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मंत्री लोधी: श्री रामराजा लोक और चित्रकूट परिक्रमा पथ को प्रमुख पर्यटन स्थल बनाने की योजना

श्री रामराजा लोक और चित्रकूट परिक्रमा पथ को उत्कृष्टतम पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करना हमारी प्राथमिकता : राज्य मंत्री  लोधी राज्य मंत्री  लोधी ने की पर्यटन निगम की समीक्षा भोपाल संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पर्यटन भवन में मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का कायाकल्प रहा, जिसमें राज्य मंत्री  लोधी ने स्पष्ट किया कि ओरछा स्थित 'श्री रामराजा लोक' और चित्रकूट के 'कामदगिरि पर्वत परिक्रमा पथ' को देश के उत्कृष्टतम पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य मंत्री  लोधी ने निर्देशित किया कि प्रदेश में निर्माणाधीन विभिन्न सांस्कृतिक लोकों के कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और इन्हें निर्धारित समयावधि में पूर्ण किया जाए। उन्होंने आगामी सिंहस्थ 2028 के लिए निगम की कार्ययोजना का सूक्ष्म अवलोकन किया और उज्जैन सहित पूरे धार्मिक सर्किट में श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में क्षेत्रीय पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान देते हुए राज्य मंत्री लोधी ने जागेश्वरधाम बांदकपुर के आगामी चरणों, नोहटा में बोट क्लब की स्थापना और भोपाल में वॉच टावर के निर्माण जैसी नवीन परियोजनाओं को गति देने की बात कही। इसके अतिरिक्त, कटावधाम और भारत माता मंदिर (हटा) के सौंदर्याकरण के साथ-साथ मगरोन (पथरिया) और खर्राघाट से संबंधित विकास कार्यों की प्रशासनिक एवं क्रियान्वयन संबंधी समीक्षा की गई। पर्यटन निगम की वित्तीय प्रगति पर चर्चा करते हुए राज्य मंत्री  लोधी ने आय के स्रोतों को बढ़ाने के लिए आधुनिक नवाचारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तकनीक और बेहतर प्रबंधन का समन्वय आवश्यक है। साथ ही, संस्थान की मजबूती के लिए कार्य कर रहे कर्मचारियों के कल्याण का ध्यान रखते हुए उन्होंने उनकी वेतनवृद्धि के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए। राज्य मंत्री  लोधी ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से मध्यप्रदेश न केवल एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बनेगा, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यहाँ एक अद्वितीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभूति प्राप्त होगी। इस अवसर पर प्रबंध संचालक राज्य पर्यटन विकास निगम डॉ. इलैयाराजा टी सहित सम्बंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें।  

ऊर्जा मंत्री तोमर का आह्वान: शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए जन आंदोलन में भाग लें

शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए जन आंदोलन में सहभागी बनें : ऊर्जा मंत्री तोमर स्वच्छता, प्रदूषण और नशा मुक्ति के लिए अखण्ड सीताराम धुन का समापन ग्वालियर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की पहल पर ग्वालियर शहर को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और नशा मुक्त बनाने के संकल्प की पूर्ति के लिए बीते साल आरंभ हुई संगीतमय सीताराम धुन श्रृंखला का एक वर्ष पूर्ण होने पर सोमवार को समापन किया गया। जन कल्याण समिति ग्वालियर द्वारा रविवार से ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की पहल पर आरंभ हुए 24 घंटे के अखण्ड सीताराम धुन जाप का सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा अर्चना के साथ समापन हुआ। सीताराम धुन समापन आयोजन में हजारों की संख्या में धर्मालंबियों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने सभी शहरवासियों से आह्वान किया कि स्वच्छता के लिए जागरूक होना मतलब स्वच्छता ही सेवा अभियान का हिस्सा बनना है, जिससे सामाजिक वातावरण को बेहतर बनाया जा सके। इसके लिए व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ सार्वजनिक स्वच्छता (कचरा न फैलाना, कूड़ा सही जगह डालना, सार्वजनिक स्थानों की सफाई) दोनों शामिल हैं, जो स्वच्छ ग्वालियर अभियान के तहत शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए एक जन आंदोलन है। इसमें हर नागरिक की भागीदारी ज़रूरी है, जिससे गंदगी को खत्म कर एक स्वस्थ और सुंदर ग्वालियर का निर्माण किया जा सके। ऊर्जा मंत्री तोमर ने सभी से अपील की कि अपने-अपने घर में तुलसी का एक पौधा अवश्य लगाएं। अखण्ड सीताराम धुन समापन उपरांत इस अवसर पर प्रसादी वितरण के रुप में भंडारे का आयोजन भी किया गया।  

टीबी मुक्त भारत अभियान में जन भागीदारी बढ़ाने के करें प्रयास: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

मैनपावर भर्ती की प्रक्रिया समय से करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री शुक्ल टीबी मुक्त भारत अभियान में जन भागीदारी बढ़ाने के करें प्रयास औषधि निर्माण इकाइयों की सतत जांच ज़ारी रखें लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विस्तृत समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विस्तृत एवं वृहद समीक्षा की। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, गुणवत्ता, मानव संसाधन प्रबंधन, अधोसंरचना विकास, चिकित्सा शिक्षा, जांच एवं उपचार सुविधाओं सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) एवं कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) के माध्यम से संचालित भर्ती प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने मेडिकल ऑफिसर, चिकित्सा विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट, लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग ऑफिसर, एएनएम एवं अन्य चिकित्सकीय एवं सहायक पदों की भर्ती में प्रगति की जानकारी ली तथा लंबित प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में मानव संसाधन की कमी से सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए और सभी रिक्त पदों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित की जाए। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधोसंरचना विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन अस्पताल भवनों, मेडिकल कॉलेजों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की प्रगति की जानकारी लेते हुए गुणवत्ता एवं समय-सीमा के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए। साथ ही, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीदी, उनकी स्थापना एवं उपयोगिता की समीक्षा करते हुए उपकरणों के समुचित रख-रखाव पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा करते हुए जनभागीदारी बढ़ाने तथा जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें जन जागरूकता और सहभागिता की महत्वपूर्ण भूमिका है।बैठक में पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के संचालन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सेवा के विधिवत, पारदर्शी एवं प्रभावी संचालन के निर्देश देते हुए कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को त्वरित एवं सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने औषधि निर्माण इकाइयों (ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स) की नियमित एवं सघन जांच करने तथा गुणवत्ता मानकों के कड़ाई से अनुपालन के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में जांच सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के प्राथमिकता से उन्नयन के निर्देश दिए। इसके साथ ही, सभी ब्लड बैंकों के विधिवत संचालन, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, रक्त की गुणवत्ता एवं संबंधित नियमों के पूर्ण अनुपालन को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने टेलीमेडिसिन सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराने में टेलीमेडिसिन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए तकनीकी संसाधनों, प्रशिक्षण एवं नेटवर्क विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाए।ृ उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा। बैठक में प्रमुख सचिव संदीप यादव, आयुक्त स्वास्थ्य तरुण राठी, संचालक स्वास्थ्य दिनेश श्रीवास्तव, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर बनाएंगे सिंहस्थ को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जैन आने वाले श्रद्धालु सिर्फ मेहमान नहीं, महाकाल के अतिथि हैं, उनके सत्कार में संवेदना भी हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर बनाएंगे सिंहस्थ को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन पुराने हॉकी स्टेडियम में आधुनिक एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा चिंतामण गणेश बनेगा मुख्य स्टेशन, मोहनपुरा में भी होगा रेलवे स्टेशन, उज्जैन में बन रहा एयरपोर्ट मुख्यमंत्री ने उज्जैन में किया करीब 129 करोड़ रुपए के 12 कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले सभी श्रद्धालुओं का स्वागत है, अभिनंदन है। बीते तीन-चार दिनों के अंदर ही 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। उज्जैन आने वाले सभी श्रद्धालु सिर्फ हमारे मेहमान नहीं, स्वयं बाबा महाकाल द्वारा आमंत्रित अतिथि हैं। महाकाल ने उन्हें दर्शन देने के लिए बुलाया है। इसलिए सभी श्रद्धालुओं के सत्कार से जुड़ी हर व्यवस्था में संवेदना और आत्मीयता भी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से ही उज्जैन नगरी सिर्फ भारत नहीं, सम्पूर्ण विश्व की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनी हुई है। उज्जैन के नागरिकों का सहयोग ही बाबा महाकाल की सच्ची सेवा है। सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर सिंहस्थ-2028 को सबसे भव्य, दिव्य और अनुशासित के साथ एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक आयोजन बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को उज्जैन के नानाखेड़ा स्टेडियम में विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां लगभग 129 करोड़ रुपए की लागत के 12 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में युवाओं को केंद्र में रखकर तैयार की गई तीन महत्वपूर्ण पहलों का एक साथ लोकार्पण एवं शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रोजेक्ट स्वाध्याय (Coding for All) का शुभारंभ किया। इस प्रोजेक्ट के जरिए विद्यार्थियों को कम उम्र से ही कोडिंग और डिजिटल सोच से जोडा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने UtkarshUjjain.com वेब पोर्टल का भी शुभारंभ किया। यह पोर्टल युवाओं के लिए सीखने, मार्गदर्शन और अवसरों का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेगा। साथ ही कौशल सेतु इंडस्ट्री-लीड स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम का भी आगाज किया। कौशल सेतु शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को पाटते हुए युवाओं को वास्तविक इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप तैयार करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह तीनों पहले उज्जैन के युवाओं को केवल डिग्री तक ही सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि उन्हें जॉब-रेडी, स्टार्टअप-रेडी और फ्यूचर-रेडी बनाने का आधार तैयार करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन शहरी क्षेत्र में 124 करोड़ रुपए लागत से बनने वाले 11 विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इसमें करीब 102 करोड़ रुपए लागत से विभिन्न सड़कों का चौड़ीकरण कार्य, 9.50 करोड़ रुपए लागत से कपिला गौशाला (3000 गौ-वंश क्षमता वाली) का संवर्धन एवं विकास कार्य, 8.75 करोड़ रुपए लागत से पंवासा क्षेत्र में ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में विकास कार्य, 3.47 करोड़ रुपए लागत से कानीपुरा में स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का निर्माण तथा लगभग 5 करोड़ रुपए लागत से नवीन जनपद पंचायत भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों के अलावा 45 करोड़ लागत के अन्य काम भी प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि उज्जैन के इस पुराने हॉकी स्टेडियम में आधुनिक एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा, जिससे यहां इंटरनेशनल हॉकी मैच हो सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय खिलाड़ी लगभग सभी खेलों में पदक विजेता बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश के युवाओं को नौकरी लेने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आज की गई पहलें कल इसी दिशा में हमारी मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सीखो-कमाओ योजना, स्किल इंडिया मिशन और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम जैसी पहलें युवाओं को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव देकर उन्हें बाजार और उद्योगों के लिए तैयार कर रही हैं। यही सही अवसर है कि उज्जैन के युवा स्वयं को आने वाले बेहतर कल के लिए अभी से तैयार करें। अद्भुत होगा सिंहस्थ – 2028 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह भारतीय धर्म, संस्कृति, आध्यात्म और पर्यटन का अद्भुत समागम है। सिंहस्थ को देखते हुए सरकार ने भी सभी तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। हमारी कोशिश है कि 30 किलोमीटर लम्बे घाटों में 24 घंटे में 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु शिप्रा के शुद्ध जल में स्नान/आचमन कर लें। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ को बेहतर बनाने के लिए हमने उज्जैन में 2675 करोड़ रुपए की लागत से 33 प्रमुख कार्यों को मंजूरी दे दी है। इन कामों पर क्रियान्वयन भी शुरू हो चुका है। सिंहस्थ के दौरान क्राउड मैनेजमेंट पर हमारा विशेष ध्यान रहेगा। इसीलिए संपूर्ण मेला क्षेत्र को फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों से जोड़कर निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा रही है। श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी दिशा में उज्जैन में आधुनिक मेडिसिटी का निर्माण प्रगति पर है। यहां एक नया इंडस्ट्रियल पार्क भी बनाया जा रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेज के पुराने कैम्पस में नया आईटी पार्क और साइंस सिटी बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रोजेक्ट स्वाध्याय के लिए 3 हजार युवाओं के लिए निनौरा और मक्सी के पास 2 हजार युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र शुरू किए हैं। इंदौर-उज्जैन के बीच भविष्य में मेट्रो भी दौड़ेगी, लेकिन उससे पहले वंदे भारत मेट्रो ट्रेन की सौगात मिलेगी। शहर के चिंतामण गणेश स्टेशन को भी मुख्य स्टेशन के तौर पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोहनपुरा में भी एक नया रेलवे स्टेशन बनेगा। उज्जैन के समीप ही एक बड़ा एयरपोर्ट भी बनाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालु सीधे उज्जैन में ही उतर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में शनि लोक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 140 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। यह शनि लोक आस्था और पर्यटन के क्षेत्र में उज्जैन की एक और नई पहचान स्थापित करेगा। उज्जैन को दूसरे शहरों से जोड़ने के लिए यहां चारों दिशाओं में फोरलेन बन रहे हैं। यहां करीब 12-13 नए पुल भी निर्माणाधीन हैं। इससे आवागमन बेहतर होगा। … Read more

भोपाल का रुतबा बढ़ेगा, 1756 गांव और तहसीलों का होगा विकास, ग्रेटर भोपाल में होगा अहमदाबाद जैसा बदलाव

 भोपाल  नए साल में भोपाल सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक विशाल महानगर (मेट्रोपॉलिटन रीजन) के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराएगा। गुजरात के अहमदाबाद की सेप्ट (सीईपीटी) यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर एक ऐसा सुपर मैप तैयार किया जा रहा है, जो भोपाल के साथ सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ की सीमाओं को एक सूत्र में पिरो देगा। भोपाल की धड़कन इन जिलों में एक साथ सुनाई देगी अब भोपाल की धड़कन सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ में एक साथ सुनाई देगी। मेट्रोपालिटन अथॉरिटी ने हर शहर को उसकी ताकत के अनुसार एक नया रोल दिया है। पांच शहर, पांच अलग पहचान     भोपाल : सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एडमिनिस्ट्रेटिव हब।     सीहोर व रायसेन : भोपाल के नए इंडस्ट्रियल पावरहाउस।     विदिशा : दुनिया के नक्शे पर चमकता हेरिटेज हब।     राजगढ़ : खेती और उद्योग का एक अनोखा संगम। पहले चरण में 8,791 वर्ग किमी क्षेत्र फाइनल फिलहाल पहले चरण में 8,791 वर्ग किमी का क्षेत्रफल फाइनल किया गया है। जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 10 हजार वर्ग किमी किया जाएगा। बीडीए के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को नए साल में राकेट की रफ्तार देने वाले हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा वॉटर मैनेजमेंट और कमर्शियल लैंड के सर्वे से होगा, जिससे भविष्य में पानी की किल्लत नहीं होगी और उद्योगों के लिए पर्याप्त जमीन मिलेगी। विकास के साथ ग्रीन कवच भी भोपाल अपनी हरियाली के लिए जाना जाता है। इसलिए मेट्रोपॉलिटन रीजन में उपजाऊ जमीन और पर्यावरण से कोई समझौता नहीं होगा। प्रदूषण नियंत्रण और हरियाली के लिए अलग से कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान बनाया जा रहा है। कनेक्टिविटी: अब सिर्फ सड़कें नहीं, बल्कि सैटेलाइट टाउन्स और ग्रोथ सेंटर भोपाल को जोड़ेंगे। रोजगार के अवसर : पांच जिलों के जुड़ने से आइटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लाखों नौकरियां पैदा होंगी। रियल एस्टेट : आसपास के क्षेत्रों में जमीन की कीमतों और निवेश में उछाल की संभावना। इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (IMR) के विस्तार पर विचार, भविष्य में होगा बड़ा बदलाव इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (आइएमआर) के विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज है। माना जा रहा है कि इससे औद्योगिकीकरण, निवेश, रोजगार और निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी, लेकिन विशेषज्ञों का साफ कहना है कि विस्तार से पहले सुधार जरूरी है, वरना यह महत्वाकांक्षी योजना शहर के लिए भारी पड़ सकती है। शहर का क्षेत्रफल बढ़ने से आसपास के ग्रामीण इलाके शहरी दायरे में आएंगे, जिससे नए औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार के अवसर बन सकते हैं। इंदौर के कई उत्पाद पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान रखते हैं, जिन्हें मेट्रोपॉलिटन रीजन का फायदा मिल सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार इंदौर को एक बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित कर रही है, जिसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और शाजापुर जिलों के लगभग 1756 गांवों और कई तहसीलें शामिल होंगी, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र का समग्र विकास, औद्योगीकरण और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है एक्सपर्ट बोलेः योजना के बिना विस्तार विनाशकारी अर्थशास्त्री एवं डीएवीवी के प्रोफेसर कन्हैया आहूजा का कहना है कि सिर्फ क्षेत्रफल बढ़ाने से कोई शहर स्मार्ट या विकसित नहीं बनता। ट्रांसपोर्ट, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य व इंफ्रास्ट्रक्चर की दीर्घकालिक योजना नहीं बनी तो शहर अव्यवस्थित शहर में बदल जाएगा। अवसर बड़े लेकिन चुनौतियां उससे भी बड़ी विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान हालात में इंदौर बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। यदि इन समस्याओं को दूर किए बिना मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार किया गया, तो शहरी दबाव कई गुना बढ़ जाएगा। क्या होना चाहिए प्राथमिक एजेंडा ? -पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मजबूत नेटवर्क -मेट्रो परियोजना को पूर्ण क्षमता से चालू करना -बस परिवहन को फिर से सशक्त बनाना -जल आपूर्ति और सीवरेज सिस्टम का विस्तार -स्वास्थ्य और शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश -औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन मेट्रोपोलिटन रीजन का विस्तार इंदौर को औद्योगिक, आर्थिक और निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, लेकिन यह तभी संभव है, जब विस्तार से पहले सुधार और सपनों के साथ सिस्टम पर भी बराबर काम किया जाए, वरना मेट्रोपोलिटन रीजन का सपना, शहरी संकट में बदल सकता है। कहां-कहां पिछड़ रहा है इंदौर ? 1- इंफ्रास्ट्रक्चर शहर की सड़कों, फ्लाईओवर, ड्रेनेज और शहरी ढांचे का विकास बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के अनुपात में नहीं हो पाया है। कई इलाकों में ट्रैफिक जाम और जलभराव आम समस्या बन चुके हैं। 2- पब्लिक ट्रांसपोर्ट सबसे कमजोर कड़ी मेट्रो परियोजना अब भी अधूरी, बीआरटीएस बंद हो चुका है और सरकारी बस परिवहन सीमित है। नतीजा यह है कि शहर के अधिकांश नागरिक निजी वाहनों पर निर्भर हैं, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। 3- सड़कों और कनेक्टिविटी की कमी नईकॉलोनियों और बाहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी कमजोर है। सड़कों की गुणवत्ता और क्षमता दोनों ही जरूरत से कम हैं, जिससे रोजमर्रा की आवाजाही चुनौती बन गई है। 4- पानी बना सबसे बड़ा नर्मदा जल योजना का तीसरा चरण अधूरा है। वर्तमान में शहर की 35-40 प्रतिशत आबादी तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंच रहा। यदि मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार हुआ तो जल आपूर्ति की मांग कई गुना बढ़ेगी, जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। 5- स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ेगा बोझ क्षेत्र विस्तार के साथ आबादी बढ़ेगी। ऐसे में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ना तय है। अभी से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना अनिवार्य होगा।

2500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली तीसरी रेल लाइन निर्माण में तेजी, 361 पुल और 4 टनल होंगे शामिल

 इटारसी भोपाल-इटारसी के बाद अब इटारसी-आमला के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। आमला से इटारसी के बीच 130 किमी क्षेत्र में तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए मिट्टी का बेस तैयार किया जा रहा है। जिसके बाद आगे काम होगा। 40 गांवों से ली गई 16 हेक्टेयर जमीन नर्मदापुरम और बैतूल जिले में जमीन अधिग्रहण में हुई देरी की वजह से इटारसी-आमला (Itarsi-Amla third railway line) सेक्शन में निर्माण कार्य देरी से शुरू हुआ। तीसरी रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए बैतूल जिले के 3 तहसीलों के 40 गांवों में रहने वाले 290 किसानों की 16.036 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है। तीसरी रेलवे लाइन का काम पूरा होने के बाद रेल यातायात ओर बेहतर होने की उम्मीद है। खास बात यह भी है कि इस रेल रूट पर घाट सेक्शन होने की वजह से भी यातायात में परेशानी आती है। तीसरी लाइन बनने के बाद राहत मिलने की उम्मीद है। चार स्थानों पर बनेंगे टनल तीसरी लाइन के लिए मरामझिरी-धाराखौह घाट सेक्शन में चार स्थानों पर कुल 1.40 किमी लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इटारसी से नागपुर के बीच 267 किलोमीटर की लंबाई में तीसरी लाइन बिछाई जाना है। जिसके बीच 27 रेलवे स्टेशन आएंगे। साथ ही 361 पुल-पुलियाओं का निर्माण भी किया जाएगा। प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 2525 करोड़ से अधिक भोपाल से इटारसी तक तीसरी लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। रेलवे द्वारा इटारसी से नागपुर के बीच तीसरी लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। प्रोजेक्ट पर 2525.73 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वर्तमान में जो रेलवे लाइन मौजूद है, उसके समानांतर ही तीसरी लाइन बिछाने के लिए मिट्टी का बेस बनाया जा रहा है। इसलिए जरूरी तीसरी लाइन वर्तमान में रेलवे के पास नागपुर-इटारसी सेक्शन में केवल दो लाइन हैं। इन लाइनों से यात्री और और गुड्स ट्रेनों का संचालन किया जाता है। यात्री गाड़ियों को निकालने के लिए अक्सर गुड्स ट्रेनों को घंटों तक कहीं भी रोक दिया जाता है। इन्हीं समस्याओं के चलतेतीसरी लाइन बिछाई जा रही है. ताकि यात्री ट्रेनों के लिए गुड्स ट्रेनों को न रोकना पड़े और वे भी सही समय पर पहुंच सके। (MP News) बेहतर होगा रेल यातायात… रेल यातायात को बेहतर बनाने के लिए निर्माण कार्य हो रहे हैं। भोपाल-इटारसी के में तीसरी लाइन के बाद इटारसी से नागपुर के बीच भी तीसरी रेल लाइन का काम कराया जा रहा है। – नवल अग्रवाल, पीआरओ रेल मंडल भोपाल

इंदौर में आयुर्वेदिक कॉलेज ने 220 कैंसर मरीजों को दी ओजोन थेरेपी, स्वास्थ्य में सुधार

इंदौर  इंदौर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेदिक कॉलेज में ओजोन थेरेपी के माध्यम से देशभर के कैंसर मरीजों को लाभ मिल रहा है। गत पांच महीनों में 220 से अधिक मरीजों को यह थेरेपी दी जा चुकी है। ओजोन थेरेपी शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर कैंसर मरीजों को ऊर्जा प्रदान करती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऑक्सीजन मानव शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है। दूषित पर्यावरण, फेफड़ों की बीमारियों और अन्य कारणों से शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ओजोन थेरेपी शरीर में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। अस्पताल में हर वर्ष एक हजार से अधिक मरीज कैंसर का इलाज करवाने के लिए आते हैं। इनमें कई मरीज देश के विभिन्न राज्यों से होते हैं। ओजोन थेरेपी द्वारा शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर बीमारियों को समाप्त किया जा सकता है, जिससे स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलती है। आयुर्वेदिक इलाज से मिला लाभ     सुदामा नगर निवासी 66 वर्षीय महिला लाइपोसार्कोमा कैंसर से पीड़ित हैं। उन्होंने ऑपरेशन करवाया और फिर कीमोथेरेपी भी करवाई, लेकिन समस्या कम नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेदिक इलाज लेना शुरू किया और अब तक 15 ओजोन थेरेपी ले चुकी हैं, जिससे वे स्वस्थ महसूस कर रही हैं। नवीन आर्य को आंत का कैंसर है। ऑपरेशन हो चुका है और कीमोथेरेपी भी ले चुके हैं। ओजोन थेरेपी के बाद उन्हें आराम मिला है। बैतूल निवासी 55 वर्षीय महिला को स्तन कैंसर है, जिसमें गांठ बनी हुई है। उन्होंने ऑपरेशन नहीं करवाया है और इंदौर में रहकर ओजोन थेरेपी ले रही हैं, जिससे वे स्वस्थ महसूस कर रही हैं। इंदौर के 53 वर्षीय शिवदत्त जोशी को जीभ का कैंसर है। वे पिछले कुछ समय से ओजोन थेरेपी ले रहे हैं, जिससे उन्हें कैंसर की समस्या में राहत मिल रही है। पिछले पांच माह में ओजोन थेरेपी लेने वाले मरीज माह     मरीज अगस्त     41 सितंबर     102 अक्टूबर     46 नवंबर     24 दिसंबर     19 (अब तक) अन्य बीमारियों में भी सहायक यह थेरेपी अन्य बीमारियों में भी सहायक है। थेरेपी द्वारा शरीर की कोशिकाएं अधिक आक्सीजन अवशोषित करती हैं, जिससे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अस्पताल की यूनिट में डॉ. श्वेता वर्मा, डॉ. शेखर पटेल, भारत प्रजापति, कमलेश पटेल एवं निशा मालवीय मरीजों का इलाज कर रहे हैं। तीन हजार वर्ष पुरानी पद्धति विशेषज्ञों का कहना है कि यह चिकित्सा पद्धति नई नहीं है। लगभग तीन हजार वर्ष पहले पतंजलि योग सूत्रों में भी प्राणायाम के माध्यम से शरीर में ऑक्सीजन बढ़ाने की बात कही गई थी। आधुनिक यूरोपीय देशों में ओजोन थेरेपी का लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है और इसे विज्ञानी रूप से लाभकारी माना गया है। सप्ताह में दो दिन की जाती है थेरेपी     ओजोन, ऑक्सीजन का एक सक्रिय रूप है, जो शरीर के रक्त, लसिका और ऊतकों में जाकर कोशिकाओं से जुड़ता है। इस थेरेपी में एक विशेष मशीन के माध्यम से शरीर में ऑक्सीजन प्रवाहित की जाती है। इससे कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने, शरीर को डिटॉक्स करने और घावों को भरने में सहायता मिलती है। यह थेरेपी सप्ताह में दो दिन दी जाती है। – डॉ. अखिलेश भार्गव, विभागाध्यक्ष, शल्य तंत्र विभाग  

महाकाल महालोक बनने के बाद महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं और दान की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी, 5.5 करोड़ भक्तों ने किए दर्शन

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर साल 2025 मे भी देश-विदेश के आस्थावानों का प्रमुख केंद्र रहा। एक जनवरी 2025 से अब तक 5.5 करोड़ दर्शनार्थियों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। इसी के साथ मंदिर में 100 करोड़ रुपये से अधिक का दान भी आया। करीब 13 करोड़ रुपये का सोना-चांदी भी भेंट के रूप में प्राप्त हुआ है। कुल मिलाकर यह गत वर्ष की तुलना में अधिक है। बीते वर्ष 92 करोड़ रुपये दान के रूप में प्राप्त हुए थे। 12 ज्योतिर्लिंग में से एक बाबा महाकाल का धाम लाखों करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है। वर्ष 2025 में बाबा महाकाल के धाम में धन वर्षा का हैरान कर देने वाला आंकड़ा सामने आया है। एक अरब रुपये से अधिक का दान मंदिर समिति को वर्ष भर में अलग-अलग माध्यमों से मिला है। मंदिर समिति के अनुसार एक जनवरी 2025 से 15 दिसंबर 2025 तक 5.50 करोड़ श्रद्धालुओं ने साल भर में यह दान राशि अलग-अलग माध्यमों से दी है। प्रत्येक वर्ष श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के द्वारा यह आंकड़ा मंदिर समिति द्वारा जारी किया जाता है। महाकाल महालोक बनने के बाद से लगातार दान में भी बढ़ोतरी हुई है। यह सभी दान राशि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुविधा सुगम दर्शन व्यवस्थाओं में उपयोग में ली जाती है। बाबा महाकाल का दरबार मंदिर समिति अध्यक्ष और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया की साल भर में जो सावन का महीना था। उसी में लगभग 30 करोड़ का दान मंदिर समिति को मिला है। जिससे समझ में आता है कि प्रत्येक वर्ष दान राशि मंदिर में बढ़ रही है, क्योंकि पिछले वर्ष सावन के महीने में यह आंकड़ा 21-22 करोड़ का था। ऐसे में साल भर का जो आंकड़ा आया है। वह वाकई हैरान करता है। मंदिर समिति इसी दान राशि से अपनी तमाम व्यवस्थाओं को संचालित करती है। पिछले साल 2024 में जो दान राशि थी, वह लगभग 92 करोड़ रुपये की थी इस बार अधिक है। पिछले वर्ष की तुलना में 15 करोड़ अधिक दान मिला है। यानि इस बार 1 अरब 07 करोड़ 93 लाख है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि बीते 11 महीने 15 दिनों में कुल 107 करोड़ 93 लाख की आय दान पेटी और शीघ्र दर्शन, आभूषणों के माध्यम से हुई है। जिसमें 592.366 किलो चांदी, 1483.621 ग्राम सोना, जिनकी कीमत लगभग 13 करोड़ से अधिक है। साल भर में अभी 2 दिन शेष है, ऐसे में उम्मीद है कि यह आंकड़ा और बढ़ेगा। प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया की 2025 में 1483.621 ग्राम सोना जो 2024 में 1533 ग्राम था, 592.366 ग्राम चांदी 2025 में जो 2024 में 399 किलो थी। यानी इस वर्ष चांदी का दान ज्यादा मिला है। 13 करोड़ से अधिक के आभूषण हैं। ऐसे ही नकद राशि 43 करोड़ 43 लाख, शीघ्र दर्शन से 64 करोड़ 50 लाख की राशि मिली है। महाकाल महालोक बनने के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या महाकाल मंदिर में श्री महाकाल महालोक बनने और अक्तूबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसका लोकार्पण करने के बाद से ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। पहले मंदिर में रोजाना 35 से 40 हजार श्रद्धालु आते थे। श्री महाकाल महालोक के बाद संख्या 80 हजार से एक लाख प्रतिदिन पहुंच गई। पर्व त्योहार जैसे श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि आदि पर ये संख्या दो लाख के पार हो जाती है। अनुमान है कि आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ेगी। एक नजर इस साल के आंकड़ों पर     5.5 करोड़ दर्शनार्थियों ने किए महाकाल दर्शन।     43 करोड़ रुपये विभिन्न दानपेटियों से भेंट के रूप में प्राप्त हुए।     64 करोड़ रुपये शीघ्र दर्शन व्यवस्था (टिकट) से मंदिर समिति को प्राप्त हुए।     13 करोड़ रुपये का सोना-चांदी भी भेंट स्वरूप मंदिर को मिला है। क्या शामिल क्या नहीं….? मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि 1 अरब से अधिक के दान में शीघ्र दर्शन, दान पेटी, लड्डू प्रसादी, नगद और आभूषणों को जोड़ा गया है। दान राशि में भस्म आरती बुकिंग, अभिषेक पूजन, अन्न क्षेत्र, धर्मशाला बुकिंग, फोटोग्राफी मासिक शुल्क, भांग एवं ध्वज बुकिंग उज्जैन दर्शन बस सेवा से होने वाली आय को शामिल नहीं किया गया है।  

गांव के आत्मनिर्भर होने से देश होगा आत्मनिर्भर: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, 21 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

गांव के आत्मनिर्भर होने से देश होगा आत्मनिर्भर : उप मुख्यमंत्री देवड़ा ग्राम पिपलिया कराड़िया में 21 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण मंदसौर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सोमवार को मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पिपलिया कराड़िया में लगभग 21 करोड़ रुपये की लागत से किए गए विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि गांव जब आत्मनिर्भर बनेंगे, तभी देश आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने ग्रामीणों से स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने, बच्चों एवं अभिभावकों को स्वच्छता अभियान में सहभागी बनाने तथा अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आज मल्हारगढ़ क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में सड़कों का व्यापक विकास हुआ है। सिंचाई, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, भवन एवं बिजली सहित प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे प्रदेश तेजी से प्रगति की ओर बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने 01 करोड़ 7 लाख रुपये की लागत से निर्मित पिपलिया कराड़िया गांव से हाईस्कूल पहुंच मार्ग एवं 01 करोड़ 77 लाख रुपये की लागत से निर्मित खण्डेरियामारू से नावनखेड़ी मार्ग का लोकार्पण किया। उन्होंने 7 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से लिलदा से नाहरगढ़ पित्याखेड़ी मार्ग का भूमि-पूजन किया। इसके साथ ही 6 करोड़ 90 लाख 97 हजार रुपये की लागत से निर्मित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सुरी तथा 1 करोड़ 99 लाख 90 हजार रुपये की लागत से निर्मित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पिपलिया कराड़िया का भी लोकार्पण किया। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम पाल्यामारु एवं ग्राम लीलदा में 65-65 लाख रुपये की लागत से निर्मित 2 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, जनपद अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधि के साथ जिले के अधिकारी भी उपस्थित रहे।  

भोपाल में पांच राज्यों की शैक्षिक लीडरशिप कार्यशाला का आयोजन, संचालक लोक शिक्षण ने किया शुभारम्भ

पांच राज्यों की शैक्षिक लीडरशिप कार्यशाला का आयोजन भोपाल में संचालक लोक शिक्षण ने किया कार्यशाला का शुभारम्भ भोपाल राष्ट्रीय शैक्षिक नेतृत्व परिषद (एनसीएसएल) नीपा द्वारा 5 राज्यों बिहार, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा तथा मध्यप्रदेश की लीडरशिप एकेडमी की समीक्षा एवं योजना निर्माण कार्यशाला का आयोजन भोपाल में एनसीएसल (नेशनल लीडरशिप एकेडमी) नीपा द्वारा जा रहा है। यह कार्यशाला समग्र शिक्षा अभियान, एससीईआरटी तथा सीमेट के योजना निर्माण तथा लीडरशिप संबंधी कार्यो के राज्यों में संपादित कार्यों का रिव्यू एवं आगामी योजना निर्माण के संबंध में आयोजित की जा रही है। भोपाल के अशोका लेकव्यू में 29 से 31 दिसम्बर 2025 तक संचालित होने वाली क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ संचालक लोकशिक्षण डी.एस. कुशवाह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सीमेट के संचालक एवं उप सचिव प्रमोद सिंह, नीपा नई दिल्ली की कार्यशाला प्रभारी डॉ. तृप्ति सिंह, डॉ. योगेश पहाड़िया, डॉ. पंकज सिंह भी उपस्थित थे। कार्यशाला में विभिन्न आमंत्रित राज्यों द्वारा अपने अपने राज्यों में संपादित अनुकरणीय कार्यो (बेस्ट प्रेक्टिसेस) का प्रस्तुतीकरण किया जा रहा है। कार्यशाला में प्रत्येक प्रदेश से 5 से 6 अधिकारियों की सहभागिता की जा रही है। एनसीएसएल नीपा द्वारा मध्यप्रदेश लीडरशिप एकेडमी की स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी। वर्तमान में यह लीडरशिप एकेडमी, सीमेट के माध्यम से संचालित है। इसका नामांकन वर्ष 2023-24 में किया गया था। लीडरशिप एकेडमी के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापक से लेकर राज्य स्तरीय अधिकारियों के लीडरशिप कार्यक्रमों, मॉड्यूल निर्माण और प्रशिक्षण आदि का संचालन संपादित किया जाता है। इसमें लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केन्द्र एवं जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा उपलब्ध कराये गये कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।