samacharsecretary.com

मंगलवार को आदिरंग शिल्पकार महोत्सव के समापन समारोह में पहुंचेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आदिरंग शिल्पकार महोत्सव 2026 के समापन समारोह में मंगलवार को होंगे शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान मध्यप्रदेश (एनआईडी एमपी) एवं वन्या, जनजातीय कार्य विभाग, द्वारा एनआईडी मध्यप्रदेश परिसर, अचारपुरा, भोपाल में आयोजित 23 जून मंगलवार को आदिरंग शिल्पकार महोत्सव 2026 समापन समारोह में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव महोत्सव के दौरान जनजातीय शिल्पकारों द्वारा विकसित नवाचारपूर्ण उत्पादों एवं डिजाइन हस्तक्षेपों की प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। साथ ही शिल्पकारों, डिजाइन विशेषज्ञों और प्रतिभागियों से संवाद भी करेंगे। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समारोह में जनजातीय कला, शिल्प और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों तथा डिजाइन आधारित नवाचारों की जानकारी दी जाएगी। पांच दिवसीय महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार भाग लेंगे। भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों द्वारा अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। महोत्सव में आयोजित डिजाइन हस्तक्षेप कार्यशालाओं में शिल्पकारों ने एनआईडी मध्यप्रदेश के संकाय सदस्यों एवं छात्र स्वयं सेवकों के सहयोग से बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप नए उत्पाद विकसित किए हैं। समापन समारोह के अवसर पर इन कार्यशालाओं के दौरान विकसित उत्पादों और डिजाइन अवधारणाओं की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी शाम 5:30 बजे से आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी, जहां आगंतुक उत्पादों को देख सकेंगे। साथ ही, भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों द्वारा प्रदर्शित मूल कलाकृतियां एवं हस्तशिल्प उत्पाद खरीद के लिए उपलब्ध रहेंगे। आदिरंग शिल्पकार महोत्सव जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को व्यापक मंच प्रदान करने के साथ शिल्पकारों के लिए नए बाजार एवं आजीविका के अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एनआईडी मध्यप्रदेश और वन्या के संयुक्त प्रयास से आयोजित यह महोत्सव डिजाइन और परंपरा के समन्वय का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।  

CM डॉ. यादव का बड़ा निर्देश: हर जिले में बनेगी हैचरी, मछली पालन को मिलेगा नया बढ़ावा

मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में विकसित की जाए एक हैचरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मछली पालन के लिए प्रदेश में होगा 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रदेश में मोती उत्पादन को किया जाए प्रोत्साहित मध्यप्रदेश बने मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि एकीकृत मत्स्योघोग नीति : 2026 के कारण प्रदेश में मछली पालन सेक्टर में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आ रहा है। प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 9 सौ 38 केज के प्रस्तावों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। प्रदेश में मोती उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाये, इसके लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस का अध्ययन कर उनका क्रियान्वयन प्रदेश में सुनिश्चित किया जायें। प्रदेश को मछली उत्पादन में आत्म निर्भर बनाना जरूरी है। अगले ढाई साल में हमें मछली बीज अन्य स्थानों से नहीं खरीदना पड़े, इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर विभाग कार्य करे। हर जिले में एक हेचरी आवश्यक रूप से विकसित की जाये। जिलों में मछली बीज आसानी से मिलने से प्रदेश में मछली उत्पादन में और बढ़ोत्तरी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मछुआ कल्याण तथा मत्यस्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। मंत्रालय में हुई बैठक में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्य मंत्री नारायण सिंह पवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, विभाग के सचिव स्वतंत्र कुमार सिंह तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। मछुआ क्रेडिट कार्ड में मध्यप्रदेश, देश में दूसरे स्थान पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बढ़ रहे मछली उत्पादन को दृष्टिगत रखते हुए कोल्ड चेन तथा अन्य आवश्यक इंफ्रास्टक्चर विकसित किया जाये। ब्रांडिंग और निर्यात के लिए आवश्यक नेटवर्किंग को भी प्रोत्साहित किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों के पुनर्जीवन, जलीय जीवों के संरक्षण के लिए सभी संबंधित विभाग परस्पर समन्वय से कार्य करें। जलीय ईको सिस्टम को विकसित करने और जल सम्पदा पर आधारित पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने के लिए भी कार्य योजना बनाई जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत अन्तर्देशीय जल क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। राष्ट्रीय स्तर पर अन्तर्देशीय मत्स्य पालन में सिवनी जिले को वर्ष 2023-24 के लिए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। 

भोपाल स्टेशन बनेगा नए दौर की पहचान, 350 करोड़ की लागत से मिलेगा मंदिर जैसा स्वरूप

भोपाल राजधानी के मुख्य रेल द्वार भोपाल जंक्शन रेलवे स्टेशन को जल्द ही एक नया और भव्य स्वरूप मिलने जा रहा है। रेलवे ने इस स्टेशन के कायाकल्प के लिए करीब 350 करोड़ रुपये के पुनर्विकास प्रोजेक्ट का प्रस्ताव तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भोपाल जंक्शन को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान देते हुए भव्य मंदिर शैली के अग्रभाग के साथ अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस किया जाएगा। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित इस परियोजना के लिए टेंडर और बिड से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज फाइनल कर अंतिम मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड को भेज दिए गए हैं, जहां से हरी झंडी मिलते ही धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। रानी कमलापति के बाद दूसरा पीपीपी स्टेशन इस बड़े बदलाव के बाद भोपाल जंक्शन शहर का ऐसा दूसरा रेलवे स्टेशन बन जाएगा, जिसे पीपीपी मॉडल के तहत पुनर्विकसित किया जा रहा है। इससे पहले भोपाल के ही रानी कमलापति रेलवे स्टेशन को इसी मॉडल पर विश्वस्तरीय बनाया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, इस नए प्रोजेक्ट के जरिए स्टेशन के मौजूदा बिल्ट-अप एरिया को 4,238 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 6,532 वर्ग मीटर किया जाएगा। इस बढ़े हुए दायरे से स्टेशन परिसर के भीतर यात्रियों को मिलने वाली सेवाओं और खाली स्पेस को बड़े पैमाने पर विस्तार देने में मदद मिलेगी। यात्रियों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं स्टेशन के भीतर आधुनिक सुविधाओं को बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर खाका तैयार किया गया है, जिससे यात्रियों का सफर और सुगम हो सके। परियोजना के प्रमुख बिंदुओं को इस प्रकार समझा जा सकता है:     स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार को पारंपरिक और भव्य मंदिर कला की थीम पर डिजाइन किया जाएगा।     यात्रियों की सुविधा के लिए पूरी तरह से वातानुकूलित (AC) प्रतीक्षालय और बेहतर बैठने की व्यवस्था होगी।     परिसर के भीतर आवागमन को आसान बनाने के लिए नए लिफ्ट और फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे।     स्टेशन पर मौजूद प्रसाधनों को अपग्रेड कर विश्वस्तरीय और स्वच्छ बनाया जाएगा।     बढ़े हुए निर्मित क्षेत्र के कारण यात्रियों को विभिन्न प्रकार की कमर्शियल सेवाएं भी स्टेशन के भीतर मिल सकेंगी। मंजूरी मिलते ही शुरू होगा निर्माण रेलवे प्रशासन का कहना है कि जैसे ही रेलवे बोर्ड से इस 350 करोड़ रुपये के बजट वाले प्रोजेक्ट को क्लीयरेंस मिल जाएगा, निर्माण एजेंसियां जमीन पर काम शुरू कर देंगी। इस पुनर्विकास से न केवल भोपाल जंक्शन पर यात्रियों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि भोपाल आने वाले पर्यटकों को स्टेशन से बाहर निकलते ही शहर की ऐतिहासिक और हेरिटेज पहचान की पहली झलक देखने को मिलेगी।

भोपाल मंडल के 15 स्टेशनों की बदलेगी तस्वीर, यात्रियों को मिलेंगे सिनेमाघर और गेमिंग जोन

भोपाल  यदि आप एक व्यापारी हैं, स्टार्टअप चलाते हैं या निवेश के लिए किसी बड़े और गारंटीड फुटफॉल (ग्राहकों की भारी मौजूदगी) वाले स्थान की तलाश में हैं, तो भारतीय रेलवे आपके लिए एक बेहतरीन मौका लेकर आया है। पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत पुनर्विकसित हो रहे 15 रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध वाणिज्यिक स्थानों (कमर्शियल स्पेस) के उपयोग के लिए बिज़नेस प्रपोजल मांगे हैं। यानी अब रेलवे स्टेशन सिर्फ ट्रेनों के आने-जाने का जरिया नहीं, बल्कि शहर के बड़े आर्थिक और व्यापारिक केंद्र (सिटी सेंटर) बनने जा रहे हैं। ड्राइव-इन सिनेमा से लेकर गेमिंग जोन तक रेल प्रशासन पारंपरिक दुकानों के ढर्रे से अलग हटकर ऐसे आधुनिक और यात्री-केंद्रित व्यावसायिक प्रस्तावों को बढ़ावा दे रहा है, जो स्टेशन परिसर को हाई-टेक लुक दे सकें। उद्यमी नीचे दी गई श्रेणियों या किसी अन्य नए आइडिया पर अपने प्रस्ताव दे सकते हैं। मनोरंजन और गैजेट्स: ड्राइव-इन सिनेमा, गेमिंग जोन, बाल मनोरंजन केंद्र और डिजिटल एक्सपीरियंस सेंटर। सुविधाएं और आतिथ्य: आधुनिक प्रतीक्षालय/लाउंज, पर्यटन एवं आतिथ्य सेवाएं और मल्टीफंक्शनल कॉम्प्लेक्स। बैंकिंग और टेक: डिजिटल बैंकिंग यूनिट, ई-लॉबी और हाई-टेक एटीएम। भोपाल मंडल के ये 15 स्टेशन बनेंगे 'बिजनेस हब' अमृत भारत योजना के तहत जहां नर्मदापुरम और शाजापुर स्टेशनों का पुनर्विकास पूरा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण कर चुके हैं, वहीं 13 अन्य स्टेशनों पर काम तेजी से जारी है। इनमें शामिल हैं। हरदा, खिरकिया, बनापुरा, इटारसी, साँची, विदिशा, गंजबासौदा, अशोकनगर, गुना, रुठियाई, शिवपुरी, ब्यावरा-राजगढ़ और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) स्टेशन पर बिजनेस सेंटर विकसित किए जाएंगे। टेंडर और ई-नीलामी से अलॉट होगी जगह, ऐसे करें शुरुआत पारदर्शी प्रक्रिया : इच्छुक कारोबारी संबंधित स्टेशन के मंडल वाणिज्य निरीक्षक से सीधे संपर्क कर सकते हैं। वे वहां उपलब्ध खाली स्थानों का निरीक्षण और सर्वेक्षण कर अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं। ऐसे होगा चयन : प्राप्त सभी प्रस्तावों का रेलवे बोर्ड की नीतियों के अनुसार परीक्षण किया जाएगा। जो प्रस्ताव व्यवहार्य पाए जाएंगे, उन्हें ई-नीलामी या टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।     अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत स्टेशन केवल यात्री सुविधाओं के केंद्र ही नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश एवं आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे। रेलवे पारंपरिक व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ नवाचारी व्यावसायिक अवधारणाओं का स्वागत ही नहीं बल्कि बढ़ावा दे रहा है जिससे शहर के विकास में रेलवे और अधिक योगदान दे सके। – सौरभ कटारिया, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, भोपाल मंडल  

भाजपा का बूथ स्तर पर बड़ा अभियान, MP में ‘बूथ गौरव दिवस’ के तहत होंगे विशेष कार्यक्रम

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में एक बड़ा अभियान शुरू का फैसला किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार आगामी 23 जून से 6 जुलाई तक पूरे देश सहित मध्य प्रदेश में 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी संस्मरण पक्ष' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश भाजपा इस पखवाड़े को जमीनी स्तर पर 'बूथ गौरव दिवस' और विशेष वैचारिक व्याख्यानों के रूप में मनाने जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर गठित केंद्रीय संचालन टोली में मध्य प्रदेश के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह को शामिल किया है, जो राज्य में इन सभी कार्यक्रमों की सीधी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। धारा 370 की समाप्ति और 'राष्ट्र प्रथम' पर केंद्रित विशेष व्याख्यान इस पखवाड़े का सबसे मुख्य वैचारिक केंद्र धारा 370 की समाप्ति रहेगा। व्याख्यानों और सम्मेलनों के माध्यम से कार्यकर्ताओं और जनता को बताया जाएगा कि कैसे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर डॉ. मुखर्जी के अखंड भारत के सपने को साकार किया गया है। इन विशेष व्याख्यानों के जरिए यह संदेश घर-घर पहुँचाया जाएगा कि 'राष्ट्र प्रथम' अब केवल एक भावना नहीं, बल्कि देश की जीवनधारा बन चुका है। तीन प्रमुख विषयों पर जिला कार्यकर्ता सम्मेलन राज्य के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर जिला कार्यकर्ता सम्मेलनों की रूपरेखा तैयार की गई है। इन सम्मेलनों में तीन अलग-अलग प्रबुद्ध वक्ताओं द्वारा डॉ. मुखर्जी के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान, एक केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी कार्यशैली और भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उनके ऐतिहासिक योगदान पर केंद्रित विशेष व्याख्यान दिए जाएंगे। युवा मोर्चा के नेतृत्व में 'बाहरी परिसर' छात्र सम्मेलन प्रदेश के सभी प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के बाहर युवा पीढ़ी और छात्रों को इस विचारधारा से जोड़ने के लिए छात्र सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार यह सभी कार्यक्रम शैक्षणिक परिसरों की सीमा से बाहर (आउटसाइड कैंपस) आयोजित होंगे, जिसकी पूरी कमान और नेतृत्व भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिम्मे सौंपा गया है। शहरों में नामकरण, प्रतिमा अनावरण और महा-वृक्षारोपण अभियान इस पखवाड़े के दौरान मध्य प्रदेश के प्रत्येक नगर और शहर में किसी प्रमुख चौराहे, उद्यान अथवा मार्ग का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जाएगा और उनकी प्रतिमा या चित्र का अनावरण भी होगा। इसके साथ ही, चूंकि राज्य में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ प्रत्येक बूथ पर प्रभावी रूप से व्यापक वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाएगा।

रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू का डंका विदेशों तक, GI टैग मिलने से बढ़ा सम्मान

रतलाम   मध्य प्रदेश को देश विदेश में पहचान दिलाने वाली रतलाम की बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को जीआई टैग मिल गया है. इससे पहले रतलाम की सेव और रियावन सिल्वर लहसुन को भी जीआई टैग मिला था. रतलाम मध्य प्रदेश का ऐसा पहला जिला है जहां की चार-चार यूनिक प्रोडक्ट को जीआई टैग मिला है. GI टैग मिलने से रतलाम के गराडू और सैलाना की बालम ककड़ी के उत्पादक किसानों को फायदा मिलेगा और मांग बढ़ने से इनके बेहतर दाम भी किसानों को मिल सकेंगे।  भारत सरकार से मिला GI टैग, किसानों को फायदा उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक मंगल सिंह डुडवे ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, '' सैलाना क्षेत्र में उगाई जाने वाली बालम ककड़ी और रतलाम जिले के बांगरोद के गराडू को भारत सरकार से जीआई टैग मिल गया है. वर्तमान में रतलाम जिले में बालम ककड़ी लगभग 100 हेक्टेयर और गराडू लगभग 120 हेक्टेयर में बोए जा रहे हैं. इन फसलों के उत्पादन से जिले के बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं. अब इन्हें रतलाम के नाम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल सकेगी. दोनों फसलों की मांग बढ़ने से किसानों को फायदा मिलेगा और जिले के अन्य किसान भी इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे।  क्यों खास है रतलाम की बालम ककड़ी? सैलाना क्षेत्र के आदिवासी अंचल में उगाई जाने वाली एक खास किस्म की ककड़ी जिसे बालम ककड़ी के नाम से जाना जाता है. अपने खास स्वाद और भीतर से निकलने वाले केसरिया और हरे रंग के लिए प्रसिद्ध है. वैसे तो ककड़ी को सलाद के रूप में उपयोग किया जाता है लेकिन इस बालम ककड़ी को लोग नाश्ते के तौर पर खाने में उपयोग करते हैं. बालम ककड़ी के खास स्वाद का आनंद बारिश के मौसम में केवल एक महीने के लिए ही लेने को मिलता है. अगस्त से सितंबर महीने के बीच बालम ककड़ी की बहार आती है।  रतलाम के नाम से जाना जाएगा मालवी गराडू रतलाम के बांदगरोद, खेतलपुर, सेजावता और धमोतर क्षेत्र में उगाया जाने वाला यह खास किस्म का कंदमूल फ्राई करके स्नैक्स के रूप में उपयोग किया जाता है. गराडू अपने बेहतरीन स्वाद, अंदर से मुलायम व बाहर से कुरकुरा होने की वजह से लोगों को खूब पसंद आता है. ठंड के मौसम में आने वाले इस फल के स्वाद का आनंद लेने के लिए देश के बड़े शहरों सहित दुबई तक से आर्डर आते हैं. गराडू विटामिन मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है. वैसे तो मालवा के अन्य जिलों में भी गराडू की खेती की जाती है लेकिन रतलाम के आसपास के गांव में उत्पादित किए जाने वाले गराडू की साइज और क्वालिटी अच्छी होती है इसलिए रतलाम के गराडू की मांग अधिक बनी रहती है।  क्या होता है जीआई टैग? जीआई टैग (GI Tag) यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग. जैसा की नाम से समझ आता है यहा किसी उत्पाद का 'भौगोलिक संकेतक' होता है. यह टैग प्रमाणित करता है कि वह उत्पाद उसी स्थान से आया है, जिसका दावा किया जा रह है.जीआई टैग आमतौर पर उत्पादके विशिष्ट भौगोलिक मूल स्थान, पारंपरिक गुणवत्ता और ख्याति के आधार पर दिया जाता है।  रतलाम के गराडू और सैलाना की बालम ककड़ी को जीआई टैग दिलवाने के प्रयास मध्य प्रदेश शासन के एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने शुरू किए थे. इसके बाद अब रतलाम जिले के पास चार-चार यूनिक प्रोडक्ट के जीआई टैग मौजूद है। 

मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में छाई ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’, 64 योगिनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री को मिली सराहना

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव मुंबई में प्रदर्शित हुई 64 योगिनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ संस्कृति विभाग एवं काली ट्रस्ट के सहयोग से निर्मित डॉक्यूमेंट्री का अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के बीच 64 कैनवास से 15,000 किलोमीटर की आध्यात्मिक यात्रा से सिनेमा तक का सफर भोपाल 19वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026 मुंबई में कलाकार एवं साधक डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की 64 योगिनी प्रदेश के मितावली स्थित मंदिर पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ का प्रदर्शन हुआ। संस्कृति विभाग एवं काली ट्रस्ट के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के लिए पहली बार प्रदर्शित की गई। मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (Mumbai International Film Festival – MIFF) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा फिल्म समारोह है। यह विशेष रूप से वृत्तचित्र, लघु कथा और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है। इस अवसर पर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अतिरिक्त सचिव प्रभात ने डॉ. बीना उन्नीकृष्णन एवं उनकी टीम को सम्मानित किया। कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार दीपक नारायण, एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर सुदीप्ति चावला, डॉ. बीना उन्नीकृष्णन, सिनेमैटोग्राफर प्रदीप सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति रही। हमारी पुरातन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं 64 योगिनी मंदिर: अपर मुख्य सचिव शुक्ला मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश के मितावली (मुरैना), जबलपुर और खजुराहो के 64 योगिनी मंदिर हमारी पुरातन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। मितावली का 64 योगिनी मंदिर, जिसने भारत की पुरानी संसद भवन की वास्तुकला को प्रेरित किया, यह आज यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूचि में भी शामिल है। ‘Y64 – Whispers of the Unseen’ जैसी परियोजना इस अद्वितीय विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचा रही है। डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की कलात्मक यात्रा के माध्यम से यह फिल्म युवाओं को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए सृजनशीलता, साहस, आत्म-अन्वेषण और स्त्री शक्ति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों से परिचित कराती है। 64 योगिनियों ने मुझे इस कार्य के लिए चुना, यह मेरा सौभाग्य : डॉ. बीना उन्नीकृष्णन डॉ. बीना उन्नीकृष्णन ने बताया कि लगभग साढ़े बारह वर्ष पूर्व उन्होंने 64 योगिनियों के चित्रांकन की प्रक्रिया को केवल एक दस्तावेज़ के रूप में संजोने की शुरुआत की थी, लेकिन समय के साथ यह प्रयास समर्पण, धैर्य और आत्म-परिवर्तन की प्रेरणादायक सिनेमाई यात्रा बन गया। इस वर्ष उन्होंने 64 मूल चित्रों के साथ भारत के 14 शहरों में लगभग 15,000 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर हजारों लोगों को योगिनी परंपरा से परिचित कराया तथा कला, संस्कृति और अध्यात्म पर व्यापक संवाद स्थापित किया। उन्होंने कहा “जब मैंने यह यात्रा शुरू की थी, तब मैं केवल उत्तर खोजती एक कलाकार थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह एक पुस्तक, प्रदर्शनी, हजारों किलोमीटर की यात्रा और अंततः एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का रूप ले लेगी। योगिनियों ने मुझे भय से परे जाना और अपने स्त्रीत्व तथा अदृश्य मार्ग पर विश्वास करना सिखाया। मैं हमेशा कहती हूँ कि मैंने योगिनियों को नहीं चुना, बल्कि योगिनियों ने मुझे चुना है। उन्होंने बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री केवल योगिनी मंदिरों के इतिहास और रहस्य को नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आह्वान को पूरा करने के लिए आवश्यक साहस और समर्पण की कहानी भी प्रस्तुत करती है। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने मध्यप्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। विरासत और संस्कृति का अद्भुत संगम है फिल्म 64 योगिनि मंदिरों से प्रेरित यह अनूठी फिल्म, संस्कृति, अध्यात्म और विरासत का अद्भुत संगम है। कंकाली ट्रस्ट और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री भारत के योगिनी मंदिरों से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उत्सव भी है। यह डॉक्यूमेंट्री दर्शकों को ऐसे संसार में ले जाती है, जहाँ कला, आस्था, इतिहास और आत्म-परिवर्तन एक-दूसरे से जुड़कर एक अद्वितीय अनुभव का निर्माण करते हैं। 

मोहन कैबिनेट में नए चेहरे, पुराने मंत्रियों पर संकट! 3 सीनियर मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने जा रही इस नई कैबिनेट में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 23 से 30 जून के बीच यह विस्तार हो सकता है। इस बड़े फेरबदल में बेहतर परफॉर्मेंस न देने वाले 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है, जबकि 7 से 8 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। फिलहाल मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट की संख्या 31 है, जबकि 4 पद खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट के कुछ बेहद सीनियर मंत्री मुख्यमंत्री से ज्यादा अपनी वरिष्ठता के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र में संगठन की कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।  इसके अलावा, सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले जनजातीय कल्याण मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कई बार सरकार को फटकार लगा चुका है। विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, राधा सिंह और प्रतिमा बागरी पर भी गाज गिर सकती है। इन नए चेहरों की हो सकती है एंट्री नए चेहरों की बात करें तो सागर से शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी रेस में आगे चल रहा है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की भी कैबिनेट में वापसी की पूरी उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार केवल मंत्रियों के चेहरे ही नहीं बदलेंगे, बल्कि लगभग सभी मंत्रियों के विभागों में भी भारी फेरबदल किया जाएगा। सीएम बोले- परफॉर्मेंस बनेगा आधार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल का मुख्य आधार मंत्रियों का कामकाज रहेगा। अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मंत्रियों व विधायकों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा होती है, जिसमें शीर्ष नेतृत्व के सुझाव भी शामिल रहते हैं। बीजेपी के सामने प्रमुख राजनीतिक समीकरण जानकारों के अनुसार इस फेरबदल के जरिए बीजेपी कई राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण साधना चाहती है।     बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व बढ़ाना: क्षेत्र की सीमित हिस्सेदारी से उपजी नाराजगी दूर करने के लिए सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ से नए मंत्रियों को मौका दिया जा सकता है।     महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाना: महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए रीती पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को अवसर मिल सकता है।     ओबीसी समीकरण और 2028 की तैयारी: आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।     निकाय चुनाव की तैयारी: अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए संगठन सीटों की स्थिति, प्रत्याशी चयन, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति पर फीडबैक जुटा रहा है।     सिंधिया खेमे और मूल संगठन में संतुलन: मौजूदा कैबिनेट में सिंधिया समर्थक नेताओं की मजबूत मौजूदगी है। फेरबदल में पार्टी को यह प्रभाव बनाए रखते हुए संगठन के पुराने नेताओं को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देना होगा। इन मंत्रियों पर हटने का खतरा समीक्षा रिपोर्ट और विवादों के आधार पर कुछ मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:     विजय शाह: कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के बाद वे आलोचनाओं के केंद्र में रहे। मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां और संगठन की नाराजगी भी सामने आई। पूर्व में भी उनके कुछ बयान पार्टी के लिए असहजता का कारण बने थे।     दिलीप अहिरवार: पहली बार विधायक बने अहिरवार को कैबिनेट में जगह मिली थी। हालांकि हालिया समीक्षा में उनके कामकाज को अपेक्षित स्तर का नहीं माना गया, जिससे उनकी स्थिति कमजोर बताई जा रही है।     प्रतिमा बागरी: उनका नाम जाति प्रमाण पत्र संबंधी विवाद में चर्चा में रहा है, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य स्तरीय जांच समिति से रिपोर्ट मांगी है। उनके भाई की गिरफ्तारी का मामला भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना।     राधा सिंह: पहली बार विधायक बनीं राधा सिंह के विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। इसके बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।     एदल सिंह कंषाना : रेत खनन और माफिया को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। उनके स्टाफ के सदस्य तबादलों के एवज में रिश्वत मांगते के खुफिया कैमरे में कैद हुए। इन मंत्रियों के विभागों में हो सकता है बदलाव     प्रहलाद पटेल: उन्हें संगठन या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। राज्य मंत्रिमंडल में बने रहने पर उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त विभाग भी दिए जा सकते हैं।     कैलाश विजयवर्गीय: विभागों में बदलाव संभव है, लेकिन उनकी राजनीतिक भूमिका और जिम्मेदारियां क्या होंगी इसे लेकर अभी संशय की स्थिति है।     तुलसीराम सिलावट: विभागीय पुनर्संतुलन के तहत उनके विभाग में बदलाव की संभावना बताई जा रही है। वरिष्ठ पत्रकार एन के सिंह कहते हैं कि एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव देश के उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में हैं, जिन्होंने सपने में भी मुख्यमंत्री बनने की कल्पना नहीं की थी। पार्टी ने उन्हें तीसरी या चौथी पंक्ति से उठाकर इतने बड़े पद पर बैठाया है। उनके साथ प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गज नेता काम कर रहे हैं, जो अनुभव और कद में उनसे कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में इन नेताओं का असहज होना लाजमी है। यह उस समय का पॉलिटकल कंपल्शन या मजबूरी थी। यह चल रहा था और आगे भी चल सकता है। नए चेहरों की एंट्री: कौन हैं दावेदार? संभावित नए चेहरों में सागर के प्रदीप लारिया प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी चर्चा में है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम … Read more

सरकार का बड़ा फैसला: 48 लाख लोगों की होगी मुफ्त रजिस्ट्री, कपास पर मंडी शुल्क घटा और सामान्य शुल्क बढ़ा

भोपाल  स्वामित्व योजना में 48 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त में रजिस्ट्री कराने राज्य सरकार ने पंचायत उपकर और पंजीयन शुल्क माफ करने का अध्यादेश जारी कर दिया है। इसके लिए विधानसभा में दोनों ही विभागों से संबंधित मामलों में विधेयक भी सरकार मानसून सत्र के दौरान ला सकती है। इसके साथ ही 9 जून को कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले के आधार पर कपास पर मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से घटाकर 0.50 प्रतिशत करने और मंडी में लगने वाले सामान्य शुल्क को एक से 1.50 प्रतिशत करने का नोटिफिकेशन भी सरकार ने जारी कर दिया है। मोहन यादव सरकार ने 2 जून को हुई कैबिनेट बैठक में 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के अंतर्गत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है। इससे सरकार पर 3800 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आने वाला है। अलग-अलग विभाग न जारी किए नोटिफिकेशन इस निर्णय पर अमल के लिए राज्य सरकार के पंजीयन और पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग ने अलग-अलग अध्यादेश के नोटिफिकशन जारी कर दिए हैं। पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत उपकर के रूप में ली जाने वाली राशि ऐसे मामलों में माफ किए जाने और पंजीयन विभाग ने पंजीयन व मुद्रांक शुल्क माफ किए जाने का नोटिफिकेशन किया है। नौ जून को हुई कैबिनेट में तय किया गया है कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस की कमी पूरी करने एवं पंजीयन की कार्यवाही होगी। इसके बाद नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगे। आयुक्त भू संसाधन की कमेटी पूरी कराएगी प्रोसेस योजना के क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी, सदस्य होंगे एवं आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को संयोजित किया जा सकेगा। योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना का परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है। कपास पर ली जाने वाली मंडी फीस कम करने के आदेश 9 जून को मोहन कैबिनेट ने कपास पर ली जाने मंडी फीस को 1% से घटाकर 0.5% करने का निर्णय लिया था। इसके बाद किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इसका नोटिफिकेशन कर दिया है। इसमें कहा गया है कि कपास की कीमत के हर 100 रुपए पर मंडी फीस 0.50 रुपए यानी 50 पैसे होगी। सरकार का दावा है कि इससे स्थानीय जिनिंग मिलों को मजबूती मिलेगी और रोजगार बढ़ेगा। प्रदेश में लगभग 158 कपास जिनिंग मिलें है, जिनकी प्रोसेसिंग कैपिसिटी लगभग 13 लाख मीट्रिक टन है। महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में रुकेगा पलायन प्रदेश में कपास पर मंडी फीस की दर में कमी किए जाने से जिनिंग मिलों का महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में पलायन रुकेगा। इन्हें प्रदेश में ही व्यवसाय करने को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे रोजगार में तथा जीएसटी संग्रहण में वृद्धि होगी। जिनिंग मिलों की इनपुट लागत में कमी आएगी और उनकी आर्थिक व्यवहारिता में वृद्धि होगी। महाराष्ट्र सरकार पहले ही 0.5 प्रतिशत फीस ले रही है जिसके चलते एमपी का जिनिंग मिल कारोबार प्रभावित हो रहा था। नोटिफाइड उपज के हर 100 रुपए पर डेढ़ रुपए लगेगा मंडी शुल्क इसके साथ ही कृषि उपज मंडियों में लगने वाले सामान्य मंडी शुल्क को एक रुपए से बढ़ाकर एक रुपए 50 पैसे किया गया है। इससे 500 करोड़ रुपये की आय होगी। 9 जून को हुए कैबिनेट के फैसले के बाद किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इसका नोटिफिकेशन कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अधिसूचित कृषि उपज की कीमत के हर 100 रुपए पर मंडी टैक्स 1 रुपए के स्थान पर 1.50 रुपए वसूला जाएगा। इस राशि से जिलों में कोल्डस्टोरेज, वेयरहाउस प्रोसेस्ड यूनिट्स एवं लॉजिस्टिक सुविधाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। इस शुल्क राशि में से 50 पैसे व्यापार विकास निधि के अंश के रूप में किसानों के कल्याण में उपयोग किया जायेगा। इसमें निराश्रित शुल्क को यथावत् 20 पैसे रखा जाएगा। बाकी आय का उपयोग किसान सड़क निधि एवं कृषि अनुसंधान तथा अधोसंरचना विकास में किया जाएगा।

महाकाल भक्तों के लिए बड़ा बदलाव! भस्म आरती में अब 3 माह में एक बार ही मिलेगा मौका

उज्जैन उज्जैन में भगवान महाकाल की भस्म आरती की अनुमति के लिए अब श्रद्धालु तीन माह में केवल एक बार अपने मोबाइल नंबर का उपयोग कर सकेंगे। यह व्यवस्था प्रोटोकॉल से आने वाले ऐसे मोबाइल नंबरों पर भी लागू होगी, जिनसे हर माह भस्म आरती की अनुमति ली जा रही है। हालांकि, मंदिर समिति का कहना है कि यह व्यवस्था पहले से लागू है, जिसे अब और प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। करीब दो वर्ष पहले तक श्रद्धालु भस्म आरती की बुकिंग 15 दिन पहले ऑनलाइन करवा सकते थे। इसके लिए मोबाइल नंबर से जुड़ा कोई विशेष नियम नहीं था। वर्ष 2024 में भस्म आरती की अनुमति को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के चलते तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने ऑनलाइन बुकिंग कराने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति देने का निर्णय लिया था। यह व्यवस्था कुछ समय तक लागू रही, लेकिन बाद में बंद कर दी गई थी। अब एक बार फिर भस्म आरती की अनुमति को लेकर मिल रही शिकायतों के चलते मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि एक मोबाइल नंबर का उपयोग तीन माह बाद ही दोबारा किया जा सकेगा। इस व्यवस्था को लागू भी कर दिया गया है। अब जो श्रद्धालु प्रोटोकॉल या अन्य माध्यमों से हर माह भस्म आरती की अनुमति लेकर दर्शन करने आते थे, उन्हें तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति मिल सकेगी। महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है। इसे अब और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। अब एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग नहीं किया जा सकेगा। वर्ष 2024 में भी हुआ था नियम लागू बता दें कि 2024 में भी तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने भस्म आरती की बुकिंग में धांधली की शिकायतों के बाद एक आधार और एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में एक बार अनुमति का नियम बनाया था। कुछ समय तक ये व्यवस्था चली, लेकिन बाद में बंद कर दी गई थी। अब फिर से शिकायतें बढ़ने पर नियम को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। मंदिर प्रशासन ने दी सफाई महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भस्म आरती में सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिले और कुछ लोगों द्वारा बार-बार बुकिंग कर सीटें कब्जाने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके। आम श्रद्धालुओं को मिलेगा फायदा मंदिर समिति का मानना है कि नए नियम से उन भक्तों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से भस्म आरती के दर्शन के लिए स्लॉट मिलने का इंतजार करते हैं। अब एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार बुकिंग करने की संभावना कम होगी और अधिक श्रद्धालु इस विशेष आरती में शामिल हो सकेंगे। इससे भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी बढ़ेगी। क्या बदला नए नियम में? अब एक मोबाइल नंबर और एक आधार कार्ड से तीन महीने में केवल एक बार ही भस्म आरती की अनुमति मिलेगी। यह नियम आम श्रद्धालुओं और प्रोटोकॉल श्रेणी दोनों पर समान रूप से लागू रहेगा। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य भस्म आरती में सभी भक्तों को समान अवसर उपलब्ध कराना और बुकिंग प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। प्रशासक बोले – नियम नया नहीं, सिर्फ सख्ती बढ़ाई महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने साफ किया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है। अब इसे और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है ताकि आम श्रद्धालुओं को भी आसानी से दर्शन का मौका मिले। अब एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग नहीं हो सकेगा। जानिए क्या बदला नियम में? • पहले: प्रोटोकॉल से हर महीने बुकिंग संभव थी • अब: हर मोबाइल नंबर से 3 महीने में सिर्फ 1 बार बुकिंग • लागू: आम श्रद्धालु + प्रोटोकॉल दोनों पर • मकसद: बार-बार दर्शन करने वालों पर रोक, सबको समान मौका • आधार कार्ड: एक आधार से भी 3 महीने में 1 बार ही अनुमति आम श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत इस नियम से उन आम भक्तों को फायदा होगा जो महीनों तक ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते थे। अब वीआईपी और बार-बार दर्शन करने वालों की मोनोपॉली टूटेगी। मंदिर समिति का दावा है कि इससे भस्म आरती में पारदर्शिता बढ़ेगी।    .