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एम्स भोपाल से मातृ मृत्यु के वैज्ञानिक कारणों की पहचान, बिना किसी झंझट के फ्री पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी

भोपाल  प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) की स्थिति को सुधारने और प्रसव के दौरान होने वाली मौतों के वास्तविक कारणों की पहचान के लिए एम्स भोपाल में अब मातृ मृत्यु के मामलों में मुफ्त पैथोलॉजिकल (क्लिनिकल) ऑटोप्सी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह सेवा उन परिवारों के लिए मददगार साबित होगी जो अपनी प्रियजन की असामयिक मृत्यु के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझना चाहते हैं। खास बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया पुलिस हस्तक्षेप से मुक्त है और पूरी तरह गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न की जाती है। आमतौर पर ऑटोप्सी या पोस्टमार्टम का नाम आते ही पुलिस और कानूनी कार्यवाही का विचार आता है, लेकिन एम्स की यह सुविधा इससे पूरी तरह अलग है। यह एक क्लिनिकल ऑटोप्सी है, जो केवल परिवार के लिखित अनुरोध और सहमति पर की जाती है। इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती। इसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सा विज्ञान की मदद से मृत्यु के उन कारणों को खोजना है, जो सामान्य जांच में स्पष्ट नहीं हो पाते। एम्स प्रबंधन के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया लगभग डेढ़ घंटे में पूरी हो जाती है। विशेषज्ञों द्वारा केवल जांच के लिए आवश्यक सूक्ष्म ऊतक ही लिए जाते हैं और सभी अंगों को पुनः शरीर में सुरक्षित स्थापित कर दिया जाता है। चेहरे को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई जाती और शरीर को टांकों से सुरक्षित कर ससम्मान परिवार को सौंपा जाता है। इसलिए जरूरी है जांच     हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट के जरिए परिवार को पता चलता है कि मृत्यु के वास्तविक कारण क्या थे।     इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सी मौतें रोकी जा सकती थीं।     प्रमाणिक डेटा के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे। इनका कहना है     मातृ मृत्यु के मामलों को कम करना हमारी प्राथमिकता है। पैथोलाजिकल आटोप्सी के माध्यम से हम मृत्यु के उन सूक्ष्म कारणों तक पहुंच सकते हैं, जो भविष्य में अन्य महिलाओं की जान बचाने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने में मदद करेंगे- प्रो. डा. माधवानन्द कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।  

लाडली बहना की 35वीं किस्त जल्द, eKYC अपडेट किया है? अप्रैल में 1500 रुपये मिलने की उम्मीद

भोपाल  मध्य प्रदेश की 1.25 करोड़ महिलाओं को जल्द ही अप्रैल महीने की सौगात मिलने वाली है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 35वीं किस्त के रूप में जल्द ही 1500 रुपये खाते में आने वाले हैं। इस योजना के तहत अब तक 34 किस्तें जारी हो चुकी हैं। इन 34 किस्तों में पात्र महिलाओं के खाते में 54000 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा ट्रांसफर किया जा चुका है। पिछले महीने ग्वालियर जिले के भितरवार से मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त 13 मार्च को जारी की थी। इस महीने भी 10 से 15 अप्रैल के बीच 1500 रुपये की सम्मान राशि जारी हो सकती है। हालांकि अभी तक इस पर आधिकारिक अपडेट नहीं आया है। इस साल के बजट में मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के लिए भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है। इस योजना के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 23,883 करोड़ रुपये का बजट पारित किया है। समग्र पोर्टल पर करें लाडली बहना योजना का eKYC लाडली बहना योजना से बहुत सी लाभार्थियों के नाम हटा दिए गए हैं। पात्रता की वेरिफिकेशन के लिए सरकार ने ई-केवाईसी प्रक्रिया को अनिवार्य किया है। अगर आपने अभी तक ईकेवाईसी नहीं कराया है तो समग्र पोर्टल पर जाकर इस काम को तुरंत ही करा लें। लाडली बहना योजना का पैसा बस कुछ ही दिनों में जारी कर दिया जाएगा। अगर आपका ईकेवाईसी नहीं हुआ होगा तो 1500 रुपये की सम्मान राशि का पैसा अटक सकता है।  कब आ सकती है 35वीं किस्त? हालांकि फिलहाल लाड़ली बहना योजना की 35वीं किस्त को लेकर कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन सरकारी संकेतों और पिछले पैटर्न को देखते हुए माना जा रहा है कि यह राशि 10 से 15 अप्रैल के बीच महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की जा सकती है. इससे पहले योजना की 34वीं किस्त 13 मार्च को भेजी गई थी. इस बार भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंगल क्लिक के माध्यम से राशि जारी कर सकते हैं।  1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मिलेगा लाभ लाड़ली बहना योजना की 35वीं किस्त के तहत प्रत्येक पात्र महिला के खाते में 1500 रुपये ट्रांसफर किए जाने हैं. प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही हैं. वित्त विभाग ने किस्त जारी करने से जुड़ी प्रक्रिया शुरू कर दी है और किसी जिले से कार्यक्रम आयोजित कर राशि ट्रांसफर की जा सकती है।  60 साल की उम्र पूरी करने वाली महिलाओं को लेकर बदलाव अप्रैल माह में होने वाले नए सत्यापन के बाद जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो चुकी होगी, उनके नाम लाड़ली बहना योजना की सूची से हटाए जा सकते हैं. ऐसी महिलाओं को फिर वृद्धावस्था पेंशन योजना में शामिल किया जाएगा. प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव पात्रता नियमों के अनुरूप किया जा रहा है।  आधार लिंक और ई‑केवाईसी जरूरी योजना की 35वीं किस्त का लाभ पाने के लिए लाभार्थियों के बैंक खाते का आधार से लिंक होना और डीबीटी सक्रिय होना अनिवार्य है. साथ ही ई‑केवाईसी प्रक्रिया पूरी होना भी जरूरी है. इन्हीं आधारों पर पात्र महिलाओं को राशि भेजी जाती है।  अब तक 52 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ट्रांसफर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में बताया था कि लाड़ली बहना योजना के तहत अब तक महिलाओं के खातों में 52 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है. केवल 34वीं किस्त में ही 1 करोड़ 25 लाख से अधिक महिलाओं को करीब 1836 करोड़ रुपये दिए गए थे. नवंबर माह से मासिक सहायता में 250 रुपये की बढ़ोतरी के बाद महिलाओं को अब हर महीने 1500 रुपये मिल रहे हैं।  ‘मजबूर नहीं, मजबूत बनी हैं बहनें' : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से प्रदेश की महिलाएं अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं. वे न केवल घरेलू जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि अपने लिए रोजगार और स्व‑रोजगार के नए रास्ते भी खोज रही हैं. सरकार आने वाले समय में लाड़ली बहना योजना से जुड़ी महिलाओं को कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भी काम करेगी।  ऐसे चेक करें भुगतान की स्थिति लाभार्थी महिलाएं योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाकर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” विकल्प के माध्यम से अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालकर भुगतान की स्थिति देख सकती हैं. ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद पूरी जानकारी स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगी। 

MP और राजस्थान के बीच नई रेल लाइन: मुगलिया हाट, दुराहा और श्यामपुर जैसे स्टेशनों पर पहली बार चलेगी ट्रेन

भोपाल  मध्यप्रदेश के रेल यात्रियों को 2026 के अंत तक एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। भोपाल-रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना तेजी से अंतिम चरण में पहुंच रही है, जिसके पूरा होने पर प्रदेश के कई हिल और दूरदराज इलाकों में पहली बार ट्रेन पहुंचेगी और राजस्थान से सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा।हाल ही में कोटा मंडल के अंतर्गत खिलचीपुर-राजगढ़ सिटी (17.8 किमी) रेलखंड पर रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफल स्पीड ट्रायल भी किया गया। यह ट्रायल इस रूट पर जल्द यात्री सेवा शुरू होने का संकेत माना जा रहा है। कितना काम हुआ, कितना बाकी करीब 276 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना में अब तक 187 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें शेष 89 किलोमीटर का कार्य मार्च 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे कई स्टेशन इस परियोजना के तहत मध्यप्रदेश के राजगढ़ और सीहोर जिले के कई स्टेशन पहली बार रेल नक्शे पर आएंगे। इनमें पिपलहेड़ा, सोनकच्छ, नरसिंहगढ़, जमुनियागंज, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, झारखेड़ा, मुगलियाहाट, आदि शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लोग अब तक सड़क मार्ग पर निर्भर थे, लेकिन रेल सेवा शुरू होने के बाद भोपाल और राजस्थान के शहरों तक पहुंच आसान हो जाएगी। दूरी 100 किमी घटेगी, समय में 2-3 घंटे की बचत नई रेल लाइन शुरू होने के बाद भोपाल-कोटा के बीच करीब 100 किलोमीटर दूरी कम होगी और यात्रियों का 2 से 3 घंटे समय बचेगा। राजगढ़ और सीहोर के कई इलाके पहाड़ी और ग्रामीण हैं, जहां रेल सुविधा नहीं थी। नई लाइन इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ेगी, जिससे रोजगार, व्यापार और शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे।रेलवे अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे कई स्टेशन यह रहेगा संभावित किराया स्लीपर कैटेगिरी का     मुगलिया हाट 100–120 रुपए     झारखेड़ा 120–140 रुपए     दुराहा 130–150 रुपए     श्यामपुर 150–170 रुपए     जमुनियागंज 190–210 रुपए     कुरावर 170–190 रुपए     नरसिंहगढ़ 210–240 रुपए     सोनकच्छ 240–270 रुपए     पिपलहेड़ा 280–320 रुपए     ब्यावरा 320–360 रुपए  

समर्थन मूल्य पर पहले दिन हुई 1616 क्विंटल गेहूँ की खरीदी : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल.  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। गेहूँ का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 9 अप्रैल से शुरू हो चुका है। पहले दिन 45 उपार्जन केन्द्रों पर 1616 क्विंटल गेहूँ का उपार्जन किया गया है। उन्होंने बताया कि शेष संभागों में 15 अप्रैल से गेहूँ का उपार्जन शुरू किया जायेगा। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया है कि प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अभी तक 97 हजार 474 किसानों द्वारा 4 लाख 46 हजार 582 मीट्रिक टन गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। 

2840 स्थानों पर हुई जाँच, 3691 गैस सिलेण्डर जब्त : मंत्री राजपूत

भोपाल.  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्त संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिये निरंतर कार्यवाही की जा रही है, अभी तक 2840 स्थानों पर जांच की गई, 3961 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किये गए तथा 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रदेश के 734 रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की जांच कराई गई है। इसमें 01 प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रदेश के समस्त जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को सतत रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भण्डार है देश एवं प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की निरंतर सप्लाई हो सके एवं सप्लाई में कोई रुकावट न आए। मध्यप्रदेश और पूरे देश में एलपीजी (LPG) पेट्रोल] डीजल] पीएनजी एवं सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। रसोई गैस की स्थिति रसोई गैस के संबंध में प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के विरूद्ध एलपीजी सिलेण्डर का प्रदाय निरंतर रूप से किया जा रहा है। साथ ही कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार आवंटन प्रतिशत के आधार पर कमर्शियल गैस सिलेण्डरों की सप्लाई सतत रूप से की जा रही है। घरेलू एवं कॉमर्शियल की सप्लाई में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। घरेलू एवं कॉमर्शियल सिलेण्डर की सप्लाई एवं वितरण सामान्य है। खाद्य मंत्री राजपूत ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित 70% सीमा के अधीन संस्थाओं एवं प्रतिष्ठानों को तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार सप्लाई निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं। यह भी ध्यान रखा जाये कि सड़क पर कारोबार कर रहे छोटे व्यवसायी (स्ट्रीट वेण्डर) को भी उक्त अनुसार कमर्शियल सिलेण्डर प्रदाय किये जायें। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय (Extended Hours) तक काम कर रहे हैं। प्रदेश के जिलों में स्थित बॉटलिंग प्लांट तथा वितरकों के पास उपलब्धता एवं प्रदाय की सतत रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही माईग्रेन्ट लेबर, छात्रों आदि के लिए खाना पकाने के लिये 05kg के सिलेण्डर ऑयल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वह वैकल्पिक साधनों, जैसे इंडक्शन,सोलर कुकर, बायो गैस, गोबर धन तथा स्वसहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ का उपयोग करें। पीएनजी गैस सीजीडी संस्थाओं तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रतिदिन समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिन घरों में पाईपलाईन की अधोसंरचना उपलब्ध है, एवं सप्लाई प्राप्त नहीं कर रहे है, ऐसे 1.5 लाख घरों को आगामी 03 माह में पीएनजी से कनेक्ट करने के लिये निर्देशित किया गया। इस हेतु सभी सीजीडी संस्थाएं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कैम्प लगायें, जिसमें जिला प्रशासन, खाद्य विभाग नगर निगम/नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी संस्थाओं के जिला अधिकारी उपस्थित रहें। ऐसे सभी घरों एवं व्यवसाईयों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराई जाये। अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन स्थानों पर पूर्व से पीएनजी की पाइप लाईन है, सर्वप्रथम उन्हें प्राथमिकता से कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइन लाईन डालकर कनेक्शन का कार्य भी साथ-साथ किया जाए। सीजीडी संस्थाओं द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होंने जिला कलेक्टर्स के माध्यम से आवश्यक मैन पॉवर प्राप्त करने की कार्यवाही कर ली है तथा आगामी माहों में लक्ष्य के अनुसार नये पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशनुसार जिन स्थानों से पीएनजी की पाइन लाईन गई है, उसके आस पास के घरेलू एवं कमर्शियल उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन प्राप्त कर लें क्योंकि पीएनजी कनेक्शन प्राप्त न करने की स्थिति में आगामी 03 माह में एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। समस्त सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरूद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य शासन द्वारा पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिए सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन किये जाने के 24 घंटे के अंदर पाइपलाइन बिछाने की ROU स्वीकृतियां जारी की जा रही हैं। अभी तक प्राप्त सभी स्वीकृतियां जारी की जा चुकी है तथा कोई भी आवेदन शेष नहीं है। गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थाओं/सुधार ग़ृ़हों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्य प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी, आदि में जहां से आस-पास पाईपलाईन बिछी हुई है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां आस-पास पाईपलाईन गई है, उन क्षेत्रों की औद्योगिक इकाईयों की पहचान की जाकर पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश सीजीडी संस्थाओं को दिये गये। कालाबाजारी के विरूद्ध कार्यवाही सीजीडी संस्थाओं को घरेलू एवं व्यावसायिक पीएनजी के आवेदनकर्ताओं को पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये सीजीडी संस्थाओं के कन्ट्रोल रूम नं. निम्नानुसार प्रदाय किये गये है – अवंतिका गैस लिमिटेड – इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर (9424098887) गैल गैस लिमिटेड – देवास, रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788) नवेरिया गैस लिमिटेड – धार (07292-223311) थिंक गैस – भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-5727-107) IOCL – गुना (9425991090), मउगंज, रीवा(9424836488), अशोकनगर(9425119522), मुरैना(7223982333) BPCL – महैर, सतना, शहडोल(9424738607), सीधी, सिंगरौली(9424341954) गुजरात गैस लि. – रतलाम (7412230292) प्रदेश के उक्त शहरों में जिन स्थानों से पाईपलाईन गई है, उस पाईपलाईन के आस-पास के घरेलू एवं व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते है। प्रदेश के अन्य जिलों में पाईपलाईन का विस्तार होने के उपरांत पीएनजी कनेक्शन प्रदाय किये जा सकेंगे।    

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने की रतलाम एसएनसीयू टीम के समर्पित प्रयास की सराहना

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे हर नवजात को सुरक्षित जीवन की शुरुआत मिल सके। उन्होंने रतलाम के एसएनसीयू में नवजात की जीवन रक्षा में कार्यरत डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ एवं पूरी टीम के समर्पित प्रयास की सराहना की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह हमारे स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती और समर्पण का प्रमाण है। उल्लेखनीय है रतलाम के कांग्सी निवासी श्रीमती हुक्की, पति देवीसिंह, को प्रसव पीड़ा के बाद एमसीएच यूनिट में भर्ती किया गया, जहां 5 फरवरी 2026 को मात्र 26 सप्ताह में समय से पहले डिलीवरी हुई। जन्म के समय बच्चे का वजन केवल 700 ग्राम था और उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही थी। नवजात को तुरंत एसएनसीयू में भर्ती कर सिविल सर्जन डॉ. एम. एस. सागर के मार्गदर्शन और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. ए.पी. सिंह के नेतृत्व में उपचार शुरू किया गया। शुरुआत में बच्चे को सीपीएपी मशीन के माध्यम से ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और बाद में नेजल प्रॉन्स से ऑक्सीजन दी जाती रही। उपचार के दौरान बच्चे को कई बार एपनिया यानी सांस रुकने की समस्या हुई, जिसे प्रोटोकॉल के अनुसार नियंत्रित किया गया। कुछ दिनों बाद बच्चे को प्रीमैच्योरिटी के कारण एनीमिया हुआ, जिसके लिए उसे ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी देना पड़ा। धीरे-धीरे बच्चे की स्थिति में सुधार आने लगा और नली के माध्यम से मां का दूध देना शुरू किया गया, जिसकी मात्रा समय के साथ बढ़ाई गई। इस दौरान मां हुक्की ने कंगारू मदर केयर को नियमित रूप से अपनाया, जिससे बच्चे के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और उसका वजन बढ़ने लगा। नर्सिंग स्टाफ की देखरेख में बच्चे को कटोरी-चम्मच से दूध पिलाना भी शुरू किया गया। लगभग 61 दिनों तक निरंतर उपचार, निगरानी और देखभाल के बाद आखिरकार 7 अप्रैल 2026 को नवजात को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज के समय बच्चे का वजन बढ़कर 1300 ग्राम हो चुका था। परिजनों ने पूरी चिकित्सकीय टीम का आभार व्यक्त किया।  

निर्माण बाधाओं को दूर कर किसानों के खेतों तक पानी पहुँचाने के दिए निर्देश : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सर्किट हाउस रीवा में विभिन्न नहर परियोजनाओं के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि नहर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही सभी तकनीकी एवं प्रशासनिक बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए, जिससे किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए अविलंब पानी पहुँचाया जा सके। सिंचाई परियोजनाओं का उद्देश्य अंतिम छोर तक के किसानों को लाभान्वित करना है। निर्माण कार्य में अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारी समन्वय के साथ काम करें और सुनिश्चित करें कि परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी हों। भू-अर्जन, वन विभाग की अनुमति या अन्य स्थानीय स्तर की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाएं। कार्यों की गुणवत्ता और गति की नियमित निगरानी करें। आगामी सीजन को देखते हुए जल वितरण तंत्र को सुदृढ़ बनाएं। बैठक में बहुती नहर परियोजना, त्योंथर बहाव परियोजना, नईगढ़ी माइक्रो सिंचाई परियोजना सहित अन्य नहर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, जल संसाधन विभाग के अधिकारी एवं संबंधित परियोजनाओं के कार्यपालन यंत्री उपस्थित रहे।  

सकारात्मक वातावरण बना सकते हैं अच्छे आइडियाज : कुलगुरू तिवारी

भोपाल.  माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि जनसंपर्क का कार्य बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के क्षेत्र में काम करने के लिए उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशील होना आवश्यक बताया। तिवारी ने कहा कि पब्लिक रिलेशन के क्षेत्र के लोगों का पब्लिक से कनेक्शन बहुत मजबूत होना चाहिए। अगर उनके पास कोई सकारात्मक विचार हो और वे उसे मीडिया के साथ शेयर करें तो सकारात्मक समाचार तैयार हो सकते हैं और उनके विभाग की भी छवि बेहतर होती है। तिवारी ने कहा कि जनसंपर्क अधिकारियों को बहुत विनम्र होना चाहिए। प्रथम तकनीकी सत्र में एआई विशेषज्ञ कमलेश माहेश्वरी ने डिजिटल तकनीक के माध्यम से जनसंपर्क को बेहतर ढंग से क्रियान्वित करने पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज हर तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हस्तक्षेप बढ़ रहा है। जनसंपर्क में एआई बहुत सहायक साबित हो रही है। उन्होंने एआई की मदद से किसी प्रेस रिलीज को पाइंटस मे लिखना, उसे संपादित करना भी लाइव डेमो के माध्यम से सिखाया। चैटजीपीटी या जैमिनाई जैसे एआई टूल्स काम करते-करते खुद को अपडेट भी करते रहते हैं। माहेश्वरी ने कहा कि डिजिटल दुनिया में ऑडिएंस को टाकिंग पाइंट्स देना होता है। ऐसे में एआई यह काम बहुत अच्छे से कर सकता है। वह संदर्भों के लिए एक जैसी घटनाओं की एक सीरीज हमें दे सकता है जिसका उपयोग हम किसी सूचना को और इंटरैक्टिव बनाने के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई पर काम करने के लिए प्रॉम्ट का बिल्कुल सही होना जरूरी है। माहेश्वरी ने एआई और ग्राफिकल टूल्स के बारे में भी विस्तार से समझाया। दूसरे तकनीकी सत्र में शासन में डिजिटल नवाचार ई-आफिस पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस सत्र में जनसंपर्क अधिकारियों को ई-आफिस और ई-एचआरएमएस साफ्टवेयर का प्रशिक्षण भी दिया गया। इस पर एनआईसी भोपाल की ओर से धर्मेंद्र जैन, शैलेंद्र सिंह तथा मैपआईटी से मुबारक खान ने प्रशिक्षण दिया। अब डिजिटल दौर में कार्यालय अधिकतर डिजिटल हो गए हैं। ऐसे में अधिकारियों को ई-फाइलिंग नॉलेज मैंनेजमेंट सिस्टम आदि विषयों की जानकारी होना आवश्यक है। धर्मेंद्र जैन ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में भारी संख्या में दस्तावेज बनते हैं। इनका प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। मानवीय तरीके से फाइलों के प्रचलन में बहुत समय लगता है। डिजिटलीकरण और ई-ऑफिस जैसे नवाचार इसे सरल बनाते हैं। तीसरे सत्र में सूचना के अधिकार, प्रेस अधिनियम तथा मीडिया से जुड़े कानूनों, प्रावधानों पर पूर्व सूचना आयुक्त आत्मदीप जी ने जानकारी देते हुए कहा कि सूचना का अधिकार सुशासन में सहायक है। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ है। यह आजाद भारत का क्रांतिकारी कानून है। इससे आम आदमी को व्यवस्था से जुड़ी शीर्ष संस्थाओं से भी जानकारियां हासिल करने का अधिकार मिला है। आत्मदीप ने इस अवसर पर सूचना के अधिकार में वर्णित विविध प्रावधानों को भी विस्तार से समझाया। कई उदाहरणों के साथ उन्होंने लोकसेवकों के उत्तरदायित्वों पर भी चर्चा की। उन्होंने इस सत्र में प्रश्नोत्तर के माध्यम से भी प्रतिभागी अधिकारियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। जनसंपर्क के क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारियों को लगातार सीखते रहना चाहिए। फील्ड में रहने के कारण रोज होने वाले नए अनुभवों से हम हमेशा नई चीजें सीखते हैं। शासकीय सेवा में हमेशा नई बातें सीखने की आदत सफलता की ओर ले जाती है। ये बातें जनसंपर्क अधिकारियों एवं सोशल मीडिया हैंडलर्स की दक्षता उन्नयन के दो दिवसीय कार्यक्रम में जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक जी.एस. वाधवा ने कही। वे इस प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। वाधवा ने कहा कि शासकीय सेवा में हमेशा नया सीखना होता है। नित नई परिस्थितियां अधिकारियों को अनुभव संपन्न बनाती हैं। उन्होंने कहा कि हम जब भी किसी किए गए कार्य का मूल्यांकन करते हैं तो हर बार लगता है कि यह काम और बेहतर ढंग से हो सकता था। इस मूल्यांकन से सीख कर हम निकट भविष्य के लिए और अच्छी योजना बनाते हैं। अंतिम सत्र में जनसंपर्क विभाग के उप-संचालक सुनील वर्मा ने जनसंपर्क के लिए सोशल मीडिया के बेहतर उपयोग पर जानकारी दी। सोशल मीडिया का जनसंपर्क के क्षेत्र में बेहतर उपयोग के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के क्षेत्र में काम करने वाले लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने लक्षित वर्ग तक सूचनाएं पहुंचाने का प्रमुख माध्यम बना सकते हैं। इस माध्यम की स्पीड, एक्युरेसी और ओपननेस इसे विशेष बनाती है। वर्मा ने प्रदेश के जिला जनसंपर्क कार्यालयों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से संचार और संवाद के नवाचारों पर भी चर्चा की। विषय विशेषज्ञ वरिष्ठ पत्रकार सुनील शुक्ला ने सोशल मीडिया और जनसंपर्क विषय पर कहा कि ये माध्यम युवा वर्ग की पसंद का मीडिया हैं। इसकी विशेषता इसकी स्पीड और शेयरिंग के फीचर हैं। तमाम डिजिटल माध्यम लक्षित जनमानस तक खबरों को तुरंत पहुंचा सकने में सक्षम हैं। शुक्ला ने कहा कि इन माध्यमों पर हमें किसी भी कंटेंट को डालने से पहले भलीभांति जांच लेना चाहिए। इससे समाचारों और सूचनाओं की विश्वसनीयता बनी रहेगी। उद्घाटन सत्र में उपस्थित अतिथियों तथा विशेषज्ञों का आभार अपर संचालक गणेश कुमार जायसवाल ने माना। इस सत्र में विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो. पी. शशिकला भी उपस्थित थी। सत्र का संचालन डॉ. लोकेंद्र सिंह ने किया। प्रशिक्षण में जनसंपर्क संचालनालय और प्रदेश के सभी जिला जनसंपर्क अधिकारी उपस्थित थे। प्रशिक्षण का आयोजन जनसंपर्क विभाग एवं एमसीयू की प्रशिक्षण शाखा के तत्वावधान में हुआ। आयोजन का समन्वय डॉ. शलभ श्रीवास्तव ने किया। दूसरे दिन इस प्रशिक्षण के अंर्तगत जनसंपर्क की नीतियों और उनके क्रियान्वयन के व्यवहारिक पहलुओं सहित वित्तीय प्रबंधन पत्र विविध सत्र आयोजित होंगे।  

राज्यमंत्री गौर ने 90 लाख की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का किया भूमि पूजन

भोपाल.  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गुरूवार को गोविंदपुरा में विकास कार्यों का भूमि पूजन किया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि ये विकास कार्य क्षेत्र के समग्र विकास एवं जनसुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार आधारभूत सुविधाओं को बढ़ाते हुए नागरिकों का जीवनस्तर बेहतर बना रही है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कार्यक्रम में वार्ड क्रमांक 65 में 20 लाख रुपये की लागत से छत्रसाल नगर फेस-3 में बनने वाली बाउंड्रीवॉल, पेविंग ब्लॉक, सीसी रोड और कम्युनिटी हॉल के निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया। उन्होंने अर्चना कैम्पस में 8 लाख रुपए की लागत से बनने वाली सीसीरोड, अपूर्व इंक्लेव में 12 लाख रूपये की लागत से सांस्कृतिक स्टेज, पेविंग ब्लॉक और भवानी धाम पेस-1 में 8 लाख 50 हजार की लागत से सोसाइटी ऑफिस के पास सामुदायिक लाइब्रेरी के कार्य का भूमिपूजन किया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने छत्रपति नगर में 7 लाख की लागत से तैयार हो चुके सामुदायिक भवन का लोकार्पण भी किया। राज्यमंत्री ने बताया कि छत्रपति नगर कम्युनिटी हॉल के पास आरसीसी नाली एवं सीसी रोड का निर्माण कार्य 10 लाख रुपये की लागत से कराया जाएगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने नरेला जोड़ चौराहे का सौंदयीँकरण के निर्माण कार्य का भूमि पूजन भी किया गया, जिसकी लागत 3 लाख रुपए है। वार्ड स्थित रीगल ट्रेजर कॉलोनी के पार्क में 3 लाख रुपये की लागत से शेड एवं ओपन जिम इक्युपमेंट लगाने का कार्य भी किया जाएगा। उन्होंने न्यू-मिनाल छत्री पार्क में स्टेज बनाने के कार्य एवं पेविंग ब्लॉक लगाने के कार्य की रहवासियों को सौगात दी। चाणक्यपुरी में क्षेत्रवासियों की सुविधा एवं सामाजिक गतिविधियों को सशक्त बनाने के लिए कम्यूनिटी हॉल के निर्माण कार्य का विधिवत भूमि पूजन किया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों से चर्चा की और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी निर्देशित किया। कार्यक्रम के दौरान श्रीमती शिरोमणी शर्मा, श्रीमती उर्मिला मौर्य, श्री लवकुश यादव, श्री बीकम सिंह बघेल समेत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।  

काटजू अस्पताल में ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ पर गर्भ संस्कार एवं गोद भराई कार्यक्रम आयोजित

भोपाल.  विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर काटजू चिकित्सालय, भोपाल में नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे की पहल पर ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ (PMSMA) अंतर्गत गर्भ संस्कार सत्र एवं गोदभराई कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें आरोग्य भारती का सहयोग रहा। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को योग, संतुलित आहार, सकारात्मक सोच एवं स्वस्थ जीवनशैली के बारे में मार्गदर्शन दिया। डॉ. रचना दुबे ने बताया कि गर्भ संस्कार माँ और शिशु के सर्वांगीण विकास में सहायक है तथा तनाव, रक्तचाप नियंत्रण, बेहतर नींद व पाचन में लाभकारी है। डॉ. दुबे ने कहा कि आज से प्रारम्भ हुआ यह कार्यक्रम निरंतर जारी रहेगा, जिसके अंतर्गत प्रत्येक माह की 9 एवं 25 तारीख को प्रधान मंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को जांच के लिये आने वाली गर्भवती महिलाओं को आरोग्य भारती संस्था के विशेषज्ञों द्वारा गर्भ संस्कार से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताई जाएंगी एवं 7 माह पूर्ण कर चुकी महिलाओं को गोदभराई में चिकित्सालय द्वारा पौष्टिक आहार बास्केट प्रदान किया जाएगा जिससे मां एवं बच्चा दोनों स्वस्थ्य जीवन जी सकें।