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गर्मी की छुट्टियों में स्पेशल ट्रेनें और बढ़ेगा AC कोच, अब आसानी से मिलेगा सीट

सागर  रेलवे ने गर्मी के मौसम में यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इस पहल से यात्रियों को काफी राहत मिलेगी, जिससे उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं होगी। एसएमटी-गोरखपुर-सीएसएमटी प्रतिदिन स्पेशल ट्रेन 01079 सीएमएमटी से गोरखपुर स्पेशल ट्रेन 1 से 14 अप्रेल तक (14 ट्रिप) एवं समर के समय 15 से 30 अप्रैल तक (16 ट्रिप) प्रतिदिन सीएमएमटी स्टेशन से रात 10.30 बजे चलेगी जो. अगले दिन शाम 6.15 बजे बीना जंक्शन पहुंचकर तीसरे दिन सुबह 10 बजे गोरखपुर स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार 01080 गोरखपुर से सीएमएमटी स्पेशल 3 से 16 अप्रेल तक (14 ट्रिप) एवं समर के अवसर पर 17 अप्रेल से 2 मई तक (16 ट्रिप) प्रतिदिन गोरखपुर स्टेशन से दोपहर 2.30 बजे चलेगी, जो अगले दिन सुबह 6.10 बजे बीना रुकते हुए तीसरे दिन रात 12.40 बजे सीएमएमटी स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन में कुल 22 कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों तरफ से दादर, ठाणे, कल्याण, नासिक रोड, मनमाड, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, भौपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, कानपुर, सेंट्रल, लखनऊ, गोंडा, बस्ती एवं खलीलाबाद स्टेशनों पर रुकेगी। एलटीटी-बनारस-एलटीटी द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन 01073 एलटीटी से बनारस स्पेशल ट्रेन 1 से 9 अप्रैल तक (4 ट्रिप) एवं समर सीजन में 15 से 30 अप्रैल तक (6 ट्रिप) द्वि- साप्ताहिक (बुधवार एवं गुरुवार) लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन से दोपहर 12.15 बजे चलेगी, जो अगले दिन सुबह 7.55 बजे बीना पहुंचकर रात 11.30 बजे बनारस स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार 01074 बनारस से एलटीटी स्पेशल ट्रेन 3 से 11 अप्रैल तक (4 ट्रिप) एवं समर सीजन में 17 अप्रैल से 2 मई तक (6 ट्रिप) द्वि-साप्ताहिक (शुक्रवार एवं शनिवार) बनारस स्टेशन से सुबह 5.30 बजे चलेगी, जो रात 10.25 बजे बीना पहुंचकर अगले दिन शाम 4.40 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन में कुल 22 कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों तरफ से ठाणे, कल्याण, इगतपुरी, नासिक रोड, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी. रानी कमलापति बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई गोविंदपुरी, फतेहपुर एवं सूबेदारगंज (प्रयागराज) स्टेशनों पर रुकेगी। अहमदाबाद-कोलकाता में बढ़ाया गया एसी कोच रेलवे ने समर सीजन में यात्रियों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए बीना जंक्शन से होकर जाने वाली अहमदाबाद-कोलकाता-अहमदाबाद एक्सप्रेस एक थर्ड एसी कोच मई माह से अगले आदेश तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। 19413/14 अहमदाबाद-कोलकाता-अहमदाबाद एक्सप्रेस में 27 मई को अहमदाबाद से एवं 30 मई को कोलकाता से इस ट्रेन में अब 6 थर्ड एसी कोच होंगें। 

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल में खाली पड़े 60% पद, 187 में से सिर्फ 73 कर्मचारी ही कार्यरत

भोपाल  मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB), जो विभिन्न शासकीय विभागों के लिए भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है, खुद अपने ही विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि मंडल में स्वीकृत 187 पदों के मुकाबले सिर्फ 73 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि 114 पद अब भी खाली पड़े हैं। यानी करीब 60% पद रिक्त हैं। मंडल का मुख्य कार्य अलग-अलग सरकारी विभागों के लिए भर्ती करना है, लेकिन अपने ही यहां कर्मचारियों की कमी के कारण यह काम प्रभावित हो रहा है। कई अहम पद जैसे अतिरिक्त संचालक, नियंत्रक, संयुक्त संचालक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, प्रोग्रामर, सहायक संचालक, लेखा अधिकारी और अधीक्षक के पद खाली हैं।  डिप्टी कंट्रोलर के 5 पदों में से 4 खाली हैं, जबकि जूनियर अकाउंट्स ऑफिसर के 2 पदों में से 1 पद रिक्त है। सहायक ग्रेड-1 के 13 में से 10 पद, सहायक ग्रेड-2 के 28 में से 15 पद और सहायक ग्रेड-3 के 41 में से 23 पद खाली हैं। डाटा एंट्री ऑपरेटर के 5 में से 2 पद भी रिक्त हैं। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अधिकांश पद भी खाली पड़े हैं।   अतिरिक्त प्रभार से चल रहा काम कई महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय शुक्ला मंडल के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, जबकि अजॉय कटेसरिया निदेशक का अतिरिक्त जिम्मा देख रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं पर भी असर स्टाफ की कमी का असर मंडल की कार्यप्रणाली पर भी पड़ रहा है। पिछले साल मंडल ने 16 परीक्षाएं आयोजित की थीं, जबकि इस साल 22 परीक्षाएं कराने की योजना है। कर्मचारियों की कमी के कारण कई काम आउटसोर्स कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं और निगरानी भी प्रभावित हो रही है। मंडल में पद खाली रहने की एक बड़ी वजह भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताएं भी मानी जा रही हैं, जिसके चलते व्यवस्था प्रभावित हुई है। 

एमपी हाईकोर्ट का अहम फैसला, पति की संपत्ति और नौकरी पर दावे को लेकर दिया आदेश

जबलपुर  भारतीयों में आजकल बिना विधिवत तलाक लिए दूसरी शादी करने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। कई समाजों में बहुविवाह की भी प्रथा है जिसका सहारा लेकर इसे मान्यता देने की कोशिश की जाती है। इस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। पति की संपत्ति और नौकरी के दावे पर एमपी हाईकोर्ट MP High Court ने बड़ा फैसला देते हुए दूसरी पत्नी की याचिका खारिज कर दी। महिला ने आदिवासी समाज की प्रथाओं का जिक्र किया था जिसपर कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के बहुविवाह की परंपरा मान्य नहीं की जा सकती है। इसी के साथ दूसरी पत्नी का दावा भी खारिज कर दिया। आदिवासी समाज में बहुविवाह की प्रथा है। इसका हवाला देकर शहडोल की पाव जनजाति की महिला मुन्नी बाई ने खुद को भगत सिंह की दूसरी पत्नी बताते हुए पति की मौत के बाद मिले नौकरी से जुड़े लाभ और उनकी संपत्ति देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इधर पहली पत्नी फूलमती ने खुद को अकेली वैध पत्नी बताते हुए कहा कि सरकारी सेवा अभिलेख में भी पत्नी के तौर पर उनका ही नाम दर्ज है। जबलपुर हाईकोर्ट ने केस की सुनवाई करते हुए कहा है कि बिना प्रमाण के किसी समाज में बहुविवाह की परंपरा को मान्यता नहीं दी जा सकती। सिर्फ आदिवासी परंपरा का हवाला देकर किसी महिला को पति की संपदा या नौकरी में अधिकार नहीं मिल सकता। इसके साथ शहडोल की महिला की याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे दावे के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। दरअसल, मुन्नी बाई ने याचिका दायर कर कहा था, वह भगत सिंह की दूसरी पत्नी है। वे पाव जनजाति से हैं। इसमें बहुविवाह की परंपरा है। उन पर हिन्दू विवाह अधिनियम लागू नहीं होता। उसने पति की मृत्यु के बाद संपत्ति में हिस्सा और नौकरी से जुड़े लाभ देने की मांग की थी। पहली पत्नी फूलमती ने इसका विरोध किया। दस्तावेज में पहली पत्नी का नाम पहली पत्नी फूलमती की ओर से तर्क दिया गया, वह अकेली वैध पत्नी है। सरकारी सेवा अभिलेख में भी पत्नी के तौर पर उनका नाम दर्ज है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया है। कोई मान्य दस्तावेज, परंपरा का प्रमाण भी नहीं पेश किए। इसके बाद फैसला सुनाया।

250 करोड़ का जेट विमान खरीदी मध्यप्रदेश सरकार ने, जल्द मिलेगी किराए के विमान से छुटकारा

 भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार को जल्द ही किराए के विमान से मुक्ति मिल जाएगी। राज्य सरकार ने 250 करोड़ का जेट विमान खरीदा है जिसकी जल्द डिलीवरी होगी। कनाडा में सरकार का नया विमान लगभग तैयार हो चुका है। भोपाल लाने के पहले इसका परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए पायलट व दो इंजीनियर जून में कनाडा जाएंगे। विमान की जांच के ही इस काम में 50 लाख रुपए लगेंगे। अभी सरकार के पास खुद का विमान नहीं है। जरूरत के वक्त राज्य सरकार द्वारा किराए से विमान लिए जा रहे हैं। कनाडा में राज्य सरकार का नया जेट विमान (चैलेंजर 3500) लगभग तैयार हो गया है। इसे तैयार कर रही बाम्बार्डियर कंपनी जून 2026 के अंत तक सरकार को सौंपने जा रही है। डिलीवरी लेने से पहले विमान की तकनीकी जांच की जाएगी जिसके लिए सरकार ने समिति गठित कर दी है। विमान की तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम चिह्नित की गई है। ये निजी विशेषज्ञ हैं, जो जांच के लिए 50 लाख रुपए ले रहे हैं। विमान की जांच टीम में विमानन विभाग में पदस्थ पायलट विश्वास राय, तकनीकी विशेषज्ञ जेपी शर्मा और रश्मि सिंह शामिल हैं। 250 करोड़ का है विमान, एक बार में करीब 3500 किमी का सफर तय करेगा राज्य सरकार के नए विमान की कीमत 250 करोड़ है। यह अत्याधुनिक जेट विमान है जिसमें अनेक खूबियां हैं। नया विमान 870 प्रति किमी तक की रफ़्तार से उड़ान भर सकता है। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार यह जेट विमान एक बार में करीब 3500 किमी का सफर तय करेगा। एक वरिष्ठ अफसर ने इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस विमान बताया है। अधिकारी के अनुसार ​इसमें 8 से 10 यात्री सफर कर सकते हैं। विमान में दो कैबिन क्रू अलग से होंगे। नया जेट विमान आते ही राज्य सरकार को किराए से राहत मिल जाएगी बता दें, अभी सरकार के पास खुद का विमान नहीं है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के हवाई दौरों या अन्य अनिवार्य सेवाओं के लिए जरूरत के वक्त राज्य सरकार द्वारा किराए से विमान लिए जा रहे हैं। इसपर हर महीने लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं। नया जेट विमान आते ही राज्य सरकार को किराए से राहत मिल जाएगी।

लाडली लक्ष्मी योजना में तीन बेटियों को मिलते हैं 1.43 लाख रुपए, क्या हैं शर्तें?

भोपाल  भारतीय समाज में हर घर में बेटियों को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यही कारण है कि उसके जन्म लेते ही, हर कोई कह उठता है, लक्ष्मी आई है… आजकल अस्पताल से घर पहुंचने पर इस नवजात लक्ष्मी और इसे जन्म देने वाली मां का स्वागत ढोल-नगाड़ों के साथ किया जाता है, गृहप्रवेश का यह तरीका धूमधाम से मनाया जाने लगा है। इस बीच मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना लक्ष्मी स्वरूप बेटी के साथ घर में पहुंच जाते हैं 1.43 लाख रुपए। अगर आपके यहां भी आज हुआ है बेटी का जन्म तो जरूर जानें क्या है मध्य प्रदेश सरकार की यह खास योजना, कैसे कर सकते हैं आवेदन और किन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत, कैसे आपकी बेटी को मिलेगा 1.43 लाख रुपए का लाभ… यहां जानें लाडली लक्ष्मी योजना क्या है मध्य प्रदेश में बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने के साथ ही, उनके भविष्य को संवारने में मदद के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना (Ladli Laxmi Yojana) लॉन्च की थी। इस योजना के तहत बेटियों को अलग-अलग चरणों में आर्थिक मदद दी जाती है। बेटियों को लखपति बनाने के उद्देश्य के लिए छठी क्लास में एडमिशन लेने से 21 साल की उम्र तक प्रदेश सरकार की ओर से कुल 1,43,000 रुपए दिए जाने का प्रावधान किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग में संचालित की जा रही इस योजना के तहत पहले 1,18,000 रुपए दिए जाते थे, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 1,43,000 रुपए कर दिया गया। वर्तमान में लाडली बहना योजना के तहत यही बढ़ी हुई राशि मिल रही है। मुख्यमंत्री Ladli Laxmi Yojana के प्रमुख उद्देश्य     प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार लाना     बेटियों के जन्म पर समाज में सकारात्मक सोच पैदा करना     परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करना, खासतौर पर 2 बेटियों के जन्म के बाद बेटे की इच्छा रखने वालों को हतोत्साहित करना     कन्या भ्रूण हत्या/शिशु हत्या को रोकना।     बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लगाना Ladli Laxmi Yojana के लाभ क्या-क्या     बेटी के नाम से 1,43,000 रुपए का प्रमाण पत्र दिया जाएगा क्लास – स्कॉलरशिप (रुपए)     छठी में प्रवेश पर – 2000     9वीं में प्रवेश – 4000     11वीं में प्रवेश – 6000     12वीं में प्रवेश – 6000     ग्रेजुएशन या प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन (न्यूनतम 2 साल) 25,000 (2 किस्तों में कोर्स के पहले और आखिरी साल में)21 साल की उम्र होने पर 1,00,000 रुपए नोट: 1 लाख रुपए की राशि तभी मिलेगी, अगर बेटी 12वीं की परीक्षा देगी या अगर शादी हो गई है तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत शादी की उम्र के नियम का पालन किया गया हो। Ladli Laxmi Yojana के लिए कौन कर सकता है आवेदन जानें पात्रता शर्तें सामान्य स्थिति     1 जनवरी 2006 या उसके बाद जन्मी बेटियों को इसका लाभ मिल सकेगा।     बेटी का पंजीकरण पास के आंगनवाड़ी केंद्र में कराना अनिवार्य है।     बेटी के माता-पिता मूल रूप से मध्य प्रदेश निवासी होने चाहिएं     माता-पिता इनकम टैक्स न भरते हों।     माता-पिता की 2 या उससे कम संतान होनी चाहिए, दूसरी संतान के बाद परिवार नियोजन अपनाया गया हो, तभी इस योजना का लाभ मिल सकता है।     पहली संतान अगर बेटी होती है, तो बिना परिवार नियोजन के भी लाभ मिलेगा जबकि दूसरी संतान से जन्मीं बेटी को लाभ मिलने के लिए परिवार नियोजन अपनाना अनिवार्य है, तभी योजना का लाभ लिया जा सकेगा। विशेष परिस्थितियों में     जिस परिवार में अधिकतम 2 संतान हैं और माता या पिता का निधन हो गया है तो बच्ची के जन्म के 5 साल तक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।     अगर महिला या पुरुष दूसरी शादी करते हैं तो पहले से 2 बच्चे हैं तो फिर लाभ नहीं मिलेगा     अगर पहली प्रसूति में ही एक साथ 3 बच्चियां होती हैं, तो तीनों को ही लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ मिलेगा     जेल में बंद महिला कैदियों या दुष्कर्म पीड़िता की बेटियों को भी योजना के तहत लाभ मिलेगा     अगर स्वास्थ्य कारण से परिवार नियोजन नहीं हुआ है तो, 1 साल की जगह 2 साल तक आवेदन स्वीकार करने का अधिकार कलेक्टर को दिया गया है।     देरी से मिले आवेदनों पर फैसला लेने का अधिकार जिला कलेक्टर के पास होगा।     अनाथालय में प्रवेश के 1 साल में और बालिका की उम्र 5 वर्ष पूर्ण होने से पूर्व या गोद लेने वाले माता-पिता द्वारा गोद लेने के 1 साल के अंदर आवेदन करना होगा। कैसे मिलेगा लाडली लक्ष्मी योजना का पैसा लाडली लक्ष्मी योजना का पैसा चरणबद्ध तरीके से बेटी के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। यह पैसा DBT के माध्यम से भेजा जाएगा। Ladli Laxmi Yojana के लिए कैसे करें आवेदन, जानें स्टेप बाय स्टेप 1 – मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना के लिए आप पोर्टल ladlilaxmi.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं     पोर्टल पर आपको ऊपर दायीं ओर 'आवेदन करें' का विकल्प दिखेगा, इस पर क्लिक करें     अब लाडली लक्ष्मी योजना की पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट खुल जाएगी     नीचे स्वघोषणा को तीनों प्वाइंट को पढ़कर टिक करें और 'आगे बढ़ें' पर क्लिक करें 2 – अब अपने समग्र आईडी की जानकारी देनी होगी (Ladli Laxmi Yojana)     सबसे पहले लाडली बेटी की समग्र आईडी भरिए     फिर परिवार यानी माता-पिता की समग्र आईडी भरिए     अब पहली बेटी या दूसरी बेटी या जुड़वां बेटियों के लिए आवेदन कर रहे हैं, उस बॉक्स का चयन करें     समग्र से जानकारी प्राप्त करें ऑप्शन पर क्लिक करें 3- इसके बाद परिवार की पूरी जानकारी भरें     फिर मांगा गया अन्य विवरण भरें और आगे बढ़ें     अब जरूरी दस्तावेज को अपलोड करें     आप नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र, CSC या लोक सेवा केंद्र जाकर भी ऑनलाइन फॉर्म भरवा सकते हैं। Ladli Laxmi Yojana के लिए क्या हैं जरूरी दस्तावेज     बालिका का माता-पिता के साथ फोटो     मूल निवासी/स्थानीय/माता या … Read more

नई शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव, 2030 तक B.Ed कॉलेज होंगे बंद, सरकार के अल्टीमेटम से बढ़ी टेंशन

भोपाल  शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनईपी) की नई गाइडलाइन के मुताबिक 2030 तक सभी स्टैंडअलोन बीएड कॉलेजों (B.Ed Colleges) को मल्टीडिसिप्लिनरी संस्थानों में बदलना अनिवार्य होगा। यानी अब सिर्फ बीएड या एमएड पढ़ाने वाले कॉलेजों को बीए, बीकॉम, बीएससी जैसे कोर्स भी शुरू करने होंगे। इसके साथ ही 4-वर्षीय इंटीग्रेटेड टोचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) को प्राथमिकता दी जा रही है। गाइडलाइन के बाद बीयू ने ऐसे कॉलेजों की पहचान शुरू कर दी है, जहां केवल बीएड और एमएड कोर्स संचालित हो रहे है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि नए कोर्स शुरू करने से पहले इन संस्थानों का निरीक्षण किया जाएगा और उनकी आधारभूत सुविधाओं का मूल्यांकन होगा। 40 प्रतिशत कॉलेजों पर सीधा असर मध्य प्रदेश में करीब 650 बीएड कॉलेज हैं। जिनमें लगभग 40 प्रतिशत केवल शिक्षक प्रशिक्षण पर आधारित हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ये कॉलेज अकेले बीएड कोर्स नहीं चला सकेंगे। उन्हें या तो पास के मल्टीडिसिप्लिनरी कॉलेज में 3 से 10 किलोमीटर के दायरे में मर्ज होना पड़ेगा या फिर बंद होने की नौबत आ सकती है। जगह और संसाधनों की बड़ी चुनौती निजी कॉलेज संचालकों का कहना है कि वे गाइडलाइन का पालन करेंगे, लेकिन सबसे बड़ी समस्या इंफ्रास्ट्रक्चर की है। नए कोर्स शुरू करने के लिए अतिरिक्त क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी और फैकल्टी की जरूरत होगी। खासतौर पर शहरों के बीच स्थित छोटे कैंपस वाले कॉलेजों के लिए यह चुनौती और कठिन है। 15 करोड़ से 200 छात्रों को आवासीय सुविधा भोपाल. राजधानी के आयुर्वेद व होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालयों के छात्रों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। लंबे समय से छात्रावास की मांग कर रहे विद्यार्थियों के लिए आयुष विभाग ने 15 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए है, जिससे 200 छात्रों को रहने की सुविधा मिलेगी। लंबे समय से थी मांग महाविद्यालयों में सीटें बढ़ीं, लेकिन छात्रावास नहीं बने। छात्र छात्राएं पिछले 3 साल से लगातार मांग कर रहे थे। पिछले वर्ष राशि नहीं मिलने से योजना अटक गई थी। बॉयज हॉस्टल नहीं होने से छात्रों को मिसरौद में किराये के भवन में रखा गया है। आवागमन के लिए बस चलाई जा रही है, जिस पर हर महीने 4 लाख रुपए खर्च हो रहे है। दोनो महाविद्यालयों में बनेंगे छात्रावास आयुष विभाग द्वारा संचालित, पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान व शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में 100-100 सीट के छात्रावास बनाए जाएंगे। महाविद्यालय के प्राचार्य डा. एसके मिश्रा ने बताया, जमीन का चयन व नक्शा तैयार हो चुका है। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई द्वारा किया जाएगा। नई शिक्षा नीति का बड़ा कदम बीयू के रजिस्ट्रार एसबी सिंह का कहना है कि नई गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किया जा रहा है. जिसका उद्देश्य शिक्षक शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, समग्र और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।

मेडिकल कॉलेज में प्रदेश की प्रथम डिजिटल लाइब्रेरी का किया शुभारंभ

भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में श्यामशाह मेडिकल कॉलेज रीवा की सामान्य सभा की बैठक मेडिकल कॉलेज सभागार में संपन्न हुई। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि रीवा में चिकित्सा सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रीवा में 13 किडनी ट्रांसप्लांट और 36 ओपन हार्ट सर्जरी के सफल ऑपरेशन होना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने निर्देश दिए कि संचालक चिकित्सा शिक्षा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रिक्त पदों में भर्ती की प्रक्रिया तेज करें। जिससे यहाँ नये विभागों में कार्य शुरू हो सके। डीन सुपर स्पेशलिटी के डॉक्टरों को आयुष्मान योजना की शेष बची प्रोत्साहन राशि का तत्काल वितरण करायें। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के लिए दो माह में आधुनिक आवास भी उपलब्ध हो जायेंगे। कैंसर यूनिट भवन का निर्माण पूरा होते ही दो माह में कैंसर के उपचार की आधुनिक सुविधा उपलब्ध हो जायेगी। कैंसर के उपचार के लिए लीनेक और पेट स्केन मशीन शीघ्र स्थापित हो जायेगी। कैंसर अस्पताल में 200 बेड में भर्ती की सुविधा मिलेगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रदेश की प्रथम डिजिटल लाइब्रोरी का शुभारंभ किया गया है। इसमें पाँच हजार किताबें डिजिटली उपलब्ध है। एक किताब को कई विद्यार्थी एक साथ पढ़ सकते हैं। इसके लॉगिन पासवर्ड से किताबों को डाउनलोड करने की भी सुविधा रहेगी। मेडिकल के विद्यार्थी घर से भी इसका लाभ उठा सकते हैं। इसमें 4 लाख प्रश्न और उत्तर भी उपलब्घ है। मेडिकल एजुकेशन के लिए यह रीवा की बड़ी उपलब्धि है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि स्वीकृत निर्माण कार्य तेजी से पूरा करायें। मेडिकल कॉलेज में 250 सीटों के अनुसार क्लासरूम छात्रावास तथा स्टाफ की व्यवस्था करें। रीवा में प्रदेश का दूसरा शासकीय डेंटल कॉलेज खुलने जा रहा है। इसके भवन निर्माण के लिए 36 करोड़ रूपये मंजूर हो गये हैं। डीन मेडिकल कॉलेज इस वर्ष विभिन्न कार्यों के लंबित बिलों का तत्काल भुगतान करायें। कार्यपालन यंत्री को ट्रांसफार्मर सुधार की राशि का भी तत्काल भुगतान करें। नगर निगम को भी 25 लाख रूपये के सेवा कर का भुगतान करायें। मेडिकल कॉलेज स्वशासी संस्थान है। इसे आवश्यक व्यवस्थाओं तथा अधोसंरचना के विकास एवं मेंटेनेन्स के लिए शासन स्तर से पृथक से राशि देने का प्रयास किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अधीक्षक संजय गांधी हॉस्पिटल को अस्पताल में साफ-सफाई, शौचालयों में सुधार और प्रवेश कक्ष को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए। बैठक में सांसद  जनार्दन मिश्र, विधायक मऊगंज  प्रदीप पटेल ने विभिन्न विषयों में विचार व्यक्त किए। बैठक में संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ अरूणा कुमार ने कहा कि सामान्य सभा में पारित प्रस्ताओं तथा दिए गये निर्देशों का एक माह में पूरी तरह से पालन कराया जायेगा। लंबित बिलों के भुगतान, भर्ती प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने और मेडिकल कॉलेज के लिए वित्त पोषण के लिए आवश्यक व्यवस्थाऐं की जायेंगी। बैठक में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने विभिन्न कार्यों, आय व्यय और गत बैठक के निर्णय पर कार्यवाही की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में पूर्व डीन डॉ. एपी.एस. गहरवार, डॉ. आनंद सिंह, अधीक्षक संजय गांधी हॉस्पिटल डॉ. राहुल मिश्रा, अधीक्षक सुपर स्पेशलिटी डॉ. अक्षय वास्तव, डॉ. प्रियंक शर्मा सहित सामान्य सभा के सदस्य और संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।      

जनसुविधाओं को गति देने 90 लाख से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन : राज्यमंत्री गौर

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने शनिवार को गोविंदपुरा क्षेत्र में 90 लाख रुपए से अधिक लागत के विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास कार्य आमजन की सुविधा बढ़ाने और जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि साकेत नगर के 9ए से 9बी तक लगभग 40.23 लाख रुपए की लागत से सड़क डामरीकरण कार्य का भूमिपूजन किया गया, जिससे क्षेत्र की आधारभूत संरचना मजबूत होने के साथ आवागमन और अधिक सुगम होगा। उन्होंने कहा कि वार्ड क्रमांक 54 में लगभग 12.53 लाख रुपए की लागत से अमराई स्थित धनवंतरी पार्क के विकास कार्य का भी भूमिपूजन किया गया, जो नागरिकों को स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने में सहायक होगा। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि सड़कों के निर्माण, जल निकासी व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, स्ट्रीट लाइट की स्थापना तथा पार्कों के सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों से क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत मिल रही है। इन विकास कार्यों के परिणामस्वरूप जहां एक ओर यातायात व्यवस्था बेहतर हुई है, वहीं स्वच्छता और सुरक्षा के स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि यह केवल एक स्थान पर किए गए कार्य नहीं हैं, बल्कि पूरे वार्ड में लगभग 90 लाख 60 हजार रुपए की लागत से विभिन्न स्थानों पर सड़क, नाली, पार्क और अन्य निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विकास कार्य सरकार की स्पष्ट नीति और नीयत का परिणाम हैं, जिसमें आमजन के विश्वास पर खरा उतरना सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्थानीय नागरिकों ने इन कार्यों पर खुशी जताते हुए कहा कि राज्यमंत्री  गौर के प्रयासों से समस्याओं का समाधान तेज गति से हो रहा है।

इंदौर में गाइडलाइन पर घमासान: 500 आपत्तियां दर्ज, 24 मार्च को भेजा जाएगा भोपाल

इंदौर इंदौर में नई कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर आमजन और वकीलों द्वारा आपत्तियां दर्ज कराई जा रही है। शनिवार को आपत्तियां दर्ज करने के आखिरी दिन तक 500 के करीब आपत्तियां दर्ज हो चुकी थी। इसमें जिले में विभिन्न प्रस्तावित सड़क मार्गों के आसपास के गांवों में गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी करने की आपत्तियां दर्ज हुई है। वहीं शहरी क्षेत्र में पुरानी मल्टी (अपार्टमेंट) के लिए दरें कम करने को लेकर आपत्तियां दर्ज हुई है। आपत्तिकर्ता का मानना है कि समय के साथ अपार्टमेंट की स्थिति और सुविधाएं बदल जाती है, इसलिए उनकी दरें कम होना चाहिए। 500 के करीब आपत्तियां प्राप्त हुई जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में जिले की 2606 लोकेशन पर गाइडलाइन बढ़ोतरी के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली थी। इन लोकेशन पर 10 से 200 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। प्रस्ताव पर रियल एस्टेट से जुडे लोग, पंजीयन विशेषज्ञ और आमजन अपनी-अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे है। यह प्रक्रिया शनिवार को समाप्त हो गई। सभी पंजीयन कार्यालयों के साथ ही ईमेल और वाट्सएप पर भी आपत्तियां स्वीकार की गई। वरिष्ठ जिला पंजीयक मंजूला पटेल का कहना है कि 500 के करीब आपत्तियां प्राप्त हुई है। सभी प्राप्त आपत्तियों को संकलित कर जिला मूल्यांकन समिति की स्वीकृति से निराकरण किया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। संभावना है कि 24 मार्च को प्रस्ताव भोपाल भेज दिया जाएगा। सड़क आधारित वृद्धि पर आपत्ति शहर में सड़क आधारित दर वृद्धि को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। लोगों का कहना है कि सभी सड़कों को एक समान मानकर कीमत बढ़ाना सही नहीं है। खासतौर पर बायपास और रिंग रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग मानकर 100 प्रतिशत बढ़ोतरी करना अनुचित बताया गया है। इसके बजाय, सड़क की वास्तविक उपयोगिता और लोकेशन के आधार पर दरें तय करने की मांग की गई है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव जयपुर में कर्पूरचन्द्र कुलिश जन्म शताब्दी वर्ष के की नोट कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकतंत्र में अखबार जनता के हितैषी की भूमिका निभाते हैं। राजस्थान पत्रिका ने भी विभिन्न संस्करणों के प्रकाशन के माध्यम से जनता के प्रति सरोकारों का निर्वहन किया है। एक निजी समूह द्वारा स्व. कुलिश जी की स्मृति में श्रेष्ठ पत्रकारिता के साथ अन्य श्रेणियों में भी पुरस्कार दिए जाएंगे जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. कुलिश की भूमिका का स्मरण करते हुए कहा कि जीवन की एक अवस्था में सेवानिवृत्ति का निर्णय लेने और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने के भाव महत्वपूर्ण है। स्व. कुलिश जी ने सार्थक जीवन जिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को जयपुर में राजस्थान एक निजी समूह के पितृ पुरुष स्व. कर्पूर चंद्र कुलिश के जनशताब्दी समारोह में "अखबार और लोकतंत्र" विषय पर आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत की मूल सनातन संस्कृति और वेद संस्कृति को बचाने की आवश्यकता थी। गुजरात के सोमनाथ के दर्शन का सभी को अवसर मिला। एक हजार वर्ष पुराना गौरव लौटा और भारत फिर आकाश से बात करते हुए दिखाई दिया। विश्व भी इसका साक्षी बना। एक निजी समाचार पत्र द्वारा जयपुर में सोमनाथ के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की अनूठी पहल की गई, जो अभिनंदनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में फिल्म के माध्यम से प्रदर्शित एक निजी समूह की यात्रा की गंगा की धारा से तुलना करते हुए कहा कि जब गौमुख से गंगा जी निकलती हैं तो सिर्फ गंगा नहीं होती, अलकनंदा, भागीरथी भी होती है। यह यात्रा हरिद्वार, ऋषिकेश, पटना और बनारस होते हुए गंगासागर बंगाल की खाड़ी तक पहुंचती है। ऐसी ही यात्रा इस आयोजन में देखने को मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में स्व.कुलिश के चित्र पर माल्यार्पण कर आदरांजलि दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक निजी समूह को इस विशेष आयोजन के लिए बधाई देते हुए समूह के प्रधान संपादक के सार्थक योगदान का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर कुलिश जी की दो पुनर्प्रकाशित पुस्तकों- 'मैं देखता चला गया' और 'अमेरिका एक विहंगम दृष्टि' का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। लोकसभा अध्यक्ष  ओम बिरला ने कहा कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों को नष्ट करने के प्रयास होते रहे हैं, लेकिन भारत के लोकतंत्र को कोई समाप्त नहीं कर पाया है। एक निजी समूह ने अपनी छह दशक की यात्रा में अंतिम व्यक्ति की बात, शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया है।  बिरला ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कलमकारों द्वारा निभाई गई भूमिका का भी विशेष उल्लेख किया। राजस्थान के मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र की ताकत होती है। बदलते दौर में सरकारों को मीडिया के साथ कार्य करना होगा। मूल्यवान पत्रकारिता भविष्य की पीढ़ियों को दिशा देने का कार्य करती है। देश में आपातकाल के दौर में लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश की गई, तब पत्रिका सहित अनेक समाचार पत्र समूह अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अडिग खड़े थे। एक निजी समूह के प्रधान संपादक ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग भाषाओं में संवाद होते थे। शिक्षा में जीवन दर्शन, नैतिक मूल्य और भारतीय परंपराओं को शामिल करना आवश्यक हैं। दुर्भाग्य से पश्चिमी देशों के चलन का असर भारतीय युवा पीढ़ी पर दिखाई दे रहा है। देश में बहुत सी अच्छी परंपराएं आज भी जीवित हैं। नई शिक्षा नीति में आध्यात्म और संस्कारों के निर्माण का पहलु शामिल होने से सही संदेश युवाओं तक पहुंचेगा। इससे वे यह समझ सकेंगे कि आधुनिक रहते हुए भी परंपराओं के साथ मूल्य आधारित जीवन जिया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति  अजय रस्तोगी ने कहा कि श्रद्धेय कुलिश जी ने लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को उनके कर्तव्यों का बोध करवाया। न्यायपालिका लोकतंत्र का मूल आधार है, यह संविधान के अभिभावक के रूप में कार्य करती है और नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा करती है। कार्यक्रम में एक निजी समूह के प्रमुख  गुलाब कोठारी, समूह के निदेशक  बीआर सिंह और समूह के डिप्टी एडिटर  भुवनेश जैन, पत्रकारिता क्षेत्र के साथ ही अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्यजन उपस्थित थे।