samacharsecretary.com

भरतपुर में रिश्तों की मिसाल: हरियाणवी सिंगर काजल चौधरी बनीं ‘कलयुग की श्रवण कुमार’

 जयपुर राजस्थान के जिले भरतपुर में  रिश्तों की एक ऐसी अनूठी मिसाल सामने आई है, जिसने हर आंख को नम कर दिया. हरियाणा की एक बहू अपनी 90 साल की सास को प्लास्टिक के टब में बिठाकर, उसे अपने सिर पर उठाए पैदल ही '84 कोस' की कठिन परिक्रमा करवा रही है.  जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायल होते ही हर कोई इस नजारे को देखकर भावुक हो गया.  कौन हैं टब में सांस को बिठाकर कंधो पर '84 कोस' की परिक्रमा करने वाली बहू? इस बहू का नाम काजल चौधरी है. जो हरियाणा के हताना गांव की रहने वाली हैं और पेशे से एक लोकप्रिय हरियाणवी लोक गायिका (सिंगर) हैं. काजल की 90 साल की सास चन्द्री देवी पिछले कई सालों से शारीरिक रूप से बेहद कमजोर और चलने-फिरने में लाचार हैं. चन्द्री देवी के मन में लंबे समय से ब्रज की प्रसिद्ध 84 कोस की परिक्रमा करने की इच्छा थी, लेकिन शारीरिक अक्षमता के कारण वह बेबस थीं. जब उनकी बहू काजल को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अपनी सास के इस सपने को पूरा करने की कोशिश की.  टब में बैठी सास, सिर पर उठाए बहू हरियाणा के हताना गांव की हरियाणवी सिंगर काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चन्द्री देवी को बड़े प्लास्टिक के टब में बिठाकर सिर पर रखकर पैदल 84 कोस की परिक्रमा करवा रही हैं. गांव बनचारी से परिक्रमा शुरू कर सिंगर काजल ने जहां-जहां से गुजर रही थीं, लोग फूल-मालाओं से उनका स्वागत कर रहे थे. बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने पहुंच रहे हैं. 'सास ने बेटी की तरह पाला, अब फर्ज निभाने की बारी मेरी' काजल चौधरी ने बताया कि उनकी सास चलने-फिरने में असमर्थ हैं. बरसों से उनके मन में 84 कोस परिक्रमा करने की इच्छा थी. सास की यही इच्छा पूरी करने के लिए वह उन्हें भरतपुर की ब्रजभूमि लेकर आई है. काजल ने कहा कि सास ने उन्हें हमेशा बेटी जैसा प्यार दिया.आज जो कुछ भी है सास के आशीर्वाद से है. ऐसे में उनकी इच्छा पूरी करना मेरा फर्ज है. सिंगर काजल बनीं कलयुग की श्रवण कुमार ब्रजभूमि में सास-बहू के इस अद्भुत प्रेम की चर्चा हर जुबान पर है. लोग काजल को कलयुग की श्रवण कुमार बता रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में जब रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं, काजल ने समाज को नई दिशा दिखाई है.

राजस्थान मौसम अपडेट: तेज हवाओं और बारिश से तापमान में 4 डिग्री तक गिरावट की संभावना

 जयपुर राजस्थान में पिछले एक हफ़्ते से हो रही भारी बारिश और ओले गिरने से तापमान में कमी आई है, वहीं भारी बारिश और तूफ़ान ने आम ज़िंदगी पर असर डाला है. लेकिन मौसम सुहावना होने से लोगों को चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है. तापमान में आई गिरावट की वजह से मौसम विभाग ने जानकारी जारी की है कि आने वाले दिनों में यह राहत जारी रहेगी. मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में एक और नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance)   एक्टिव हुआ है. जिसके असर से 3-4 जून को बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, अजमेर, उदयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में तेज आंधी तूफान और बारिश की गतिविधियां बढ़ने की काफी उम्मीद है. मंगलवार को जैसलमेर में चली थी धूल भरी आंधी इस बीच, मौसम विभाग ने पिछले 24 घंटों में यानी बुधवार सुबह तक पूर्वी राजस्थान की कुछ जगहों पर हल्की बारिश दर्ज की गई है. वहीं, पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर सहित कई इलाकों में कल ( मंगलवार) शाम तक हल्की बारिश के साथ धूल भरी आंधी चली. इस दौरान राज्य में सर्वाधिक वर्षा रामगढ़ (जैसलमेर) में 15.0 मिलीमीटर हुई जबकि सर्वाधिक अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस फलोदी में दर्ज किया गया. राजस्थान मौसम अपडेट 3 जून एक और नए मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से आज 3 जून को एक बार पुनः जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर संभाग के कुछ भागों में तेज मेघगर्जन तेज अंधड़ (60-70 Kmph), जयपुर, भरतपुर व कोटा संभाग के कुछ भागों में भी कहीं-कही आंधी बारिश होने की संभावना है। अगले 48 घंटे में 4 डिग्री तक गिरेगा पारा मौसम केंद्र द्वारा बुधवार दोपहर बाद के लिए आधिकारिक चेतावनी जारी करते हुए राज्य के पश्चिमी और उत्तरी जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है. जिसके तहत जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर और अजमेर संभाग में ऑरेज और सीकर, चुरू, झुंझुनूं और राजसमंद में येलो अलर्ट जारी किया गया है. वही इन भागों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी आंधी और झोंकेदार हवाएं चलने की भी चेतावनी जारी की गई है. इसके असर से अगले 24 से 48 घंटों के दौरान राज्य के बड़े हिस्से में तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की कमी देखने को मिल सकती है. आंधी बारिश के प्रभाव से आगामी एक सप्ताह ज्यादातर भागों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री से नीचे दर्ज होने व 'हीटवेव' से राहत बने रहने का अनुमान है, 5 जून से मौसम लौटेगा अपने पुराने रंग में  मौसम केंद्र द्वारा जारी आने वाले पांच दिनों के पूर्वानुमान के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि यह मौसमी तंत्र सिलसिलेवार तरीके से आगे बढ़ रहा है. 3 और 4 जून को  इस पश्चिमी विक्षोभ का असर अपने चरम पर रहेगा, जिससे पश्चिमी, उत्तरी और  दक्षिण-पूर्वी हिस्सों के कुछ इलाकों में अलर्ट की स्थिति बनी रहेगी. हालांकि, 5 जून से राज्य को इस  को आंधी तूफान और झमाझम बारिश से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.  इसके बाद पश्चिमी राजस्थान पूरी तरह से सामान्य होकर 'ग्रीन जोन' में तब्दील हो जाएगा और केवल कुछ उत्तरी व मध्य जिलों में ही आंशिक रूप से 'येलो अलर्ट' प्रभावी रहेगा.

चुनावी प्रक्रिया को लेकर बढ़ी हलचल, आयोग ने विभागों से मांगा जरूरी डेटा

जयपुर राजस्थान में पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग से आरक्षण संबंधी नवीनतम आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है. आयोग का मानना है कि आवश्यक डेटा मिलते ही चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा. विभागों से मांगे आंकड़े राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर जरूरी आंकड़े मांगे हैं.  आयोग का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनावों में आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कार्यक्रम जारी करना संभव नहीं है. आयोग ने विभागों को स्पष्ट किया है कि डेटा उपलब्ध होते ही चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा. आयोग को कोर्ट में देना है जवाब उल्लेखनीय है कि चुनाव में देरी को लेकर आयोग को न्यायालय में भी जवाब देना पड़ा था.  15 अप्रैल को चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में आयोग ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं होने को प्रमुख कारण बताया था. राज्य सरकार की ओर से पहले ओबीसी आरक्षण से संबंधित आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था, लेकिन निर्वाचन आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू करने के लिए अंतिम और प्रमाणित आंकड़ों की आवश्यकता है.  यही वजह है कि विभागों से एक बार फिर विस्तृत डेटा मांगा गया है. पंचायत और निकाय चुनाव लंबित राजस्थान में पंचायत राज और नगरीय निकायों के चुनाव काफी समय से लंबित हैं. ऐसे में आयोग के ताजा पत्राचार के बाद चुनावों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.  अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार आयोग को मांगा गया डेटा कब तक उपलब्ध कराती है क्योंकि इसी पर चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय होगी.

मुख्य सचिव से RPDA की अहम बैठक, वैट कटौती पर बनी सहमति की उम्मीद

 जयपुर राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (RPDA) की अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्य के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास के साथ उनकी एक अहम बैठक हुई. एसोसिएशन ने इस वार्ता को बेहद सकारात्मक बताते हुए मुख्य सचिव का आभार व्यक्त किया है. इस बैठक में प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की निर्बाध आपूर्ति को सुनिश्चित करने से लेकर वैट कटौती जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और कई अहम फैसले लिए गए. बैठक के दौरान प्रदेश में ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया. तेल कंपनी से सीधे होगी पंप में आपूर्ति मुख्य सचिव ने सभी ऑयल कंपनियों को सख्त हिदायत दी है कि किसी भी परिस्थिति में प्रदेश में संचालित पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए. यदि किसी क्षेत्र में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे तुरंत दूर कर आपूर्ति को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि कंज्यूमर पंप अब सीधे ऑयल कंपनियों से ही ईंधन की आपूर्ति लेंगे. इसके लिए ऑयल कंपनियों को अपने स्तर पर ऐसे कंज्यूमर पंपों की एक सूची तैयार कर सरकार को सौंपने के लिए कहा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन-कौन से पंप सीधे आपूर्ति ले रहे हैं. वहीं, नायरा कंपनी द्वारा प्रदेश में डीजल की आपूर्ति रोके जाने के मामले पर भी मुख्य सचिव ने कड़ा संज्ञान लिया और कंपनी को प्रदेश में शीघ्र ही डीजल आपूर्ति सुचारु करने के दिशा-निर्देश दिए. VAT कटौती पर क्या हुई बात इस वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित मुद्दा पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने का रहा. आरपीडीए ने इस मांग को पूरी मजबूती के साथ सरकार के समक्ष रखा. एसोसिएशन ने अपने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए सरकार को यह भरोसा दिलाया कि वैट में कटौती करने से राज्य सरकार को राजस्व में किसी भी प्रकार की हानि नहीं होगी. उनका मुख्य तर्क यह था कि राज्य में वैट अधिक होने के कारण जो बिक्री पड़ोसी राज्यों में जा रही है, वह वैट कम होने से रुक जाएगी और अंततः राज्य में ईंधन की बिक्री में भारी इजाफा होगा. इसके फलस्वरूप महंगाई की मार झेल रहे किसानों और आम जनता को एक बहुत बड़ी राहत मिल सकेगी. इस विषय पर गहन विचार-विमर्श के बाद एसोसिएशन ने वैट कटौती को लेकर एक संयुक्त कमेटी बनाने का भी सुझाव दिया ताकि समय रहते कोई ठोस निर्णय लिया जा सके. एसोसिएशन की इन तमाम दलीलों और सुझावों पर मुख्य सचिव ने उन्हें अवगत कराया कि सरकार वैट कटौती के मुद्दे को लेकर पूरी तरह से गंभीर है और वर्तमान में इस पर अध्ययन करवा रही है. उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को स्पष्ट आश्वासन दिया है कि राज्य में वैट कटौती को लेकर सरकार का रुख बेहद सकारात्मक है और शीघ्र ही इस दिशा में अग्रिम व उचित कार्रवाई की जाएगी. यह जानकारी आरपीडीए के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह भाटी, उपाध्यक्ष प्रकाश गवालेरा और महासचिव शशांक कौरानी द्वारा जारी की गई.

BJP ने अजेय कुमार को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, राजस्थान की राजनीति में बढ़ी हलचल

जयपुर  राजस्थान भाजपा को आखिरकार नया संगठन महामंत्री मिल गया है और इस जिम्मेदारी के लिए जिस नाम की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, वह है अजेय कुमार. आम लोगों के बीच भले ही उनका चेहरा बहुत ज्यादा परिचित न हो, लेकिन भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनात्मक ढांचे में उन्हें लंबे समय से एक मजबूत रणनीतिकार माना जाता रहा है. यही वजह है कि राजस्थान जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से अहम राज्य में उनकी संभावित भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा तेज हो गई है. राजस्थान भाजपा में यह पद लंबे समय से खाली चल रहा था. इससे पहले चंद्रशेखर अगस्त 2017 में राजस्थान भाजपा के संगठन महामंत्री बनाए गए थे और जनवरी 2024 तक करीब 6 साल 5 महीने इस जिम्मेदारी को संभालते रहे. बाद में उन्हें राजस्थान से हटाकर तेलंगाना भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दे दी गई थी. तब से संगठन स्तर पर नए चेहरे को लेकर चर्चाएं चल रही थीं. संघ की पृष्ठभूमि से निकला संगठन का चेहरा अजेय कुमार उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पहचान मंचों और भाषणों से कम, संगठन और रणनीति से ज्यादा रही है. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और लंबे समय तक संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे हैं. भाजपा में संगठन महामंत्री का पद वैसे भी बेहद अहम माना जाता है. यह केवल राजनीतिक पद नहीं होता, बल्कि संघ और भाजपा के बीच समन्वय का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है. उनकी जिम्मेदारियों में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, चुनावी रणनीति में समन्वय स्थापित करना, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना, सदस्यता अभियान को आगे बढ़ाना और प्रदेश नेतृत्व व केंद्रीय नेतृत्व के बीच संवाद बनाए रखना शामिल रहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ बड़ा सफर उत्तराखंड जाने से पहले अजेय कुमार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक काम किया. मेरठ, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में उन्होंने संगठन को मजबूत करने का काम संभाला. बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता प्रशिक्षण और चुनावी नेटवर्क तैयार करने में उनकी खास भूमिका रही. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में काम करने का अनुभव बाद में उनके लिए बड़ी ताकत साबित हुआ. यही अनुभव उन्हें आगे बड़े राज्यों की जिम्मेदारी तक ले गया. 2019 में मिला सबसे बड़ा मौका वर्ष 2018 में उत्तराखंड भाजपा के तत्कालीन संगठन महामंत्री संजय कुमार को पद से हटाए जाने के बाद यह पद कुछ समय तक खाली रहा. भाजपा और संघ दोनों संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश में जुटे थे. इसी क्रम में सितंबर 2019 में अजेय कुमार को उत्तराखंड भाजपा का संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया. इसे उनके राजनीतिक और संगठनात्मक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ माना जाता है. उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की गई थी. इससे पहले वे मेरठ क्षेत्र में भाजपा के संगठन मंत्री के रूप में काम कर रहे थे. बूथ से लेकर चुनाव तक दिखाई पकड़ 2020 और 2021 के दौरान उन्होंने उत्तराखंड में बूथ समितियों के पुनर्गठन, मंडल स्तर की सक्रियता, युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने और सोशल मीडिया नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया. उनकी कार्यशैली का सबसे खास पहलू यह माना गया कि वे बिना ज्यादा प्रचार के जमीन पर संगठन को मजबूत करने में विश्वास रखते हैं. भाजपा के भीतर उन्हें लो-प्रोफाइल लेकिन प्रभावशाली संगठनकर्ता कहा जाने लगा. 2022 चुनाव बना सबसे बड़ी परीक्षा अजेय कुमार के संगठनात्मक कौशल की सबसे बड़ी परीक्षा 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में हुई. उस समय राज्य में राजनीतिक चुनौतियां थीं और मुख्यमंत्री बदलने जैसी परिस्थितियां भी सामने आई थीं. इसके बावजूद भाजपा ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की. हालांकि तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट हार गए थे, लेकिन पार्टी ने बहुमत बरकरार रखा. राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे भाजपा संगठन की बड़ी उपलब्धि माना. इस चुनाव के बाद अजेय कुमार की पकड़ और प्रभाव दोनों बढ़ते हुए दिखाई दिए. 2024 के बाद भी बनी रही चर्चा 2023 और 2024 के दौरान उन्हें भाजपा के रणनीतिक संगठनकर्ताओं में गिना जाने लगा. इस दौरान कुछ राजनीतिक विवादों और मीडिया चर्चाओं में उनका नाम भी सामने आया, लेकिन आधिकारिक स्तर पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ और न ही कोई कार्रवाई हुई. इसी समय भाजपा और संघ के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी उनकी भूमिका की चर्चा होती रही. संगठन के भीतर उन्हें शांत स्वभाव लेकिन मजबूत निर्णय क्षमता वाले नेता के रूप में देखा जाता है. क्यों कहा जाता है पर्दे के पीछे का रणनीतिकार अजेय कुमार की पहचान उन नेताओं में है जो सुर्खियों से दूर रहकर काम करना पसंद करते हैं. उनकी कार्यशैली में अनुशासन, बूथ आधारित राजनीति, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और माइक्रो लेवल प्लानिंग को खास महत्व दिया जाता है. हाल के वर्षों में कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें भाजपा का “राइजिंग चाणक्य” तक कहा गया. इसकी वजह उत्तराखंड में संगठनात्मक सफलता, चुनावी प्रबंधन और बिना शोर किए परिणाम देने वाली कार्यशैली को माना गया. अब अगर राजस्थान जैसे बड़े राज्य में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलती है तो उनकी अगली परीक्षा भी कम बड़ी नहीं होगी. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड में संगठन को मजबूत करने वाले अजेय कुमार राजस्थान भाजपा के लिए किस तरह की नई रणनीति लेकर आते हैं.  

राजस्थान के श्री सांवलिया सेठ मंदिर में 16 करोड़ की अलौकिक कलाकृति बनी आकर्षण का केंद्र

चित्तौड़गढ़  राजस्थान के विख्यात कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में श्रद्धालुओं की अगाध आस्था अब सोने और चांदी की दिव्य भव्यता के रूप में साकार हो उठी है। मंदिर मंडल द्वारा भक्तों से चढ़ावे के रूप में मिले 20 किलोग्राम सोने और 120 किलोग्राम चांदी का उपयोग करके ठाकुर जी के गर्भगृह के लिए एक अत्यंत मनमोहक और अलौकिक पिछवाई तैयार करवाई गई है। भगवान श्रीकृष्ण की मूल प्रतिमा के ठीक पीछे स्थापित की गई यह नई पिछवाई अपनी बेजोड़ कलात्मकता और वैभव के कारण इन दिनों मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। सागवान की लकड़ी पर नक्काशी इस भव्य कलाकृति को तैयार करने में उस समय लगभग 16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत आई थी। इसकी मजबूती को बनाए रखने के लिए इसे सागवान की उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी के विशेष पैनल पर मढ़ा गया है। सोने और चांदी की अत्यंत महीन व बारीक नक्काशी से सुसज्जित यह कलाकृति मंदिर के गर्भगृह के सौंदर्य को एक अद्वितीय और दिव्य स्वरूप प्रदान करती है। आपको बता दें कि इस प्रसिद्ध मंदिर को राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी धार्मिक सर्किट योजना में भी शामिल किया गया है। राजकोट के कारीगरों की मेहनत इस दिव्य पिछवाई के निर्माण के विषय में जानकारी देते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष हजारीलाल वैष्णव ने बताया कि इस अलौकिक कृति को आकार देने के लिए विशेष रूप से गुजरात के राजकोट से कुशल शिल्पकारों को आमंत्रित किया गया था। इस पूरी कलाकृति को धरातल पर उतारने में कारीगरों को पूरे 90 दिनों का समय लगा। इस ऐतिहासिक काम की कुल निर्माण लागत 16 करोड़ रुपये रही है। सीसीटीवी की निगरानी में पिघलाया गया सोना-चांदी सबसे पहले चढ़ावे में आए सोने और चांदी को उच्च तापमान पर गलाकर उनकी सिल्लियां तैयार की गईं, जिन्हें बाद में आधुनिक मशीनों की मदद से महीन और पतली शीट्स में परिवर्तित किया गया। इन तैयार स्वर्ण और रजत शीट्स पर अनुभवी कारीगरों द्वारा बेहद बारीक नक्काशी की गई और फिर इन्हें सागवान की लकड़ी से बने सुदृढ़ पैनलों पर मजबूती से फिट कर दिया गया। मूल्यवान धातुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्माण के दौरान पूरे मंदिर परिसर में 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। धातु को गलाने से लेकर नक्काशी करने तक की संपूर्ण निर्माण प्रक्रिया को चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों की सख्त निगरानी में अंजाम दिया गया। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए किसी भी बाहरी कोष या फंड से कोई मदद नहीं ली गई, बल्कि यह पूर्ण रूप से भक्तों द्वारा ठाकुर जी के चरणों में समर्पित किए गए सोने और चांदी से ही संपन्न हुआ।

भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, 100 से ज्यादा अफसर सस्पेंड

जयपुर  राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सीधे तौर ये कह दिया है कि प्रदेश में अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस रहेगा। यहां अपराधियों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेश की कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपराधियों और भ्रष्ट अधिकारियों को बेहद सख्त संदेश दिया है। शनिवार को 'राजस्थान नगर पालिका कर्मचारी फेडरेशन' के अधिवेशन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि प्रदेश में अब न तो अपराध पनपेगा, न भ्रष्टाचारियों को पनाह मिलेगी और न ही कानून तोड़ने वालों को बख्शा जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'राजस्थान में यदि कोई अपराधी पैर पसारेगा, तो वह वापस नहीं जा पाएगा; उसे उसके सही मुकाम (जेल) तक पहुंचाया जाएगा।' भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' और बड़ी कार्रवाई मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कर्मचारियों से पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ जनसेवा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ के मूलमंत्र पर चलते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रही है। सीएम बोले: करप्शन में 100 अधिकारी हुए सस्पेंड सरकार ने अब तक भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 103 अधिकारियों को निलंबित (सस्पेंड) किया है। 6 अफसरों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। 11 भ्रष्ट अधिकारियों की आजीवन पेंशन पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही रिश्वतखोरी, ट्रैप, पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति दी गई है, जबकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 अन्य मामलों में भी कठोर कार्रवाई अमल में लाई गई है।सीएम ने कर्मचारियों को नसीहत दी कि वे भ्रष्ट आचरण के दलदल से पूरी तरह दूर रहें। स्वच्छ सर्वेक्षण में 16 वें स्थान की तारीफ की नगरीय निकायों की भूमिका की सराहना करते हुए सीएम ने कहा कि पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में जयपुर ग्रेटर को देश में 16वां स्थान मिला था। लेकिन अब हमें रुकना नहीं है, बल्कि प्रदेश के सभी शहरों को देश के सबसे स्वच्छ और सर्वश्रेष्ठ शहरों की श्रेणी में लाना है। यह लक्ष्य नगरीय निकाय कर्मचारियों के सहयोग के बिना संभव नहीं है, क्योंकि वे जनता और सरकार के बीच की सबसे मजबूत कड़ी हैं। किया 4 लाख नौकरियों का वादा इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं को संबल देते हुए प्रदेश में चार लाख सरकारी नौकरियां देने के अपनी सरकार के संकल्प को एक बार फिर दोहराया। खुशेंद्र तिवारी

अक्षरधाम और ताज के बाद टिफनी ट्रंप जैसलमेर में, सूर्यागढ़ होटल में ठहराव और हाई अलर्ट सुरक्षा

 जैसलमेर दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर और आगरा में ताज महल का दीदार करने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की छोटी बेटी टिफनी ट्रंप (Tiffany Trump) आज (रविवार) राजपूताना शान का अनुभव करने राजस्थान के जैसलमेर (Jaisalmer) पहुंच गई हैं. करीब 11 बजे जैसलमेर एयरपोर्ट से बाहर निकलते वक्त उनके पति माइकल बलोस (Michael Boulos) ने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन भी किया है. इस दौरान एयरपोर्ट को भारी पुलिस फोर्स के साथ-साथ एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती भी देखी गई. लक्जरी सूर्यागढ़ होटल में ठहरेंगी टिफनी सूत्रों के मुताबिक, टिफनी ट्रंप और उनके पति का जैसलमेर के मशहूर और बेहद आलीशान सूर्यागढ़ होटल (Suryagarh Hotel) में रुकने का कार्यक्रम है. अपने दो दिवसीय इस निजी दौरे में टिफनी ट्रंप मरुस्थलीय सौंदर्य और राजस्थानी संस्कृति का करीब से अनुभव करेंगी. उनका संभावित कार्यक्रम के अनुसार, सबसे पहले वे विश्व प्रसिद्ध सोनार किला (Jaisalmer Fort) देखने जाएंगे. उसके बाद नक्काशीदार पटवों की हवेली और ऐतिहासिक गड़ीसर लेक घूमने जाएंगी. शाम के समय वह सम (Sam Sand Dunes) के रेतीले धोरों में मरुस्थलीय सौंदर्य और राजस्थानी लोक संस्कृति का आनंद लेंगी. वह सोमवार को अपना जैसलमेर दौरा पूरा कर यहां से प्रस्थान करेंगी. भारत-पाक सीमा का हाई-अलर्ट चूंकि जैसलमेर एक संवेदनशील सीमावर्ती जिला (Border District) है और यहां से भारत-पाकिस्तान की सीमा सटी हुई है, इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी के दौरे को लेकर सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. उन्हें स्टेट गेस्ट (State Guest) का दर्जा दिया गया है. खुफिया एजेंसियां और स्थानीय पुलिस लगातार समन्वय कर रही हैं. पर्यटन स्थलों से लेकर उनके होटल तक के रूट पर ट्रैफिक रेगुलेशन और कड़े सुरक्षा घेरे की व्यवस्था की गई है. ट्रंप परिवार का जैसलमेर से पुराना नाता यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप परिवार का कोई सदस्य मरुधरा की धरती पर कदम रख रहा है. इससे पहले नवंबर 2018 में डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी बेटी इवांका ट्रंप के पति और तत्कालीन व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर (Jared Kushner) भी जैसलमेर आ चुके हैं. वह इसी सूर्यागढ़ होटल में एक हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने पहुंचे थे, तब भी अमेरिका और राजस्थान पुलिस ने मिलकर अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था की थी.      दिल्ली और आगरा में बिताए यादगार पल जैसलमेर पहुंचने से पहले टिफनी और माइकल बलोस ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत नई दिल्ली से की थी. शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली के स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर (Akshardham Temple) के दर्शन किए और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर मंदिर की भव्यता की तस्वीरें भी साझा कीं. इसके बाद शनिवार को इस जोड़े ने आगरा पहुंचकर ताज महल का दीदार किया और यूनेस्को विश्व धरोहर के सामने तस्वीरें खिंचवाईं.

ट्रंप परिवार का राजस्थान दौरा, चार्टर प्लेन से जैसलमेर पहुंचेंगी बेटी और दामाद

जैसलमेर  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छोटी बेटी टिफनी ट्रंप अपने पति माइकल बोलस के साथ आज रविवार को राजस्थान के जैसलमेर पहुंचेंगी। यह शाही जोड़ा चार्टर प्लेन से सीधे जैसलमेर पहुंचेगा। उनके इस हाई-प्रोफाइल और निजी दौरे को देखते हुए पर्यटन नगरी में सुरक्षा का अलर्ट जारी।  अपनी इस यात्रा के दौरान टिफनी ट्रंप जैसलमेर की ऐतिहासिक धरोहरों का दीदार करेंगी। वे यहां के विश्व प्रसिद्ध सोनार किला (जैसलमेर फोर्ट), पटवों की हवेली और खूबसूरत गड़ीसर लेक देखने जाएंगी। सोमवार को उनका यहां से रवाना होने का कार्यक्रम है। अक्षरधाम और ताजमहल की खूबसूरती देखी भारत घूमने आईं टिफनी ट्रंप और उनके पति माइकल बोलस ने अपनी यात्रा की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली से की। शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया। टिफनी ने मंदिर की भव्यता और अद्भुत शिल्पकला की सोशल मीडिया (X) पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए जमकर तारीफ की। इसके बाद शनिवार को वह आगरा पहुंचीं, जहां उन्होंने दुनिया के सात अजूबों में शामिल 'ताजमहल' का दीदार किया। बॉर्डर का जिला होने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, रूट डायवर्जन की तैयारी अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी के दौरे को लेकर जैसलमेर जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटा जिला होने और हाई-प्रोफाइल वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उनके रुकने वाले संभावित स्थानों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। खुफिया एजेंसियां भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं। पर्यटन कारोबारियों में भारी उत्साह अमेरिकी राष्ट्रपति के परिवार की इस यात्रा से जैसलमेर के पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों, होटल व्यवसायियों और गाइडों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। कारोबारियों का मानना है कि टिफनी ट्रंप के इस दौरे से वैश्विक स्तर पर जैसलमेर के पर्यटन को एक नई और बड़ी पहचान मिलेगी। इस हाई-प्रोफाइल विजिट के बाद आने वाले दिनों में यहां विदेशी पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। स्वर्ण नगरी अपने पारंपरिक अंदाज 'पधारो म्हारे देस' के साथ इस खास विदेशी मेहमान के भव्य स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के एक और दामाद आ चुके हैं जैसलमेर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर नवंबर 2018 में जैसलमेर में एक हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने आए थे। वह डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रम्प के पति हैं। जारेड कुशनर (डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और तत्कालीन वरिष्ठ व्हाइट हाउस सलाहकार) 22 से 25 नवंबर, 2018 को जैसलमेर रहे थे। वे सम रोड स्थित होटल सूर्यगढ़ में उद्योगपति संजय हिंदुजा की पत्नी अनु हिंदुजा के भाई नितिन संपाल की हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने जैसलमेर आए थे। जारेड कुशनर की सुरक्षा के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) के एजेंट्स कई दिन पहले ही जैसलमेर पहुंच गए थे। स्थानीय राजस्थान पुलिस और सीक्रेट सर्विस ने मिलकर होटल सूर्यगढ़ को एक किले में तब्दील कर दिया था।

भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्ती, राजस्थान सरकार ने 103 अधिकारियों पर गिराई गाज

जयपुर  राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ते हुए सख्त कार्रवाई का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों के दौरान एक आईएएस अधिकारी सहित 103 अधिकारियों को निलंबित किया है। वहीं, भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में 6 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन पर रोक लगा दी गई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति राज्य सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह प्रशासन उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी नीति के तहत भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग जैसे मामलों में दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जनता के हितों से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। कोर्ट से दोषी साबित होते ही हुई बर्खास्तगी सरकार ने उन अधिकारियों पर भी सख्त कदम उठाए हैं, जिन्हें न्यायालयों ने भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराया। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया गया। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में भीलवाड़ा के तत्कालीन विकास अधिकारी भरत प्रकाश मेघवाल, झुंझुनूं के तत्कालीन कृषि उप निदेशक राजेश कुमार नैनावत, भरतपुर के तत्कालीन सहायक आयुक्त महावीर सिंह आसीवाल शामिल हैं। इसके अलावा चिकित्सा विभाग के डॉ. राम मोहन सिंह चौहान, डॉ. मुरलीधर शर्मा और डॉ. मनोहर लाल को भी सेवा से हटाया गया है। इसी तरह कोटा के तत्कालीन अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) हरिसिंह मीना को एसीबी कोर्ट से सजा मिलने के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। पानी की जांच में फर्जी रिपोर्ट देने वाले अधिकारी पर भी गिरी गाज राज्य सरकार ने जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में भी सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की अलवर स्थित प्रयोगशाला में कार्यरत वरिष्ठ रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। आरोप है कि उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता जांच से संबंधित नमूनों में फर्जी रिपोर्ट तैयार की थी। सरकार ने इसे आम लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ मानते हुए यह कार्रवाई की। वहीं डॉ. विलास राव गुल्हाने को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की आजीवन पेंशन पर रोक भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है। 11 अधिकारियों की आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन बंद कर दी गई है। इनमें पूर्व आरएएस अधिकारी बनवारी लाल मीणा, देवेंद्र सिंह ढिल्लो, पूर्व आरपीएस अधिकारी महेंद्र सिंह, तत्कालीन बीडीओ मनोहर लाल सिसोदिया और तत्कालीन एक्सईएन देशराज नूनिया प्रमुख हैं। इसके अलावा नृसिंह रेबारी, सुरेश माथुर और चार अन्य चिकित्सकों के खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्रवाई की गई है। सरकार का मानना है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को दंडित किया जाना आवश्यक है। 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने रिश्वतखोरी, ट्रैप और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 अन्य मामलों में भी जांच और कार्रवाई को मंजूरी दी गई है। प्रशासन को स्पष्ट संदेश सरकार की इस व्यापक कार्रवाई को प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से राज्य के सरकारी तंत्र को स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामलों में अब सख्ती से निपटा जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान को राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।