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मध्यप्रदेश सरकार की तैयारी, किरायेदारों के अधिकारों को सुरक्षित करेगा नया कानून

भोपाल   किरायेदार और मकान मालिक दोनों को सुरक्षित करने के लिए सरकार मॉडल किराएदारी बिल (Model Tenancy Bill) लागू करने जा रही है। बिल को अंतिम रूप देने के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने फिर कवायद शुरू की है। विभाग ने संचालनालय से प्रदेश में बनाए बिल के ड्राफ्ट, लागू कानून और केंद्र के मॉडल किराएदारी एक्ट की तुलनात्मक रिपोर्ट मांगी है। नए कानून के ड्राफ्ट में किराएदार और मकान मालिक दोनों के हितों की रक्षा की व्यवस्था है। मकान पर कब्जा होने से रोकने के प्रावधान हैं। एग्रीमेंट खत्म होने पर किराएदार के मकान खाली न करने पर उसे पहले दो माह में दोगुना और तीसरे महीने से चार गुना किराया देना होगा। मकान भी प्रशासन खाली कराएगा। किराएदार की सुरक्षा के लिए मालिक द्वारा घर का नल कनेक्शन, गैस सप्लाई, मार्ग, लिफ्ट, सीढिय़ां, पार्किंग आदि बंद करने पाबंदी लगाई गई है। नगरीय विकास विभाग मॉडल किराएदारी बिल को दे रहा अंतिम रूप नगरीय विकास विभाग मॉडल किराएदारी बिल को अंतिम रूप देने के लिए बैठकें कर रहा है। अफसरों का कहना है, बिल जल्द वरिष्ठ सचिव समिति के पास भेजा जाएगा। वहां से अनुमति के बाद कैबिनेट में पेश होगा। बता दें, अभी प्रदेश में किराएदारी अधिनियम 2010 लागू है। यह सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। नया एक्ट ग्रामीण-शहरी, व्यावसायिक सभी प्रॉपर्टी पर लागू होगा। शासकीय, धार्मिक संस्थान, ट्रस्ट या वक्फ बोर्ड के अधीन परिसरों पर लागू नहीं होगा। विवाद सुलझाने कोर्ट जाने की जरूरत नहीं -नए नियमों के तहत किराएदारी विवाद सुलझाने कोर्ट नहीं जाना होगा। – जिले में किराया प्राधिकारी डिप्टी कलेक्टर स्तर के अफसर होंगे। किराया अतिरिक्त कलेक्टर कोर्ट होगा। – अपील के लिए जिला जज की अध्यक्षता में रेंट ट्रिब्यूनल गठित होगा। – किराएदारी की पूरी जानकारी रखने के लिए अलग पोर्टल बनेगा। – मकान मालिक और किराएदार के बीच के एग्रीमेंट की सूचना किराया प्राधिकारी को 60 दिन में देनी होगी। – प्राधिकारी इसे पोर्टल पर अपलोड करेंगे। किराया वृद्धि या मकान खाली करने जैसी सूचना यहीं अपडेट होंगी। विवाद घटेंगे, भरोसा बढ़ेगा मध्यप्रदेश में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 27.7 फीसदी आबादी शहरों में रहती है। यह 40 फीसदी पहुंचने का अनुमान है। लोग बड़ी संख्या में पढ़ाई, नौकरी, व्यापार, बेहतर सुविधा के लिए शहरों में आ रहे हैं। कई लोग किराएदारों के विवाद से बचने के लिए खाली आवास होने के बावजूद किराए पर नहीं देते। लोग अपने कार्यस्थल के पास ही अफॉर्डेबल राशि का भुगतान कर किराए पर आवास लेना चाहते हैं। कई बार मकान मालिक मनमाना किराया मांगते हैं। अभी कानून (Model Tenancy Bill) में इसके प्रावधान नहीं हैं। नए कानून में मकान मालिक अधिकतम दो माह का एडवांस किराया ही ले सकेंगे। मनमानी पर रोक, क्षेत्र के हिसाब से किराया नए एक्ट में जहां मकान मालिक के हितों की रक्षा करने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं. वहीं किराए पर दी जाने वाली संपत्तियों पर मनमानी किराया वसूलने से भी रोक लगाई गई है. इसमें क्षेत्र के आधार पर किराया तय किया जाएगा. जिससे किराएदारों को भी राहत मिलेगी और उन्हें मुंहमांगा किराया नहीं चुकाना पड़ेगा. वर्तमान में शहरों में संपत्ति कर के लिए अलग-अलग स्लैब हैं, इसी आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों पर किराए की दर भी निर्धारित की जाएगी. अतिरिक्त निर्माण पर रोक, क्षतिपूर्ति देनी होगी एमटीए के तहत अब किराएदार संबंधित संपत्ति में अतिरिक्त निर्माण नहीं करा सकेगा. यदि वह ऐसा कराता है, तो उसके साथ बेदखली की कार्रवाई भी की जा सकेगी. इसके साथ उसके द्वारा किराए के लिए जमा की गई एडवांस राशि में से ही अतिरिक्त निर्माण को हटाने के साथ मकान को व्यवस्थित किया जाएगा. मकान या दुकान में टूट-फूट होने पर भी यही प्रावधान लागू होंगे. यानि क्षतिपूर्ति किराएदार को चुकानी होगी. एमटीए में एजेंट को मिलेगा कानूनी दर्जा मकान मालिक और किराएदारों के बीच में बड़ा रोल एजेंटो का भी होता है, लेकिन अब तक इनको एक्ट में नहीं लिया गया था, लेकिन नए मॉडल टेनेंसी एक्ट में एजेंटों को भी एक्ट के दायरे में लाया गया है. इनको हर साल अपना पंजीयन कराना होगा. एजेंट संबंधित जिले में कलेक्टर कार्यालय में जाकर अपना पंजीयन करा सकेंगे. इसके लिए एजेंटो को मामूली शुल्क भी चुकाना होगा. ऐसे में अब एजेंटो को भी कानूनी दर्जा मिलेगा. ट्रिब्यूनल के बाद ही सिविल कोर्ट में होगी सुनवाई बता दें कि नए एक्ट के तहत मकान मालिक और किराएदार के बीच आपसी विवाद निपटाने के लिए किराया प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. इसकी अध्यक्षता अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारी करेंगे. वहीं अलग से एक रेंट कोर्ट भी होगी, जिसमें अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई करेंगे. इसी प्रकार रेंट ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा. जिसमें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश सुनवाई करेंगे. वहीं रेंट ट्रिब्यूनल में विवाद नहीं सुलझ पाने के बाद ही इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होगी. ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियां भी एक्ट के दायरे में साल 2010 में जो किराएदारी का एक्ट बना था. उसमें केवल शहरी क्षेत्रों को लिया गया था, यानि ग्रामीण क्षेत्रों में यह कानून लागू नहीं होता था. लेकिन अब नया कानून शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू होगा. खास बात यह है कि अब तक दूतावास, बहु राष्ट्रीय कंपनियां, आयोग और अंतराष्ट्रीय संगठन समेत कुछ संस्थाओं को इस एक्ट से छूट थी, लेकिन अब नए किराएदारी के एक्ट में इन सबको अधिनियम के तहत प्रावधानों का पालन करना होगा. अन्यथा इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. विवाद निपटाने के लिए न्यायालय और ट्रिब्यूनल का गठन नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश में अब तक किराएदारी अधिनियम 2010 का पालन किया जा रहा है. लेकिन इसमें कई विसंगतियां है. ऐसे में अब नए एक्ट एमटीए बनाया गया है. इस एक्ट में कई बातें स्पष्ट हैं, जिससे मकान मालिक और किराएदार के बीच बार-बार विवाद की नौबत नहीं बनेगी. वहीं यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए भी एक्ट में न्यायालय और ट्रिब्यूनल का प्रावधान है. यानि कि एक्ट के लागू होते ही मध्य प्रदेश में किराएदारी के विवाद निपटाने के लिए न्यायालय या ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाएगी. विधानसभा सत्र में रखा जाएगा मॉडल टेनेंसी एक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने … Read more

MP में सड़क हादसों की स्थिति चिंताजनक, सावधानी के साथ चलें: आंकड़े बताते गंभीर स्थिति

भोपाल   केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर में वर्ष 2023 में हुए सड़क हादसों की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। अगस्त के अंतिम हफ्ते में जारी इस रिपोर्ट से मध्य प्रदेश में सड़कों की बदहाली और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की बदइंतजामी खुलकर सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उक्त अवधि में देश में सबसे ज्यादा सड़क हादसों में तमिल नाडु के बाद मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा। हादसों में सबसे ज्यादा मौत उत्तर प्रदेश और तमिल नाडु में हुईं, जबकि मध्य प्रदेश चौथे नंबर पर रहा। इतना ही नहीं, देश में तेज रफ्तार की वजह से हुए हादसों में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर रहा। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में पूरे देश में चार लाख 80 हजार 583 सड़क हादसे हुए। इनसे एक लाख 72 हजार 890 लोगों की मौत हुई और चार लाख 62 हजार 825 लोग घायल हुए। देश में हुए कुल हादसों में से 14 प्रतिशत हादसे तमिल नाडु, 11.5 प्रतिशत मध्य प्रदेश, 10 प्रतिशत केरल, 9.39 प्रतिशत उप्र और 9 प्रतिशत हादसे कनार्टक में हुए। देश में यही पांच राज्य टाप-फाइव की सूची में शामिल हैं। टाप-पांच राज्य : कहां कितने हादसे     तमिलनाडु – 67 हजार 213     मध्य प्रदेश – 55 हजार 327     केरल – 48 हजार 091     उत्तर प्रदेश – 44 हजार 534     कर्नाटक – 43 हजार 440 सड़क हादसों में मौत : टाप-फाइव राज्य     उप्र – 23 हजार 652     तमिल नाडु – 18 हजार 347     महाराष्ट्र – 15 हजार 366     मप्र – 13 हजार 798     कर्नाटक – 12 हजार 321 नेशनल हाइवे पर हादसे     उत्तर प्रदेश – 8446     तमिलनाडु – 6258     मध्य प्रदेश – 5780 ट्रैफिक नियम तोड़ने के कारण सबसे ज्यादा हादसे मप्र में     रिपोर्ट में सड़क हादसों की अलग-अलग वजहों का भी विश्लेषण किया गया है। सामने आया है कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हादसे ट्रैफिक नियम तोड़ने की वजह से हुए।     प्रदेश में ट्रैफिक नियम न मानने की वजह से 44 हजार 592 हादसे हुए। वहीं तेज रफ्तार की वजह से हुए हादसों में मरने वालों की संख्या मप्र में 11 हजार 380 रही, जो देश में सबसे ज्यादा है।     देश में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जबलपुर तीसरे नंबर पर है, जहां हादसों में 545 लोगों ने जान गंवाई है। दिल्ली 1457 मौत के साथ पहले नंबर पर है। टाप-10 शहर…जहां सबसे ज्यादा हादसे     दिल्ली – 5834     बेंगलुरु – 4974     जबलपुर – 4205     चेन्नई – 3653     इंदौर – 3566     मल्लपुरम – 3253     हैदराबाद – 2943     जयपुर – 2915     भोपाल – 2906     कोच्चि – 2803 शाम 6 से 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे, मरने वालों में दो पहिया वाले ज्यादा रिपोर्ट में वर्ष 2020 से लेकर 2023 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। सामने आया कि शाम 6 से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे हुए। 2023 में इस समयावधि में 99 हजार 945 हादसे हुए हैं। यह कुल हादसों का 20.8 प्रतिशत है। ऐसे हादसों में जान गंवाने वाले सबसे ज्यादा दो पहिया सवार हैं। 2023 में सात हजार 591 दो पहिया सवारों की मौत हुई, जबकि पैदल चलने वालों की संख्या चार हजार 604 के साथ दूसरे नंबर पर है। एक हजार 593 कार सवारों की मौत हुई।

SC ने सुनाया बड़ा आदेश, दुर्घटना के शिकार बच्चों और दिव्यांगों को मिले कुशल श्रमिक के बराबर मुआवजे

इंदौर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक दुर्घटना क्लेम मामले में सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या उसके स्थायी रूप से दिव्यांग होने पर क्षतिपूर्ति की गणना उसे कुशल श्रमिक मानते हुए की जाएगी। राज्य में दुर्घटना के समय कुशल श्रमिक का जो न्यूनतम वेतन होगा, उसे ही बच्चे की आय माना जाएगा। दावेदार व्यक्ति को न्यायाधिकरण के समक्ष न्यूनतम वेतन के संबंध में दस्तावेज पेश करने होंगे।  सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक दुर्घटना क्लेम मामले में सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसका असर देशभर में होगा। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या स्थायी रूप से दिव्यांग होने पर क्षतिपूर्ति की गणना अब बच्चे को कुशल श्रमिक मानते हुए की जाएगी। राज्य में दुर्घटना के समय कुशल श्रमिक का जो न्यूनतम वेतन होगा, उसे ही बच्चे की आय माना जाएगा। दावेदार व्यक्ति को न्यायाधिकरण के समक्ष न्यूनतम वेतन के संबंध में दस्तावेज पेश करने होंगे, अगर वह ऐसा नहीं कर पाता है तो इन दस्तावेजों को पेश करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होगी। फैसले की प्रति सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों को भेजी जाए, ताकि निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके। बता दें, अब तक दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की गणना नोशन इंकम (काल्पनिक आय, वर्तमान में 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष) के हिसाब से की जाती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति मिलेगी। वर्तमान में मप्र में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 14,844 मासिक, यानी 495 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है। साल 2012 में हुई थी दुर्घटना, ऐसे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला 14 अक्टूबर 2012 को इंदौर निवासी आठ वर्षीय हितेश पटेल पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी गुजर रहे वाहन ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में हितेश को गंभीर चोट आई। यह कहते हुए कि उसे स्थायी दिव्यांगता आई है, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (जिला न्यायालय) के समक्ष दस लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया। जिला न्यायालय ने यह मानते हुए कि हितेश को 30 प्रतिशत दिव्यांगता आई है, उसे तीन लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने के आदेश बीमा कंपनी को दिए। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि चूंकि हितेश की आयु सिर्फ आठ वर्ष है, क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर आठ लाख 65 हजार रुपये कर दिया। इस फैसले से असंतुष्ट होकर सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई। इसे स्वीकारते हुए कोर्ट ने क्षतिपूर्ति की राशि 35 लाख 90 हजार रुपये कर दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या? बता दें कि अब तक दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या उसके स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की गणना नोशन इनकम (काल्पनिक आय, वर्तमान में 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष) के हिसाब से की जाती है। अब राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति मिलेगी। वर्तमान में मध्य प्रदेश में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 14844 मासिक यानी 495 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है।     कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन को ही मानें बच्चे की आय     कोर्ट ने फैसले की प्रति सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों को भेजने का दिया निर्देश ऐसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला? 14 अक्टूबर 2012 को इंदौर निवासी आठ वर्षीय हितेश पटेल पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी एक वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हितेश को गंभीर चोट आई। यह कहते हुए कि उसे स्थायी दिव्यांगता आई है, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के समक्ष 10 लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने यह मानते हुए कि हितेश को 30 प्रतिशत दिव्यांगता आई है, उसे तीन लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश बीमा कंपनी को दिया। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि चूंकि हितेश की आयु सिर्फ आठ वर्ष है, क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर आठ लाख 65 हजार रुपये कर दिया। ऐतिहासिक फैसला, देशभर में लागू होगा     सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। पहली बार बच्चों की मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने पर उन्हें कुशल श्रमिक मानते हुए कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति के लिए हकदार माना है। फैसले का असर पूरे देश में चल रहे क्लेम प्रकरणों पर पड़ेगा। -राजेश खंडेलवाल, दुर्घटना क्लेम प्रकरण के वकील  

संचालन के लिए हो रही है विशेष पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

माता-पिता, गुरुजनों के योगदान के प्रति हमेशा रहें कृतज्ञ : राज्यपाल पटेल दीक्षांत, शैक्षणिक यात्रा की पूर्णता के साथ, समाज और राष्ट्र की सेवा यात्रा का शुभारंभ अवसर विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय, फैशन डिजाइनिंग जैसे रोजगारपरक कोर्स संचालन के लिए हो रही है विशेष पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दीक्षांत समारोह सिर्फ डिग्री प्राप्त करने का उत्सव नहीं, विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और गुरुजनों के मार्गदर्शन का है प्रतिफल राज्यपाल पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को उपाधि और स्वर्ण पदक प्रदान किए राज्यपाल पटेल ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को ग्लोबल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में प्रदेश के एकमात्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थान प्राप्त करने पर दी बधाई राज्यपाल पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्वलित कर दीक्षांत समारोह का किया शुभारंभ बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के 78 हजार विद्यार्थियों को मिली पीएचडी, स्नातकोत्तर सहित अन्य उपाधि कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ बरकतउल्ला विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह भोपाल राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने कहा कि विद्यार्थी अपने माता-पिता और गुरूजनों के योगदान के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहें। सफलता के बाद भी उनका हमेशा सम्मान करें। दीक्षांत शपथ का प्रतिदिन मनन करें और जीवन भर उसका अनुसरण भी करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नए, डिजिटल और "विकसित भारत" के सपने को साकार करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। दीक्षांत, वह अवसर है जब शैक्षणिक यात्रा की पूर्णता के साथ, समाज और राष्ट्र की सेवा यात्रा का शुभारंभ होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का उत्सव नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के वर्षों की मेहनत, अनुशासन और गुरुजनों के सफल मार्गदर्शन का प्रतिफल है। राज्यपाल पटेल सोमवार को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण कर समारोह का शुभारंभ किया। विश्वविद्यालयीन स्मारिका और पुस्तक का लोकार्पण भी किया। राज्यपाल व कुलाधिपति पटेल तथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अगुवाई में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की शोभा यात्रा ने मंत्रोच्चार के बीच सभागार में प्रवेश किया। राज्यपाल पटेल का विश्वविद्यालय के कुलगुरु सुरेश कुमार जैन ने पौधा, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कुलगुरु जैन ने दीक्षित विद्यार्थियों को दीक्षांत उपदेश दिया और दीक्षांत शपथ दिलाई। डिग्री और स्वर्ण पदक प्राप्त कर खिले विद्यार्थियों के चेहरे राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं के लिए उनके कौशल, रुचि और क्षमता के अनुसार शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर अनेक अवसर विद्यमान है। आज देश में कृषि, खाद्य, फिजिकल एजुकेशन, साइबर सिक्योरिटी, फोरेंसिक साइंस, ड्रोन तकनीक और विधि आदि विषयों में कैरियर की संभावनाएं तेजी से बढ़ी है। राज्यपाल पटेल ने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल से समाज और राष्ट्र उत्थान के लिए आगे आने का आह्वान किया है। राज्यपाल पटेल ने समारोह में विद्यार्थियों को डिग्री और स्वर्ण पदक प्रदान किए। दीक्षित विद्यार्थियों और स्वर्ण पदक प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने विश्वविद्यालय को शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के बेहतर प्रयासों के लिए नैक से "ए" ग्रेड प्राप्त करने और ग्लोबल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिग में प्रदेश के एक मात्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थान बनाने के लिए शुभकामनाएं दी। दीक्षांत समारोह अब भारतीय परंपरा के अनुरूप आयोजित किए जा रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारतीय अपनी क्षमता से विश्व में पहचान बना रहे हैं। अतीत की गलतियों को सुधारते हुए दीक्षांत समारोह अब भारतीय परंपरा के अनुरूप आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश में सबसे पहले वर्ष 2020 में शिक्षा नीति लागू की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सभी भाषाओं के अध्ययन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी राज्यों में बोली जाने वाली भाषाएं हमारी राष्ट्रभाषा हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रभाषा हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई कराने की पहल की है, जिसे काफी सराहना मिल रही है। शिक्षा को केवल नौकरियों से न जोड़ा जाए, यह समाज में ज्ञान के सतत प्रसार का माध्यम है। राज्य में कुलपति को कुलगुरु की नई संज्ञा मिली है, जिसे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली ने भी अपनाया है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में नवाचारों के साथ कृषि संकाय और फैशन डिजाइनिंग जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम की पढ़ाई कराई जा रही है। नए मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में विश्वविद्यालयों की बड़ी भूमिका मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के माध्यम से आज 54 हजार से अधिक विद्यार्थियों को स्नातक, 23 हजार विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर, 190 विद्यार्थियों को पीएचडी, 21 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, इस प्रकार कुल 78 हजार विद्यार्थियों के सपने साकार हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्राइवेट कॉलेज और शासकीय विश्वविद्यालयों को मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने के लिए सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर के सहयोग से जनजातीय बहुल झाबुआ जिले में मेडिकल कॉलेज खुलने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में सुशासन की नई बयार आई है। देश के युवा, किसान, गरीब सभी वर्गों के कल्याण के साथ सरकार आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी देश के स्वाभिमान और समाज के सभी वर्गों के हितरक्षक हैं। 21वीं सदी भारत की होगी और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में डिजिटल वैल्यूएशन होगा शुरू : मंत्री परमार तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि आज विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। हमें जीवनभर समाज और परिवार का ऋण उतारने के लिए कार्य करना चाहिए। देश में भारतीय परंपरा के अनुसार दीक्षांत समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए सबसे पहले प्रदेश में शिक्षा नीति लागू की गई। राज्य सरकार सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल मूल्यांकन शुरू करेगी। विद्यार्थियों को ऑनलाइन कॉपी उपलब्ध कराएंगे। शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के साथ प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में 1 या 2 भाषाओं की पढ़ाई शुरू करेंगे। मध्यप्रदेश हृदय प्रदेश है। यहां भाषाओं को जोड़ने का कार्य शुरू होगा। विद्यार्थी अपनी ऊर्जा राष्ट्र और समाज के कल्याण में लगाएं कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन ने विद्यार्थियों को शपथ दिलाते … Read more

प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को किया जाए प्रोत्साहित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गौ-शालाऔं को स्वावलंबी बनाना जरूरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को किया जाए प्रोत्साहित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को जोड़े: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड की बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आत्मनिर्भर गौशाला, प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। गौ-शालाएं गोबर, गौमूत्र आदि अपशिष्ट से धन अर्जित कर संपन्न बन सकती हैं। स्वावलंबी गौशालाएं विकसित करने के लिए दुग्ध उत्पादों सहित गौमूत्र-गोबर आदि से निर्मित सामग्री के विक्रय की व्यवस्था विकसित की जाए। साथ ही गौशालाओं में उपलब्ध स्थान का उपयोग सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन के लिए भी किया जाए। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में स्थानीय परिवेश के अनुरूप देसी नस्ल के गौपालन को प्रोत्साहित किया जाए। गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को जोड़े। प्रदेश में उपलब्ध पशुधन के अनुपात में पशु चिकित्सकों की संख्या कम है। गौवंश के बेहतर प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशु चिकित्सकों की संख्या में बढ़ोतरी आवश्यक है। इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड की मंत्रालय में सोमवार को हुई बैठक में दिए। पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा अनुसार प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गिर, साहीवाल, मालवी और नागौरी नस्ल के पशुधन को प्रोत्साहित किया जाए। प्रदेश के जनजातीय अंचलों में भी गौपालन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए आवश्यक नवाचार किए जाएं। प्रदेश में पशुपालन-कृषि-उद्यानिकी तथा नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समन्वित रूप से कार्य करने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और दुग्ध उत्पादन की दिशा में भी प्रदेश, देश के शीर्षस्थ राज्यों में शामिल हो सकेगा। बैठक में जानकारी दी गई कि गौसंवर्धन बोर्ड द्वारा गौशाला समितियों के बैंक खातों में राज्य स्तर से सीधे राशि अंतरित की जा रही है। बोर्ड द्वारा 937 नवीन गौशालाओं की स्थापना उपरांत पंजीयन किया गया है, जिसमें एक लाख 10 हजार गौवंश को आश्रय प्राप्त है। वर्ष 2024-25 में विदिशा, देवास, आगर-मालवा, ग्वालियर, दमोह, सतना तथा रीवा में बायोगैस सह जैविक खाद निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए। नगर निगम ग्वालियर, इंदौर तथा उज्जैन ने वृहद गौशालाओं का संचालन आरंभ किया गया है। भोपाल और जबलपुर में गौशालाओं की स्थापना का कार्य जारी है। बैठक में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति की प्रगति पर भी समीक्षा हुई।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम को एशिया कप जीतने पर दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 8 वर्ष बाद पुन: एशिया कप-2025 जीतने पर भारतीय पुरुष हॉकी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय टीम की यह ऐतिहासिक विजय सभी खिलाड़ियों की दृढ़ इच्छा शक्ति, अद्वितीय खेल कौशल एवं टीम भावना का प्रमाण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हॉकी नर्सरी के रूप में प्रतिष्ठित भोपाल सहित पूरे मध्यप्रदेश ने हॉकी के अनेक दिग्गज खिलाड़ी भारत को दिए हैं। भारतीय टीम की इस अद्वितीय विजय पर सभी गौरवान्वित है। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगलकामनाएं कीं। उल्लेखनीय है कि बिहार के राजगीर में रविवार को खेले गए फाइनल मैच में भारत की हॉकी टीम ने दक्षिण कोरिया को 4-1 से हराया। भारतीय टीम ने 8 साल के अंतराल के बाद पुरुष एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट का खिताब पर कब्जा किया है।  

मैनिट की साख पर लगातार चोट, NIRF 2025 में संस्थान खिसका 81वें स्थान पर

भोपाल  भोपाल का मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT) की स्थिति इस साल नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) मे फिर से गिर गई है। इंजीनियरिंग कैटेगरी में मैनिट को वर्ष 2025 में 81वां स्थान मिला है। यह पिछले चार वर्षों की तुलना में सबसे खराब स्थिति है। 2022 में मैनिट को 70वां स्थान मिला था, जबकि 2023 में यह 80वें पायदान पर पहुंचा। 2024 में सुधार दिखा और संस्थान 72वें स्थान पर आया, लेकिन 2025 में एक बार फिर यह नीचे खिसक कर 81 पर आ गया। लगातार उतार-चढ़ाव से स्पष्ट है कि मैनिट स्थायी सुधार नहीं कर पा रहा। इसलिए गिरी रैंकिंग विशेषज्ञों की माने तो ये संस्थान इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट व फुट प्रिंट ऑफ प्रोजेक्ट्स एंड प्रोफेशन प्रैक्टिस में पिछड़े हुए है। आसान भाषा में कहें तो ये संस्थान शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने में शोध में पिछड़ रहे है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक संस्थान प्रोजेक्ट्स, शोध-पत्रों और प्रोफेशनल प्रैक्टिस पर फोकस नहीं करेंगे, तब तक सुधार मुश्किल है। शिक्षा की गुणवत्ता और रिसर्च गतिविधियों में गंभीर कमी गिरावट का कारण है। छात्रों को डर, लगातार गिरावट रैंकिंग में गिरावट से कैंपस प्लेसमेंट और छात्रों के आत्मविश्वास पर असर पड़ता है। राष्ट्रीय स्तर पर अन्य आईआईटी और एनआईटी की तुलना में मैनिट के छात्रों को प्रतिस्पर्धा में पिछडने का डर रहता है। एक समय देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में गिने जाने वाला मैनिट अब लगातार गिरावट से अपनी ब्रांड वैल्यू खो रहा है। यह न केवल संस्थान की साख को प्रभावित करता है, बल्कि नए एडमिशन और रिसर्च प्रोजेक्ट्स की संभावनाओं को भी कमजोर करता है।  भविष्य की चुनौती से निपटना आसान नहीं रिसर्च और इनोवेशन पर जोर देकर ही मैनिट अपनी स्थिति को सुधार सकता है। अन्यथा प्रदेश के तकनीकी शिक्षा संस्थान राष्ट्रीय स्तर की रेस में और पीछे छूट सकते हैं।  इन बिंदुओं पर रैकिंग     फैकल्टी की संख्या और योग्यता     छात्र-शिक्षक अनुपात     शिक्षण सुविधाएं     पुस्तकालय, लैब्स, क्लासरूम आदि की गुणवत्ता     वित्तीय संसाधन और उनका उपयोग ये मापा जाता है     रिसर्च पब्लिकेशन्स की संख्या और गुणवत्ता     पेटेंट्स और इनोवेशन     पीएचडी छात्रों की संख्या     इंडस्ट्री के साथ जुड़ाव यह बताता है कि छात्रों का प्रदर्शन और भविष्य     पास होने वाले छात्रों की संख्या     प्लेसमेंट डेटा     उच्च शिक्षा में जाने वाले छात्रों का प्रतिशत     स्टार्टअप्स या एंटरप्रेन्योरशिप में गए छात्र     शिक्षाविदों, नियोक्ताओं और आम जनता में उस संस्थान की क्या प्रतिष्ठा है  

लिव-इन रिलेशनशिप पर फिर उठा विरोध, कथावाचक अनिरुद्धाचार्य से मिलीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर दिए गए बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जब माता-पिता बच्चों को संस्कार नहीं दे पाते, तो बच्चियां अर्धनग्न दिखाई देती हैं और इससे समाज में दुराचार भी बढ़ते हैं. दरअसल, साध्वी प्रज्ञा सिंह वृंदावन पहुंची थीं, जहां उन्होंने गौरी गोपाल आश्रम जाकर मशहूर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य से मुलाकात की. इस मुलाकात की तस्वीर प्रज्ञा सिंह ठाकुर के कार्यालय की ओर से रविवार को जारी की गई.  साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने हाल ही में अनिरुद्धाचार्य के लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया. कहा कि अनिरुद्धाचार्य का बयान समाज की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है. जब समाज में इस तरह के परिदृश्य बढ़ने लगते हैं, तो दुराचार की घटनाएं भी बढ़ती हैं. BJP की पूर्व सांसद ने कहा, ''माताओं को बेटियों को मर्यादा सिखानी चाहिए और पिताओं को बेटों को अनुशासन का महत्व समझाना चाहिए. बेटा-बेटी दोनों पर समान नियम लागू हों. घर लौटने का समय हो या अनुशासन से जुड़े नियम, ये सभी बच्चों पर समान रूप से लागू होने चाहिए. ऐसा नहीं होता है तो समाज में विकृति और पाश्चात्य सोच बढ़ रही है. स्कूल और कॉलेज लड़कियां जाती हैं, तो वहां भी अर्धनग्न रहती हैं.'' लिव-इन रिलेशनशिप का भी किया विरोध भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि चाहे कोर्ट कुछ भी कहे, लेकिन सनातन धर्म में लिव-इन संबंध स्वीकार्य नहीं हैं और इसलिए वह इसका विरोध करती रहेंगी.

MP में स्वास्थ्य लापरवाही का मामला, NHRC ने नवजात मौत पर भेजा नोटिस

भोपाल  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के एक अस्पताल के अंदर ‘चूहों के हमले’ के कारण एक नवजात शिशु की मौत के मामले को गंभीरता से लिया है। एनएचआरसी ने इस बारे में मिली शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव और इंदौर के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने बताया कि शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश के एक अस्पताल के अंदर ‘चूहों के हमले’ के कारण एक नवजात शिशु की मौत हो गई और अन्य घायल हो गए। एनएचआरसी के अनुसार, कथित घटना से संबंधित शिकायत के बाद आयोग ने 4 सितंबर को मामला दर्ज किया था। एनएचआरसी ने अपने नोटिस में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर 10 दिनों के भीतर ऐक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की कार्यवाही के अनुसार शिकायत का शीर्षक ‘न्याय तक पहुंच के लिए नेटवर्क’ है। कार्यवाही में कहा गया है, ‘‘आयोग को प्राप्त शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता ने इंदौर के एमवाय अस्पताल में हुई एक बेहद हैरान और परेशान करने वाली घटना की सूचना दी है, जहां अस्पताल परिसर के अंदर चूहों के हमले के कारण एक नवजात शिशु की मृत्यु हो गई और अन्य घायल हो गए।’’ इसके अलावा, हाल में सरकारी महाराजा यशवंतराव अस्पताल के आईसीयू में चूहों के काटने से दो नवजात बच्चियों की मौत की खबर भी मिली है। अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह भयावह घटना घोर चिकित्सा लापरवाही और बुनियादी स्वच्छता एवं रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूर्ण विफलता को उजागर करती है। कार्यवाही में कहा गया है कि इस तरह की ‘चूक’ न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में नागरिकों के विश्वास का उल्लंघन करती है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का भी गंभीर उल्लंघन है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता, कीट नियंत्रण और समग्र सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए तत्काल उपाय किए जाने चाहिए। एनएचआरसी ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथमदृष्टया पीड़ितों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन प्रतीत होते हैं। कार्यवाही में कहा गया है, ‘‘रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश सरकार, भोपाल और इंदौर के डीएम को नोटिस जारी करके शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करवाएं और आयोग के अवलोकन के लिए 10 दिनों के भीतर एक ऐक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करें।’’

आज से भोपाल में शुरू हुआ ट्रैफिक अभियान, नियम तोड़ने वालों पर होगी कड़ी नजर

 भोपाल यातायात नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सोमवार से 15 दिन तक (आठ से 22 सितंबर) कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें अर्थदंड लगाने से लेकर नियमों के अनुसार अन्य वैधानिक कार्रवाई होगी। पुलिस प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (पीटीआरआई) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक शाहिद अबसार ने इस संबंध में सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि सड़क सुरक्षा के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने हाल ही में प्रदेश का दौरा किया था। समिति ने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को लेकर चिंता जताई थी। इसके साथ ही यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराने, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुधार करने के लिए कहा था। इसी तारतम्य में 15 दिन का अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। हर साल हो रही 55 हजार सड़क दुर्घटनाएं बता दें कि प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 55 हजार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें 14 हजार लोगों की जान चली जाती है। एडीजी ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, पर यातायात नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध कार्रवाई संतोषजनक नहीं है। अभियान के दौरान कॉलेज विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा। साथ ही सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक कार्रवाई की रिपोर्ट प्रतिदिन पुलिस मुख्यालय को ई-मेल से भेजेंगे। क्या होगा अभियान में तेज गति, बिना हेलमेट व सीट बेल्ट, नाबालिग द्वारा वाहन चलाने, ड्राइविंग के समय मोबाइल का उपयोग, शराब पीकर वाहन चलाना, गलत दिशा में वाहन चलाना, ओवर लोडिंग और बिना लाइसेंस, परमिट और फिटनेस के वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।