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BJP का बड़ा प्रदर्शन, महिला आरक्षण पर सड़क पर उतरी पार्टी; CM ने विपक्ष को नारी अपमान याद दिलाया

भोपाल   लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाने के विरोध में मध्य प्रदेश में सियासी माहौल गरमा गया है। अब इसकी गूंज सड़कों तक पहुंच गई है। राजधानी भोपाल में सोमवार को भाजपा महिला मोर्चा की ओर से ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ निकाली गई। बड़ी संख्या में महिलाओं ने इसमें भाग लेकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की। भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू हुई पदयात्रा रोशनपुरा चौराहे की ओर बढ़ी। इसमें छह विशेष रथ भी शामिल किए गए थे। महिलाओं के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस यात्रा में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। पद यात्रा भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से लोक भवन होते हुए रोशनपुरा चौराहे पहुंची। यहां मुख्यमंत्री ने काले गुब्बारे उड़ाकर इसका समापन किया। इससे पहले हुई सभा में मुख्यमंत्री यादव ने कहा- नारी सब भूल सकती है लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिलाओं के अधिकार का बिल गिरने पर खुशियां मनाईं। जश्न मनाया। हम बहनों के अधिकार को कुचलने के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव पारित करेंगे।     मुख्यमंत्री ने कहा- प्रियंका गांधी बड़ी-बड़ी बातें करती थीं कि मैं नारी हूं, लड़ सकती हूं। लेकिन वह बड़ी-बड़ी बातें कहां गईं, जब आपने बहनों के अधिकारों को फांसी देने का काम किया। राहुल गांधी के पिताजी ने भी 40 साल पहले तीन तलाक लागू कर बहनों के अधिकारों पर डाका डाला था। यही कांग्रेस का अतीत है।     बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा- जब मौका लगे, तब बहनें अपना आक्रोश दिखाएं। कांग्रेस के नेताओं से पूछे कि बहनों को अपमानित करने का अधिकार आपको किसने दिया? कांग्रेसियों के घर जाकर पूछें कि जो बहन आपके घर की शोभा बढ़ाती है, जिस मां ने आपको जन्म दिया, उनके सपनों को चूर-चूर करने का हक किसने दिया?     बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे ने कहा- कांग्रेस के नेताओं ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम गिराकर जश्न मनाया, यह महिलाओं के अपमान का प्रतीक था। मातृ शक्ति इस अपमान का जवाब देगी। अब याचना नहीं, रण होगा।     पंचायत राज्यमंत्री राधा सिंह, अपनी बेटी अंजलि सिंह के साथ जन आक्रोश महिला पदयात्रा में शामिल हुई। उन्होंने कहा- आजादी के इतने सालों बाद भी हमें अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है। राहुल गांधी को शर्म आना चाहिए कि उन्होंने बहनों का साथ नहीं दिया।     मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा- कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने महिलाओं को हक देने का विरोध किया है। हम सड़कों पर उतरकर उसका विरोध कर रहे हैं।     सागर लोकसभा सीट से सांसद लता वानखेड़े ने कहा- ये केवल बिल नहीं, बल्कि महिलाओं के पंचायत से पार्लियामेंट तक पहुंचने का दरवाजा था, जिसे कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने बंद कर दिया। विपक्ष को महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं चाहिए। ये वही लोग हैं, जो मंच पर महिलाओं की बात करके बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हैं। लेकिन इनकी सोच है कि महिलाएं सिर्फ भीड़ का हिस्सा रहें। तालियां बजाएं, नेतृत्व न करें। क्या है पूरा मामला? 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस विधेयक में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव था। लेकिन इसे पास कराने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिल पाया। इसी के विरोध में भाजपा ने इस मुद्दे को जन आंदोलन बनाने की रणनीति शुरू कर दी है। भाजपा का आरोप – महिलाओं के अधिकारों पर चोट प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस और विपक्ष पर महिलाओं के सपनों को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम हो रहा था, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधा डाली। खंडेलवाल ने यह भी कहा कि अब यह सवाल घर-घर तक पहुंचाया जाएगा कि महिलाओं के अधिकारों को रोकने का जिम्मेदार कौन है। सीएम मोहन यादव का सख्त संदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक पार्टी की नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान की है। उन्होंने कहा कि नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती। महिलाओं के अधिकारों के लिए सरकार ने पूरी कोशिश की, लेकिन बहुमत नहीं मिल सका। सीएम ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने देश की आधी आबादी के अधिकारों का सम्मान नहीं किया। सच सामने लाया जाएगा – भाजपा नेता कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने संकेत दिया कि आने वाले समय में इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाया जाएगा। नगरीय निकायों में निंदा प्रस्ताव पारित कराने और विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने की बात कही गई। नेताओं ने कहा कि विपक्ष के खिलाफ जनता के बीच जाकर सच सामने लाया जाएगा। महिला मोर्चा का ऐलान – अब याचना नहीं, रण होगा भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे ने कहा कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि विधेयक गिरने पर जश्न मनाना महिलाओं का अपमान है और अब देश की महिलाएं इसका जवाब देंगी। आंदोलन को देशभर में ले जाने की तैयारी भाजपा महिला मोर्चा इस पदयात्रा को एक बड़े आंदोलन की शुरुआत मान रही है। नेताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में इसे प्रदेश से बाहर देशभर में ले जाया जाएगा, ताकि महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके।

धार का पुल डेढ़ साल के लिए बंद, वाहनों को 5 किमी का लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा

धार  मप्र सड़क विकास निगम धार जिले के घाटाबिल्लौद से गुजरने वाली चंबल नदी पर बने ब्रिज को तोड़कर नया ब्रिज बनाने जा रहा है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है। भोपाल की फर्म के माध्यम से ब्रिज का निर्माण करवाया जाएगा। ब्रिज निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ होते ही चंबल नदी के पुल से वाहनों का अवागमन बंद हो जाएगा। इसका सबसे ज्यादा असर इंदौर से होकर रतलाम-नीमच-मंदसौर जाने वाले लोगों पर होगा। निर्माण प्रारंभ होते ही इस रूट के लोगों को 5 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाकर नेशनल हाईवे इंदौर- अहमदाबाद के मार्ग का उपयोग करके लेबड़ तक आना होगा। विभाग द्वारा मार्ग डायवर्सन प्लान बनाया गया है, जिसमें नेशनल हाईवे के ब्रिज से होकर पानखेड़ी और लेबड़ तक जाया जा सकेगा। इसको लेकर डायवर्सन प्लान अनुमति के लिए जिला प्रशासन को भेजा गया है। अनुमति मिलते ही प्लान पर काम शुरू हो जाएगा। 40 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे: चंबल नदी पर वर्तमान में सिंगल पट्टी ब्रिज है, जिसकी चौड़ाई करीब 20 फीट है। नया फोरलेन ब्रिज 24 मीटर चौड़ा होगा। दोनों ओर 12- 12 मीटर की सड़क रहेगी। 18 महीने निर्माण अवधि तय की गई है। करीब 40 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे। सिंहस्थ 2028 के पूर्व इसे तैयार कर लिया जाएगा। नवीन पुल तैयार होने के बाद सुगम यातायात हो सकेगा। वर्तमान का पुल उस दौर के वाहनों की संख्या को देखकर बनाया गया था। पुल अभी मजबूती से खड़ा है, लेकिन बड़े औद्योगिक सामग्रियों के वाहनों के लिए उपयोगी नहीं है। कुछ समय पूर्व बड़े औद्योगिक वाहनों को निकालने के लिए चंबल में अतिरिक्त अस्थाई मार्ग का निर्माण करके वाहनों को निकाला गया था। फोरलेन ब्रिज बनने के बाद इसे बड़े वाहनों के लिए राहत होगी। मार्ग परिवर्तन का बोर्ड लगाया, यातायात हुआ कम सड़क विकास निगम को अभी डायवर्सन रूट को लागू करने की अनुमति नहीं मिली है। वहीं विभाग ने पुल के पहले सड़क पर मार्ग परिवर्तन निर्माण कार्य प्रगतिरत है जैसे बोर्ड लगा दिए हैं। इसके कारण मार्ग पर यातायात का दबाव कम हो गया है। इधर, ब्रिज के माध्यम से इस पार आने वाले घाटाबिल्लौद के लोगों को आंतरिक छोटे-छोटे मार्गों का उपयोग करके इस पार से उस पार आना होगा। आगामी दिनों में पानखेड़ी और लेबड़ मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ जाएगा। सड़क विकास निगम, धार के एसडीओ प्रदीप चौहान बताते हैं कि चंबल नदी पर फोरलेन ब्रिज निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है। रूट डायवर्सन प्लान बनाकर अनुमति के लिए स्थानीय प्रशासन को दिया गया है। अनुमति मिलने के बाद आगे का काम शुरू होगा। 18 महीने में कार्य पूर्ण करने की अवधि है। बारिश में बढ़ेगी चुनौती, अभी डेढ़ माह का समय चंबल नदी वर्तमान में पूरी तरीके से सूख चुकी है। यह समय पुल को डिस्मेंटल करने एवं बैस तैयार करने के लिए उपयुक्त है। डायवर्सन मार्ग के लिए जल्द अनुमति मिलती है तो काम को गति मिल जाएगी। बारिश का दौर प्रारंभ होते ही प्रोजेक्ट के तहत दो से तीन माह प्रभावित होंगे। अच्छी बारिश के दौरान चंबल नदी उफान पर रहती है। नदी तट के मंदिर तक डूब जाते हैं। ऐसी स्थिति में बारिश के पूर्व नींव का काम हो जाता है तो पानी कम होने पर आगे का काम किया जा सकता है।

एमपी टेंडर घोटाला? – हर डिजिटल मूल्यांकन टेंडर में एक ही नाम: MPCON पर गंभीर सवाल

एमपी टेंडर घोटाला? – हर डिजिटल मूल्यांकन टेंडर में एक ही नाम: MPCON पर गंभीर सवाल GFR, CVC और MP Procurement नियमों की अनदेखी? कॉपी-पेस्ट टेंडर, फर्जी प्रतिस्पर्धा, गलत वर्गीकरण और संदिग्ध प्रमाणपत्र पर उठे सवाल भोपाल  मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों—DAVV इंदौर, SVVV उज्जैन, MPBOU तथा वर्तमान डिजिटल मूल्यांकन टेंडर—में एक चौंकाने वाला समान पैटर्न सामने आया है। शिकायतों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में बार-बार MPCON को लाभ पहुंचाने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे पूरे सिस्टम की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।  सबसे बड़ा सवाल – हर टेंडर में MPCON ही क्यों?     •    हर टेंडर में ऐसी पात्रता शर्तें, जो केवल MPCON से मेल खाती हैं     •    अन्य सक्षम संस्थाएं स्वतः बाहर     •    परिणाम: एक ही संस्था के पक्ष में झुकी प्रक्रिया SVVV टेंडर में बड़ा खुलासा (Goods vs Services घोटाला)     •    टेंडर को “Goods” में डाला गया     •    जबकि कार्य:     •    डिजिटल मूल्यांकन सॉफ्टवेयर     •    स्कैनिंग, IT सेवाएं, मैनपावर  स्पष्ट रूप से Service Contract, फिर भी Goods में डालना  पूरा टेंडर कानूनी रूप से संदिग्ध 📄 DAVV → SVVV: कॉपी-पेस्ट टेंडर का खेल     •    दोनों टेंडरों में समान भाषा, समान शर्तें     •    केवल नाम बदला गया संकेत: टेंडर स्वतंत्र नहीं, बल्कि पूर्व-निर्धारित डिजाइन MPSOS केस – पहले भी बना पैटर्न     •    3 बिड प्राप्त     •    2 बिड अस्वीकृत     •    केवल MPCON योग्य घोषित   फिर भी:     •    अंतिम परिणाम स्पष्ट नहीं     •    आरोप: फर्जी/सपोर्ट बिड से टेंडर दिलाया गया  फर्जी प्रतिस्पर्धा का आरोप     •    AFC India Limited, AP Productivity Council, APITCO Ltd.     •    पात्रता नहीं, फिर भी नियमित भागीदारी  आरोप:     •    डमी/फर्जी बिड     •    MPCON के पक्ष में सपोर्ट     •    कृत्रिम प्रतिस्पर्धा नियमों का खुला उल्लंघन?     •    केवल 1 पात्र बोलीदाता (MPCON)     •    जबकि नियम: कम से कम 3 योग्य बिड आवश्यक     •    फिर भी टेंडर प्रक्रिया जारी  सवाल: टेंडर रद्द क्यों नहीं किया गया? सबसे बड़ा विवाद – CMMI Level 3 प्रमाणन     •    सभी टेंडरों में CMMI Level 3 अनिवार्य     •    लेकिन:     •    MPCON के पास स्वयं का CMMI प्रमाणन उपलब्ध नहीं     •    कथित रूप से थर्ड-पार्टी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया गया  गंभीर आरोप:     •    थर्ड-पार्टी CMMI सर्टिफिकेट टेंडर शर्तों के विरुद्ध     •    आधिकारिक CMMI रजिस्ट्री में सत्यापन स्पष्ट नहीं सत्यापन हेतु: https://pars.cmmiinstitute.com यह स्थिति:     •    फर्जी/अमान्य दस्तावेज प्रस्तुत करने की श्रेणी में     •    जो नियमों के अनुसार सीधी ब्लैकलिस्टिंग का आधार बनती है किन नियमों का उल्लंघन?     •    GFR 2017 (Rule 144, 160, 173)     •    CVC Guidelines (Fair Procurement)     •    MP Procurement Rules 2023     •    Competition Act, 2002     •    संविधान अनुच्छेद 14 (समानता) बड़े सवाल (Public Interest Questions)     •    हर टेंडर में MPCON ही क्यों?     •    CMMI शर्त होने के बावजूद प्रमाणन कैसे स्वीकार किया गया?     •    एक ही पात्र बोलीदाता होने पर टेंडर रद्द क्यों नहीं हुआ?     •    कॉपी-पेस्ट टेंडर किस स्तर पर तैयार हुए?     •    क्या पूरी प्रक्रिया पूर्व-निर्धारित थी? बड़ी मांग – अब कार्रवाई जरूरी     •    उच्च शिक्षा आयुक्त द्वारा तत्काल जांच (Enquiry)     •    MPCON की ब्लैकलिस्टिंग (False/Non-compliance आधार पर)     •    सभी सपोर्ट बिड देने वाली संस्थाओं की ब्लैकलिस्टिंग     •    सभी विभागों में MPCON को दिए गए टेंडरों की राज्यस्तरीय जांच     •    संदिग्ध टेंडरों का तत्काल निरस्तीकरण अंतिम चेतावनी (Legal Position) “यदि टेंडर प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज, प्रतिबंधात्मक शर्तें और कृत्रिम प्रतिस्पर्धा सिद्ध होती है, तो यह न केवल अवैध है बल्कि संबंधित संस्था की ब्लैकलिस्टिंग अनिवार्य हो जाती है।” यह मामला अब सिर्फ टेंडर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता का सवाल बन चुका है।

मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी का कहर, पारा 44°C के पार, भोपाल-रायसेन में बादल और रतलाम में बूंदाबांदी

भोपाल  मध्यप्रदेश में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को राज्य के अधिकांश जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। इस बीच छतरपुर के नौगांव में इस सीजन का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड हुआ, जहां पारा 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं जबलपुर में पिछले तीन वर्षों का तापमान रिकॉर्ड टूट गया है। नौगांव बना सबसे गर्म शहर छतरपुर जिले के नौगांव में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक है। इससे पहले शनिवार को रतलाम में पारा 44 डिग्री तक पहुंचा था। प्रदेश के कई शहरों में 40°C से ऊपर तापमान मंडला में 43.9 डिग्री, खजुराहो में 43.4 डिग्री, उमरिया और सतना में 43.1 डिग्री, दमोह में 43 डिग्री, नर्मदापुरम में 42.8 डिग्री, सीधी और सागर में 42.6 डिग्री, मलाजखंड में 42.5 डिग्री, दतिया और रीवा में 42.4 डिग्री तथा धार में 42.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। भोपाल, रायसेन और बैतूल में आज सोमवार सुबह से बादल छाए हैं। रायसेन में रात में बूंदाबांदी भी हुई। धार जिले में तेज धूप निकली है। शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। लोग केवल जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। इससे पहले रतलाम में रविवार रात 12 बजे बूंदाबांदी हुई। बादलों की गड़गड़ाहट के साथ बिजली चमकी। खरगोन में भी रविवार रात 12 बजे तेज बिजली कड़की। 15 मिनट तक बारिश का दौर चला। बड़वानी जिले के मंडवाड़ी निहाली गांव में रविवार देर रात आकाशीय बिजली गिरी। इससे किसान सलु बरडे के दो बैलों की मौत हो गई। जबलपुर में 3 साल का रिकॉर्ड टूटा प्रदेश के बड़े शहरों में जबलपुर सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह अप्रैल महीने में पिछले तीन वर्षों का सबसे अधिक तापमान है। इसके अलावा ग्वालियर में 42.4 डिग्री, भोपाल में 41.8 डिग्री, उज्जैन में 41.4 डिग्री और इंदौर में 40.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश में पहली बार 44°C के पार पहुंचा पारा शनिवार को इस सीजन में पहली बार मध्यप्रदेश में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा। रतलाम में अधिकतम तापमान 44 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि उमरिया, मंडला, गुना और अन्य कई जिलों में भी तेज गर्मी का असर रहा। 20 अप्रैल का मौसम पूर्वानुमान मौसम विभाग के अनुसार 20 अप्रैल को प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा, जबकि कुछ स्थानों पर यह 42 डिग्री से भी ऊपर जा सकता है। अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बैतूल जैसे जिलों में तापमान 35 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। जनजीवन पर असर तेज गर्मी के चलते दिन के समय सड़कों पर आवाजाही कम हो गई है। लोग केवल जरूरी काम के लिए ही घर से बाहर निकल रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में लू के कारण पशुधन और फसलों पर भी असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए। आगे क्या मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटे प्रदेश के लिए चुनौतीपूर्ण रहेंगे। तापमान ऊंचा बना रहेगा, हालांकि कुछ क्षेत्रों में आंशिक बादल छाने से हल्की राहत मिल सकती है। एमपी मौसम अपडेट के अनुसार, अप्रैल के अंतिम सप्ताह में भी गर्मी का असर जारी रहने की संभावना है, जिससे प्रदेश में लू की स्थिति और गंभीर हो सकती है। मौसम में बदलाव की वजह क्या है? मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन की वजह से बादल बन रहे हैं। इसी कारण कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश और बादल देखने को मिल रहे हैं। इसके अलावा 23 अप्रैल के आसपास एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में सक्रिय हो सकता है, लेकिन इसका असर मध्य प्रदेश में सीमित रहने की संभावना है। प्रदेश में छतरपुर जिला सबसे गर्म इससे पहले रविवार को पूरा प्रदेश गर्म रहा। छतरपुर के नौगांव में पारा सबसे ज्यादा 44.3 डिग्री दर्ज किया गया। गर्मी के इस सीजन में पहली बार पारा 44 डिग्री के पार पहुंचा। मंडला प्रदेश का दूसरा सबसे गर्म शहर रहा। यहां तापमान 43.9 डिग्री दर्ज किया गया। इसी तरह छतरपुर के खजुराहो में 43.4 डिग्री, दतिया, उमरिया-सतना में 43.1 डिग्री, दमोह में 43 डिग्री, नर्मदापुरम में 42.8 डिग्री, सीधी-सागर में 42.6 डिग्री, मलाजखंड में 42.5 डिग्री, रीवा में 42.4 डिग्री, धार में 42.2 डिग्री, टीकमगढ़ और श्योपुर में तापमान 42 डिग्री रहा। बड़े शहरों की बात करें तो जबलपुर में सबसे ज्यादा 42.5 डिग्री, ग्वालियर में 42.4 डिग्री, भोपाल में 41.8 डिग्री, इंदौर में 40.6 डिग्री और उज्जैन में 41.4 डिग्री सेल्सियस रहा।  

बीजेपी अध्यक्ष ने शोकाकुल मां की मदद की, 1800 किमी दूर नेपाल तक पहुंचाई बेटे की पार्थिव देह

बैतूल मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में एक मार्मिक घटना घटी। यहां नेपाल के एक युवक की ट्रेन से गिरने से मौत हो गई। युवा बेटे के यूं अचानक दम तोड़ देने से मां का तो कलेजा फट पड़ा। वे मृत बेटे को नेपाल ले जाकर वहीं अंतिम संस्कार करना चाहती थीं पर इतने पैसे ही नहीं थे। स्थानीय विधायक और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को जब यह जानकारी मिली तो उन्होंने शोकाकुल मां की यह इच्छा तुरंत पूरी कर दी। बीजेपी अध्यक्ष ने एंबुलैंस से युवक की पार्थिव देह नेपाल भेजने की व्यवस्था की ​और इसका पूरा खर्च खुद वहन किया। नेपाल के परिवार के साथ 16 अप्रैल को यह दुखद हादसा हुआ था। वहां के रमेश दमाई दुर्घटना का शिकार हो गए। नेपाल के कंचनपुर जिले के भीमदत्त के रहनेवाले रमेश अपने परिवार सहित यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान बैतूल जिले के गंज थाना क्षेत्र में वे चलती ट्रेन से गिर गए। बाजपुर- मलकापुर के पास गिरे रमेश दमाई की मौके पर ही मौत हो गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ से टूट पड़ा। परिवार के पास इतने पैसे ही नहीं थे कि वे युवक का शव नेपाल ले जा सकें कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 29 वर्षीय रमेश दमाई के अंतिम संस्कार का सवाल उठा। दुखद घटना के बाद परिवार पहले से ही शोकग्रस्त था, ऐसे में स्थानीय लोगों ने अंतिम संस्कार बैतूल में ही करने का सुझाव दिया लेकिन मृतक की मां इसपर सहमत नहीं थीं। वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार अपने देश यानि नेपाल में ही करना चाहती थीं। हालांकि इसमें बड़ी अड़चन थी। परिवार के पास इतने पैसे ही नहीं थे कि वे युवक का शव नेपाल ले जा सकें। आर्थिक तंगी के कारण रमेश दमाई के पार्थिव शरीर को उनके देश ले जाना संभव नहीं हो पा रहा था। एक सामाजिक कार्यकर्ता के माध्यम से बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष और स्थानीय विधायक हेमंत खंडेलवाल को इसकी सूचना मिली। शोकाकुल मां की सहायता के लिए वे तुरंत आगे आए। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष विधायक हेमंत खंडेलवाल ने मां की अंतिम इच्छा पूरी करते हुए उनके बेटे की पार्थिव देह को बैतूल से नेपाल तक पहुंचाने की व्यवस्था कर दी। कंचननगर तक पार्थिव देह को सुरक्षित पहुंचाने का पूरा खर्च बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष विधायक हेमंत खंडेलवाल ने ही उठाया स्वर्गीय रमेश दमाई की पार्थिव देह को एंबुलेंस से नेपाल पहुंचाने का निर्णय लिया गया। शनिवार शाम एंबुलेंस शव लेकर नेपाल के लिए रवाना हुई। बैतूल से लगभग 1800 किलोमीटर दूर नेपाल के कंचननगर तक पार्थिव देह को सुरक्षित पहुंचाने का पूरा खर्च बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष विधायक हेमंत खंडेलवाल ने ही उठाया। उनकी इस पहल को मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का अनुपम उदाहरण माना जा रहा है। उल्लेखनीय है विधायक हेमंत खंडेलवाल द्वारा विजय सेवा न्यास के माध्यम से बैतूल में 'शांति वाहन' सेवा का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत जरूरतमंद परिवारों को पार्थिव देह घर तक पहुंचाने की नि:शुल्क सुविधा दी जाती है। जिले में यह सेवा लंबे समय से निरंतर जारी है।

बाइक स्टंट के दौरान हुई त्रासदी, ट्रेलर से टकराकर 3 युवकों की मौत

रीवा मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रील बनाने का खतरनाक शौक एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ. मऊगंज के नेशनल हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार में रील बनाते समय यह हादसा हुआ. घटना का खौफनाक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तीन युवक तेज रफ्तार बाइक पर नजर आ रहे हैं।  दरअसल, मऊगंज थाना क्षेत्र के पन्नी पथरिया स्थित नेशनल हाईवे पर यह हादसा हुआ. दो बाइकों में सवार कुल पांच लोग इसकी चपेट में आ गए. जानकारी के अनुसार, एक पल्सर बाइक पर सवार तीन युवक तेज रफ्तार में चलते हुए मोबाइल से रील बना रहे थे. इसी दौरान उनकी बाइक सड़क किनारे खड़े ईंट से लोड ट्रेलर से जा टकराई।  टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवक उछलकर दूर जा गिरे और मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई. इसी बीच पीछे से आ रही दूसरी बाइक भी उसी खड़े ट्रेलर से भिड़ गई, जिससे उसमें सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।  पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया गया. सची पाठक ने बताया कि सोशल मीडिया के लिए खतरनाक स्टंट और लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ. घायलों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।  डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों घायलों को बेहतर इलाज के लिए संजय गांधी अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उनका इलाज जारी है. पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है।  मृतकों और घायलों की पहचान पुलिस के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान 17 वर्षीय उपलक्ष कोल, 22 वर्षीय अमरीश कोल और 17 वर्षीय हेमराज कोल के रूप में हुई है. तीनों बेला गांव के निवासी थे और लौर थाना क्षेत्र से संबंधित थे।  वहीं, हादसे में घायल हुए दो सगे भाइयों की पहचान प्रशांत द्विवेदी और प्रदीप द्विवेदी के रूप में हुई है, जो चितपुरवा गांव के रहने वाले हैं. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया के लिए खतरनाक स्टंट के कारण तीन लोगों की मौत और दो के घायल होने की पुष्टि हुई है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोहनखेड़ा महातीर्थ में आदिराज पारणा महोत्सव में बढ़ाई सहभागिता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोहनखेड़ा महातीर्थ में आदिराज पारणा महोत्सव में की सहभागिता पारणोत्सव में मुख्यमंत्री का उपवास, संस्कार और सेवा का संगम का संदेश मोहनखेड़ा महातीर्थ पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. यादव, किए दर्शन धार  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अनेक योनियों के पश्चात मानव शरीर की प्राप्ति होती है, जो पंचतत्वों से निर्मित है। इस शरीर को संस्कारित करने के लिए उपवास एक श्रेष्ठ माध्यम है। आज अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर पारणोत्सव के माध्यम से इस जीवन को पुण्य संचयन से जोड़ने का यह अवसर अत्यंत पावन और कल्याणकारी है। ऐसे उत्सवों में सहभागिता से मानव जीवन धन्य हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज मोहनखेड़ा महातीर्थ में आयोजित आदिराज पारणा महोत्सव (वर्षीतप पारणा महोत्सव) में यह बात कही। आदिराज पारणा महोत्सव (वर्षीतप पारणा महोत्सव) का  भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब की पावन निश्रा में संपन्न हुआ। आयोजन के दौरान 550 से अधिक तपस्वियों का पारणा अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विधिवत संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे चराचर जगत में सूर्य ऊर्जा का संचार करता है, उसी प्रकार मानव जीवन में गुरुदेव सूर्य के समान मार्गदर्शक होते हैं। जीवन में अनेक प्रकार के भटकाव आते हैं, किन्तु अच्छे और बुरे का अंतर समझाने का कार्य गुरुदेव ही करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुदेव आचार्य राजेन्द्र सूरी जी महाराज के आशीर्वाद से ही सरकार भौतिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मानव अपने संस्कारों को न भूले और आदिकाल से चली आ रही सनातन संस्कृति से जुड़ा रहे। जीवन में पाने से अधिक आनंद देने में है, इसी उद्देश्य के साथ सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जनजातीय अंचल में गुरुदेव के आगमन से नई चेतना का संचार हो रहा है। गुरुदेव के इंदौर में चातुर्मास आगमन पर राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा। साथ ही, उनके आशीर्वाद से शासन के कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से पूर्ण करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन स्तर पर सामाजिक चेतना के विकास के लिये अनेक कार्य किए जा रहे हैं। गौशालाओं में प्रति गाय अनुदान राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये की गई है। दुग्ध उत्पादन और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गरीबों के जीवन स्तर में सुधार और उनके उत्थान के लिए सरकार संकल्पित होकर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसिद्ध मोहनखेड़ा महातीर्थ में पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन कर दर्शन किए। गच्छाधिपति पूज्य श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब मानव के मन में धर्म का अंश जागृत होता है, तभी वह इस प्रकार के पुण्य आयोजनों में सहभागी बनता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आगमन पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वे प्रदेश सेवा के लक्ष्य को लेकर निरंतर आगे बढ़ें, उनका आशीर्वाद सदैव साथ है। इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विरासत के गौरव को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ किसान, महिला, युवा और गरीब वर्ग के कल्याण हेतु सतत कार्य कर रही है। आदिराज पारणा महोत्सव आदिराज पारणा महोत्सव जैन धर्म का एक प्रमुख एवं पवित्र आध्यात्मिक आयोजन है, जो प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की तपस्या की स्मृति में मनाया जाता है। जैन परंपरा के अनुसार, भगवान ऋषभदेव ने 400 दिन की कठोर वर्षीतप साधना पूर्ण करने के उपरांत अक्षय तृतीया के दिन हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस कुमार के हाथ से गन्ने के रस (इक्षुरस) से पारणा किया था। इसी ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा के निर्वहन में प्रतिवर्ष अक्षय तृतीया के अवसर पर वर्षीतप करने वाले तपस्वियों का पारणा कराया जाता है, जो आत्मसंयम, त्याग और तपस्या की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में पूर्व विधायक वेलसिंह भूरिया, ट्रस्ट अध्यक्ष सूर्य प्रकाश  भंडारी, जैन संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश तांतेड, जैन संघ के प्रमुख महेंद्र व्होरा, ट्रस्ट सचिव मुकेश  जैन, नवयुवक परिषद राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश छाजेड़ उपस्थित रहे।  

राज्य सरकार बेटियों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बेटियों के सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है राज्य सरकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार जिले के सिरसोदिया में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 400 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने नव-दंपत्तियों पर पुष्पवर्षा कर दिया आशीर्वाद धार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश की बेटियों के सशक्तिकरण और उनके उज्जवल भविष्य के लिए पूरी तरह संकल्पित है। सामूहिक विवाह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए संबल और सहयोग के जीवंत प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर धार जिले के ग्राम सिरसोदिया में 'मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना' के अंतर्गत आयोजित भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सांस्कृतिक महत्व और सामाजिक आधार  मुख्यमंत्री ने कहा कि धार जिले की यह पावन धरा भगवान कृष्ण एवं माता रुक्मणी की ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ी है, जिससे इस मांगलिक आयोजन का महत्व और अधिक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि विवाह हमारी गौरवशाली संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी और समाज का आधार है। प्रदेश सरकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के साथ एक सच्चे मित्र की तरह हमेशा खड़ी है। अभिभावक के रूप में निभाई भूमिका मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं अभिभावक का दायित्व निभाते हुए सभी 400 नव-विवाहित जोड़ों पर पुष्पवर्षा की और उन्हें सुखद एवं मंगलमय वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं।         मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेरा यह सौभाग्य है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से बेटियों के विवाह में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हुआ। भारतीय संस्कृति में विवाह एक श्रेष्ठ और पवित्र संस्कार है यह 16 संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण है जिसे "पाणिग्रहण संस्कार"भी कहा जाता है। सरकार की इस योजना के माध्यम से उन सभी गरीब अभिभावकों की इस चिंता को खत्म किया है।जिससे वे बेटियों की शादी को बोझ नहीं वरदान समझे।  इस योजना के माध्यम से गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित परिवारों को उनकी बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता की जाती है। नवविवाहित जोड़ों को 49 हजार रूपए की राशि का अर्थिक सहयोग दिया जाता है। क्षेत्रीय विधायक कालुसिंह ठाकुर, प्रभारी कलेक्टर अभिषेक चौधरी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि,वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित रहे।  

सिंहस्थ महापर्व 2028 के लिए उज्जैन में चल रहे विकास कार्यों पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान

सिंहस्थ महापर्व 2028 के अंतर्गत उज्जैन शहर में निरंतर किए जा रहे हैं विकास कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने उज्जैन में 18 करोड़ रुपए की लागत की सड़क का किया लोकार्पण उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ महापर्व 2028 के अंतर्गत उज्जैन शहर में निरंतर विकास के कार्य किए जा रहे हैं। शहर के सौंदर्यीकरण की दिशा में आज एक और सौगात शहरवासियों को मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी ओर से सभी नागरिकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को उज्जैन प्रवास के दौरान 18 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित कोठी रोड संकुल से देवास रोड और विक्रम नगर तक मार्ग चौडीकरण और उन्नयन कार्य का लोकार्पण कर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोकार्पण के बाद मार्ग पर चलकर यहां किए गए विकास कार्यों का अवलोकन किया तथा स्थानीय जनता से भी भेंट की। लोकार्पण के दौरान वेद पाठी बटुकों के द्वारा मंत्रोच्चार और स्वस्ती वाचन किया गया। साथ ही कलापथक दल द्वारा आकर्षक प्रस्तुति और झांझ मंजिरे और डमरु वादन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी इस अवसर पर डमरु वादन किया गया। इस अवसर पर महापौर मुकेश टटवाल, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संजय अग्रवाल, एमआईसी सदस्य शिवेन्द्र तिवारी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि उक्त विकास कार्य नगर निगम के द्वारा किया गया है। लगभग 02 कि.मी. लंबा यह मार्ग देवास रोड़ से कोठी लिंक रोड़ होता हुआ विक्रम नगर की तरफ मिलेगा। यहां पर मार्ग के बीच में और दोनों तरफ पौधारोपण और आकर्षक विद्युत साज सज्जा की गई है। साथ ही मार्ग के दोनों तरफ सुबह और शाम की पैदल सैर करने के लिए पेवर ब्लाक भी बनाए गए हैं। इससे सौंदर्यीकरण के साथ-साथ यातायात भी सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित होगा। इस मार्ग से जिला न्यायालय परिसर और अन्य प्रमुख कार्यालयों तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। जिससे आमजन को सुविधा होगी। मार्ग में प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था भी की गई है। कार्यक्रम का संचालन शैलेन्द्र व्यास स्वामी मुस्कुराके ने किया।  

पचमढ़ी में गर्म जलवायु में सेब के बागान, मध्य प्रदेश के सबसे ऊंचे स्थान पर पर्यटकों का आकर्षण

नर्मदापुरम  देश के चुनिंदा हिल स्टेशनों में शामिल पचमढ़ी विभिन्न वैरायटी के आमों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां शासकीय पोलो उद्यान ने नया प्रयोग करके सभी को हैरान कर दिया है. पचमढ़ी में जल्द ही सेब बागान आकर्षण का केंद्र होंगे. क्योंकि यहां हिमाचल प्रदेश के सेब के पौधे लगाकर उत्पादन करने का प्रयोग सफल हो गया है. दो साल पहले गर्म वातावरण में भी फल देने वाले सेब की तीन वैरायटियों के पौधे लगाए गए थे, जिनमें फल आने लगे हैं. जिसका स्वाद अगस्त-सितंबर महीने में पकने पर मिल पाएगा. इसी के साथ ही प्रदेश की दूसरी सरकारी नर्सरियों में भी सेब के पौधे लगाने की तैयारी होगी. वहीं किसानों को पचमढ़ी के उद्यान में पौधे तैयार करके लगाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. जिससे गर्म वातावरण में पैदा होने वाले सेब किसानों की आय का जरिया बन सकें।  सभी वातावरण में मिलते हैं फल पचमढ़ी के शासकीय पोलो उद्यान में लगाए गए 500 पौधों में से 35% फलदार हो गए हैं. वहीं 40% पौधों में फूल लगे हैं, जो जल्द ही फल बनने की प्रक्रिया में पहुंच जाएंगे. दो साल पहले पोलो उद्यान की दो एकड़ जमीन पर हिमाचल प्रदेश की एचआर 99, अन्ना इजरायल और डोरसेट गोल्डन वैरायटी के पौधों का रोपण हुआ था. यह पौधे वहां की प्राइवेट नर्सरियों से लाए गए थे. जो अब चार से पांच फीट तक ऊंचाई के हो गए हैं. सेब की इन वैरियटयों का चुनाव गर्म और सर्द वातावरण में पौधों के पनपने और फल देने के कारण किया गया था. इन वैरायटी के सेब पौधों को ज्यादा ठंडे वातावरण की आवश्यकता नहीं होती है. सामान्य तापमान में भी सेबों की पैदावार होती है. पचमढ़ी के वातावरण में सेब के पौधों की उचित देखभाल और संरक्षण के कारण यह फल देने लगे हैं।  सेब से मिल सकता है लाखों का मुनाफा पोलो उद्यान के प्रभारी राजू गुर्जर बताया, "शुरुआत के 4 साल बाद एक सेब के पौधे से 25 से 30 किलो तक फल मिल सकते हैं. इसके बाद जैसे-जैसे पौधा बड़े पेड़ का रूप लेगा तब उत्पादन दोगुना हो जाएगा. एचआर 99 प्रजाति के 800 पौधे एक एकड़ में लगाए जा सकते हैं. यदि किसान 1 एकड़ में 500 पौधे लगाकर उत्पादन लेता है तो एक पौधे से 25 किलो के हिसाब से कुल 12500 किलो सेब प्राप्त कर सकता है. जिसका थोक मूल्य 4 से 5 लख रुपए तक जा सकता है।  सेब लगाने का प्रयोग हुआ सफल पोलो उद्यान के प्रभारी राजू गुर्जर ने बताया, "2 साल पहले पचमढ़ी में सेब के उत्पादन का प्रयोग किया गया था. जो सफल हुआ है. हिमाचल प्रदेश से जो पौधे ले गए थे आज इनमें फूल और फल दोनों लग रहे हैं. प्रदेश में पचमढ़ी का वातावरण हिमाचल के सेब पौधों के लिए उपयुक्त था, क्योंकि यहां गर्मी में भी अधिकतम तापमान 35 डिग्री तक रहता है. सर्दी में एक डिग्री तक तापमान पहुंचता है. मिश्रित वातावरण के कारण सेब का बागान लगाने का प्रयोग सफल हुआ है।  उन्होंने आगे बताया, "अगस्त में जो फल लगे हैं वह पकना शुरू होंगे. तब यह देखा जाएगा कि कितने पौधों से कितना उत्पादन हुआ. इसके बाद पौधों की संख्या बढ़ाई जाएगी और मैदानी क्षेत्र की नर्सरी और किसानों को भी पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे. किसानों को सेब के पौधे और उनका उत्पादन बढ़ाने का उन्नत प्रशिक्षण देने की भी हमारी तैयारी है. भविष्य में पचमढ़ी के साथ कई अन्य स्थानों पर भी सेब के बागान देखने को मिल सकते हैं।