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वजन घटाने के लिए खाएं हाई प्रोटीन सोया पराठा, स्वाद भी और सेहत भी भरपूर

 वजन घटाने के सफर में सबसे बड़ी चुनौती होती है एक ऐसा खाना ढूंढना, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखे और प्रोटीन से भरपूर हो. अगर आप रोज-रोज वही उबला हुआ खाना या फीका सलाद खाकर बोर हो चुके हैं, तो सोया पराठा आपके लिए एक परफेक्ट ऑप्शन है. यह खाने में काफी टेस्टी होता है और इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है. सही तरीके से बनाया गया सोया पराठा नाश्ते, लंच या डिनर में आसानी से शामिल किया जा सकता है. आइए जानते हैं इसकी (High Protein Soya Paratha Recipe) आसान रेसिपी. सोया पराठा बनाने के लिए जरूरी सामग्री     सोया चंक्स: 1 कप (उबले और पिसे हुए)     गेहूं का आटा (या मल्टीग्रेन आटा): 1 कप     बारीक कटा प्याज: 1 छोटा     हरी मिर्च: 1-2 (बारीक कटी हुई)     अदरक-लहसुन का पेस्ट: 1 छोटा चम्मच     मसाले: आधा चम्मच हल्दी, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच गरम मसाला, और आधा चम्मच अजवाइन     बारीक कटा हरा धनिया: आधा कप     नमक: स्वादानुसार     तेल या घी: पराठा सेकने के लिए (बिल्कुल कम मात्रा में) पराठा बनाने की आसान विधि स्टेप 1: सोया कीमा तैयार करें सबसे पहले सोया चंक्स को गर्म पानी में थोड़ा सा नमक डालकर 10 मिनट के लिए भिगो दें. जब ये सॉफ्ट हो जाएं, तो इनका सारा पानी अच्छी तरह निचोड़ लें. अब इन्हें मिक्सी में डालकर हल्का दरदरा (कीमा जैसा) पीस लें. स्टेप 2: चटपटी स्टफिंग बनाएं एक पैन में बस आधा चम्मच तेल गर्म करें. इसमें अजवाइन, अदरक-लहसुन का पेस्ट और हरी मिर्च डालकर भूनें. अब बारीक कटा प्याज डालें और हल्का गुलाबी होने तक पकाएं. इसके बाद पिसा हुआ सोया, हल्दी, लाल मिर्च, गरम मसाला और नमक डालें. सब कुछ 3-4 मिनट तक भूनें और आखिर में हरा धनिया मिलाकर गैस बंद कर दें. आपकी हाई-प्रोटीन स्टफिंग तैयार है. स्टेप 3: आटा गूंथें और पराठा बेलें गेहूं के आटे में थोड़ा सा नमक और पानी डालकर एक सॉफ्ट डो (आटा) गूंथ लें. अब आटे की एक लोई लें, उसे थोड़ा सा बेलें और बीच में 2 चम्मच सोया की स्टफिंग भरें. इसे चारों तरफ से बंद करके पोटली जैसा बना लें और सूखे आटे की मदद से हल्के हाथों से गोल पराठा बेल लें. लॉस में क्यों फायदेमंद है सोया पराठा?     प्रोटीन का पावरहाउस: सोयाबीन को शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है. यह मांसपेशियों (Muscles) को मजबूत बनाता है और फैट बर्न करने में मदद करता है.     लंबे समय तक नहीं लगेगी भूख: इसमें फाइबर की मात्रा अच्छी होती है, जिससे इसे खाने के बाद दोपहर के लंच तक आपको बार-बार भूख नहीं लगती और आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं.     मेटाबॉलिज्म बूस्ट करता है: हाई प्रोटीन डाइट लेने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे कैलोरी तेजी से बर्न होती है.  

अब चैट खोले बिना पता चलेगा कौन है ऑनलाइन, WhatsApp ला रहा नया ग्रीन डॉट फीचर

WhatsApp ने हाल ही में यूजरनेम फीचर का ऐलान किया था. तब से अब तक ये फीचर विवादों में बना हुआ है और रोल आउट नहीं हुआ है. बहरहाल, अब एक और फीचर आ रहा है जो काफी यूजर्स को पसंद भी आएगा. वॉट्सऐप के इस अपकमिंग फीचर मदद से यूजर्स को यह जानने के लिए चैट खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि सामने वाला ऑनलाइन है या नहीं. वॉट्सऐप अब कॉन्टैक्ट की प्रोफाइल फोटो पर एक छोटा ग्रीन डॉट दिखाने की तैयारी कर रहा है. यह डॉट इस बात का साइन होगा कि वह यूजर उस समय वॉट्सऐप इस्तेमाल कर रहा है. फिलहाल यह फीचर एंड्रॉयड और आईफोन दोनों के बीटा वर्जन में कुछ चुनिंदा यूजर्स के लिए जारी किया गया है. वॉट्सऐप के नए अपडेट में जब आप किसी कॉन्टैक्ट की चैट इनफो स्क्रीन खोलेंगे, तो अगर वह यूजर ऑनलाइन होगा तो उसकी प्रोफाइल फोटो पर हरे रंग का छोटा डॉट दिखाई देगा. जैसे ही वह वॉट्सऐप से बाहर जाएगा, यह डॉट अपने आप गायब हो जाएगा. अभी तक वॉट्सऐप में किसी के ऑनलाइन होने की जानकारी सिर्फ Online लिखकर दिखाई जाती थी. इसके लिए चैट खोलनी पड़ती थी. अब कंपनी इस टेक्स्ट की जगह ग्रीन डॉट देने जा रही है, जिससे एक नजर में ही पता चल जाएगा कि सामने वाला एक्टिव है या नहीं. कंपनी का मानना है कि इससे यूजर्स का एक्स्पीरिएंस पहले से बेहतर होगा. हालांकि यह फीचर सभी लोगों के लिए नहीं दिखेगा. अगर किसी यूजर ने अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स में ऑनलाइन छिपा रखा है, तो उसके प्रोफाइल पर ग्रीन डॉट दिखाई नहीं देगा. वॉट्सऐप ने इस फीचर को मौजूदा प्राइवेसी सेटिंग्स के साथ ही जोड़ा है. अगर आपने किसी को अपना ऑनलाइन स्टेटस देखने की अनुमति नहीं दी है, तो यह नया साइन भी दिखाई नहीं देगा. फिलहाल ग्रीन डॉट सिर्फ चैट इनफो स्क्रीन तक सीमित है. यह अभी चैट लिस्ट या होम स्क्रीन पर नहीं दिखता. लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक वॉट्सऐप फ्यूचर में इसे ऐप के दूसरे हिस्सों में भी ला सकता है, ताकि ऑनलाइन कॉन्टैक्ट को पहचानना और आसान हो जाए. गौरतलब है कि ये फीचर फेसबुक मैसेंजर, टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड और कई दूसरे मैसेजिंग ऐप्स में पहले से मौजूद है. फिलहाल ये फीचर बीटा टेस्टिंग फेज में है. इसलिए ये कह पाना कि ये लॉन्च कब होगा मुश्किल है. कई बार कंपनी बीटा टेस्टिंग के बाद कभी फीचर लॉन्च ही नहीं करती है. देखना दिलचस्प होगा कि ये फीचर कंपनी कब ऑफिशियली रोलआउट करती है.

सफेद बालों से राहत के लिए करी पत्ते का तेल, जानें फायदे और इस्तेमाल का तरीका

 आजकल कम उम्र में बालों का सफेद होना एक आम समस्या बन गई है. पहले जहां लोगों के बाद उम्र बढ़ने पर सफेद होते थे, वहीं अब 20-30 साल के युवाओं में भी ये परेशानी तेजी से देखने को मिल रही है. ऐसे में युवाओं से लेकर बड़े लोग तक बार-बार अपने सफेद बालों को काला करने के लिए हेयर डाई या केमिकल वाले हेयर कलर का इस्तेमाल करते हैं. केमिकल वाली हेयर डाई से बाल काले तो हो सकते हैं, लेकिन लगातार इनका इस्तेमाल बालों को नुकसान भी पहुंचा सकता है. यही वजह है कि आजकल लोग प्राकृतिक और घरेलू उपायों की तलाश में रहते हैं. अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो केमिकल हेयर डाई लगाना पसंद नहीं करते हैं और बालों को काला करने के लिए किसी नेचुरल नुस्खे की तलाश में रहते हैं, तो ये खबर आपके लिए है. आपने करी पत्ते की मदद से सफेद बालों को काला करने के बारे में जरूर सुना होगा. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में करी पत्ता सफेद बालों पर असर करता है या ये सिर्फ एक घरेलू नुस्खा भर है? आइए जानते हैं कि सफेद बालों के लिए करी पत्ते का इस्तेमाल कैसे किया जाता है, इससे बालों को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं. कम उम्र में बाल सफेद क्यों हो रहे हैं? पहले सफेद बाल सिर्फ बढ़ती उम्र की निशानी माने जाते थे, लेकिन अब छोटी उम्र के लोगों में भी ये समस्या तेजी से बढ़ रही है. 20-30 साल के कई लड़के-लड़कियों के बाल उम्र से पहले ही सफेद होने से परेशान हैं. इसके पीछे तनाव, खराब खानपान, प्रदूषण, जेनेटिक्स और बालों पर बार-बार केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल जैसी कई वजहें होती हैं. यही कारण है कि आजकल लोग बालों की देखभाल के लिए नेचुरल और घरेलू उपायों की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. बालों के लिए क्यों फायदेमंद माना जाता है करी पत्ता? करी पत्ता बालों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. इसमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बालों और स्कैल्प के लिए बढ़िया माने जाते हैं. इनका नियमित इस्तेमाल बालों की जड़ों को मजबूत बनाने, स्कैल्प को पोषण देने, ड्राईनेस को कम करने और बालों की चमक बनाए रखने में मदद कर सकता है. साथ ही, ये समय से पहले बाल सफेद होने की एक वजह माने जाने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भी मददगार हो सकता है. क्या करी पत्ता सफेद बालों को दोबारा काला कर सकता है? इसका सटीक जवाब मिल पाना मुश्किल है क्योंकि ऐसा कोई पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जो ये साबित करे कि करी पत्ता सफेद बालों को फिर से काला कर सकता है. अगर बालों की नेचुरल तरीके से रंग बनाने वाले सेल्स काम करना बंद कर चुके हैं, तो सिर्फ करी पत्ते से बालों का काला हो पाना संभव नहीं है. हालांकि, ये बालों को हेल्दी रखने और समय से पहले सफेद होने की रफ्तार को कुछ हद तक धीमा करने में मदद कर सकता है. सफेद बालों के लिए करी पत्ते का तेल कैसे बनाएं? अगर आप इसे आजमाना चाहते हैं, तो घर पर आसानी से करी पत्ते का तेल तैयार कर सकते हैं. तेल बनाने के लिए आपके चाहिए:     15-20 ताजे करी पत्ते     2 बड़े चम्मच नारियल का तेल बनाने का तरीका     सबसे पहले नारियल का तेल हल्का गर्म करें.     इसमें करी पत्ते डाल दें.     पत्तों का रंग गहरा होने तक धीमी आंच पर पकाएं.     अब गैस बंद करके तेल को ठंडा होने दें.     ठंडा होने के बाद तेल छानकर किसी साफ बोतल में भर लें. इस्तेमाल करने का सही तरीका     तेल को स्कैल्प और बालों की जड़ों में अच्छी तरह लगाएं.     5-10 मिनट हल्के हाथों से मसाज करें.     करीब 2 घंटे तक तेल लगा रहने दें.     इसके बाद माइल्ड शैंपू से बाल धो लें.     बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में 2 से 3 बार इस्तेमाल किया जा सकता है.  

क्या ऐप से बंद हो सकता है ATM? वायरल वीडियो ने बढ़ाई चिंता, एक्सपर्ट्स ने बताया सच

पिछले दिनों जिस तरह से BAT-BMS नाम की ऐप सड़क चलते ई-रिक्शा बंद कर रही थी, कुछ वैसा ही अब ATM मशीनों के साथ होता दिख रहा है। दरअसल इंटरनेट पर एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि एक ऐप की मदद से ATM मशीन को बंद या चालू किया जा सकता है। हालांकि तेजी से फैल रहे इस वीडियो की प्रमाणिकता को पुष्टि नहीं की जा सकती लेकिन वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि फोन में मौजूद ऐप की मदद से ATM को बंद और चालू किया जा रहा है। वीडियो में ऐसा करने वालों के चेहरे नहीं दिख रहे लेकिन इतना साफ है कि वे बैंक या ATM मशीन को मैनेज करने वाला स्टाफ नहीं है। इसके अलावा वीडियो में दिख रहे ऐप का इंटरफेस काफी हद तक उस ऐप से मेल खाता है, जो कि पिछले दिनों ई-रिक्शों को बंद करने की वजह बनी थी। इसके बाद सरकार ने इन ऐप्स पर सख्त कदम उठाते हुए इन्हें ब्लॉक कर दिया था ई-रिक्शों के बाद निशाने पर ATM?     पिछले दिनों ई-रिक्शों को बंद करने वाली BAT-BMS ऐप की तर्ज पर अब एक ऐसी ऐप का वीडियो इंटनरेट पर फैल रहा है, जिससे ATM की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि किसी ऐप की मदद से ATM को बंद और फिर रीस्टार्ट किया जा सकता है।     इससे पहले BAT-BMS और Lossigy जैसे चीनी मोबाइल ऐप्स का गलत इस्तेमाल कर चलते हुए ई-रिक्शा को दूर से बंद करने के कई मामले देखने को मिले थे। अब जिस ऐप से ATM को कंट्रोल करते हुए दिखाया जा रहा है उसका इंटरफेस बी BAT-BMS जैसी ही है। इतनी आसानी से हैक हो सकते हैं ATM?     एक्सपर्ट्स के अनुसार ई-रिक्शा को उसके असुरक्षित BMS सिस्टम की वजह से चीनी ऐप द्वारा कंट्रोल किया जाना संभव था लेकिन ATM एक बेहद सुरक्षित मशीन होती है। यह मशीनें बैंकों के नेटवर्क, वीपीएन (VPN) और मल्टी-लेयर सिक्योरिटी फायरवॉल पर काम करती हैं। इन्हें किसी ऐप या ब्लूटूथ की मदद से कंट्रोल किया जाना नामुमकिन है।     इस वीडियो को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि संभव है कि मशीन खुद ही रीबूट हो रही हो और वीडियो बनाने वाले ने सिर्फ टाइमिंग को मैच कर ऐसा दिखाने की कोशिश की है कि वह खुद मशीन को ऐप की मदद से बंद या चालू कर रहा है।     वीडियो में BAT BMS ऐप जैसे इंटरफेस की वजह से यह शक और पुख्ता हो जाता है कि यह सिर्फ व्यूज बटोरने की एक कोशिश भर है। हालांकि फिलहाल इस पर किसी बैंक की ओर से कोई जवाब नहीं आया है सरकार ने किया था ब्लॉक BAT BMS ऐप के जरिए ई-रिक्शा बंद किए जाने के मामले सामने आने के बाद पिछले दिनों भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने गूगल प्ले स्टोर और ऐप स्टोर को कड़े आदेश दिए थे। इसके बाद दोनों ही ऐप स्टोर्स से BAT BMS ऐप जैसे एप्लिकेशन डाउन कर दिए गए थे। हालांकि फिल्हाल गूगल प्ले स्टोर पर BAT BMS नाम से कई फर्जी ऐप्स मौजूद हैं, जिन्हें लोग डाउनलोड भी कर रहे हैं।

मोरिंगा ऑयल से पाएं जवां त्वचा, झुर्रियां और फाइन लाइन्स होंगी कम

आज के समय में खराब खानपान, प्रदूषण और लगातार बढ़ते तनाव के कारण लोग उम्र से पहले ही बूढ़े दिखने लगे हैं. चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां, फाइन लाइन्स और डार्क सर्कल्स आना बेहद आम हो गया है. अपनी त्वचा को वापस जवां और ग्लोइंग बनाने के लिए लोग महंगे स्किन केयर ट्रीटमेंट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन उनमें मौजूद केमिकल्स त्वचा को लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं. अगर आप भी बुढ़ापे से पहले बूढ़ा नहीं दिखना चाहते और नेचुरल तरीके से अपनी स्किन को टाइट और ग्लोइंग बनाना चाहते हैं तो मोरिंगा का तेल आपके लिए एक जादुई वरदान साबित हो सकता है. सहजन के बीजों से निकलने वाला यह तेल एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिंस का पावरहाउस है, जो आपकी त्वचा को अंदर से पोषण देकर उसे हमेशा यूथफुल बनाए रखता है. आइए जानते हैं त्वचा के लिए इसके फायदे और इस्तेमाल करने का सही तरीका. इस्तेमाल करने का सही तरीका: रात का नाइट सीरम: रोज रात को सोने से पहले अपने चेहरे को माइल्ड फेस वॉश से अच्छी तरह साफ कर लें. अब अपनी हथेलियों पर मोरिंगा के तेल की 3-4 बूंदें लें और उन्हें आपस में रगड़कर हल्का गुनगुना करें. इसके बाद चेहरे और गर्दन पर सर्कुलर मोशन में हल्के हाथों से 2-3 मिनट तक मसाज करें और रातभर के लिए छोड़ दें. गुआ शा या रोलर के साथ: अगर आप चेहरे की पफिनेस कम करना चाहते हैं और फेस को परफेक्ट शेप देना चाहते हैं, तो मोरिंगा ऑयल लगाकर फेस रोलर या गुआ शा टूल से मसाज कर सकते हैं. फेस पैक में मिलाकर: आप अपने रेगुलर होममेड फेस पैक (जैसे मुल्तानी मिट्टी या चंदन पाउडर) में भी इस तेल की 4-5 बूंदें मिलाकर चेहरे पर लगा सकते हैं. मोरिंगा के फायदे मोरिंगा के तेल में भरपूर मात्रा में साइटोकिनिन और मुख्य रूप से ज़ियाटिन पाया जाता है, जो त्वचा की कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं. इसमें मौजूद विटामिन ए, सी और ई त्वचा को डीप हाइड्रेशन देते हैं, जिससे चेहरे का रूखापन खत्म होता है और एक नेचुरल गुलाबी निखार आता है. एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होने के कारण यह तेल मुंहासों को रोकता है और ब्लैकहेड्स व डार्क स्पॉट्स को तेजी से हल्का करता है. यह तेल त्वचा में कोलेजन के प्रोडक्शन को बढ़ाता है, जिससे ढीली पड़ चुकी त्वचा में कसाव आता है

ग्रीन टी से बनाएं नेचुरल एंटी-एजिंग टोनर, झुर्रियां और दाग-धब्बों में मिलेगी राहत

उम्र बढ़ना एक नेचुरल प्रोसेस है, जिसे रोका नहीं जा सकता. बढ़ती उम्र के साथ चेहरे पर झुर्रियां, फाइन लाइन्स और स्किन में ढीलापन आना आम बात है. इन्हें कम करने के लिए कई लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स या पार्लर ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में रखी ग्रीन टी भी आपकी स्किन को ग्लोइंग और यंग बनाए रखने में मदद कर सकती है. आज हम आपको घर पर ग्रनी टी से नेचुरल एंटी-एजिंग टोनर बनाना बताएंगे, जिसे आप बेहद आसानी से घर पर तैयार कर सकते हैं. यह टोनर न सिर्फ आपकी लटकती स्किन को टाइट करने में मदद करेगा, बल्कि दाग-धब्बों को दूर कर चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में मदद करेगा. ग्रीन टी से टोनर बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है? 2 कप पानी 2 छोटे चम्मच ग्रीन टी की पत्तियां 1 बड़ा चम्मच गुलाब जल ग्रीन टी से एंटी-एजिंग टोनर कैसे बनाएं?     सबसे पहले एक पैन में 2 कप पानी डालकर उबाल लें.     जब पानी अच्छी तरह उबलने लगे, तब उसमें ग्रीन टी की पत्तियां डाल दें.     अब पैन को ढक दें और तब तक उबालें, जब तक पानी घटकर लगभग आधा रह जाए.     इसके बाद मिश्रण को छान लें और पूरी तरह ठंडा होने दें. जब यह ठंडा हो जाए, तब इसमें गुलाब जल डालकर अच्छी तरह मिला लें.     अब तैयार टोनर को एक साफ स्प्रे बोतल में भरकर फ्रिज में रख लें. आपका नेचुरल एंटी-एजिंग टोनर इस्तेमाल के लिए तैयार है. टोनर का इस्तेमाल चेहरे पर कैसे करें? सबसे पहले चेहरे को किसी अच्छे फेसवॉश से अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद टोनर को सीधे चेहरे पर स्प्रे करें. अगर चाहें तो कॉटन पैड की मदद से भी इसे लगा सकते हैं. बेहतर रिजल्ट के लिए इसका इस्तेमाल दिन में दो बार करें. ग्रीन टी से बने टोनर क्यों है इतना खास ग्रीन टी से बना यह टोनर नेचुरल एंटी-एजिंग की तरह काम करता है. यह स्किन को लंबे समय तक रिफ्रेश और हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है. इसके रेगुलर इस्तेमाल से फाइन लाइन्स, झुर्रियों, पिग्मेंटेशन और डार्क स्पॉट्स की समस्या कम होती है. साथ ही यह चेहरे पर नेचुरल ग्लो बनाए रखने में भी मदद करता है. इन बातों का रखें ध्यान     टोनर को हमेशा साफ और सूखी स्प्रे बोतल में रखें.     इसे फ्रिज में स्टोर करें और 5 से 7 दिनों के भीतर इस्तेमाल कर लें.     अगर आपकी काफी सेंसिटिव है तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें.     अगर टोनर लगाने के बाद जलन, खुजली या एलर्जी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें.  

PM2.5 प्रदूषण से सिर्फ सांस नहीं, बाल भी खतरे में, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

अक्सर माना जाता है कि हवा प्रदूषण के कारण खांसने, दम घुटने और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स ने अब एक ऐसी चेतावनी दी है जो आपकी चिंताएं बढ़ा सकती है. हालिया रिसर्च में पाया गया है कि हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बारीक कण न सिर्फ हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि इनका सीधा असर हमारे बालों और स्कैल्प पर भी पड़ रहा है. ये महीन कण इतने छोटे होते हैं कि ये आसानी से स्कैल्प की त्वचा के रोमछिद्रों में घुस जाते हैं जिससे बालों का गिरना और उनकी क्वालिटी खराब होना एक बड़ी समस्या बन गया है. इस बारे में डॉक्टर ने कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है जो सभी को मानना चाहिए. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और बालों की कमजोरी बेंगलुरु के अपोलो हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी और रेस्पिरेटरी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. समीर बंसल का कहना है, 'PM2.5 सामान्य धूल नहीं है. इसका आकार इतना छोटा होता है कि यह नाक और ऊपरी एयरवे के सुरक्षा कवच को पार करके फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंच जाता है. उन्होंने बताया कि प्रदूषण को केवल खांसी या सांस की तकलीफ तक सीमित नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसका 'इन्फ्लेमेटरी बोझ' शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है जिससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इन्फ्लेमेटरी रिस्पॉन्स पैदा होते हैं.' बेंगलुरु के फोर्टिस हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डायरेक्टर डॉ. विवेक आनंद पडेगल का कहना है, 'लोग PM2.5 को फेफड़ों के लिए हानिकारक मानते हैं लेकिन अब यह स्पष्ट हो रहा है कि इसका प्रभाव हेयर फॉलिकल्स यानी बालों की जड़ों पर भी पड़ रहा है. लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से स्कैल्प में इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा होता है जो बालों के झड़ने, उनके पतले होने और स्कैल्प के अस्वस्थ होने का कारण बन सकता है.' स्कैल्प का इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण के सूक्ष्म कण शरीर में फ्री रेडिकल्स को बढ़ाते हैं, जो बालों की जड़ों की प्रोटीन संरचना को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे बाल न केवल कमजोर और रूखे हो जाते हैं, बल्कि उनके टूटने की रफ्तार भी बढ़ जाती है. द मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण की मार सिर्फ बालों की लंबाई तक सीमित नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक, वायु प्रदूषण में मौजूद हानिकारक तत्व स्कैल्प में सूजन या इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं. जब स्कैल्प पर गंदगी और टॉक्सिन्स की परत जमती है तो यह बालों के रोमछिद्रों को प्रभावित करती है जिससे बालों को जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इसका नतीजा ये होता है कि बाल समय से पहले पतले होने लगते हैं और स्कैल्प में खुजली व डैंड्रफ की समस्या आम हो जाती है. सिस्टमिक हेल्थ रिस्क डॉ. बंसल और डॉ. पडेगल इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि वायु प्रदूषण अब केवल एक अंग की समस्या न होकर एक 'सिस्टमिक हेल्थ रिस्क' बन गया है जो बालों सहित पूरे शरीर को प्रभावित कर रहा है. प्रदूषण की वजह से स्कैल्प पर जो गंदगी की परत जमती है वह स्कैल्प को सेंसिटिव बनाती है. यदि इसे समय रहते साफ न किया जाए तो यह बालों के पतले होने और बालों की जड़ों की मजबूती कम होने का कारण बनती है. बचाव के लिए क्या करें? इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर निकलते समय बालों को स्कार्फ या कैप से जरूर ढकें. प्रदूषण वाली जगहों पर जाने के बाद बालों को माइल्ड सल्फेट-फ्री शैम्पू से धोना चाहिए ताकि गंदगी जमा न हो. इसके अलावा, एंटीऑक्सीडेंट युक्त हेयर केयर प्रोडक्ट्स और संतुलित डाइट का सेवन बालों की जड़ों को प्रदूषण के असर से बचाने में मददगार साबित हो सकता है.

भारत में Apple यूजर्स के लिए बड़ी राहत, App Store पर लौटेगा कार्ड पेमेंट

टिम कुक के रिटायरमेंट से पहले भारत में ऐपल यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। ऐपल के इंडिया ऐप स्टोर पर बहुत जल्द लोग डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करके शॉपिंग कर पाएंगे। करीब 5 साल पहले ऐपल ने भारत में इस सुविधा को हटा लिया था। रिपोर्टों के अनुसार, ऐपल ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कार्ड टोकनाइजेशन नियमों का पालन कर लिया है जिसके बाद वह अपने प्लेटफॉर्म पर डेबिट-क्रेडिट कार्ड से पेमेंट लेना शुरू करने वाली है। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट कहती है कि कंपनी ने भारत में कुछ चुनिंदा यूजर्स के साथ कार्ड पेमेंट का ट्रायल शुरू कर दिया है। हालांकि कंपनी ने इस बारे में कोई ऑफिशियल बयान नहीं दिया है। ऐपल ऑनलाइन स्टोर पर पेमेंट के ऑप्शन? RBI का टोकनाइजेशन नियम लागू होने के बाद ऐपल ने साल 2021 में भारत में कार्ड पेमेंट बंद कर दिया था। अभी लोगों के पास पेमेंट के लिए यूपीआई या नेट बैंकिंग का ही ऑप्शन है। कहा जाता है कि कुछ लोग प्रीपेड ऐपल आईडी बैलेंस से भी शॉपिंग करते थे।     रिपोर्टों के अनुसार, अब कंपनी ने आरबीआई के नियमों का पालन कर लिया है।     नियम कहता है कि सिर्फ कार्ड नेटवर्क ही टोकनाइज्ड कार्ड डेटा को स्टोर कर सकते हैं     इसका डेटा भारत में ही स्टोर होना चाहिए।     नियमों को मानने के बाद ऐपल भारत में दोबारा से कार्ड पेमेंट लेने जा रही है।     यूजर्स को अपने ऐपल गैजेट में सेटिंग्स में जाकर 'पेमेंट एंड शिपिंग' पेज पर डेबिट-क्रेडिट कार्ड को ऐड करना होगा। (REF. ) फीचर को किया जा रहा टेस्ट ऐपल ने इस फीचर के बारे में आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी है। बताया जाता है कि वह इसे टेस्ट कर रही है और आने वाले दिनों में सभी ऐपल यूजर्स के लिए इसे रोलआउट किया जाएगा। कहा जाता है कि कंपनी देश के कई बैंकों और कार्ड नेटवर्क के साथ मिलकर Apple Pay को लॉन्च करने पर काम कर रही है। ‘ऐपल पे’ के लिए काम करते हुए कंपनी को कार्ड पेमेंट की सुविधा वापस लाने में मदद मिली है। ग्राहकों को मिलेगा पेमेंट का नया ऑप्शन इस फीचर के आने के बाद ग्राहकों को ऐपल प्रोडक्ट्स के लिए पेमेंट का नया ऑप्शन मिल जाएगा। भारत में बड़ी संख्या में लोग डेबिट-क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करना पसंद करते हैं। क्रेडिट कार्ड से नया गैजेट खरीदना भी लोगों की प्राथमिकता होती है। ऐपल स्टोर पर कार्ड पेमेंट फीचर आने से बड़ी समस्या हल होगी और शॉपिंग करना अधिक आसान हो जाएगा।  

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त, Meta को मिला 9 जुलाई तक का नया डेडलाइन

नई दिल्ली WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर को लेकर भारत सरकार और Meta के बीच चल रहा विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. अब सरकार ने Meta को अपना जवाब देने के लिए कुछ और समय दिया है।  पहले कंपनी को तीन दिन के भीतर जवाब देना था, लेकिन अब यह समय बढ़ाकर 9 जुलाई कर दिया गया है. सरकार इस फीचर के सुरक्षा और ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है. HT की एक रिपोर्ट मेें सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मेटा को कुछ दिन का एक्स्टेंशन दिया गया है।  दरअसल वॉट्सऐप ने हाल ही में यूजरनेम फीचर का ऐलान किया था. इस फीचर के आने के बाद यूजर्स अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी दूसरे लोगों से बात कर सकेंगे। यानी अगर आपके पास किसी का यूजरनेम है, तो कई मामलों में फोन नंबर शेयर किए बिना भी बातचीत शुरू की जा सकेगी. मेटा का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से बेहतर होगी।  लेकिन भारत सरकार की चिंता कुछ और है. सरकार का मानना है कि अगर किसी प्लेटफॉर्म पर पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करना आसान हो गया, तो ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग और किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान बनाकर ठगी करने जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।  इसी वजह से सरकार ने पिछले हफ्ते Meta को इस फीचर का रोलआउट रोकने और इसकी पूरी जानकारी देने का नोटिस भेजा था।  सरकारी अधिकारियों के मुताबिक मेटा और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर बैठक भी हो चुकी है. बैठक में कंपनी ने यूजरनेम फीचर के सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।  इसके बाद सरकार ने कंपनी को अपना विस्तृत लिखित जवाब देने के लिए 9 जुलाई तक का समय दे दिया है. इसके बाद सरकार तय करेगी कि फीचर को भारत में किस तरह और किन शर्तों के साथ शुरू किया जा सकता है।  मेटा का कहना है कि यूजरनेम फीचर को शुरू से ही सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. कंपनी के मुताबिक यूजरनेम पूरी तरह ऑप्शनल होगा. वॉट्सऐप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा।  इसके अलावा किसी व्यक्ति से बातचीत करने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना चाहिए. कंपनी का दावा है कि उसने फर्जी अकाउंट और स्कैम से बचाने के लिए कई सुरक्षा लेयर भी जोड़ी हैं. हाल ही में मेटा ने इस फीचर से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए एक FAQ भी जारी किया है।  सरकार हालांकि अभी इन दावों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम और पहचान छिपाने वाले फीचर्स का इस्तेमाल कई साइबर अपराधों में हुआ है। ऐसे में वॉट्सऐप पर भी इसी तरह की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सरकार चाहती है कि फीचर शुरू होने से पहले यह साफ हो जाए कि इससे फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगना आसान नहीं होगा।  भारत वॉट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार है, जहां 80 करोड़ से ज्यादा लोग इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में सरकार का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वॉट्सऐप के ग्लोबल रोलआउट पर भी असर डाल सकता है।  अब सभी की नजर 9 जुलाई पर है, जब मेटा अपना विस्तृत जवाब सरकार को सौंपेगी. उसके बाद यह तय होगा कि वॉट्सऐप का नया यूजरनेम फीचर भारत में कब और किन नियमों के साथ शुरू होगा। 

इंस्टाग्राम के CSEAM विज्ञापनों पर सरकार सख्त, Meta को 7 दिन में जवाब देने का नोटिस

भारत सरकार ने मेटा को नोटिस भेजा है. इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों में बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (CSEAM) से जुड़े कंटेंट को लेकर सरकार ने मेटा को नोटिस जारी किया है. साथ ही मंत्रालय ने 7 दिनों के अंदर डिटेल्स में जवाब देने को कहा है. ये जानकारी सूत्रों से मिली है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंस्टाग्राम को ऐसे सभी विज्ञापनों और कंटेंट को तुरंत हटाने/बंद करने का निर्देश दिया है, जो CSEAM तक पहुंच को बढ़ावा देते हैं और उसको आसान बना रहे हैं. भारत समेत दुनियाभर में इंस्टाग्राम का बड़ा यूजरबेस है. युवाओं में इंस्टाग्राम काफी पसंद किया जाता है और इसके रील्स फीचर की मदद से बहुत से लोग घंटों तक का समय बिताते हैं. ऐसे में कंपनियां बेहतर रीच और ब्रांड प्रमोशन के लिए इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देते हैं. वॉट्सऐप को लेकर भी भेजा नोटिस   मेटा की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. कुछ दिन पहले ही सरकार ने मेटा को नोटिस जारी किया है, जिसमें वॉट्सऐप के यूजरनेम को लेकर जवाब मांगा है.  कंपनी ने वॉट्सऐप पर यूजरनेम रिजर्वेशन के लिए भारत में इसको बतौर टेस्टिंग जारी किया था. भारत सरकार ने आशंका जताई थी कि वॉट्सऐप यूजरनेम फीचर की वजह से साइबर ठगों को फायदा मिलेगा. हालांकि कंपनी ने साफ किया था कि वह अभी इस फीचर को रोलआउट नहीं कर रहे हैं, उनका मकसद यूजरनेम फीचर को साल के अंत में लॉन्च करने का है. यूजरनेम फीचर से छिपा सकेंगे फोन नंबर वॉट्सऐप में आने वाले यूजरनेम फीचर की मदद से यूजर्स अपने फोन नंबर को छिपा सकेंगे. अभी अनजान नंबर से आने वॉट्सऐप मैसेज को आसानी से पहचाना जा सकता है कि वह भारतीय नंबर है या फिर विदेशी. अब यूजरनेम फीचर आने से नंबर पहचानने में मुश्किल हो सकती है. Meta क्या है? मेटा प्लेटफॉर्म आईएनसी एक मल्टीनेशनल कंपनी है, जिसका पुराना नाम फेसबुक आईएनसी था. अक्तूबर 2021 को मार्क जकरबर्ग ने अपनी कंपनी का नाम बदलकर मेटा कर दिया था. इस कंपनी के तहत अब फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, वर्चुअल और AI ब्रांड काम करते हैं.