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स्मार्टफोन को हर हफ्ते रीस्टार्ट करना क्यों है जरूरी, जानिए इसके बड़े फायदे

आपने अपना स्मार्टफोन आखिरी बार कब रीस्टार्ट किया था? आम तौर पर जब तक फोन सही काम कर रहा होता है लोग उसे रीस्टार्ट नहीं करते हैं. कई बार लोगों को लगता है कि फोन खराब हो गया और एक रीस्टार्ट से काम बन जाता है और फोन ठीक चलने लगता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है? आज ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को हफ्तों या महीनों तक बंद ही नहीं करते. फोन हमेशा ऑन रहता है और लगातार ऐप्स, नोटिफिकेशन, बैकग्राउंड प्रोसेस और सिस्टम सर्विसेज चलते रहते हैं. इसी वजह से टेक एक्सपर्ट समय-समय पर फोन को रीस्टार्ट करने की सलाह देते हैं. सवाल यह है कि आखिर फोन को कितने दिन में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए? क्या इससे सच में कोई फायदा होता है या यह सिर्फ एक पुरानी आदत है? कई लोगों को लगता है कि फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी तेजी से ड्रेन होती है और फोन की लाइफ कम होने लगती है. एक कॉमन मिथ ये भी है कि लोगों को लगता है फोन रीस्टार्ट करने से अच्छा है ऐप्स को मैनुअली बंद कर दिया जाए. लेकिन ऐप स्वाइप करके बंद करने से प्रोसेस चलता ही रहता है. रीस्टार्ट करने से पूरी तरह बंद होता है. फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी पर असर नहीं पड़ता. यहां तक की एक्सपर्ट्स का मानना है कि रीस्टार्ट या फोन रीबूट करने से बैटरी रीकैलिब्रेशन प्रोसेस होता है और बैकग्राउंड ऐप्स बंद होते हैं जिससे हीटिंग इश्यू नहीं होती. हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना सबसे बेहतर माना जाता है सैमसंग समेत कई टेक कंपनियां और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि स्मार्टफोन को कम से कम हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए. अगर आप बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जैसे गेम खेलते हैं, वीडियो एडिट करते हैं या दिनभर कई ऐप्स चलाते हैं, तो 3-4 दिन में एक बार रीस्टार्ट करना भी अच्छा माना जाता है. रीस्टार्ट करने से फोन का डेटा डिलीट नहीं होता और न ही कोई फोटो या ऐप हटती है. यह सिर्फ ऑपरेटिंग सिस्टम को नए सिरे से शुरू करता है. रीस्टार्ट करने से क्या फायदा होता है? फोन लगातार चलने पर कई ऐप्स बैकग्राउंड में खुले रहते हैं. इनमें से कुछ ऐप्स जरूरत से ज्यादा रैम इस्तेमाल करने लगते हैं. रीस्टार्ट करने पर ये सभी एक्स्ट्रा प्रोसेस बंद हो जाते हैं और रैम खाली हो जाती है. इससे फोन पहले से ज्यादा स्मूद चल सकता है. अगर किसी ऐप में कोई छोटी तकनीकी गड़बड़ी आ गई हो या सिस्टम किसी वजह से अटक गया हो, तो रीस्टार्ट के बाद यह समस्या कई बार अपने आप ठीक हो जाती है. यही वजह है कि कस्टमर केयर भी अक्सर सबसे पहले फोन रीस्टार्ट करने की सलाह देता है. रीस्टार्ट करने से बैटरी लाइफ पर भी असर पड़ सकता है. जब बेवजह बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स बंद हो जाते हैं, तो प्रोसेसर पर दबाव कम होता है और बैटरी की खपत भी कम हो सकती है. सिर्फ स्पीड ही नहीं, सिक्योरिटी में भी मदद फोन रीस्टार्ट करना सिर्फ परफॉर्मेंस के लिए ही नहीं, बल्कि सिक्योरिटी के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. अमेरिका की National Security Agency (NSA) भी पहले सलाह दे चुकी है कि समय-समय पर फोन रीस्टार्ट करना कुछ तरह के साइबर हमलों और मेमोरी में चल रहे संदिग्ध प्रोसेस को रोकने में मदद कर सकता है. हालांकि यह किसी वायरस का इलाज नहीं है, लेकिन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जरूर बन सकती है. Google और Apple ने भी हाल के समय में अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐसा फीचर जोड़ा है कि अगर फोन कई दिनों तक लॉक रहे तो वह खुद ही Restart हो जाता है. इसका मकसद फोन के डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखना है. रीस्टार्ट के बाद फोन First Unlock मोड में चला जाता है, जहां PIN या पासकोड डाले बिना डेटा एक्सेस नहीं किया जा सकता. किन लोगों को ज्यादा जरूरत है? अगर आपका फोन दो-तीन साल पुराना है, उसमें स्टोरेज लगभग भर चुकी है या आप दिनभर सोशल मीडिया, बैंकिंग, कैमरा और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो नियमित रीस्टार्ट आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. जो लोग कभी भी फोन बंद नहीं करते, उनके फोन में छोटी-छोटी तकनीकी दिक्कतें जमा होती रहती हैं. रीस्टार्ट इन अस्थायी समस्याओं को काफी हद तक साफ कर देता है. क्या रोज Restart करना चाहिए? रोज रीस्टार्ट करना जरूरी नहीं है. इससे कोई खास एक्स्ट्रा फायदा भी नहीं मिलता. ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना नॉर्मल यूजर के लिए काफी है. अगर आपका फोन पहले से बिल्कुल स्मूद चल रहा है, तब भी हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना अच्छी आदत मानी जाती है. ऑटो रीस्टार्ट फीचर भी है कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन, खासकर सैमंसग, में ऑटो रीस्टार्ट या ऑटो ऑप्टिमाइजेशन का फीचर मिलता है. इसमें आप तय कर सकते हैं कि फोन रात में किसी तय समय पर अपने आप रीस्टार्ट हो जाए. इससे आपको अलग से याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपके फोन में यह फीचर मौजूद है, तो उसे हफ्ते में एक बार रात के समय के लिए सेट किया जा सकता है.

Orient Aero O2 फैन रिव्यू: क्या सच में हवा में ऑक्सीजन बढ़ाता है या सिर्फ मार्केटिंग है

आजकल मार्केट में सिर्फ कूलिंग देने वाले फैन नहीं, बल्कि हेल्थ बेचने वाले फैन भी आ गए हैं. ऐसा ही एक फैन है Orient का Aero O2, जिसे कंपनी इंडिया का पहला ऑक्सीजन एनरिचिंग फैन कहती है. मैंने इस फैन को कुछ समय तक अपने घर में इस्तेमाल किया और अब आपको बता रहा हूं कि असल में ये फैन कितना काम का है और क्या ये सिर्फ मार्केटिंग है या सच में फर्क महसूस होता है. यह भी पढ़ें: Haier 475L डबल डोर फ्रिज रिव्यू: डिजाइन और परफॉर्मेंस का शानदार कॉम्बो, LG-Samsung को मिलेगी टक्कर Aero O2 डिजाइन सबसे पहले डिजाइन की बात करें तो Aero O2 का लुक काफी प्रीमियम और मॉडर्न है. सफेद रंग में आने वाला ये फैन किसी भी मॉडर्न घर में आसानी से फिट हो जाता है. इसका मोटर हाउसिंग थोड़ा अलग दिखता है क्योंकि इसमें वही टेक्नोलॉजी लगी है जो कंपनी का सबसे बड़ा दावा है. फैन को देखते ही समझ आता है कि ये कोई साधारण सीलिंग फैन नहीं है. कॉन्वर्सेशन स्टार्टर कहा जा सकता है, यानी कोई भी देख कर पूछेगा कि आखिर इस फैन में क्या खास है? क्योंकि इसकी बनावट अगल तरह की है. इसके साथ जो रिमोट मिलता है वो RF बेस्ड है, यानी आपको फैन की तरफ सीधा पॉइंट करने की जरूरत नहीं होती. ये एक छोटी लेकिन बहुत काम की चीज है. रिमोट में अलग-अलग स्पीड कंट्रोल, टाइमर, रिवर्स मोड और एक खास बूस्ट मोड भी दिया गया है. मैंने खुद इसका इस्तेमाल किया और ये फीचर काफी काम का लगा, खासकर जब कमरे में जल्दी ठंडक चाहिए होती है. Aero O2 में क्या टेक है? अब आते हैं इसकी सबसे बड़ी बात पर, यानी प्लाज्मा आयन टेक्नोलॉजी. कंपनी का दावा है कि ये टेक्नोलॉजी हवा में मौजूद माइक्रोब्स को 99.99% तक न्यूट्रलाइज करती है और कमरे में ऑक्सीजन लेवल को बेहतर बनाती है. इसके अलावा यह भी कहा गया है कि 8 घंटे में ऑक्सीजन लेवल 90% तक रिस्टोर हो सकता है और जहरीली गैसों को 75% तक कम किया जा सकता है. फैन में एलईडी लगी है जो इसे और प्रीमियम टच देती है. ऑक्सीजन फीचर ऑन और ऑफ करने का ऑप्शन है जिससे लाइट का भी कलर चेंज होता है, ताकि आपको पता रहे कि फैन कौन से मोड पर चल रहा है. फैन के नीचे दी गई लाइट आंखों को ज्यादा नहीं चुभती है और ये इस फैन के ऐस्थेटिक को बेहतर भी करता है. सवाल यह है कि क्या ये सच में काम करता है? मैंने जब इसे इस्तेमाल किया तो ऐसा कोई तुरंत 'ऑक्सीजन बढ़ गई' जैसा एहसास नहीं होता, जैसा कि अक्सर मार्केटिंग में दिखाया जाता है. लेकिन लंबे समय तक कमरे में रहने पर एक चीज नोटिस हुई कि हवा थोड़ी फ्रेश लगती है, खासकर बंद कमरे में.  यह पूरी तरह साइंटिफिक तरीके से मापना तो आसान नहीं है, लेकिन जो फर्क है, वो महसूस होता है. इसके अलावा अगर आपके घर में AQI खराब रहता है या शहर में पॉल्यूशन ज्यादा है, तो यह फैन एक एक्स्ट्रा लेयर देता है. लेकिन यह एयर प्यूरीफायर का रिप्लेसमेंट नहीं है, यह समझना जरूरी है. यह फैन हवा को पूरी तरह साफ नहीं करेगा, लेकिन थोड़ा बेहतर जरूर बनाता है. Aero O2: जबरदस्त परफॉर्मेंस और फीचर पैक्ड परफॉर्मेंस की बात करें तो यह फैन 250 CMM एयर डिलीवरी देता है और करीब 290 RPM की मोटर स्पीड के साथ आता है. इस्तेमाल के दौरान मुझे इसकी एयर थ्रो काफी अच्छी लगी. कमरे में हवा अच्छे से फैलती है और स्पीड भी स्मूद रहती है. सबसे अच्छी बात इसका व्हिस्पर-क्वाइट ऑपरेशन है. यह फैन बहुत कम आवाज करता है. रात में सोते समय बिल्कुल डिस्टर्ब नहीं करता. यह फीचर आजकल बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि कई फैन तेज आवाज करते हैं जो नींद खराब करते हैं. इसमें ऑल सीजन फैन का फीचर भी दिया गया है, यानी इसमें रिवर्स मोड है. सर्दियों में आप इसे उल्टा घुमा सकते हैं जिससे कमरे की गर्म हवा नीचे आती है. यह फीचर भारत में ज्यादा लोग यूज नहीं करते, लेकिन जिनको पता है उनके लिए यह काफी काम का है. एक और चीज जो मुझे पसंद आई वो है इसका टाइमर फीचर. आप इसे 2, 4, 6 या 8 घंटे के लिए सेट कर सकते हैं. रात में सोते समय यह बहुत काम आता है क्योंकि आपको उठकर फैन बंद नहीं करना पड़ता. अब बात करते हैं इसकी सबसे बड़ी चिंता वाली चीज की, यानी कीमत. Aero O2 एक प्रीमियम फैन है और इसकी कीमत नॉर्मल फैन से काफी ज्यादा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या यह पैसा वसूल है? किसके लिए है ये फैन? अगर आप सिर्फ कूलिंग के लिए फैन खरीद रहे हैं तो यह फैन आपके लिए नहीं है. मार्केट में इससे सस्ते और अच्छे एयर थ्रो वाले फैन मिल जाएंगे. लेकिन अगर आप हेल्थ, एयर क्वालिटी और टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखकर खरीदना चाहते हैं, तो यह फैन एक अलग कैटेगरी में आता है. यह फैन उन लोगों के लिए ज्यादा सही है जो मेट्रो सिटी में रहते हैं, जिनके घर में बच्चे हैं या जिन्हें हवा की क्वालिटी को लेकर चिंता रहती है. खासकर अगर आप AC और बंद कमरे में ज्यादा समय बिताते हैं, तो यह फैन थोड़ा बेहतर माहौल बनाने में मदद करता है. लेकिन यहां एक बात साफ कर देना जरूरी है. यह कोई जादू नहीं करता. यह आपके कमरे को जंगल जैसी ताजी हवा नहीं देगा. यह बस हवा को थोड़ा बेहतर बनाता है, जो लंबे समय में फायदा दे सकता है. कुल मिलाकर मेरा तजुर्ब  यह रहा कि Orient Aero O2 एक अलग तरह का प्रोडक्ट है. यह सिर्फ फैन नहीं है, बल्कि एक हेल्थ-फोकस्ड डिवाइस बनने की कोशिश करता है. इसका डिजाइन अच्छा है, परफॉर्मेंस बढ़िया है, और कुछ फीचर्स जैसे रिमोट, टाइमर और साइलेंट ऑपरेशन इसे और बेहतर बनाते हैं.  

फालसे का ठंडा शरबत: गर्मी में लू से राहत देने वाली आसान और नेचुरल रेसिपी

गर्मी में पारा चढ़ते ही शरीर को हाइड्रेटेड और एक्टिव रखने के लिए हम अक्सर फ्रिज में रखे ठंडे ड्रिंक्स, लस्सी या छाछ की तरफ भागते हैं. लेकिन रोज वही छाछ और नींबू पानी पीकर मन भर जाता है. अगर आप इस चिलचिलाती गर्मी में कोई ऐसा ड्रिंक ढूंढ रहे हैं जो पूरी तरह नेचुरल हो और जिसका स्वाद बेहद चटपटा और लाजवाब हो तो आपको मशहूर शेफ कुणाल कपूर की रेसिपी से घर पर फालसे का शरबत जरूर बनाना चाहिए. छोटे-छोटे जामुनी बेर जैसे दिखने वाले फालसे गर्मियों के मौसम का एक बेहतरीन सुपरफूड हैं. जब इन्हें काले नमक, भुने जीरे और पुदीने के साथ मिलाकर ठंडे-ठंडे शरबत का रूप दिया जाता है तो यह न सिर्फ आपके गले को तर करता है, बल्कि लू और पेट की गर्मी से भी तुरंत राहत दिलाता है. आइए जानते हैं इसे बनाने की एकदम आसान विधि. फालसा शरबत बनाने की साम्रगी ताजा फालसा: 500 ग्राम चीनी या मिश्री: 100 ग्राम (आप स्वादानुसार कम या ज्यादा भी कर सकते हैं) काला नमक और सफेद नमक भुना हुआ जीरा पाउडर: आधा छोटा चम्मच पुदीने की पत्तियां: 5-6 (सजावट और खुशबू के लिए) ठंडा पानी और बर्फ के टुकड़े बनाने का तरीका सबसे पहले फालसा को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें. एक बाउल या परात में फालसा लें और उसमें चीनी और दोनों नमक डालकर उन्हें हाथों से मसलें (मिक्सर का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे बीज पिस सकते हैं जो स्वाद कड़वा कर देते हैं). अब इसे एक छलनी में डालकर मसलें. बीच-बीच में ठंडा पानी मिलाते रहें और तब तक उसे मसलते रहें जब तक कि फालसे का सारा गूदा रस के रूप में निकल आ जाए. अच्छी तरह मिक्स करें. जब पूरा रस निकल आए तो गिलास में बर्फ के टुकड़े डालें, ऊपर से शरबत डालें और पुदीने की पत्तियों से सजाकर ठंडा-ठंडा सर्व करें. फालसा शरबत के फायदे विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फालसा शरीर को अंदर से ठंडा रखने और लू से बचाने का एक प्राकृतिक तरीका है. उत्तर भारत में इसका शरबत बनाकर पीने का खूब चलन है. जाने-माने सेलिब्रिटी शेफ कुणाल कपूर ने कुछ समय पहले अपने यूट्यूब चैनल पर इसकी आसान रेसिपी बताई थी जिसे हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं.

मानसून हेल्थ अलर्ट: बारिश में बढ़ते संक्रमण से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

 देश के कई हिस्सों में मानसून की एंट्री के साथ लोगों को भीषण गर्मी और लू से राहत मिलने लगी है. बारिश का मौसम जहां ठंडक और सुकून लेकर आता है, वहीं यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है. मौसम में अचानक बदलाव होने पर वायरल इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम, बुखार, एलर्जी और पेट से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ जाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में खानपान और साफ-सफाई को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है. साफ पानी पीना है सबसे जरूरी बारिश के मौसम में पानी दूषित होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पीना चाहिए. इससे पेट के संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. बाहर का खाना खाने से बचें मानसून में खुले में रखी खाने की चीजें जल्दी खराब हो सकती हैं. कटे हुए फल, चाट-पकौड़ी और अन्य स्ट्रीट फूड संक्रमण का कारण बन सकते हैं. घर का ताजा और स्वच्छ भोजन बेहतर विकल्प माना जाता है. हाथों की सफाई पर दें ध्यान खाना खाने से पहले और बाहर से घर लौटने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए. यह आदत कई प्रकार के संक्रमण से बचाने में मदद करती है. भीगने के बाद तुरंत बदलें कपड़े बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़े पहनकर रहने से सर्दी-जुकाम और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहन लेना चाहिए. इम्यूनिटी मजबूत रखें मौसमी फल, हरी सब्जियां, विटामिन-सी से भरपूर खाद्य पदार्थ और ड्राई फ्रूट्स शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अलावा पर्याप्त नींद और नियमित पानी पीना भी जरूरी है. मच्छरों से करें बचाव बारिश के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है. डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचने के लिए मच्छरदानी, रिपेलेंट और पूरे कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए. छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आप मानसून के मौसम में खुद को और अपने परिवार को स्वस्थ रख सकते हैं.

AI के दौर में टेक नौकरियों पर संकट: भारत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग हायरिंग में तेज गिरावट

भारत में टेक्नोलॉजी सेक्टर में नौकरियों की हायरिंग की रफ्तार धीमी होती नजर आ रही है. इसका सबसे ज्यादा असर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर पड़ता दिखाई दे रहा है क्योंकि कंपनियां AI और ऑटोमेशन को ज्यादा अपनाने लगी है. एक नए अध्ययन के मुताबिक, कुल मिलाकर नौकरी के अवसर कम हुए हैं लेकिन टेक सेक्टर में नौकरियों की संख्या पिछले कुछ महीनों में और तेजी से घटी है. लोकप्रिय जॉब पोर्टल इंडीड के अनुसार, मई 2026 में प्लेटफॉर्म पर भारतीय नौकरियों के एड 0.7 प्रतिशत कम हुए, जिनमें से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की नौकरियों में पिछले तीन महीनों में 12.3 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई. आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेशंस एंड सपोर्ट, आईटी सिस्टम्स एंड सॉल्यूशंस और डेटा एंड एनालिटिक्स जैसी अन्य तकनीकी नौकरियों में भी 10.2, 9.3 और 6.7 प्रतिशत की गिरावट आई है.  इंडीड के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि तकनीकी कंपनियां कर्मचारियों को ऑफिस लौटने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही हैं. क्या कहते हैं आंकड़े? आंकड़े बताते हैं कि इस समय टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़े बदलाव हो रहे हैं. कंपनियों की हायरिंग और कामकाज अब इस बात पर निर्भर करता है कि वे AI को कितनी अच्छी तरह इस्तेमाल कर पा रही हैं. हालांकि, यह साफ नहीं है कि टेक नौकरियों के एड क्यों कम हुए हैं, लेकिन AI इसका एक बड़ा कारण माना जा रहा है. कई कंपनियां AI से जुड़े नए स्किल वाले कर्मचारियों को हायर कर रहे हैं, जबकि कुछ कंपनियां क्लाउड और ChatGPT जैसे AI टूल्स की मदद से कम कर्मचारियों के साथ ही ज्यादा काम कर रही हैं. छंटनी का बढ़ रहा है खतरा वहीं, तकनीकी क्षेत्र में छंटनी धीरे-धीरे बढ़ रही है, जबकि पहले यह बहुत कम होती थी. उदाहरण के लिए अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच अमेजन ने लगभग 30,000 कॉर्पोरेट और तकनीकी पदों पर छंटनी की. इस अप्रैल में, मेटा ने 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की. उसी महीने माइक्रोसॉफ्ट ने लगभग 8,750 अमेरिकी कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की घोषणा की. इसकी लिस्ट काफी लंबी है, लेकिन मुख्य बात यह है कि तकनीकी क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और इंडीड के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि तकनीकी नौकरियां एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही हैं, जिसमें कुछ पद पूरी तरह से समाप्त हो सकते हैं और फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर (एफडीई) जैसे नए पद सामने आ सकते हैं. कम कर रही है वर्क फ्रॉम होम की सुविधा कई कंपनियां अब वर्क फ्रॉम होम की सुविधा को कम कर रही है या पूरी तरह खत्म कर रही है. इंडीड के आंकड़ों के अनुसार, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेशंस और सपोर्ट जैसी नौकरियों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है. इन क्षेत्रों में रिमोट वर्क के अवसर 4.4% तक कम हुए हैं. इसे लेकर इंडीड का कहना है कि रिमोट वर्क में कमी से यह पता चलता है कि कंपनियों का रुख बदल रहा है और वह अपने कर्मचारियों से ऑफिस में काम करने की उम्मीद कर रही है. खासकर टेक कंपनियों में यह बदलाव हाल के समय में साफ दिखाई दे रहा है. साथ ही कंपनियां ज्यादा उम्मीदवारों को आकर्षित करने के लिए अपनी हायरिंग प्लानिंग में बदलाव कर रही है. इन नौकरियां में हो रही बढ़त दिलचस्प बात यह है कि जहां एक ओर टेक सेक्टर में नौकरियां कम हो रही हैं, वहीं कई दूसरे क्षेत्रों में हायरिंग तेजी से बढ़ रही है. देशभर में खेल, ब्यूटी और हेल्थ, पर्सनल केयर तथा घरेलू सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नई नौकरियां निकली हैं. पिछले तीन महीनों में खेल क्षेत्र में नौकरियां 41%, ब्यूटी और हेल्थ में 36% और पर्सनल केयर और घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं में 34% बढ़ी हैं.

मानसून में मलेरिया का खतरा बढ़ा: जानें इसके शुरुआती लक्षण और समय रहते कैसे पहचानें

मानसून का मौसम जहां तपती गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. बारिश के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिसके कारण मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी फैल सकती है. अक्सर लोग मलेरिया के शुरुआती संकेतों को सामान्य वायरल संक्रमण या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या बढ़ सकती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते लक्षणों की पहचान और सही इलाज शुरू कर दिया जाए तो मलेरिया से होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं इस बीमारी के कुछ प्रमुख संकेतों के बारे में. तेज बुखार और ठंड लगना मलेरिया का सबसे सामान्य लक्षण तेज बुखार है. इसके साथ अचानक ठंड लगना और कंपकंपी भी हो सकती है. कई बार बुखार बार-बार आता है और शरीर का तापमान काफी बढ़ जाता है. ज्यादा पसीना आना बुखार उतरने के बाद अत्यधिक पसीना आना भी मलेरिया का संकेत माना जाता है. शरीर तापमान को सामान्य करने की कोशिश करता है, जिसके कारण मरीज को जरूरत से ज्यादा पसीना आ सकता है. सिरदर्द और शरीर में दर्द मलेरिया होने पर सिर भारी लगना, आंखों के आसपास दर्द और पूरे शरीर में टूटन महसूस हो सकती है. कई लोगों को मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी की शिकायत भी होती है. लगातार थकान और कमजोरी अगर बिना ज्यादा काम किए भी हर समय थकान महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. मलेरिया शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करता है, जिससे कमजोरी और सुस्ती बढ़ सकती है. उल्टी होना कुछ मरीजों में जी मिचलाना, उल्टी होना, भूख कम लगना और पेट में असहजता जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं. बुखार के साथ ऐसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत जांच करानी चाहिए. मलेरिया से बचाव कैसे करें? मलेरिया से बचने के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें. सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का उपयोग करें. यदि लगातार बुखार या ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें. मानसून के मौसम में थोड़ी सावधानी और जागरूकता आपको और आपके परिवार को मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रख सकती है.

Apple का अगला धमाका: iPhone 18 Pro और Pro Max होंगे पहले से महंगे, फीचर्स भी अपग्रेड

ऐपल अपनी न्यू iPhone 18 Pro सीरीज पर काम कर रहा है, जिसको जल्द ही लॉन्च किया जाएगा. बीते 3 साल का ट्रेंड देखें तो कंपनी सितंबर के दूसरे सप्ताह में अपनी फ्लैगशिप सीरीज को अनवील करती है. इस बार भी अपकमिंग आईफोन सीरीज को सितंबर में अनवील किया जा सकता है. कंपनी ने आईपैड और मैकबुक की कीमत में इजाफा कर दिया है, हालांकि आईफोन की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया है. IDC इंडिया के वायस प्रेसिडेंट नवेंदर सिंह ने दावा किया है कि ऐपल कई आईफोन की कीमत में इजाफा करेगा. iPhone 18 और iPhone 18 Pro सीरीज की कीमत में बदलाव होगा. सिंह ने बताया है कि मौजूदा मॉडल iPhone 17 Pro और 17 Pro Max की तुलना में iPhone 18 Pro/18 Pro Max की कीमत 10 हजार रुपये से लेकर 142,00 रुपये तक ज्यादा हो सकती है. iPhone 17 Pro की शुरुआती कीमत 1,34,900 रुपये थी और अब iPhone 18 Pro की कीमत इससे ज्यादा होगी. वहीं iPhone 17 Pro Max की तुलना में iPhone 18 Pro Max की कीमत काफी ज्यादा हो सकती है. यह कीमत 1.50 लाख रुपये तक हो सकती है. iPhone 18 Pro सीरीज में डाइनेमिक नॉच मिलेगा iPhone 18 Pro सीरीज के अंदर कई अपग्रेड्स भी नजर आएंगे. iPhone 17 Pro की तुलना में iPhone 18 Pro के डिजाइन में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं दिखेगा. iPhone 18 Pro के डिस्प्ले में डायनेमिक आइलैंड का साइज छोटा किया जा सकता है. iPhone 18 Pro सीरीज में कैमरा अपग्रेड होगा iPhone 18 Pro और 18 Pro Max में कैमरा सेटअप को अपग्रेड किया जाएगा. बैक पैनल पर ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा, जिसमें तीनों ही कैमरा 48 मेगापिक्सल के होंगे, लेकिन सेंसर को बेहतर किया जाएगा. इसकी मदद से यूजर्स को बेहतर अपर्चर देखने को मिल सकता है. iPhone 18 Pro सीरीज में न्यू कलर वेरिएंट iPhone 18 Pro सीरीज में एक यूनिक कलर वेरिएंट देखने को मिलेगा, जो डार्क चेर होगी. यह वाइन रेड शेड में लॉन्च होगा. अपकमिंग वेरिएंट में कॉस्मिक ओरेंज कलर को बदल जाएगा.

Apple का बड़ा झटका: iPad और MacBook हुए 42% तक महंगे, iPhone की कीमत क्यों नहीं बदली?

अमेरिकी टेक कंपनी ऐपल ने भारत समेत दुनियाभर में अपने कस्टमर को बड़ा झटका दिया है. कंपनी ने अपने प्रोडक्ट की कीमत में 42 परसेंट तक का इजाफा कर दिया है, जिसकी वजह iPad से लेकर मैकबुक आदि खरीदने वालों को ज्यादा रकम खर्च करनी होगी. कंपनी ने iPhone की कीमत में कोई  बदलाव नहीं किया है. आइए जानते हैं क्यों? Apple ने एक खास रणनीति के तहत अभी आईफोन की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया है. कंपनी अपने सबसे ज्यादा रेवेन्यू कमाने वाले प्रोडक्ट की कीमत में कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहती है. हालांकि आगे कीमत में बदलाव होगा या नहीं, उसके बारे में अभी कहना मुश्किल है. कीमत बढ़ाने के पीछे मुख्य वजह महंगे होते कंपोनेंट हैं. चिप, मेमोरी और अन्य कंपोनेंट के दाम में इजाफा हो रहा है, जिसकी वजह से कंपनी ने आईपैड से लेकर मैकबुक तक की कीमत में इजाफा किया है. ऐसा करके कंपनी अपने प्रोफिट को बरकरार रखना चाहती है. बीते दो क्वार्टर में कीमत में इजाफा नहीं ऐपल बीते करीब दो क्वार्टर से महंगे कंपोनेंट और अन्य प्रोडक्ट की बढ़ी हुई कीमत का सामना कर रहा था. कंपनी ने इसका बोझ कस्टमर पर नहीं पड़ने दिया. अब कंपनी ने iPad और मैकबुक की कीमत में इजाफा कर दिया है. AI डेटा सेंटर्स के लिए भी कंपोनेंट तैयार हो रहे दरअसल, चिप उत्पादन करने वाली कंपनियां अब AI डेटा सेंटर्स के लिए भी कंपोनेंट तैयार कर रही हैं, जिसकी वजह से उनपर दबाव बढ़ गया है. ऐसे में वे मोबाइल, लैपटॉप आदि के लिए पूरी तरह से सप्लाई नहीं दे पा रहे हैं और उन्होंने कीमत में भी इजाफा कर दिया है.

अंडा vs सोया चंक्स: प्रोटीन के मामले में कौन है ज्यादा फायदेमंद, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

प्रोटीन की बात जब भी आती है, तो अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि आखिर सबसे बेस्ट ऑप्शन क्या है. हाल ही में पश्चिम बंगाल के मिड-डे मील प्रोग्राम में अंडे की जगह सोया चंक्स को शामिल करने के फैसले ने एक नई बहस छेड़ दी है. यह विवाद सिर्फ डाइट तक सीमित नहीं, बल्कि पोषण की क्वालिटी और शाकाहार VS मांसाहार के बीच भी सिमट गया है. अंडे को जहां हाई क्वालिटी एनिमल प्रोटीन का बेस्ट सोर्स माना जाता है, वहीं सोया चंक्स वेजीटेरियन लोगों के लिए एक किफायती और दमदार विकल्प के रूप में देखे जाते हैं. तो आखिर क्या वाकई सोया चंक्स अंडे की कमी पूरी कर सकते हैं? दोनों ही प्रोटीन के पावरहाउस माने जाते हैं लेकिन फिर भी यह बहस काफी पहले से चली आ रही है. अंडे को जहां हाई क्वालिटी एनिमल प्रोटीन का बेस्ट सोर्स कहा जाता है वहीं सोया चंक्स वेजीटेरियन लोगों के लिए प्रोटीन का सबसे सस्ता और बेहतरीन विकल्प है. कई लोग वजन घटाने या मसल्स बनाने के लिए भी डाइट में इन्हें शामिल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी फिटनेस गोल्स के हिसाब से इनमें से क्या चुनना ज्यादा फायदेमंद है? आइए जानते हैं क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स. अंडे और सोया चंक्स प्रोटीन क्वालिटी और एब्जॉर्प्शन के मामले में अंडे को हमेशा नंबर वन माना जाता है. हेल्थलाइन का कहना है, अंडे में सभी 9 जरूरी अमीनो एसिड्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो मसल्स रिपेयर और ओवरऑल हेल्थ के लिए जरूरी हैं. 1 अंडे में करीब 6-7 ग्राम प्रोटीन होता है. इसकी बायो-अवेलेबिलिटी बहुत ज्यादा होती है जिसका मतलब है कि आपका शरीर इसे बहुत आसानी से इस्तेमाल कर लेता है. दूसरी तरफ सोया चंक्स प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का एक शानदार सोर्स हैं. इसमें भी सभी अमीनो एसिड्स होते हैं लेकिन इसकी क्वालिटी और एब्जॉर्प्शन रेट अंडे के मुकाबले थोड़ी कम हो सकती है. हालांकि, फाइबर की बात करें तो सोया चंक्स इस मामले में बाजी मार ले जाते हैं. 50 ग्राम सोया चंक में करीब 25 ग्राम प्रोटीन होता है. कौन है आपके लिए बेस्ट? यदि आप मसल बिल्डिंग पर फोकस कर रहे हैं तो अंडा एक कंप्लीट और सुपीरियर प्रोटीन सोर्स है. इसकी डाइजेस्टिबिलिटी अंडे की तुलना में ज्यादा मानी जाती है. हालांकि यदि आप शुद्ध शाकाहारी हैं या बजट फ्रेंडली ऑप्शन ढूंढ रहे हैं तो सोया चंक्स एक बेस्ट ऑल्टरनेटिव है. वेबएमडी की रिपोर्ट के अनुसार, सोया जैसे प्लांट-बेस्ड सोर्स न सिर्फ प्रोटीन देते हैं बल्कि हार्ट हेल्थ में भी सुधार कर सकते हैं. बस ध्यान रखें कि सोया चंक्स को अगर आप अनाज जैसे चावल या रोटी के साथ मिलाकर खाएं, तो यह इसकी प्रोटीन प्रोफाइल को और बेहतर बना देता है. अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले हमेशा अपनी बॉडी की जरूरतों को समझना जरूरी है.

Apple प्रोडक्ट्स हुए 42% तक महंगे: MacBook Pro और iPad Air की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

ऐपल ने भारत समेत दुनियाभर में अपने प्रोडक्ट के दाम बढ़ा दिए हैं, जिसमें मैकबुक से लेकर iPad तक का नाम शामिल है. कंपनी ने प्रोडक्ट की शुरुआती कीमत में 20 से 42 परसेंट तक का इजाफा किया है. यहां तक कि MacBook Pro के शुरुआती वेरिएंट की कीमत में 1 लाख रुपये का इजाफा हुआ है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं. कंपनी का कहना है कि कीमत बढ़ने के पीछे की मुख्य वजह मेमोरी चिप्स और अन्य कंपोनेंट की बढ़ती लागत है. Apple India पोर्टल पर नई प्राइस लिस्ट आ चुकी है. पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि M5 सीरीज चिप वाले MacBook Pro की कीमत में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा चुकी है. MacBook Pro M5 Pro की नई कीमत 14-इंच MacBook Pro M5 Pro चिप वाले की कीमत अब 2,99,900 रुपये हो चुकी है. वहीं, लॉन्चिंग के दौरान इसकी शुरुआती कीमत 2,49,900 रुपये थी.   MacBook Pro 14-inch (M5 Max variant) की कीमत में करीब 1 लाख रुपये तक का इजाफा हुआ है. ये जानकारी इंडियाटुडे की रिपोर्ट से मिली है. iPad Air की कीमत में भारी इजाफा हुआ है. 13-इंच iPad Air के बेस मॉडल की कीमत 84,900 रुपये से बढ़ाकर 1,19,900 रुपये कर दी जा चुकी है, जो करीब 42 परसेंट तक का इजाफा है. कीमत बढ़ाने की वजह काउंटर रिसर्च के को-फाउंडर और रिसर्च वीपी नील शाह ने बताया है कि मैकबुक नियो, मैकबुक एयर, मैकबुक प्रो, आईपैड एयर और आईपैड प्रो वाईफाई की कीमत लागत में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है. मेमोरी से सेमीकंडक्टर चिप्स की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है. चिप मेकर AI डेटा सेंटर के लिए भी कर रही हैं काम मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियां अब अपने मैन्युफैक्चरर का बड़ा हिस्सा AI डेटा सेंटरों को दे रही हैं. ऐसे में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए मेमोरी चिप्स की कमी हो चुकी है और उनकी लागत बढ़ रही है. नील शाह ने बताया है कि ऐपल ने करीब दो तिमाहियों तक कीमतें नहीं बढ़ाईं और महंगाई का असर ग्राहकों तक नहीं पहुंचने दिया. अब कंपनी के लिए बढ़ी हुई लागत का बोझ उठाना मुश्किल हो गया है, जिसकी वजह ये कीमत में इजाफा हुआ है. Apple इस साल अपने नए ऑन-डिवाइस Apple Intelligence जैसा फीचर लॉन्च कर सकती है. इसके लिए डिवाइस को और ज्यादा मेमोरी और रैम की जरूरत पड़ सकती है.