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मौसम का रौद्र रूप, कई जिलों में पेड़-बिजली खंभे गिरे, ब्लैकआउट जैसे हालात

हिसार  हरियाणा में मौसम ने अचानक रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। भीषण गर्मी और तपती लू के बीच प्रदेश के कई जिलों में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आंधी और तेज वर्षा से फतेहाबाद सहित राज्य के कई हिस्सों में सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभे और दुकानों के टीन शेड व होर्डिंग्स उखड़ गए, जिससे गुरुग्राम सहित कई इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई है। हांसी में करीब एक घंटे तक चली तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि भी हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब के ऊपर चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार से 13 जून तक पूरे प्रदेश में भारी वर्षा, गरज-चमक और ओलावृष्टि का ‘आरेंज अलर्ट’ जारी किया है। वीरवार सुबह से ही मौसम के मिजाज बदले-बदले नजर आए। सरकार की ओर से मोबाइल पर इमरजेंसी अलर्ट जारी मौसम के इस रूप को देख हरियाणा सरकार व आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ (चेतावनी संदेश) भेजा। इस संदेश में पंचकूला, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और पानीपत जिलों के निवासियों को घरों में रहने और तेज तूफान व ओलावृष्टि के प्रति सावधान रहने की सलाह दी है। प्रारंभिक सुस्ती के बाद मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। गति में तेजी आई है, लेकिन बारिश की स्थिति अच्छी नहीं है। जून में अभी तक देश में औसतन 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस स्थिति को अलनीनो से जोड़कर देखा जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में तेजी से उभर रहा है। यूपी और बिहार में कई लोगों की मौत पश्चिम विक्षोभ से उत्तर भारत में वीरवार को अचानक मौसम ने करवट ली। उत्तर प्रदेश और बिहार में तेज आंधी-पानी और वज्रपात से 16 लोगों की मौत हो गई। जिनमें बिहार में 10 लोगों की जान गई, जबकि एक ही परिवार के चार लोगों समेत 10 झुलस गए। वहीं, कई जगह वर्षा से जलभराव हुआ।  

CM नायब सैनी और अमित शाह की मुलाकात, हरियाणा से जुड़े अहम मामलों पर हुई विस्तृत बातचीत

चंडीगढ़. नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हिस्सा लेने के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। करीब आधे घंटे की मुलाकात के दौरान पंजाब में अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव की तैयारी तथा हरियाणा में संगठन के बदलाव को लेकर चर्चा हुई। बताया जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई हरियाणा के सीएम की बातचीत के दौरान पंजाब ही केंद्र में रहा। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने गृहमंत्री को पंजाब के अब तक किए गए दौरों के बारे में फीड बैक दिया। साथ ही राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ हो रही मुलाकातों पर भी बातचीत की। पंजाब के किसानों व आम लोगों को आ रही परेशानियों से नायब सैनी ने केंद्रीय गृह मंत्री को अवगत कराया। नायब सैनी ने कहा कि पंजाब के लोग केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, क्योंकि कई योजनाएं पंजाब लागू नहीं करता है, जबकि वे हरियाणा की भाजपा सरकार की योजनाओं से बहुत अधिक प्रभावित हैं। नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय गृह मंत्री को पंजाब की चुनावी रणनीति पर भी अपनी रिपोर्ट पेश की। यह भी बताया कि संगठन के बड़े नेता भी पंजाब का दौरा करना आरंभ करेंगे। मुख्यमंत्री पंजाब को लेकर लगातार सक्रिय हैं। वे माह में तीन से चार बार वहां पार्टी की ओर से होने वाली जनसभाओं के साथ-साथ धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं। शुक्रवार को वह एक बार फिर से पंजाब के राजपुरा जा रहे हैं। इससे पहले इसी सप्ताह उन्हों ने धुरी में जनसभा की थी। मुख्यमंत्री ने हरियाणा सरकार के साल 2047 के विजन प्रारूप पर भी विस्तार से चर्चा की। अमित शाह को बताया गया कि सिलसिलेवार चुनावी वादों को पूरा किया जा रहा है। हरियाणा सरकार द्वारा बनाए जा चुके बोर्ड एवं निगमों के चेयरमैनों की पूरी रिपोर्ट देने के साथ ही भविष्य में बनाए जाने वाले चेयरमैनों के नामों की भी मंजूरी ली गई है।

फुटपाथ, डिवाइडर और स्ट्रीट लाइट से सुसज्जित होंगी प्रदेश की प्रमुख सड़कें

 पानीपत लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने चार प्रमुख नेशनल और स्टेट हाईवे को माडल रोड के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में पानीपत से सफीदों, जींद व भिवानी रोड, गोहाना से खानपुर कलां रोड (सोनीपत), घरौंडा से फुरलक रोड (करनाल) व ओल्ड बाईपास रोड (कैथल) को शामिल किया है। यह पहल प्रदेश की सड़कों की गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ-साथ यातायात सुरक्षा को भी बढ़ावा देगी। पीडब्ल्यूडी ने संबंधित मार्गों परहाई टेंशन (एचटी) और लो टेंशन (एलटी) बिजली लाइनों को शिफ्ट करने के संबंध में बिजली निगम को पत्र भेजे हैं। मॉडल रोड परियोजना के तहत सभी चयनित सड़कों के दोनों ओर व्यवस्थित फुटपाथ बनाए जाएंगे। इसके अलावा सड़क के बीचों-बीच आकर्षक डिवाइडर तैयार किए जाएंगे, जिन पर फूलों और सजावटी पौधों का रोपण किया जाएगा। सुरक्षा पर विशेष ध्यान रात्रि में बेहतर रोशनी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। वहीं, यातायात नियमों के पालन और दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट और मानक के अनुरूप जेबरा क्रासिंग बनाई जाएंगी। पानीपत पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन सवित पानु ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से लैस इन मार्गों पर यात्रा अधिक आरामदायक होगी। साथ ही शहरों व कस्बों की कनेक्टिविटी मजबूत होने से स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।     बिजली लाइनों की शिफ्टिंग के लिए कई तरह की औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। ये औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिफ्टिंग के कार्य तेजी से पूरे किए जाएंगे। -आदित्य कुंडू, एक्सईएन, बिजली निगम, पानीपत।  

ऑनलाइन प्यार पड़ा भारी! Tinder के जरिए जज को लगाया लाखों का चूना, मामले में FIR दर्ज

चंडीगढ़  ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। हरियाणा की एक महिला जज कथित तौर पर हनी ट्रैप (Honey Trap) का शिकार हो गईं। उनसे 52 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई। दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपी की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पहली नजर में ऑनलाइन रोमांस घोटाले के पैटर्न को दर्शाती है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस केस में हुए वित्तीय लेनदेन हनी ट्रैप की परिकल्पना के अनुकूल हैं। कोर्ट ने जांच के शुरुआती चरण और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के गायब होने का हवाला देते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया। सीक्रेट ऑफिसर बनकर जाल में फंसाया यह मामला नवंबर 2025 का है, जब पीड़िता मोबाइल डेटिंग ऐप टिंडर (Tinder) के माध्यम से आरोपी के संपर्क में आई थीं। आरोपी ने कथित तौर पर खुद को एक गुप्त सरकारी विभाग का अधिकारी बताते हुए अपना नाम अभिमन्यु वशिष्ठ बताया था। इसके बाद दोनों के बीच संबंध विकसित हुए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस दौरान आरोपी ने जज साहिबा को ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद उन्होंने आरोपी से जुड़े बैंक खातों में 52 लाख रुपये से अधिक ट्रांसफर कर दिए। कोई रिटर्न नहीं मिला और अंततः यह मामला धोखाधड़ी में बदल गया। नौकरानी के नाम पर दर्ज कराई गई FIR इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि ठगी की शिकार होने के बाद भी जज साहिबा ने खुद एफआईआर दर्ज नहीं कराई। शिकायत उनकी घरेलू सहायिका यानी कि नौकरानी के नाम पर दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसके साथ एक ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए धोखाधड़ी हुई है। सत्र अदालत ने जब आरोपी की जमानत याचिका और बैंक खातों की जांच की तो पाया कि लगभग सभी संदिग्ध लेनदेन न्यायिक अधिकारी के खातों से हुए थे न कि घरेलू सहायिका के खाते से। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, "दर्ज की गई शिकायत असली शिकायतकर्ता को प्रतिबिंबित नहीं करती है। एक न्यायिक अधिकारी, जिसे खुद न्याय देने और कानून के सामने सच्चाई को बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसने खुद आगे आने के बजाय अपनी नौकरानी के नाम का सहारा लेकर अदालत का रुख किया है।" अदालत ने माना कि रोमांस स्कैम का शिकार होने पर व्यक्तिगत शर्मिंदगी हो सकती है, लेकिन यह जांचकर्ताओं से महत्वपूर्ण तथ्यों या सबूतों को छिपाने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा, "किसी अधिकारी की व्यक्तिगत असुविधा को आपराधिक जांच की अखंडता से समझौता करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।" जांच और दोनों पक्षों के रवैये पर कोर्ट नाराज अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि केस से जुड़े कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत जांच से गायब हैं। डेटिंग ऐप से शुरू हुई इस बातचीत के न तो टिंडर चैट्स और न ही जज साहिबा के पूरे व्हाट्सऐप संदेश रिकॉर्ड पर रखे गए हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी एकत्र नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता एक न्यायिक अधिकारी होने के नाते कानून को बेहतर समझती हैं, इसलिए उन्हें जल्द से जल्द जांच अधिकारी या मजिस्ट्रेट के सामने आकर अपनी पूरी व्हाट्सऐप चैट हिस्ट्री, टिंडर चैट और लेनदेन की पूरी सच्चाई पेश करनी चाहिए। वहीं, अदालत ने आरोपी की भी खिंचाई की और कहा कि वह आंख-मिचौली खेल रहा है। आरोपी ने केवल जज द्वारा भेजे गए संदेशों को पेश किया और अपने जवाब छिपा लिए, साथ ही उसने अपने मोबाइल फोन का एक्सेस देने से भी इनकार कर दिया।

नई पहचान पाएंगी हरियाणा की सड़कें, 4 हाईवे को मॉडल रोड के रूप में किया जाएगा विकसित

पानीपत. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने चार प्रमुख नेशनल और स्टेट हाईवे को माडल रोड के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में पानीपत से सफीदों, जींद व भिवानी रोड, गोहाना से खानपुर कलां रोड (सोनीपत), घरौंडा से फुरलक रोड (करनाल) व ओल्ड बाईपास रोड (कैथल) को शामिल किया है। यह पहल प्रदेश की सड़कों की गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ-साथ यातायात सुरक्षा को भी बढ़ावा देगी। पीडब्ल्यूडी ने संबंधित मार्गों परहाई टेंशन (एचटी) और लो टेंशन (एलटी) बिजली लाइनों को शिफ्ट करने के संबंध में बिजली निगम को पत्र भेजे हैं। मॉडल रोड परियोजना के तहत सभी चयनित सड़कों के दोनों ओर व्यवस्थित फुटपाथ बनाए जाएंगे। इसके अलावा सड़क के बीचों-बीच आकर्षक डिवाइडर तैयार किए जाएंगे, जिन पर फूलों और सजावटी पौधों का रोपण किया जाएगा। सुरक्षा पर विशेष ध्यान रात्रि में बेहतर रोशनी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। वहीं, यातायात नियमों के पालन और दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट और मानक के अनुरूप जेबरा क्रासिंग बनाई जाएंगी। पानीपत पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन सवित पानु ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से लैस इन मार्गों पर यात्रा अधिक आरामदायक होगी। साथ ही शहरों व कस्बों की कनेक्टिविटी मजबूत होने से स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। बिजली लाइनों की शिफ्टिंग बिजली लाइनों की शिफ्टिंग के लिए कई तरह की औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। ये औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिफ्टिंग के कार्य तेजी से पूरे किए जाएंगे। -आदित्य कुंडू, एक्सईएन, बिजली निगम, पानीपत।

अटारी बॉर्डर से बैरंग लौटे श्रद्धालु, एचएसजीएमसी ने बैठाई जांच

कुरुक्षेत्र  हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) की ओर से श्रीगुरु अर्जुन देव महाराज के शहीदी गुरु पर्व पर पाकिस्तान की धार्मिक यात्रा के लिए भेजे गए सिखों के जत्थे को अटारी-वाघा बॉर्डर से वापस भेजे जाने के बाद मामला पूरी तरह गरमा गया है। प्रशासनिक और दस्तावेजी प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक के कारण 94 श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में प्रवेश नहीं मिल सका और उन्हें बार्डर से बैरंग लौटना पड़ा। इस बड़ी लापरवाही के बाद जहां श्रद्धालुओं में भारी रोष है, वहीं एचएसजीएमसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। बुधवार देर रात जत्थे के वापस कुरुक्षेत्र लौटने के बाद वीरवार सुबह एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा तुरंत मुख्य कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की। कमेटी ने साफ किया है कि इस ऐतिहासिक चूक के लिए जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। गृह मंत्रालय तक दौड़े अधिकारी, पर नहीं मिली क्लीयरेंस सूत्रों के मुताबिक, यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेज समय रहते बार्डर पर तैनात सुरक्षा और आव्रजन (इमिग्रेशन) अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाए थे। बुधवार को जब जत्थे को बार्डर पर रोके जाने की खबर आई, तो एचएसजीएमसी के आला अधिकारी तुरंत चंडीगढ़ भागे और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क साधा। मंत्रालय से संपर्क करने पर जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला था। पता चला कि जिला स्तर से जो अधिकृत सूची गृह विभाग को भेजी जानी चाहिए थी, वह समय पर पहुंची ही नहीं। वीजा जारी होने के बाद भी सूची को वापस जिलों में नहीं भेजा गया। तालमेल की कमी के कारण श्रद्धालुओं को जरूरी क्लीयरेंस नहीं मिल सकी। अब संबंधित विभाग के कर्मचारी खुद को पाक-साफ बताते हुए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ने में लगे हैं।  

बॉर्डर से लौटाए गए 94 सिख श्रद्धालु, शहीदी गुरु पर्व यात्रा पर उठा बड़ा सवाल

कुरुक्षेत्र. हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) की ओर से श्रीगुरु अर्जुन देव महाराज के शहीदी गुरु पर्व पर पाकिस्तान की धार्मिक यात्रा के लिए भेजे गए सिखों के जत्थे को अटारी-वाघा बॉर्डर से वापस भेजे जाने के बाद मामला पूरी तरह गरमा गया है। प्रशासनिक और दस्तावेजी प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक के कारण 94 श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में प्रवेश नहीं मिल सका और उन्हें बार्डर से बैरंग लौटना पड़ा। इस बड़ी लापरवाही के बाद जहां श्रद्धालुओं में भारी रोष है, वहीं एचएसजीएमसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। बुधवार देर रात जत्थे के वापस कुरुक्षेत्र लौटने के बाद वीरवार सुबह एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा तुरंत मुख्य कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की। कमेटी ने साफ किया है कि इस ऐतिहासिक चूक के लिए जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। गृह मंत्रालय तक दौड़े अधिकारी, पर नहीं मिली क्लीयरेंस सूत्रों के मुताबिक, यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेज समय रहते बार्डर पर तैनात सुरक्षा और आव्रजन (इमिग्रेशन) अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाए थे। बुधवार को जब जत्थे को बार्डर पर रोके जाने की खबर आई, तो एचएसजीएमसी के आला अधिकारी तुरंत चंडीगढ़ भागे और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क साधा। मंत्रालय से संपर्क करने पर जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला था। पता चला कि जिला स्तर से जो अधिकृत सूची गृह विभाग को भेजी जानी चाहिए थी, वह समय पर पहुंची ही नहीं। वीजा जारी होने के बाद भी सूची को वापस जिलों में नहीं भेजा गया। तालमेल की कमी के कारण श्रद्धालुओं को जरूरी क्लीयरेंस नहीं मिल सकी। अब संबंधित विभाग के कर्मचारी खुद को पाक-साफ बताते हुए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ने में लगे हैं।

प्रदर्शन में भाग लेना पड़ा महंगा, हरियाणा की महिला शिक्षक पर गिरी निलंबन की गाज

रोहतक  हरियाणा के रोहतक जिले के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत एक अतिथि शिक्षिका को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले सप्ताह हुए एक प्रदर्शन में शामिल होने के कुछ दिनों बाद निलंबित कर दिया गया है। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित किया गया था। जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने  शिक्षिका सुलेखा दलाल को आठ जून से निलंबित करने का आदेश जारी किया। हालांकि आदेश में निलंबन का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। खुद को बताया था कॉकरोच की मां आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान रोहतक खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यालय उनका मुख्यालय रहेगा और उन्हें बिना पूर्व अनुमति के वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। गौरतलब है कि एक वीडियो क्लिप में दलाल को जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन के बोलते हुए देखा गया था। वीडियो में कथित तौर पर उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि यह लड़ाई है। इस बार ‘करो या मरो’ की लड़ाई है। अब ‘कॉकरोच की मां’ मैदान में उतर चुकी है। हम किसी समूह का हिस्सा नहीं हैं, हम अपने बच्चों के साथ हैं। एक मां पूरे देश की मां होती है। क्या बोली टीचर     निलंबन को लेकर पूछे जाने पर दलाल ने कहा कि उन्हें इसके कारण की जानकारी नहीं है।     उन्होंने कहा कि मैं कई वर्षों से काम कर रही हूं। मुझे यह नहीं पता था कि वहां (प्रदर्शन में) शामिल नहीं हुआ जा सकता।     मुझे लगता है कि निलंबन से पहले मुझे कारण बताया जाना चाहिए था।     शिक्षिका ने बताया कि उनके स्नातक पुत्र ने उस भर्ती परीक्षा में भाग लिया था, जिसमें कथित अनियमितताएं सामने आई हैं।     उन्होंने कहा कि इसलिए मेरा बेटा और एक अभिभावक के रूप मैं प्रभावित हैं। मेरा किसी पार्टी या संगठन से कोई संबंध नहीं उन्होंने कहा कि मैं वहां केवल एक चिंतित मां के रूप में गई थी। मैंने जो कहा, वह एक मां का दर्द था। मेरा किसी पार्टी या संगठन से कोई संबंध नहीं है। उल्लेखनीय है कि अतिथि शिक्षक की नियुक्ति सरकार द्वारा अस्थायी रिक्तियों को भरने के लिए अनुबंध के आधार पर की जाती है। सीजेपी का प्रदर्शन छह जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ था, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों और युवाओं ने कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग की थी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह समूह हाल के हफ्तों में परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया अभियानों के जरिए चर्चा में आया है और खुद को शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग करने वाला युवा मंच बताता है।  

NCR में बड़ा बदलाव संभव! हरियाणा के 5 जिलों की किस्मत का फैसला करेगी 16 जून की बैठक

चंडीगढ़  दिल्ली और आसपास के राज्यों के करोड़ों लोगों के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमाओं से जुड़ी एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। हरियाणा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का दायरा अब बहुत जल्द बड़े स्तर पर सिकुड़ने वाला है। आगामी 16 जून को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी) की एक अहम बैठक होने जा रही है। यहां करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जिलों का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से बाहर हो सकता है।  दरअसल, केंद्र सरकार और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर की सीमाओं की समीक्षा कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार, एनसीआर की सीमा दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित की जा सकती है। इस बदलाव का सबसे अधिक असर हरियाणा पर पड़ने की संभावना है। वर्तमान में हरियाणा के 14 जिले पूरी तरह या आंशिक रूप से एनसीआर में शामिल हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। नया प्रस्ताव लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर रह सकता है। इससे करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जैसे जिलों के बड़े हिस्से एनसीआर की सीमा से बाहर हो सकते हैं। इस मुद्दे को सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उठाया था। उनका तर्क था कि दिल्ली से काफी दूर स्थित जिलों को एनसीआर में बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने एनसीआर के मौजूदा ढांचे की समीक्षा की आवश्यकता पर कई बार जोर दिया था। अब उनकी इसी सोच को रीजनल प्लान-2041 के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। क्या है हरियाणा सरकार का दिया गया सुझाव? हरियाणा सरकार ने यह भी सुझाव दिया है कि राज्य के 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़े कॉरिडोर को एनसीआर में शामिल रखा जाए . इससे सड़क और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है . माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से पानीपत और करनाल के कुछ हिस्सों को राहत मिल सकती है। राज्य सरकार का कहना है कि एनसीआर में शामिल जिलों पर कई अतिरिक्त नियम और प्रतिबंध लागू होते हैं। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का असर उन क्षेत्रों पर भी पड़ता है, जो दिल्ली के प्रभाव क्षेत्र से काफी दूर हैं। इससे उद्योग, निर्माण कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।  यदि एनसीआर की सीमा में बदलाव होता है, तो इसका असर केवल एनसीआर का दर्जा खत्म होने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग, परिवहन परियोजनाओं, रेल कनेक्टिविटी, निवेश योजनाओं और रियल एस्टेट सेक्टर पर भी प्रभाव पड़ सकता है।अब सभी की नजर 16 जून को होने वाली एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर टिकी है, जहां इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है। 

सिख गुरुओं और बाबा बंदा सिंह बहादुर की शिक्षाएं अब बच्चों को पढ़ाई जाएंगी

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिख समाज से किया गया एक महत्वपूर्ण वादा पूरा करते हुए कक्षा आठवीं के इतिहास के पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं व बाबा बंदा सिंह बहादुर से जुड़े इतिहास को शामिल करा दिया है। अब स्कूली बच्चे सिख गुरुओं के साथ-साथ बाबा बंदा सिंह बहादुर जी के त्याग, बलिदान और आदर्शों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने हरियाणा में मनाए गए गुरु तेगबहादुर जी के 350वें शहीदी समागम के अवसर पर घोषणा की थी कि आने वाली पीढ़ियों को सिख इतिहास, गुरुओं के आदर्शों और उनके महान बलिदानों से परिचित कराने के लिए उन्हें स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाया जाएगा। अब सरकार ने इस घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए इसे पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक, सभी सिख गुरुओं ने मानवता, समानता, सेवा, करुणा, भाईचारे और सामाजिक न्याय का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं और बाबा बंदा सिंह बहादुर का जीवन केवल एक समुदाय की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने गुरु गोबिंद सिंह जी की प्रेरणा से अन्याय, अत्याचार और शोषण के विरुद्ध संघर्ष करते हुए समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को सम्मान और अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनका जीवन साहस, नेतृत्व, राष्ट्रभक्ति और जनकल्याण की भावना का अद्वितीय उदाहरण है, जो आज भी युवाओं को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार शिक्षा को केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण का सशक्त साधन मानती है। इसी सोच के तहत विद्यालयी पाठ्यक्रम में ऐसे महापुरुषों के जीवन और शिक्षाओं को स्थान दिया जा रहा है, जिन्होंने राष्ट्र और समाज के लिए अनुकरणीय कार्य किए। मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. प्रभलीन सिंह ने हरियाणा सरकार की इस महत्वपूर्ण पहल के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सिख समुदाय की लंबे समय से लंबित और भावनात्मक रूप से जुड़ी मांग को पूरा समाज की भावनाओं का सम्मान किया है।