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भोपाल हिल्स इनर व्हील क्लब की फेलोशिप मीटिंग सम्पन्न, सेवा और नेतृत्व पर जोर

भोपाल. इनर व्हील क्लब ऑफ भोपाल हिल्स में ऑफिशियल डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन (डीसी) विजिट एवं फेलोशिप मीटिंग के रूप में सम्पन्न गया हुआ, जिसमें सेवा, नेतृत्व एवं सामाजिक प्रतिबद्धता की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन विभा सिंह जी रहीं, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊंचाई प्रदान की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिकता से भर दिया। इस अवसर पर क्लब की प्रेसिडेंट रश्मि गुप्ता जी ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए क्लब की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात सेक्रेटरी काव्या वाधवानी जी, एडिटर पूनम गर्ग जी एवं आईएसओ स्मिता पागनीस जी द्वारा वर्ष भर की गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण क्लब के प्रथम बुलेटिन “इनर स्पार्क” का विमोचन रहा, जिसका मुख्य अतिथि विभा सिंह जी द्वारा विमोचन किया गया। इस उपलब्धि ने क्लब की रचनात्मकता एवं सक्रियता को एक नई पहचान दी। मुख्य अतिथि विभा सिंह ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में सेवा, मित्रता एवं नेतृत्व के मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया तथा क्लब के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में विभिन्न इनर व्हील क्लब्स के पदाधिकारियों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही

एमपी में कर्मचारियों को मिलेगा भत्ता और वेतन वृद्धि, हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की

भोपाल  मध्यप्रदेश में लाखों संविदा व आउटसोर्स कर्मियों के भत्तों व वेतन वृद्धि की राह खुल गई है। कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में मप्र हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील पर स्थगन देने से इनकार कर दिया, जिसमें सिंगल बेंच द्वारा संविदा कर्मियों के पक्ष में दिए गए निर्णय को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह बड़े वर्ग के भविष्य से जुड़ा मसला है, इसलिए इस पर स्थगन नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने का हाईकोर्ट द्वारा दिया गया आदेश प्रभावी बना रहेगा। इस संबंध में कोर्ट ने सरकार को सिंगल बेंच के निर्णय का पालन करने के निर्देश दिए हैं। सिंगल बेंच ने 9 अप्रेल को कहा था कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कर्मचारियों को सामान्य प्रशासन विभाग की 7 अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने 9 अप्रेल को कहा था कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कर्मचारियों को सामान्य प्रशासन विभाग की 7 अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए। जिस प्रकार दैनिक वेतन भोगियों को विनियमित किया गया और उन्हें वेतनमान, भत्ते व वार्षिक वेतन वृद्धि दी गई, वही लाभ अब संविदा कर्मियों को भी दिया जाएगा। जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार ने अपील की थी। अधिवकता ओपी द्विवेदी ने बताया कि कोर्ट ने 9 अप्रेल को उनके मामले में दिए गए निर्णय को उचित ठहराते हुए प्रदेश सरकार की अपील निरस्त कर दी। जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश पर स्थगन देने से साफ इंकार कर दिया जिसमें संविदा कर्मचारियों को स्थायी कर्मी के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इसी के साथ 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स, अंशकालिक कर्मियों को  वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ के लिए रास्ता क्लियर हाईकोर्ट में मप्र सरकार की अपील खारिज हो जाने से मप्र के संविदा कर्मियों को खासी राहत मिली है। इसी के साथ 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स, अंशकालिक कर्मियों को वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ के लिए रास्ता क्लियर हुआ है। हालांकि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सिंगल बेंच के समक्ष नए दस्तावेज पेश करने की छूट दी है लेकिन तब तक संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान के संबंध में दिया गया पुराना आदेश प्रभावी रहेगा।

इंदौर में 6 हजार से अधिक ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन, जोन के हिसाब से कलर करवा रहे संचालक, नई व्यवस्था लागू

इंदौर  इंदौर में ट्रैफिक पुलिस ने 6 हजार से ज्यादा ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन करा लिए हैं। इन ई-रिक्शाओं का संचालन अलग-अलग जोन में किया जाएगा, जिसके लिए इन पर कलर कराए जा रहे। पिछले दिनों ट्रैफिक पुलिस ने अलग-अलग जोन में अलग-अलग कलर कोड तैयार किया था, जिसके आधार पर इन पर कलर कराए जा रहे हैं, आगामी 15 दिनों में ये व्यवस्था शुरू हो जाएगी। डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि शहर को चार जोन में बांटा गया था। जिसमें अलग-अलग कलर कोड की ई-रिक्शाओं का संचालन किया जाएगा। एक महीने ट्रैफिक पुलिस ने संचालकों के साथ बैठक कर यह निर्णय ले लिया था। इसके बाद संचालकों को रिक्शाओं का थाने पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा था। इसके लिए उन्हें समय भी दिया था। उन्होंने बताया कि अब तक 6 हजार से ज्यादा ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जिनके नहीं हुए हैं, उनके भी रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। कौन सी रिक्शा किस जोन में चलेगी उसके अनुसार उन पर कलर रोड किया जा रहा है, ताकि वह आसानी से पहचान में आ सके। शहर का जोनवार बाटा, कलर कोड भी ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने के लिए शहर को संबंधित ट्रैफिक के 4 जोन के आधार पर 4 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। इसमें जोन 1 में ब्लू, जोन 2 में येलो, जोन 3 में रेड और जोन 4 में व्हाइट कलर कोड की ई-रिक्शाओं का संचालन किया जाएगा। बता दें कि इसके पीछे का उद्देश्य है यह है कि शहर में बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था बन सके। जोनवार व्यवस्था होने से संबंधित जोन की ई-रिक्शा उसी जोन में चलेगी। अगर वह दूसरे जोन में संचालित होगी तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। .

BJP विधायक समेत 6 लोगों को बंगला खाली करने का नोटिस, विधायक ने CM के पदचिह्नों पर चलने की बात की

उज्जैन  मध्यप्रदेश के उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में बंगलों से कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही विवाद गहरा गया है। विवि प्रशासन ने आलोट से बीजेपी विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय सहित 6 लोगों को सरकारी आवास खाली करने के नोटिस थमाए हैं। नोटिस मिलने के बाद बीजेपी विधायक ने आवास को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिससे सियासत गर्मा गई है। विपक्ष को भी हमला करने का मौका मिल गया है। विवि का अवैध कब्जाधारियों को नोटिस विश्वविद्यालय की हाल ही में हुई कार्यपरिषद (EC) की बैठक में निर्णय लिया गया कि जिन लोगों का यूनिवर्सिटी से कोई संबंध नहीं है, उनसे आवास खाली कराया जाएगा। बताते हैं करीब आधा दर्जन आवासों पर बाहरी लोगों का कब्जा है, जिनमें बीजेपी विधायक, पूर्व एडिशनल एसपी, असिस्टेंट प्रोफेसर, लेक्चरर सहित कई लोग शामिल हैं। बाहरी कब्जों के कारण विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को आवास नहीं मिल पा रहे हैं। उन्हें परेशानी हो रही है। वर्तमान में 50 से अधिक कर्मचारी आवास के लिए आवेदन कर चुके हैं। प्रशासन अब प्रभाव का इस्तेमाल कर वर्षों से कब्जा जमाए लोगों को हटाने की तैयारी कर रहा है। विधायक ने उठाया गंभीर सवाल आलोट विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय को वर्ष 2009 में विश्वविद्यालय का ई-4 बंगला आवंटित हुआ था, जिसका मासिक किराया 1620 रुपए है। उन्होंने अक्टूबर 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले एक ही दिन में 9.09 लाख रुपए जमा कराए थे, हालांकि इसके बाद से किराया जमा नहीं किया। विधायक ने यह भी कहा नोटिस के बाद विधायक चिंतामणि ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिससे सियासत गर्मा गई है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय से उनका कुछ बकाया हिसाब है। उन्होंने चुनाव से पहले करीब 10 लाख रुपए जमा किए थे। उनका दावा है कि 2010 में उनका प्रमोशन होना था, जो 4 साल लंबित रहा, जिससे उनका भुगतान बाकी है। विधायक ने कहा कि वे कई बार विश्वविद्यालय से हिसाब करने का अनुरोध कर चुके हैं और हिसाब होने पर वे आवास खाली कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस विषय में गहराई से जांच होगी तो मामला लंबा हो सकता है। एक महीने में आवास खाली करने का नोटिस विक्रमादित्य विवि के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने बताया कि कार्यपरिषद के निर्णय के अनुसार विश्वविद्यालय के आवास केवल कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे। जिन लोगों को नोटिस दिया गया है, उन्हें एक महीने का समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई कर्मचारी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ क्वार्टरों पर बाहरी लोगों का कब्जा है। आवास खाली होने के बाद इन्हें कर्मचारियों को आवंटित किया जाएगा और जर्जर हो चुके 21 भवनों को हटाने की भी योजना है। विधायक बोले- हिसाब होने पर आवास खाली कर देंगे आलोट विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय को 2009 में विश्वविद्यालय का ई-4 आवास आवंटित हुआ था, जिसका मासिक किराया 1620 रुपए है। उन्होंने अक्टूबर 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले एक दिन में 9.09 लाख रुपए जमा किए थे। इसके बाद से किराया जमा नहीं किया गया है। नोटिस के बाद विधायक ने कहा- नैतिक सवाल यह भी है कि मुख्यमंत्री ने कुलपति का बंगला ले रखा है, जो एक लैंडमार्क और ऐतिहासिक भवन होता है। हम उन्हीं के पदचिह्नों पर हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से उनका कुछ बकाया हिसाब है। उन्होंने चुनाव से पहले करीब 10 लाख रुपए जमा किए थे। उनका दावा है कि 2010 में उनका प्रमोशन होना था, जो 4 साल लंबित रहा, जिससे भुगतान बाकी है। वे कई बार विश्वविद्यालय से हिसाब करने का अनुरोध कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि हिसाब होने पर वे आवास खाली कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जांच गहराई से होगी तो मामला लंबा हो सकता है। आवास केवल कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने बताया कि कार्यपरिषद के निर्णय के अनुसार विश्वविद्यालय के आवास केवल कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे। जिन लोगों को नोटिस दिया गया है, उन्हें एक माह का समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ आवासों पर बाहरी कब्जा है। आवास खाली होने के बाद इन्हें कर्मचारियों को दिया जाएगा। जर्जर 21 भवनों को हटाने की योजना भी है। सीएम को मिला कुलपति का बंगला मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. मोहन यादव के लिए उज्जैन के देवास रोड स्थित कुलपति का बंगला खाली कराया गया था। इसके बाद उसका नवीनीकरण हुआ। ये करीब डेढ़ साल पहले तैयार किया गया। वर्तमान में मुख्यमंत्री उज्जैन प्रवास के दौरान अधिकतर इसी बंगले में रात्रि विश्राम करते हैं। इसी मुद्दे पर विधायक ने विश्वविद्यालय के नोटिस पर प्रतिक्रिया दी है।

सीएम ने सागर में 58 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया, बुंदेलखंड की धरा से किसानों की खुशहाली की शुरुआत

सागर  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 अप्रैल को सागर जिले के नरयावली को बड़ी सौगात दी। उन्होंने यहां 58 करोड़ 46 लाख रुपए की लागत के 98 विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। इस मौके पर उन्होंने सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण किया। उन्होंने बच्चों के साथ संवाद कर उज्ज्वल भविष्य के लिए उनका मार्गदर्शन किया। इस मौके पर वे कांग्रेस पर भी जमकर बरसे। उन्होंने कांग्रेस की तुलना कौरवों से और द्रौपदी चीरहरण की तुलना महिला आरक्षण बिल पास न होने से की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और कन्या पूजन से की। इस दौरान मंच पर उपस्थित पदाधिकारियों ने उनका जोरदार स्वागत किया।  कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बुंदेलखंड की धरती अद्बभुत है। चंबल की शान, छत्रसाल महाराज के बुंदेलखंड का ये इलाका, हर काल-हर समय में अपने संघर्ष के लिए जाना जाता है। हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि यहां एक भव्य-दिव्य भवन विद्यालय के रूप में मिल रहा है। ये विद्यालय नहीं है, बल्कि 5 हजार साल पहले हुई भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती का स्मृति स्थल है। भगवान कृष्ण के जीवन की कई लीलाएं हैं। हर लीला ने उनके प्रति हमारी श्रद्धा को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि धर्म की स्थापना के लिए भगवान ने कदम-कदम पर संघर्ष किया। गरीब और अमीर की दोस्ती का सबसे बड़ा उदाहरण भी भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती का उदाहरण है। व्यक्ति कितना भी धनी क्यों न हो जाए, लेकिन उसे अपने निर्धन दोस्त के प्रति प्रेम रखना चाहिए।  सिंचाई और बिजली पर बड़ा फैसला मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड के जल संकट को दूर करने के लिए केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इस योजना से क्षेत्र की एक-एक इंच जमीन सिंचित होगी। साथ ही, किसानों को मात्र 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन कड़ान मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 240 करोड़ रुपये की संशोधित राशि की स्वीकृति भी प्रदान की।   बिना भूमि अधिग्रहण के दिल्ली-नागपुर कॉरिडोर समारोह में नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने मुख्यमंत्री की नीतियों की सराहना करते हुए बताया कि दिल्ली-नागपुर कॉरिडोर के लिए लगभग 600 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसमें किसानों की एक इंच भूमि भी प्रभावित नहीं हुई, जिससे क्षेत्र के अन्नदाताओं में संतोष का वातावरण है। कड़ान परियोजना पूरी होने पर करीब 30 हजार एकड़ भूमि सिंचित हो सकेगी। गेहूं खरीदी पर सरकार का संकल्प किसानों की चिंताओं को दूर करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि सरकार 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदेगी वैश्विक कारणों से आए बारदाने के संकट को जल्द सुलझाया जाएगा। प्रदेश में बंपर पैदावार को देखते हुए केंद्र से खरीदी का कोटा बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसानों का दाना-दाना सरकार खरीदेगी। दिग्गजों की रही मौजूदगी इस अवसर पर खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, सांसद लता वानखेड़े और सागर संभाग के समस्त विधायक व वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। कांग्रेस ने बहनों को नहीं दिया मान-सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यहां बहनें बड़ी संख्या में मौजूद हैं। हमारी सरकारों ने माताओं-बहनों का सम्मान बढ़ाया है। माता का नाम लो तो भगवान प्रसन्न होते हैं। जब तक राधा नहीं बोलो तो कन्हैया मुस्कुराते नहीं हैं, जब तक सीता मां को याद न करो, तो भगवान राम का आशीर्वाद नहीं मिलता है। यह बातें हमें माताओं-बहनों के आदर का आभास कराती हैं।उन्होंने कहा कि हमने 5 हजार साल पहले घटना सुनी थी कि कौरवों ने भरे दरबार में द्रौपदी का चीरहरण किया था, उसी तरह अभी कुछ दिन पहले लोकसभा में वो ही नाटक दोहराया गया। उस समय कौरव थे और अब कांग्रेसी हैं। दोनों में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहनों को अधिकार देने का जो निर्णय लिया था, कांग्रेसियों ने मुस्कुरा-मुस्कुरा कर उस निर्णय पर पानी फेर दिया। कांग्रेसियों को इस बात पर जरा दया नहीं आई। प्रधानमंत्री मोदी ने तो यहां तक कहा कि आप श्रेय ले लीजिए, मैं विज्ञापन छपवा दूंगा। तुम लोग जहां बोलोगे वहां हम तुमको श्रेय दे देंगे। आपने कभी बहनों को मान-सम्मान नहीं दिया, लेकिन हम मान-सम्मान देने को तैयार हैं। कांग्रेसी उसी अपनी पुरानी लाइन पर ही चलेंगे। तीन तलाक के मामले में भी राहुल गांधी ने बहनों के भरण-पोषण के मुद्दे का विरोध किया था। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का भी फैसला ठुकराया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारा संगठन महिलाओं को तीस फीसदी आरक्षण दे रहा है। हमारे प्रदेश में 17 बहनें कलेक्टर हैं। सागर की सांसद-महापौर-कलेक्टर सब बहनें हैं। 

मध्यप्रदेश बनेगा विमानन और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान

मध्यप्रदेश बनेगा विमानन और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्ष 2030 तक प्रदेश की विमानन क्षमता में होगा व्यापक विस्तार अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण से विमानन क्षेत्र को मिल रही नई गति भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश विमानन क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी के ‘उड़ान’ विजन को साकार करते हुए प्रदेश को उत्कृष्ट विमानन केंद्र और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2030 तक यात्री क्षमता 5.5 मिलियन से बढ़ाकर 10 मिलियन प्रति वर्ष तथा माल कार्गो क्षमता 20 हजार मीट्रिक टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।प्रदेश में विमानन अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। इंदौर-देवास-उज्जैन क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ एयरपोर्ट सिटी विकसित की जाएगी। यह परियोजना पीपीपी मॉडल पर आधारित होगी, जिससे निवेश, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट पॉलिसी के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे प्रदेश में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित होंगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच हुई सुलभ मध्यप्रदेश आस्था, अध्यात्म और अनुपम शिल्पकला का संगम है। उज्जैन के महाकाल लोक, ओंकारेश्वर के एकात्म धाम, खजुराहो की ऐतिहासिक धरोहर और ओरछा-चित्रकूट की आस्थाएँ जन-मानस में रची-बसी हैं। इन स्थलों तक सहज पहुँच सुनिश्चित करने के लिए ‘पीएमपर्यटन वायु सेवा’ और ‘धार्मिक पर्यटन हेली सेवा’ प्रभावी माध्यम बन रही हैं। वर्तमान में यह सेवा प्रदेश के 8 प्रमुख केंद्रों—भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, ग्वालियर, सिंगरौली और खजुराहो को आपस में जोड़कर श्रद्धा और पर्यटन को नए पंख लगा रही है। हाल ही में ओरछा और चित्रकूट जैसे पावन धामों के लिए प्रारंभ हुई हेली सेवा ने श्रद्धालुओं के लिए 'हरि-हर-दर्शन' कीको और भी सरल, सुखद और स्मरणीय बना दिया है। तहसील स्तर तक हो रहा हवाई सेवाओं का विस्तार प्रदेश में विमानन क्षेत्र को विकेंद्रीकृत करते हुए हवाई सुविधाओं को तहसील स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। हवाई सेवाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि हर क्षेत्र तक पहुंचें। इसी दृष्टि से प्रत्येक तहसील ब्लॉक में हेलीपैड विकसित करने की योजना है। प्रदेश में हर 150 किलोमीटर पर एक कॉमर्शियल एयरपोर्ट, 75 किलोमीटर पर एयरस्ट्रिप और 45 किलोमीटर के दायरे में हेलीपैड विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह व्यवस्था आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करेगी और दूरस्थ क्षेत्रों के आर्थिक विकास को नई गति देगी। क्षेत्रीय हवाई संपर्क से छोटे शहरों को मिली विकास की उड़ान विगत दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने हवाई सेवाओं के विस्तार में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। दतिया प्रदेश के 8वें हवाई अड्डे के रूप में अपनी सेवा दे रहा है। रीवा, सतना और दतिया की सफलता के बाद अब शिवपुरी और उज्जैन में भी नए हवाई अड्डों की तैयारी तेजी से चल रही है। रीवा हवाई अड्डा पूरे विंध्य क्षेत्र के लिए विकास का नया इंजन बन चुका है। यह न केवल सीमेंट और बिजली उत्पादन केंद्रों के लिए मददगार साबित हो रहा है, बल्कि मुकुंदपुर टाइगर सफारी जैसे पर्यटन केंद्रों तक पर्यटकों की पहुँच को भी आसान बना रहा है। इसी कड़ी में हम चित्रकूट और मैहर जैसे आस्था के बड़े केंद्रों को भी बेहतर हवाई नेटवर्क से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान हवाई यात्रा में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश के हवाई अड्डे सेवा और गुणवत्ता के वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित हो रहे हैं।इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा ‘एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी’ सर्वे में 4.90 स्कोर के साथ 16 एशियाई हवाई अड्डों में छठे स्थान पर रहा है। वहीं भोपाल के राजा भोज अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 24 घंटे संचालन शुरू किया गया है। प्रदेश के सभी हवाई अड्डों पर सुरक्षित, सुगम और बेहतर यात्रा अनुभव सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नागर विमानन नीति-2025 से निवेश और रोजगार को बढ़ावा प्रदेश की सिविल एविएशन पॉलिसी-2025 विमानन क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में विमानन अधोसंरचना को मजबूत करना, निजी निवेश को आकर्षित करना और युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करना है।नीति के तहत प्रदेश की 11 हवाई पट्टियों को उड़ान प्रशिक्षण (FTO) और अन्य व्यावसायिक विमानन गतिविधियों के लिए निजी भागीदारी से विकसित किया जा रहा है। इनमें सिवनी, सागर, गुना, रतलाम, उज्जैन, बालाघाट, उमरिया, छिंदवाड़ा, मंदसौर, नीमच और शिवपुरी शामिल हैं। इससे इन क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विकास होगा। मध्यप्रदेश में पायलट ट्रेनिंग और एविएशन एजुकेशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रदेश विमानन क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। नीति के क्रियान्वयन से युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति इसे  देश के ‘हृदय प्रदेश’ के रूप में विशेष बनाती है। प्रधानमंत्री मोदी के ‘गति शक्ति’ विजन और ‘रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम’ के साथ राज्य की नीतियों का समन्वय प्रदेश को लॉजिस्टिक्स और एविएशन हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विमानन क्षेत्र का यह विस्तार किसानों, व्यापारियों, युवाओं और पर्यटकों के लिए नए अवसर सृजित कर रहा है। यह केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम है। 'विकसित मध्यप्रदेश' के संकल्प के साथ प्रदेश निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है।  

सतना के ग्राम बैरहना में 24 अप्रैल से श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का आयोजन

सतना सतना जिले के अंतर्गत ग्राम बैरहना में दिनांक 24 अप्रैल से 1 मई  2026 तक विशाल श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है ! जिसमे चित्रकूट आश्रम के पीठाधीश्वर श्री 1008 राजगुरु स्वामी श्री बद्री प्रपन्नाचार्य जी महाराज के श्री मुख से कथा की अमृत वर्षा होगी ! कार्यक्रम के आरम्भ में भव्य कलशजल शोभा यात्रा प्रातः 9:00 बजे ग्राम बैरहना में निकाली जायेगी एवं प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से नित्य भगवत रस की वर्षा हरि इच्छा तक।  कथा के मुख्य यजमान श्री युगल किशोर पांडे, राम सखी पांडेय पुष्पराज पांडेय ,शिवहर पांडेय ,शीतल संत श्री राम दस जी महाराज , श्री कृष्ण पांडेय एवं समस्त पांडेय परिवार ! इस पवन कार्यक्रम में जगत में कल्याण के लिए किया जाएगा एवं साधु संतों का समागम रहेगा ! कथा के अंतिम चरण में विशाल भंडारे के आयोजन भी 1 मई को किया जाएगा। 

मस्तिष्क विकास में शुरुआती 6 वर्ष और पहले 1000 दिन हैं अहम, मंत्री सुश्री भूरिया का बयान

मस्तिष्क विकास के लिए शुरुआती 6 वर्ष और प्रथम 1000 दिन है सबसे महत्वपूर्ण : मंत्री सुश्री भूरिया मध्यप्रदेश में 8वें पोषण पखवाड़ा का हुआ भव्य समापन पोषण योद्धाओं को किया सम्मानित भोपाल प्रदेश में 8वें 'पोषण पखवाड़ा' का समापन गुरूवार को हुआ। इस अवसर पर आई एच एम भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बच्चों के सर्वांगीण विकास और पोषण को लेकर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों को साझा करते हुए कहा कि एक सशक्त राष्ट्र की नींव बच्चों के स्वस्थ बचपन में छिपी है और इसके लिए जीवन के शुरुआती 6 वर्ष सबसे निर्णायक होते हैं। मंत्री सुश्री भूरिया ने 'मिशन पोषण 2.0' की सफलता पर कहा कि विज्ञान यह सिद्ध कर चुका है कि मनुष्य के मस्तिष्क का अधिकांश विकास उसके जीवन के शुरुआती छह वर्षों में ही हो जाता है। ऐसे में गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक के 'प्रथम 1000 दिन' वह सुनहरा कालखंड हैं, जहाँ सही पोषण और उचित देखभाल के जरिए एक मजबूत पीढ़ी का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वे अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि एक स्वस्थ माँ ही सुपोषित भविष्य की जननी है। मंत्री सुश्री भूरिया ने शिशु स्वास्थ्य के बुनियादी सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए कहा कि'कोलोस्ट्रम' यानी माँ के पहले गाढ़े पीले दूध को नवजात का 'पहला टीका' माना जाता है । उन्होंने स्तनपान की सही तकनीक और जन्म से छह माह तक केवल स्तनपान के महत्व पर जोर दिया। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि छह माह की आयु पूर्ण होने के बाद बच्चों को सही समय पर पौष्टिक ऊपरी आहार देना अनिवार्य है, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक वृद्धि में कोई बाधा न आए। उन्होंने आधुनिक दौर की चुनौतियों का जिक्र करते हुए अभिभावकों को सचेत किया कि वे बच्चों का 'स्क्रीन टाइम' यानी मोबाइल और टीवी से दूरी कम करें और उन्हें खेल-आधारित शिक्षा की ओर प्रेरित करें। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि पोषण पखवाड़ा' के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने पूरे देश में जन आंदोलन पोर्टल पर गतिविधियों की प्रविष्टि के मामले में देश भर में तीसरे स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से कुपोषण को दूर करने, स्तनपान को बढ़ावा देने और स्वस्थ आहार के साथ बच्चों के प्रारंभिक विकास पर विशेष बल दिया गया। मंत्री सुश्री भूरिया ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और कुपोषण निवारण की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और कर्मठ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन 'पोषण योद्धाओं' की सक्रियता के कारण ही मध्यप्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति चेतना जागी है। कार्यक्रम में आयोजित 'पोषण प्रदर्शनी' का अवलोकन करते हुए मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मोटे अनाजों और संतुलित आहार के मॉडलों की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल 15 दिनों के आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संतुलित पोषण को हर घर की दैनिक आदत बनाना हमारा साझा लक्ष्य है। समारोह का समापन एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित जनसमूह ने हर बच्चे के मस्तिष्क विकास और सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिए निरंतर कार्य करने की शपथ ली।  

एक्ट्रेस जानकी बोदीवाला पहुंची बाबा महाकाल के दर, नंदी महाराज से की मनोकामना की प्रार्थना

उज्जैन   अजय देवगन की फिल्म 'शैतान' से हिंदी फिल्मों में कदम रखने वाली अभिनेत्री जानकी बोदीवाला ने बुधवार को उज्जैन पहुंचकर विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर के दर्शन करने पहुंची। अभिनेत्री ने नंदी हॉल से बाबा महाकाल की भस्म आरती और पूजन में भाग लिया। भस्म के दौरान हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहे और पूरा मंदिर परिसर ओम नमः पार्वती पतये हर हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा। मुख्य रूप से गुजराती सिनेमा में सक्रिय अभिनेत्री जानकी बोदीवाला बाबा महाकाल के दर पर भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। नंदी मंडपम के पास बैठकर उन्होंने बाबा का ध्यान किया और नंदी महाराज के गानों में अपनी मनोकामना कही। दर्शन के बाद अभिनेत्री ने कहा, "बाबा महाकाल के दर्शन के अनुभव को शब्दों में बयां कर पाना नामुमकिन है क्योंकि यह भावना हमारे मन के भीतर होती है। आज बहुत अच्छे से दर्शन हुए और मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने इतने अच्छे दर्शन कराने में हमारी मदद की। बाबा से यही कामना है कि वो बार-बार अपने दर पर बुलाते रहें।" जानकी ने अपने करियर की शुरुआत ब्लॉकबस्टर गुजराती फिल्म 'छेलो दिवस' से की थी, जिसके बाद उन्होंने 'नाड़ी दोष' जैसी कई सफल फिल्में दीं। हाल ही में उन्होंने अजय देवगन के साथ बॉलीवुड फिल्म 'शैतान' में अपनी दमदार एक्टिंग से देशभर में पहचान बनाई है। सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सक्रिय जानकी बाबा का आशीर्वाद लेकर बेहद अभिभूत दिखीं। बता दें कि अभिनेत्री ने पहले गुजराती फिल्म वश में काम किया, जिसमें उनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया। इसी फिल्म का रीमेक बॉलीवुड में 'शैतान' के नाम से बना और शैतान में भी जानकी को ही बतौर लीड कास्ट किया गया, जो एक वशीकरण से पीड़ित लड़की है। गुजराती फिल्म वश का दूसरा सीक्वल 'वश लेवल-2' भी साल 2025 में रिलीज हो चुका है। इस फिल्म ने भी सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी। फिल्म का डायरेक्शन कृष्णदेव याग्निक ने किया और फिल्म में जानकी के अलावा, हितू कनोडिया, हितेन कुमार और मोनल गज्जर ने अहम रोल्स किए हैं।

किसानों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बना रही है मध्यप्रदेश सरकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बना रही है मध्यप्रदेश सरकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बना रही है। मंत्रि-परिषद की बैठक में कृषि भूमि के अर्जन पर बाजार दर से 4 गुना मुआवजा देने का निर्णय ऐतिहासिक है। इससे जहां किसानों को नई जमीन खरीदने में आसानी होगी, वहीं भू-अर्जन कार्यों के निराकरण को गति मिलेगी। सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को इसका लाभ होगा। यह किसानों की समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  मुख्यमंत्री निवास में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने आज कैबिनेट बैठक में मध्यप्रदेश भू-अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम, 2015 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मल्टीप्लीकेशन फैक्टर 1.0 से बढ़ाकर 2.0 कर दिया है। इससे किसानों को बाजार मूल्य का अधिकतम 4 गुना मुआवजा मिल सकेगा। तेज होगा परियोजनाओं का क्रियान्वयन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस निर्णय से सिंचाई परियोजनाओं, सड़क, पुल, रेलवे और बांध निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि पर किसानों को अधिक राशि मिल सकेगी। इससे न केवल विकास कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि भूमि देने वाले किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार होगा। शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में विकास कार्यों को गति मिलेगी। मेट्रोपोलिटन सिटी की जरूरतें होंगी पूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश में मेट्रोपोलिटन सिटी की ओर भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में भू-अर्जन की आवश्यकता पड़ेगी। गत तीन वर्ष में 55 हजार से अधिक किसानों को विभिन्न परियोजना के माध्यम से 16 हजार करोड़ मुआवजा वितरित किया गया है। सालाना आधार पर यदि देखें तो जो मुआवजा करीब 5000 करोड़ रूपए था, अब वो 4 गुना बढ़ा दिया गया है। अब हर साल करीब 20 हजार करोड़ रूपए मुआवजा किसानों को मिलेगा। मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 में किसानों के हित में निरंतर कार्य होगा। वैश्विक परिदृश्य में गेहूं का निर्यात न के बराबर है। इन परिस्थितियों में भी सरकार किसानों के साथ खड़ी है। पहले छोटे और मझौले किसान और फिर बड़े किसानों से गेहूं खरीदा जा रहा है। किसानों को बोनस भी दिया जा रहा है। पिछले साल का गेहूं भी वेयरहाउस में स्टॉक है। इस वर्ष गेहूं उत्पादन बढ़ा है। अन्नदाताओं के हित में राज्य सरकार गेहूं खरीदी का कार्य पूर्ण करेगी। भारत सरकार से 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी के अनुमान के अनुसार आवश्यक अनुरोध किया गया है। लाड़ली बहनों की राशि में वृद्धि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़ाई है, किसानों और नारी सशक्तिकरण के लिए अपने सभी वादों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। किसी भी योजना को बंद नहीं किया गया है। योजनाओं को बंद किए जाने संबंधी दुष्प्रचार गलत सिद्ध हुआ है। राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 21 हजार करोड़ रूपए का बजट पेश किया है। नीति आयोग की गाइडलाइन के अनुसार सभी प्रकार के वित्तीय प्रबंधन करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं।