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धार में आज विशेष आयोजन: भोजशाला में बसंत पंचमी और जुमे की नमाज, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

 धार  मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला परिसर में इस बार बसंत पंचमी और शुक्रवार (जुमे की नमाज) एक ही दिन पड़ने से असमंजस जैसी स्थिति बन गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने समय और स्थान के बंटवारे का एक विशेष फॉर्मूला तय कर शांतिपूर्ण समाधान निकाल लिया है. आज मौके पर बसंत पंचती की पूजा और नमाज दोनों हो रही है. मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित 11वीं सदी के विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर में शुक्रवार को बसंत पंचमी की पूजा भारी सुरक्षा के बीच शुरू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए पूजा और नमाज के लिए समय निर्धारित किया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने आदेश दिया कि हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति होगी, जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे के बीच नमाज अदा कर सकेंगे.  प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा के लिए पुलिस, आरएएफ और सीआरपीएफ सहित करीब 8,000 जवानों को तैनात किया है. पूरे परिसर की निगरानी 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों और 10 ड्रोनों के जरिए की जा रही है. शांति बनाए रखने के लिए नमाजियों की लिस्ट पहले ही प्रशासन को सौंप दी गई है. एजेंसी के मुताबिक, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं और वे इस व्यवस्था पर सहमत हैं. अब तक साइट को कैसे मैनेज किया गया है? पिछले 23 सालों से एक एडमिनिस्ट्रेटिव व्यवस्था लागू है, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की इजाज़त है. मुसलमानों को साइट पर शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त है. इस सिस्टम ने काफी हद तक रोज़ाना के झगड़ों को रोका है, लेकिन जब बड़े हिंदू त्योहार शुक्रवार को पड़ते हैं, तो परेशानियां सामने आती हैं. भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद क्या है? भोजशाला ASI द्वारा संरक्षित एक स्मारक है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह परमार राजा भोज के वक्त से है. इस जगह पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय अपना दावा करते हैं. मुस्लिम मान्यता: मुस्लिम समुदाय इस संरचना को सूफी संत कमालुद्दीन के नाम पर कमल मौला मस्जिद मानता है और दावा करता है कि वहां सदियों से लगातार नमाज़ पढ़ी जा रही है और इस दावे का खंडन करता है कि यह मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था. हिंदू मान्यता: हिंदू भोजशाला को देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर मानते हैं, जिसके लिए वे संस्कृत शिलालेखों, मंदिर जैसी मूर्तियों और वास्तुकला की विशेषताओं का हवाला देते हैं और दावा करते हैं कि यहां बहुत पहले से मंदिर थी. यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक भी है, जिसमें विरासत, पुरातत्व और पूजा की निरंतरता की अलग-अलग व्याख्याएं शामिल हैं. दो दशक से हो रही है नमाज और पूजा पिछले 23 साल से चले आ रहे एक इंतज़ाम के तहत, ASI हिंदुओं को मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की इजाज़त देता है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त है. साल 2016 में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी थी, जिससे विवादित जगह पर नमाज़ के वक्त को लेकर धार में विरोध प्रदर्शन और झड़पें हुई थीं. दोनों पक्षों ने कोर्ट में रखी थी मांग भोज उत्सव समिति ने 23 जनवरी को पूरे दिन सरस्वती पूजा करने के लिए अधिकारियों से इजाज़त मांगी थी, जबकि मुस्लिम समुदाय ने दिन के महत्व का हवाला देते हुए दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज़ पढ़ने की मंज़ूरी के लिए एक ज्ञापन सौंपा था.    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दोनों पक्षों ने क्या कहा? भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वे सूर्योदय से सूर्यास्त तक निरंतर पूजा जारी रखेंगे. वहीं, कमल मौला नमाज इंतजामिया कमेटी के जल्फिकार पठान ने भी शांति बनाए रखने की अपील करते हुए फैसले को सर्वसम्मति से स्वीकार किया है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस संतुलित फैसले का स्वागत किया है. एएसआई की 2003 की व्यवस्था के मुताबिक, यहां मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज अदा करते आए हैं.   सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ड्रोन से निगरानी एसपी मनीष अवस्थी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 8,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिनमें महिला पुलिस इकाइयां भी शामिल हैं. भोजशाला की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई है और हर वाहन की बारीकी से जांच हो रही है. सोशल मीडिया पर भी चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है, जिससे कोई अफवाह न फैले. परिसर के अंदर सरस्वती पूजा के लिए भगवा झंडों और रंगोली से सजावट की गई है.  

स्टेट टाइगर सेल की बैठक में वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए साझा की जाएंगी जानकारी

 भोपाल  वन्यजीव अपराध पर सख्ती के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। स्टेट टाइगर सेल की तीन साल बाद हुई बैठक में तय किया गया कि अपराधियों को पकड़ने, मामलों के त्वरित निराकरण और डिजिटल निगरानी को मजबूत करने के लिए सभी एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। बैठक में तय हुआ कि वन्यजीव अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभिन्न विभाग आपस में सूचनाएं साझा करेंगे। हॉट स्पॉट की जानकारी वन विभाग पुलिस को देगा, ताकि त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी और वन विभाग के स्वान दस्ते की संयुक्त गश्त भी शुरू की जाएगी। न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने पर जोर न्यायालय में लंबित मामलों की समीक्षा कर उनके शीघ्र निपटारे के प्रयास किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर आरोपितों के खिलाफ आर्म्स एक्ट, आईटी एक्ट और बीएएनएस के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। फरार वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए भी सभी एजेंसियां सहयोग करेंगी। संयुक्त प्रशिक्षण और पुनर्गठन वन अमले की क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राज्य, संभागीय और जिला स्तर पर स्टेट टाइगर सेल को प्रभावी बनाने और पुनर्गठन के लिए राजस्व विभाग को भी शामिल करने का निर्णय लिया गया। डिजिटल निगरानी और पर्यटन ठगी पर कार्रवाई वन्यजीव से जुड़े मामलों में डिजिटल निगरानी बढ़ाने, ऑनलाइन बुकिंग से जुड़ी ठगी रोकने और टाइगर रिजर्व में पारदर्शिता लाने पर चर्चा हुई। सभी एजेंसियां अपना खुफिया तंत्र मजबूत करेंगी। बैठक में शामिल एजेंसियां यह बैठक विशेष पुलिस महानिदेशक एसटीएफ पंकज श्रीवास्तव की अध्यक्षता में वन भवन में हुई। इसमें वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, साइबर पुलिस, डीआरआई, सीबीआई, कस्टम, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एनटीसीए, स्टेट फॉरेंसिक साइंस, ईडी सहित कई एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।

मध्यप्रदेश में नगर निकायों की संख्या बढ़ेगी, गांवों को शहर बनाने की योजना

धार  धार जिले में नगरीय क्षेत्रों की संख्या नगर निकाय (Urban Bodies Expansion) स्थापित करके बढ़ाई जाने की कवायद शुरू हो गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर जिले की अलग-अलग विधानसभाओं के बड़े ग्राम पंचायत क्षेत्रों को नगर पंचायत (Nagar Panchayat) बनाने के लिए जनपद कार्यालयों से 9 बिंदुओं पर आधारित जानकारी प्रस्ताव बनाकर देने के लिए कहा गया है। बड़ी ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाने की मांग स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा उठाई गई है। यह सभी मांग पत्र सीएम डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) को सौंपे गए थे। सीधे आवेदन सौंपने का असर यह हुआ कि इस मामले में जिला शहरी विकास अभिकरण द्वारा अलग अलग क्षेत्रों के राजस्व अधिकारियों को पत्र जारी करके जनपदों के माध्यम से प्रस्ताव तैयार करवाने के लिए लिखा गया है। जनपदों से प्राप्त प्रस्तावों पर स्पष्ट अभिमत स्वीकृति के लिए आता है तो ग्राम विकास को गति मिलेगी। नगर परिषदें में तब्दील होने के बाद उसके अनुरुप सुविधाएं और व्यवस्थाएं तय होगी। बदनावर को नगर पालिका बनाने की मांग बदनावर विधानसभा क्षेत्र में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क बनने के बाद से तेजी से विकास मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है। यहां की नगर पंचायत को अब नगर पालिका बनाने की मांग उठी है। नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा सीएम डॉ. यादव को मांग पत्र सौंपा गया था। इस मामले में भी सीएमओ बदनावर को मप्र राजपत्र असाधारण 2011 में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार एवं मप्र नगर पालिका अधिनियम की धारा 5 के प्रावधानों के तहत जरूरी जानकारी जुटाकर प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा है। सब कुछ ठीक रहा तो बदनावर नगर पंचायत से नगर पालिका में तब्दील होगी और विकास के लिए राशि सहित सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी। सरदापुर में सर्वाधिक नगर पंचायत के प्रस्ताव सरदारपुर विधानसभा के बड़े ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाने की मांग भाजपा नेताओं द्वारा की गई थी। पूर्व विधायक मुकामसिंह निगवाल ने ग्राम पंचायत दसई, ग्राम पंचायत राजीद को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की मांग की थी। इस मामले में भी अनुविभागीय अधिकारियों को जनपदों के माध्यम से प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। इसमें ग्राम पंचायत को दर्शाते हुए प्रस्तावित नगर परिषद् का मानचित्र, आपस में दूरिया सहित राजस्व मानचित्र पर चिहिनत कर संपूर्ण जानकारी का प्रस्ताव स्पष्ट अभिमत के साथ तैयार करने के लिए कहा गया है। इसमें ग्राम पंचायत अमझेरा को स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा नगर पंचायत बनाने की मांग का प्रस्ताव भी शामिल है। मंत्री की मांग पर केसूर भी शामिल बदनावर विधानसभा की ग्राम पंचायत केसूर को नगर परिषद् बनाने की मांग केन्द्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर द्वारा पत्र के माध्यम से सीएम से की गई थी। इस मामले में प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। इसी तरह सिंधाना और गंधवानी को भी नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव तैयार करने के साथ अभिमत देने के लिए स्थानीय जनपदों को निर्देशित किया गया है।  प्रस्ताव मांगे है… मुख्यमंत्री को सौंपे जनप्रतिनिधियों के मांग पत्र के आधार पर अनुविभागीय अधिकारियों को जनपदों के माध्यम से प्रस्ताव और अभिमत देने के लिए कहा है। यह रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए प्रक्रिया शुरू होगी।-विश्वनाथ सिंह, प्रभारी डूडा अधिकारी धार

बेटी को मिलेगा माता-पिता की पेंशन में अधिकार, नए नियम जल्द होंगे लागू

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब बेटी को माता-पिता पेंशन की पेंशन में अधिकार मिलेगा। ये नियम प्रदेशभर में 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। राज्य सरकार पेंशन नियमों में पहली बार बड़े संशोधन करने जा रही है। प्रस्ताव तैयार किए जाने के बाद कैबिनेट में आने का इंतजार है। दरअसल, प्रस्तावित नियमों गौर करें तो भले ही घर में बेटा हो, लेकिन अगर बेटी उससे बड़ी है तो वही परिवार पेंशन की पात्र होगी। अविवाहित पुत्री/विधवा और तलाकशुदा पुत्री को आजीवन पेंशन मिलती रहेगी। आजीविका कमाने में पूरी तरह से अक्षम दिव्यांग पुत्र/पुत्री/भाई को भी पेंशन की पात्रता होगी। ये नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे। नए नियमों में दिव्यांगजनों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। जो पुत्र, पुत्री या भाई आजीविका कमाने में पूरी तरह से अक्षम हैं, उन्हें भी परिवार पेंशन की पात्रता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आश्रित को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर मिलती है। ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) में यह अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत होती है, जबकि एनपीएस में एन्युटी के आधार पर पेंशन तय होती है। वहीं यूपीएस में निश्चित पेंशन का प्रावधान है। कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार पेंशन पहले पत्नी को और पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद अवयस्क बच्चों को मिलती है। नए पेंशन नियम लागू होने के बाद बेटियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उन्हें परिवार में बराबरी का अधिकार मिलेगा। सरकार का यह फैसला महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। 1 अप्रैल से होंगे लागू  इसके अलावा अविवाहित बेटी, विधवा या फिर तलाकशुदा बेटी को भी आजीवन पेंशन मिलने की योजना रहेगी. वहीं अपना जीवन यापन न कर पाने वाले अक्षम दिव्यांग बेटे-बेटी या भाई को भी पेंशन की पात्रता दी जाएगी. नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू किए जाने की संभावना है. यानि यह योजना नए वित्त वर्ष में लागू होगी, बता दें कि पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर के लिए मिलती है, जबकि ओल्ड पेंशन स्कीम में आखिरी सैलरी का 50 प्रतिशत हिस्सा एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और यूपीएस में निश्चित पेंशन की पात्रता है जो कि अंतिम एन्युटी के आधार पर बनती है. जहां अगर कर्मचारी की मौत होती है तो फिर उसकी पेंशन उसकी पत्नी को दी जाती है, जो 30 प्रतिशत होती है. ऐसे में अब यह बदलाव होगा कि अगर पति-पत्नी दोनों की मौत होती है तो इस स्थिति में पेंशन पर उनकी बड़ी संतान का अधिकार होगा, जिसमें अव्यस्क बच्चा भी शामिल होगा.  यह भी होगा बदलाव  वहीं शादी के बाद भी बड़ी बेटी या फिर बड़े बेटे को पेंशन ट्रांसफर की जाएगी. अगर कोई पति पत्नी दोनों पेंशन स्कीम के तहत आते हैं, यानि दोनों की सरकारी नौकरी होगी और उन्हें पेंशन मिलता है तो उनकी मौत के बाद इसका अधिकार दोनों की फैमिली को मिलेगा. वहीं 25 साल से ज्यादा उम्र की बेटी या बेटे को हर साल यह भी बताना होगा कि वह अविवाहित या फिर विधवा है, यानि पूरी जानकारी के बाद ही वह पेंशन के नियमों में पात्रता रखेंगे.  कैबिनेट बैठक में पास होगा प्रस्ताव  बताया जा रहा है कि जल्द ही यह प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में भी पास होगा. सीएम मोहन यादव के विदेश दौरे से लौटने के बाद कैबिनेट की बैठक में पेंशन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव पास होगा, जबकि इसे नए वित्त वर्ष में लागू किया जाएगा. इसके लिए वित्त विभाग की तरफ से काम शुरू हो गया है. जबकि नए बजट में इसका प्रावधान भी कर दिया जाएगा.   अव्यस्क बच्चों को पेंशन की पात्रता बता दें कि, पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर मिलती है, जो ओल्ड पेंशन स्कीम में अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत है। एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और यूपीएस में निश्चित पेंशन की पात्रता है। परिवार पेंशन कर्मचारी की मृत्यु के बाद पत्नी को पति और पत्नी दोनों की मृत्यु के बाद अव्यस्क बच्चों को पेंशन की पात्रता होती है।

PWD ने 40 हजार किमी सड़कों का सेफ्टी ऑडिट कराया, सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन की अहम शुरुआत

भोपाल  एमपी में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) पहली बार सड़कों का अनिवार्य रूप से रोड सेफ्टी ऑडिट करवाने जा रही है। एनएचएआइ के एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा निर्मित स्टेट हाई-वे सहित अन्य जिला मार्ग और मुख्य जिला मार्ग की सड़कों का रोड सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा। जिसमें सड़कों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से विभिन्न मापदंडों में परखा जाएगा। सुरक्षा के मापदंडों पर होगी परख प्री-डिजाइन स्टेज से लेकर कंस्ट्रक्शन तक सेफ्टी का ऑडिट विभिन्न चरणों में किया जाएगा। उसके बाद सड़क की शुरुआत होने के बाद भी उसे सुरक्षा के मापदंडों पर फिर परखा जाएगा। जहां कमी सामने आएगी उसको दोबारा दुरुस्त किया जाएगा। ऑडिट के दौरान जो सड़कें विभाग द्वारा बनाई गई हैं उनकी खामियों को सुरक्षा कारणों के तहत चिह्नित किया जा रहा है।  40 हजार किमी सड़कों का कराया ऑडिट PWD विभाग द्वारा बनाई गई प्रमुख मौजूदा सड़कों का भी विभाग द्वारा सेफ्टी ऑडिट करवाया गया। जिसमें प्रमुख रूप से 441 खामियां पाई गई हैं। इनमें से करीब 200 खामियां ऐसी थीं, जिनमें थोड़े बहुत सुधार की आवश्यकता रही। जिन्हें ठीक कर दिया गया। वहीं 200 से ज्यादा ऐसी भी गलतियां चिह्नित की गईं जिनमें कंस्ट्रक्शन से जुड़ा काम करना था। जैसे अंधा मोड़, क्यूकल अंडर पास और सेफ क्रॉसिंग का निर्माण करना, जिस पर भी विभाग द्वारा लगभग काम पूरा कर लिया गया है। सड़क हादसों को रोकने की दिशा में यह बड़ी पहल साबित होगी। तकनीकी खामी के कारण नहीं होगी दुर्घटना इसलिए रोड सेफ्टी ऑडिट पर विभाग का जोर रोड सेफ्टी ऑडिट से सड़क पर किसी तकनीकी खामी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है। इसमें सड़क की डिजाइन, साइन बोर्ड, रोशनी, गति नियंत्रण, पैदल यात्रियों व साइकिल चालकों की सुरक्षा और ब्लैक स्पॉट्स का आकलन किया जाता है।  कई बार सड़कें बनने के बाद छोटी-छोटी खामियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन जाती हैं, जिन्हें ऑडिट के जरिए सुधारा जा सकता है। यह प्रक्रिया नई सड़कों के निर्माण से पहले, निर्माण के दौरान और उपयोग में आने के बाद भी की जाती है। तीन चरणों में ऐसे होगा सेफ्टी ऑडिट 1. प्री-डिजाइन स्टेज -सड़क की आवश्यकता और स्थान का अवलोकन – ट्रैफिक वॉल्यूम-वाहन के प्रकार – स्कूल, अस्पताल और बाजार जैसे प्वॉइंट का चयन। 2. डिजाइन स्टेज -रोड चौड़ाई, -कर्व, ग्रेड और जंक्शन डिजाइन -फुटपाथ, स्टॉप और अन्य ट्रैक -ड्रेनेज, लाइटिंग, साइन बोर्ड और मार्किंग -कंस्ट्रक्शन स्टेज वर्क जोन सेफ्टी – बैरिकेडिंग और डायवर्जन – रात की विजिबिलिटी और चेतावनी संकेत प्री-ओपनिंग – सड़क खोलने से पहले निरीक्षण – सभी साइन, मार्किंग और स्पीड ब्रेकर की जांच – ब्लैक स्पॉट की पहचान पोस्ट-ओपनिंग – दुर्घटना डेटा का विश्लेषण – ट्रैफिक का अध्ययन – सुधारात्मक उपाय

प्रदेश में दूध और डेयरी उत्पादों की शुद्धता जांचने के लिए बनाई गई हाईटेक डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला

भोपाल  दूध और दूध से जुड़े डेयरी प्रोडक्ट्स की शुद्धता जांचने के लिए प्रदेश में पहली बार हाईटेक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है। केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट परियोजना द्वारा स्वीकृत यह लैब राज्य की पहली प्रयोगशाला होगी, जहां दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच हो सकेगी। भारत सरकार ने दिया 12.40 करोड़ का अनुदान प्रयोगशाला के निर्माण के लिए भारत सरकार ने 12.40 करोड़ का अनुदान दिया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, शेष की खरीदी प्रक्रिया जारी है। MP की इस हाइटेक प्रयोगशाला में दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटि‚स, हेवी मेटल्स जैसी कई जांच हो सकेंगी। राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता भी दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच करा सकेंगे। यदि आपके घर में आने वाले दूध या उससे बने उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, जहां आम उपभोक्ता के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी। उपभोक्ताओं को मिलेगा शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाला दूध एवं दुग्ध उत्पाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। NABL और FSSAI से मान्यता प्राप्त होगी प्रयोगशाला यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के मार्गदर्शन एवं वित्तीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी। अत्याधुनिक मशीनें स्थापित प्रयोगशाला के निर्माण के लिये भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष मशीनों, केमिकल्स एवं ग्लासवेयर की खरीदी प्रक्रिया जारी है। शीघ्र ही दूध एवं दुग्ध पदार्थों के परीक्षण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। 100 से अधिक मानकों पर होगा परीक्षण राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी। आम उपभोक्ता और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ इस प्रयोगशाला की सुविधा आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ देश की विभिन्न खाद्य उत्पादक संस्थाओं को भी उपलब्ध होगी। इसके स्थापित होने से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा, शुद्धता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेश के उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। देशभर की संस्थाओं को मिलेगा लाभ मिलावट की आशंका पर शुद्धता जांचने के लिए लैब का इस्तेमाल आम आदमी से लेकर देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं कर सकेंगी। यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के वियीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी।

25 जनवरी से लोकभवन होगा आमजनों के लिए खोल दिया गया

लोकभवन 25 जनवरी से आमजनों के लिए खुलेगा कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में होगी पार्किंग, प्रवेश गेट नंबर 1 से भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार लोकतंत्र के महापर्व गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर 25 जनवरी से लोकभवन आमजनों के लिए खोला जा रहा है। नागरिक 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक निर्धारित समयावधि में लोकभवन का भ्रमण कर सकेंगे। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि लोकभवन 25 जनवरी एवं 27 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे से सायं 8 बजे तक आम नागरिकों के लिए खुला रहेगा। 26 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस के दिन, लोकभवन भ्रमण का समय प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि लोकभवन भ्रमण के लिए आने वाले नागरिक कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में वाहन पार्किंग कर सकेंगे। लोकभवन में प्रवेश गेट क्रमांक-1 से होगा और निकास गेट क्रमांक- 4 से होगा। भ्रमण के समस्त रूट में आमजन लोकभवन की ऐतिहासिकता, सजावट और प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि इस अवसर पर केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा “वीबी-जी रामजी योजना तथा वंदे भारत थीम” पर आधारित विशेष आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। तीनों दिन केन्द्रीय संचार ब्यूरों के सांस्कृतिक दलों द्वारा विभिन्न प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इसी प्रकार मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा “राजभवन से लोकभवन” विषय पर विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लोकभवन की ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक और प्रशासनिक यात्रा को रोचक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।  

पेंच जल विद्युत गृह ने मॉक ड्रिल में दिया महाराष्ट्र के तीन ताप विद्युत गृहों को बैकअप

भोपाल मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह के माध्यम से उच्च स्तरीय अभियान्त्रिकी दक्षता, समन्वय एवं परिचालन तत्परता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए महाराष्ट्र राज्य विद्युत पारेषण कम्पनी (MahaTransco) के साथ गत दिवस सफलतापूर्वक ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल की। यह अभ्यास विशिष्ट आपातकालीन परिस्थितियों या राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के आंशिक अथवा पूर्ण विफल होने की स्थिति में विद्युत प्रणाली की त्वरित बहाली एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की दृष्टि से किया जाता है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी के पेंच जल विद्युत गृह से महाराष्ट्र राज्य स्थित कोराडी ताप विद्युत गृह (महा-जेनको), खापरखेड़ा ताप विद्युत गृह (महा-जेनको) व विदर्भ औद्योगिक विद्युत गृह (अदाणी समूह), नागपुर तक एक आयलैंड का निर्माण कर महाराष्ट्र की लगभग 5 हजार मेगावाट उत्पादन क्षमता को बैकअप दिया गया। क्यों की जाती है मॉक ड्रिल भारतीय विद्युत ग्रिड संहिता (इंडियन इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड – IEGC) एवं MEGC 2020 के प्रावधानों के अंतर्गत ग्रिड पुनर्बहाली प्रक्रियाओं का सामयिक परीक्षण व सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इसमें पूर्ण या आंशिक ब्लैकआउट की स्थिति में ब्लैक स्टार्ट प्रक्रिया, आयलैंड का निर्माण व उसके पुनः राष्ट्रीय ग्रिड के साथ समन्वय की व्यवस्था शामिल है। मॉक ड्रिल कैसे की गई पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह में यह ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल गत दिवस 21 जनवरी को सुबह 10:03 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक सफलतापूर्वक संचालित की गई। इस मॉक ड्रिल में आयलैंड के माध्यम से पेंच जल विद्युत गृह से लगभग 20 मेगावाट विद्युत की आपूर्ति महाराष्ट्र के तीन ताप विद्युत गृहों कोराडी ताप विद्युत गृह, खापरखेड़ा ताप विद्युत गृह व विदर्भ औद्योगिक विद्युत गृह को की गई। इस मॉक ड्रिल में आपातकालीन स्थिति में विद्युत गृह को प्रारंभ करने की तकनीकी क्षमता का परीक्षण किया गया। लगभग दो घंटे तक आयलैंड के सफल एवं स्थिर संचालन के बाद दोपहर 12:02 बजे पेंच जल विद्युत गृह को राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के साथ सफलतापूर्वक पुनः समन्वित (री-सिंक्रोनाइज) किया गया। यह संपूर्ण प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप पूर्ण की गई, जो मध्यप्रदेश पावर कंपनी की उच्च स्तरीय अभियान्त्रिकी दक्षता, समन्वय व परिचालन तत्परता को प्रदर्शित करती है। ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल क्या है ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल एक विशेष तकनीकी अभ्यास है, जिसके अंतर्गत किसी भी पूर्ण या आंशिक ब्लैक आउट की स्थिति में विद्युत गृह को बाह्य ग्रिड सहायता के बिना, सेल्फ स्टार्ट जनरेटरों की सहायता से चालू किया जाता है। सामान्यतः यह प्रक्रिया जल अथवा गैस आधारित विद्युत गृहों द्वारा की जाती है, जहाँ स्थानीय स्टैंड-अलोन विद्युत स्रोतों जैसे डीजल जनरेटर सेट के माध्यम से सहायक प्रणालियों को विद्युत आपूर्ति देकर क्रमशः ताप विद्युत इकाइयों को प्रारंभ किया जाता है। यह अभ्यास त्वरित समाधान, प्रणाली की विश्वसनीयता तथा अभियंताओं की तकनीकी तत्परता एवं दक्षता का व्यावहारिक परीक्षण होता है। पेंच जल विद्युत गृह की विशिष्ट भूमिका पिछले वर्षों में ग्रिड संबंधी घटनाओं के परिपेक्ष्य में ब्लैक स्टार्ट सक्षम विद्युत गृहों की निरंतर तत्परता, परीक्षण एवं अभ्यास अत्यंत आवश्यक है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में विद्युत प्रणाली की शीघ्र बहाली कर आर्थिक एवं सामाजिक क्षति को न्यूनतम किया जा सके। उल्लेखनीय है कि सेंट्रल इंडिया व विदर्भ क्षेत्र के निकटस्थ उपलब्ध एकमात्र जल विद्युत स्रोत 160 मेगावाट क्षमता का पेंच जल विद्युत गृह है। इस दृष्ट‍ि से पेंच जल विद्युत गृह आपातकालीन तकनीकी अभ्यास के लिए अहम भूमिका रखता है। पेंच जल विद्युत गृह के माध्यम से आसपास स्थित महाराष्ट्र के विभिन्न ताप विद्युत गृहों को आपातकालीन परिदृश्य निर्मित कर इस अभ्यास को क्रियान्वित किया गया।  

मानसि‍क स्वास्थ्य पहल से विद्यार्थियों के समग्र विकास को मिलेगा नया आयाम

आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में सहायक कुलसचिव एवं प्रभारी प्राचार्य के लिए प्रशिक्षण भोपाल उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, शाहपुरा भोपाल में सहायक कुलसचिव एवं प्रभारी प्राचार्यों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषय-विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों के बारे में जानकारी दी जा रही है। गुरुवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुलसचिव व प्रभारी प्रचार्य को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस अवसर पर विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. ऊषा नायर ने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक पहल की जा रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक कल्याण को सुनिश्चित करना है। डॉ. नायर ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से विद्यार्थियों के भावनात्मक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होगा। परामर्श, मार्गदर्शन, जागरूकता कार्यक्रमों एवं सहयोगात्मक गतिविधियों के जरिए विद्यार्थी तनाव, चिंता और भावनात्मक दबाव को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इससे उनमें आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच तथा जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण का विकास होगा। उन्होंने कहा कि समय पर परामर्श, सहायता एवं संवेदनशील वातावरण के निर्माण से जोखिम की स्थिति में मौजूद विद्यार्थियों को आवश्यक सहयोग मिल सकेगा, जिससे न केवल मानसिक स्थिरता सुनिश्चित होगी बल्कि जीवन की रक्षा भी संभव हो पाएगी। इन पहलों के माध्यम से एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण का निर्माण होगा, जहां प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सहानुभूति, सहयोग और समग्र विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाएगा। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षण संस्थानों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच समन्वय एवं सहयोग को भी सुदृढ़ किया जाएगा। मनोवैज्ञानिकों, परामर्शदाताओं एवं प्राध्यापकों के संयुक्त प्रयासों से एक प्रभावी सहयोग तंत्र विकसित होगा, जो विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप समय पर सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 20 विश्वविद्यालयों के सहायक कुलसचिव एवं 20 महाविद्यालयों के प्रभारी प्राचार्य उपस्थित रहे।  

लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर पर समर्पित होगी नई दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाली म.प्र. की झांकी

 भोपाल लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड-2026 में मध्यप्रदेश की भव्य झांकी शामिल होगी झांकी में ‘पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर’ के गौरवशाली व्यक्तित्व, सुशासन, आत्मनिर्भरता, नारी सशक्तीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया जायेगा। झांकी के अग्र भाग में लोकमाता देवी अहिल्याबाई की चिर-परिचित प्रतिमा को दर्शाया गया है, जिसमें वे हाथ में शिवलिंग धारण किए पद्मासन में विराजमान हैं। यह दृश्य भारतीय मातृशक्ति की सौम्यता, गरिमा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। झाँकी के मध्य भाग में लोकमाता अहिल्याबाई अपने मंत्री-गण एवं सैनिकों के साथ दिखाई गई हैं, जो उनके सुदृढ़ प्रशासन और न्यायप्रिय शासन व्यवस्था को दर्शाता है। इसके निचले हिस्से में उनके शासनकाल में होल्कर साम्राज्य द्वारा किए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्यों का चित्रण है, जहाँ एक सैनिक पहरा देते हुए सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का संदेश देता है। अंतिम भाग में देवी अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर के प्रसिद्ध घाट, मंदिर एवं किले को प्रदर्शित किया गया है। नीचे पवित्र नर्मदा नदी, घाट एवं नौकाओं का दृश्य अंकित है। झाँकी के अंतिम छोर पर महेश्वर घाट स्थित मंदिरों के शिखर दिखाई देते हैं। वहीं भित्तिचित्रों में लोकमाता अहिल्याबाई के मार्गदर्शन में महिलाएँ प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ी की बुनाई करती हुई नजर आती हैं, जो उनके काल में नारी सशक्तीकरण, स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण है। झाँकी के साथ चलते लोक कलाकारों का पारंपरिक नृत्य, इस प्रस्तुति को जीवंत, रंगीन और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली बनाता है।