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ग्वालियर व्यापार मेले में डबल धमाल, ऑटोमोबाइल ही नहीं इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर भी रहेगा आकर्षण का केंद्र

ग्वालियर ग्वालियर व्यापार मेला 120 साल से अधिक पुराना हो चुका है और देश के बड़े मेलों में शामिल है। इसकी खास बात यह है कि इस मेले में घर में उपयोग होने वाली सुई से लेकर मोटर कार तक छूट के साथ मिलती हैं। इसलिए इस मेले में खरीदारी करने के लिए देश भर से लोग आते हैं। जब जीएसटी लागू नहीं था तब समान रूप से सभी चीजों पर 50 प्रतिशत वाणिज्यकर में छूट मिलती थी। लेकिन एक जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद मेले की चमक कुछ फीकी पड़ गई। लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर में सरकार ने रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दे दी। इसके बाद मेले में ऑटोमोबाइल सेक्टर तो चमका, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक सहित अन्य सेक्टर में कारोबार उतना अच्छा नहीं रहा। लेकिन इस बार जीएसटी कम होने से ऑटोमोबाइल सेक्टर के साथ इलेक्ट्रॉनिक व अन्य सेक्टरों में अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है। क्योंकि जीएसटी कम होने के साथ कंपनियां भी अपने प्रोडक्ट पर तगड़ी छूट देंगी। ऐसे में खरीदारी करने वालों को फायदा होगा। यहां बता दें कि 2024-25 मेले में 3327 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ। इसमें 900 करोड़ से अधिक का कारोबार केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर में हुआ।   1937 में टर्नओवर था 5-6 लाख रुपये मेले से जुड़े लोगों के मुताबिक इस मेले के कारोबार की अगर बात करें तो 1937 में इसका टर्नओवर लगभग 5-6 लाख रुपये था। 1984-85 में जहां मेले में करों की छूट मिलने के बाद टर्नओवर 84 लाख 86 हजार 730 रुपये था वहीं 1990-91 में यह बढकऱ 70 करोड़ 36 लाख रुपये हो गया। 1984 में व्यापार मेले का दर्जा मिलने पर इलेक्ट्रॉनिक और ऑटोमोबाइल सेक्टर इसका प्रमुख आकर्षण बन गए। इस आकर्षण के पीछे इन सेक्टरों में मेले में दी जाने वाली पचास फीसदी विक्रय कर की छूट थी। इसके चलते उस समय सभी बड़ी कंपनियां मेले में भागीदारी करती थीं। 1998 में मेले का कारोबार 350 करोड़ और सैलानियों की संख्या 40 लाख तक जा पहुंची थी। वहीं 2018 में मेले के ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोड टैक्स में 50 फीसदी छूट मिलने के बाद इसका टर्नओवर 500 करोड़ के पार हो गया था। इसलिए चमकेगा इलेक्ट्रॉनिक सहित अन्य सेक्टर का कारोबार 22 सितंबर से जीएसटी की दरों में सरकार ने कमी की है। जीएसटी कम होने का असर कारोबार के सभी सेक्टरों पर है और चीजें सस्ती हुई हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोड टैक्स की छूट मिलती है। इसलिए कार व बाइक कंपनियां अपनी तरफ से कम ही छूट देती हैं। लेकिन अभी तक इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर सहित अन्य सेक्टरों में कंपनियां ही छूट दे रही थी। लेकिन इस बार जीएसटी कम होने व कंपनियों से मिलने वाले डिस्काउंट की वजह से ये चीजें मेले में सस्ती मिलेंगी। इसलिए ऑटोमोबाइल सेक्टर सहित अन्य सेक्टरों में कारोबार अच्छा होने की उम्मीद कारोबारियों को है।

इंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा मार्च 2026 तक शुरू होगी, 17 साल का इंतजार होगा समाप्त

इंदौर  अगले वर्ष 2026 में आदिवासी बहुल क्षेत्र धार जिले में पहली बार ट्रेन दौड़ेगी। इंदौर-दाहोद नई ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना (204.76 किमी) का भूमिपूजन वर्ष 2008 में हुआ था। 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद रेलवे दावा कर रहा है कि इंदौर से धार नए रूट पर मार्च-2026 तक ट्रेन चलाई जाएगी। हालांकि निर्माण कार्य की गति और जमीनी हकीकत को देखकर लग रहा है कि ट्रेन शुरू होने में छह महीने का और समय लग सकता है। वहीं, रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फरवरी-2026 तक टनल का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हैं। हर दिन की समय सीमा तय की है, क्योंकि पहले ही इस प्रोजेक्ट में टनल की वजह से देरी हो चुकी है। इंदौर और वड़ोदरा के बीच सीधा संपर्क उक्त परियोजना वड़ोदरा और इंदौर के बीच सीधा संपर्क देकर यात्रा समय कम करेगी। अभी रतलाम होकर वड़ोदरा आना-जाना पड़ता है। परियोजना की अनुमानित कुल लागत लगभग 1873 करोड़ रुपये है। वर्तमान स्थिति में इंदौर से टीही (21 किमी) और दाहोद से कटवारा (11.30 किमी) खंड का कुल 32.30 किमी भाग शुरू हो चुका है। टीही से धार के बीच ट्रैक लिंकिंग और मोबिल फ्लैश वेल्डिंग कार्य प्रगति पर है। खंड का सीआरएस निरीक्षण फरवरी 2026 के लिए लक्षित है। टीही टनल (2.9 किमी) कार्य भी तेज गति से चल रहा है। 2.95 किमी टनल में से 1.87 किमी हिस्से का काम पूरा कर दिया है। टनल के अंदर दीवारों पर फिनिशिंग की जा रही है। पानी निकलने के लिए लोहे की 150 व 400 एमएम की लाइन बिछाई जा रही है। पूरी टनल में हर 50 मीटर पर कुल 30 मेन होल बनाए गए हैं। इनके माध्यम से टनल में एकत्रित होने वाला पानी लगातार बाहर निकाला जाएगा। ट्रैक बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है पाइप चोक होने की स्थिति में मशीन से हवा का प्रेशर दिया जाएगा, जिससे पाइप साफ हो जाएंगे और पानी नहीं रुकेगा। इसके बाद इस हिस्से में ट्रैक बिछाने का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। टनल के अंदर रेलवे बैलास्ट लैस ट्रैक बिछाएगा। रेलवे जनसंपर्क अधिकारी खेमराज मीणा ने दावा किया कि टनल का काम अंतिम चरण में चल रहा है। अगले साल मार्च 2026 तक इंदौर से धार के बीच ट्रेन चलने लगेगी। हम ट्रेन चलाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। टनल में मटेरियल लाने-ले जाने के लिए दोनों एंड पर छोड़ा था काम टनल के दोनों एंड पी-1 और पी-2 पर मटेरियल लाने-ले जाने के लिए रेलवे ने दोनों हिस्से में टनल का काम छोड़ा था। एक हिस्से में 170 मीटर जबकि दूसरे हिस्से में 50 मीटर से ज्यादा हिस्सा था। दोनों टनल के बीच भी 60 मीटर का हिस्सा बचा हुआ है। अब इस हिस्से में भी रेलवे काम शुरू करेगा। प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने कहा- अगले दो महीने में इस हिस्से को भी पूरा करने का लक्ष्य है। इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट     2008 में प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ     2013 में काम शुरू हुआ     1873 करोड़ से अधिक लागत वर्तमान में     204.76 किमी लंबी लाइन इसलिए खास है यह परियोजना, इंदौर-मुंबई की दूरी कम होगी रेल परियोजना के पूरा होने से इंदौर और मुंबई के बीच रेल मार्ग की दूरी लगभग 55 किमी घट जाएगी। गुजरात-महाराष्ट्र से एमपी की बेहतर कनेक्टिविटी: यह नई रेल कड़ी इंदौर को गुजरात और महाराष्ट्र से सीधे जोड़ेगी, जिससे न केवल यात्री, बल्कि माल-ढुलाई में भी सुविधा बढ़ेगी। औद्योगिक विकास व माल भाड़ा सस्ता इस मार्ग से औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर पीथमपुर को लाभ होगा। माल को रेल से सीधे मुंबई व अन्य बंदरगाहों तक भेजना आसान और कम लागत वाला होगा। पिछड़े व आदिवासी क्षेत्रों को रेल सुविधा इस लाइन से प्रदेश के धार, झाबुआ जैसे क्षेत्रों को पहली रेल-कनेक्टिविटी मिलेगी। विकास, रोजगार, आवाजाही जैसे सामाजिक-आर्थिक लाभ होंगे।  

उज्जैन में ‘शनि लोक’ का निर्माण शुरू, महाकाल लोक की तर्ज पर 140 करोड़ की स्वीकृति, 2028 से पहले होगा पूरा

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है। वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महाकाल लोक का लोकार्पण किए जाने के बाद यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो आज भी लगातार बनी हुई है। इसी विकास यात्रा में अब उज्जैन एक और भव्य धार्मिक स्थल का साक्षी बनने जा रहा है। महाकाल लोक की तर्ज पर शनि लोक का भव्य निर्माण किया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 140 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। जानिए कहां दिखेगा शनि लोक का खूबसूरत नजारा  महाकाल की नगरी में अति प्राचीन शनि मंदिर है. यहां यह खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलेगा. जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा. यह वह प्रसिद्ध स्थान है, जहां शनि महाराज शिवलिंग स्वरूप में भक्तों को दर्शन देकर भक्तों के कष्ट हरते हैं. इतना ही नहीं, इस मंदिर की और भी कई खासियतें हैं. शिव के रूप में शनिदेव  मंदिर के पुजारी राकेश बैरागी ने बताया, यह मंदिर 2000 वर्ष पुराना है. राजा विक्रमादित्य की जब साढ़ेसाती खत्म हुई थी, तब शनि महाराज राजा पर प्रसन्न हुए और यहां सारे ग्रह एक साथ प्रकट हुए. इसे शनि मंदिर में एक साथ विराजमान हुए, तभी से इस मंदिर में लोगों की आस्था है. यहां पर मुख्य शनिदेव की प्रतिमा के साथ-साथ ढैय्या शनि की भी प्रतिमा स्थापित है. बताया जाता है कि राजा विक्रमादित्य का इतिहास भी इस मंदिर से जुड़ा है. यही नहीं, यह शनि मंदिर पहला मंदिर है, जहां शनिदेव शिव रूप विराजमान हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाते हैं. कहा जाता है कि यहां साढ़ेसाती और ढैय्या की शांति के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाया जाता है. शनि लोक का अद्भुत स्वरूप आएगा नजर उज्जैन स्थित अति प्राचीन शनि मंदिर में शनि लोक का भव्य नजारा जल्द ही दिखाई देगा। शीघ्र ही इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। यह वही स्थान है, जहां शनि महाराज शिवलिंग स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और उनके कष्ट हरते हैं। इस मंदिर को लेकर कई मान्यताएं और विशेषताएं प्रसिद्ध हैं। शिव के स्वरूप में विराजमान हैं शनिदेव मंदिर के पुजारी राकेश बैरागी के अनुसार यह मंदिर लगभग 2000 वर्ष पुराना है। मान्यता है कि जब राजा विक्रमादित्य की साढ़ेसाती समाप्त हुई, तब शनि महाराज प्रसन्न होकर यहां प्रकट हुए और सभी ग्रहों ने एक साथ दर्शन दिए। यह देश का पहला ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां शनिदेव शिवरूप में विराजमान हैं। यहां मुख्य शनिदेव की प्रतिमा के साथ ढैय्या शनि की प्रतिमा भी स्थापित है। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति और शांति के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाने आते हैं। 140 करोड़ में बनेगा भव्य शनि लोक सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। शनि लोक का निर्माण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  गौरतलब है कि नवग्रह शनि मंदिर पर शनिवार व शनिश्चरी अमावस्या के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां शनि लोक निर्माण के लिए मुख्यमंत्री ने 140 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। सिंहस्थ से पहले पूरा होगा निर्माण कलेक्टर  ने बताया कि सीएम के निर्देशानुसार विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और सिंहस्थ 2028 के दौरान यहां भारी भीड़ आने की संभावना है। इसी कारण शनि लोक निर्माण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है और लक्ष्य है कि सिंहस्थ से पहले शनि लोक का निर्माण पूरा हो जाए।

1873 करोड़ की रेल लाइन से इंदौर में होगा नया ट्रांसपोर्ट युग, फरवरी तक शुरू हो सकता है ट्रेन संचालन

इंदौर इंदौर शहर का डेड एंड खत्म करने के लिए वर्षों से लंबित इंदौर-दाहोद रेल लाइन का काम अब तेजी से चल रहा है। रेलवे इस प्रोजेक्ट के इंदौर-धार रेल लाइन का काम अंतिम दौर में कर रहा है। फरवरी में सीआरएस (कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी) के निरीक्षण का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद धार तक ट्रेन चल जाएगी।  1873 करोड़ का है प्रोजेक्ट मालूम हो, धार क्षेत्र में आज तक ट्रेन नहीं पहुंची है। पीथमपुर, सागौर, गुणावद, टीही में स्टेशन बिल्डिंग, पटरियां बिछाने और ब्रिजों का काम अंतिम दौर में है। 204.76 किमी में इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट वर्षों से अटका है। प्रोजेक्ट के लिए 1873.10 करोड़ मिले है। धार तक 21 ब्रिज बनने है, जिनमें से 19 का पूरा हो गया है। राजस्थान तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी रतलाम रेल मंडल पीआरओ खेमराज मीना ने बताया कि धार लाइन से इंदौर का दाहोद, छोटा में से उदयपुर के जरिए मुंबई-गुजरात से सीधा जुड़ाव होगा। धार स्टेशन मांडू के जहाज महल की प्रतिकृति बनाया जा रहा है। इस रेल लाइन सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। कृषि और व्यवसाय के लिए परिवहन मजबूत होगा। काम की स्थिति इंदौर से टीही 21 किमी राऊ से धार के लिए रेल लाइन डाली जानी है। राऊ से टीही तक 21 किमी तक ट्रैक बन चुका है। टीही तक मालगाड़ियों का संचालन हो रहा है। टीही से पीथमपुर 8.29 किमी टीही से पीथमपुर तक पटरियां बिछ चुकी हैं। राऊ से बिछे ट्रैक और नई पटरियों के बीच 2.9 किमी टनल का फिनिशिंग का काम चल रहा है। बाद टनल में पटरियां बिछेंगी। पीथमपुर से सागौर : 9.12 किमी पीथमपुर से सागौर के बीच पटरियां बिछाई जा चुकी हैं। पीथमपुर में स्टेशन की फिनिशिंग चल रही है. हालांकि स्टेशन के पीछे वाली भूमि का अधिग्रहण बाकी है। सागौर से गुणावद : 15.14 किमी 4 किमी से अधिक हिस्से में पटरियां डल गई हैं। इसके अलावा अन्य हिस्सों में पटरियां बिछाई जा रही हैं। स्टेशन का काम अंतिम दौर में है। गुणावय से धार: 14.02 किमी किमी से अधिक किमी तक पटरियां डाली जा चुका है। धार में स्टेशन का स्ट्रक्चर खड़ा होने के बाद फिनिशिंग की 9.8 जा रही है। धार से आगे तिरला तक अर्थ वर्क चल रहा है।

महिला को आज़ादी, शादीशुदा होने के बावजूद अपनी पसंद से रहने का अधिकार — MP हाईकोर्ट

इंदौर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने कहा कि महिला वयस्क है, भले ही वह शादीशुदा है तो वह अपनी मर्जी के हिसाब से किसी के साथ रह सकती है। दरअसल, एक याचिका की सुनवाई के दौरान महिला को शुक्रवार को हाई कोर्ट में पुलिस सुरक्षा के बीच लाया गया। महिला ने कोर्ट में कहा कि वह याचिकाकर्ता के साथ रहना चाहती है, लेकिन उसके माता-पिता ने उसे जबरन अपने पास रखा है। इधर महिला के माता-पिता ने कहा कि उसकी पहले ही शादी हो चुकी है। शादी के बाद उसे अपने पति के साथ रहना चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद उक्त टिप्पणी की।  “मैं पूरी तरह बालिग हूँ और कानून मुझे यह अधिकार देता है कि मैं अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले खुद लूं। मैं अपनी मर्जी से जिसके साथ चाहूँ, उसके साथ रह सकती हूँ। मेरे माता-पिता मेरी इच्छा के खिलाफ मुझे जबरन अपने पास रखे हुए हैं। मैं किसी दबाव में नहीं हूँ और स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूँ कि मैं धीरज के साथ रहना चाहती हूँ। मुझे अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने दिया जाए।” पुलिस सुरक्षा के बीच  इंदौर हाई कोर्ट पहुंची महिला ने न्यायालय के सामने यह स्पष्ट बयान दिया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि महिला वयस्क है तो वह अपनी इच्छा के अनुसार किसी के साथ भी रह सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि महिला का शादीशुदा होना उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद पर रोक नहीं लगा सकता। यह फैसला उस याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें एक युवक ने आरोप लगाया था कि उसकी साथी को उसके माता-पिता ने जबरन अपने पास रखा हुआ है। यह मामला राजस्थान के सवाई माधोपुर निवासी धीरज नायक से जुड़ा है, जिन्होंने अपने अधिवक्ता जितेंद्र वर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि धीरज ने संध्या नामक महिला से विवाह किया है और संध्या उसके साथ रहना चाहती है, लेकिन उसके माता-पिता उसे जबरदस्ती अपने घर में रखे हुए हैं और बाहर जाने की अनुमति नहीं दे रहे। पुलिस सुरक्षा में कोर्ट लाई गई महिला इस मामले की पिछली सुनवाई 2 दिसंबर को हुई थी, जिसमें हाई कोर्ट ने महिला को स्वयं कोर्ट के सामने पेश कर बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश पर शुक्रवार को पुलिस सुरक्षा के बीच महिला को इंदौर हाई कोर्ट लाया गया। सुनवाई के दौरान महिला ने साफ तौर पर कहा कि वह अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता धीरज नायक के साथ रहना चाहती है और उसके माता-पिता उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने पास रखे हुए हैं। महिला ने यह भी बताया कि इससे पहले कोर्ट के निर्देश पर एक न्यायिक दंडाधिकारी (JMFC) के समक्ष भी उसके बयान दर्ज कराए जा चुके हैं। उन बयानों में भी उसने यही कहा था कि उसे जबरन अपने माता-पिता के नियंत्रण में रखा गया है और वह स्वतंत्र रूप से अपनी जिंदगी का फैसला नहीं कर पा रही है। माता-पिता ने कहा, पहले से शादीशुदा है बेटी वहीं, महिला के माता-पिता की ओर से यह दलील दी गई कि उनकी बेटी की पहले ही शादी हो चुकी है। उनका कहना था कि शादी के बाद महिला को अपने पति के साथ ही रहना चाहिए और किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहने का उसे अधिकार नहीं है। माता-पिता ने इसे सामाजिक और पारिवारिक मर्यादाओं से जोड़ते हुए कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की। हालांकि, हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद महिला की उम्र और उसकी स्वतंत्र इच्छा को सबसे महत्वपूर्ण आधार माना। अदालत ने कहा कि कानून की नजर में यदि महिला बालिग है, तो उसे यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह किसके साथ और कहां रहना चाहती है। हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी भी वयस्क महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध कहीं रोके रखना कानूनन गलत है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शादीशुदा होना किसी महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खत्म नहीं करता। संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के तहत महिला अपने जीवन से जुड़े फैसले खुद लेने के लिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने यह भी माना कि माता-पिता या परिवार की असहमति के बावजूद, यदि महिला ने स्पष्ट रूप से अपनी इच्छा जाहिर कर दी है, तो उसे उसी के अनुसार निर्णय लेने दिया जाना चाहिए। धीरज नायक को सौंपी गई महिला की सुपुर्दगी  हुई सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि महिला को धीरज नायक के साथ ही रहने दिया जाए। कोर्ट ने महिला की सुपुर्दगी धीरज को सौंपते हुए पुलिस को निर्देश दिए कि वह दोनों को सुरक्षा प्रदान करे और सुरक्षित रूप से सवाई माधोपुर तक छोड़कर आए। अदालत ने यह आदेश भी दिया कि इस दौरान किसी प्रकार का दबाव, धमकी या हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए, ताकि महिला बिना किसी भय के अपने फैसले पर अमल कर सके। व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर फिर मुहर यह फैसला एक बार फिर यह स्थापित करता है कि भारतीय न्यायपालिका वयस्क महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद के अधिकार को सर्वोपरि मानती है। इससे पहले भी कई मामलों में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट यह कह चुके हैं कि बालिग महिला को यह अधिकार है कि वह अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुने और उसके साथ रहे, चाहे परिवार या समाज को यह पसंद हो या नहीं।  विधि विशेषज्ञ मयंक सिंह ने कहा, कि यह आदेश उन मामलों में नजीर बनेगा, जहां पारिवारिक दबाव के चलते महिलाओं की स्वतंत्रता छीनी जाती है। अदालत का यह रुख साफ संकेत देता है कि कानून की नजर में सबसे अहम महिला की सहमति और उसकी इच्छा है, न कि सामाजिक दबाव या पारिवारिक परंपराएं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर को दी विकास की अनेक सौगातें

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार को ब्रिलियेंट कन्वेशन सेंटर में इंदौर के विकास को नई गति देने के लिये महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विकास की अनेक सौगाते दीं। अधोसंरचनात्मक विकास को नई गति देने के लिये कई अहम निर्णय भी बैठक में हुये। इस मैराथन बैठक में इंदौर और उसके विस्तृत मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई बड़े निर्णय लिए गए। बैठक में जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सहभागी होकर शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर, यातायात, उद्योग, शिक्षा, मेट्रोपॉलिटीनरिजन, पूर्व एवं पश्चिमी बायपास, इकॉनामिक कारिडोर, स्थानीय परिवहन, आईटी, पर्यटन और मास्टर प्लान से जुड़े विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह बैठक इंदौर के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी परियोजनाएँ धरातल पर उतरेंगी और इंदौर आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी महानगरों में शामिल होगा। भूमिगत होगा मेट्रो का प्रमुख हिस्सा-राज्य सरकार देगी 800–900 करोड़ रुपए बैठक में मेट्रो परियोजना के रूट निर्धारण पर विस्तृत चर्चा की गई। बताया गया कि मूल प्रस्ताव संशोधित होने के बाद भी समस्याएँ बनी रहीं, इसलिए सुझाव आया कि मेट्रो के मुख्य हिस्से को पूरी तरह भूमिगत किया जाए। मुख्य हिस्से को भूमिगत करने के लिये निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि राज्य सरकार इसके लिए लगभग 900 करोड़ रुपये का भार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय इंदौर के भविष्य को देखते हुए लिया गया है ताकि मेट्रो का अधिकतम लाभ जनता को मिले और यातायात प्रबंधन बेहतर हो। एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण शीघ्र प्रारंभ होगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एलिवेटेड कॉरिडोर की यह परियोजना इंदौर शहर के यातायात के लिये अतिमहत्वपूर्ण है। इसका निर्माण शीघ्र प्रारंभ किया जाये। एलिवेटेड कॉरिडोर के जंक्शन, रोटरी, लंबाई आदि पर शीघ्र तकनीकी व जनप्रतिनिधियों की बैठक कर अंतिम डिज़ाइन तय करें। बैठक में बीआरटीएस हटने के बाद शहर में नए वैज्ञानिक ट्रैफिक सर्वे के आधार पर एकीकृत ट्रैफिक प्लान तैयार करने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि यह परियोजना आने वाले 25–50 वर्षों तक इंदौर की ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान देगी। इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का होगा विस्तार—14,000 वर्ग किमी में जुड़ेगा पूरा मालवा बैठक में इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को भविष्य की दृष्टि से विस्तारित करने का निर्णय लिया गया। भविष्य को ध्यान में रखते हुए  इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में उज्जैन, देवास, धार, रतलाम, नागदा, बदनावर और शाजापुर–मक्सी क्षेत्रों के साथ जोड़कर लगभग 14,000 वर्ग किलोमीटर का मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि इस क्षेत्र में पाँच से अधिक बड़े रेलवे जंक्शन,एक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट,उज्जैन और रतलाम के भविष्य के एयरपोर्ट,दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे,दिल्ली–मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर,इंदौर–मनमाड़ रेल लाइन इन्हें आधार बनाकर इंदौर को देश का बड़ा व्यापार–उद्योग–पर्यटन हब बनाने की योजना है। स्टार्टअप पार्क और अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर—इंदौर को देंगे नई आर्थिक पहचान बैठक में एमआर-10 के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टार्टअप पार्क और कन्वेंशन सेंटर की स्थापना का निर्णय लिया गया। बताया गया कि भारत सरकार भी इस प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने को तैयार है। यह इंदौर को मध्य भारत का सबसे बड़ा इनोवेशन सेंटर बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कन्वेंशन सेंटर को नई दिल्ली के भारत भवन के तर्ज पर विकसित किया जाये। बताया गया कि कन्वेंशन सेंटर की लागत 550 से 600 करोड़ के लगभग है। इसे तीन वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका संचालन पीपीपी के माध्यम से किया जाना प्रस्तावित है। इसकी इंडोर क्षमता 5 हजार और आउट डोर क्षमता 10 हजार रहेगी। हुकुमचंद मिल परियोजना बनेगी देश के लिये मॉडल बैठक में बताया गया कि हुकुमचंद मिल परियोजना का क्रियान्वयन जल्द प्रारंभ होगा। इस मिल की भूमि का पंजीयन मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के नाम पर हो गया है। भूमि हस्तांतरित कर दी गयी है। सम्पूर्ण 17.5 हेक्टेयर भूमि के विकास के लिये डीपीआर तैयार हो गयी है। निविदा की कार्यवाही प्रचलित है। आगामी तीन वर्षों में कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस भूमि का ऐसा विकास किया जाये,जो देश के लिये मॉडल हो। इसमें देश की शीर्षस्थ नियोजकों की मदद ली जाये। बड़े निवेशकों को भी निवेश के लिये प्रोत्साहित किया जाये। पीडब्ल्यूडी की 12 हेक्टेयर भूमि का  होगा रिडेंसिफिकेशन बैठक में पलासिया स्थित पीडब्ल्यूडी की 12 हेक्टेयर भूमि के पुर्नघनत्वीकरण (Redevelopment) के लिए निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने  इसके प्लान में विशेष रूप से ग्रीनरी, हवा की गुणवत्ता और खुले स्थानों को संरक्षित करने पर जोर दिया। स्मार्ट इंदौर—आईटी, सीसीटीवी, फ्यूचर-रेडी सिस्टम बैठक में इंदौर शहर को फ्यूचर रेडी बनाने के लिए निर्णय लिये गये। इसके तहत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्मार्ट सीसीटीवी नेटवर्क स्थापना,उन्नत आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने,ई-बस प्रोजेक्ट संचालित करने,स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम लागू करने आदि पर तेज़ी से कार्य करने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि  जनसहभागिता आधारित सीसीटीवी नेटवर्क स्थापित किया जायेगा। इसके तहत 13690 स्थान चिन्हित किये गये हैं, जहाँ लगभग 60 हजार कैमरों की स्थापना की जायेगी। इसकी एकीकृत कन्ट्रोल रूम के माध्यम से मॉनिटरिंग होगी। बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क स्थापित किये जायेंगे। बैठक में बताया गया कि पीएम ई-बस सेवा का संचालन होगा। इसके तहत 270 ई-बसें चलायी जायेंगी। यह बसें आगामी मार्च माह से शहर में चलना शुरू हो जायेंगी। इससे सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। स्लम-फ्री इंदौर और आवास योजना शहर की झुग्गी बस्तियों के पूर्ण पुनर्वास के लिए उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़कर स्थायी आवास देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में बताया गया कि इसके तहत आगामी तीन वर्षों में डेढ़ लाख घर बनाये जायेंगे। इसके लिये वर्तमान में 10 स्थानों के लिये डीपीआर तैयार की जा रही है। एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड और नए खेल मैदान होंगे विकसित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर खेलों की राजधानी है। इंदौर में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ मुहैया करायी जायेंगी। इसके लिये कोई कसर नहीं छोड़ी जायेगी। उन्होंने कहा कि इंदौर में एस्ट्रोटर्फ मैदान, नए खेल मैदान और आधुनिक स्पोर्ट्स सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। यह शहर को खेल महाकुंभ और राष्ट्रीय टूर्नामेंटों का केंद्र बनाएगा विश्वविद्यालय बनेंगे … Read more

इंदौर मेट्रोपोलिटन से भविष्य की योजना होगी साकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में शून्य से शिखर सम्मान-2025 में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर का अपना एक रोल है। इंदौर में मेट्रोपोलिटन का नक्शा बनाया गया है, जो भविष्य की योजना को साकार करेगा। आज जो मेट्रोपॉलिटन का नक्शा बना है, वह 14 हजार किलोमीटर का है। इंदौर से लेकर रतलाम और रतलाम से लेकर शाजापुर तक सराउंडिंग क्षेत्र में यह मेट्रोपोलिटन का नक्शा इंदौर-भोपाल के साथ क्लीन सिटी के रूप में जुड़ाव करेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य की दृष्टि से महानगर की श्रेणी में इंदौर का जो क्षेत्र बनेगा उसी आधार पर भविष्य की इमारतें खड़ी होंगी और निर्माण का अगला पड़ाव तय होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर में आयोजित शून्य से शिखर सम्मान -2025 में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेट्रो ट्रेन को भूमिगत भी चलाया जाएगा। इस कार्य में जो राशि लगेगी सरकार देगी। शहर की खूबसूरती को ख़त्म नहीं होने देंगे। एलिवेटेड रोड भी बनेगा, एलिवेटेड रोड से जनता को जहाँ सुविधा होगी वहाँ उन्हें रास्ते भी देंगे। उन्होंने कहा कि पाँच साल के अंदर विकास परक बजट डबल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी नए अवसर तलाशने और बेहतर तकनीक से जुड़ने की आवश्यकता है। ड्रोन टेक्नोलॉजी से लेकर सेमी कंडक्टर तक, आईटी से लेकर हेल्थ तक, इंफ्रास्ट्रक्चर से वेलनेस और टूरिज्म तक, हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारियां जारी है। मध्यप्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने में शासन पीछे नहीं रहेगा। कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद श्री शंकर लालवानी, महापौर श्री पुष्पमित्र भार्गव,  संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त श्री संतोष सिंह, कलेक्टर श्री शिवम वर्मा श्री राजेश चेलावत, श्री किशोर चेलावत उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करने वाले विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।  

मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से आगर के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 551 नवदंपतियों को दी बधाई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधायक श्री मधु गहलोत के पुत्र श्री मोहित सिंह गहलोत और उनकी पुत्रवधू सहित आगर मंडी प्रांगण में सात फेरों के बंधन में बंधने वाले सभी 551 जोड़ों को ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर इंदौर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उज्जवल भविष्य शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र अनुरूप सामूहिक विवाह कार्यक्रम सभी अभिभावकों के विवाह आयोजन के स्वप्न को साकार करने में सहायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकर खुशी व्यक्त की कि विधायक श्री मधु गहलोत अब तक 10 हजार बेटियों के विवाह में सहयोग कर चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधायक श्री गहलोत के पुत्र श्री मोहित सिंह गहलोत से अपेक्षा जताई कि वे अपने पिता के समाजसेवा कार्य को आगे बढ़ायेंगे। उन्होंने इस शुभ आयोजन के लिए दादा नर्सिंग फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की और बाबा बैद्यनाथ की धरती में आयोजित इस मंगल कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट सहित अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना से मध्यप्रदेश में डेयरी क्रांति को मिलेगी नई गति: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को हर संभव तरीके से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाया जाएगा। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने सहित वर्तमान डेयरी उद्योग को सुनियोजित, सुव्यवस्थित, व्यावसायिक और लाभकारी बनाने की दिशा में 'डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना' आरंभ की है। यह योजना खासतौर पर उन जरूरतमंद युवाओं, किसानों और पशुपालकों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है, जो आधुनिक डेयरी इकाई स्थापित कर अपनी आय का स्थायी साधन विकसित करना चाहते हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नये-नये अवसर सृजित करना और पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना में लाभार्थियों को 25 दूधारू पशुओं की एक इकाई स्थापित करने का अवसर दिया जाता है। इच्छुक और सक्षम हितग्राही अधिकतम 8 इकाइयां अर्थात 200 पशुओं तक की डेयरी परियोजना भी स्थापित कर सकते हैं। यह योजना छोटे से लेकर मध्यम स्तर के डेयरी उद्यमियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। योजना की एक प्रमुख शर्त यह है कि प्रति इकाई के लिए इच्छुक हितग्राही के पास कम से कम 3.50 एकड़ कृषि भूमि उपलब्ध हो। भूमि की यह व्यवस्था पशुओं के आवास, चारे की व्यवस्था और डेयरी के समुचित तरीके से संचालन के लिए जरूरी है। इसके साथ ही सरकार पशुपालकों/दूध उत्पादकों की प्रोफेशनल ट्रेनिंग को भी महत्व दे रही है, जिससे पशुपालक वैज्ञानिक और आधुनिक पद्धति से अपना डेयरी बिजनेस चला सकें। पशुपालकों को आर्थिक सहायता देना इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू है। परियोजना की कुल लागत पर सरकार द्वारा अनुदान (सब्सिडी) भी दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को कुल परियोजना लागत का 33 प्रतिशत तथा अन्य सभी वर्गों को 25 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। शेष राशि बैंक ऋण के जरिए उपलब्ध कराई जा रही है। इस प्रावधान से बड़े निवेश की बाधा काफी हद तक कम हो जाती है और डेयरी बिजनेस शुरू करना भी आसान हो जाता है। योजना में लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है और चयन सामान्यत: “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर ही किया जा रहा है। साथ ही उन पशुपालकों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जो पहले से ही किन्हीं दुग्ध संघों या सहकारी संस्थाओं को निरंतर दुग्ध आपूर्ति कर रहे हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, भूमि के दस्तावेज, बैंक खाता विवरण, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। इच्छुक आवेदक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आधिकारिक पोर्टल या अपने जिले के पशु चिकित्सा सेवाएं कार्यालय से विस्तृत जानकारी और मार्गदर्शन भी ले सकते हैं। योजना के बारे में कुछ तथ्य     1. मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना में नवीन घटक के रूप में राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2025 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को मंजूरी दी।     2. योजना के अंतर्गत 25 दुधारु पशु की प्रति इकाई राशि 36 लाख से 42 लाख रुपये तक की इकाई लागत है।     3. योजना में अधिकतम 8 इकाइयों की स्थापना एक हितग्राही द्वारा की जा सकती है। एक इकाई में एक ही नस्ल के गौ-वंश एवं भैसवंशीय पशु रहेंगे।     4. हितग्राही के पास प्रत्येक इकाई के लिये न्यूनतम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होना जरूरी है।     5. भूमि के लिये परिवार के सामूहिक खाते भी सम्मिलित हैं। इनके लिये अन्य सदस्यों की सहमति भी जरूरी होगी।     6. इकाइयों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि होने पर आनुपातिक रूप से न्यूनतम कृषि भूमि की अर्हता में भी आनुपातिक वृद्धि जरूरी होगी।     7. पात्र हितग्राही को ऋण राशि का भुगतान चार चरणों में किया जायेगा।  

पत्रकारिता समाज में चेतना का संचार करती हैं: विधानसभा अध्यक्ष तोमर

मप्र प्रेस क्लब का 33वां स्थापना वर्ष समारोह संपन्न अच्छी शिक्षा, उत्तम स्वास्थ्य और त्वरित न्याय से ही ‘विकास’ संभव : न्यायमूर्ति अग्रवाल भोपाल समाज को दिशा देने वाली पत्रकारिता और साहित्य की संयुक्त भूमिका को रेखांकित करता हुआ मध्य प्रदेश प्रेस क्लब का 33वां स्थापना वर्ष समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर आयोजित ‘मप्र रत्न अलंकरण समारोह–2025’ न केवल प्रदेश की प्रतिभाओं के सम्मान का साक्षी बना, बल्कि सामाजिक सरोकारों, न्याय, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूल प्रश्नों पर गंभीर विमर्श का मंच भी बना। समारोह को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य दोनों ही समाज की चेतना को दिशा देते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में लगभग हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में ‘अवमूल्यन’ दिखाई देता है, ऐसे समय में मप्र प्रेस क्लब जैसी संस्थाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। श्री तोमर ने प्रदेश का मान बढ़ाने वाली विभूतियों को सम्मानित करने की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में यह आयोजन किसी शिक्षण संस्था के सहयोग से उसके परिसर में किया जाए, ताकि विद्यार्थी सीधे इन विभूतियों से संवाद कर प्रेरणा ग्रहण कर सकें। उन्होंने कहा कि इन विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित कर उन्हें स्वयं भी गौरव की अनुभूति हो रही है। साथ ही, पत्रकारों के हित में क्लब द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की। गरीबों के लिए सरल और सुलभ न्याय अनिवार्य : न्यायमूर्ति अग्रवाल श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर ऐतिहासिक निर्णय देने वाले न्यायमूर्ति श्री सुधीर अग्रवाल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यदि हम वास्तव में देश और समाज के विकास की बात करते हैं, तो गरीब और सामान्य नागरिक को अच्छी शिक्षा, उत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना होगा। यही एक स्वस्थ और विकसित समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि देश की सवा सौ करोड़ से अधिक जनता के लिए एक ही सुप्रीम कोर्ट से समय पर न्याय मिलना व्यावहारिक नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि देश की चारों दिशाओं और प्रमुख राज्यों में सुप्रीम कोर्ट की और बेंच स्थापित हों। न्यायमूर्ति अग्रवाल ने शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज संपन्न वर्ग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराना नहीं चाहता, क्योंकि वहां व्यवस्थाओं और सुविधाओं का अभाव है। यदि शासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और अन्य जिम्मेदार लोग स्वयं या अपने परिजनों को इन संस्थानों में भेजें, तो वास्तविक स्थिति से परिचित होंगे और व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस पहल संभव होगी। उन्होंने कहा कि यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि जिम्मेदार लोग अपने बच्चों की शिक्षा और इलाज सरकारी संस्थानों में ही कराएं। सबको मिले समान न्याय न्यायमूर्ति अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज देश में आम आदमी न्याय के लिए भटक रहा है। देश की अदालतों में लगभग साढ़े पांच करोड़ मुकदमे लंबित हैं। संपन्न वर्ग के मामलों में अदालतें रातों-रात खुल जाती हैं और त्वरित सुनवाई हो जाती है, जबकि आम आदमी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने तक के लिए संघर्ष करता है। यह स्थिति समान न्याय की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जहां हर नागरिक को समान, सरल और शीघ्र न्याय मिल सके। भाषायी मर्यादा और सांस्कृतिक गरिमा की रक्षा में मीडिया की भूमिका कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर ध्यानश्री स्वामी शैलेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि आज समाज में भाषायी असहिष्णुता बढ़ रही है। इसकी मर्यादा की रक्षा में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और उसे यह दायित्व निभाना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि आचरण और आवरण में भेद नहीं होना चाहिए। महाराजश्री ने इस बात पर भी चिंता जताई कि आज तीर्थ स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में देखा जाने लगा है, जबकि तीर्थाटन और पर्यटन के बीच के अंतर को समझना आवश्यक है। तीर्थों की गरिमा और पवित्रता बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। अपने बहुआयामी जीवन अनुभव—फिल्म अभिनेता, क्रिकेट कमेंटेटर, पत्रकारिता, राजनीति और संत जीवन—साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की माटी ने उनके जीवन को बार-बार नया स्वरूप दिया है। उन्होंने मप्र प्रेस क्लब के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली विभूतियों का सम्मान करना वास्तव में गौरव का विषय है। सामाजिक दायित्व निभा रहा है मप्र प्रेस क्लब कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत वक्तव्य देते हुए मप्र प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ. नवीन आनंद जोशी ने क्लब की गतिविधियों और उद्देश्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मप्र प्रेस क्लब प्रतिवर्ष उन विभूतियों का सम्मान करता है, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम, प्रतिभा और समर्पण से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। इसके पीछे क्लब की मंशा समाज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन करने की है। दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। क्लब की ओर से डॉ. शिशिर उपाध्याय, राजेन्द्र शर्मा, रोमा मल्होत्रा, महेन्द्र बैस, राजेश सिंह भदौरिया, विनोद नागर तथा महेन्द्र शर्मा ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। आभार प्रदर्शन महासचिव डॉ. शिशिर उपाध्याय ने किया, जबकि कार्यक्रम का सुसंगठित संचालन आशीष दवे ने किया। इन विभूतियों का हुआ सम्मान समारोह में देश-विदेश में मध्य प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली विभूतियों को ‘मप्र रत्न’ और ‘मप्र श्री’ सम्मान से अलंकृत किया गया। दोनों ही श्रेणियों में नौ-नौ विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। ‘मप्र रत्न’ से सम्मानित विभूतियां— अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कमेंटेटर पद्मश्री सुशील दोषी, विश्वविख्यात शास्त्रीय गायिका कलापिनी कोमकली, अमर उजाला समूह के डिजिटल हेड एवं वरिष्ठ पत्रकार जयदीप कर्णिक, ‘वन शॉट मूवी’ दिल्ली–2020 के निर्माता-निर्देशक देवेन्द्र मालवीय, अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत में पहचान बनाने वाले मुमताज़ खान, टीवी9 भारतवर्ष के वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गौतम, प्रसिद्ध नृत्यांगना एवं कोरियोग्राफर अमृता जोशी, आईएनएस 24×7 की न्यूज़ एडिटर सोनल भारद्वाज, तथा लोकप्रिय वेब सीरीज कोटा फैक्ट्री और हाफ सीए के निर्देशक प्रीतिश मेहता। ‘मप्र श्री’ सम्मान से … Read more