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रतलाम में पोल्ट्री फार्म में मिली एमडी ड्रग फैक्ट्री, 100 किलो केमिकल जब्त, 3 आरोपी गिरफ्तार

रतलाम  पिपलौदा थाना क्षेत्र के ग्राम बोरखेड़ा में पुलिस ने सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे मुखबिर की सूचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक खाली पड़े पोल्ट्री फार्म में संचालित एमडी ड्रग फैक्ट्री का राजफाश किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से तीन से अधिक आरोपितों को एमडी ड्रग बनाते हुए पकड़ा है। फिलहाल पुलिस ने अधिकारिक रूप से आरोपितों की जानकारी और जब्त मशरूका का खुलासा नहीं किया है। दोपहर तीन बजे पुलिस मामले का खुलासा करेगी। जानकारी के अनुसार खेत में बने इस पोल्ट्री फार्म में अवैध रूप से एमडी ड्रग तैयार की जा रही थी। सूचना मिलने पर थाना पिपलौदा पुलिस, साइबर सेल जावरा एवं एसडीओपी संदीप मालवीय व थाना प्रभारी रमेश कोली के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने दबिश दी। सूत्रों के अनुसार छापे के दौरान पुलिस द्वारा करीब 600 ग्राम एमडी ड्रग और 100 किलो से अधिक संदिग्ध केमिकल बरामद करने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि इन केमिकल्स का उपयोग एमडी ड्रग बनाने में किया जा रहा था। पहले भी पकड़ी गया था अवैध माल     गौरतलब है कि इससे पहले 16 जनवरी को जावरा के कालूखेड़ा थाना क्षेत्र के चिकलाना में पुलिस ने एमडी ड्रग बनाने की एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। रात करीब 1 बजे मस्जिद के पीछे स्थित एक मकान पर दबिश देकर यह कार्रवाई की गई थी। मकान दिलावर खान पठान का बताया गया, जहां करीब एक वर्ष से अवैध गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई थी। उस दौरान पुलिस ने मौके से 10 किलो से अधिक एमडी ड्रग, बड़ी मात्रा में केमिकल से भरे ड्रम, एमडी निर्माण में प्रयुक्त उपकरण, 12 बोर की बंदूक, 91 जिंदा कारतूस, दो मोर तथा चंदन की लकड़ियां बरामद की थीं। करीब ढाई माह के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे क्षेत्र में अवैध ड्रग निर्माण के नेटवर्क की गंभीरता उजागर हुई है। पुलिस जल्द ही पूरे गिरोह का करेगी खुलासा फिलहाल पुलिस ने बोरखेड़ा मामले में पकड़े गए आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक आरोपियों के नाम-पते और नेटवर्क का पूरा खुलासा नहीं किया गया था। पुलिस का कहना है कि मामले में विस्तृत जांच जारी है और जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा।

बड़वानी उत्कृष्ट विद्यालय में ‘अपात्र’ का चयन: नियमों को ताक पर रखकर कार्तिक को भेजा नागालैंड, जिला टॉपर शिवम बागुल का हक मारा!

 बड़वानी  बड़वानी -शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़वानी में 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' योजना के तहत छात्रों के चयन में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। ताज़ा खुलासे ने विद्यालय प्रबंधन और चयन समिति की साख को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है। आरोप है कि प्राचार्य और समिति ने जानबूझकर एक 'अपात्र' छात्र को उपकृत करने के लिए जिले के वास्तविक मेधावी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया है। ​नियमों की धज्जियां: 2024-25 की योजना में 2025-26 के छात्र का चयन कैसे? ​सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि नागालैंड भ्रमण की यह योजना सत्र 2024-25 के लिए निर्धारित थी। नियमानुसार, इस अवधि में विद्यालय में अध्ययनरत छात्र ही इसके पात्र थे। लेकिन चयन समिति ने कार्तिक शुक्ल का चयन किया, जो सत्र 2024-25 में इस विद्यालय का छात्र ही नहीं था, बल्कि एक निजी स्कूल में पढ़ाई कर रहा था। कार्तिक ने सत्र 2025-26 में उत्कृष्ट विद्यालय में प्रवेश लिया है। सवाल यह है कि जो छात्र योजना के समय स्कूल का हिस्सा ही नहीं था, उसे हवाई यात्रा और सरकारी भ्रमण का लाभ किस 'जादुई' प्रक्रिया के तहत दे दिया गया? ​मेधावी छात्र शिवम बागुल की अनदेखी क्यों? ​चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सबसे बड़ा प्रहार तब होता है जब हम कक्षा 10वीं के परिणामों को देखते हैं। सत्र 2024-25 में उत्कृष्ट विद्यालय के छात्र शिवम बागुल (पिता राजेश बागुल) ने अपनी मेहनत से जिला टॉपर का गौरव हासिल किया था। कायदे से, ऐसे राज्य स्तरीय सांस्कृतिक समन्वय कार्यक्रम के लिए पहला हक जिले के उस टॉपर छात्र का था जिसने विद्यालय का नाम रौशन किया। ​लेकिन, चयनकर्ताओं ने एक जिला टॉपर (शिवम बागुल) को दरकिनार कर एक ऐसे छात्र (कार्तिक शुक्ल) को चुन लिया जो उस वक्त स्कूल में था ही नहीं। यह सीधे तौर पर मेधावी छात्रों के मनोबल को तोड़ने वाली कार्रवाई है। ​चयन समिति पर उठते तीखे सवाल: ​क्या चयन समिति को यह जानकारी नहीं थी कि कार्तिक शुक्ल सत्र 2024-25 में विद्यालय का छात्र नहीं था? ​जिला टॉपर शिवम बागुल के नाम पर विचार क्यों नहीं किया गया? क्या उस पर किसी 'खास' का दबाव था? ​प्राचार्य अनिल मिश्रा इस स्पष्ट नियम विरुद्ध चयन पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? ​भ्रष्टाचार की बू और जांच की मांग ​यह मामला केवल एक चयन की गलती नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और पद के प्रभाव का स्पष्ट उदाहरण प्रतीत होता है। अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि इस चयन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। ​शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की 'सेटिंग' और 'भाई-भतीजावाद' बड़वानी जिले की शिक्षा व्यवस्था पर एक काला धब्बा है। यदि जिला प्रशासन ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो मेधावी छात्रों का व्यवस्था से भरोसा उठना तय है।

रतलाम में अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क पर करारा प्रहार, कई गिरफ्तार

रतलाम में अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क पर करारा प्रहार एमडीएमए निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़, 500 ग्राम एमडी व ब्राउन शुगर सहित आरोपी गिरफ्तार लगभग 80 लाख रुपये से अधिक का मादक पदार्थ व वाहन जप्त रतलाम पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त एवं सतत कार्यवाही जारी है। इसी क्रम में रतलाम जिले में विगत दो दिनों में पुलिस द्वारा एक के बाद एक प्रभावी कार्रवाई करते हुए न केवल ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया, बल्कि एक संगठित सिंथेटिक ड्रग निर्माण नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया गया है, जो प्रदेश में मादक पदार्थों के विरुद्ध चल रही मुहिम की बड़ी सफलता है। यह कार्यवाही पुलिस अधीक्षक रतलाम अमित कुमार के निर्देशन में थाना रिंगनोद पुलिस तथा थाना पिपलोदा पुलिस द्वारा की गई हैं। 31 मार्च को थाना पिपलोदा क्षेत्र के ग्राम बोरखेड़ा में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध एमडी (MDMA) सिंथेटिक ड्रग निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। एक पोल्ट्री फार्म की आड़ में संचालित इस अवैध लैब पर दबिश देकर पुलिस ने लगभग 175 किलोग्राम रासायनिक पदार्थ, 200 ग्राम तैयार एमडीएमए, गैस सिलेंडर, हीट गन, स्टोव एवं अन्य ड्रग निर्माण सहित 24 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है। इस कार्रवाई में मुख्य सरगना जमशेद खान उर्फ “जमशेद लाला” उर्फ “जमशेद सेठ” को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी जमशेद लाला एक अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क का प्रमुख संचालक है, जिसके विरुद्ध विभिन्न राज्यों में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पूछताछ में यह भी ज्ञात हुआ है कि ड्रग निर्माण हेतु रसायनों की आपूर्ति राजस्थान के प्रतापगढ़ क्षेत्र से की जा रही थी तथा घटना से पूर्व बड़ी मात्रा में एमडी की सप्लाई भी की जा चुकी थी। इसी प्रकार 29 मार्च को पुलिस चौकी माननखेड़ा थाना रिंगनोद द्वारा मुखबिर सूचना के आधार पर फोरलेन रोड पर घेराबंदी कर बोलेरो पिकअप वाहन से 500 ग्राम एमडी ड्रग्स (कीमत लगभग 50 लाख रुपये) जब्‍त करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। साथ ही घटना में प्रयुक्त बोलेरो वाहन (कीमत लगभग 5 लाख रुपये) भी जप्त किया गया। इस प्रकार पुलिस ने लगभग 55 लाख रुपये की संपत्ति जप्त की है। इसी दिन एक अन्‍य कार्यवाही में थाना रिंगनोद पुलिस द्वारा 100 ग्राम ब्राउन शुगर (कीमत लगभग 1 लाख रुपये) साथ एक आरोपी को मोटरसाइकिल सहित गिरफ्तार किया है। आरोपी से कुल 1 लाख 50 हजार रुपये की संपत्ति  जप्त की गई। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी रतलाम जिले में एमडीएमए निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में संगठित ड्रग नेटवर्क सक्रिय रहा है, जिस पर मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए संपूर्ण सप्लाई चेन को ध्वस्त करने, नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी तथा अवैध संपत्ति के विरुद्ध कार्रवाई हेतु विस्तृत विवेचना की जा रही है। यह कार्रवाई प्रदेश में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की दृढ़ प्रतिबद्धता एवं प्रभावी रणनीति को दर्शाती है।  

राज्यपाल पटेल बोले: रोगियों के उपचार में सेवा भाव की भूमिका अहम

रोगियों के उपचार प्रयासों में सेवा भाव प्रमुख : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने की लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग की समीक्षा भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा मानवता की सेवा है। इससे आत्म संतोष मिलता है। प्रदेश को सिकल सेल और टी.बी. मुक्त बनाने के प्रयासों में सेवा भाव को सर्वोपरि होना चाहिए।    राज्यपाल पटेल मंगलवार को लोकभवन में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन 2047 एवं टी.बी. मुक्त भारत अभियान के तहत लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। जनजातीय प्रकोष्ठ द्वारा जवाहर खण्ड सभागार में आयोजित बैठक में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल रोगियों को आयुष्मान योजना के तहत दी जाने वाली सुविधाएं और पात्रता आदि की समुचित जानकारी दें। प्रदेश स्तरीय सिकल सेल उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शून्य से 40 वर्ष तक के व्यक्तियों की विशेष तौर पर जाँच करें। जाँच शिविरों में आमजन को बताएँ कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सिकल सेल एनीमिया का इलाज कवर होता है। उन्होंने आयुष्मान योजना के तहत सिकल सेल रोगियों के इलाज की जिलेवार समीक्षा की। जन प्रतिनिधि पोषण आहार वितरण में करें सक्रिय सहयोग राज्यपाल पटेल ने बैठक में टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश को टी.बी. मुक्त बनाने स्थानीय जन प्रतिनिधियों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विशेष कर जनजातीय क्षेत्रों के जन प्रतिनिधि टी.बी. रोगियों को पोषण आहार वितरण में सक्रिय सहयोग करें। राज्यपाल पटेल ने नि:क्षय मित्रों की जिलेवार समीक्षा की। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में और अधिक नि:क्षय मित्रों को जोड़कर पोषण आहार वितरण को बढ़ाने के प्रयासों पर बल देने के निर्देश दिए है।  खनन क्षेत्रों में भी कराएं टी.बी. की सघन जाँच राज्यपाल पटेल ने खनन क्षेत्रों में निवासरत और कार्यरत व्यक्तियों की टी.बी. जाँच कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सिकल सेल जाँच लक्ष्य एवं पूर्ति, जेनेटिक कार्ड वितरण, हाईड्राक्सी यूरिया की उपलब्धता, गर्भावस्था में माताओं और शिशुओं का सिकल सेल प्रबंधन, सिकल सेल रोगियों को आयुष्मान कार्ड वितरण, आयुष्मान योजना का लाभ, दिव्यांगता प्रमाण पत्र वितरण, 125 दिवसीय सिकल सेल जागरूकता अभियान आदि विस्तार से समीक्षा कर जरूरी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आयुष्मान कार्ड की प्रगति, सिकल सेल और टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम के विभिन्न मानको को शत-प्रतिशत पूरा करने विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। राज्यपाल पटेल को आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने जिलेवार दवा वितरण, घर-घर दवाई वितरण, जाँच आदि कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। जैन ने अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिलों में औषधि वितरण के विशेष प्रयासों और नवाचारों की जानकारी भी दी। राज्यपाल पटेल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की उपलब्धियों, सघन स्क्रीनिंग, 100 दिवसीय नि:क्षय अभियान, नि:क्षय मित्र, पोषण आहार वितरण आदि की जानकारी दी। राज्यपाल पटेल के निर्देशानुसार प्रारंभ किए गए अनुसूचित जनजाति छात्रावासों में विद्यार्थियों की टी.बी. जाँच, परामर्श, उपचार आदि के बारे में भी बताया। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव अशोक कुमार बर्णवाल, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और लोकभवन के अधिकारी मौजूद रहे।    

राज्यसभा उपसभापति का बयान: ‘विकसित भारत के लिए 66 साल का सफर, कई देशों में लॉकडाउन, भारत में हालात सामान्य’

भोपाल  भोपाल में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायकों के सम्मेलन का समापन सत्र चल रहा है। कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका का विमोचन किया। इस बीच उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना देखने में 66 साल लगा दिए गए। कई देशों में आज लॉकडाउन जैसे हालात लेकिन भारत आराम से चल रहा है। एक समय था जब दुनिया के अर्थशास्त्री, जिन्हें हम बहुत मानते थे- यह कहते थे कि भारत 2 से 3 प्रतिशत से अधिक विकास नहीं कर सकता। इसे “हिंदू ग्रोथ रेट” कहा जाता था। उस समय यह भी माना जाता था कि केवल अलग तरह की राजनीतिक व्यवस्थाओं वाले देश ही तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन आज भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में भी तेज विकास संभव है। उन्होंने कहा कि भारत ने यह भी सिद्ध किया है कि सही नीतियों और संकल्प के साथ देश तेजी से तरक्की कर सकता है। विधानसभा अध्यक्ष बोले- छतीसगढ़ अलग हुआ तो आंखों में आंसू थे वहीं, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में अलग-अलग विचारधाराओं के विधायकों ने अपनी सीमाओं से ऊपर उठकर विषय के अंतर्गत अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में टेक्नोलॉजी के उपयोग, स्वच्छता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने, शिक्षा के विस्तार के साथ उसकी गुणवत्ता सुधारने, व आधारभूत संरचना के विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। तोमर ने कहा कि, मुझे वह क्षण आज भी याद है जब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश विधानसभा से अलग हुआ। उस दिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सभी विधायकों की आंखों में आंसुओं के अलावा कुछ नहीं था। इसीलिए आज भी दोनों राज्यों के बीच वही आत्मीयता बनी हुई है। उज्जैन जाएंगे विधायक युवा विधायक सम्मेलन का समापन होने के बाद विधायक उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन करने जाएंगे। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था। एमपी के विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष मौजूद थे।

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर लिखेंगे सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत:CM यादव

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर लिखेंगे सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा विश्वनाथ से की प्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना क्रॉउड मैनेजमेंट, दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का किया अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का किया भ्रमण भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें "विरासत के साथ विकास" के मंत्र को आत्मसात करते हुए सुशासन और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में साझा संस्कृति विकसित कर रही हैं। यह न केवल दोनों राज्यों के संबंधों को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि जन-कल्याण के नए मार्ग भी प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बात वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के भ्रमण के दौरान कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने वाराणसी भ्रमण की शुरूआत देवादिदेव महादेव काशी विश्वनाथ जी के दर्शन और पूजन के साथ किया। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन कर मध्यप्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पावन गंगा घाट पहुँचकर पतित पावनी माँ गंगा के दर्शन किए। उन्होंने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ माँ गंगा का पूजन किया और गंगाजल से आचमन किया। दर्शन और पूजन के बाद उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के धाम में आकर जो आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, वह अद्भुत है। काशी-महाकाल के बीच व्यवस्थाओं का साझा संगम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को वाराणसी भ्रमण के दौरान विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल के धामों के बीच व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू (MOU) किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्शनार्थियों को सुगम और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर परिसर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। सिंहस्थ-2028 के लिए प्रबंधन का रोडमैप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी के अनुभवों को मध्यप्रदेश के उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के न्यासियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रेजेंटेशन से कॉरिडोर में तीर्थयात्री प्रबंधन, क्राउड कंट्रोल (भीड़ प्रबंधन), दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ और काशी कॉरिडोर के प्रबंधन से सीख लेकर हम उज्जैन में श्रद्धालुओं के लिए दूरगामी योजनाएं तैयार कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को दर्शन की उच्चतम और सुगम व्यवस्था देना हमारा लक्ष्य है। प्रेजेंटेशन से तीर्थ स्थल प्रबंधन की एसओपी (SOP) को समझा। इसमें रियल टाइम सीसीटीवी मॉनिटरिंग, जोन-बेस्ड क्राउड कंट्रोल, सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वच्छता प्रबंधन के आधुनिक तौर-तरीकों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा 'ग्लोबल सनातन' पुस्तक भी भेंट की गई। वाराणसी में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का भव्य मंचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे, जिसमें हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच बढ़ते आर्थिक और बुनियादी ढांचे के सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से दोनों राज्यों के किसानों का भाग्य बदल रहा है। दोनों राज्यों के किसानों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध होगी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भ्रमण और बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान के साथ अपर मुख्य सचिव राघवेंद्र सिंह, सचिव पर्यटन डॉ. इलैया राजा टी, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह, वाराणसी कलेक्टर सत्येंद्र सिंह और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सीईओ विश्व भूषण मिश्र सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

नई व्यवस्था लागू: आउटसोर्स कर्मचारियों को अब सीधे बैंक खाते में मिलेगा वेतन

भोपाल  मध्यप्रदेश में आउटसोर्स एम्प्लॉइमेंट सिस्टम बदलने जा रहा है। जिसका सीधा फायदा लाखों कर्मचारियों को मिलेगा। मध्यप्रदेश के सभी सरकारी विभागों में आउटसोर्स एम्प्लॉइज के अपॉइंटमेंट और उनके कामकाज की व्यवस्था बदलेगी। 1 अप्रैल 2026 से पूरे आउटसोर्सिंग सिस्टम के संचालन की नई गाइडलाइन लागू हो जाएगी। आउटसोर्स की पूरी प्रोसेस डिजिटल की जाएगी। एम्प्लॉइज के अकाउंट में  सीधे सैलरी आएगी। मध्यप्रदेश में ये कंपनियां होंगी ब्लैकलिस्ट दरअसल, मध्यप्रदेश सरकार उन सभी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करेगी, जो एम्प्लॉइमेंट के लिए एंट्री फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट वसूलती है। बिचौलिया कंपनियों द्वारा किए जा रहे एम्प्लॉइज के शोषण पर रोक लगेगी। वित्त विभाग ने सभी विभाग के अधिकारियों को आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने को कहा है। 1 अप्रैल से लागू होंगी नई गाइडलाइन आगामी 1 अप्रैल से प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में आउटसोर्स नियुक्तियों और उनके कामकाज को लेकर नई गाइडलाइन प्रभावी हो जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। सरकार के इस फैसले से न केवल वेतन मिलने में देरी की समस्या खत्म होगी, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में होने वाले भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। 4 कैटेगरी में बंटेंगे एम्प्लॉइज, एंट्री फीस पर रोक मध्यप्रदेश सरकार ने पहली बार एम्प्लॉइज को चार कैटेगरी में बांट दिया है। इससे ये होगा कि कोई भी एम्प्लॉइज ग्रे जोन में नहीं रहेगा। इन चार कैटेगरी में स्थायी, अस्थायी, संविदा और आउटसोर्स शामिल हैं। भर्ती में किसी भी तरह की एंट्री फीस पर रोक रहेगी। अवैध वूसली पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। एम्प्लॉइज का EPF, ESIC लेबर कानून से कटेगा नए सिस्टम के तहत प्राइवेट एजेंसियां के पास सैलरी का अधिकार नहीं रहेगा। एम्प्लॉइज की सैलरी सीधे उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाएगी। मिनिमम सैलरी से एक रुपया भी कम नहीं दिया जाएगा। एम्प्लॉइज के ईपीएफ, ईएसआईसी और लेबर कानूनों के तहत पूरा प्रोसेस की जाएगी। बिचौलिया कंपनियों से राहत, नहीं होगा शोषण     सीधा बैंक खाते में वेतन: नई व्यवस्था में वेतन निजी एजेंसियों के माध्यम से नहीं होगा। वेतन सीधे कर्मचारी के बैंक खातों में ट्रांसफर होगा। बिचौलियों और एजेंसियों द्वारा वेतन में कटौती या कमीशनखोरी नहीं की जा सकेगी।     न्यूनतम वेतन की गारंटी: न्यूनतम वेतन से एक रुपया भी कम नहीं दिया जाएगा। ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कानूनों का पालन अनिवार्य होगा।     स्पष्ट श्रेणी और पहचान: सरकार ने पहली बार कर्मचारियों को स्पष्ट श्रेणियों (स्थायी, अस्थायी, संविदा, आउटसोर्स आदि) में बांट दिया है। इससे कोई भी कर्मचारी 'ग्रे जोन'में नहीं रहेगा।     शोषण से मुक्ति: भर्ती के नाम पर किसी भी तरह की एंट्री फीस या अवैध वसूली पर प्रतिबंध लगेगा। उल्लंघन पर कार्रवाई होगी।

यति नरसिंहानंद बोले: हिंदुओं को तालिबान और ISIS जैसी सेना बनानी होगी

गुना  'हिंदुओं को बनानी होगी अपनी सेना, तभी बचेगा सनातन!' हमें तालिबान और आईएसआईएस के पैटर्न पर अपनी सेना तैयार करनी होगी। हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद सरस्वती ने देश के मौजूदा हालात को लेकर चेताया है। उन्होंने दो टूक कहा कि संघ और बजरंग दल जैसे संगठनों के भरोसे सनातन का बचाना असंभव है। चेतावनी दी है कि अगर हिंदू समाज ने अब भी कट्टरता नहीं दिखाई, तो भारत का 'विश्वगुरु' बनने का सपना सिर्फ एक मुस्लिम राष्ट्र बनकर रह जाएगा। हिंदुत्ववादी यति नरसिंहानंद सरस्वती ने अपने ताजा बयान से नए विवाद को जन्म दे दिया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए भारत और सनातन को खतरे में बताया है। उन्होंने कहा कि यदि हिंदुओं को अपना अस्तित्व बचाना है, तो उन्हें तालिबान और आईएसआईएस के पैटर्न पर अपनी सेना तैयार करनी होगी। उन्होंने संघ और बजरंग दल जैसे संगठनों पर तीखा कटाक्ष करते हुए इन्हें नपुंशक संगठन करार दिया और कहा कि इनके भरोसे सनातन धर्म का बचना असंभव है। वे एमपी के गुना में मीडिया से रूबरू हो रहे थे। RSS और बजरंग दल पर दिया विवादास्पद बयान यति नरसिंहानंद ने संगठनों पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने इन संगठनों को 'नपुंसक' करार देते हुए कहा कि, इनके भरोसे सनातन धर्म का बचना असंभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये संगठन केवल सोशल मीडिया पर फोटो डालने और नेताओं की 'चमचागिरी' कर चुनाव का रास्ता ढूंढने के लिए बने हैं। यति नरसिंहानंद सरस्वती के बयान की मुख्य बातें     हिंदुओं को अपना अस्तित्व बचाने के लिए ISIS और तालिबान जैसी कट्टर सेना बनानी होगी     संघ और बजरंग दल जैसे संगठनों भरोसे सनातन धर्म नहीं बचेगा     भारत 'विश्वगुरु' नहीं बल्कि 'मुस्लिम भारत' बनने की ओर बढ़ रहा है     'विश्वगुरु' का सपना छलावा धर्मगुरु जनता को मूर्ख बना रहे हैं     भारत पिछले 1400 साल से समर्पण की मुद्रा में है     इजरायल मानवता का रक्षक हर हिंदू को उसका साथ देना चाहिए     मुस्लिम लड़कियों से दोस्ती न करें, वे युवकों से भी ज्यादा 'जिहादी' हैं     भारत के कानून हिंदुओं को आपस में लड़ाकर खत्म करने के लिए बनाए गए हैं तालिबान-ISIS की कार्यप्रणाली को बताया आदर्श महामंडलेश्वर ने कहा कि जो समर्पण और कट्टरता इस्लाम के लिए तालिबान और आईएसआईएस दिखाते हैं, वैसी ही सेना बनाने की आज हिंदुओं को जरूरत है। उन्होंने कहा कि 'बाकी की फालतू सेनाओं का हम समर्थन नहीं करते। बजरंग दल और संघ के चक्कर में पड़े रहे, तो भविष्य में सनातनियों का कुछ भी बचने वाला नहीं है।' हिंदुओं को अपना अस्तित्व बचाने के लिए ISIS और तालिबान जैसी कट्टर सेना बनानी होगी, क्योंकि RSS और बजरंग दल जैसे संगठनों के भरोसे सनातन धर्म नहीं बचेगा विश्वगुरु का सपना एक 'छलावा' मात्र है, मूर्ख बना रहे भारत के विश्वगुरु बनने के दावों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि जिस गति से जनसंख्या असंतुलन बढ़ रहा है, भारत 'सनातन भारत' नहीं बल्कि 'मुस्लिम भारत' की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने हिंदू धर्मगुरुओं पर भी निशाना साधा और कहा कि जो गुरु भारत के विश्वगुरु बनने का दावा कर रहे हैं, वे अपने अनुयायियों को मूर्ख बनाकर केवल पैसा बटोर रहे हैं। यूजीसी और मौजूदा कानून हिन्दुओं को लड़वा रहे महंत ने UGC और देश के मौजूदा कानूनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये भेदभाव मिटाने के लिए नहीं, बल्कि हिंदुओं को आपस में लड़वाकर खत्म करने के लिए बनाए गए हैं। उन्होंने जनता से ऐसी सरकारों का विरोध करने की अपील की जो सनातन विरोधी 'काले कानून' लाती हैं। इजरायल का समर्थन किया, बोले-जालिमों से लड़ रहे ईरान-इजरायल युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने इजरायल को 'मानवता का रक्षक' बताया। उन्होंने कहा कि 90 लाख इजरायली दुनिया के 200 करोड़ 'जालिमों' से लड़ रहे हैं, इसलिए हर मानवतावादी को इजरायल का साथ देना चाहिए।  

कलेक्टर ने जनसुनवाई में 38 आवेदकों की सुनी समस्याएं

कलेक्टर ने जनसुनवाई में 38 आवेदकों की सुनी समस्याएं  अनूपपुर  जिला स्तरीय जनसुनवाई मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में संपन्न हुई। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने 38 आवेदनों पर जनसुनवाई करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निराकरण करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अर्चना कुमारी सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारियों ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनी।  जनसुनवाई के दौरान तहसील पुष्पराजगढ़ के ग्राम श्यामदुवारी निवासी श्रीमती वंशी कुमारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग हेतु भूमि का अधिग्रहण करने पर मुआवजा राशि दिलाए जाने, तहसील अनूपपुर के ग्राम पोंड़ी खुर्द निवासी केशव प्रसाद पटेल ने पीएम कृषक मित्र सूर्य योजना का लाभ दिलाए जाने, तहसील अनूपपुर के ग्राम छोहरी निवासी श्यामलाल ने फौती नामांतरण कराए जाने, तहसील अनूपपुर के ग्राम कांसा निवासी सूर्यबली विश्वकर्मा ने सीमांकन कराए जाने, तहसील पुष्पराजगढ़ के ग्राम लखौरा निवासी बुजुर्ग श्रीमती कुंवारिया पनिका ने भरण पोषण अधिनियम के तहत आर्थिक सहायता प्रदाय किए जाने, तहसील अनूपपुर के ग्राम धिरौल (डोंगराटोला) निवासी श्रीमती दुर्गा सिंह ने स्वरोजगार हेतु आर्थिक सहायता प्रदाय किए जाने के संबंध में आवेदन दिए।

10 अप्रैल से मालवांचल, नर्मदापुरम और भोपाल में गेहूं उपार्जन, बाकी संभागों में 15 मार्च से खरीदी शुरू

भोपाल प्रदेश में गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया एक बार फिर टल गई है। अब न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,885 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदी एक अप्रैल के बजाय 10 अप्रैल से शुरू होगी। इंदौर-उज्जैन (मालवांचल), नर्मदापुरम और भोपाल संभाग में 10 अप्रैल से खरीदी प्रारंभ होगी, जबकि अन्य संभागों में यह प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू की जाएगी। कैबिनेट समिति की बैठक में लिया गया यह निर्णय किसानों के लिए अहम माना जा रहा है, हालांकि देरी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल भी उठाए हैं। बोरों की कमी बनी देरी की वजह सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण बोरों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हुई। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने चार करोड़ सिंगल यूज बोरे खरीदने के लिए टेंडर जारी किए हैं। जैसे ही इनकी आपूर्ति होगी, खरीदी में तेजी लाई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बोरों की उपलब्धता सुनिश्चित होते ही प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। पारदर्शी और समयबद्ध खरीदी पर जोर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि बैठक में खाद्यान्न आपूर्ति और भंडारण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गेहूं खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी, सुचारु और समयबद्ध हो। किसानों को उपज का उचित मूल्य समय पर मिले और भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो, इसके लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य सुरक्षा और प्रबंधन पर फोकस सरकार का मानना है कि व्यवस्थित और समय पर गेहूं खरीदी से न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रदेश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। बदलते वैश्विक हालात के बीच यह कदम राज्य में खाद्यान्न प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष ने उठाए सवाल उधर, कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री अरुण यादव ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल खेतों में पड़ी है, लेकिन सरकार खरीदी की तारीख लगातार आगे बढ़ा रही है। पहले 16 मार्च, फिर एक अप्रैल और अब 10 अप्रैल तय किया गया है, जिससे साफ है कि किसान सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं। बैठक में रहे कई मंत्री शामिल वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, किसान कल्याण मंत्री एंदल सिंह कंसाना और पशुपालन मंत्री लखन पटेल सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।