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इंदौर के बोरिंग पानी में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा 350 से ज्यादा, हैजा और टाइफाइड के खतरे का अलर्ट

इंदौर इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब एक और डराने वाली सच्चाई सामने आई है. शहर के भागीरथपुरा इलाके में अंडरग्राउंड यानी बोरिंग के पानी में गंभीर प्रदूषण की पुष्टि हुई है. रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि यहां का बोरवेल पानी पीने लायक नहीं है और लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन चुका है. जांच रिपोर्ट में क्या निकला पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए भागीरथपुरा इलाके की कुल 60 बोरिंग से सैंपल लिए गए थे. जांच में सामने आया कि इनमें से 35 सैंपल पूरी तरह फेल हो गए. सबसे गंभीर बात यह है कि बोरिंग के पानी में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया है, जो सीधे तौर पर मल-मूत्र से जुड़ा बैक्टीरिया होता है. मानकों के अनुसार पीने के पानी में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा 0 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन जांच में अलग-अलग बोरिंग के पानी में यह मात्रा 84 से लेकर 350 के पार तक पाई गई. कितनी खतरनाक है यह स्थिति फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया को बेहद खतरनाक माना जाता है. मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक यह बैक्टीरिया हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-A जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. खासतौर पर बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह पानी जानलेवा साबित हो सकता है. नर्मदा के पानी तक फैल रहा प्रदूषण रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भागीरथपुरा की बोरिंग का दूषित पानी नर्मदा के पानी को भी प्रभावित कर रहा था. यानी समस्या सिर्फ अंडरग्राउंड वॉटर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर शहर की मुख्य जल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है. इलाके में सैकड़ों बोरिंग, खतरा और बड़ा भागीरथपुरा क्षेत्र में 500 से ज्यादा सरकारी और निजी बोरिंग मौजूद हैं. जनवरी के पहले सप्ताह में आई इस रिपोर्ट ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है. सवाल यह है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो इंदौर में पानी से जुड़ा यह संकट और कितना बड़ा रूप ले सकता है. वॉटर एक्सपर्ट का कहना है कि बोरिंग के पानी की नियमित जांच, सीवेज सिस्टम की मरम्मत और दूषित बोरिंग को तत्काल बंद करना बेहद जरूरी है. वरना इंदौर में पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा और गहराता जाएगा.

इंदौर महापौर के खिलाफ संघ का एक्शन, दूषित पानी की त्रासदी पर कलेक्टर के साथ हुई बैठक

इंदौर  दूषित पानी से 18 मौतों के साथ अब तक उल्टी-दस्त के 3200 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे-बुजुर्ग और महिलाएं हैं। यह त्रासदी नगर निगम के अफसर और जनप्रतिनिधियों की रोज की लापरवाह कार्यशैली से हुई। भागीरथपुरा में जर्जर सप्लाई लाइन को नई में बदलने के लिए एमआइसी में प्रस्ताव पास होने से लेकर वर्क ऑर्डर देने में ही काफी देरी हुई। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव बुधवार देर रात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पहुंचे। संघ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दोनों से भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों और प्रशासनिक तालमेल को लेकर बात की गई। अफसरों पर काम न करने आरोप लगाने वाले महापौर की लेटलतीफी नगरीय विकास एसीएस संजय दुबे की बैठक में अफसरों पर काम न करने आरोप लगाने वाले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने ही इस फाइल पर 67 दिन बाद हस्ताक्षर किए थे। दूसरे मामले में टेंडर की फाइल बनाने में 7 माह लगा दिए। वर्क ऑर्डर भी दिए तो लेटलतीफी ऐसी कि 10 माह में पूरा होने वाला काम 35 माह में पूरा नहीं हुआ। इधर, आरएसएस ने बुधवार शाम महापौर भार्गव व कलेक्टर शिवम वर्मा को तलब किया। संघ कर्यालय में डेढ़ घंटे मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह ने बैठक ली। बताते हैं, संघ पदाधिकारियों ने उचित व्यवस्थाएं बनाने पर जोर दिया। दोनों की क्लास भी लगाई। सूत्रों ने यह भी बताया कि संघ के मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन ने कलेक्टर और महापौर से करीब डेढ़ घंटे तक वन-टू-वन चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, मामला संभाल नहीं पाने पर महापौर को कड़ी फटकार भी लगी है। महापौर भार्गव, रामबाग स्थित नए संघ कार्यालय 'सुदर्शन' सरकारी गाड़ी से पहुंचे थे। उन्हें छोड़ने के बाद शासकीय वाहन वापस रवाना हो गया था। बैठक खत्म होने के बाद वे अपने निजी वाहन से लौटे। बैठक से बाहर आने के बाद महापौर भार्गव ने  कहा- मैं संघ कार्यालय आता रहता हूं। आज भी सहज ही आया था। इंदौर की छवि को ठीक करना प्राथमिकता सूत्रों ने बताया कि बैठक में यह बात भी हुई है कि भविष्य में इस तरह की घटना न हो और प्रशासनिक तालमेल की कमी की बात भी नहीं उठे। सभी अधिकारी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बातों को सुनें और उनके साथ तालमेल बैठाते हुए काम करें। चर्चा का फोकस इस बात पर रहा कि अब इंदौर की छवि को स्वच्छ करना है। पहली प्राथमिकता है कि भागीरथपुरा में हालात ठीक हो जाएं। यहां हर जरूरतमंद तक पहुंचा जाए। बीमारों के इलाज में किसी तरह की कोताही न हो। तारीखें बता रहीं जिम्मेदारों की करतूत भागीरथपुरा में गंदे पानी की समस्या आने पर 25 नवंबर 2022 को नगर निगम की एमआइसी बैठक में 106 क्रमांक संकल्प पारित हुआ। इसमें भागीरथपुरा में नर्मदा पाइप लाइन बिछाने और नए कनेक्शन के लिए मालवा इंजीनियरिंग का चयन किया गया। प्रस्ताव पास होने के बाद ये फाइल अचानक गायब हो गई। बताते हैं, यह परिषद कार्यालय में ही रखी रही। करीब 67 दिन बाद 30 जनवरी 2023 को महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस पर हस्ताक्षर किए। इसी तारीख में तत्कालीन आयुक्त ने दस्तखत किए। इसके चौथे दिन तत्कालीन अपर आयुक्त ने 3 फरवरी को हस्ताक्षर किए। तब जलकार्य समिति ने काम ठेकेदार को सौंपा। टेंडर की शर्तों के अनुसार, काम 10 माह में पूरा होना था। लेकिन अब तक इस वार्ड में काम पूरा नहीं हो सका। नई लाइन.. दूसरे प्रकरण में भी निगम की लापरवाही शहर के भागीरथपुरा में नई लाइन बिछाने के लिए 12 नवंबर 2024 को टेंडर के लिए फाइल बनाई। 7 माह बाद 30 जुलाई 2025 को टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई। टेंडर प्रक्रिया पूरे होने के महीनों बाद भी वर्क आर्डर जारी नहीं हुआ   अव्वल दर्जे की लापरवाही – 22 जुलाई 2022 को आयुक्त ने नई पाइपलाइन डालने का प्रस्ताव बनाया – 25 नवंबर 2022 को एमआइसी में प्रस्ताव पास – 30 जनवरी 2023 को महापौर ने किए हस्ताक्षर – 30 जनवरी को ही आयुक्त कार्यालय ने मुहर लगाई – 03 फरवरी 2023 अपर आयुक्त कार्यालय से प्रस्ताव पर लगी मुहर कलेक्टर ने साधी चुप्पी, महापौर भार्गव बोले बैठक सामान्य थी संघ ने दूषित पानी से हुई घटना पर चिंता जताई है। इसी वजह से महापौर, कलेक्टर संघ दफ्तर पहुंचे। बताते हैं, दोनों की संघ पदाधिकारियों ने क्लास भी लगाई। बीते दिनों प्रशासनिक मतभेद का मामला भी सुर्खियों में रहा था, इस पर भी चर्चा हुई। संघ की आंतरिक रिपोर्ट भी बन रही है। आगे इसका महापौर और प्रशासनिक अफसरों पर असर देखने को मिल सकता है।

एमपी हाईकोर्ट ने दी टिप्पणी, न्याय के लिए शक्ति का इस्तेमाल होना चाहिए

जबलपुर आपसी समझौता का आवेदन निरस्त ट्रायल कोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए। जिससे कोर्ट प्रोसेस का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सके और न्याय का मकसद पूरा हो सके। अपराधों की प्रकृति और गंभीरता से समाज पर पड़ने वाले गंभीर असर को देखते हुए अपील को खारिज किया जाता है। इंदौर निवासी ने लगाई थी याचिका इंदौर निवासी रोशन खातरकर की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि भोपाल के मिसरोद थाने में शिकायतकर्ता शाहरुख खान ने उसके और सह अभियुक्त के खिलाफ पिस्टल की नोंक पर कार और मोबाइल लूटने की शिकायत दर्ज करवाई थी। दोनों पक्षों में पहले ही विवाद सुलझ गया है और उन्होंने धारा 320(2) के तहत ट्रायल कोर्ट ने आपसी समझौते के लिए आवेदन दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपराध कंपाउंडेबल नहीं होने के आधार पर आवेदन को खारिज कर दिया था। अंदरूनी शक्तियां हैं बड़ी एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि हाई कोर्ट की अंदरूनी शक्तियां बहुत बड़ी हैं। उनका मकसद न्याय का सही प्रशासन कायम रखना है। न्याय में होने वाली गलतियों को ठीक करना है। कोई अपराध कंपाउंडेबल नहीं है, इस आधार पर हाईकोर्ट अपनी शक्ति का इस्तेमाल करने से इनकार नहीं कर सकता है। शक्ति का इस्तेमाल उन मामलों में किया जा सकता है, जहां आरोपी के खिलाफ सजा दर्ज होने की कोई संभावना नहीं है और ट्रायल की पूरी प्रक्रिया बेकार साबित होने वाली है। शक्तियों का इस्तेमाल बहुत कम और सिर्फ उन मामलों में किया जाना चाहिए, जिसमें अभियोजन जारी रखना कानून प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा। प्रकरण में दोनों पक्षों में आपस में लगे हुए प्लॉट के कारण सिविल विवाद की शुरुआत हुई थी। अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए याचिका को निरस्त किया जाता है।  

MP में बर्फीली ठंड का कहर: शहडोल का कल्याणपुर में पारा गिरकर 2.7 डिग्री, कोहरे से ट्रेनें लेट, इंदौर में स्कूल समय में बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण ठंड और घने कोहरे की दोहरी मार झेल रहा है। हालात ऐसे हैं कि प्रदेश के कई जिलों में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। शहडोल जिले का कल्याणपुर इस समय प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका बन गया है, जहां पारा गिरकर 2.7 डिग्री तक पहुंच गया। साथ ही घने कोहरे और शीतलहर के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है, वहीं रेल और सड़क यातायात पर भी गंभीर असर पड़ा है। शहडोल का कल्याणपुर बना सबसे ठंडा इलाका प्रदेश में सबसे कम तापमान शहडोल जिले के कल्याणपुर में दर्ज किया गया, जहां पारा 2.7 डिग्री तक लुढ़क गया। उमरिया, राजगढ़, शिवपुरी और रीवा जैसे इलाकों में भी ठंड ने लोगों को अलाव और हीटर का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया।सीहोर, छिंदवाड़ा और मुरैना में तो हालात ऐसे रहे कि पौधों पर जमी ओस की बूंदें बर्फ का रूप लेती नजर आईं, जिससे फसलों को नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है। उत्तर एमपी में कोहरे का कहर प्रदेश के उत्तरी और उत्तर-पूर्वी जिलों में सुबह के समय घना कोहरा छाया रहा। ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर विंध्य क्षेत्र तक सड़कें धुंध में गुम रहीं। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर जैसे जिलों में दृश्यता बेहद कम रही।भोपाल, इंदौर, देवास, सीहोर और रायसेन में भी मध्यम कोहरा दर्ज किया गया। उत्तरी हिस्से में घना कोहरा प्रदेश के उत्तरी हिस्से में आज सुबह भी घना कोहरा छा रहा है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिले शामिल हैं। भोपाल, इंदौर, रायसेन, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर, देवास समेत कई जिलों में भी मध्यम कोहरा है। इससे पहले बुधवार को प्रदेश के आधे हिस्से में कोहरे का असर देखा गया। वहीं, उमरिया और शहडोल में शीतलहर की स्थिति बनी रही। भोपाल में दिन में सर्द हवाएं चली। दिन में भी राहत नहीं, कोल्ड डे जैसे हालात सिर्फ रात ही नहीं, दिन के तापमान ने भी लोगों को सर्दी का अहसास कराया। खजुराहो और नौगांव जैसे इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान 16 डिग्री से नीचे रहा। दतिया, रीवा, टीकमगढ़ और ग्वालियर में भी दिनभर सर्द हवाएं चलती रहीं, जिससे कोल्ड डे जैसी स्थिति बनी रही।राजधानी भोपाल में भी दिन के समय ठंडी हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी। आगे और बढ़ेगी ठंड मौसम विभाग के मुताबिक जनवरी में ठंड का असर इसी तरह बना रहेगा। हिमालय क्षेत्र में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) अगले 2-3 दिनों में आगे बढ़ेगा। इसके असर से पहाड़ों पर जमी बर्फ पिघलेगी और उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाएं तेज होंगी, जिससे मध्यप्रदेश में सर्दी और ज्यादा तीखी हो सकती है।कुल मिलाकर, प्रदेश में आने वाले दिनों में ठंड और कोहरे से फिलहाल राहत के आसार कम हैं। लोगों को सावधानी बरतने और जरूरी होने पर ही सुबह-शाम यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।  रेल और सड़क यातायात पर भी असर प्रदेश में सुबह होते ही अधिकांश जिले कोहरे की मोटी चादर में लिपट जा रहे हैं। विजिबिलिटी बेहद कम होने से सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं। दिल्ली से मध्य प्रदेश आने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनें रोजाना 2 से 6 घंटे तक लेट पहुंच रही हैं। कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार कम करनी पड़ रही है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बीती रात (मंगलवार-बुधवार की रात) प्रदेश में बर्फ जमा देने वाली ठंड दर्ज की गई। शहडोल के कल्याणपुर में न्यूनतम तापमान 2.7 डिग्री रहा। इसके अलावा उमरिया, राजगढ़, शिवपुरी और रीवा जैसे इलाकों में भी पारा तेजी से गिरा। सीहोर, छिंदवाड़ा और मुरैना में हालात ऐसे रहे कि पौधों पर जमी ओस की बूंदें बर्फ में तब्दील हो गईं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। उत्तर और पूर्वी एमपी में शीतलहर का असर उत्तर और पूर्वी मध्यप्रदेश में शीतलहर का प्रकोप सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिलों में सुबह घना कोहरा छाया रहा। वहीं भोपाल, इंदौर, रायसेन, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर और देवास में मध्यम कोहरे का असर दर्ज किया गया। ग्वालियर में सर्दी का असर ग्वालियर-चंबल अंचल में ठंड और कोहरे का असर बरकरार है। ग्वालियर में रात का न्यूनतम तापमान 8.7 डिग्री और दिन का अधिकतम तापमान 18.2 डिग्री दर्ज किया गया। सुबह घने कोहरे के चलते विजिबिलिटी काफी कम रही, जिससे रेल और सड़क यातायात प्रभावित हुआ। इस बार कड़ाके की ठंड का दौर इस बार मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी तो दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। नवंबर-दिसंबर की तरह ही जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे भोपाल में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। एक्सपर्ट की माने तो जनवरी में प्रदेश में माइनस वाली ठंड गिर चुकी है। अबकी बार भी तेज सर्दी, घना कोहरा छाने के साथ शीतलहर भी चल रही है। ठंड के लिए इसलिए खास जनवरी मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिन बादल भी छाए रहे।   दिन में भी नहीं मिल रही राहत ठंड का असर केवल रात तक सीमित नहीं है। कई जिलों में दिन के तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। खजुराहो और नौगांव में दिन का अधिकतम तापमान 16 डिग्री से नीचे रहा। दतिया, रीवा, … Read more

ईरानी गैंग के 14 आरोपियों को फर्जी जमानत पर रिहा किया गया, मृतकों के नाम पर जमानतदार बने लोग

भोपाल  भोपाल में पुलिस ने कड़ी मशक्कत और लंबी प्लानिंग के बाद 27 और 28 दिसंबर की दरमियानी रात भोपाल के अमन कॉलोनी में बने ईरानी डेरे पर दबिश दी थी. यहां से पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया था, क्योंकि जैसे ही पुलिस की टीम ईरानी डेरे में पहुंची थी तो यहां पुलिस के साथ पथराव और मारपीट की घटना सामने आई थी. पुलिस को इस बात की जानकारी मिली थी कि इस ईरानी डेरे में देश के अलग-अलग हिस्सों के बदमाश छिपे थे. जिसके बाद पुलिस ने यहां कार्रवाई थी. यहां से 22 पुरुषों और 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था. लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि यह 14 सदस्य जमानत पर रिहा हो चुके हैं.  जमानत लेने में दिखा फर्जीवाड़ा  बताया जा रहा है कि 5 जनवरी को आरोपियों की तरफ से कोर्ट में जमानत की याचिका लगाई गई थी. लेकिन जमानत लेने में कोर्ट में ईरानियों का फर्जीवाड़ा दिखा है, क्योंकि फर्जी जमानतदारों को कोर्ट में खड़ा किया गया था, इनमें से 2 जमानतदार तो ऐसे थे, जिनकी मौत हो चुकी है. जमानत के लिए जमील रहमान नाम के व्यक्ति को कोर्ट में खड़ा किया गया था, उसकी संपत्ति रखवाई थी, लेकिन जमील रहमान की दो साल पहले ही हो मौत हो चुकी है, इसी तरह से दूसरे फर्जी जमानतदार को भी खड़ा किया गया था. जहां 5 जनवरी को 10 और 6 जनवरी को 4 आरोपियों को जमानत मिली थी, इस तरह से कुल 14 आरोपियों को पूरे मामले में जमानत मिल चुकी है.  ऐसे में इस मामले ने अब पुलिस और अभियोजन की कार्यप्रणाली को भी कटखरे में खड़ा कर दिया है कि आखिर फर्जी जमानतदारों के आधार पर जमानत कैसे ली गई. इस मामले में सख्ती क्यों नहीं बरती गई. पुलिस फिलहाल जमानत निरस्त करवाने के लिए तैयारी करने की बात कह रही है.  महीनों की प्लानिंग के बाद रात 4 बजे दी थी दबिश 27 और 28 दिसंबर की दरमियानी रात करीब चार बजे पुलिस ने अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरे पर दबिश दी थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि यहां देश के विभिन्न हिस्सों में वांछित बदमाश छिपे हुए हैं। महीनों की निगरानी और रणनीति के बाद की गई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस पर पथराव और मारपीट की गई। हालात बेकाबू होने के बावजूद पुलिस ने मौके से 22 पुरुषों और 10 महिलाओं को हिरासत में लिया। कई शहरों और राज्यों में चोरी, लूट और ठगी में शामिल पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ बलवा, शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट, तोड़फोड़ और संगठित अपराध जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कई आरोपी पहले भी दूसरे शहरों और राज्यों में चोरी, लूट और ठगी की वारदातों में संलिप्त रह चुके हैं। लगातार दो दिन फर्जी जमानतदार पेश 5 जनवरी को 10 आरोपियों की ओर से कोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई। जमानत के लिए जमील रहमान खान नामक व्यक्ति को जमानतदार बताया गया और उसके नाम के भूमि संबंधी दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए। बाद में जांच में सामने आया कि जमील रहमान खान की दो साल पहले ही मौत हो चुकी है। इसके बावजूद किसी अन्य व्यक्ति को उसी नाम से कोर्ट में पेश कर जमानत हासिल कर ली गई। इसके अगले दिन 6 जनवरी को चार और आरोपियों को भी दूसरे फर्जी जमानतदार के जरिए राहत मिल गई। इस तरह कुल 14 आरोपी जेल से बाहर आ गए। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि फर्जी जमानतदारों के इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और जिम्मेदारों पर कब शिकंजा कसा जाता है। भोपाल में सक्रिए ईरानी गैंग  भोपाल के अमन कॉलोनी के ईरानी डेरे के सदस्य कई राज्यों में सक्रिए माने जाते हैं, जो मारपीट, तोड़फोड़, संगठित अपराध, लूट, ठगी, चोरी समेत कई घटनाओं में संलिप्त पाए जा चुके हैं. वहीं यहां के कई सदस्यों पर कुख्यात अपराधों के मामले दर्ज हैं. इसमें राजू ईरानी का नाम सबसे ऊपर है, जो ईरानी गैंग का भोपाल में मुखिया माना जाता है. ऐसे में आरोपियों को मिली जमानत के बाद इस मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं.   जमानत के साथ कोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें कोर्ट ने जमानत देते समय कड़ी शर्तें लगाई हैं। आदेश के अनुसार, सभी आरोपियों को हर पेशी पर अनिवार्य रूप से न्यायालय में उपस्थित रहना होगा। इसके साथ ही उन्हें साक्ष्यों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने और गवाहों को प्रभावित न करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आरोपियों द्वारा जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया गया, तो उनकी जमानत निरस्त की जा सकती है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, अमन कॉलोनी क्षेत्र के ईरानी डेरे से कई अपराधों में शामिल बदमाशों के खिलाफ छापामार कारर्वाई करते हुए गिरफ्तारी की गई थी। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया था। फिलहाल, पुलिस और अभियोजन पक्ष की आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। ईरानी डेरा बना कुख्यात अंतर्राज्यीय गिरोहों का अड्डा भोपाल पुलिस की जांच में बड़ी खुलासा हुआ है कि ईरानी डेरे में एक नहीं बल्कि 6 से अधिक ईरानी गैंग सक्रिय पाई गई हैं। इन गैंग चोरी, ठगी, नकली सोना खपाना, लूट और प्रॉपर्टी कब्जाने जैसे अपराधों में शामिल हैं। हर गैंग का अलग लीडर है। सभी गैंग का मुख्य सरगना राजू ईरानी बताया जा रहा है, जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। जांच में काला ईरानी का नाम प्रॉपर्टी कारोबार में सामने आया है। निशातपुरा के जनता नगर कॉलोनी में प्लॉट हेरफेर कर बेचने के आरोप लगे हैं। करोड़ों की संपत्ति और काला ईरानी के करीबी रहीम की भी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस दबिश में बड़ी संख्या में मोबाइल, लैपटॉप, सीपीयू और पैनड्राइव जब्त किए गए है। आशंका है कि इन डिवाइस से चोरी के मोबाइल का सिक्योरिटी लॉक तोड़ा जाता था।  घरों से महीनों गायब रहते हैं गिरोह के सदस्य ईरानी डेरे में रहने वाले अपराधी चोरी, लूट, ठगी जैसी वारदातों के लिए महीनों कबीले से दूर दूसरे शहर और राज्यों में रहते … Read more

एमपी वन विभाग में प्रशासनिक बदलाव, 28 IFS और 20 राज्य वन सेवा अधिकारियों के तबादले

भोपाल  मध्य प्रदेश वन विभाग ने भारतीय वन सेवा के 28 अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत प्रधान मुख्य वन संरक्षक विभाष कुमार ठाकुर को वन मुख्यालय की संरक्षण शाखा से हटाकर अनुसंधान एवं विस्तार शाखा का प्रभार सौंपा गया है। वहीं, संजय टाइगर रिजर्व, सीधी के क्षेत्र संचालक अमित कुमार दुबे को एपीसीसीएफ संरक्षण, वन मुख्यालय भोपाल पदस्थ किया गया है। साथ ही, बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व के उप संचालकों के भी तबादले किए गए हैं। क्षितिज कुमार बनाए गए वन संरक्षक वन विभाग मंत्रालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के रूप में पदस्थ क्षितिज कुमार को भोपाल वन वृत्त का वन संरक्षक बनाया गया है। वहीं, राज्य वन विकास निगम, विभिन्न वन वृत्तों, कार्य आयोजना इकाइयों और डीएफओ स्तर पर भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। वन विभाग ने इसी आदेश में प्रवर श्रेणी वेतनमान में कार्यरत राज्य वन सेवा के 20 अधिकारियों के भी तबादले किए हैं, जिससे विभागीय प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। अधिकारी का नाम——————————मौजूदा पदस्थापना——————————–नई पदस्थापना -विभाष कुमार ठाकुर————-पीसीसीएफ संरक्षण, वन मुख्यालय भोपाल——————पीसीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार, वन मुख्यालय भोपाल -अमित कुमार दुबे————एपीसीसीएफ, क्षेत्र संचालक संजय टाइगर रिजर्व सीधी——–एपीसीसीएफ संरक्षण, वन मुख्यालय भोपाल -प्रफुल नीरज गुलाबराव फुलझेले—-सीसीएफ राज्य लघुवनोजन संघ भोपाल—————-सीसीएफ राज्य वन विकास निगम भोपाल -मस्तराम बघेल ——————सीसीएफ उज्जैन वृत्त————–सीसीएफ जबलपुर वृत्त -कमल अरोरा——————-सीएफ जबलपुर वृत्त——————सीएफ छिंदवाड़ा वृत्त -मधु व्ही राज——————सीएफ छिंदवाड़ा वृत्त——————सीएफ बैतूल वृत्त -आलोक पाठक—————सीएफ राज्य वन विकास निगम भोपाल————————–सीएफ उज्जैन वृत्त -बासु कनौजिया—————-सीएफ बैतूल वृत्त—————————सीएफ खंडवा वृत्त -क्षितिज कुमार—————-विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, वन विभाग———————–सीएफ भोपाल वृत्त -विपिन कुमार पटेल—————–डीएफओ अनूपपुर——————–डीएफओ कार्य आयोजना जबलपुर -प्रदीप मिश्रा———————डीएफओ इंदौर————————–डीएफओ कार्य आयोजना इकाई बैतूल -अब्दुल अलीम अंसारी———–डीएफओ नौरादेही वन्यप्राणी———————डीएफओ कार्य आयोजना इकाई सिवनी -नरेश कुमार दोहरे——————–डीएफओ रतलाम————————उप वन संरक्षक कार्यालय, वन बल प्रमुख मुख्यालय भोपाल -प्रकाश कुमार वर्मा——————उप संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया——————–उप संचालक, कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला -अनिल चौपड़ा———————डीएफओ हरदा————————–उप वन संरक्षक कार्यालय, वन बल प्रमुख मुख्यालय भोपाल -पुनील गोयल———————उप संचालक, कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला——————-उप संचालक, पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी -अंकित पांडेय———————डीएफओ ग्वालियर——————–विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, वन विभाग -गौरव शर्मा———————–डीएफओ कटनी————————डीएफओ नर्मदापुरम -पुनीत सोनकर——————-डीएफओ डिंडोरी———————-डीएफओ जबलपुर -अशोक सोलंकी——————उप वन संरक्षक कार्यालय, वन बल प्रमुख मुख्यालय भोपाल————डीएफओ डिंडोरी -रजनीश कुमार सिंह————उप संचालक, पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी——————–डीएफओ नौरादेही वन्यप्राणी -गर्वित गंगवार——————-डीएफओ उत्तर पन्ना—————-डीएफओ कटनी -मयंक गुर्जर———————-डीएफओ नर्मदापुरम——————उप वन संरक्षक कार्यालय, वन बल प्रमुख मुख्यालय भोपाल -स्वरूप दीक्षित——————–उप वन संरक्षक, ईको पर्यटन विकास बोर्डभोपाल——————–डीएफओ पूर्व छिंदवाड़ा -रिषी मिश्रा————————-डीएफओ जबलपुर——————–डीएफओ छतरपुर -सर्वेश सोनवानी—————डीएफओ छतरपुर———————-डीएफओ जनसंपर्क एवं विक्रय डिपो, नई दिल्ली -डेविड व्यंकटराव——————उप वन संरक्षक, राज्य वन विकास निगम भोपाल————————-डीएफओ अनूपपुर -अरिहंत कोचर डीएफओ दक्षिण बालाघाट उत्पादन—————————-डीएफओ दक्षिण बैतूल

एमपी में बढ़ते प्रदूषण पर NGT की चिंता, सरकार से 8 शहरों पर 8 हफ्तों में रिपोर्ट की मांग

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर प्रदूषण का ग्राफ बढ़ गया है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने भोपाल और इंदौर के साथ साथ राज्य के 8 शहरों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता व्यक्त की है। साथ ही, बढ़ते प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार से 8 हफ्तों में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। वहीं एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा एक ज्वाइंट कमेटी भी गठित कर मामले पर संज्ञान लेने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में प्रदूषण का लेवल बढ़ गया है। एनटीजी ने भोपाल-इंदौर समेत 8 शहरों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। राजधानी भोपाल में वायु गुणवत्ता तय मानकों के नीचे है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में दर्ज हो रहा है, जो गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए संकट है। एमपी के इन शहरों पर संकट एनजीटी ने एमपी के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सिंगरौली, सागर और देवास में बढ़ते प्रदूषण स्तर को लेकर कहा है कि, ये शहर गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की श्रेणी में है। इनमें पीएम-10 का औसत 130-190 और पीएम 2.5 का 80-100 माइक्रोग्राम/घनमीटर है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन 8 शहरों को 'नॉन-अटेनमेंट सिटी' घोषित किया है। बता दें कि, साल 2016 में 6 शहर थे, लेकिन अब इस श्रेणी में 8 शहर आ गए हैं। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए एनजीटी ने सरकार से 8 हफ्तों में रिपोर्ट तलब की है।

सतना का नया अंतरराज्यीय बस स्टैंड उद्घाटन के बावजूद खाली पड़ा, बसों का संचालन शुरू नहीं

सतना शहर के बाईपास पर न्यू बस स्टैंड बनकर तैयार है. इस नए अंतरराज्यीय बस स्टैंड का उद्घाटन सीएम डॉ. मोहन यादव ने 27 दिसंबर को फीता काटकर किया था. लेकिन उद्घाटन के बाद से अभी तक 10 दिन बीत जाने के बाद भी यहां से बसों का संचालन शुरू नहीं हो सका है. अभी भी सभी बसों का संचालन सेमरिया चौराहे स्थित पुराने बस स्टैंड से किया जा रहा है. 31 करोड़ की लागत से बना है बस स्टैंड सतना-मैहर बायपास में स्थित नवनिर्मित अंतरराज्यीय बस स्टैंड का उद्घाटन किया जा चुका है. यह अंतरराज्यीय बस स्टैंड 31 करोड़ से अधिक की लागत से बनकर तैयार हुआ है. जो नगर निगम के द्वारा तैयार कराया गया है. इसके उद्घाटन के बाद जिले भर के समस्त बसें यही से संचालित होनी है, लेकिन बस स्टैंड सुनसान पड़ा हुआ है. आरोप लगाया जा रहा है कि बसों के संचालन का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है और परिवहन विभाग की संपूर्ण गाइडलाइन का पालन किए बिना ही इसका उद्घाटन हो गया. धूल फांक रहा है बस स्टैंड बस स्टैंड पर मौजूद चौकीदार विनोद सिंह बघेल ने बताया कि "जब से इस बस स्टैंड का निर्माण हो रहा है, तब से यहां पर चौकीदारी का काम कर रहे हैं. इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया, लेकिन बसों का संचालन शुरू नहीं हुआ है. हम भी यहां पर बसों के संचालन की राह देख रहे हैं. इतना खूबसूरत बस स्टैंड तो बना दिया गया, लेकिन यहां बसें नहीं चल पा रही हैं. जिससे यहां धूल और जाले लगते जा रहे हैं." परमिट शर्तों का पालन किए जाने की मांग इस बारे में बस यूनियन के अध्यक्ष कमलेश गौतम ने बताया कि "हमारी कोई नवीन मांगे नहीं है. नवनिर्मित बस स्टैंड से बसों के संचालन के लिए जो हम लोगों को परमिट शर्तों में अनुबंध हुआ है. इस अनुबंध के तहत इसका पालन किया जाए. जिससे कि हम सब बसों का संचालन नए बस स्टैंड से कर सकें." बैठक कर संचालन के बिंदु पर होगी चर्चा आरटीओ अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने बताया कि "नियमानुसार बस स्टैंड बन गया और उसका उद्घाटन भी मुख्यमंत्री कर चुके हैं. अब धीरे-धीरे करके यहां से बसों का संचालन शुरू किया जाएगा. परमिट शर्तों के पालन के लिए एक पत्र संभाग आयुक्त को भेजा गया है, जिसमें संशोधन की बात हो चुकी है. जिला प्रशासन के द्वारा इस विषय में आगामी 8 जनवरी को एक बैठक भी रखी गई है. जिसमें बस यूनियन और जिला प्रशासन शामिल होंगे. इस बैठक में नियम शर्तों के तहत नए बस स्टैंड से बसों का संचालन शुरू करने की पूरे बिंदु सामने रखे जाएंगे." इस बारे में जिले के सांसद गणेश सिंह ने बताया कि "बहुत जल्दी हम बसों का संचालन नए बस स्टैंड से शुरू कराएंगे. बसों के परमिट एवं अन्य बिंदुओं को लेकर हम एक बड़ी बैठक बुलाने वाले हैं जिसमें सारी चीजें तय होंगी."

शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे, सरकार का बड़ा फैसला

शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे दुर्घटना में क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करने सरकार का बड़ा फैसला बीमा, फिटनेस व परमिट अनिवार्य परिवहन विभाग ने जारी किए आदेश भोपाल  मध्यप्रदेश शासन के परिवहन विभाग ने शासकीय विभागों, निगमों एवं निकायों द्वारा विभिन्न प्रयोजनों के लिए अनुबंधित किए जाने वाले वाहनों के संबंध में नवीन निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेशानुसार अब बगैर वैध दस्तावेजों के किसी भी वाहन को शासकीय कार्यालयों में उपयोग में नहीं लिया जाएगा। शासकीय विभागों द्वारा सीधे अथवा निजी एजेंसियों के माध्यम से उपयोग में लाए जाने वाले मालवाहक एवं यात्री वाहनों के सभी वैधानिक दस्तावेज अनुबंध से पूर्व और वाहन उपयोग की संपूर्ण अवधि के दौरान वैध होना अनिवार्य होगा। साथ ही, विभागों को भुगतान से पहले भी इन दस्तावेजों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन विभाग ने यह भी निर्देश दिये है कि खनिज अथवा अन्य सामग्री के परिवहन के लिये जारी की जाने वाली अनुमति संबंधित वाहन की निर्धारित क्षमता से अधिक नहीं होनी चाहिए। अनुबंधित वाहनों द्वारा नियमानुसार मोटरयान कर का भुगतान किया गया होना चाहिए। ई-मेल से  भीप्राप्‍त कर स‍कते हैं मार्गदर्शन सभी विभागों, निगमों एवं निकायों को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वे अपने यहां अनुबंधित अथवा एजेंसियों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे वाहनों के संबंध में परिवहन आयुक्त कार्यालय, मध्यप्रदेश, ग्वालियर से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए ई-मेल आईडी commr.transpt@mp.gov.in पर पत्र प्रेषित किया जा सकता है।  

ग्वालियर: छात्रा का सोशल मीडिया पर वीडियो, योग मुद्रा से छेड़छाड़ पर सवाल उठाते हुए समाज की मानसिकता पर गंभीर टिप्पणी

ग्वालियर  शहर में स्मार्ट सिटी पहल के तहत बनाई गई महिलाओं की योग करती हुई पेंटिंग को कुछ आसामाजिक तत्वों ने गंदी हरकतों से खराब कर दिया। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब 11वीं की छात्रा आशी कुशवाहा ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो ने लोगों को गुस्सा दिलाया और नगर निगम को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी। छात्रा ने सोशल मीडिया पर डाली थी पोस्ट छात्रा आशी कुशवाहा ने जब इस गंदी हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला तो उसने लिखा, 'मुझे यह बात उठानी पड़ी। मैं रोज़ इस सड़क से गुज़रती हूं, और रोज़ इसे देखकर मुझे गुस्सा और घिन आती है। ग्वालियर को गर्व से 'स्मार्ट सिटी' कहा जाता है, लेकिन इसके लोगों की स्मार्टनेस कहां है? यह कोई मामूली नुकसान नहीं है। यह घटिया सोच, गंदी मानसिकता और गहरा अनादर है। यह शर्मनाक और बेहद निराशाजनक है कि एक महिला की पेंटिंग भी ऐसी बीमार सोच से सुरक्षित नहीं है। अगर हमारी सोच ऐसी है, तो 'स्मार्ट सिटी' का मतलब कुछ भी नहीं है।' वीडियो पोस्ट से पहले डरी हुई थी आशी आशी ने बताया कि वह वीडियो पोस्ट करने से पहले थोड़ी डरी हुई थी क्योंकि वह अभी 11वीं में पढ़ती है। उन्होंने बताया कि 'मैं ऐसे सिटी-लेवल स्टेप लेने के लिए छोटी भी हूं। लेकिन मुझे लगा कि यह ज़रूरी है। यह समस्या सिर्फ ग्वालियर की नहीं है, बल्कि पूरे देश में सार्वजनिक जगहों और संपत्तियों का यही हाल है। दीवार ठीक हो जाएगी और फिर से पेंट हो जाएगी, लेकिन उन लोगों की मानसिकता का क्या जो एक महिला की काली पेंटिंग को भी वस्तु की तरह देख रहे हैं? महिलाएं पेंटिंग में भी सुरक्षित नहीं हैं। यह शर्मनाक है। यह निराशाजनक और दुखद है।' वीडियो वायरल होने के बाद एक्शन छात्रा के पोस्ट के बाद, कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मौके पर पहुंचे। लोकेंद्र सिंह उर्फ 'केतु' पेंट और ब्रश लेकर पहुंचे और पेंटिंग के खराब हुए हिस्सों को ठीक किया। उन्होंने कहा, 'जब मैंने अपने सोशल मीडिया फीड पर यह रील देखी, तो मुझे इतना बुरा लगा कि मैं मौके पर गया और दीवार पर आपत्तिजनक निशानों को फिर से पेंट कर दिया। लोगों को ऐसे काम करने से बचना चाहिए।' प्रशासन ने पूरी सफेद रंग दी दीवार इसके बाद, ग्वालियर नगर निगम ने पूरी दीवार को सफेद रंग से पोत दिया, जिससे सभी निशान और कलाकृति मिट गईं। जीएमसी कमिश्नर संघ प्रिय ने बताया कि फिलहाल दीवार को सफेद रंग से रंग दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे उसी स्थान पर एक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जहां वे Gen Z को फिर से दीवार को सकारात्मक संदेशों के साथ पेंट करने के लिए आमंत्रित करेंगे। निगम पेंट के साथ-साथ स्नैक्स भी मुहैया कराएगा। इस प्रस्तावित कार्यक्रम के बारे में और जानकारी अलग से दी जाएगी।