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24वीं कुमार सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैम्पियनशिप का किया शुभारंभ

भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने शनिवार को मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित 24वीं कुमार सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैम्पियनशिप का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने देशभर से आए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिये शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार खेलों के समग्र विकास के लिए सतत रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की खेलोन्मुखी नीतियों और अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के कारण प्रदेश आज देश के अग्रणी खेल राज्यों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। मंत्री  सारंग ने कहा कि म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ शूटिंग अकादमियों में से एक है। यह अकादमी विश्वस्तरीय सुविधाओं और अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है। यहाँ खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में शूटिंग खेल की अपार संभावनाएं हैं और प्रदेश के खिलाड़ी ओलम्पिक, एशियन गेम्स सहित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक अर्जित कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। मंत्री  सारंग ने शूटिंग परिसर स्थित बैठक कक्ष में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर ग्रीष्मकालीन खेल शिविर आरोह-2026 सहित आगामी खेल गतिविधियों एवं कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में संचालक, खेल और युवा कल्याण  अंशुमान यादव, उप-संचालक  बीएस यादव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।  

प्रधानमंत्री मोदी ने काशी विश्वनाथ में किया था ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का अवलोकन

भोपाल  काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी के पावन परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ने अपनी सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आभा से डिजिटल दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस अनूठी पहल ने सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर 78 लाख 42 हजार 167 से अधिक लोगों तक अपनी डिजिटल रीच दर्ज कराई है। प्रधानमंत्री के अवलोकन से मिला वैश्विक विस्तार प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक के इस संगम का अवलोकन बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के बाद किया था। प्रधानमंत्री  मोदी ने इस वैदिक घड़ी को प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत मेल बताया। उनके अवलोकन के बाद सोशल मीडिया पर वैदिक घड़ी को लेकर नया उत्साह देखा गया, जिससे यह देश-विदेश में चर्चा का केंद्र बन गई। प्रधानमंत्री  मोदी के अवलोकन से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चर्चाओं का ऐसा वातावरण तैयार हुआ कि केवल सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म से ही लाखों उपयोगकर्ताओं तक इसकी गूँज पहुँची। प्रधानमंत्री  मोदी और अन्य आधिकारिक यूट्यूब चैनलों पर आयोजित लाइव स्ट्रीम को 5,933 दर्शकों ने सीधे देखा। साथ ही राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर हुए सीधे प्रसारण ने करोड़ों दर्शकों तक इसकी जानकारी पहुँचाई।  सोशल मीडिया के माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर हैशटैग #विक्रमोत्सव_वाराणसी भारत के 'ट्रेंडिंग सेक्शन' में नंबर 1 स्थान पर काबिज रहा, जो सनातन संस्कृति और भारतीय कालगणना से जुड़े आयोजनों के लिए एक डिजिटल मील का पत्थर है। 16 से अधिक प्रमुख हैशटैग्स को ट्रैक किया गया, जिनमें #Varanasi, #विक्रमादित्य_वैदिक_घड़ी और #Vedic Ghadi जैसे हैशटैग ने लाखों लोगों को आकर्षित किया। इस व्यापक कवरेज ने इस गौरवशाली वैज्ञानिक विरासत को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सांस्कृतिक चेतना का नया संवाहक मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा निर्मित इस घड़ी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सादर भेंट किया गया था। 04 अप्रैल 2026 को स्थापित यह घड़ी भारतीय कालगणना, पंचांग, और ग्रहों की स्थिति जैसी जटिल गणनाओं को सरलता से प्रस्तुत करती है। भविष्य की योजनाएँ इस सफल डिजिटल आउटरीच ने सिद्ध कर दिया है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति के वैज्ञानिक आधारों को जानने के लिए उत्सुक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, वाराणसी की सफलता के बाद अब अयोध्या के  राम मंदिर सहित देश के सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंग परिसरों में ऐसी वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना है, ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रकाश जन-जन तक पहुँच सके। यह न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि भारतीय काल-चिन्तन को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप (Vikramaditya Vedic Clock) जिन लोगों को वैदिक घड़ी अपने मोबाइल फोन पर चाहिए तो विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप वैदिक घड़ी का डिजिटल संस्करण है, जो भारतीय काल गणना (तिथि, नक्षत्र, योग, करण) और 7000 वर्षों का पंचांग दिखाता है। यह ऐप 189+ भाषाओं में उपलब्ध है, जो सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त और 30 घंटे के समय प्रारूप को Android/iOS पर दिखाता है। वैदिक घड़ी ऐप की मुख्य विशेषताएं     भारतीय काल गणना: यह ऐप समय को 30 मुहूर्तों में बांटकर दिखाता है, जो सूर्योदय पर आधारित है।     पंचांग विवरण: तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, और मास की सटीक जानकारी।     189+ भाषाएँ: यह ऐप हिंदी, अंग्रेजी सहित 189+ भाषाओं में उपलब्ध है।     शुभ/अशुभ समय: यह दैनिक 'राहुकाल', 'शुभ मुहूर्त' और 'चौघड़िया' की जानकारी देता है     इतिहास: इसमें महाभारत काल से लेकर अब तक के 7000 वर्षों का पंचांग समाहित है।     अलार्म: आप वैदिक समय के अनुसार अलार्म भी सेट कर सकते हैं। ऐप कैसे डाउनलोड करें? यह ऐप Google Play Store (Android) पर "Vikramaditya Vedic Clock" नाम से उपलब्ध है। App Store (iOS/iPhone) से भी इसे डाउनलोड किया जा सकता है।  

शाम 4 बजे भड़की आग ने लिया विकराल रूप, घंटों मशक्कत के बाद भी काबू नहीं

देवास इंदौर रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र क्रमांक 1 में श्रीनिवास बोर्ड एंड पेपर्स फैक्ट्री के परिसर में शनिवार शाम अचानक आग लग गई। यहां पुराने कागजों को रिसाइकल कर पेपर रोल बनाने का काम किया जाता है। पुराने पेपर के कंप्रेस्ड बंडलों तक पहुंची आग देखते ही देखते विकराल हो गई। लगभग 100 मीटर के दायरे में आग भड़कती रही। सूचना मिलने पर नगर निगम, टाटा, आयशर, सीआइएसएफ बीएनपी की दमकलें मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया। देर रात समाचार लिखे जाने तक आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका था। जानकारी के अनुसार शाम करीब 4:45 बजे नगर निगम फायर विभाग को आग की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही नगर निगम के 4 फायर टैंडर और कई टैंकर मौके पर पहुंचे। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्र की वाल्वो आयशर, टाटा इंटरनेशनल की दमकल भी मौके पर पहुंची। आग इतनी भीषण थी कि दमकल द्वारा चारों ओर से डाला जा रहा पानी भी बेअसर साबित हो रहा था। फायर ब्रिगेड की लगभग 16 गाड़ियों के अलावा टैंकरों से कई बार पानी लाया गया। आसपास के बोरवेल से भी पानी का छिड़काव लगातार किया गया। बावजूद इसके रात तक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। घटनास्थल पर एसडीएम अभिषेक शर्मा, तहसीलदार सपना शर्मा, सीएसपी सुमित अग्रवाल, औद्योगिक क्षेत्र टीआई शशिकांत चौरसिया, यातायात टीआइ पवन बागड़ी सहित पुलिसबल व प्रशासन का अमला भी मौजूद रहा। बड़ी मात्रा में जमा था स्क्रैप कागज बताया जा रहा है कि कंपनी में पुराने व स्क्रैप कागजों को प्रोसेस कर नए पेपर रोल व बाक्स तैयार किए जाते हैं। यहां पुराने गत्ते के बक्सों व रद्दी को कंप्रेस कर बड़े-बड़े बंडल के रूप में रखा गया था। आग रेलवे लाइन की ओर कंपनी के पिछले हिस्से से शुरू हुई और आगे की ओर बढ़ी। फायर ब्रिगेड कर्मचारी लगातार पानी का छिड़काव कर रहे थे, परन्तु बड़ी मात्रा में गत्ते के बंडल नीचे से फिर भभक रहे थे। जेसीबी, लोडर से हटाया कच्चा माल आग को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वहां भारी मात्रा में जमा कंप्रेस्ड पेपर बंडल व स्क्रैप कागजों को तेजी से हटाने का काम किया गया। हालांकि बड़ी मात्रा में माल होने के कारण घंटों की मशक्कत करना पड़ी। इस दौरान दो जेसीबी व चार लोडर लगातार कच्चा माल आग की ओर से अलग हटाते रहे। तहसीलदार सपना शर्मा ने बताया कि आग के कारणों व नुकसानी का फिलहाल आंकलन नहीं किया जा सका है।   

ग्लोबल वॉर्मिंग आज अलार्मिंग हो चुकी है, यह मुख्य चुनौती बनकर आई है सामने

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का आधार है। वर्तमान समय की बड़ी चुनौती यह है कि हम कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच खड़े हैं। पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस परंपरा के उत्तराधिकारी हैं जिन्होंने स्वस्थ नगर नियोजन के साथ जल संरक्षण के लिए विशाल इकोलॉजिकल सिस्टम बनाये। विद्वान, वास्तुकार राजा भोज द्वारा विकसित भोपाल इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सौभाग्य का विषय है कि सस्टेनेबल फ्यूचर इनोवेशंस इन ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिसेस जैसे विषय पर भोपाल में राष्ट्रीय सेमिनार हो रहा है। प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडव के जल प्रबंधन और नगर नियोजन को देखते हुए वहां भी इस प्रकार के आयोजन होने चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग कॉउंसिल मीटिंग के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग तथा इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस, कार्यक्रम के आयोजक हैं। पी.डब्ल्यू.डी. की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव का लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने शॉल-फल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम वंदे-मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर आईबीसी इनोग्रल सॉन्ग और लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों पर लघु फिल्म की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन किया। उनकी उपस्थिति में आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच निर्माण तकनीक पर केंद्रित एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। दूसरा एमओयू लोक निर्माण विभाग तथा गृहा संस्था के साथ किया गया। हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राजा भोज ने भोज पत्रों पर लेख और निर्माण कार्यों के माध्यम से हमें प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा की अद्भुत सौगात दी है। राजा भोज ने प्रकृति के साथ प्रगति‍की बात समरांगण सूत्रधार में स्पष्ट की थी। हमारे ग्रंथों में कहा गया है 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे' अर्थात् जो शरीर में है वही ब्रह्मांड में है। ग्रीन बिल्डिंग, पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश तत्वों के समावेश से हमारे घरों को उसी ब्रह्मंडीय संतुलन में वापस लाने की एक प्रक्रिया है। हमारे प्राचीन ग्रंथ यह मानते हैं कि एक भवन में इन सब तत्वों का समावेश आवश्यक है। वर्तमान दौर में जीपीएस एक नई तकनीक है, लेकिन पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है। यह प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है। तत्कालीन गणना की सटीकता इससे सिद्ध होती है कि वर्तमान में भी निश्चित तिथियों पर मौसम में बदलाव का अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में भी स्थापत्य कला का अद्भुद उदाहरण देखने को मिलते हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को मौजूदा दौर में विज्ञान के साथ जोड़ा है। आज आवश्यकता है कि हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राचीन वास्तुकला की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए भोपाल के बड़े तालाब और उज्जैन में शिप्रा नदी के आस-पास की संरचनाओं का उल्लेख किया। अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास हमारी प्राथमिकता है, लेकिन अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग हो, इन बिन्दुओं के साथ ही हम ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग आज अलार्मिंग हो चुकी है, यह मुख्य चुनौती बनकर सामने आई है। राज्य सरकार ने इस चुनौती का सामना करने में जन-जन की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुढ़ी पड़वा से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की है। गंगा दशहरा 25 मई को इसके अंतर्गत प्रदेश में कुएं, बाबड़ियों और सभी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। इसमें अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में सभी ने जल संरचनाओं पर निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर है। जल संचयन में डिण्डौरी और खंडवा जिले देश में क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर रहे हैं। सस्टेनेबल फ्यूचर केवल विचार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है : मंत्री  सिंह लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग प्रदेश के बेहतर भविष्य के लिए नवाचारों के साथ अधोसंरचना विकास को गति प्रदान कर रहा है। प्रदेश में टिकाऊ निर्माण के लिए भारतीय प्राचीन निर्माण तकनीक पर हम आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने वैदिक घड़ी को सराहा है। इस घड़ी के निर्माण का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जाता है। प्रदेश में बनने वाले सभी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बनाए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग ने अपने प्रशिक्षण कैलेंडर में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को शामिल किया है। प्रदेश में हाईवे और फ्लाईओवर्स को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है। मंत्री  सिंह ने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम लागत वाली ग्रीन बिल्डिंग तकनीकों का विकास किया जाए, जिससे आम नागरिक भी इनका लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रयासों से मध्यप्रदेश ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा तथा “लोक निर्माण से लोक कल्याण” की परिकल्पना साकार होगी। मंत्री  सिंह ने कहा कि “सस्टेनेबल फ्यूचर” केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे हमें आज से ही अपने कार्यों में लागू करना होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और संतुलित वातावरण प्रदान किया जा सके। लोक निर्माण विभाग ने बनाई अपनी नई छवि प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग और आईबीसी मध्यप्रदेश चैप्टर के प्रेसिडेंट  एस.आर. बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदृष्टि के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश में अब सभी भवन ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बन रही हैं। आईबीसी प्रेसिडेंट  चिन्मय देवनाथ ने कहा कि आज इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग काउंसिल … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों को मिला सुखद परिणाम

भोपाल  वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की राष्ट्रीय निवेश प्रोत्साहन एवं सुविधा एजेंसी इन्वेस्ट इंडिया द्वारा जारी ताजा निवेश आंकड़ों में मध्यप्रदेश रोजगार सृजन के मामले में देश में अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है। यह जानकारी भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी में सामने आई है, जो देश में निवेश के बढ़ते दायरे और राज्यों की भूमिका को रेखांकित करती है। राष्ट्रीय रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से घोषित किया गया है कि रोजगार सृजन में मध्यप्रदेश समूचे देश में आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र को पीछे छोड़कर शीर्ष स्थान पर रहा है। यह उपलब्धि राज्य में विकसित हो रहे निवेश अनुकूल वातावरण, अधोसंरचना विस्तार और उद्योगोन्मुख नीतियों का परिणाम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष-2025 को म.प्र. में रोजगार और उद्योग वर्ष घोषित किया गया। मध्यप्रदेश में निवेश संवर्धन को प्राथमिकता दी गई है। देश और विदेश में आयोजित इन्वेस्टर मीट, रोड-शो और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से निवेशकों से सीधा जुड़ाव स्थापित किया गया है। साथ ही रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की श्रृंखला के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार सुनिश्चित किया गया है। इन्वेस्ट इंडिया के ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सकल प्रयासों से मध्यप्रदेश न केवल निवेश आकर्षित करने में सक्षम है, बल्कि उसे प्रभावी रूप से रोजगार सृजन में भी परिवर्तित कर रहा है। राज्य अब देश के उभरते औद्योगिक और रोजगार केंद्र के रूप में अपनी पहचान सुदृढ़ कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष फोकस निवेश को रोजगार में परिवर्तित करने पर रहा है। इसी क्रम में कौशल उन्नयन पर विशेष ध्यान देते हुए उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्रशिक्षण को सुदृढ़ किया जा रहा है। विद्यार्थियों के प्लेसमेंट पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने में मदद मिल रही है। रोजगार मेलों और “युवा संगम” जैसे आयोजनों के माध्यम से भी बड़ी संख्या में युवाओं को अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इन्वेस्ट इंडिया ने 6.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य की 60 निवेश परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में सहयोग किया है। ये परियोजनाएं 14 राज्यों में फैली हुई हैं और इनके माध्यम से 31 हजार से अधिक संभावित रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इस व्यापक राष्ट्रीय परिदृश्य में मध्यप्रदेश ने रोजगार सृजन के क्षेत्र में शीर्ष स्थान प्राप्त करते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।  

उज्जैन एवं भोपाल पुलिस ने ट्रैक्टर एवं चारपहिया वाहन धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों का किया भंडाफोड़

भोपाल प्रदेश में संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश पुलिस को दो अलग-अलग प्रकरणों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। उज्जैन एवं भोपाल पुलिस द्वारा संगठित धोखाधड़ी गिरोहों का भंडाफोड़ करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर 20 ट्रैक्टर, 1 एक्सयूव्ही , 02 बोलेरो एवं 02 इनोवा कार सहित लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति जप्त की गई है। उज्जैन-ट्रैक्टर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश, 20 ट्रैक्टर (कीमत 1 करोड़ 80 लाख रुपए) जप्त जिले के थाना भाटपचलाना पुलिस द्वारा किसानों के साथ ट्रैक्टर धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपये मूल्य के 20 ट्रैक्टर जप्त किए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना भाटपचलाना क्षेत्र में किसानों द्वारा ट्रैक्टर धोखाधड़ी एवं ट्रैक्टर वापस न करने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराध पंजीबद्ध कर तत्काल विशेष टीम गठित कर विवेचना प्रारंभ की गई। 30 अप्रैल को तकनीकी साक्ष्यों एवं मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपी रफीक पिता गनी मोहम्मद निवासी ग्राम माधीपुरा को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से पुलिस ने उज्जैन, इंदौर, धार एवं रतलाम जिलों के विभिन्न क्षेत्रों से 1 करोड़ 80 लाख रुपये मूल्य के 20 ट्रैक्टर जप्त किए हैं। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों के भोले-भाले किसानों को निशाना बनाकर उन्हें ट्रैक्टर पर अधिक मासिक किराया देने का लालच देता था। इस प्रलोभन में आकर किसान अपने ट्रैक्टर आरोपी को सौंप देते थे। आरोपी ट्रैक्टरों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें अन्य जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों में बेच देता या गिरवी रख देता था। वह न तो किसानों को कोई किराया देता था और न ही ट्रैक्टर वापस करता था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने मोबाइल नंबर बदलता रहता था तथा अपने निवास स्थान से भी फरार रहता था। भोपाल- चार पहिया वाहन धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़, 05 वाहन (कीमत 80 लाख) जप्त जिले के थाना अयोध्यानगर पुलिस ने किराए पर वाहन लगवाने का झांसा देकर चार पहिया वाहन बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। प्रकरण में 01 आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1 महिन्द्रा एक्सयूव्ही , 02 बुलेरो एवं 02 इनोवा कार सहित कुल 05 चार पहिया वाहन (कीमत लगभग 80 लाख रुपये) जप्त किए। प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी द्वारा वाहन को एयरपोर्ट पर किराए से लगवाने का झांसा देकर अनुबंध के माध्यम से वाहन लिया गया तथा प्रारंभिक अवधि में किराया देने के बाद वाहन को भोपाल लाकर अन्य व्यक्तियों को सस्ते दामों पर बेच दिया गया। शिकायत पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना में सामने आया कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर टीकमगढ़, सागर एवं दमोह जैसे जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के वाहन मालिकों को सरकारी विभाग में वाहन लगवाकर अधिक किराया देने का लालच देते थे। उसके बाद वाहनो को भोपाल लाकर गिरोह उन्हें मजबूरी बताकर कम कीमत में अन्य व्यक्तियों को बेच देते थे। गिरोह के अन्य आरोपियों की तलाश जारी है तथा प्रकरण में और भी वाहनों की बरामदगी की संभावना है। मध्यप्रदेश पुलिस आमजन, विशेषकर किसानों एवं वाहन मालिकों से अपील करती है कि किसी भी प्रकार के लालच या प्रलोभन में आकर अपनी संपत्ति अज्ञात व्यक्तियों को न सौंपें। वाहन किराए पर देने से पूर्व संबंधित व्यक्ति की पूर्ण जानकारी एवं सत्यापन अवश्य करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।  

सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक विकसित होगा एकीकृत इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 3 मई को इन्दौर में इस परियोजना के प्रथम चरण का भूमि-पूजन करेंगे। यह पहल प्रदेश में अधोसंरचना, उद्योग और शहरी विकास को एकीकृत रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है। मध्यप्रदेश को सुदृढ़ औद्योगिक आधार और आदर्श निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर (IPEC) महत्वपूर्ण साबित होगा। कार्यक्रम में शॉर्ट फिल्म के माध्यम से कॉरिडोर के स्वरूप, संभावनाओं और क्षेत्रीय प्रभावों को दिखाया जाएगा। यह कॉरिडोर इन्दौर एयरपोर्ट के समीप स्थित सुपर कॉरिडोर को पीथमपुर निवेश क्षेत्र से जोड़ते हुए एक सुव्यवस्थित औद्योगिक धुरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से न केवल औद्योगिक इकाइयों को बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स, परिवहन और बाजार तक पहुंच भी अधिक प्रभावी बनेगी। यह परियोजना इन्दौर क्षेत्र में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स को एकीकृत कर निवेश के लिए एक संगठित और सक्षम वातावरण तैयार करेगी। इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से पीथमपुर निवेश क्षेत्र, लॉजिस्टिक हब, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को एकीकृत कनेक्टिविटी प्राप्त होगी। इससे उत्पादन और वितरण तंत्र अधिक प्रभावी बनेगा और उद्योगों के लिए संचालन की प्रक्रिया सरल होगी। यह परियोजना प्रदेश में निवेश प्रवाह को सुदृढ़ करने और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगी। परियोजना की प्रमुख विशेषताएं परियोजना के अंतर्गत सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक लगभग 20.28 किलोमीटर लंबाई का मार्ग विकसित किया जा रहा है। लगभग 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में नियोजित विकास का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए कुल 2360 करोड़ रु. की लागत निर्धारित की गई है। अधोसंरचना के तहत 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क तथा उसके दोनों ओर विकसित होने वाला बफर ज़ोन इस कॉरिडोर को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विस्तार योग्य बनाएगा। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और राष्ट्रीय राजमार्ग-52 के बीच प्रभावी कनेक्टिविटी स्थापित करते हुए औद्योगिक परिवहन को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाएगा। साथ ही, यह परियोजना इन्दौर क्षेत्र में संतुलित शहरीकरण और अधोसंरचना आधारित विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।  

तेज आंधी से शिवपुरी में अफरा-तफरी, दीवार ढही, पांच घायल, छत पर खड़ी दो महिलाएं गिरीं

शिवपुरी शिवपुरी में शनिवार की दोपहर अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में रौद्र रूप दिखा रहा सूरज काले बादलों के बीच छिप गया। इसके बाद जिले भर में आई तेज आंधी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक चली तेज आंधी ने शहर भर में आफत मचा दी। प्ले ग्राउंड पर पेड और पत्थर की बाउंड्री गिरने से पांच लोग मलबे में दब कर घायल हो गए। वहीं शहर के दो अलग-अलग हिस्सों में अपने मकानों की छत पर खड़े होकर तेज हवा का आनंद उठा रही एक महिला और एक युवती हवा के तेज झोंके के साथ उड़ते हुए छत से नीचे जमीन पर आकर गिरीं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। सभी घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सभी को गंभीर चोटें आई हैं। हालांकि सभी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। इसके अलावा शहर सहित अंचल में कई पेड़ टूट कर गिर गए, अंचल भर में दर्जनों स्थानों पर बिजली की लाईनें टूट गईं, जिससे ब्लैक शहर में दिन भर ब्लैक आउट के हालात बने रहे। प्ले ग्राउंड की बाउंड्री के नीचे ये दबे      बाउंड्री के यहां मोबाइल कंपनी की नई सिम बेचने व सिम पोर्ट करने वाले युवक पवन पुत्र चरण सिंह रजक उम्र 25 साल निवासी कोठी नंबर 27 व बृजेंद्र उर्फ गोलू पुत्र रामहेत रावत उम्र 27 साल निवासी खुड़ा। दोनों को अंदरूनी चोटें आई हैं, पवन जहां बेहोशी की हालत में आईसीयू में आक्सीजन पर उपचाररत है, वहीं बृजेंद्र की कमर व रीढ़ की हड्डी में चोट बताई जा रही है। वह भी अद्ध बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती है। रन्नौद से उपचार कराने के लिए शिवपुरी आए गिरजेश चंद्र आचार्य आंधी और पानी से बचने के लिए बाउंड्री के किनारे खड़े हुए थे, पेड़ के साथ जमींदोज हुई बाउंड्री के मलवे के नीचे वह दब गए। उनके पैर में कई फ्रैक्चर बताए जा रहे हैं। देवरी राजस्थान से अपनी पत्नी के साथ शिवपुरी घूमने के लिए आया बादल आदिवासी भी प्ले ग्राउंड से पास से गुजर रहा था। इसी दौरान बाउंड्री का एक पत्थर उसके सिर में आकर लगा, जिससे उसके सिर में चोट लग गई और वह मौके पर ही गिरकर बेहोश हो गया। उसके सिर में चोट आई है। एक अन्य युवक की मलवे में गिरकर घायल हो गया, हालांकि उसे बहुत अधिक चोट नहीं आई तो वह प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से चला गया। मौसम का लुत्फ उठाते हुए हवा में उड़ गईं गौशाला निवासी रामदेवी पत्नी अखिलेश लोधी उम्र 23 साल आंधी के दौरान छत पर जाकर खड़ी हो गई और मौसम का लुत्फ लेने लगी। इसी दौरान एक तेज हवा का झोंका आया और रामदेवी को अपने साथ हवा में उड़ता ले गया।      कुछ दूर जाने के बाद वह जमीन पर जा गिरी, जिससे उसके पैर में चोट आई है। अस्पताल में उसके पैर में टांके लगाने के बाद खूब के बहाव को रोका जा सका। पैर में फेक्चर की संभावना बताई जा रही है। यही हाल फतेहपुर क्षेत्र में विद्यापीठ स्कूल के पास रहने वाली अनुरति पुत्री संतोष जाटव उम्र 16 साल के साथ हुआ। वह छत पर से हवा के झोंके साथ उड़ती हुई सीधा जमीन पर आकर गिरी, उसके पैर व कमर में गंभीर चोट बताई जा रही है। कुछ सेकेंड के फेर से टला बड़ा हादसा ग्राम जाफरपुर से कुछ ग्रामीण शनिवार को ट्रैक्टर-ट्राली में भरकर उनके घर में आयोजित होने वाले किसी समारोह के आयोजन की खरीददारी करने के लिए शिवपुरी आए थे। ग्रामीणों ने अपने ट्रैक्टर-ट्राली पीएम हाउस के परिसर में लगाए और ट्राली से उतरे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान पास लगा एक पेड़ आंधी के झोंकों से टूट कर ट्राली पर जा गिरा। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो अगर कुछ सेेकेंड और ट्राली में सवार लोग नीचे नहीं उतरते तो यह पेड़ उनके ऊपर ही गिरता। लोगों का कहना है कि कुछ सेकेंड के फेर से बड़ा हादसा टल गया। होटल पर गिरा हाईमास्ट, हादसा टला कोलारस में पूरनखेड़ी टोल टैक्स के पास लगा एक हाईमास्ट का पोल आंधी के कारण उखड़ कर जमींदोज हो गया। यह पोल टोल टैक्स के पास बने एक ढाबे पर जाकर गिरा, जिससे ढाबा भी जमींदोज हो गया। इस घटना का सुखद पहलू यह रहा कि हादसे के समय होटल में कोई नहीं था, जिसके चलते काेई भी पोल व ढाबे के मलबे की चपेट में नहीं आया। नरवर के ईमलिया, सिमरिया में लगी आग नरवर क्षेत्र के गांव ईमलिया, सिमरिया और पारागढ़ में तेज आंधी के बीच आग लग गई, जिससे सैंकड़ों बीघा के खेतों में आग लग गई। टीआई नरवर विनय यादव का कहना है कि कुछ किसान खेत में नरवाई जला रहे थे। इसी दौरान तेज आंधी चल गई और आग आंधी के साथ उड़ती चली गई, जिससे इमलिया, सिमरिया, पारागढ़ तीन गांवों में दर्जनों किसानों के खेतों में भीषण आग गई। कई किसानों के खेतों में रखे भूसे के ढेर धूं-धूं कर जलने लगे। इस आग पर घंटों की मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड, स्थानीय किसानों के प्रयास आदि से काबू पाया जा सका।  

पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

  प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का है आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक ग्लोबल वॉर्मिंग आज अलार्मिंग हो चुकी है, यह मुख्य चुनौती बनकर आई है सामने राजा भोज ने प्रकृति के साथ प्रगति‍की बात स्पष्ट की थी समरांगण सूत्रधार में हर निर्माण में समाहित हों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश के तत्व प्रधानमंत्री मोदी ने प्राचीन ज्ञान-परंपरा को मौजूदा विज्ञान के साथ जोड़ा इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग कॉउंसिल की मीटिंग भी हुई आरंभ पीडब्ल्यूडी और आईआईटी इंदौर के बीच निर्माण तकनीक के विकास पर केंद्रित एमओयू का हुआ आदान-प्रदान लोक निर्माण विभाग ने गृहा संस्था के साथ भी साइन किया एमओयू सेमिनार में ग्रीन बिल्डिंग सामग्री, ऊर्जा दक्षता, प्राकृतिक प्रकाश एवं वेंटिलेशन, स्मार्ट टेक्नोलॉजी, प्रीडिक्टिव मेंटेनेंस आदि विषयों पर हुआ विचार-विमर्श मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर केंद्रित दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार का किया कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का आधार है। वर्तमान समय की बड़ी चुनौती यह है कि हम कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच खड़े हैं। पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस परंपरा के उत्तराधिकारी हैं जिन्होंने स्वस्थ नगर नियोजन के साथ जल संरक्षण के लिए विशाल इकोलॉजिकल सिस्टम बनाये। विद्वान, वास्तुकार राजा भोज द्वारा विकसित भोपाल इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सौभाग्य का विषय है कि सस्टेनेबल फ्यूचर इनोवेशंस इन ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिसेस जैसे विषय पर भोपाल में राष्ट्रीय सेमिनार हो रहा है। प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडव के जल प्रबंधन और नगर नियोजन को देखते हुए वहां भी इस प्रकार के आयोजन होने चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग कॉउंसिल मीटिंग के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग तथा इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस, कार्यक्रम के आयोजक हैं। पी.डब्ल्यू.डी. की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव का लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम वंदे-मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर आईबीसी इनोग्रल सॉन्ग और लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों पर लघु फिल्म की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन किया। उनकी उपस्थिति में आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच निर्माण तकनीक पर केंद्रित एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। दूसरा एमओयू लोक निर्माण विभाग तथा गृहा संस्था के साथ किया गया। हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राजा भोज ने भोज पत्रों पर लेख और निर्माण कार्यों के माध्यम से हमें प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा की अद्भुत सौगात दी है। राजा भोज ने प्रकृति के साथ प्रगति‍की बात समरांगण सूत्रधार में स्पष्ट की थी। हमारे ग्रंथों में कहा गया है 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे' अर्थात् जो शरीर में है वही ब्रह्मांड में है। ग्रीन बिल्डिंग, पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश तत्वों के समावेश से हमारे घरों को उसी ब्रह्मंडीय संतुलन में वापस लाने की एक प्रक्रिया है। हमारे प्राचीन ग्रंथ यह मानते हैं कि एक भवन में इन सब तत्वों का समावेश आवश्यक है। वर्तमान दौर में जीपीएस एक नई तकनीक है, लेकिन पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है। यह प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है। तत्कालीन गणना की सटीकता इससे सिद्ध होती है कि वर्तमान में भी निश्चित तिथियों पर मौसम में बदलाव का अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में भी स्थापत्य कला का अद्भुद उदाहरण देखने को मिलते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को मौजूदा दौर में विज्ञान के साथ जोड़ा है। आज आवश्यकता है कि हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राचीन वास्तुकला की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए भोपाल के बड़े तालाब और उज्जैन में शिप्रा नदी के आस-पास की संरचनाओं का उल्लेख किया। अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास हमारी प्राथमिकता है, लेकिन अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग हो, इन बिन्दुओं के साथ ही हम ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग आज अलार्मिंग हो चुकी है, यह मुख्य चुनौती बनकर सामने आई है। राज्य सरकार ने इस चुनौती का सामना करने में जन-जन की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुढ़ी पड़वा से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की है। गंगा दशहरा 25 मई को इसके अंतर्गत प्रदेश में कुएं, बाबड़ियों और सभी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। इसमें अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में सभी ने जल संरचनाओं पर निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर है। जल संचयन में डिण्डौरी और खंडवा जिले देश में क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर रहे हैं। सस्टेनेबल फ्यूचर केवल विचार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है : मंत्री सिंह लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग प्रदेश के बेहतर भविष्य के लिए नवाचारों के साथ अधोसंरचना विकास को गति प्रदान कर रहा है। प्रदेश में टिकाऊ निर्माण के लिए भारतीय प्राचीन निर्माण तकनीक पर हम आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वैदिक घड़ी को सराहा है। इस घड़ी के निर्माण का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जाता है। प्रदेश में बनने वाले सभी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बनाए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग ने अपने प्रशिक्षण कैलेंडर में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को शामिल किया है। प्रदेश में हाईवे और फ्लाईओवर्स को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है। मंत्री सिंह ने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान … Read more

सरकार ने स्मार्टफोन्स पर भेजा अलर्ट SMS, अचानक बजने लगे फोन

भोपाल   केंद्र की मोदी सरकार ने शनिवार को देशभर में देसी मोबाइल इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम का टेस्ट किया, ताकि जब कुदरत का कहर बरपा हो तो अपने नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सके. इस सिस्टम को ‘सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट’ कहा जाता है. अभी, NDMA (नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी) की तरफ से एक फ्लैश SMS मैसेज के रूप में, पूरे भारत में इसकी टेस्टिंग चल रही है. NDMA 2 मई 2026 को आपके इलाके में सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट का टेस्ट करेगा।  सरकार की ओर से जारी किए नोटिफिकेशन में लिखा था कि आपके मोबाइल फोन पर मैसेज आने के बाद, कोई एक्शन लेने की जरूरत नहीं है. प्लीज़ घबराएं नहीं. जब शनिवार को इमरजेंसी अलर्ट आया, तो फोन तेज अलार्म टोन और एक फ्लैशिंग मैसेज के साथ काफी जोर से बजा. अलर्ट देसी इंटीग्रेटेड अलर्ट सिस्टम (SACHET) से दिए गए थे, जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने बनाया है. यह सिस्टम कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है, जिसे इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन ने रिकमेंड किया है।  सरकार ने भेजा अलर्ट SMS (Screenshot Massage) इस सिस्टम का मकसद सुनामी, भूकंप, बिजली गिरने, और गैस लीक या केमिकल खतरों जैसी इंसानों की बनाई इमरजेंसी जैसी स्थितियों में, टारगेटेड इलाकों में मोबाइल यूजर्स को SMS के जरिए आपदा और इमरजेंसी से जुड़े अलर्ट देना है. हालांकि सरकार ने पहले भी कुछ बार इस सिस्टम को टेस्ट किया है, लेकिन अभी ये अलर्ट इस सिस्टम को देश भर में लागू करने से पहले सिस्टम की परफॉर्मेंस और भरोसे का अंदाजा लगाने के लिए किए जा रहे हैं. ये टेस्ट अलर्ट NDMA ने भेजे थे, जो भारत में आपदा मैनेजमेंट के लिए सबसे बड़ी संस्था है।  टेस्ट मैसेज उन मोबाइल फोन पर मिले जिनके सेल ब्रॉडकास्ट टेस्ट चैनल चालू थे. आप सेटिंग्स, सुरक्षा और इमरजेंसी, वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट, टेस्ट अलर्ट पर जाकर अलर्ट चालू या बंद कर सकते हैं. पूरे देश में टेस्टिंग के बाद, मोबाइल अलर्ट सिस्टम पूरे देश में चालू हो जाएगा और सभी मोबाइल हैंडसेट पर कई भारतीय भाषाओं में इमरजेंसी अलर्ट भेजेगा।