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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 23वीं मौत, 13 मरीज ICU में, 3 वेंटिलेटर पर

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. सोमवार को एक ही दिन में दो और लोगों की मौत हो गई, जिससे इस मामले में अब तक मौतों का आंकड़ा बढ़कर 23 तक पहुंच गया है. मृतकों की पहचान 59 वर्षीय कमलाबाई और 64 वर्षीय भगवान दास सबनानी के रूप में हुई है. जानकारी के अनुसार, दोनों ही मरीज पिछले करीब 10 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. उन्हें उल्टी-दस्त और तेज कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी और अब दोनों ने दम तोड़ दिया. हालांकि, इन दोनों मौतों को लेकर अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. बड़ी संख्या में लोग बीमार भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से दूषित पानी की सप्लाई के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नर्मदा पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिल जाने से यह स्थिति बनी है. इसके बाद इलाके में उल्टी, दस्त, बुखार और पेट दर्द के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में पानी की सप्लाई को बंद कर दिया था और वैकल्पिक रूप से टैंकरों के जरिए स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और बीमार लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा रहा है. अस्पतालों में एक्सट्रा बेड और डॉक्टरों की व्यवस्था भी की गई है. प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठे पानी के सैंपलों की जांच में खतरनाक बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि पहले ही हो चुकी है, जिसके बाद पूरे इलाके में अलर्ट घोषित किया गया. इसके बावजूद लगातार सामने आ रही मौतों ने प्रशासन की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मृतकों के परिजनों को जल्द मुआवजा दिया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी समाधान किया जाए. वहीं, लोग अब भी दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं और प्रशासन से साफ और पारदर्शी जानकारी की मांग कर रहे हैं.

मंत्री सिंह ने राष्ट्रीय युवा दिवस पर कहा, बच्चों को सही दिशा देने और उनकी छिपी प्रतिभा पहचानने का है यह दिन

राष्ट्रीय युवा दिवस बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानने, उन्हें सही दिशा देने और जिम्मेदार नागरिक बनाने का अवसर है : मंत्री सिंह नरसिंहपुर जिले के राव रुक्मणीदेवी पब्लिक स्कूल में आयोजित सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में हुए शामिल विद्यार्थियों के साथ किया सामूहिक सूर्य नमस्कार राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में प्रदेश भर में मनायी गया स्वामी विवेकानंद जी की जयंती नरसिंहपुर  प्रदेश भर में सोमवार को स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनायी गयी। इस अवसर पर प्रदेश के सभी स्कूलों में सामूहिक सूर्य नमस्कार का कार्यक्रम हुआ। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह सोमवार को नरसिंहपुर जिले के राजमार्ग स्थित राव रुक्मणीदेवी पब्लिक स्कूल में आयोजित सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में शामिल हुए और विद्यार्थियों के साथ सामूहिक सूर्य नमस्कार व योग किया। इस अवसर उपस्थित जनों ने स्वामी विवेकानंद के रिकॉर्डेड संदेश और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के रेडियो के माध्यम से प्रसारित किए गए संदेश का प्रसारण भी सुना। मंत्री सिंह ने विद्यार्थियों को योग के माध्यम से स्वस्थ्य रहने और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब तक बच्चों को अपने महापुरुषों के विचारों से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक उनमें आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और राष्ट्रप्रेम की भावना पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो सकती। राष्ट्रीय युवा दिवस बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानने, उन्हें सही दिशा देने और जिम्मेदार नागरिक बनाने का अवसर है। इसलिए आज का दिन केवल मनाने का नहीं, बल्कि स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को बच्चों के जीवन में उतारने का संकल्प लेने का दिन है। स्वामी विवेकानंद दुनिया के ऐसे युवा सन्यासी थे, जिन्होंने अल्पायु में ही अपने विचारों, चरित्र और ओजस्वी वाणी से विश्वभर में भारत का नाम रोशन किया। उन्होंने यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में भारत की आध्यात्मिक परंपरा, वेदांत और मानवता का संदेश पहुंचाया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि भारत केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और आत्मबल की भूमि है। मातृभाषा के सम्मान और भारतीय मूल्यों की दृढ़ता के साथ उन्होंने “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” का अमर संदेश दिया। मंत्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मैं हृदय से धन्यवाद देता हूं, जिनके नेतृत्व में देश में नवाचार हुए, आत्मनिर्भरता आयी और प्रगति के राह पर देश अग्रसर है। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त पहचान बनाई है और युवा शक्ति को नई दिशा मिली है। प्रधानमंत्री मोदी ने योग को केवल भारत तक सीमित न रखते हुए, उसे संपूर्ण विश्व की जीवनशैली के रूप में स्थापित किया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत कर उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस विचार को साकार किया, जिसमें शरीर, मन और आत्मा के समन्वय की बात कही गई थी। आज योग विश्वभर में भारत की सांस्कृतिक धरोहर और शांति संदेश का प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हर जिले में युवा दिवस का कार्यक्रम हुआ स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के हर जिले में युवा दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि आज हम राष्ट्रीय युवा दिवस मना रहे हैं, लेकिन यह केवल एक औपचारिक दिवस न होकर उसके महत्व और उद्देश्य की जानकारी बच्चों तक पहुंचना अत्यंत आवश्यक है। बच्चों को यह समझना चाहिए कि राष्ट्रीय युवा दिवस क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचार और आदर्श क्या हैं। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।  

ग्वारीघाट स्टेशन पर मकर संक्रांति और वसंत पंचमी के मौके पर चार ट्रेनें रुकेंगी, श्रद्धालुओं को मिलेगा लाभ

 जबलपुर  मकर संक्रांति और वसंत पंचमी पर आसपास से श्रृद्धालु स्नान के लिए ग्वारीघाट पहुंचते है। उनकी आवाजाही की सुविधा के लिए इस बार रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। जबलपुर-नैनपुर रेलखंड पर संचालित चार एक्सप्रेस ट्रेनों का संबंधित दोनों तिथियों पर ग्वारीघाट रेलवे स्टेशन पर अस्थाई ठहराव घोषित किया है। इस संबंध में दक्षिण पूर्व मध्य रेल की ओर से दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए है। मकर संक्रांति पर 13 से 15 जनवरी और वसंत पंचमी पर 22 से 26 जनवरी तक चांदाफोर्ट सुपरफास्ट (त्रिसाप्ताहिक), शहडोल-नागपुर और रीवा-इतवारी एक्सप्रेस ग्वारीघाट स्टेशन पर रुकेगी। संबंधित तिथि पर आते-जाते दोनों तिथियों पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ग्वारीघाट में अस्थाई ठहराव रहेगा। ग्वारीघाट स्टेशन पर भी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। ग्वारीघाट से रिजर्वेशन भी उपलब्ध रेलवे ने श्रृद्धालुओं की सुविधा ने मकर संक्रांति और वसंत पंचमी के दौरान अस्थायी ठहराव वाली एक्सप्रेस ट्रेनों में ग्वारीघाट से रिजर्वेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। संबंधित तिथियों पर यात्री एक्सप्रेस ट्रेनों का ग्वारीघाट स्टेशन तक एवं वहां से वापसी के लिए सीट आरक्षित करा सकते हैं। ट्रेनों के ठहराव और स्टेशन तक रिजर्वेशन की सुविधा से छिंदवाड़ा, गोंदिया, बालाघाट, कटनी से श्रृद्धालुओं का ग्वारीघाट तक पहुंचना आसान होगा। जबलपुर से भी जा सकेंगे श्रृद्धालु जबलपुर-नैनपुर रेलखंड पर वर्तमान में तीन पैसेंजर ट्रेन संचालित है। इनका शहर के अंतर्गत आने वाले मदन महल, गढ़ा स्टेशन और जमतरा पैसेंजर हाल्ट में ठहराव है। ग्वारीघाट, जमतरा में रुकने वाली एक डेमू ट्रेन का संचालन भी गढ़ा-गोंदिया के बीच होता है। चार एक्सप्रेस ट्रेनों को अस्थायी ठहराव से ग्वारीघाट स्टेशन तक आवाजाही के विकल्प बढ़ गए हैं। ग्वारीघाट मार्ग पर जाम में फंसने से बचने के बजाय ट्रेन से श्रृद्धालु ग्वारीघाट पहुंच सकते हैं। इन ट्रेनों का ठहराव और ग्वारीघाट स्टेशन पर टाइमिंग     नागपुर-नैनपुर-शहडोल एक्सप्रेस (11201) दोपहर 3.30-03:32 बजे।     शहडोल-नैनपुर-नागपुर एक्सप्रेस (11202) सुबह 09:49-09:51 बजे।     इतवारी-सिवनी-रीवा एक्सप्रेस (11755) मध्यरात्रि 02:47-02:49 बजे।     रीवा-सिवनी-इतवारी एक्सप्रेस (11756) रात 10:59-11:01 बजे।     इतवारी-गोंदिया-रीवा एक्सप्रेस (11753) मध्यरात्रि 02:47-02:49 बजे।     रीवा-गोंदिया-इतवारी एक्सप्रेस (11754) रात 10:59-11:01 बजे।     चांदा फोर्ट-जबलपुर सुपरफास्ट (22173) रात 9:30-9:32 बजे।     जबलपुर-चांदाफोर्ट सुपरफास्ट (22174) सुबह 5:49-05:51 बजे।  

सीएम ने जल रेखा ऐप से पाइपलाइन लीकेज की जांच कराने के निर्देश दिए, हर मंगलवार होगी ‘जल सुनवाई’

भोपाल  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने राज्यभर में जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया है। शुरू किए गए ‘हर बूंद हो स्वच्छ और हर घूट हो स्वस्थ’ अभियान के प्रभाव के बाद अब राज्य सरकार ने भी प्रांतव्यापी स्वच्छ जल अभियान की शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जल सुरक्षा, जल संरक्षण और जल सुनवाई के उद्देश्य से इस अभियान का शुभारंभ किया। जल रेखा ऐप से पाइपलाइन में लीकेज की जांच कराएं पानी की पाइपलाइन में लीकेज की समस्या को दूर करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करें। विभाग द्वारा जारी जल रेखा ऐप का उपयोग करके पाइपलाइन में लीकेज की जांच कराएं। प्रत्येक ग्राम पंचायत और शहरी क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड में हर मंगलवार को जल सुनवाई का आयोजन करके आम जनता की पेयजल संबंधी समस्याओं का निदान करें। अधिकारियों को सख्त निर्देश मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पेयजल से जुड़ी शिकायतों और जल सुनवाई व्यवस्था को अधिकारी पूरी गंभीरता से लें। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच हो और यदि कहीं पानी दूषित पाया जाए तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी स्थिति में दूषित पानी की आपूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने घर-घर स्वच्छ जल पहुंचाने को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इसे अवसर की तरह लेकर प्रदेश को देश के लिए आदर्श बनाना है। नगरीय निकाय विभाग द्वारा जल आपूर्ति निगरानी के लिए एप के उपयोग की सराहना करते हुए उन्होंने चेताया कि स्वच्छ पेयजल आपूर्ति में ढिलाई पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। किट के माध्यम से भी पानी की गुणवत्ता की जांच कराएं शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की नल जल योजनाओं के माध्यम से दिए जाने वाले पानी की उपभोक्ता के घर जाकर टेस्टिंग करें। किट के माध्यम से भी पानी की गुणवत्ता की जांच कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 मई तक चलाये जाने वाले जल सुरक्षा, जल संरक्षण और जल सुनवाई अभियान से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दें। आम जनता को भी इस अभियान से जोड़ें। आम जनता को हर हाल में साफ और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराएं। पानी की आपूर्ति की सतत निगरानी की व्यवस्था करें। बैठक में अभियान के संबंध में बिंदुवार जानकारी दी गई। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कमिश्नर बीएस जामोद, उपायुक्त एलआर अहिरवार, संयुक्त आयुक्त दिव्या त्रिपाठी तथा अन्य अधिकारी शामिल हुए। कलेक्ट्रेट के एनआईसी केंद्र से कलेक्टर प्रतिभा पाल, प्रभारी आयुक्त नगर निगम मेहताब सिंह गुर्जर, जिला भाजपा अध्यक्ष श्री वीरेंद्र गुप्ता, नगर परिषदों के अध्यक्ष तथा सीएमओ और अन्य अधिकारी बैठक में शामिल हुए।  रोबोट से होगी पाइपलाइन की जांच अभियान के तहत प्रदेशभर में जल शोधन संयंत्रों और पेयजल टंकियों की सफाई कराई जाएगी। जीआईएस मैप आधारित एप से निगरानी की जाएगी। पेयजल पाइपलाइन में दूषित मिश्रण रोकने के लिए वाटर और सीवेज पाइपलाइन की मैपिंग होगी, इंटर पॉइंट चिन्हित किए जाएंगे और रोबोट की मदद से लीकेज की जांच की जाएगी। इसके साथ ही सभी पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता जांच, एसटीपी की नियमित निगरानी, हर मंगलवार जल सुनवाई, 181 पर पेयजल शिकायतों के लिए विशेष व्यवस्था और तय समय-सीमा में शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था लागू की जाएगी।  हर मंगलवार होगी जल सुनवाई     मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि-     हर मंगलवार जिले में जल सुनवाई अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए     शिकायतकर्ता को आवेदन के साथ समस्या का पूरा विवरण देना होगा     शिकायतों का समय-सीमा में निराकरण किया जाएगा     लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी  दो चरणों में चलेगा 'स्वच्छ जल अभियान' बैठक में बताया गया कि प्रदेशभर में यह अभियान दो चरणों में लागू किया जाएगा- 1.पहला चरण: 10 जनवरी से 28 फरवरी तक 2. दूसरा चरण: 1 मार्च से 31 मई तक इन दोनों चरणों में-     सभी जल शोधन संयंत्रों (Water Treatment Plants) की जांच     पेयजल संग्रहण टंकियों की सफाई और निगरानी     GIS मैप आधारित एप के माध्यम से सतत निगरानी     पानी की गुणवत्ता का नियमित परीक्षण किया जाएगा     रोबोट से होगी पाइपलाइन लीकेज की जांच स्वच्छ जल अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब पेयजल पाइपलाइन की लीकेज जांच रोबोट से की जाएगी। इसके तहत-     वाटर पाइपलाइन और सीवेज लाइन की GIS मैपिंग     दोनों लाइनों के इंटर पॉइंट्स की पहचान     दूषित पानी के मिश्रण को रोकने के लिए विशेष कार्रवाई     लीकेज की पहचान कर तुरंत सुधार मुख्यमंत्री ने कहा कि सीवेज और पेयजल का मिश्रण किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है और इसके लिए तकनीक का पूरा उपयोग किया जाएगा।     पानी की गुणवत्ता पर विशेष फोकस     अभियान के दौरान-     सभी पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता की जांच     अल्पकालीन और दीर्घकालीन समाधान लागू     नागरिकों को साफ, सुरक्षित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की ठोस व्यवस्था सीएम ने कहा कि इंदौर की घटना ने सरकार को यह सिखाया है कि पानी से जुड़ी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए अब कोई जोखिम नहीं लिया जाएगा। जनता को मिलेगा सीधा अधिकार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा- "स्वच्छ जल अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा अभियान है। जल सुनवाई के माध्यम से हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार मिलेगा।" सरकार का दावा है कि इस अभियान से न केवल दूषित पानी की समस्या पर लगाम लगेगी, बल्कि पेयजल व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।  

इंदौर में नकली पान मसाला कारखाने का पर्दाफाश, कारोबारी समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

 इंदौर एमपी के इंदौर में नकली पान मसाला बनाने वाले एक कारखाने पर कार्रवाई की गई है। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में मसाला बनाने का सामान जब्त किया है। कई तरह की इलेक्ट्रॉनिक मशीन भी बरामद की गई है। मुंबई के रहने वाले कारोबारी को भी पकड़ा गया है। पुलिस ने मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया है। बताया जा रहा है कि यह सभी घर पर ब्रांडेड कंपनी के पान मसाले बना रहे थे। एसीपी कुंदन मंडलोई के मुताबिक, मुखबिर से सूचना मिली थी कि कनाड़िया क्षेत्र के सहारा सिटी से बिचोली मर्दाना स्थित मकान में अवैध गतिविधियां चल रही हैं। जहां विमल पान मसाला के नाम से नकली पान मसाला बनाकर मार्केट में सप्लाई किया जा रहा था। जानकारी मिलते ही टीआई यादव ने मकान पर दबिश दी। इस दौरान पुलिस ने पाया कि वहां नकली पान मसाला बनाने के उपकरण मौजूद थे। साथ ही वहां बड़ी मात्रा में माल तैयार किया जा रहा था। इस पर पुलिस ने कापीराइट एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए मौके से पाऊच पेकिंग मशीन, पाऊच सीलिंग मशीन, सुपारी ओवन ड्रायर, सुपारी कटर मशीन, विमल रोल, मैग्नीशियम कार्बोनेट, कत्था, चूना, टबैको की सामग्री, थैली में रखा पान मसाला जब्त किया है। साथ ही पुलिस ने नकली पान मसाला बना रहे तीन लोगों अक्षत निवासी स्नेह नगर, जावेद निवासी सनावद और अरूण निवासी पालघर मुंबई को गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।

कमिशनर संस्कृति जैन ने किया कमाल, ‘गिफ्ट ए डेस्क’ अभियान को गोल्ड स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया

भोपाल मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल सिवनी जिले से शुरू हुई एक छोटी सी पहल आज राष्ट्रीय स्तर पर गौरव का विषय बन गई है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को दूर करने के लिए शुरू की गई ‘गिफ्ट ए डेस्क’ मुहिम को दिल्ली में आयोजित 105वें स्कॉच समिट (SKOCH Summit) में प्रतिष्ठित गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान सिवनी की तत्कालीन कलेक्टर संस्कृति जैन के उस प्रशासनिक नवाचार को मिला है, जिसने बिना किसी सरकारी बजट के हजारों बच्चों के बैठने का तरीका बदल दिया। क्या है ‘गिफ्ट ए डेस्क’ मॉडल? अक्सर सरकारी स्कूलों में बजट की कमी के कारण बच्चे टाट-पट्टी या जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर होते हैं। तत्कालीन कलेक्टर संस्कृति जैन ने इस समस्या का समाधान सरकारी फाइलों में खोजने के बजाय 'जनभागीदारी' में ढूंढा। उन्होंने एक पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म और वेबसाइट तैयार की, जिसके जरिए आम नागरिक, उद्योगपति और एनआरआई सीधे स्कूलों को डेस्क-बेंच दान कर सकते थे। अभियान की बड़ी सफलताएं: • 17,000 से ज्यादा डेस्क-बेंच अब तक स्कूलों को दान में मिले। • 40,000 छात्र अब जमीन की जगह सम्मानजनक तरीके से डेस्क पर बैठकर पढ़ रहे हैं। • पारदर्शी व्यवस्था के कारण दानदाताओं ने खुद वेंडर और स्कूल चुनने की आजादी पाई। विदाई भी रही ऐतिहासिक : पालकी पर सवार होकर हुईं विदा संस्कृति जैन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उनका स्थानांतरण हुआ, तो सिवनी की जनता ने उन्हें किसी राजनेता या अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह विदाई दी। जिले के प्रति उनके लगाव और जनहित के कार्यों के सम्मान में उन्हें पारंपरिक पालकी में सवार कर विदा किया गया। यह दृश्य सिवनी के इतिहास में दर्ज हो गया, जहां एक अधिकारी के प्रति जनता का इतना गहरा प्रेम और सम्मान प्रकट हुआ। क्यों खास है यह उपलब्धि? स्कॉच गोल्ड अवार्ड देश के सबसे प्रतिष्ठित गवर्नेंस पुरस्कारों में से एक है। संस्कृति जैन की यह पहल साबित करती है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो समाज के सहयोग से बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। आज यह मुहिम सिर्फ सिवनी की ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की पहचान बन चुकी है।  

इंदौर कनेक्शन के साथ 10 करोड़ की MD ड्रग्स फैक्टरी का भंडाफोड़, हरियाणा तक होती थी सप्लाई

आगर-मालवा  आगर-मालवा में पकड़ी गई अवैध एमडी ड्रग्स फैक्ट्री मामले में 36 घंटे बीत जाने के बाद भी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो इस खेल के असली 'खिलाड़ी' तक नहीं पहुंच सकी हैं। एनसीबी की छापेमारी में 31.25 किलो ड्रग्स और पूरी लैब तो पकड़ ली गई, लेकिन जमीन के असली मालिक और फैक्टरी संचालक को लेकर रहस्य बना है। दस्तावेजों में जमीन स्थानीय लोगों के नाम है, लेकिन तार इंदौर से जुड़े होने की बात सामने आ रही है। NCB उज्जैन के अधीक्षक मुकेश खत्री ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आगर में इस एमडी ड्रग्स निर्माण की अवैध फैक्टरी के मामले में फाूर्म हाउस के मैनेजर सिद्धनाथ धारासिंह और प्रहलाद सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभाग को पूछताछ में कुछ अहम जानकारी भी मिली हैं। हालांकि उनका खुलासा नहीं किया गया है। इन लोगों को हिरासत में लिया, कर रहे पूछताछ जानकारी अनुसार आमला के पास स्थित तीर्थ हर्बल नर्सरी पर शनिवार को नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम द्वारा कार्यवाहिकर एमडी ड्रग्स की फैक्ट्री का खुलासा किया था। मामले में रविवार को नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया की फैक्ट्री संचालन को लेकर तीन लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।  31.25 kgs एमडी और करीब 600 किलो कैमिकल्स जब्त नारकोटिक्स टीम के अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि आमला स्थित तीर्थ हर्बल नर्सरी में छुपी हुई नशे की फैक्टरी से 31 किलो 250 ग्राम एमडी ड्रग्स और 600 किलो से अधिक ड्रग्स बनाने का कैमिकल्स जब्त किया गया है। टीम ने पूरी लैब को मौके पर ही नष्ट कराया है, ताकि दोबारा यहां अवैध कारोबार न किया जा सके। ड्रग्स बनाने की मशीनें भी मिलीं नारकोटिक्स विभाग के छापे में तलाशी के दौरान नर्सरी परिसर के भीतर MD ड्रग्स बनाने की लैब मिली। मौके से 31.250 किलो तैयार ड्रग्स, करीब 600 किलो केमिकल, ड्रग्स निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनें और तकनीकी उपकरण जब्त किए गए। मामले में मैनेजर सिद्धनाथ, धारा सिंह और प्रहलाद सिंह को गिरफ्तार कर केस दर्ज किया गया है। नर्सरी का बोर्ड, तारों की फेंसिंग आगर मालवा जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर झालावाड़-कोटा रोड पर करीब 18 किमी दूर आमला है। यहां से करीब एक किलोमीटर पहले हनुमान मंदिर और क्रेशर के पास से होकर जंगल में अंदर एक रास्ता जाता है। यहां से करीब दो किमी अंदर कच्ची रोड किनारे यह नर्सरी है। बाहर तीर्थ हर्बल फार्म एंड नर्सरी का बोर्ड लगा है। चारों ओर तारों की फेंसिंग है। इसके आसपास अन्य किसानों की खेती की जमीन है। तस्करों को ड्रग्स सप्लाई की जानकारी मिली थी बता दें कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को आमला गांव में हाईवे के निकट स्थित तीर्थ नर्सरी कम फॉर्म हाउस से एक अंतर राज्यीय तस्कर को एमडी ड्रग्स क बड़ी खेप की डिलीवरी की सूचना मिली थी। उज्जैन, जावरा और नीमच कार्यालयों की संयुक्त टीम ने आधी रात को नर्सरी को आसपास से घेरकर जाल बिछाया था। सुबह 11 बजे तक जब कोई व्यक्ति डिलीवरी लेने नहीं आया तो सीबीएन टीम ने नर्सरी में प्रवेश किया था। टीम ने सुनसान जगह पर गुप्त रूप से बनी हुई एमडी की लैब को ढूंढ़ निकाला। साथ ही 31.250 kg एमडी पाउडर, 600 kgs के करीब एमडी निर्माण में प्रयुक्त होने वाले रसायन एवं लैब के उपकरणों जब्त किया। तीन व्यक्ति मौजूद थे, इन्हें हिरासत में लिया मौके पर मौजूद तीन संदिग्ध व्यक्तियों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में लेकर कार्यालय लाया गया है। उन से पूछताछ की जा रही है। इधर, सीबीएन द्वारा की गई कार्यवाही से स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि थाना क्षेत्र में नशे की इतनी बड़ी फैक्टरी संचालित हो रही थी और पुलिस इससे अनजान बनी रही।

बरगी बांध पर संकट, 7 साल से रिसाव जारी, विशेषज्ञों ने दी ‘बड़ी आपदा’ की चेतावनी

जबलपुर  केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने रानी अवंती बाई सागर परियोजना (बरगी बांध) की गैलरी से लगातार हो रहे पानी के रिसाव को गंभीर खतरा बताया है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) को तीन दिन पहले सौंपी रिपोर्ट में संयुक्त जांच दल ने अनेक सवाल उठाए हैं। साथ ही एनवीडीए को नोटिस देकर 30 दिनों में जवाब मांगा है। निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। क्या निकला रिपोर्ट में रिपोर्ट के अनुसार बरगी बांध के रखरखाव, निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन में गंभीर खामियां हैं। टीम ने माना है कि बांध की स्थिति से लेकर खतरे तक को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बांध की मैसनरी स्पिलवे गैलरी से वर्ष 2018 से रिसाव बना हुआ है। सात वर्षों बाद भी स्थायी समाधान नहीं किया गया। इस पर राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण ने एनवीडीए को चेतावनी दी है कि इतने लंबे समय तक रिसाव को नजरअंदाज करना बांध की संरचनात्मक मजबूती को कमजोर कर सकता है और भविष्य में बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। निगरानी तंत्र कमजोर रिपोर्ट में बांध के सुरक्षा वर्गीकरण को भी भ्रामक बताया गया है। निरीक्षण दल के अनुसार, बरगी बांध को मामूली कमियों की श्रेणी में रखना वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। रिसाव के दबाव और व्यवहार को मापने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और प्रभावी निगरानी प्रणाली का अभाव है। साथ ही, अति-संवेदनशील क्षेत्रों में अनधिकृत लोगों की आवाजाही जारी है। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राजकुमार सिन्हा ने भी इसे लाखों लोगों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ बताया है। अधिकारियों का क्या कहना राजेश सिंह, ईई, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण का कहना है कि केंद्रीय जल आयोग और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने सितंबर 2025 में निरीक्षण किया था। कुछ कमियां निकाली हैं, जिनका सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद जांच करवाकर हम पता करेंगे कि कहां-कहां से पानी की रिसाव हो रहा है।  

इंदौर में दूषित पानी का कहर जारी, 22वीं मौत, 4 मरीज वेंटिलेटर पर

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से मौतों का सिलसिला जारी है।  22वीं मौत सामने आई। एमवाय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती भागीरथपुरा निवासी 59 वर्षीय कमला बाई ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बता दें कि दूषित पेयजल से यहां 3300 से अधिक लोग बीमार हुए हैं। इनमें से कई लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। मकान मालिक मनोज कुमार के अनुसार, कमला बाई करीब एक माह पहले ही पति तुलसीराम के साथ उनके यहां किराये से कमरा लिया था। दोनों पति-पत्नी मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे थे। छह जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। स्वजन ने उन्हें संजीवनी क्लीनिक में दिखाया। प्राथमिक उपचार व दवाइयां देकर वहां से घर भेज दिया गया। मकान मालिक मनोज कुमार के अनुसार कमलाबाई करीब एक माह पहले अपने पति तुलसीराम के साथ उनके मकान में किराए से रहने आई थीं। दोनों पति-पत्नी मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे थे। 6 जनवरी को कमलाबाई को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई, जिस पर उन्हें भागीरथपुरा स्थित संजीवनी क्लिनिक में दिखाया गया। वहां प्राथमिक उपचार कर दवाईयां देकर घर भेज दिया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम क्षेत्र में पहुंची और मरीज को ओआरएस व कुछ गोलियां दीं, लेकिन तबीयत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। हालत लगातार बिगड़ने पर 7 जनवरी को परिजन उन्हें एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए आईसीयू में भर्ती किया। तमाम प्रयासों के बावजूद 9 जनवरी की सुबह कमलाबाई ने दम तोड़ दिया। अब भी 12 से ज्यादा मरीज ICU में गौरतलब है कि इंदौर के भागीरथपुरा में मौतों का मामला नहीं थम रहा है। नलों से आ रहे दूषित पानी पीने के कारण इससे 21 लोगों की मौत हो चुकी हैं। वहीं अभी भी क्षेत्र से रोजाना 15 से अधिक मरीज उल्टी-दस्त के सामने आ रहे हैं। 40 से अधिक मरीज अभी भी अस्पतालों में भर्ती है, वहीं 12 से अधिक मरीज आईसीयू में है। चार मरीज करीब सप्ताहभर से वेंटीलेटर पर है, उनमें कोई खास सुधार नहीं आ रहा है। स्वजन सुबह से शाम अस्पतालों में अपने मरीज के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं। 1 साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थी एमवाय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव का कहना है कि कमला बाई भागीरथपुरा के मरीजों की यूनिट में भर्ती नहीं थी। वह पंचम की फेल की निवासी थी और पिछले एक साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थी। मामला एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) का नहीं होने के कारण उनका पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया। आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या 13 हुई दूसरी तरफ, भागीरथपुरा में अभी भी लोगों में दूषित पानी का डर बना हुआ है। लोग आरओ, बोरिंग और बोतल के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। पानी को छानकर और उबालकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बीच, आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या कम ज्यादा हो रही है। 8 जनवरी को जहां आईसीयू में 10 मरीज थे। 10 जनवरी को ये आंकड़ा 11 तक पहुंच गया। वहीं, 11 जनवरी को आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या 13 हो गई। जबकि पिछले कई दिनों से 4 मरीज वेंटिलेटर पर बताए जा रहे हैं। 29 दिसंबर को जब कई लोग अस्पताल में भर्ती हुए तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ अस्पतालों में पहुंचे और मरीजों व उनके परिजनों से बातचीत की। देखते ही देखते दूषित पानी के कारण मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। एक के बाद एक कई लोगों की जान दूषित पानी के कारण चली गई। स्थिति ये है कि कई लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। कुछ लोग आईसीयू में इलाजरत है। स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को बुलेटिन जारी किया। इसके मुताबिक 50 दलों ने भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे किया। 176 सदस्यों ने 924 घरों में ORS और जिंक की गोलियां दी। इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी जांचे भी की गई। इलाके में आज OPD में 13 मरीज डायरिया के आए, जिसमें से 1 को रेफर किया है। कुल भर्ती मरीज 427 डिस्चार्ज हुए 385 अभी इतने भर्ती 42 ICU में मरीज 13 एंबुलेंस की संख्या 3 निगम आयुक्त ने किया इलाके का दौरा रविवार को भी नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने भागीरथपुरा इलाके का दौरा किया। यहां पर चल रहे कामों को देखा। इलाके में टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई की भी समीक्षा की। लगातार टीम के माध्यम से लोगों को पानी उबालकर, छानकर पीने के संबंध में अनाउंसमेंट करने, ड्रेनेज सीवरेज लाइन की सफाई करने, सफाई के बाद निकलने वाली गाद को तुरंत हटाने, मलेरिया टीम द्वारा नाला सफाई करने के लिए भी कहा है। इसके अलावा निगमायुक्त ने भागीरथपुरा के सभी बीट प्रभारी, उपयंत्री को अपनी-अपनी बीट में आने वाले सरकारी बोरिंग में क्लोरिनेशन काम करने के लिए कहा है।    

एमपी में शीतलहर का कहर: दतिया सबसे ठंडा, चार दिन तक कोहरा और तापमान में गिरावट

भोपाल  पहाड़ों पर हुई भारी बर्फबारी का सीधा असर अब मैदानी इलाकों में दिख रहा है। मध्यप्रदेश में उत्तर से आ रही बर्फीली हवाओं ने ठंड की धार और तेज कर दी है। खासकर ग्वालियर-चंबल संभाग सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां दिन की धूप भी राहत नहीं दे पा रही और रातें कंपकंपाने को मजबूर कर रही हैं। सोमवार सुबह घना कोहरा और सर्द हवाओं का मेल लोगों के लिए दोहरी मार बन गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले चार दिन तक इसी तरह की सख्त ठंड बनी रहेगी, जबकि भोपाल और इंदौर में पारा 10 डिग्री से नीचे रह सकता है।मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रदेश के ऊपरी हिस्से में स्थित होने के कारण ग्वालियर-चंबल में ठंड का असर ज्यादा तीखा है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर और दतिया में दिन के तापमान में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद रात का पारा लगातार 10 डिग्री से नीचे बना हुआ है। रविवार को ग्वालियर में अधिकतम तापमान 21.5, दतिया में 20.1 और श्योपुर में 21.4 डिग्री दर्ज किया गया, लेकिन रात की ठंड ने लोगों को अलाव और हीटर का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान दतिया में 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पांच बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री रहा। भोपाल में 9 डिग्री, इंदौर में 9.6 डिग्री, उज्जैन में 9.4 डिग्री और जबलपुर में 9.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। प्रदेश के अधिकांश जिलों में रात का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। राजगढ़ और पचमढ़ी में 5.6 डिग्री, मंडला में 5.9 डिग्री, खजुराहो में 6.5 डिग्री, नौगांव, शिवपुरी और रीवा में 7 डिग्री के आसपास पारा रिकॉर्ड किया गया। कोहरे से विजिबिलिटी घटी कोहरे के कारण कई जिलों में दृश्यता प्रभावित रही। मौसम विभाग के मुताबिक रतलाम, खजुराहो और नौगांव में विजिबिलिटी 500 से 1000 मीटर तक दर्ज की गई। दतिया, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा, सतना और सीधी में विजिबिलिटी 1 किलोमीटर से अधिक रही, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और अन्य जिलों में 2 से 4 किलोमीटर के बीच दृश्यता दर्ज की गई। कोहरे की मार से ट्रेनें लेट घने कोहरे का असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा। दिल्ली की ओर से आने वाली और वहां जाने वाली कई ट्रेनें घंटों देरी से चलीं। मालवा एक्सप्रेस करीब 1 घंटे 20 मिनट लेट रही। सचखंड एक्सप्रेस सबसे ज्यादा प्रभावित रही और करीब 9 घंटे की देरी से चली। झेलम एक्सप्रेस 2 घंटे 30 मिनट, पंजाब मेल 1 घंटे 20 मिनट और कर्नाटक एक्सप्रेस भी 1 घंटे 20 मिनट लेट रही। शताब्दी एक्सप्रेस करीब 20 मिनट देरी से पहुंची।मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल ठंड और कोहरे से राहत के आसार कम हैं। आने वाले दिनों में भी रातें सर्द बनी रहेंगी और सुबह के समय कोहरे का असर जारी रह सकता है। ऊपरी इलाकों में कोहरे की चादर सोमवार सुबह प्रदेश के उत्तरी और ऊपरी हिस्सों में कोहरा सबसे ज्यादा असर दिखा। ग्वालियर, भिंड, मुरैना और श्योपुर में घना कोहरा छाया रहा, वहीं भोपाल, इंदौर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, रायसेन, शाजापुर, विदिशा और उज्जैन समेत 20 से ज्यादा जिलों में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया। कल्याणपुर सबसे ठंडा, पचमढ़ी पीछे नहीं प्रदेश में ठंड का रिकॉर्ड-तोड़ सिलसिला जारी है। शहडोल का कल्याणपुर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री दर्ज हुआ। हिल स्टेशन पचमढ़ी 5.8 डिग्री के साथ दूसरे नंबर पर रहा। पांच बड़े शहरों में इंदौर सबसे ठंडा रहा, जहां पारा 7 डिग्री तक लुढ़क गया। कोहरे का असर ट्रेनों की रफ्तार पर भी पड़ा है, जिससे दिल्ली से आने-जाने वाली कई ट्रेनें लेट चल रही हैं।मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, पचमढ़ी, खजुराहो, नौगांव, मंडला, उमरिया, रीवा, राजगढ़, रायसेन, दतिया, मलाजखंड, दमोह, सतना, छिंदवाड़ा, खंडवा, सीधी, खरगोन और टीकमगढ़ में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया। रविवार को अधिकतर शहरों में दिन का तापमान भी 25 डिग्री के पार नहीं पहुंच सका। कोहरे ने रोकी रफ्तार, ट्रेनें लेट पिछले 15 दिनों से कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने रेल यातायात को प्रभावित किया है। दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली ट्रेनें लगातार देरी से पहुंच रही हैं। सबसे ज्यादा असर मालवा एक्सप्रेस पर पड़ा है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के मुताबिक, प्रदेश के उत्तरी हिस्से में अगले कुछ दिन तक कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। कल्याणपुर सबसे ठंडा रहा, पचमढ़ी दूसरा सबसे ठंडा प्रदेश में ठंड का दौर जारी है। शनिवार-रविवार की रात में शहडोल के कल्याणपुर में पारा 4.8 डिग्री रहा। प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी दूसरा सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 5 बड़े शहरों में इंदौर का टेम्परेचर सबसे कम 7 डिग्री दर्ज किया गया। 20 से अधिक जिलों में कोहरा छाया। इस वजह से दिल्ली से आने वाली ट्रेनों की टाइमिंग पर असर पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, पचमढ़ी, खजुराहो, नौगांव, मंडला, उमरिया, रीवा, राजगढ़, रायसेन, दतिया, मलाजखंड, दमोह, सतना, छिंदवाड़ा, खंडवा, सीधी, खरगोन और टीकमगढ़ में तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। इधर, रविवार को अधिकांश शहरों में दिन का तापमान 25 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। अगले चार दिन तक अधिकतम और न्यूनतम तापमान इसी तरह बना रहेगा। पिछले 15 दिनों से लेट आ रही ट्रेनें नए साल में प्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असर है। इस वजह से दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली ट्रेनें निर्धारित समय से लेट हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा असर मालवा एक्सप्रेस में हो रहा है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि उत्तरी हिस्से में कोहरे का असर ज्यादा रहेगा। इस बार कड़ाके की ठंड का दौर इस बार मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी तो दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। नवंबर-दिसंबर की तरह ही जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे भोपाल में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। एक्सपर्ट की माने तो जनवरी में प्रदेश में माइनस वाली ठंड गिर चुकी है। अबकी बार … Read more