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आईपीएस अधिकारियों के थोकबंद तबादले, कई जिलों में एसपी की बदली जिम्मेदारी

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में थोकबंद तबादले करते हुए 23 जिलों के पुलिस अधीक्षकों को बदल दिया गया है. इसके अलावा पुलिस मुख्यालय में भी सीनियर पुलिस अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. प्रदेश के भिंड, शिवपुरी, रीवा, सागर, धार, मुरैना, छतरपुर, खंडवा, झाबुआ, नीमच सहित 21 जिलों के एसपी को बदला गया है. इसके अलावा भोपाल देहात और इंदौर देहात के पुलिस अधीक्षकों को भी बदला गया है. उधर पुलिस ट्रेनिंग में नए-नए प्रयोगों के लिए चर्चा में रहने वाले एडीजी राजाबाबू सिंह को एडीजी रेल बनाया गया है. इसके अलावा कई रेंज के आईजी को भी बदल दिया गया है. इन जिलों के पुलिस अधीक्षक बदले प्रदेश के 21 जिलों में नए पुलिस अधीक्षक बनाए गए हैं. इसमें भिंड, शिवपुरी, रीवा, सागर, धार, मुरैना, छतरपुर, खंडवा, झाबुआ, नीमच, पांढुर्णा, आगर मालवा, अनूपपुर, मऊगंज, डिंडौरी, मंडला, दतिया, सीहोर, सिंगरौली, दमोह, सिवनी जिले शामिल हैं. इसके अलावा भोपाल और इंदौर देहात के दो और पुलिस अधीक्षकों को भी बदला गया है. इस तरह कुल 23 एसपी को बदला गया है. यह पुलिस अधीक्षक बदले गए मनोज कुमार राय– पुलिस अधीक्षक (जिला-खण्डवा) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. राहुल कुमार लोढ़ा – पुलिस अधीक्षक (रेल, भोपाल) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. सिमाला प्रसाद – पुलिस अधीक्षक (रेल, जबलपुर) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. असित यादव – पुलिस अधीक्षक (जिला-भिण्ड) को उप पुलिस महानिदेशक (ग्वालियर रेंज, ग्वालियर) बनाया गया. विवेक सिंह – पुलिस उपायुक्त (जोन-2, भोपाल) को उप पुलिस महानिदेशक (शहडोल रेंज, शहडोल) बनाया गया. शैलेन्द्र सिंह चौहान – पुलिस अधीक्षक (जिला-रीवा) को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था, भोपाल) बनाया गया.   कुमार प्रतीक – पुलिस उपायुक्त (जोन-2, इन्दौर) को उप पुलिस महानिदेशक (नारकोटिक्स, इन्दौर) बनाया गया.   शिव दयाल – पुलिस अधीक्षक (जिला-झाबुआ) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. मयंक अवस्थी – पुलिस अधीक्षक (जिला-धार) को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था, इन्दौर) बनाया गया. अरविन्द तिवारी – सहायक पुलिस महानिदेशक (भोपाल) को सेनानी (34वीं वाहिनी, विसबल, धार) बनाया गया. सूरज कुमार वर्मा – पुलिस अधीक्षक (जिला-दतिया) को पुलिस अधीक्षक (जिला-भिण्ड) बनाया गया. यांगचेन डोलकर भुटिया – पुलिस अधीक्षक (देहात, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-शिवपुरी) बनाया गया. गुरूकरण सिंह – सेनानी (24वीं वाहिनी, विसबल, रतलाम) को पुलिस अधीक्षक (जिला-रीवा) बनाया गया. दीपक कुमार शुक्ला – पुलिस अधीक्षक (जिला-सीहोर) को सेनानी (32वीं वाहिनी, विसबल, उज्जैन) बनाया गया. अमन सिंह राठौड़ – पुलिस अधीक्षक (जिला-शिवपुरी) को पुलिस उपायुक्त (जोन-2, इन्दौर) बनाया गया. अनुराग सुजानिया – सहायक पुलिस महानिदेशक (भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सागर) बनाया गया. सचिन शर्मा – संयुक्त आवासीय आयुक्त (नई दिल्ली) को पुलिस अधीक्षक (जिला-धार) बनाया गया. वाहनी सिंह – पुलिस अधीक्षक (जिला-डिंडौरी) को पुलिस अधीक्षक (पीटीसी, इन्दौर) बनाया गया. विकास कुमार सहवाल – पुलिस अधीक्षक (जिला-सागर) को पुलिस उपायुक्त (जोन-2, भोपाल) बनाया गया. धर्मराज मीना – सेनानी (32वीं वाहिनी, विसबल, उज्जैन) को पुलिस अधीक्षक (जिला-मुरैना) बनाया गया. समीर सौरभ – पुलिस अधीक्षक (जिला-मुरैना) को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (रेडियो, भोपाल) बनाया गया. रजत सकलेचा – पुलिस अधीक्षक (जिला-मण्डला) को पुलिस अधीक्षक (जिला-छतरपुर) बनाया गया. अगम जैन – पुलिस अधीक्षक (जिला-छतरपुर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-खण्डवा) बनाया गया. मनीष खत्री – पुलिस अधीक्षक (जिला-सिंगरौली) को सहायक पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. सुनील कुमार मेहता – पुलिस अधीक्षक (जिला-सिवनी) को पुलिस उपायुक्त (जोन-4, इन्दौर) बनाया गया. देवेन्द्र कुमार पाटीदार – पुलिस अधीक्षक (जिला-बुरहानपुर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-झाबुआ) बनाया गया. रामशरण प्रजापति – पुलिस अधीक्षक (देहात, भोपाल) को सहायक पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. सुन्दर सिंह कनेश – पुलिस अधीक्षक (जिला-पांढुर्ना) को पुलिस अधीक्षक (रेल, जबलपुर) बनाया गया. राजेश व्यास – पुलिस उपायुक्त (आसूचना एवं सुरक्षा, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-नीमच) बनाया गया. विनोद कुमार सिंह – पुलिस अधीक्षक (जिला-आगर मालवा) को सेनानी (24वीं वाहिनी, विसबल, रतलाम) बनाया गया. पंकज कुमार पाण्डे – सहायक पुलिस महानिदेशक (भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (देहात, भोपाल) बनाया गया. प्रकाश चन्द्र परिहार – पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-पांढुर्ना) बनाया गया. दिलीप कुमार सोनी – पुलिस अधीक्षक (जिला-मऊगंज) को पुलिस अधीक्षक (जिला-आगर मालवा) बनाया गया. राजेन्द्र कुमार वर्मा – पुलिस अधीक्षक (पीटीसी, इंदौर) को पुलिस अधीक्षक (देहात, इन्दौर) बनाया गया. विक्रांत मुराब – सहायक पुलिस महानिदेशक (अ.वि., पुलिस मुख्यालय, भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-अनूपपुर) बनाया गया. सुरेन्द्र कुमार जैन – पुलिस अधीक्षक (पीटीएस, रीवा) को पुलिस अधीक्षक (जिला-मऊगंज) बनाया गया. आशीष खरे – जोनल पुलिस अधीक्षक (विशेष शाखा, जबलपुर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-डिंडौरी) बनाया गया. अंकित जायसवाल – पुलिस अधीक्षक (जिला-नीमच) को पुलिस अधीक्षक (रेल, भोपाल) बनाया गया. राजेश रघुवंशी – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (जिला-खण्डवा) को पुलिस अधीक्षक (जिला-मण्डला) बनाया गया. मोती उर्र रहमान – पुलिस अधीक्षक (जिला-अनूपपुर) को सेनानी (9वीं वाहिनी, विसबल, रीवा) बनाया गया. श्रुतकीर्ति सोमवंशी – पुलिस अधीक्षक (जिला-दमोह) को सेनानी (13वीं वाहिनी, विसबल, ग्वालियर) बनाया गया. मयूर खण्डेलवाल – पुलिस उपायुक्त (जोन-4, भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-दतिया) बनाया गया. सोनाक्षी सक्सेना – पुलिस उपायुक्त (आसूचना व सुरक्षा, भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सीहोर) बनाया गया. शियाज, के.एम. – सेनानी (हॉकफोर्स, बालाघाट) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सिंगरौली) बनाया गया. आनंद कलादगी – पुलिस उपायुक्त (जोन-4, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-दमोह) बनाया गया. कृष्ण लालचंदानी – पुलिस उपायुक्त (जोन-1, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सिवनी) बनाया गया. आयुष गुप्ता – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (जिला-जबलपुर) को पुलिस उपायुक्त (जोन-3, भोपाल) बनाया गया. आदर्शकांत शुक्ला – प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एन्टी नक्सल आपरेशन, बालाघाट) को पुलिस उपायुक्त (जोन-4, भोपाल) बनाया गया. नरेन्द्र रावत – माननीय राज्यपाल के परिसहाय को पुलिस उपायुक्त (जोन-1, इन्दौर) बनाया गया. अभिषेक रंजन – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (जिला-उज्जैन) को पुलिस उपायुक्त (जोन-3, इन्दौर) बनाया गया. राहुल देशमुख – सीएसपी (कोतवाली, उज्जैन) को माननीय राज्यपाल का परिसहाय बनाया गया. सीनियर पुलिस अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी रवि कुमार गुप्ता – विशेष पुलिस महानिदेशक (रेल, भोपाल) को विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण एवं निदेशक, पुलिस अकादमी, भौरी भोपाल) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. राजाबाबू सिंह – अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण, पुलिस मुख्यालय, भोपाल) को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेल, भोपाल) बनाया गया. डी.पी. गुप्ता – अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (शिकायत एवं मानव अधिकार, भोपाल) को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सामुदायिक पुलिसिंग, आरटीआई, लोक सेवा गारंटी आदि) बनाया गया. सोलोमन यश कुमार मिंज – अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) को … Read more

हर दो दिन में मौसम का मिजाज बदलेगा, आंधी और बारिश से आम की फसलें होंगी प्रभावित, पैदावार में गिरावट

शहडोल   मध्य प्रदेश में पिछले दो तीन दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है. प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी के बाद तेज आंधी व बूंदाबांदी से मौसम तेजी से बदला है. शहडोल में भी पिछले दो दिनों से मौसम इसी तरह बदल रहा है, जिसने आम की फसलों पर बड़ा संकट पैदा कर दिया है।  शहडोल में दो दिन से आंधी बारिश शहडोल जिले के किसान भोलू गुप्ता बताते हैं, '' पिछले दो दिन से तेज गर्मी से राहत मिली हुई है, जिस तरह से सूर्य देव का पारा चढ़ा हुआ था, उससे हालत खराब थी लेकिन पिछले दो दिन से मौसम ऐसा बदला है, कि शाम को ठंडक महसूस हो रही है. आंधी और बारिश से मौसम ठंडा हो गया है पर कई फसलों पर इसका असर पड़ सकता है।  बदलते मौसम से आम को बड़ा नुकसान मौसम के इस बदलते मिजाज से किस तरह का नुकसान हो सकता है? इसे लेकर कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, '' जो आंधी तूफान आया है इससे जो पेड़ वर्गीय फसल है जैसे आम, केला आदि तो इनके गिरने से तो निश्चित ही नुकसान होता है लेकिन अन्य कई वजहों से भी फल प्रभावित होते हैं. तूफान में आम की कमजोर डगालें व फूल टूटने से आने वाले आमों की संख्या कम हो जाती है, इससे सबसे ज्यागदा नुकसान होता है।  सब्जी व अन्य फसलों का क्या होगा? कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, '' इसके अलावा सब्जी वर्गीय फसलों की बात करें या गर्मी की फसल मूंग-उड़द की बात करें तो जब तक ओले नहीं गिरेंगे तब तक ज्यादा नुकसान नहीं है. बारिश हो रही है, मौसम ठंडा है तो इसका फायदा ही इन फसलों को मिलेगा. बस जिस तरह से तेज आंधी चल रही है उसका असर आम की फसल पर जरुर पड़ सकता है क्योंकि आम की फसल वक्त से पहले ही झड़ रही है।  तूफानी आंधी न मचाई तबाही  तेज आंधी ने शहडोल में कई स्थानों पर जमकर नुकसान किया, कहीं शादी का टैंट उड़ा दिया, तो कहीं बिजली के खंबे और पेड़. बिजली की तारों पर पेड़ गिरने से कई इलाकों में ब्लैक आउट हो गया और बिजली कर्मचारी बिजली दुरुस्त करने में लगे रहे. इसके अलावा कई गांव में कई घंटे तक ब्लैकआउट रहा, शुक्रवार को पूरे दिन लाइट अप एंड डाउन चलती रही, क्योंकि लगातार मेंटेनेंस का कार्य चलता रहा। 

जबलपुर-इटारसी के बीच रेलवे की तीसरी लाइन पूरी, दिल्ली तक तेज़ी से दौड़ेंगी ट्रेनें

नर्मदापुरम   जबलपुर-इटारसी रेल सेक्शन पर तीसरी रेल लाइन की तैयारी तेज हो गई है. इसके लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर लिया गया है. अब विभिन्न स्तरों पर इसकी परीक्षण प्रक्रिया जारी है. परीक्षण पूरा होने के बाद काम शुरू होगा. तीसरी लाइन बनने से जबलपुर-नर्मदापुरम के बीच ट्रेनों का आवागमन तेज हो जाएगा. इसका असर ये होगा कि राजधानी और वंदे भारत जैसी ट्रेनों सहित सभी ट्रेनों की रफ्तार तेज हो जाएगी. क्रॉसिंग के लिए हॉल्ट की समस्या भी खत्म होगी।  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी जबलपुर-इटारसी रेल सेक्शन के बीच तीसरी लाइन की योजना के बारे में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी को जानकारी दी. सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का इसके लिए आभार जताते हुए कहा "यह परियोजना लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख मांग रही है. तीसरी लाइन बनने से ट्रेनों की आवाजाही सुचारू होगी. समयबद्धता में सुधार आएगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी. नर्मदापुरम, नरसिंहपुर समेत आसपास के जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।  ट्रेनों के साथ ही मालगाड़ियों की स्पीड बढ़ेगी तीसरा ट्रैक बिछने से इस बिजी रूट पर ट्रेनें सनसनाती हुई निकलेंगी. अभी इस रेल लाइन पर ट्रैफिक का प्रेशर रहता है. इस कारण क्रॉसिंग कर सुपरफास्ट ट्रेनों को पहले निकाला जाता है. अब एक और ट्रैक बनने से ये समस्या खत्म हो दाएगी. जाहिर है इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और मालगाड़ियों का परिचालन भी बिना किसी बाधा के संभव हो सकेगा. तीसरा ट्रैक बनने से जबलपुर और इटारसी के बीच आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी. माना जा रहा है कि डीपीआर की परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेलवे बजट आवंटित करेगा. इसके बाद टेंडर होगा।  इटारसी से मानिकपुर तक प्लानिंग भी शामिल इसके अलावा पश्चिम मध्य रेलवे की प्लानिंग के अनुसार इटारसी रेलवे जंक्शन से जबलपुर होकर मानिकपुर तक जाने वाले रेलवे लाइन का विस्तार करने की है. यहां पर तीसरा ट्रैक बिछाने की तैयारी की जा रही है. इस लाइन की भी स्वीकृति की मांग रेलवे बोर्ड की गई है. ये तीसरी लाइन डलने के बाद इटारसी-जबलपुर-मानिकपुर रेल लाइन पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी। 

बीजेपी का नया कदम, जिला प्रशिक्षण वर्गों में नेताओं के लिए मोबाइल प्रतिबंधित, नीट-यूपीएससी जैसी परीक्षा

भोपाल  मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है. इस बीच पार्टी ने नेताओं के लिए एक और टास्क की शुरुआत कर दी है. भाजपा अपने नेताओं की परीक्षा लेगी. जिसका आयोजन जिला स्तर पर किया जाएगा. खास बात यह है कि यह परीक्षा नीट-यूपीएससी एग्जाम की तरह होगी. जिसमें मोबाइल फोन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा. इसके अलावा उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. जिसमें पार्टी की नीति रीति से नेताओं और कार्यकर्ताओं को अवगत कराया जाएगा. निकाय और पंचायत चुनाव से पहले भाजपा इसी तैयारी में लगी है।  बीजेपी लेगी परीक्षा दरअसल, एमपी में भाजपा अपने संगठन को और मजबूत करने में जुटी है. जिसके लिए सभी जिलों में जिला प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन किया जाना है.  इस दौरान नेताओं का टेस्ट लिया जाएगा. जिसमें नीट-यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह मोबाइल फोन पहले ही जमा करा लिए जाएंगे. परीक्षा कक्ष के अंदर किसी तरह की जानकारी नेताओं को लेना बंद रहेगी. इसके लिए एक मोबाइल काउंटर बनाया जाएगा, जहां सभी के मोबाइल जमा होंगे और उसके बाद ही उन्हें टेस्ट देना होगा. इस टेस्ट के जरिए भाजपा अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं की क्षमता को समझना चाहती है।  नीट-यूपीएससी की तरह मोबाइल रहेगा बैन जिला प्रशिक्षण वर्गों में शामिल होने वाले नेताओं के मोबाइल नीट-यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह पहले ही जमा करा लिए जाएंगे। इसके लिए प्रशिक्षण स्थल पर एक मोबाइल काउंटर बना होगा। जहां एक टोकन नंबर देकर मोबाइल जमा करा लिया जाएगा। ट्रेनिंग के बाद होगी परीक्षा प्रशिक्षण वर्ग के बाद नेताओं को पोस्ट टेस्ट देना होगा। यानी प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने क्या सीखा, उनको क्या जानकारी मिली, उन्हें किस सत्र में बताई गई कौन सी बात याद रही। प्रशिक्षण के बाद होने वाली परीक्षा में प्रशिक्षण में बताई गई जानकारी से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। बीजेपी नेताओं को देगी ट्रेनिंग बीजेपी नेताओं की परीक्षा के बाद उन्हें ट्रेनिंग भी देगी. क्योंकि पहले जिला प्रशिक्षण वर्ग होगा, उसके बाद नेताओं को पोस्ट देस्ट देना होगा. प्रशिक्षण में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने क्या सीखा, उन्हें पार्टी से संबंधित क्या जानकारी मिली. किस सत्र में कौन सी बात बताई गई. इससे जुड़े सवाल पूछा जाएंगे. खास बात यह है कि परीक्षा के बाद भी भाजपा अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग भी दिलाएगी. ताकि भविष्य के हिसाब से नेताओं को तैयार किया जा सके. माना जा रहा है कि बीजेपी इस प्रयोग के जरिए संगठन को मजबूत करने में जुटी है।  मध्य प्रदेश में अगले साल पंचायत और निकाय चुनाव की प्रक्रिया होने वाली है. ऐसे में भाजपा ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसलिए एमपी के अलग-अलग जिलों में भाजपा जल्द ही अपने प्रशिक्षण शिविर की तैयारियां शुरू करने वाली है। 

प्रदेश में जनगणना 2027 की शुरुआत, 33 सवालों का जवाब देना होगा घर आए कर्मचारियों को

भोपाल  मध्य प्रदेश में 1 मई से जनगणना-2027 के 'हाउस लिस्टिंग' यानी मकानों की सूची बनाने का काम शुरू हो गया है। इस बार की जनगणना खास है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल है। आपके घर पहुंचने वाले प्रगणक आपसे 33 मुख्य सवाल पूछेंगे। इसमें आपके मकान की स्थिति, दीवारों में इस्तेमाल सामग्री से लेकर घर में कौन सा अनाज खाया जाता है, इसकी जानकारी भी ली जाएगी। इन चीजों का देना होगा ब्यौरा पहले फेज में मुख्य रूप से सुविधाओं और संपत्तियों पर फोकस रहेगा: घर की संपत्ति: गाड़ी, लैपटॉप, कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन। मकान की बनावट: दीवार और छत की सामग्री। खान-पान: परिवार में इस्तेमाल होने वाला मुख्य अनाज। जातिगत गणना: ध्यान रहे कि जाति से जुड़े सवाल इस बार नहीं, बल्कि फरवरी 2027 में होने वाले दूसरे चरण में पूछे जाएंगे। पूरी तरह गुप्त रहेगी जानकारी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने स्पष्ट किया है कि लोगों को अपनी संपत्ति बताने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। गोपनीयता: आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह गुप्त रहेगी और किसी भी एजेंसी के साथ साझा नहीं की जाएगी। सरकारी लाभ: जनगणना का मकसद केवल विकास की योजनाएं बनाना है। इससे किसी के सरकारी लाभ या पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सुरक्षा: डेटा पूरी तरह 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड' है, यानी सर्वर तक पहुंचने के दौरान इसे कोई नहीं देख सकता। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना है और डेटा प्रोटेक्शन हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लोग बेझिझक और सही जानकारी साझा करें। आपके सहयोग से ही बेहतर सरकारी नीतियां बन सकेंगी। कार्तिकेय गोयल, निदेशक (जनगणना-2027, MP & CG) 1.5 लाख कर्मचारियों की फौज तैनात इस महा-अभियान के लिए मध्य प्रदेश में करीब 1.5 लाख कर्मचारियों को लगाया गया है, जिनमें से ज्यादातर स्कूल शिक्षक हैं। हाउस लिस्टिंग का यह काम एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान हितेषी फैसले से इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर को मिली नई रफ्तार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान हितेषी फैसले से इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर को मिली रफ्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 मई को प्रथम चरण का करेंगे भूमिपूजन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट को गति देने के लिए किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने जमीन देने वाले भू-स्वामियों को मिलने वाली विकसित जमीन का हिस्सा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से किसानों का भरोसा बढ़ा है और वे प्रोजेक्ट में स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाली प्रमुख परियोजना है। इस परियोजना में 75 मीटर चौड़ी और 20 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में सुनियोजित विकास किया जाएगा। परियोजना में 1300 हैक्टेयर से अधिक भूमि शामिल है और इसकी कुल लागत 2360 करोड़ रु. निर्धारित की गई है। इसके माध्यम से उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती भू-स्वामियों से सहमति के साथ जमीन प्राप्त करना थी, क्योंकि शहर के समीप होने के कारण भूमि का बाजार मूल्य अधिक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस स्थिति को समझते हुए किसानों के हित में बेहतर निर्णय लिया। इससे विकास और किसानों के हितों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस निर्णय के बाद किसानों की भागीदारी में तेजी आई है। योजना में किसानों को उनकी जमीन के बदले विकसित जमीन दी जाती है, यानी ऐसी जमीन जिसमें सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध हों। अब 60 प्रतिशत विकसित जमीन मिलने से किसानों को भविष्य में अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही वे इस जमीन का उपयोग आवासीय, वाणिज्यिक या अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए कर सकेंगे, जिससे उनकी आय के स्थायी स्रोत बनेंगे। परियोजना के प्रथम चरण का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा 3 मई को सेक्टर-ए, ग्राम नैनोद, इंदौर में किया जाएगा। प्रथम चरण की लागत 326.51 करोड़ रु. है, जिसके तहत प्रारंभिक अधोसंरचना विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। परियोजना से क्षेत्र में आधुनिक अधोसंरचना विकसित होगी, कनेक्टिविटी मजबूत होगी और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। जिला प्रशासन और एमपीआईडीसी द्वारा भू-स्वामियों से लगातार संवाद स्थापित किया जा रहा है और उन्हें योजना के लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और किसान इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।  

अल्प समय में ही 61 जटिल जीवन-रक्षक प्रक्रियाएँ सफल

भोपाल  विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, संजय गांधी अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से विभाग ने एक माह से भी कम समय में 61 से अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने स्वयं विभाग का निरीक्षण कर इन उपलब्धियों और स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने उन्नत ईआरसीपी, एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड, कोलैन्जियोस्कोपी और लिथोट्रिप्सी जैसी मशीनों की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और विभाग की दक्षता की सराहना की। मध्यप्रदेश के सबसे उन्नत 'एडवांस्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी स्किल लैब' के माध्यम से अस्पताल ने न केवल अपनी कार्यक्षमता में वृद्धि की है, बल्कि गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए जीवनदायिनी भी सिद्ध हुआ है। सफल रही 61 प्रक्रियाओं में से एक बड़ी संख्या उन जीवन-रक्षक हस्तक्षेपों की है, जिनमें सक्रिय रक्तस्राव से जूझ रहे मरीजों का समयबद्ध एंडोस्कोपिक हीमोस्टेसिस किया गया। यदि ये आधुनिक सुविधाएं यहाँ उपलब्ध न होतीं, तो मरीजों को अन्य बड़े शहरों के केंद्रों में रेफर करना अनिवार्य हो जाता, जिससे उपचार में देरी के साथ-साथ मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ और जान-माल का खतरा भी बना रहता। वर्तमान में यह विभाग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. एम.एच. उस्मानी के कुशल नेतृत्व और सह-प्राध्यापक डॉ. प्रदीप निगम के सहयोग से अपनी अधिकतम परिचालन क्षमता पर कार्य कर रहा है। अस्पताल अब उन्नत इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी सेवाएं प्रदान करने में आत्मनिर्भर हो चुका है। इन सुविधाओं के विस्तार से अब स्थानीय स्तर पर ही जटिल बीमारियों का सटीक उपचार संभव हो पा रहा है, जिससे क्षेत्र के मरीजों को अनावश्यक रेफरल और आर्थिक चुनौतियों से बड़ी राहत मिली है।  

भाजपा की रणनीति तेज, राज्यसभा की तीसरी सीट पर आदिवासी प्रत्याशी पर मंथन

भोपाल मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटें जून महीने में रिक्त हो रही हैं। संख्या बल के हिसाब से दो सीटें भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है। लेकिन कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और कलह का फायदा उठाकर भाजपा तीसरी सीट पर भी अपना उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले इस सीट के लिए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम चर्चा में था, लेकिन दतिया में संभावित विधानसभा उपचुनाव के चलते अब किसी आदिवासी चेहरे को मैदान में उतारने पर विचार किया जा रहा है। इसकी दो वजहें हैं-पहली, कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन हासिल करना और दूसरी, विपक्ष के खेमे में सेंध लगाना। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के कुछ आदिवासी विधायक उनके संपर्क में हैं। प्रदेश की जिन सीटों पर जून 2026 में चुनाव संभावित हैं, उनमें से एक पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, दूसरी पर भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी और तीसरी सीट से केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री जार्ज कुरियन राज्यसभा सदस्य हैं। तीनों का कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है। लेकिन कांग्रेस के लिए आसान मानी जाने वाली राज्यसभा की तीसरी सीट पर सियासी गणित इस बार उलझता दिख रहा है। दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद 230 सदस्यीय सदन में कांग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 64 हो गई। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है। वहीं बीना विधायक निर्मला सप्रे का मामला लंबित होने के बावजूद झुकाव भाजपा की ओर माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के प्रभावी वोट घटकर लगभग 62 रह गए हैं।     दरअसल, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। अभी यह संख्या तो कांग्रेस के पास है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रास वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है।     भाजपा आदिवासी प्रत्याशी उतारती है तो कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन भी उसे मिल सकता है। यही, दांव चलकर भाजपा कांग्रेस से तीसरी सीट छीनने का प्रयास कर सकती है।     पार्टी के पास 164 विधायक हैं, यानी दो सीटें जीतने के बाद भी उसके पास करीब 48 वोट बचेंगे।     यदि कांग्रेस में क्रास वोटिंग होती है और कुछ अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है, तो भाजपा तीसरी सीट पर भी जीत दर्ज कर सकती है।     कांग्रेस में फिलहाल मीनाक्षी नटराजन व कमल नाथ सहित कुछ अन्य नाम चर्चा में हैं। लेकिन, भाजपा की रणनीति देखकर कांग्रेस भी आदिवासी या दलित चेहरे को मौका दे सकती है।  

6.91 लाख किसानों से 34.73 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 6 लाख 91 हजार किसानों से 34 लाख 73 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। अभी तक 14 लाख 64 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनीटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 5462.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

उप मुख्यमंत्री ने किया प्राकृतिक खेती का निरीक्षण

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने रविवार हरिहर धाम स्थित खेत का भ्रमण कर वहां अपनाई जा रही प्राकृतिक खेती की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने खेत में इस्तेमाल हो रहे प्राकृतिक खाद और जीवामृत के निर्माण व प्रयोग की प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया।  शुक्ल ने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और जल संरक्षण के लिए अपनाए गए विशेष उपायों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने उपस्थित सहायकों और कृषि विशेषज्ञों को रसायन मुक्त खेती की तकनीकों को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेती में रसायनों का न्यूनतम उपयोग न केवल लागत कम करता है, बल्कि भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी दीर्घकालिक लाभ पहुँचाता है।  शुक्ल ने प्राकृतिक कृषि को आधुनिक समय की मांग बताते हुए इसे जन-आंदोलन के रूप में प्रसारित करने की बात कही, ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध आहार और सुरक्षित वातावरण मिल सके।