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नौ साल बाद मिला इंसाफ! MP हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बीच आरोपी दोषमुक्त घोषित

जबलपुर  हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मामले का ट्रैक खो दिया और हुक या क्रूक से दोषसिद्धि का निर्णय पारित किया। यह अपीलार्थी के साथ घोर अन्याय है। लिहाजा, नौ वर्ष से जेल में बंद अपीलार्थी को दोषमुक्त करार दिया जाता है। बहुचर्चित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है अपीलकर्ता मंडीदीप, रायसेन निवासी संजय गुप्ता की ओर से अधिवक्ता आनंद कुमार शुक्ला, आशीष त्रिवेदी, प्रशांत अवस्थी व असीम त्रिवेदी ने पक्ष रखा। उन्हाेंने दलील दी कि अपीलार्थी 12 वर्षीय नितिन की हत्या के बहुचर्चित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। हत्या की और शव को बोरे में भरकर कूड़े में फेंक दिया रायसेन की ट्रायल कोर्ट ने उसके विरुद्ध तीन अप्रैल, 2017 को उम्रकैद व 17 हजार जुर्माने का फैसला सुनाया था। तब से नौ वर्ष हो गए, वह जेल की सलाखों में है। उस पर आरोप लगाया गया था कि उसने नितिन को घर पर बुलाया। हत्या की और शव को बोरे में भरकर कूड़े में फेंक दिया। बचाव पक्ष के वकीलों की ये रही दलीलें अपीलकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि लास्ट सीन गवाह साहब सिंह ने नितिन को संजय के साथ नहीं, उसके बेटे के साथ देखा था। गवाह प्रेमसिंह लोवंशी ने बताया कि घटना तिथि सात अप्रैल, 2015 को संजय गुप्ता सुबह 8:30 से शाम पांच बजे तक आकाश फैक्ट्री में ड्यूटी पर था और रात आठ बजे से भोपाल में मालिक की बेटी की बर्थडे पार्टी में शामिल था। पुलिस ने ज्ञापन दो माह बाद चार जून, 2015 को बनाया और जब्त सामग्री एफएसएल जांच के लिए चार-छह माह बाद 30 अक्टूबर, 2015 को भेजी। ये रहा हाई कोर्ट का निष्कर्ष हाई कोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने जिस सेमी लिक्विड ब्लड को संजय के बाथरूम से बरामद बताया, उसकी कोई बरामदगी नौ अप्रैल, 2015 के पंचनामा में दर्ज ही नहीं है। बरामद स्लिपर का साइज दर्ज नहीं, खुले प्लाट से मिली इसलिए महत्वहीन है। हथौड़े से चोट का मेडिकल कनेक्शन साबित नहीं, पेचकस पर फिंगर प्रिंट नहीं लिए गए। केस डायरी और कोर्ट में विरोधाभासी कार से मोटरसाइकिल हो गई गवाह साहब सिंह के बयान केस डायरी और कोर्ट में विरोधाभासी कार से मोटरसाइकिल हो गई। एफएसएल चेन आफ कस्टडी टूटी, छह माह तक माल थाने में रखा गया। हाई कोर्ट ने इन तथ्यों के आधार पर ने सुप्रीम कोर्ट के शरद बिरधीचंद सारदा केस का हवाला देकर कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य में एक भी कड़ी टूटने पर दोषसिद्धि नहीं हो सकती। लिहाजा, दोषसिद्धि व दंडादेश निरस्त कर संजय गुप्ता को सभी आरोपों से बरी कर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया जाता है।  

MP में तबादला सीजन की शुरुआत, अधिकारी-कर्मचारी 15 जून तक होंगे इधर से उधर

 भोपाल  मध्य प्रदेश में आज से तबादलों पर लगा प्रतिबंध हटने जा रहा है। यानी आज प्रदेश में सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों के ट्रांसफर होने लगेंगे। विभाग 15 जून तक प्रशासनिक और स्वैच्छिक आधार पर तबादले कर सकेंगे। खास बात ये है कि, उन स्थानों को इस बार विशेष प्राथमिकता दी गई है, जो फिलहाल रिक्त पड़े हैं। ऐसे स्थानों को पहले भरा जाएगा। इसमें खास बात ये है कि, जनगणना कार्य में जुटे कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं होगा। बता दें कि, जिले के अंदर होने वाले तबादले का अधिकार प्रभारी मंत्री के पास रहेगा। जबकि, प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री मोहन यादव के समन्वय से अनुमति लेकर ही किए जा सकेंगे। नीति के दायरे से बाहर रखी गई सेवाएं मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा और मंत्रालय के कर्मचारियों के तबादले इस नीति के दायरे के बाहर रखे गए हैं। शिक्षकों के तबादलों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की अलग नीति है। वहीं, पुलिस कर्मियों के स्थानांतरण तबादला बोर्ड के माध्यम से किए जाएंगे। तृतीय, चतुर्थ श्रेणी और राज्य स्तर के स्थानांतरण की प्रक्रिया जिले के भीतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले जिला कलेक्टर के अधिकार में होंगे। हालांकि, इसमें संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री की मंजूरी होना अनिवार्य होगा। वहीं प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी अधिकारियों – कर्मचारियों के राज्य स्तर के तबादले संबंधित विभाग के मंत्री की अनुमति से संबंधित प्रशासनिक विभाग ही करेगा। जबकि, डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की पदस्थापना भी प्रभारी मंत्री की सलाह पर की जाएगी। पुलिस विभाग में बढ़ी हलचल पुलिस मुख्यालय की ओर से 5 जून तक आरक्षक से लेकर उप निरीक्षक स्तर तक के तबादले करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बाद विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों ने स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू की गई है। कई विभागों ने मांगा कर्मचारियों का विवरण शिक्षा विभाग के साथ साथ कई अन्य विभागों ने जिलों में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की विस्तृत जानकारी तलब की है। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों से 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन करने के निर्देश दिए हैं। कैबिनेट की मंजूरी के बाद नई नीति लागू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 20 मई को हुई कैबिनेट बैठक में तबादला नीति को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 मई को साल 2026 की तबादला नीति जारी की थी। नीति जारी होने के बाद विभागों को 9 दिन में अपनी विभागीय तबादला नीति तैयार करने के साथ – साथ जरूरी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए थे। अब सभी विभाग नीति के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे। विभागवार तय की गई तबादलों की सीमा -नई तबादला नीति के तहत विभागों में कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तबादलों की अधिकतम सीमा तय हुई है। -200 तक कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 20 फीसदी तबादले हो सकेंगे। -200 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 15 फीसदी स्थानांतरण किये जा सकेंगे। -1000 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 10 फीसदी तबादलों की अनुमति। -2001 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 5 फीसदी तबादलों की अनुमति दी गई है। 15 जून तक जारी रहेगी प्रक्रिया मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश के मुताबिक, 15 जून तक सभी विभाग स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे। इसके बाद तबादलों पर फिर से रोक लगा दी जाएगी।

राज्यपाल पटेल को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्मदिवस की दीं शुभकामनाएं

राज्यपाल पटेल को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्मदिवस की दीं शुभकामनाएं लोकभवन में पुष्पगुच्छ भेंट कर किया अभिवादन भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल के जन्मदिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकभवन पहुंचकर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल पटेल को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्पगुच्छ, अंग वस्त्रम और बाबा महाकाल की प्रतिकृति भेंट कर उनका अभिवादन किया। साथ ही उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु होने की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि संवैधानिक मूल्यों और अंत्योदय के प्रति राज्यपाल पटेल की निष्ठा, कर्तव्यपरायणता एवं प्रतिबद्धता प्रेरणादायी है।  

अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष पर प्राण घातक हमला

अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष पर प्राण घातक हमला  इंदौर अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष हीरा सिंह ठाकुर द्वारा लगातार अवैध शराब एवं माफियाओं के खिलाफ अपने सोशल मीडिया एवं समाचार के माध्यम से आवाज उठा रहे थे जब भी अचानक अजय, विजय नामक व्यक्तियों ने उनके समाचार से असंतुष्ट होकर उनके ऊपर प्राण घातक हमला कर दिया! यह हमला देर रात को उनके घर लौटते समय हुआ जिसमें उनके मोबाइल लूट ले जाने एवं उनके हाथ पर दो अंगूठी सोने की थी वह लूट ले गए और नगद धनराशि भी लूट कर उन्हें घायल कर दिया और उनके सिर पर प्राण घातक हमला किया गया उन्हें चिकित्सालय में इलाज के दौरान उन्होंने बताया कि आज टैंक सर पर लगे और गंभीर चोटे आई है स्थानी पुलिस पर भी मामला दर्ज कराया गया है मगर आप दिनांक तक कोई भी कार्यवाही संतुष्ट जनक नहीं की गई  क्या कर रही पुलिस  देखना यह है कि एक पत्रकार जो जुझारू एवं अपने कर्तव्यों के परिपालन में समाज में चल रहे आवाज परिवहन को अपने समाचार के माध्यम से उजागर कर रहे थे मगर यह गवारा नहीं हुआ तो आवाज बंद कर देने की साजिश रसी गई जिसमें उन्हें पूर्ण रूप से घायल कर दिया गया मगर पुलिस अभी तक इस मामले से अनजान है या फिर उसे पर कार्यवाही होगी यह आने वाला समय ही बता सकेगा? क्या कहते हैं यह  हीरा सिंह ने स्थानी पुलिस से मांग की है कि शीघ्र ही उनके ऊपर प्राण घातक हमला करने वाले अजय विजय को पुलिस शीघ्र गिरफ्तार करें  कार्यवाही नहीं तो?  पत्रकारों ने इस घटना की घोर निंदा की है और कहा है किसी ग्रह अगर पुलिस कार्यवाही नहीं करती तो पत्रकार जो है आंदोलन करने के लिए बात होगा जिसकी संपूर्ण जवाबदारी प्रशासन की होगी

MP STF की लगातार दूसरे दिन रेड, 50 लाख की नशीली कफ सिरप बरामद, मचा हड़कंप

भोपाल राजधानी भोपाल में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 50 लाख रुपये कीमत की नशीली कफ सिरप की खेप बरामद की है। लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई ने यह संकेत दे दिया है कि भोपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में नशीली दवाओं का संगठित नेटवर्क गहराई तक अपनी जड़ें जमा चुका है। एसटीएफ अब इस पूरे सिंडिकेट की परतें खोलने में जुट गई है। जानकारी के अनुसार 30 और 31 मई की दरमियानी रात एसटीएफ की टीम ने एयरपोर्ट रोड स्थित मुबारकपुर क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और नशे के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली कफ सिरप बरामद की गई। जब्त माल में ऑफ-कफ और ऑनरेक्स ब्रांड की बड़ी खेप शामिल है, जिनका दुरुपयोग युवाओं और नशे के आदी लोगों द्वारा किए जाने की आशंका जताई जा रही है।   आरोपितों को पांच दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, जिसमें उन्होंने बताया कि मुबारकपुर में भी एक मकान में कफ सिरप रखा हुआ है। एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया कि आरोपित दिल्ली से आनरेक्स और आफ-कफ सिरप मंगाते थे। इनसे एक्सपायरी और बैच नंबर हटाने के लिए रैपर बदल देते थे। यह सिरप ग्रामीण अंचलों में खपाया जाता था। नियमानुसार, डाक्टर के पर्चे के बिना इसे नहीं खरीदा-बेचा जा सकता है। पूछताछ में आरोपितों ने बताया था एक सप्ताह पहले ही दिल्ली से कफ सिरप मंगाया था। लगभग एक वर्ष से यह धंधा चल रहा था, पर पुलिस को भनक नहीं लगी। संरक्षण देने वालों की तलाश में जुटी एसटीएफ  एसटीएफ को लंबे समय से मुबारकपुर क्षेत्र में नशीली दवाओं के अवैध भंडारण और वितरण की शिकायतें मिल रही थीं। इसी सूचना के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई। एसटीएफ अधीक्षक राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि यह खेप कहां से लाई गई, किसके संरक्षण में रखी गई और इसे किन-किन क्षेत्रों में भेजा जाना था। इसके साथ ही इस अवैध कारोबार से जुड़े सभी लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।  गौरतलब है कि इससे पहले एसटीएफ ने गांधीनगर क्षेत्र की डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी में छापेमारी कर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये कीमत की नशीली कफ सिरप बरामद की थी। उस कार्रवाई में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान मामले में भी गिरफ्तार आरोपियों को एसटीएफ ने न्यायालय से पांच दिन के रिमांड पर लिया है। पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।  

ट्विशा शर्मा मर्डर केस की जांच तेज, CBI ने गिरिबाला सिंह के घर किया सीन रीक्रिएट

भोपाल  ट्विशा शर्मा केस की जांच तेज हो गई है। सीबीआई की टीम सोमवार को क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए गिरिबाला सिंह के घर पहुंची है। गिरिबाला सिंह ने कहा था कि समर्थ ने ही फंदे से ट्विशा को उतारा था। रीक्रिएशन के लिए सीबीआई की टीम ट्विशा शर्मा का डमी पुतला लेकर पहुंची है। साथ ही वेट के लिए पुलिस के जवान डंबल भी ले आए हैं। पूरा सीन क्रिएट करेगी सीबीआई दरअसल, समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह अभी सीबीआई की रिमांड पर हैं। दोनों से पूछताछ में सीबीआई को कई तरह की जानकारी मिली है। सीबीआई की टीम अब गिरिबाला सिंह के घर पर क्राइम सीन को रीक्रिएट कर रही है। इसके लिए सीबीआई की टीम पूरी तैयारी के साथ पहुंची है। सीबआई की टीम गिरिबाला सिंह के घर में ट्विशा शर्मा का डमी पुतला लेकर पहुंची है। साथ ही वेट के लिए डंबल भी लेकर पहुंची है। फंदे पर लटकाया जाएगा पुतला पुतले को फंदे पर लटकाया जाएगा। पुतले का वेट ट्विशा शर्मा के वजन के अनुसार ही होगा। साथ ही ट्विशा के ससुरालवालों ने कहा था कि उसने बेल्ट से फंदा लगाया है। सीबीआई टीम बेल्ट भी लेकर आई है। छत पर पूरा सीन रीक्रिएशन करवाया जाएगा। साथ ही ट्विशा के वजन जितना पुतले को समर्थ से उतरवाया जाएगा। ट्विशा और गिरिबाला सिंह ने सीबीआई को जो जानकारी दी है, उसी हिसाब से सीन को रिक्रिएट की जाएगी। दो जून को रिमांड खत्म हो रहा ट्विशा की सासा गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह अभी सीबीआई की रिमांड पर है। दोनों की रिमांड दो जून को दो बजे खत्म हो रही है। इनके बयानों और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद सीबीआई की तरफ से मामले में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इसके बाद कोर्ट में मामले की सुनवाई होगी। फरारी के दौरान जबलपुर और भोपाल में रहा समर्थ वहीं, ट्विशा शर्मा की मौत के बाद समर्थ सिंह फरार हो गया था। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि समर्थ सिंह कुछ दिनों तक भोपाल में छुपा रहा। इसके बाद वह जबलपुर में जाकर छुप गया था। हाईकोर्ट से जमानत याचिका वापस लेने के बाद समर्थ सिंह ने जबलपुर हाईकोर्ट में ही सरेंडर किया था। सीबीआई ने आरोपियों के दर्ज किए हैं बयान गौरतलब है कि इस मामले में सीबीआई ने सभी आरोपियों और केस से संबंधित लोगों से पूछताछ की है। ट्विशा के शव उतारने में जिनलोगों ने समर्थ की मदद की थी, उनसे भी पूछताछ की गई है।  

इंदौर के जल संकट पर एक्शन मोड में सीएम डॉ. यादव, हालात की समीक्षा के लिए बुलाई अहम बैठक

इंदौर के जल संकट की स्थिति पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक ली अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश संकटग्रस्त वार्डों में विशेष जलापूर्ति योजना लागू की जाए जल चोरी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश पाइप-लाइन लीकेज और वितरण हानि को सुधारने के निर्देश नागरिकों को राहत मिले, हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  इंदौर स्थित संभागायुक्त कार्यालय पहुंचकर शहर में उत्पन्न जल संकट की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की तथा अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 24×7 जल नियंत्रण कक्ष के माध्यम से प्रतिदिन सुबह एवं शाम जलापूर्ति की समीक्षा की जाए। संकटग्रस्त वार्डों में विशेष जलापूर्ति योजना लागू कर प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर राहत प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि नल से जल सप्लाई के समय में असमानता और विसंगतियों को तत्काल दूर किया जाये। साथ ही सभी क्षेत्रों में संतुलित जल वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने शासकीय महाविद्यालयों, छात्रावासों तथा अन्य आवासीय संस्थानों में जल उपलब्धता की विशेष चिंता करने के निर्देश दिए। साथ ही जल चोरी करने वालों एवं मोटरों के माध्यम से अवैध रूप से पानी खींचने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई करने को कहा। जल टंकियों का पूर्ण क्षमता से उपयोग सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शहर की बड़ी जल टंकियों का पूर्ण क्षमता से उपयोग सुनिश्चित किया जाए। निजी एवं नगर निगम के टैंकरों की मिनट-टू-मिनट मॉनिटरिंग की जाए। पाइपलाइन लीकेज एवं वितरण हानि को तत्काल सुधारकर जल की बर्बादी रोकी जाए। इउन्होंने कहा कि भोपाल से वरिष्ठ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी पूर्व में भी इंदौर का दौरा कर चुके हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पुनः भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और नागरिक समितियों के साथ नियमित संवाद तथा समन्वय बनाए रखने तथा जल संकट की स्थिति से संबंधित जानकारी एवं प्रतिवेदन मुख्यमंत्री कार्यालय को निरंतर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्ला, विधायक श्रीमती मालिनी गौर, विधायक मधु वर्मा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।  

इंदौर में हुई तकनीक आधारित सुशासन की नई पहल- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सुशासन की दिशा में वरदान साबित हो रहा विज्ञान – मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में हुई तकनीक आधारित सुशासन की नई पहल- मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर शहर में खोले जाएंगे तीन नए थाने, पुलिस बल की पूर्ति भी की जाएगी- मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की घोषणा सरकार हर जिले में स्थापित कर रही है पुलिस बैंड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ के तहत 18 अत्याधुनिक हाईटेक ड्रोन्स किए लोकार्पित, 10 पुलिस वाहनों को दिखाई हरी झंडी ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ मोबाईल एप का किया शुभारंभ इंदौर मध्यप्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन की पहल के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ का लोकार्पण तथा ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने 18 अत्याधुनिक हाईटेक ड्रोन्स का और 10 पुलिस वाहनों का लोकार्पण कर इन्हें इंदौर पुलिस के बेड़े में शामिल कराया। यह ड्रोन्स पुलिस की तीसरी आंख के रूप में हर वक्त कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और भी अधिक प्रभावी बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर इंदौर शहर में तीन नए पुलिस थाने खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की कमी की पूर्ति भी क्रमबद्ध रूप से की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम हर साल पुलिस विभाग के 22 हजार 500 पदों पर भर्ती कर रहे हैं। लगभग सभी पदों पर भर्ती जारी है। हम प्रदेश के हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना भी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार हमेशा पुलिस विभाग के साथ है। परन्तु नागरिकों को बेवजह परेशानी या अपने पदीय कर्तव्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक लोगों के हित में है, तो एक चुनौती भी है, इसलिए इसका बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रोन पुलिस का कान्सेप्ट इंदौर से ही आया है। अब यह एक मिसाल बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास के समन्वय को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारी सरकार 'विरासत से विकास' के मार्ग पर चल रही है। उन्होंने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने जिस इंदौर को सेवा, सुशासन और जनकल्याण के जीवन मूल्यों से जोड़ा था, अपनी श्रम साधना से सींचा था, आज वही शहर नवाचार और तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में देश के लिए उदाहरण बन रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान वास्तव में सुशासन की दिशा में 'लोक कल्याणकारी राज्य' के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार तकनीक से लोगों की तकदीर बदलने, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और लोकसेवा का नया अध्याय लिखने के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ और ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ जैसे नवाचार पुलिस और प्रशासन दोनों को नई ताकत प्रदान करेंगे। आज इंदौर में हुआ यह नवाचार पुलिस और प्रशासन दोनों को बेहतर काम करने की नई ऊर्जा देगा तथा नागरिक सुविधाओं को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल स्मार्ट और सुरक्षित इंदौर की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है, जो तकनीक और सुशासन के बेहतर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी। आज लोकार्पित ड्रोन्स कानून व्यवस्था की स्थापना में पुलिस के लिए सहायक होंगे, वहीं ट्रेफिक साथी ऐप वाहन चालकों के लिए बेहद कारगर साबित होगा। इस ऐप के जरिए वाहन चालक पार्किंग की बेहतर लोकेशन जान सकेंगे। पुलिस कमिश्नर इंदौर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि इंदौर पुलिस के बेड़े में 18 ड्रोन्स शामिल किए जा रहे हैं। अब इंदौर पुलिस भीड़ के समुचितप्रबंधन में इन अत्याधुनिक ड्रोन्स के बेहतर उपयोग करने के लिये तैयार हो गई है। इन ड्रोन्स से 2 किलोमीटर का दायरा कवर होगा। उन्होंने कहा कि अब हम न सिर्फ ट्रैफिक बल्कि अपराधों पर भी नजर रख सकेंगे। इसका प्रयोग इंदौर में रंगपंचमी पर निकली गैर और बसंत पंचमी पर भोजशाला में कानून व्यवस्था के लिए किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इंदौर पुलिस ने 4 हजार 370 लोगों को नि:शुल्क हेलमेट बांटे हैं। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, पूर्व मंत्री एवं विधायिका सुउषा ठाकुर, पूर्व मंत्री एवं विधायक महेन्द्र हार्डिया, विधायक रमेश मेंदोला, विधायिका मालिनी गौड़, विधायक मधु वर्मा, विधायक मनोज पटेल, विधायक राकेश शुक्ला सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित थे।  

उच्च शिक्षा विभाग ने दी मंजूरी, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू होंगी नई कक्षाएं

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार और विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 शासकीय महाविद्यालयों में नए संकाय एवं विषय प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की है। इस संबंध में विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा, श्री अनुपम राजन ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश छह शासकीय महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय प्रारंभ किया जाएगा। इसके अंतर्गत भौतिकी, रसायन विज्ञान, प्राणीशास्त्र, गणित एवं वनस्पति विज्ञान विषयों का संचालन किया जाएगा। जिन महाविद्यालयों में विज्ञान संकाय प्रारंभ किया जा रहा है, उनमें शासकीय महाविद्यालय देवेंद्रनगर, केसली, रहली, गढ़ाकोटा, शाहगढ़ और जावर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, शासकीय महाविद्यालय ढाना में स्नातक स्तर पर इतिहास विषय प्रारंभ करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है। शासकीय महाविद्यालय देवेंद्रनगर में स्नातकोत्तर स्तर पर राजनीतिक शास्त्र, शासकीय महाविद्यालय बम्हनी में स्नातकोत्तर स्तर पर राजनीतिक शास्त्र, हिन्दी एवं समाजशास्त्र, शासकीय महाविद्यालय नईगढ़ी राजनीतिक शास्त्र, भूगोल एवं समाजशास्त्र, शासकीय कन्या महाविद्यालय बासौदा में स्नातकोत्तर स्तर पर भौतिकी, रसायन शास्त्र, प्राणीशास्त्र, गणित एवं वनस्पति शास्त्र, शासकीय महाविद्यालय बंडा में स्नातकोत्तर स्तर पर अर्थशास्त्र, हिन्दी, इतिहास, वनस्पति शास्त्र, प्राणी शास्त्र एवं रसायन शास्त्र, शासकीय महाविद्यालय रहली स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी साहित्य, राजनीतिक शास्त्र, समाजशास्त्र, शासकीय महाविद्यालय गढ़ाकोटा में हिन्दी साहित्य, राजनीतिक शास्त्र, समाजशास्त्र, शासकीय महाविद्यालय शाहगढ़ में हिन्दी साहित्य, राजनीतिक शास्त्र, भूगोल एवं इतिहास, विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। उच्च शिक्षा विभाग के इस निर्णय से प्रदेश के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा। साथ ही, उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों की ओर उनका पलायन भी कम होगा। विभाग का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।  

पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित “गोरस” मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध, पशुपालक और किसान आसानी से कर सकेंगे डाउनलोड

भोपाल  प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा पशुपालकों एवं किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुओं के संतुलित आहार प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में पशुपालन एवं डेयरी विभाग निरंतर नवाचार कर रहा है। इसी क्रम में विभाग द्वारा "गोरस मोबाइल ऐप" विकसित किया गया है। यह ऐप पशुपालकों को वैज्ञानिक आधार पर पशुओं के आहार प्रबंधन की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इस ऐप के उपयोग से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी। इससे पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। प्रदेश के पशुपालक एवं किसान गूगल प्ले स्टोर से इस ऐप को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप विकसित करने का उद्देश्य मध्यप्रदेश में दो करोड़ से अधिक गायों और भैंसों का पालन किया जाता है, लेकिन अधिकांश पशुपालक अभी भी पारंपरिक तरीके से पशुओं को आहार देते हैं। वैज्ञानिक पद्धति से संतुलित पोषण न मिलने के कारण पशुओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप दूध उत्पादन में 20 से 30% तक की कमी आती हैं। पशुपालकों की इन समस्याओं के समाधान के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा "गोरस मोबाइल ऐप" विकसित किया गया है। पशुपालक जैसे ही अपने पशु से संबंधित जानकारी, जैसे नस्ल, वजन, दुग्ध उत्पादन, दुग्ध उत्पादन का चरण तथा वर्तमान पशु आहार आदि दर्ज करेंगे, ऐप उनके पशु के लिए संतुलित आहार की मात्रा और प्रकार की जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही ऐप यह भी बताएगा कि आहार प्रबंधन में सुधार करने पर एक ब्यांत के दौरान पशुपालक को कितना आर्थिक लाभ हो सकता है। ऐप वर्तमान में दिए जा रहे आहार के कारण होने वाले संभावित नुकसान की जानकारी भी देगा। विभाग की यह पहल प्रदेश में वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित "गोरस" मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। यह ऐप पूरी तरह नि:शुल्क है। पशुपालक एवं किसान इसे अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड कर विभिन्न प्रकार की उपयोगी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऐप की प्रमुख विशेषताएं यह ऐप पूरी तरह से हिंदी भाषा में विकसित है, जो गाय एवं भैंसों के लिए संतुलित आहार संबंधी सुझाव प्रदान करता है। साथ ही, उपलब्ध चारे के संयोजन के आधार पर अधिकतम दुग्ध उत्पादन और न्यूनतम लागत का दर्शाता है। इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी यह कार्य करने में सक्षम है। सबसे खास बात यह है कि ये ऐप 28 से अधिक स्थानीय चारे की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराता है। मौसम विशेषकर गर्मी तथा गर्भावस्था की स्थिति के अनुसार स्वचालित सुझाव देता है। गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा, भदावरी एवं संकर नस्लों के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है। इसके अलावा पशुपालकों को संभावित आर्थिक लाभ का आकलन प्रदान करता है और अवर्णित गायों एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार संबंधी सलाह देता है। ऐसे करें डाउनलोड "गोरस" मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए पशुपालकों को अपने मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर पर जाना होगा। वहां "गोरस ऐप" सर्च करें। ऐप दिखाई देने पर उसे डाउनलोड करें। डाउनलोड होने के बाद इंस्टॉलेशन की अनुमति दें और "इंस्टॉल" विकल्प पर क्लिक करें। आवश्यक सुरक्षा अनुमति प्रदान करने के बाद ऐप को खोलकर उपयोग किया जा सकता है। विभाग द्वारा विकसित किया गया ऐप पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों और पशुपालकों को पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराने तथा वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग द्वारा "गोरस" मोबाइल ऐप विकसित कराया गया है। उन्होंने बताया कि यह ऐप सरल एवं सहज हिंदी भाषा में तैयार किया गया है और गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। पशुपालक एवं किसान इसे आसानी से डाउनलोड कर इसका लाभ उठा सकते हैं।