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सुपरमार्केट्स को मिली GST छूट, छोटे दुकानदारों को छोड़ दिया बाहर

 ग्वालियर  जीएसटी कम होने के बाद मंगलवार को कांच मिल क्षेत्र के निवासी बीपी श्रीवास्तव ने दुकान से घी का पैकेट खरीदा। घी का पैकेट 595 रुपए में दुकानदार ने दिया। पहले भी उन्हें घी का पैकेट इतनी ही कीमत में मिलता था। जब उन्होंने दुकानदार से जीएसटी कम करके घी देने के लिए कहा तो उसने कहा कि अभी तो पुरानी रेट में ही मिलेगा। जब हमें कम कीमत पर मिलेगा तब हम भी आपको कम कीमत पर देंगे। ऐसा केवल एक व्यक्ति के साथ नहीं हो रहा है, बल्कि शहर में बड़े सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर को छोड़ दें, गली मोहल्लों सहित अन्य जगहों की दुकानों पर जीएसटी कम होने के बाद भी सामान पुरानी कीमत या एमआरपी पर ही मिल रहा है। बिस्किट हो, चिप्स का पैकेट हो या अन्य ऐसी ही कोई पैक्ड सामग्री हो, उपभोक्ताओं को जीएसटी की छूट लागू होने के दो दिन बाद भी एमपीआरपी पर ही मिल रहे है। ऐसे में अभी लोगों को जीएसटी कम होने से कम ही राहत मिल पा रही है। सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर पर क्यों मिल रही है छूट     सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर न केवल जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं, बल्कि वे बिलिंग भी सॉफ्टवेयर से करते हैं। ऐसे में उनके साफ्टवेयर में जीएसटी कम कर दिया गया है। इसलिए इन स्टोर पर लोगों को कम कीमत में सामान मिल रहा है। जबकि छोटी व गली मोहल्लों की दुकानों में से अधिकतर जीएसटी में रजिस्टर्ड ही नहीं है, साथ ही इन दुकानों पर बिलिंग के लिए किसी तरह का साफ्टवेयर भी उपयोग नहीं करते। ऐसे में ये दुकानदार अभी भी जीटएसटी कम होने के बाद भी पुरानी एमआरपी पर ही चीजें बेच रहे हैं। शहर में अधिकतर दुकानदारों को सामान डिस्ट्रीब्यूटर या उनके एजेंट ही सप्लाई करते हैं। ये लोग सीधे सीधे कच्चे बिल पर ही माल सप्लाई करते हैं। ऐसे में दुकानदारों का कहना है कि एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर को तो हम माल के पैसे दे चुके हैं, अब वो वापस नहीं करेगा। इसलिए जब तक पुराना माल है तब तक पुरानी ही कीमत में बेचेंगे। जिन मेडिकल स्टोरों पर कंप्यूटर से बिलिंग हो रही है वहां पर लोगों को दवाओं पर जीएसटी से राहत मिल रही है। हालांकि मेडिकल स्टोर वाले अब पहले जो 10 से 15 प्रतिशत डिस्काउंट दवा पर देते थे, वह नहीं दे रहे हैंं। ऑनलाइन ग्रोसरी का सामान बेचने वाली कंपनियों ने भी कीमत घटाई ऑनलाइन ग्रोसरी सहित अन्य आयटम बेचने वाली कंपनियों ने अपने यहां सभी सामग्रियों की कीमतों को जीएसटी कटौती के मुताबिक घटा दिया है। आर्डर मिलने के बाद वे तुरंत डिलेवरी भी दे रही हैं। ऐसे में लोग अब दुकानों से पुरानी दरों की जगह ऑनलाइन चीजें मंगा रहे हैं। दुकानदारों की यह भी समस्या गोले का मंदिर चौराहे पर एक दुकानदार से जब 5 रुपए का बिस्किट पैकेट और एक 10 रुपये का चिप्स का पैकेट लिया गया और उससे जीएसटी कम करने की बात की तो उसने कहा कि माल नहीं बेच पाएंगे, क्योंकि आप तो 5 और 10 का सिक्का या नोट दोगे। बिस्किट पर 20 पैसे कम होंगे और चिप्स पर 40 पैसे। ऐसे में अब 60 पैसे मैं कहां से लाउंगा। ये सिक्के तो अब चलन में भी नहीं है। इस वजह से 5 से लेकर 50 रुपये की चीजें पुरानी कीमतों पर ही बिक रही हैं। क्या कहते हैं दुकानदार     पांच से दस रुपये या सौ रुपये तक के पैकेट पर जीएसटी कम करके बेचें भी, लेकिन छोटे सिक्के चलन में नहीं है। ऐसे में इन चीजों को एमआरपी पर ही बेचना पड़ रहा है। जिन चीजों पर 20 से 30 या अधिक राशि छूट की होती है उसमें जरूर कम करते हैं। – प्रमोद जैन, किराना दुकानदार जब नया स्टॉक आएगा तभी कम करेंगे     अभी तक घर के उपयोग की जो भी चीजें खरीदी हैं, उन वे सभी एमपीआरपी या पुरानी दर पर मिल रही थी, उसी पर मिल रही हैं। दुकानदार कह देते हैं, जब नया स्टॉक आएगा तभी ही कम पर मिलेंगी। – सुधीर झा, निवासी मुरार क्या कहते हैं व्यापारी संघ के पदाधिकारी     जब भी नई व्यवस्था होती है तो उसमें स्थिरता आने में समय लगता है। वर्तमान में जीएसटी का फायदा 5 हजार रुपये से अधिक की खरीदारी पर ही दिखेगा। दुकानदारों के पास 10 से 15 दिन या एक महीने का ही स्टाक होगा। तब तक छोटे आयटमों पर ही जीएसटी का फायदा आम आदमी को नहीं मिलेगा। लेकिन एक महीने में यह व्यवस्था पूरी तरह से सेटल हो जाएगी। इसके बाद सभी को राहत मिलेगी और बचत होगी। – प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ कॉमर्स  

स्विट्जरलैंड में रह रही रोहिणी ने सांसद पर गंभीर आरोप लगाए, आत्महत्या की धमकी से परिवार में चिंता

इंदौर  भीम आर्मी के संस्थापक और यूपी के नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद चंद्रशेखर पर इंदौर की एक महिला ने यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पीएचडी स्कॉलर डॉ रोहिणी घावरी ने बुधवार को धमकी दी है कि उन्हें अगर न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेंगी. इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर कई पोस्ट किए हैं. डॉ रोहिणी घावरी इंदौर की रहने वाली हैं और वर्तमान में वह स्विटजरलैंड में रह रहीं हैं. सोशल मीडिया पर उनकी आत्महत्या की बात से इंदौर में रहने वाले उनके माता-पिता परेशान हैं और अपनी बेटी से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका अब तक उनकी बेटी रोहिणी से संपर्क नहीं हो पाया है. सांसद चंद्रशेखर पर शारीरिक और मानसिक शोषण का आरोप इंदौर की रहने वाली डॉ रोहिणी घावरी ने नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण पर कई दिनों तक शारीरिक और मानसिक रूप से शोषण का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि इस मामले की शिकायत वह कई बार दिल्ली पुलिस को कर चुकी हैं. अधिकारियों से मिलकर कई सबूत भी दे चुकी हूं लेकिन पुलिस ने इस मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की. 3 महीने पहले लगाए थे रोहिणी ने आरोप डॉ रोहिणी घावरी ने चंद्रशेखर पर 3 महीने पहले गंभीर आरोप लगाए थे. पुलिस के साथ उन्होंने महिला आयोग में भी शिकायत की थी और कहा था कि यह स्वाभिमान और आत्मसम्मान की लड़ाई है और वह अब पीछे नहीं हटेंगी. महिला आयोग में की गई शिकायत में उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर से उनकी मुलाकात 2020 में हुई थी. 2024 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उनका व्यवहार बदल गया. इंदौर में रहने वाले माता-पिता परेशान सोशल मीडिया पर उनकी आत्महत्या वाली पोस्ट देखकर इंदौर में रहने वाले उनके माता-पिता परेशान हैं. पिता शिव घावरी का कहना है कि "उन्हें भी सोशल मीडिया के द्वारा अपनी बेटी के द्वारा इस तरह के कदम उठा लेने की जानकारी मिल रही है. वह पिछले कई घंटों से लगातार अपनी बेटी रोहिणी से संपर्क करने में लगे हुए हैं लेकिन अभी तक उसने हमसे भी कोई बात नहीं की है. जिसके चलते हम काफी डिप्रेशन में आ चुके हैं." '2020 में रोहिणी से हुई थी जान-पहचान' रोहिणी के पिता शिव घावरी ने भी चंद्रशेखर उर्फ रावण पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उनकी बेटी की शिकायत पर सुनवाई नहीं हो रही है. चंद्रशेखर से 2020 में उसकी जान पहचान हुई थी. चंद्रशेखर ने रोहिणी को यह आश्वासन दिया था कि वह अविवाहित है और उससे शादी कर लेगा. इसके चलते दोनों काफी दिनों तक साथ में भी रहे. कौन हैं रोहिणी घावरी इंदौर की रहने वाली वाली रोहिणी घावरी बाल्मिकी समुदाय से आती हैं और उनके पिता सफाईकर्मी हैं. 2019 में मध्य प्रदेश सरकार की स्कॉलरशिप से स्विट्जरलैंड में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं. उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी किया है. इसके पहले रोहिणी ने इंस्टिट्यूट ऑफ कॉमर्स से फॉरेन ट्रेड में बीबीए किया है. उसके बाद इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से मार्केटिंग में एमबीए किया है. वह अपना एक एनजीओ भी चलाती हैं और दलित समुदाय के उत्थान के लिए काम करती हैं. 

सीवर लाइन में उतरे मजदूरों पर आफत, सतना में एक की जान गई, दो घायल

सतना जिला में मैला सफाई के दौरान एक मजदूर की जान गवाने का मामला सामने आई है। सतना नगर निगम क्षेत्र कृपालपुर में सफाई के लिए तीन मजदूर सीवर लाइन की पाइप में उतरें। लेकिन पाइप के अंदर अंदर मीथेन गैस के रिसाव के प्रभाव में आकर तीनों मजदूर अंदर ही बेहोश हो कर फस गए। जिसकी जानकारी लगते ही स्थानीय लोगों द्वारा तीनों मजदूरों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। लेकिन उनमें से एक मजदूर अमित कुमार कि तब तक जान जा चुकी थी। जबकि दो गंभीर रूप से घायल हैं। इनकी कोई पहचान नहीं हो सकीं। इस दौरान लोगों ने शहर सरकार के ऊपर गंभीर आरोप लगाए कि इस घटना की जानकारी लगते ही मौके पर जुटे लोगो ने 112, फायर, नगर निगम, महापौर सभी को इसकी जानकारी दी लेकिन मौके ओर कोई नही पहुंचा। जिससे नाराज लोगो ने मजदूरों की जनन बचने और उन्हें बाहर निकलने की जद्दोजहद में जुट गए और पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने लगे। इसके बाद नगर निगम के अभियंताओं से लेकर महापौर तक सब घटनास्थल पर पहुच गए। हालंकि इस घटना के बाद मजदूरों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्थानीय नागरिक सौरभ सिंह ने कोलगवां थाने में लिखित शिकायत करते हुए संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का शिकायती आवेदन भी दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2019 से 2024 के बीच सीवर और सेप्टिक टैंक में उतरने के कारण दिल्ली में ही 37 लोगों की मौत हो चुकी है। ये मौतें तब हुईं, जब सरकार मशीनों से सफाई कराने का दावा करती रही है। वहीं 2019 से अब तक देश भर में 430 लोगों की मौत हो चुकी है। वो भी तब जब बिना उपकरणों के सफाई कराने के खिलाफ कानून मौजूद हैं। चार दिन में दूसरा हादसा लगातार दूसरी घटना से दहशत का माहौल सीवर चेंबर में जहरीली गैस से कर्मचारियों की तबीयत बिग?ने का ये दूसरा मामला है। इससे पहले 22 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे महादेव रोड पर क्रिस्तुकुला स्कूल के पास आदर्श शुक्ला और किशन वर्मा सीवर लाइन की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान जहरीली गैस के कारण दोनों बेहोश होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत अधिकारियों को सूचना दी। दोनों कर्मचारियों को बाहर निकाला। एसडीएम राहुल सिलडय़िा मौके पर पहुंचे और अपनी गाड़ी से दोनों कर्मचारियों को जिला अस्पताल ले गए थे। यह हादसा बीते सप्ताह हुई समान घटना के बाद सामने आया है, जिसने सफाईकर्मियों और उनके परिजनों में भारी दहशत फैला दी है। सवाल यह है कि लाखों रुपए खर्च कर खरीदी गई सुरक्षा किट मजदूरों तक क्यों नहीं पहुंचाई जा रही? 2 घायल गायब, पीडि़त के स्वजनों को 50 लाख मुआवजे की मांग घटना के बाद जिला कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ता जिला चिकित्सालय पहुंच गए। जहां उन्हें हादसे में घायल दो मजदूर नदारद मिले, जिनकी जानकारी किेसी भी प्रशासनिक अमलें को नहीं थी। जिसके बाद सभी कांग्रेसियों ने मजदूर के पीडि़त स्वजनों को पचास लाख मुआवजा देने की मांग पर अड़ गए। कांग्रेसियों ने मौके पर ही दो अन्य घायलों को ठेकेदार पर गायब कराने का आरोप लगाया। जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा ने कहा, कलेक्टर से हुई है चर्चा। मामले के सभी दोषियों पर प्रकरण दर्ज कराने और मृतक को मुआवजा दिलाने की मांग रखी गई है । ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएं।  

छोटी बात पर बस में भिड़े शिक्षक और प्राचार्य, बालाघाट के स्कूल में पैदा हुआ तनावपूर्ण माहौल

बालाघाट लालबर्रा के नेवरगांव स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक व्यवसायिक शिक्षक ने प्रभारी प्राचार्य की सिर्फ इसलिए बेरहमी से पिटाई कर दी, क्योंकि प्रभारी प्राचार्य ने शिक्षक को नियत समय पर ही स्कूल से जाने कहा था। जल्दी छुट्टी न देने पर व्यवसायिक शिक्षक वीरेंद्र ब्रम्हे इतना आक्रोशित हो उठा कि उसने मौका पाते ही प्रभारी प्राचार्य नवीन लोढ़ा की बस में पिटाई कर दी। प्राचार्य को आईं गंभीर चोटें हाथ-मुक्कों से पिटाई से नवीन को गंभीर चोटें आई हैं। वह जिला अस्पताल में भर्ती हैं। शिक्षक ने प्रभारी प्राचार्य को जान से मारने की धमकी देकर गाली-गलौच की। घटना बुधवार शाम की है। जानकारी लगते ही गुरुवार सुबह स्कूली विद्यार्थी आक्रोशित हो गए। उन्होंने दोपहर डेढ़ बजे तक स्कूल में प्रदर्शन किया। कक्षाएं नहीं लगने दीं और जमकर नारेबाजी की। फिर से शुरू किया गया स्कूल का संचालन तहसीलदार, बीआरसी, बीईओ की समझाइश के बाद विद्यार्थियों ने प्रदर्शन समाप्त किया और स्कूल का संचालन किया गया। प्रभारी प्राचार्य की शिकायत पर लालबर्रा पुलिस ने आरोपित शिक्षक वीरेंद्र ब्रम्हे के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। इस घटना की आजाद अध्यापक संघ ने कड़ी निंदा की है।

रीवा में BJP ने बनाई नई टीम, ब्राह्मण नेतृत्व को बढ़ावा, महिलाओं को मिली जगह

रीवा  मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपनी कार्यकारिणी की घोषणा कर रही है। 62 संगठनात्मक जिलों में से अब तक 30 से ज्यादा जिलों की कार्यकारिणी घोषित हो चुकी है। अब रीवा के लिए अपनी नई जिला स्तरीय नेतृत्व टीम को घोषित कर दिया है। यह कदम आने वाले समय की राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। चुनौतियों के पहले संगठनात्मक ताकत को मजबूत किया जा सके। इन नियुक्तियों को बीजेपी प्रेदश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मंजूरी दी। इसकी औपचारिक घोषणा रीवा बीजेपी के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने की। उन्होंने बताया कि यह टीम अनुभवी नेताओं और युवा चेहरों का मिश्रण है, जिसका मकसद जिले में पार्टी की पकड़ और मजबूत करना है। इनको मिली जिम्मेदारी पार्टी ने एक बयान में कहा कि इस घोषणा में सात जिला उपाध्यक्ष, तीन महासचिव, सात सचिव और दो वित्त संबंधी पद शामिल हैं। उपाध्यक्षों में प्रबोध व्यास, मनीषा पाठक, अशोक सिंह गहरवार, शरद साहू, राजेश प्रताप सिंह, मनीष चंद्र शुक्ला और संध्या कोल (गौटिया) को जिम्मेदारी दी गई है। ये बनाए गए महासचिव नियुक्त महासचिवों में उमाशंकर पटेल, विवेक गौतम और जीवनलाल साकेत शामिल हैं। वहीं, सचिवों में कल्पना पटेल, रविराज विश्वकर्मा, प्रणेश ओझा, गीता मांझी, बृजेंद्र गौतम, सुमन शुक्ला और बाबूलाल यादव शामिल हैं। वित्त विभाग में वासुदेव थारवानी को जिला कोषाध्यक्ष और अलकनरायन केशरवानी को सहायक कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। 5 महिलाओं को भी मिली जिम्मेदारी इस कार्यकारिणी में पांच महिला नेताओं मनीषा पाठक, संध्या कोल, कल्पना पटेल, गीता मांझी और सुमन शुक्ला को भी शामिल किया गया है। इससे साफ होता है कि भाजपा महिला नेतृत्व और लैंगिक संतुलन पर जोर दे रही है। जिला अध्यक्ष ने किया संबोधित जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ने कहा कि नई टीम का गठन प्रदेश नेतृत्व की सहमति से किया गया है। उम्मीद है कि नई कार्यकारिणी अनुशासन बनाए रखते हुए पार्टी के कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और संगठन की पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त पदाधिकारी पार्टी के मूल्यों को बनाए रखेंगे और क्षेत्र में पार्टी के विकास में सार्थक योगदान देंगे। नई टीम का गठन ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ रही है। भाजपा का यह कदम आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर अपनी संगठनात्मक तैयारी को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

प्रमोशन आरक्षण विवाद: MP हाईकोर्ट ने सुनवाई की नई तारीख घोषित की

जबलपुर  मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई 16 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। आज दिनांक 25/9/25 को कोर्ट न. 01 मे सीरियल क्र.32 से 32.38 पर समय 11:30 बजे से सुनवाई थी,लेकिन सुबह एडिशनल एडवोकेट जनरल हरप्रीत रूपराह ने मेंशन करके दिनांक 16/10/25 की तारीख़ लगवाई है। आज शासन की ओर से अधिकृत सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता वैद्धांनाथन उपलवध नहीं होने का हवाला दिया गया। अजाक्स संघ सहित अनेक कर्मचारियों एवं अधिकारियो की ओर से प्रमोशन कानून के पक्ष मे अनेक हतक्षेप याचिकाए दाखिल की गईं है,उक्त सभी आवेदनों को पिछली तारीख 16/9/2025 मे अलाउ कर दिया गया है तत्पष्यात हतक्षेप कर्ताओ की ओर से प्रमोशन नियम 2025 को चुनौती देने वाले याचिका कर्ताओ की लोकस एवं याचिकाओं की विचारणशीलता पर आवेदन दाखिल कर आपत्ति दर्ज कराई गईं है। एवं अजाक्स संघ द्वारा नियम 2025 प्रकाशित होने के पूर्व याचिका क्रमांक 16383/2025 दाखिल की गईं है,जिसकी आज प्रथम सुनवाई हेतु सीरियल क्रमांक 32.38 पर सूचिवद्ध है,लेकिन मुख्य केस मे सरकार की ओर से 16/10/25 को सुनवाई किए जाने का समय ले लिया गया है जिसके कारण उक्त याचिका की भी सुनवाई 16/10/25 को होगी। पदोन्नति नियम को लेकर हाई कोर्ट में लगी याचिका के महत्‍वपूर्ण बिंदु     पदोन्नति नियम को लेकर हाई कोर्ट जबलपुर में गुरुवार को सुनवाई हुई। सरकार ने हाई कोर्ट के निर्देश पर नियम के संबंध में विस्तृत जानकारी दी है। इसके साथ ही यह भी कहा है कि प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण सशर्त पदोन्नति दी जाएगी। पदोन्नति नियम को सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने चुनौती है। याचिका में कहा गया है कि जब सरकार ने नए नियम बना लिए हैं तो यह स्पष्ट है कि 2002 के नियम निरस्त करने का निर्णय सही था। ऐसे में इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका को वापस क्यों नहीं लिया जा रहा है। इससे भ्रम की स्थिति बन रही है। दरअसल, पुराने नियम से जो पदोन्नतियां हुई हैं, उन्हें सरकार वापस नहीं लेना चाहती है इसलिए याचिका वापस नहीं ली जा रही है। इससे स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। जबकि, सरकार नौ वर्ष से रुकी पदोन्नति प्रारंभ करना चाहती है। नए नियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा विभिन्न मामलों में दिए गए निर्देशों की रोशनी में तैयार किए गए हैं। इसमें सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा गया है।  

EOW ने पेट्रोल पंप पर दबोचा रिश्वत लेते अधिकारी, मंडला में हंगामा

मंडला जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) अरविंद विश्वकर्मा को रिश्वत लेते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा है। पत्नी के हाथों रुपये का लिफाफा रिलायंस पेट्रोल पंप पर लेते ही दोनों को मौके पर ही ईओडब्ल्यू ने पकड़ कार्रवाई शुरू कर दी। इस मामले में एपीसी को भी सह आरोपित बनाया गया है। डीपीसी ने मांगी थी एक लाख 20 हजार की मदद बताया गया है कि डीपीसी ने विद्या निकेतन ग्राम ककैया स्कूल को मान्यता देने के नाम पर एक लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। जिसके एवज में दूसरी क़िस्त की राशि 60 हजार रुपये स्कूल संचालक द्वारा देते ही ईओडब्ल्यू टीम ने पकड़ लिया। जानकारी अनुसार स्कूल का भवन पूरा नहीं होने से मान्यता समाप्त हो गई थी। दोबारा मांगी गई थी रिश्वत पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए स्कूल संचालक रविकांत नंदा से एक लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी। पहली किश्त 50 हजार रुपये डीपीसी को स्कूल संचालक कुछ दिन पहले दे चुका था। 60 हजार रुपये की मांग पुनः की गई थी। इस पर स्कूल संचालक रविकांत नंदा यह राशि देने बिंझिया स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप पहुंचा। जहां राशि का लिफाफा डीपीसी को देने पर उन्होंने पत्नी को देने कहा। लिफाफा पत्नी के हाथों में आते ही ईओडब्ल्यू ने रंगे हाथों पकड़ लिया। ईओडब्ल्यू डीएसपी स्वर्ण जीत सिंह धामी व टीम के द्वारा पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में कार्रवाई की जा रही है।  

रेडीमेड घटिया वर्दी के विरोध में कोटवार संगठन पहुंचा जनसुनवाई

जबलपुर/ मण्डला बताया बिचौलियों के द्वारा घटिया कपड़े से बनी रेडीमेड जोकर जैसी रेडीमेड वर्दी नहीं लेंगे पहले की तरह कोटवारों के खाते में जमा हो पैसे,कोटवार खुद पसंद के कपड़े खरीदकर सिलाई कराकर पहनेंगे।                 घटिया से घटिया कपड़े से बने रेडीमेड अनफिट वर्दी एवं घटिया सामग्रियां जबरन न थोपे जाने कोटवारों ने जनसुनवाई में आवेदन दिया है। जिसमें यह भी चाहा गया है,कि जिस तरह दो साल पहले इन सामग्रियों को खरीदने के लिए राशि कोटवारों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती रही है,उसी तरह अब भी जमा कराए जाने का निवेदन किया है। कोटवार संगठन के जिला उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता शंकर दास पड़वार,जिला अध्यक्ष रंजीत पड़वार और संगठन मंत्री कुंवर दास धार्वैया ने संयुक्त रूप से यह भी बताया है,कि कोटवारों को घटिया क्वालिटी के कपड़े से बने ढीली-ढाली जोकर के पहनावे जैसी वर्दी बांटने को लेकर जिले के समस्त तहसीलदारों के लिए हाल ही में कलेक्टर मण्डला के द्वारा आदेश जारी हुआ है। जिसको सोशल मीडिया पर वायरल होते देख जोकर जैसी वर्दी जबरेन थोपे जाने की प्रक्रिया को लेकर जिले भर के साढ़े सात सौ कोटवारों में आक्रोश की लहर दौड़ गई। जगह-जगह कोटवारों की चिंतन बैठकों का दौर चल गया और मंगलवार 23 सितंबर को जनसुनवाई पहुंच गए। जहां पर निवेदन किया गया है,कि इस संबंध में प्रदेश संगठन के द्वारा हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई है।जो विचाराधीन है। जिस पर निर्णय आते तक वर्दी नहीं दिए जाने चाहिए। जबरेन थोपने पर समस्त कोटवार पुरजोर विरोध करेंगे।जनसुनवाई में कलेक्टर के द्वारा दिए गए जवाब से कोटवार संगठन और अधिक चिंताग्रस्त हो गया है। कलेक्टर ने कहा है,कि शासन के द्वारा प्राप्त दिशानिर्देश का पालन जिला प्रशासन को करना है।जबकि कोटवारों का बस इतना सा निवेदन था,कि पूर्व वर्षों की भांति वर्दी एवं सामग्रियां (दो जोड़ वर्दी, गरम कोट, जूता एवं टॉर्च) की राशि कोटवारों के सीधे बैंक खाते में हस्तांतरण किया जाए।जबकि लगभग एक साल से इस मुद्दे को लेकर जिले से लेकर राज्य स्तर तक ज्ञापन,भेंट और आंदोलनों का दौरा चलाया गया पर सरकार है जो मानने से रही और बिचौलियों को फायदा दिलाने कोटवारों का शोषण करने उतारू हो गई है।इस निवेदन पर कोटवार के पक्ष में सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है,और इसके बाद भी रेडीमेड वर्दी लेने मजबूर करने पर जिले के साढ़े सात सौ कोटवार सारे शासकीय काम बंद करके कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठकर काम बंद हड़ताल करने मजबूर हो जाएंगे ।  जिसकी संपूर्ण जवाबदेही शासन प्रशासन की होगी।इस मौके पर मुख्य रूप से कोटवार संगठन के मार्गदर्शक पी.डी.खैरवार,जिला अध्यक्ष रंजीत पड़वार, जिला संगठन प्रभारी कुंवर दास धार्वैया, कोषाध्यक्ष धीरज बैरागी, सचिव मनोज झारिया सहित बड़ी संख्या में जिले भर के कोटवार पहुंचे।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार राज्य सरकार की नीति के आधार स्तंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर किया नमन लालघाटी स्थित प्रतिमा पर किया माल्यार्पण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सुख की कामना करते हुए एकात्म मानववाद का दर्शन दिया। स्वदेशी और आत्मनिर्भरता ही हमारी संस्कृति और गांवों की व्यवस्था का आधार रही है, यह स्वावलंबन की भावना ही पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का आधार थी। पं. दीनदयाल उपाध्याय और महात्मा गांधी के विचारों में बहुत समानता थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पं. दीनदयाल उपाध्याय की 109वीं जयंती पर लालघाटी स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत सिंदूर का पौधा भी रोपा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंडित दीनदयाल के विचार राज्य सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं। हम प्रदेश के गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी सुधारों के माध्यम से देशवासियों को बड़ी सौगात दी है। इससे छोटे व्यापारियों और कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के किसानों, कारीगरों, छोटे व्यापारियों की बेहतरी के लिए सभी से स्वदेशी अपनाने का आव्हान किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रदेशाध्यक्ष  हेमंत खंडेलवाल, संगठन मंत्री  हितानंद शर्मा, सांसद  आलोक शर्मा, विधायक  रामेश्वर शर्मा, विधायक  भगवानदास सबनानी तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

हाईकोर्ट का फैसला: रिश्तों में पूरी तरह टूट चुका विश्वास, विवाह विच्छेद के आदेश जारी

जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि पक्षों(पति और पत्नी) के बीच वैवाहिक जीवन फिर से शुरू करना असंभव हो जाता है, तो न्यायालय इस तथ्य से अपनी आँखें बंद नहीं कर सकता है. हम तलाक नहीं देकर दोनों पक्षों की पीड़ा को बढ़ा नहीं सकते है. हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने इस आदेश के साथ 9 साल से अलग रहने वाले पति-पत्नी के विवाह विच्छेद पर मोहर लगा दी. ग्वालियर निवासी विकास आर्य की तरफ से दायर की गई थी याचिका, कुटुम्ब न्यायालय के आदेश को दी गई थी चुनौती ग्वालियर निवासी विकास आर्य की तरफ से दायर की गई याचिका में कुटुम्ब न्यायालय द्वारा तलाक के आवेदन को खारिज किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी. अपील पर मार्च 2025 में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने तलाक के लिए सहमति व्यक्त की थी. इसके बाद कूलिंग पीरियड माफ करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था. इसके बाद परिवादी पत्नी की तरफ से स्थगन की मांग करने पर प्रकरण को मध्यस्थता के लिए भेजा गया था. हाई कोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता और प्रतिवादी पिछले 9 साल से अलग-अलग रह रहे हैं और तलाक चाहते हैं हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश कर बताया गया था कि प्रतिवादी पत्नी मध्यस्थता के लिए उपस्थित नहीं हुई, इसलिए मामले को न्यायालय में वापस भेज दिया गया है. युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अपीलकर्ता और प्रतिवादी पिछले 9 साल से अलग-अलग रह रहे हैं और तलाक चाहते हैं. जैसा की पूर्व में पारित आदेश पत्र से स्पष्ट है. ऐसी स्थिति में तलाक का आदेश नहीं देने का अर्थ होगा कि विवाह पूरी तरह से टूटने के बावजूद विशेष चरण में रोक दिया गया है. पक्षों के बीच वैवाहिक संबंधों के समाधान की कोई संभावना नहीं है. युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ विवाह विच्छेद के आदेश जारी किए.