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युवाओं पर देश को विश्वगुरू बनाने की महती जिम्मेदारी: राज्यपाल मंगुभाई पटेल

राज्यपाल अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के दीक्षांत समारोह में हुए शामिल मानद उपाधियाँ ले. जनरल धीरेन्द्र सिंह कुशवाह और डॉ वाई.के. मिश्रा को भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 तक देश को विश्वगुरू और आधुनिकतम विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। युवाओं पर देश को विश्वगुरू बनाने की महती जिम्मेदारी है। युवा अपनी प्रतिभा, लगन और देशभक्ति से इस संकल्प पूरा करने के लिए दृढ़-प्रतिज्ञ रहे। राज्यपाल श्री पटेल बुधवार को अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के तेरहवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की। लेफ्टिनेंट जनरल धीरेन्द्र सिंह कुशवाह को डी. लिट तथा प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. युगल किशोर मिश्रा को डी.एस.ई. की मानद उपाधि प्रदान की। राज्यपाल श्री पटेल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के नव निर्मित रिसर्च, इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर का और विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकाशनों का लोकार्पण किया। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि विद्यार्थी दीक्षांत शपथ को आत्मसात करें। उसका आजीवन अनुसरण करें। शिक्षक, विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा देने के साथ ही भारतीयता के संस्कार और जीवन जीने की कला अवश्य सिखाएं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी देश के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और महापुरूषों के जीवन से प्रेरणा लें। राज्यपाल श्री पटेल ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय द्वारा रामायण पीठ की स्थापना की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि पीठ रामायण पर शोध करने वाले विद्यार्थियों और विद्वानों को नए अवसर प्रदान करेगी। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में देश के प्राचीन ज्ञान और परंपराओं का आधुनिक विज्ञान के साथ समावेश किया गया है। इससे देश की शिक्षा प्रणाली को भारतीयता का मजबूत आधार मिला है। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कारों की शिक्षा मिल रही है। समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरदास ने कहा कि जात-पात और धर्म का भेद मिटाकर हम सब सच्चे मन से भारतीय बनकर भारत माँ की सेवा करें। भारत के प्राचीन दर्शन और शिक्षा के महान संस्कारों को आत्मसात करें। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के समक्ष विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. राजेन्द्र कुमार कुड़रिया ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। समारोह में अतिथियों को स्मृति चिन्ह तथा शॉल-श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में श्री रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालय के आचार्यगण तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।                            

भोपाल में डॉ. बत्रा हेल्थकेयर का होम्योपैथिक और अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य क्लिनिक पुनः खुला

भोपाल विश्व स्तर पर होम्योपैथिक क्लीनिकों के सबसे बड़े नेटवर्क के साथ भारत की अग्रणी कंपनी डॉ. बत्रा हेल्थकेयर ने भोपाल में अपने अत्याधुनिक क्लिनिक के पुनः शुभारंभ की घोषणा की है। यह क्लिनिक 100 से अधिक तीव्र और दीर्घकालिक बीमारियों के लिए साक्ष्य-आधारित होम्योपैथी उपचार के साथ-साथ सुरक्षित, गैर-आक्रामक और दुष्प्रभाव-रहित उन्नत अंतरराष्ट्रीय स्तर के बाल और त्वचा सौंदर्य उपचार प्रदान करेगा। सभी उपचार प्रक्रियाएं और प्रोटोकॉल वैश्विक चिकित्सा मानकों के अनुरूप हैं। उद्घाटन समारोह में मंत्री सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश शासन विश्वास सारंग और होम्योपैथिक कॉस्मेटोलॉजी एवं एस्थेटिक्स में फेलोशिप प्राप्त तथा डॉ. बत्राज® हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक डॉ. अक्षय बत्रा उपस्थित थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, होम्योपैथी विश्व स्तर पर चिकित्सा की दूसरी सबसे बड़ी प्रणाली है, और भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग अपने स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी जरूरतों के लिए इस पर निर्भर हैं। वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचारों से समर्थित डॉ. बत्राज® नाम होम्योपैथी का पर्याय है। पद्मश्री डॉ. मुकेश बत्रा द्वारा 1982 में एक रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा संस्थान के रूप में स्थापित, डॉ. बत्राज® हेल्थकेयर ने 91% की सफलता दर के साथ 15 लाख से अधिक रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज किया है, जैसा कि अमेरिकी गुणवत्ता मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा प्रमाणित किया गया है। भोपाल क्लिनिक व्यक्तिगत, सुरक्षित और प्रभावी देखभाल के प्रति ब्रांड की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।   डॉ. बत्रा भोपाल क्लिनिक विज्ञान-समर्थित उपचार प्रदान करेगा जो न केवल समस्या के मूल कारण का इलाज करते हैं बल्कि होम्योपैथी को उन्नत बाल और त्वचा सौंदर्य उपचारों के साथ मिलाकर तेजी से परिणाम भी देते हैं। इस पुनः लॉन्च के अवसर पर, डॉ. बत्राज® ने अपना नया डॉ. बत्राज® ज़ोडर्मा भी प्रदर्शित किया, नुकसान रहित, सुरक्षित और दुष्प्रभाव-मुक्त त्वचा सौंदर्य उपचार है, यह अपनी तरह का पहला त्वचा कायाकल्प उपचार है जो हाइपरपिग्मेंटेशन, बढ़ती उम्र के धब्बे, महीन रेखाएं आदि जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए होम्योपैथी और एक्सोसोम को संयोजित करता है। इस अभिनव उपचार से, मरीज़ मात्र 3 सत्रों में ही स्पष्ट परिणाम देख सकते हैं। बाल गिरने/झड़ने जैसी समस्याओं के लिए, डॉ. बत्राज® XOGEN एडवांस पेश करते हैं, जो भारत का पहला केश पुनर्जनन उपचार है और 10 बिलियन एक्सोसोम से युक्त है। यह उन्नत अंतरराष्ट्रीय उपचार एक शक्तिशाली एक्सोसोम-आधारित फॉर्मूलेशन का उपयोग करता है जो निष्क्रिय बालों के रोमों को सक्रिय करता है और जड़ों से बालों के पुनर्जनन को सक्षम बनाता है। यह अत्यधिक लक्षित उपचार पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए उपयुक्त है और आनुवंशिक बाल झड़ने की समस्या का समाधान करने वाले उपलब्ध कुछ उपचारों में से एक है। 95%+ सफलता दर के साथ, रोगियों ने मात्र 4 सत्रों में ही स्पष्ट परिणाम देखे हैं। डॉ. बत्रा विभिन्न त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे सोरायसिस, विटिलिगो, एक्जिमा आदि के लिए अत्यधिक व्यक्तिगत और प्रभावी होम्योपैथिक उपचार भी प्रदान करता है। डॉ. बत्राज® हेल्थकेयर न्यूयू रेंज के त्वचा सौंदर्य उपचारों में त्वचा  का कसाव, चमक, साफ करना, कायाकल्प करना और लेजर हेयर रिमूवल शामिल हैं। ये सभी उपचार पूरी तरह से सुरक्षित, नुकसान रहित और बिना किसी दुष्प्रभाव के हैं। डॉ. बत्राज® ऑक्सीलंग (श्वसन संबंधी समस्याओं के लिए), एलर्जोन (एलर्जी के लिए), बीफिट शुगरकंट्रोल (मधुमेह प्रबंधन के लिए), बीफिट वेट कंट्रोल (वजन घटाने के लिए), माइंडफिट (तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए) और पीसीओएस प्रबंधन कार्यक्रम जैसे अनुकूलित उपचार भी प्रदान करते हैं। क्लिनिक के पुनः शुभारंभ के अवसर पर मंत्री सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश शासन   विश्वास सारंग ने कहा, “इस पुनः शुभारंभ का हिस्सा बनकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है। मैं डॉ. बत्राज® की टीम को भारत और विश्वभर में होम्योपैथिक उपचारों का अगुआ बनने और निरंतर तकनीकी प्रगति के साथ इसे और अधिक सशक्त बनाने के लिए बधाई देता हूं। मैं डॉ. बत्राज® के ' हीलिंग पीपुल, चेंजिंग लाइफ (लोगों का स्वास्थ्य सुधारना, जीवन बदलना)' के दृष्टिकोण से भी प्रभावित हूं, जो सभी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा विकल्प उपलब्ध कराता है। मुझे पूरा विश्वास है कि डॉ. बत्राज® की विशेषज्ञता और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण से भोपाल के लोगों को अत्यधिक लाभ होगा और उन्हें उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त होंगे।” होम्योपैथिक कॉस्मेटोलॉजी और एस्थेटिक्स में फेलोशिप प्राप्त  और डॉ. बत्रा हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक डॉ. अक्षय बत्रा ने कहा, “हमें भोपाल में अपने क्लिनिक के पुनः शुभारंभ की घोषणा करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह भारत भर में अधिक से अधिक लोगों तक सुरक्षित, प्रभावी और विश्व स्तरीय होम्योपैथिक देखभाल पहुँचाने के हमारे मिशन को और मजबूत करता है। डेढ़ दशक से अधिक समय से इस शहर की सेवा करते हुए, हम इस क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऐसी ही एक समस्या मध्य प्रदेश में वेक्टर जनित रोगों का बढ़ता प्रकोप है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अध्ययन के अनुसार, चिकनगुनिया के मामले 2024 में 3% से बढ़कर 2025 में 6% हो गए हैं। राज्य में भारत भर में दर्ज किए गए कुल डेंगू मामलों में 2% से अधिक का योगदान भी है। डॉ. बत्राज® में, हम होम्योपैथी के सर्वोत्तम तरीकों को अत्याधुनिक वैश्विक सौंदर्य तकनीकों के साथ एकीकृत करने के लिए निरंतर नवाचार कर रहे हैं। यह क्लिनिक न केवल भोपाल के रोगियों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि उन्हें बालों और त्वचा के लिए समग्र और दुष्प्रभाव-मुक्त उन्नत समाधान भी प्रदान करेगा।” डॉ. बत्राज® भोपाल क्लिनिक स्थित है: 11, अलंकार कॉम्प्लेक्स, दूसरी मंजिल, जोन-II, महाराणा प्रताप नगर, भोपाल, मध्य प्रदेश 462011।

नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की जानकारी अब ‘प्रेक्षा ऐप’ से देंगे प्रेक्षक

प्रेक्षक प्रेक्षा ऐप से देंगे नगरीय निकाय और पंचायत निर्वाचन संबंधी जानकारी भोपाल राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकायों एवं त्रि-स्तरीय पंचायतों के उप निर्वाचन के लिये नियुक्त प्रेक्षकों की सुविधा के लिये 'प्रेक्षा' ऐप बनाया गया है। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह ने जानकारी दी है कि इस मोबाइल ऐप में प्रेक्षकों को प्रतिवेदन भेजने, नियमों एवं निर्देशों को पढ़ने एवं निर्वाचन प्रक्रियाओं के प्रशिक्षण संबधी जानकारी की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस ऐप को और अधिक उपयोगी बनाने के लिये प्रेक्षकों से सुझाव भी मांगे गये हैं। मोबाइल ऐप में प्रेक्षकों द्वारा भेजी जाने वाली जानकारी का प्रारूप उपलब्ध है। इसमें से अधिकांश जानकारी हाँ/नहीं के रूप में दी जा सकेगी। कुछ बिन्दुओं में संक्षिप्त टीप लिखनी है। यह जानकारी एक क्लिक से राज्य निर्वाचन आयोग भेजी जा सकेगी।  

नेशनल पार्क की खास पेशकश: बांधवगढ़ में सीमित समय के लिए फ्री सफारी

उमरिया   बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफारी की इच्छा रखने वालों के लिए गुड न्यूज है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 17 दिसंबर बुधवार से 1 सप्ताह के लिए टाइगर सफारी फ्री रहेगी. नेशनल पार्क के प्रबंधन ने ज्वालामुखी गेट से टाइगर सवारी के लिए प्रवेश निशुल्क कर दिया गया है. हालांकि, इसे लेकर कुछ नियम और शर्तें भी बताई गई हैं. ज्वालामुखी गेट में नो एंट्री फीस बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने पत्र जारी करते हुए बताया, '' पर्यटन व स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ज्वालामुखी बफर जोन के लिए ये फैसला लिया गया है. पार्क भ्रमण के लिए जिप्सी से प्रवेश पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. ये संपूर्ण जिप्सी के टिकट लेने पर प्रभाव प्रभावित होगा, ये सुविधा 17 दिसंबर से 23 दिसंबर एक सप्ताह तक सुबह और दोपहर पार्क भ्रमण पर प्रभावी रहेगी. हालांकि, जारी पत्र में उन्होंने ये भी कहा है कि जिप्सी और गाइड का शुल्क प्रचलित नियमानुसार देना होगा. ये सुविधा पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दी जाएगी. इसके लिए टिकट काउंटर से संपर्क कर फ्री सेवा हासिल कर सकते हैं. साथ ही ये भी कहा गया है कि ये सुविधा सिर्फ ज्वालामुखी गेट के ऑफलाइन काउंटर से बुकिंग वाहनों के लिए उपलब्ध है. खास है बांधवगढ़ का ज्वालामुखी गेट बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ज्वालामुखी गेट बफर जोन में है और यहां पर मांसाहारी व शाकाहारी हर तरह के वन्य प्राणी देखने को मिलते हैं. इसके अलावा यहां प्रकृति का अद्भुत मनोरम दृश्य भी देखने को मिलता है. अगर आप भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व घूमने जाने वाले हैं, तो इस ऑफर का आनंद ले सकते हैं. बाघों का गढ़ है बांधवगढ़ नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों का गढ़ कहा जाता है, और यहां पर काफी संख्या में बाघ पाए जाते हैं. इसके अलावा अब तो ये हाथियों के भी पर्यटन का बड़ा जोन बन चुका है. पिछले कुछ सालों से काफी संख्या में यहां हाथी भी स्थाई रूप से रह रहे हैं, और पर्यटकों के रोमांच का कारण बन रहे हैं. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में टाइगर्स के अलावा कई तरह के शाकाहारी, मांसाहारी जीवों के साथ प्रकृति का अद्भुत मनोरम दृश्य भी देखने मिलता है. यहां अद्भुत वादियां, जंगल झरने, नदी तालाब और पुरातात्विक महत्व की चीजें भी देखने को मिलती हैं.

स्वच्छता और इनोवेशन में आगे इंदौर: पुराने कपड़े धागे में, पशु शवों का सुरक्षित प्रबंधन

इंदौर  स्वच्छता और नवाचार में देश को दिशा दिखाने वाला इंदौर अब शहरी प्रबंधन के नए अध्याय लिखने की ओर बढ़ रहा है। नगर निगम ने कचरे को संसाधन में बदलने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक साथ कई बड़े कदम उठाए हैं। शहर में जहां अब पुराने कपड़ों से धागा तैयार कर पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं मृत पशुओं को दफनाने की परंपरा को समाप्त कर उन्हें अत्याधुनिक संयंत्र में सम्मानजनक अग्निदाह की व्यवस्था की जा रही है। ट्रेंचिंग ग्राउंड परिसर में आधुनिक फायर स्टेशन भी इसके साथ ही नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेंचिंग ग्राउंड परिसर में एक आधुनिक फायर स्टेशन भी विकसित किया जाएगा। ये सभी परियोजनाएं पीपीपी मोड पर स्थापित की जा रही हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड पर इन नवाचारी परियोजनाओं का भूमिपूजन कर इंदौर को टिकाऊ, सुरक्षित और भविष्य के शहर के रूप में आगे बढ़ाने का संदेश दिया। इस अवसर पर महापौर ने कहा कि इंदौर का ट्रेंचिंग ग्राउंड न केवल देश, बल्कि दुनिया में सबसे अधिक सर्च और अध्ययन किया जाने वाला स्थल बन चुका है। हमारे नवाचार ही हमारी असली ताकत हैं। इंदौर वेस्ट टू वेल्थ की दिशा में आगे बढ़ रहा है अनुपयोगी कपड़ों से धागा बनाने, मृत पशुओं और मीट अपशिष्ट का पर्यावरण अनुकूल निपटान करने जैसे कार्य इंदौर को स्वच्छता के अगले स्तर पर ले जाएंगे। भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर परिषद सदस्य अश्विनी शुक्ल, अभिषेक शर्मा बबलू, नंदकिशोर पहाड़िया, मनीष शर्मा मामा, नगर निगम के अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान 16 दिसंबर विजय दिवस के अवसर पर महापौर ने उपस्थित सेवानिवृत्त सैनिकों का सम्मान भी किया। कचरे से संसाधन रोजाना 25 टन पुराने कपड़ों से बनेगा धागा नगर निगम ने शहर के सभी जोन क्षेत्र में थ्री-आर सेंटर स्थापित किए हैं। इन पर रोजाना बड़ी मात्रा में नागरिक पुराने कपड़े देते हैं। इसके अलावा नेकी की दीवार पर भी बड़ी मात्रा में अनुपयोगी कपड़े एकत्र होते हैं। इन पुराने कपड़ों से धागा बनाने के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड पर पीपीपी मोड पर पुराने कपड़ों से धागा बनाने का संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। पशु शवदाह स्थापित किया जा रहा दुर्गंध और प्रदूषण से भी मिलेगी राहत नगरीय सीमा में रोजाना करीब 50 पशुओं की मृत्यु होती है। इन पशुओं के शव को फिलहाल ट्रेंचिंग ग्राउंड लाकर दफनाया जाता है। इसके अलावा शहरभर से एकत्र होने वाले मीट अपशिष्ट को भी ट्रेंचिंग ग्राउंड लाया जाता है। यहां जमीन में गड्ढा कर अपशिष्ट को गाढ़ा जाता है। इससे उठने वाली बदबू से वायु प्रदूषण होता है। भूजल भी दूषित होता है। इससे बचने के लिए अब पीपीपी मोड पर पशुओं के शव के लिए शवदाह स्थापित किया जा रहा है। आग पर काबू अब मिनटों में देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड में नया फायर स्टेशन शहर के पूर्वी क्षेत्र में अग्निशमन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड परिसर में नया फायर स्टेशन विकसित करने जा रहा है। पालदा और नेमावर रोड क्षेत्र में पिछले दो दशक में बड़ी संख्या में रहवासी कॉलोनियां विकसित हुई हैं। हजारों की संख्या में लोग इन क्षेत्रों में रह रहे हैं। आग लगने की स्थिति में दमकलों को कई किमी दूर स्थित फायर स्टेशन से बुलाना पड़ता है। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर फायर स्टेशन विकसित होने से दमकलें कुछ ही मिनट में मौके पर पहुंच सकेंगी।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विधानसभा की गौरवशाली यात्रा पर दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विधानसभा की गौरवशाली यात्रा के दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का किया शुभारंभ विधानसभा के विशेष सत्र के अवसर पर विधानसभा के इतिहास और प्रदेश के विकास पर आधारित है प्रदर्शनी भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बुधवार को विधानसभा के विशेष सत्र के अवसर पर “मध्यप्रदेश विधानसभा के 1956 से 2025 तक के इतिहास के पल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का "अभ्युदय मध्यप्रदेश- विकास और सेवा के दो वर्ष” विषय पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार एवं अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने “मध्यप्रदेश विधानसभा के 1956 से 2025 तक के इतिहास के पल” प्रदर्शनी का फीता खोल कर शुभारंभ किया। उन्होंने विधानसभा के सेंट्रल हॉल में आयोजित चित्र प्रदर्शनी के एलबम का भी लोकार्पण किया और प्रदर्शनी के चित्रों का अवलोकन किया। उन्होंने ऐतिहासिक, दुर्लभ चित्र संकलन और प्रस्तुतिकरण की सराहना की। राज्यपाल पटेल ने इस अवसर पर जनसंपर्क विभाग द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का "अभ्युदय मध्यप्रदेश- विकास और सेवा के दो वर्ष” विषय पर आयोजित चित्र प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल के विधानसभा आगमन पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर मंत्रीगण, विधायक और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रथम सत्र के 70 वर्षों के उपलक्ष्य में विशेष सत्र का आयोजन किया गया है। मध्यप्रदेश विधानसभा के सात दशकों की गौरवशाली यात्रा के दुर्लभ चित्रों की आकर्षक प्रदर्शनी विधानसभा के सेंट्रल हॉल में लगाई गई है। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश विधानसभा के 1956 से 2025 तक के इतिहास के 135 दुर्लभ चित्रों का संयोजन किया गया है। इसी तरह जनसंपर्क विभाग द्वारा विधानसभा प्रांगण में 90 पेनलों की आकर्षक विकास प्रदर्शनी लगाई गई है।  

मोहन सरकार का बड़ा फैसला: उज्जैन की लैंड पूलिंग योजना अब नहीं चलेगी

उज्जैन    किसानों और स्थानीय स्तर पर भारी विरोध के बाद आखिरकार सरकार ने उज्जैन के सिंहस्थ क्षेत्र की लैंड पूलिंग योजना को मंगलवार देर रात निरस्त कर दिया। अब सिंहस्थ क्षेत्र में ठीक उसी तरह से व्यवस्था होगी, जैसे अब तक होती आई है।लैंड पूलिंग योजना में सरकार ने सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी निर्माण के लिए किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के तहत लेने का प्रावधान किया था। इसमें किसानों को भूमि का एक हिस्सा विकसित करके दिया जाता और शेष का मुआवजा मिलता लेकिन इसके लिए वे तैयार नहीं थे। शासन ने आदेश को राजपत्र (गजट) में प्रकाशित भी कर दिया है। यह निर्णय भारतीय किसान संघ के 26 दिसंबर से उज्जैन में ‘घेरा डालो–डेरा डालो’ आंदोलन की चेतावनी के बाद लिया गया है। किसान संघ ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक लैंड पूलिंग नीति को पूरी तरह निरस्त करने का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। आंदोलन की घोषणा के बाद सरकार और किसान संगठनों के बीच टकराव की स्थिति लगातार गहराती जा रही थी। दरअसल, सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास योजनाओं के अंतर्गत किसानों की भूमि को लैंड पूलिंग के माध्यम से विकसित करने का प्रस्ताव था। इस नीति के तहत जमीनों के अधिग्रहण और पुनर्विकास को लेकर किसानों में भारी असंतोष था। किसान संगठनों का आरोप था कि यह नीति उनकी सहमति के बिना लागू की जा रही है और इससे उनकी जमीनों पर स्थायी असर पड़ेगा। 19 नवंबर का आदेश सिर्फ संशोधन था भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने कहा था कि 19 नवंबर को जारी आदेश केवल संशोधन था, निरस्तीकरण नहीं। इसके बाद प्रदेश के 18 जिलों के किसान प्रतिनिधियों की बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया गया। किसानों ने एलान किया था कि 26 दिसंबर से विक्रमादित्य प्रशासनिक भवन का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। अब शासन द्वारा लैंड पूलिंग योजना को पूरी तरह निरस्त किए जाने को किसान आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है।   उज्जैन लैंड पूलिंग पॉलिसी यह थी उज्जैन लैंड पूलिंग पॉलिसी दरअसल सिंहस्थ कुंभ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) द्वारा प्रस्तावित एक शहरी विकास योजना थी। इसके तहत शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी मात्रा में किसानों की निजी जमीन को एक साथ पूल (एकत्र) कर सुनियोजित तरीके से विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। यानी सरकार जमीनों को अधिग्रहित कर सड़क, सीवर, ड्रेनेज, बिजली, पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं का विकास, सिंहस्थ के लिए स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना, उज्जैन के विस्तार को मास्टर प्लान के तहत विकसित करना था।  योजना में किसानों को क्या दिया जाना था? किसानों से जमीन लेकर उसे विकसित करने के बाद विकसित भूमि का एक हिस्सा (कम लेकिन अधिक मूल्य वाला) किसान को लौटाने का प्रावधान रखा गया था। शेष भूमि पर शासन/प्राधिकरण द्वारा शहरी विकास में उपयोग की थी।  किसान संगठन क्यों नाराज हुए? भारतीय किसान संघ समेत अन्य किसान संगठनों को जमीन पर स्थायी नियंत्रण खत्म होने का डर था। किसानों का कहना था कि एक बार जमीन लैंड पूलिंग में चली गई तो उस पर उनका  अधिकार कमजोर हो जाएगा। कितनी जमीन लौटेगी, कब लौटेगी और किस कीमत पर इस पर स्पष्ट और कानूनी भरोसा नहीं था। किसानों का तर्क था कि यह अधिग्रहण जैसा ही है, लेकिन बिना सीधा मुआवजा दिए। इसमें आरोप लगे कि कई जगह किसानों की स्पष्ट सहमति के बिना योजना लागू करने की तैयारी थी। किसान संगठनों का कहना था कि सिंहस्थ अस्थायी आयोजन है, लेकिन इसके नाम पर जमीन की स्थायी योजना बनाई जा रही थी।   भाजपा विधायक ने भी किया योजना का विरोध  उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने लैंड पूलिंग योजना को लेकर अपनी ही सरकार के फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा है कि यह योजना किसानों के हित में नहीं है और इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। विधायक जैन ने लिखा कि 17 नवंबर को भोपाल में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई बैठक में योजना वापस लेने का निर्णय लिया गया था, जिसके बाद किसान संघ ने उत्सव रैली भी निकाली थी। इसके बावजूद यदि योजना लागू मानी जा रही है और किसान 26 दिसंबर से आंदोलन करने को मजबूर हैं, तो वे स्वयं भी किसानों के समर्थन में आंदोलन में शामिल होंगे। विधायक के इस रुख से लैंड पूलिंग योजना को लेकर भाजपा के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा था मामला किसान संघ और स्थानीय संगठन सिंहस्थ के नाम पर लैंड पूलिंग के माध्यम से किसानों की जमीन लेने का विरोध कर रहे थे। बात पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अधिकारियों के साथ पहुंचे और बैठकों के कई दौर चले। सरकार की ओर से सिहंस्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का हवाला देकर व्यवस्था बनाने की बात रखी गई तो अन्य कुंभ का उदाहरण देकर लैंड पूलिंग के बिना व्यवस्था बनाए जाने की बात उठी। उधर, किसान पूरी तरह से लैंड पूलिंग योजना को निरस्त करने पर अड़े थे। सरकार ने पहले प्रयास किया था कि किसानों की सहमति से लैंड पूलिंग की जाए, लेकिन भारतीय किसान संघ का कहना था कि किसानों की भूमि स्थायी निर्माण के लिए लेने से उनकी आजीविका का साधन समाप्त हो जाएगा। यह होता उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में लगभग 2,800 हेक्टेयर भूमि है। इसमें साढ़े आठ सौ हेक्टेयर शासकीय और शेष निजी भूमि है। सरकार बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए यहां जन सुविधा की दृष्टि से स्थायी निर्माण करना चाहती थी। इसके लिए किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के तहत लेना प्रस्तावित था। इसमें जिसकी भूमि ली जाती, उसे एक निश्चित क्षेत्र में स्थायी निर्माण करके सरकार देती और बाजार मूल्य से शेष भूमि का भुगतान भी किया जाता। भाजपा विधायक की भी असहमति उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने भी योजना से असहमति जताई थी। उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि किसान हित में लैंड पूलिंग योजना निरस्त होनी चाहिए। … Read more

दुग्ध किसानों को राहत: 17 दिसंबर से संपर्क अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ

17 दिसंबर से दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी जाएंगे पशुपालक किसानों के घर-घर पशु पोषण, नस्ल सुधार और पशुओं के स्वास्थ्य से संबंधित देंगे जानकारी भोपाल  प्रदेश में पशुपालकों, किसानों की आय बढ़ाने व दुग्ध उत्पादन वृद्धि के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है, जिसके द्वितीय चरण का शुभारंभ 17 दिसंबर, 2025 से होने जा रहा है। अभियान अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, पशुपालकों और किसानों के घर जाएंगे, जहां पशुपालकों को पशुओं में नस्ल सुधार, पशु पोषण तथा पशु स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी देंगे। अभियान में मंत्रीगण, विधायक व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी सहभागिता रहेगी। गांवों में पहुंचेगा विभागीय अमला द्वितीय चरण में प्रदेश के सभी गांवों में दुधारू पशु रखने वाले पशुपालकों से सीधे संपर्क कर संवाद किया जाएगा। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक विकासखंड से एक पशु चिकित्सक को मास्टर ट्रेनर के रूप में राज्य स्तर पर प्रशिक्षित किया गया है। प्रथम चरण में 3 लाख 76 हजार पशुपालकों के घर विभागीय अधिकारी पहुंचे थे और उन्हें अभियान से संबंधित सूचनाओं व सुविधाओं लाभान्वित किया था। दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का प्रथम चरण 3 से 9 अक्टूबर के मध्य संचालित हुआ, जिसमें 3.76 लाख पशुपालकों के यहां 8752 प्रशिक्षित विभागीय अमला घर पहुंचा था। अभियान की निगरानी के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। कलेक्टर नियमित रूप से अभियान की समीक्षा करेंगे। साथ ही राज्य स्तर पर जानकारी साक्षा की जाएगी। अभियान के द्वितीय चरण के लिए राज्य पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान भोपाल में 18 से 24 नवंबर के मध्य लगभग 428 पशु चिकित्सक (प्रत्येक जिले के प्रत्येक विकासखण्ड के पशु चिकित्सक, जिला नोडल अधिकारी, राज्य नोडल अधिकारी) का प्रशिक्षण मल्टीमॉडल तथा तीनों पहलू पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार में गतिविधि बेस कराया गया और इन प्रशिक्षित मास्टर नोडल द्वारा इसी प्रकार प्रशिक्षण अपने जिलें एवं विकासखण्ड में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी, मैत्री एवं गोसेवक को दिया गया। दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के द्वितीय चरण में 5 से 9 गौवंश एवं भैंसवंश रखने वाले 7.87 लाख पशुपालकों के यहां प्रशिक्षित विभागीय अमले द्वारा घर जाकर भेंट की जाएगी। साथ ही उन्हें नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर जागरूक किया जाएगा।  

पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक विजेता आरक्षक सौदान सिंह चौहान की डीजीपी कैलाश मकवाणा से सौजन्य भेंट

डीजीपी कैलाश मकवाणा से पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक विजेता आरक्षक सौदान सिंह चौहान ने की सौजन्य भेंट डीजीपी ने दी बधाई भोपाल  डीजीपी कैलाश मकवाणा से  पुलिस मुख्यालय में पावरलिफ्टिंग की क्लासिक बेंच प्रेस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता आरक्षक सौदान सिंह चौहान ने भेंट की। मध्यप्रदेश पुलिस के जिला पुलिस लाइन उज्जैन में पदस्थ आरक्षक सौदान सिंह चौहान ने पावरलिफ्टिंग की क्लासिक बेंच प्रेस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अर्जित किया हैं। उन्‍होंने यह पदक क्लासिक बेंच प्रेस प्रतियोगिता में 82 किग्रा भार वर्ग में हासिल किया है। डीजीपी मकवाणा ने आरक्षक को स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई एवं निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने के लिये शुभकामनायें दीं। उन्होंने कहा कि पुलिस अपनी शारीरिक क्षमताओं को बढ़ाते हुए व्यावसायिक दक्षता भी सिद्ध कर रही है। डीजीपी ने कहा कि पुलिस बल के कर्मचारी जब खेलों में इस प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं, तो यह पूरे विभाग के मनोबल को सुदृढ़ करता है।       उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पावरलिफ्टिंग एसोसिएशन द्वारा आयोजित क्लासिक बेंच प्रेस प्रतियोगिता का आयोजन 23–24 नवंबर 2025 को उज्जैन में किया गया था। इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पूरे मध्यप्रदेश से 400 से अधिक खिलाड़ियों ने सहभागिता की। आरक्षक सौदान सिंह चौहान ने 82 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।    ऑल इंडिया क्लासिक बेंच प्रेस प्रतियोगिता  7 से 11 जनवरी तक फरीदाबाद, हरियाणा में आयोजित होगी। इस ऑल इंडिया क्लासिक बेंच प्रेस प्रतियोगिता में आरक्षक सौदान सिंह चौहान मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों से पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी  सहित लगभग 800 खिलाड़ी भाग लेंगे।       आरक्षक सौदान सिंह चौहान ने विश्वास व्यक्त किया है कि वे आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश के लिए स्वर्ण पदक अर्जित करने का हरसंभव प्रयास करेंगे।  

पर्यटन क्विज भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम : मंत्री लोधी

मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज-2025 : खरगोन जिले ने पाया प्रथम स्थान, सीहोर द्वितीय एवं निवाड़ी रहे तृतीय पर्यटन क्विज भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम : मंत्री लोधी विद्यार्थियों की जिज्ञासा और उत्साह प्रदेश पर्यटन के लिए शुभ संकेत : अपर मुख्य सचिव शुक्ला भोपाल मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक विरासत से नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से पर्यटन बोर्ड द्वारा आयोजित 'राज्य स्तरीय पर्यटन क्विज-2025' का कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में गरिमामय समापन हुआ। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में खरगोन जिले के सीएम राइज स्कूल, महेश्वर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, सीहोर जिले के नूतन बाल विद्या मंदिर ने द्वितीय और निवाड़ी जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, तरीचरकलां ने तृतीय स्थान हासिल कर अपने जिलों का गौरव बढ़ाया। भावी ब्रांड एम्बेसडर तैयार कर रही यह प्रतियोगिता पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि, "पर्यटन क्विज मात्र एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि प्रदेश की भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक अनुष्ठान है। जब हमारे विद्यार्थी प्रदेश की धरोहरों, कला और संस्कृति को गहराई से जानते हैं, तो वे भविष्य में मध्यप्रदेश पर्यटन के सच्चे 'ब्रांड एम्बेसडर' बनते हैं। सरकार का यह प्रयास है कि पर्यटन के माध्यम से युवाओं में अपने प्रदेश के प्रति गौरव का भाव निरंतर प्रबल हो।" ज्ञान और पर्यटन का अद्भुत संगम अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व शिव शेखर शुक्ला ने आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि, "इस वर्ष 24 हजार से अधिक विद्यार्थियों की प्रत्यक्ष भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के युवाओं में अपनी विरासत को जानने की उत्कंठा बढ़ रही है। यह क्विज लर्निंग विथ ट्रैवल की अवधारणा को चरितार्थ करती है। हमारा उद्देश्य है कि विद्यार्थी किताबी ज्ञान से बाहर निकलकर प्रदेश के नैसर्गिक और ऐतिहासिक सौंदर्य को साक्षात अनुभव करें। रोचक राउंड्स और विजेताओं का सम्मान पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविन्द बेडेकर ने बताया कि इस वर्ष क्विज में नवाचार करते हुए तमिलनाडु की संस्था 'क्विज केटेलिस्ट' द्वारा प्रतियोगिता को विभिन्न तकनीकी और दृश्य-श्रव्य (ऑडियो-विजुअल) राउंड्स के माध्यम से अत्यंत रोचक बनाया गया। कार्यक्रम में विजेताओं को मेडल तथा नि:शुल्क टूर पैकेज के कूपन प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही, राज्य स्तर पर पहुँचे सभी 53 जिलों के 159 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 से निरंतर (कोविड काल को छोड़कर) आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता ने अब तक प्रदेश के 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों को पर्यटन से जोड़ने का कार्य किया है। आयोजन को सफल बनाने में स्कूल शिक्षा विभाग, स्वराज संस्थान, विक्रमादित्य शोध संस्थान उज्जैन एवं दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। विद्यार्थियों के मार्गदर्शन हेतु डॉ. राजीव अग्रवाल द्वारा एक विशेष प्रेरणा सत्र भी आयोजित किया गया।