यप्रदेश के 10 प्रतिभागियों में 5 बेटियाँ शामिल रहीं। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 में भोपाल की शासकीय संभागीय आईटीआई की प्रशिक्षण अधिकारी श्रीमती प्रेमलता रहांगडाले को राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु द्वारा सम्मानित किया गया। वहीं इंडिया स्किल प्रतियोगिता-2024 में प्रदेश की बेटियों ने सिल्वर, ब्रॉन्ज और मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किए। यह उपलब्धियां प्रदेश की बेटियों की क्षमता और मेहनत को दर्शाती हैं। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के प्रयासों से प्रदेश की बेटियां अब आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं। कौशल प्रशिक्षण उनके लिए रोजगार, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार बन रहा है।  

ई-रिक्शा से कैबिनेट बैठक में पहुंचे मंत्री टेटवाल और पंवार, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

ई-रिक्शा से कैबिनेट बैठक के लिए मंत्रालय पहुंचे मंत्री द्वय श्री टेटवाल और  पंवार भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से किए गए ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के आह्वान को आत्मसात करते हुए, बुधवार को कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पंवार कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए ई-रिक्शा से मंत्रालय पहुंचे। "सुरक्षित पर्यावरण का यही आधार-ईंधन बचत हर बार" का संदेश देते राज्यमंत्री श्री टेटवाल कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संसाधनों के संयमित उपयोग का जो आह्वान किया है, उसे आत्मसात कर हम सभी को अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करना चाहिए। ऊर्जा बचत को जन आंदोलन बनाने की अपील मंत्री श्री टेटवाल और श्री मंत्री पंवार ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और ऊर्जा बचत को एक जनआंदोलन बनाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में एक आत्मनिर्भर, स्वच्छ एवं सशक्त भारत के निर्माण की मजबूत नींव तैयार करेंगे।  

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही आम आदमी पर डबल मार, एक्सपर्ट बोले- अब और बढ़ेगी महंगाई

भोपाल  पांच दिन के अंदर पेट्रोल-डीजल की कीमतें 4 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गईं। इसके बाद ट्रांसपोर्टर्स ने मध्य प्रदेश में माल भाड़ा बढ़ाने के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में माल भाड़ा 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते पहले ही दूध, खाना और LPG महंगे हो चुके हैं। अब भाड़े में बढ़ोतरी से आम आदमी का बजट गड़बड़ाना तय है। भोपाल के बड़े ट्रांसपोर्ट कारोबारी कमल पंजवानी ने बताया कि सरकार की नीतियों के चलते ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले ही ऑक्सीजन पर है। अब डीजल के रेट तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे कारोबार प्रभावित हो सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि भोपाल से इंदौर के बीच का भाड़ा 10 हजार रुपए है तो यह बढ़कर 11 हजार रुपए हो सकता है। एमपी में 8 से 10 लाख ट्रक चलते हैं, जो ऑल इंडिया परमिट वाले होते हैं, यानी ये पूरे देश में कहीं भी माल लाने-ले जाने का काम करते हैं। माल भाड़ा बढ़ा तो महंगा होगा सामान ट्रक व लोडिंग वाहनों से पूरे प्रदेश में किराना, सोयाबीन, कपास, गेहूं, सीमेंट, चूना पत्थर, दवाएं, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोलर पैनल, खाद आदि की सप्लाई की जाती है। माल भाड़ा बढ़ने से इन सामानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट कारोबारी कमल पंजवानी ने बताया कि भाड़ा बढ़ने का असर आखिरकार जनता पर ही होगा। खाना महंगा, होटल और रेस्टॉरेंट में 10 से 15% तक बढ़ोतरी भोपाल होटल एवं रेस्टॉरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली बताते हैं कि होटल इंडस्ट्री पहले ही LPG संकट से जूझ रही है। 2 महीने के अंदर कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ गए। अब यह करीब 3 हजार रुपए में मिल रहा है। LPG संकट के बाद भोपाल में भोजन 10 से 15 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। दूध के रेट 2 रुपए प्रति लीटर तक बढ़े हैं। इस वजह से पनीर और दही भी महंगे हो गए, जिसका असर सीधे खाने के मेन्यू पर पड़ा है। किचन से जुड़ा सामान महंगा हो चुका किराना कारोबारी विवेक साहू कहते हैं कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद बाजार में रोजमर्रा की जरूरत के सामान की कीमतें बढ़ी हैं। इससे जनता के बजट पर असर पड़ा है। माल भाड़ा बढ़ता है तो तय है कि कीमतें और भी बढ़ जाएंगी। टैक्सी संगठन की बैठक अगले सप्ताह ऑल इंडिया टैक्सी यूनियन कल्याण समिति संपूर्ण भारत के राष्ट्रीय सचिव नफीस उद्दीन ने बताया कि संगठन और टैक्सी चालकों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। अगले एक सप्ताह में बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें 10 से 20 प्रतिशत तक किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बैठक के बाद ही तय होगा कि किराया कितना बढ़ाया जाए। पंपों की स्टॉक लीमिट तय पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक, एचपीसीएल में 300 लीटर, बीपीसीएल व इंडियन ऑयल में एक बार में 200 लीटर से ज्यादा डीजल भरते ही मशीन लॉक हो जाएगी। बता दें ​कि बस और ट्रक का डीजल टैंक 150 से 600 लीटर के बीच होता है। तेल कंपनियां ऐसी कैपिंग से इनकार किया है। एचपीसीएल के सीजीएम अश्विन के सिन्हा व इंडियन ऑयल के सीजीएम नवनीत मेहता ने ने कहा कि ऐसी कोई कैपिंग नहीं की है।