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म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग की टीम ने जाना बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के नवाचार

भोपाल स्थानीय निकाय निर्वाचनों में राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार द्वारा किए गए तकनीकी नवाचारों एवं संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के आधुनिकीकरण का अध्ययन करने के लिये राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश के उप सचिव डॉ. सुतेश शाक्या, अवर सचिव  एन. के. लच्छवानी, विधिक सलाहकार  प्रदीप शुक्ला एवं आईटी कंसल्टेंट  राकेश शुक्ला ने बिहार का दौरा किया। बैठक में राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार के सचिव  मुकेश कुमार सिन्हा, विशेष कार्य पदाधिकारी  संजय कुमार सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने बिहार में निर्वाचन प्रक्रिया में किए गए तकनीकी विस्तार और सुधारों का विस्तृत अध्ययन किया। अध्ययन के दौरान संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के पूर्ण डिजिटलीकरण, बायोमेट्रिक/एफ.आर.एस. के माध्यम से मतदाता सत्यापन, ईवीएम द्वारा मतदान, मतदान केंद्र एवं मतगणना केंद्रों की वेबकास्टिंग द्वारा लाइव मॉनिटरिंग, वज्रगृह में डिजिटल लॉक की व्यवस्था, ओसीआर (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन) के माध्यम से मतगणना, जीआईएस मैपिंग, ई-वोटिंग प्रणाली तथा व्यापक जन-जागरुकता एवं प्रचार-प्रसार अभियान की जानकारी प्राप्त की गई। राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार तकनीक के प्रभावी उपयोग से निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश ने बिहार में लागू विभिन्न चुनावी नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए इसे एक उल्लेखनीय उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि "हम AI SUMMIT में राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार द्वारा प्रस्तुत ई-वोटिंग के प्रयासों की प्रशंसा से प्रेरित होकर इसके सफल क्रियान्वयन को देखने बिहार आए थे। यहाँ चुनाव सुधारों की दिशा में तकनीकी नवाचार अत्यंत प्रभावी एवं सुव्यवस्थित ढंग से लागू किए गए हैं। प्रत्येक चरण में कार्य सफलतापूर्वक संपादित किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने न केवल ई-वोटिंग को अपनाया है, बल्कि संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया को डिजिटाइज कर एआई के माध्यम से सुदृढ़ बनाया है। उन्होंने यह भी कहा है कि मध्यप्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में इस प्रकार तकनीक प्रक्रियाओं एवं नवाचारों को अपनाने पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जायेगा।  

राज्यपाल ने वनांचल ग्राम परसिली में जनजातीय समुदाय से किया संवाद

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि पात्र व्यक्तियों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाकर ही विकसित भारत का संकल्प पूरा किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गरीब और जरूरतमंदों को प्राथमिकता से योजनाओं से जोड़ें तथा उन्हें मुख्यधारा में शामिल कराए। राज्यपाल सीधी जिले के मझौली जनपद अंतर्गत वनांचल ग्राम परसिली में गुरुवार को आयोजित जनजातीय संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया है। महिलाएं निर्भीक होकर मंच से अपने अनुभव साझा कर रही हैं। परिवार की आर्थिक उन्नति में भागीदारी कर रही हैं। आधुनिक तकनीक को अपनाने में भी वह तेजी से आगे बढ़ रही है। देश में एक करोड़ ड्रोन दीदी है। आने वाले समय में यह संख्या दो करोड़ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान में जनजातीय समुदाय के लिए 80 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान है। पीएम जनमन योजना के तहत 24 हजार करोड़ रुपये से विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। सिकल सेल एनीमिया मरीजों से नियमित दवा लेने और खान-पान का ध्यान रखने का आग्रह किया। सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा कि वनांचल में राज्यपाल  पटेल के आगमन से उत्साह का माहौल है, वे गुजरात से ही सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन के लिए प्रयासरत हैं, उनका यह संकल्प प्रदेश में जारी है। स्वागत उद्बोधन में विधायक धौहनी  कुंवर सिंह टेकाम ने कहा कि अंचल में जनजातीय वर्ग को शासन की सभी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने सभी से सिकल सेल एनीमिया की जांच कराने के लिए कहा है। इससे पूर्व कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर राज्यपाल  पटेल का जनजातीय परंपरागत नृत्य से स्वागत किया गया। राज्यपाल ने कन्या-पूजन और मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन किया।  राज्यपाल  पटेल को परंपरागत जनजातीय कैप पहनाई गई और प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया। राज्यपाल ने महिला स्व-सहायता समूह और हितग्राही परिजनों से की चर्चा राज्यपाल  पटेल को रमाबाई अंबेडकर स्व-सहायता समूह की सदस्य मती साधना ने बताया कि समूह से जुड़कर सिलाई का कार्य प्रारंभ किया। कृषि एवं बीमा कार्य कर वे प्रतिमाह 10 से 15 हजार रुपए कमा रही हैं। वार्षिक आय एक लाख से अधिक है। आस्था स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष मती ललिता ने बताया कि उनकी पहले आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। अब वे लखपति दीदी है। राज्यपाल ने ओम प्रकाश बैगा के बच्चों शिवानी, शिवम और पुष्पेन्द्र को शिक्षा के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षित होकर ही सपने साकार होते हैं। उन्होंने माता-पिता की सेवा और नैतिक मूल्यों के पालन पर बल देते हुए जीवन में बड़े लक्ष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। परिवार ने बताया कि उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। हितलाभ वितरण और प्रदर्शनी का अवलोकन  राज्यपाल  पटेल ने जनजातीय संवाद कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से लाभान्वित हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। मध्यप्रदेश डे-आजीविका मिशन के तहत ऋण वितरण किए। कार्यक्रम स्थल में मध्य प्रदेश डे-आजीविका मिशन द्वारा लगाई गई हर्बल अबीर, गुलाल, महुआ के लड्डू आदि उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यपाल ने पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश राज्यपाल  पटेल ने परसिली स्थित सत्यसाई आश्रम में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही प्रत्येक नागरिक को जीवन के विशेष अवसरों पर कम से कम एक पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने आश्रम में उपस्थित बच्चों और स्थानीय नागरिकों से सीधा संवाद किया। जनजातीय और ग्रामीण संस्कृति के संरक्षण पर बल देते हुए पारंपरिक कला और पेंटिंग की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने और आजीविका का माध्यम बनाने के लिए प्रेरित किया।  

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: घूस लेते महिला सुपरवाइजर ट्रैप

खंडवा, खालवा विकासखंड मुख्यालय खालवा में महिला एवं बाल विकास विभाग की एक संविदा पर्यवेक्षक को लोकायुक्त की टीम ने पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि पर्यवेक्षक ने पहले सहायिका पद पर नियुक्ति के लिए पांच हजार रुपये और बाद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर पदस्थापना के लिए दो लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता 27 वर्षीय सलिता पालवी निवासी ग्राम मोजवाड़ी वर्तमान में आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक-एक मोजवाड़ी में सहायिका के पद पर पदस्थ हैं। उनकी नियुक्ति अक्टूबर 2025 में हुई थी। मोजवाड़ी स्थित आंगनवाड़ी केंद्र-3 में कार्यकर्ता का पद रिक्त होने पर उन्होंने नियमानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग, खालवा में आवेदन प्रस्तुत किया था। नियुक्ति दिलाने पांच, पदास्थापना के लिए दो लाख मांगे आरोप है कि महिला एवं बाल विकास परियोजना खालवा के सेक्टर सांवलीखेड़ा की संविदा पर्यवेक्षक 55 वर्षीय अंजिला मोहे निवासी ग्राम मलगांव ने आवेदिका से पहले सहायिका पद पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर पांच हजार रुपये तथा कार्यकर्ता पद पर पदस्थापना के लिए दो लाख रुपए की मांग की। इस प्रकार कुल दो लाख पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत के बाद बिछाया जाल पीड़िता ने मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त) इंदौर विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त) इंदौर राजेश सहाय से की। शिकायत का सत्यापन सही पाए जाने पर ट्रैप दल का गठन किया गया। योजनाबद्ध कार्रवाई के तहत लोकायुक्त टीम ने गुरुवार को आरोपित अंजिला मोहे को आवेदिका से पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। मामले की जांच जारी आरोपित के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त इंस्पेक्टर प्रतिभा तोमर, आशुतोष मिठास सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप की स्थिति है। मामले की आगे की जांच जारी है। रुपये लेते हुए ऐसे हुई ट्रैप फरियादिया सलिता पालवी ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं पर्यवेक्षकों का जनपद पंचायत खालवा सभाकक्ष में प्रशिक्षण चल रहा था। इसी दौरान मैडम ने परियोजना कार्यालय में बुलाया। पूर्व से नियत योजना के तहत लोकायुक्त अधिकारियों ने तैयारी करके रखी थी, जैसे ही परियोजना आफिस में रिश्वत की राशि मैडम को दी, अधिकारियों में पकड़ लिया।  

ब्लैकमेलिंग मामले में मुरैना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, यूट्यूबर सपन सिंह जादौन हिरासत में

मुरैना अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से ब्लैकमेलिंग करके वसूली करने वाले एक यूट्यूबर को मुरैना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले सपन सिंह जादौन नाम के युवक ने मुरैना की आरटीओ अर्चना परिहार से संबंधित खबरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। इसके साथ ही मुरैना के ही सबलगढ़ के नगर पालिका अध्यक्ष सोनेराम धाकड़ से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे। दोनों से कर रहा था पैसे की मांग वहीं, यूट्यूबर सपन सिंह जादौन दोनों अधिकारियों से पैसे की मांग कर रहा था। मुरैना के दोनों अधिकारियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद पुलिस यूट्यूबर सपन सिंह जादौन को गिरफ्तार किया है। अब आगे की कार्रवाई की जा रही है। प्राइवेसी का कर रहा है उल्लंघन मुरैना के सिटी कोतवाली के टीआई अमित भदौरिया ने बताया कि आरटीओ अर्चना परिहार ने पुलिस में शिकायत की थी कि सपन सिंह जादौन नाम का एक यूट्यूबर सोशल मीडिया पर उनकी निजता का उल्लंघन कर रहा है और सोशल मीडिया पर ही उनके बारे में अनर्गल बातें कर रहा है। आरटीओ की शिकायत मिलने पर पुलिस ने सपन सिंह के खिलाफ एक्सटॉर्शन समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। नगर पालिका अध्यक्ष को भी कर रहा था ब्लैकमेल टीआई ने यह भी जानकारी दी की सबलगढ़ के नगर पालिका अध्यक्ष से भी सपन सिंह जादौन द्वारा इसी तरह ब्लैकमेलिंग की जा रही थी। नगर पालिका अध्यक्ष सोनेराम धाकड़ ने इस बात की शिकायत संबंधित थाने में की थी। जिसके बाद सबलगढ़ थाने में भी सपन सिंह जादौन पर एफआईआर दर्ज हुई है। सपन सिंह जादौन पर एफआईआर दर्ज होने के बाद मुरैना पुलिस ने सपन सिंह जादौन को गिरफ्तार कर लिया है। टीआई ने जानकारी देते हुए बताया कि सपन सिंह जादौन सोशल मीडिया पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ पोस्ट डालता था और उन्हें ब्लैकमेल करता था। यही उसका काम था। इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। सपन सिंह जादौन के कुछ साथियों के बारे में भी जानकारी मिली है। पुलिस तथ्यात्मक विवेचना कर रही है और उसके साथ जो भी सहयोगी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ भी पुलिस द्वारा कार्रवाई की जाए

रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया जिला पंचायत का लिपिक, कटनी में लोकायुक्त ने किया एक्शन

कटनी  जिला पंचायत में रिश्वतखोरी का अजब मामला सामने आया है। जहां दो साल पहले रिश्वत लेते पकड़े गए एक सचिव से हाईकोर्ट के आदेश पर बहाली के नाम पर बाबू ने रिश्वत मांगी। सचिव ने लोकायुक्त से शिकायत कर बाबू को ही ट्रैप करवा दिया। जिला पंचायत के लिपिक को लोकायुक्त पुलिस जबलपुर ने पांच हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा है। कार्रवाई से जिला पंचायत में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार सह फरियादी सचिव आशीष दुबे वर्ष 2024 में रिश्वत लेने के एक मामले में ट्रैप हुए थे और उन्हें सह आरोपी बनाया गया था। इसके बाद जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें निलंबित कर दिया था। सचिव ने मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके आधार पर आठ माह पूर्व न्यायालय ने उन्हें बहाल करने के आदेश दिए थे। 55,000 रुपये कीमत का मोबाइल मांगा बहाली की फाइल आगे बढ़ाने के लिए वह जिला पंचायत की स्थापना शाखा में पदस्थ लिपिक सत्येंद्र सिंह सोलंकी के पास पहुंचे। वहां उन्होंने फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 55,000 रुपये कीमत का मोबाइल मांगा। सचिव ने इतनी राशि एक साथ न देने की बात कही, जिस पर लिपिक ने किस्तों में राशि लेने की बात तय की। लिपिक ने सचिव से पहली किस्त में 5,000 रुपये, अगले माह 10,000 रुपये और बहाली के बाद शेष राशि देने की बात तय की थी। इसकी शिकायत सचिव आशीष दुबे ने लोकायुक्त जबलपुर एसपी से की थी। लिपिक को रंगे हाथ पकड़ लिया लोकायुक्त एसपी ने मामले की जांच कर शिकायत सही पाए जाने पर गुरुवार को जिला पंचायत में टीम भेजी और जैसे ही आशीष ने किस्त के 5,000 रुपये दिए, लिपिक को रंगे हाथ पकड़ लिया। मौके पर कार्रवाई जारी है।  

शिक्षा विभाग ने जारी किया अलर्ट, 7 दिन अनुपस्थिति वाले कर्मचारियों को लगेगा कड़ा कदम

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब स्कूलों से गायब रहने वाले शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। लोक शिक्षण संस्थान विभाग के नए निर्देश के मुताबिक यदि कोई शिक्षक लगातार 7 दिन तक बिना सूचना के अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सेवा सीधे समाप्त की जा सकती है। इस फैसले ने शिक्षा महकमे में हलचल मचा दी है। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप ने दो टूक कहा कि विभाग में अनुशासन सर्वोपरि है। “हर सिस्टम की अपनी मर्यादा होती है। अगर शिक्षक ही जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा?” मंत्री ने साफ कर दिया कि शिक्षा व्यवस्था में ढिलाई या मनमानी अब किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।  क्या है नया आदेश? लगातार 7 दिन बिना सूचना गैरहाजिरी पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई संबंधित अधिकारी को अनुपस्थिति की रिपोर्ट अनिवार्य विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने पर जवाबदेही तय क्यों लिया गया फैसला? सूत्रों के अनुसार, कई जिलों से शिक्षकों की लगातार गैरहाजिरी की शिकायतें मिल रही थीं। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही थी। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।सख्ती या सख्त संदेश?मंत्री राव उदय प्रताप ने कहा कि यह कदम किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए है। “बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं होगा। जो जिम्मेदारी निभाएगा, उसे पूरा सम्मान मिलेगा; लेकिन लापरवाही पर सीधी कार्रवाई होगी। अब देखना होगा कि इस सख्त आदेश के बाद शिक्षा व्यवस्था में कितना सुधार आता है और गैरहाजिर रहने वाले शिक्षकों पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल, शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है ड्यूटी से गायब रहना अब महंगा पड़ेगा। 

आश्रम में त्रासदी: 250 बच्चों में से 11 की मौत, गंभीर हालत में 50+ बच्चे; हाईकोर्ट ने की कार्रवाई

उज्जैन  उज्जैन के अंबोदिया स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम में 20 नवंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच डेढ़ माह में 11 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। मृतकों में अधिकांश बच्चे बहु-दिव्यांग थे और 10 से 18 वर्ष आयु वर्ग के थे। सभी बच्चों को गंभीर हालत में इलाज के लिए जिला अस्पताल उज्जैन लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हुई। हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, अधिकारियों को नोटिस जारी सेवाधाम आश्रम में बीते एक साल में कुल 17 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लिया। कोर्ट ने मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास प्रमुख सचिव, आयुक्त, कलेक्टर उज्जैन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की गई है। दिसंबर और जनवरी में लगातार हुई मौतें शासकीय चरक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 2025 में 8 बच्चों और जनवरी 2026 में अब तक 2 बच्चों की मौत दर्ज की गई है। सभी मामलों में पोस्टमॉर्टम कराया गया और पुलिस की मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी की गई। चरक भवन अस्पताल में कराया गया पोस्टमॉर्टम मृत सभी बच्चों का पोस्टमॉर्टम शासकीय चरक भवन अस्पताल के पोस्टमॉर्टम रूम में थाना भैरवगढ़ पुलिस की मौजूदगी में कराया गया। अस्पताल के आरएमओ डॉ. चिन्मय चिंचोलेकर ने बताया कि बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। कुछ बच्चों को मृत अवस्था में लाया गया, जबकि कुछ की इलाज के दौरान मौत हुई। अधिकांश मौतों में एनीमिया बीमारी सामने आई है। आश्रम में 250 बच्चे, 50 से अधिक की हालत गंभीर अंकित सेवाधाम आश्रम में वर्तमान में करीब 250 निराश्रित और दिव्यांग बच्चे रह रहे हैं। आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने बताया कि इनमें से 50 से अधिक बच्चों की हालत गंभीर है। उन्होंने कहा कि आश्रम में आने वाले अधिकांश बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। कई बच्चे ऐसे हैं जो चलने, उठने या स्वयं भोजन करने में सक्षम नहीं हैं। इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम से 86 बच्चों को किया गया था शिफ्ट करीब 1.5 साल पहले इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम में बच्चों की मौत और बीमारी के मामले के बाद प्रशासन ने आश्रम की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बाद वहां रह रहे 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया गया था। मृतकों में अधिकांश बच्चे उसी आश्रम से लाए गए थे। आश्रम संचालक ने बताया पहले से बीमार थे बच्चे आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने बताया कि जिन बच्चों की मौत हुई, वे पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। कई बच्चों को सांस लेने में परेशानी, खून की कमी और अन्य बीमारियां थीं। उन्होंने बताया कि आश्रम में आने वाले बच्चों का इलाज पहले से विभिन्न स्थानों पर चल रहा होता है और उनकी गंभीर स्थिति के कारण उन्हें आश्रम में रखा जाता है।

MDMA निर्माण का बड़ा नेटवर्क फटा मंदसौर में, जब्त 1886 किलो केमिकल, 100 किलो ड्रग्स बनने से बचाई गईं जानें

मंदसौर  वायडी नगर पुलिस ने विजय हाउसिंग सोसायटी के एक किराए के मकान में चल रही एमडी ड्रग्स बनाने की बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मौके से 1886.6 किलो घातक केमिकल जब्त किया है। जांच में टीसीएसए, एमएमए और एसिटोलोन जैसे रसायनों की पुष्टि हुई. प्रतापगढ़ निवासी आरोपी श्रेयांस मोगरा ने 1 जनवरी 2026 को खुद को लहसुन-प्याज का व्यापारी बताकर यह मकान लिया था। आरोपी वर्तमान में तस्करी के एक अन्य मामले में प्रतापगढ़ जेल में बंद है। मामला तब खुला जब मकान मालकिन ललिता जैन ने मकान खाली कराने के लिए पुलिस को आवेदन दिया। एसपी विनोद कुमार मीना के निर्देशन में टीम ने ताला तोड़ा तो 10 ड्रमों में केमिकल का स्टॉक मिला। पुलिस आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार करेगी। एमडीएमए के खिलाफ 3 साल में दर्जनों कार्रवाई ड्रग तस्करों ने अफीम, हीरोइन, ब्राउन शुगर और डोडा चूरा की तस्करी के अलावा अब नए और खतरनाक ड्रग एमडीएमए को स्थानीय तौर पर बनाने की छोटी-छोटी फैक्ट्रियां तैयार कर ली हैं. तस्कर इसे दुनिया भर के बाजारों में खपाने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले 3 सालों के दौरान मध्य प्रदेश के मालवा इलाके के मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों के अलावा राजस्थान के झालावाड़, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों में एमडीएमए बनाने की दर्जनभर से ज्यादा फैक्ट्रियां पकड़ी गई. हाल ही में रतलाम जिले के ग्राम चिकलाना में भारी मात्रा में एमडीएमए की ड्रग बनाने की एक बड़ी फैक्ट्री पर कार्रवाई हुई. यहां चंदन और राष्ट्रीय पक्षी मोर की तस्करी करने का भी खुलासा किया गया. इसके पहले भोपाल में एमडीएमए बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई थी. उसके कनेक्शन भी मंदसौर जिले से मिलने की बात सामने आई थी. इसी तरह नीमच जिले में भी पिछले 2 सालों के दौरान 4 बड़ी कार्रवाई हुई है. जिनमें पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. 2025 में 448 आरोपियों की गिरफ्तारी 6 अक्टूबर 2024 को भोपाल में 1814 करोड़ की एमडीएमए बनाने की फैक्ट्री जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया था. इस मामले के कनेक्शन मंदसौर से जुड़े हुए होने की बात सामने आई थी. पिछले साल 2025 अफीम, हीरोइन, ब्राउन शुगर, स्मैक और डोडा चूरा की तस्करी के मामलों में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत 166 प्रकरण दर्ज किए. जिसमें 448 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई. 295 करोड़ की संपत्ति फ्रिज पुलिस ने इन मामलों में 13273 किलो डोडा चूरा, 61 किलो अफीम, 7 किलो एमडीएमए ड्रग, 2011 किलो गांजा, 55 ग्राम स्मैक, 2 किलो अल्फा झेलम केमिकल जब्त करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया. जिनके कानूनी प्रकरण अभी देश की विभिन्न न्यायालय में चल रहे हैं. इस मुहिम में मंदसौर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए इन तस्करों की अवैध संपत्तियों पर कानून के तहत कार्रवाई करते हुए 295 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की है. साथ ही इस कानून के अंतर्गत बड़े तस्करों पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने अभी 7 तस्करों के खिलाफ देश की विभिन्न कोर्ट में प्रकरण प्रस्तुत किए हैं.

भगोरिया हाट में मची उत्सव की रौनक, युवा और बुजुर्ग पारंपरिक अंदाज में हुए शामिल

धूलकोट  जिले के धूलकोट में  आदिवासी लोक संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया हाट का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। मेले में आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे पहुंचे। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक आभूषणों से सुसज्जित युवक-युवतियों की छटा देखते ही बन रही थी। कई युवा और बालिकाएं एक समान वेशभूषा में समूह बनाकर मेले की रौनक बढ़ाते नजर आए।  मेले में खानपान की दुकानों पर भी अच्छी-खासी भीड़ रही। जलेबी, गुड़, सेव, भजिया सहित पारंपरिक व्यंजनों का लोगों ने परिवार सहित आनंद लिया। वहीं कुल्फी, लस्सी और बर्फ के गोले का स्वाद लेते युवाओं की टोलियां खासा उत्साहित दिखीं। परिवार और मित्रों के साथ पहुंचे लोगों ने मेले के पलों को मोबाइल कैमरों में कैद किया और जमकर सेल्फी ली। होली पर्व को ध्यान में रखते हुए हार, कंकण, खजूर, चना और रंग-गुलाल की दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने पारंपरिक आभूषणों की खरीदारी की, जबकि बच्चों ने खिलौनों की दुकानों पर मोलभाव किया। मेले में मिकी माउस झूला, आकाश झूला, जहाज झूला और जंपिंग झूलों का बच्चों व युवाओं ने भरपूर आनंद उठाया। कई बालिकाएं हाथों में अपना नाम गुदवाती नजर आईं, वहीं परिवारों ने फोटो स्टूडियो में समूह फोटो खिंचवाकर इस दिन को यादगार बनाया। मादल और ढोल-मांडल की थाप पर बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं पारंपरिक नृत्य में थिरकते दिखाई दिए। पूरे हाट परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। समाजजनों ने एक-दूसरे को भगोरिया हाट और होली पर्व की शुभकामनाएं दीं। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को सतपुड़ा के वनांचल ग्राम काबरी में भी भगोरिया हाट का आयोजन होगा, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों के पहुंचने की संभावना है। 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरलाइंस को हाईकोर्ट का नोटिस, ग्वालियर एयरपोर्ट की उड़ानों में कमी पर सवाल

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के ग्वालियर एयरपोर्ट पर हवाई सेवाओं के विस्तार के बावजूद फ्लाइट्स की कमी पर अब हाईकोर्ट भी चिंतित है. जिसको लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने केंद्र सरकार के साथ नागरिक उड्डयन मंत्रालय और ग्वालियर एयरपोर्ट पर सेवाएं दे रही एयरलाइन कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. नियमित उड़ानों को लेकर लगाई गई जनहित याचिका असल में ये नोटिस एक जनहित याचिका पर चल रही सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर दिए गए हैं. मामला ग्वालियर एयरपोर्ट पर संचालित होने वाली नियमित हवाई उड़ानों को लेकर कोर्ट के संज्ञान में लाया गया था. ये जनहित याचिका कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के अध्यक्ष सुदर्शन झवर द्वारा दायर की गई है. नया एयरपोर्ट, यात्री बढ़े, लेकिन सीमित उड़ाने याचिकाकर्ता की ओर से दायर जनहित याचिका पर पैरवी कर रहे वकील सिद्धार्थ सिजौरिया के मुताबिक, "इस पीआईएल पर याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष रखते हुए बताया है की, "ग्वालियर के नए एयरपोर्ट राजमाता विजयाराजे सिंधिया टर्मिनल का निर्माण करीब 450 करोड़ की लागत से कराया गया. इसके बाद ग्वालियर से हवाई सफर करने वालों की संख्या में भी 25 से 26 फीसदी तक बढ़ोत्तरी हो चुकी है. बावजूद इसके ग्वालियर को पर्याप्त हवाई सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं. देश के कई प्रमुख शहरों के लिए ग्वालियर से कोई सीधी उड़ान उपलब्ध नहीं है. ऐसे में यात्रियों को ट्रेन या सड़क मार्ग पर निर्भर होना पड़ रहा है." एविएशन पॉलिसी लागू फिर भी प्रमुख शहरों के लिए नहीं फ्लाइट्स एडवोकेट सिद्धार्थ राजौरिया ने कोर्ट के सामने पक्ष रखते हुए कहा कि, केंद्र और राज्य सरकारों ने छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने के लिए नीतियां बनायी है. मध्य प्रदेश में भी एविएशन पॉलिसी लागु हो चुकी है, लेकिन ग्वालियर से देश और प्रदेश के प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ाने अब तक शुरू नहीं हो सकी है. कोर्ट ने संबंधित पक्षों को दिया नोटिस हालांकि इस दौरान वकील ने यह भी बताया कि, इस सुनवाई के लिए याचिकाकर्ता द्वारा नगर निगम को 25 हजार रुपए जमा करने की सहमति दी थी. जिसके बाद कोर्ट ने इस याचिका को सुनवाई योग्य माना और याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और संबंधित एयरलाइंस कंपनियों से 4 हफ्ते में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किए हैं."