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ग्रामीण राजनीति में BJP की एंट्री, ब्लॉक समिति चुनाव में पंजाब में हासिल की अहम सफलता

समराला पंजाब के जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव के नतीजों को राज्य के राजनीतिक भविष्य के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इन चुनावों के जरिए भारतीय जनता पार्टी ने ग्रामीण राजनीति में एंट्री की है और पहली बार जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। अब तक BJP ने दो सीटें जीती हैं और एक सीट पर BJP उम्मीदवार आगे चल रहा है। जानकारी के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी ने 2 ब्लॉक समिति सीटों पर जीत हासिल की है। समराला के समसपुर ब्लॉक समिति जोन से BJP उम्मीदवार परमजीत कौर 47 वोटों से जीती हैं। परमजीत कौर को कुल 904 वोट मिले थे। इसी तरह जैतो की एक सीट से भी BJP उम्मीदवार ने जीत हासिल की है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी की ग्रामीण राजनीति में एंट्री काफी अहम है, क्योंकि गांवों से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों का रिस्पॉन्स राजनीति को नई दिशा दे सकता है। समराला ब्लॉक के अब तक के नतीजे बागली ज़ोन से आम आदमी पार्टी के मंदीप सिंह जीते। उन्हें कुल 1132 वोट मिले और वे 334 वोटों के मार्जिन से जीते। इसी तरह, नागरा ज़ोन में अकाली दल के लखबीर सिंह को 984 वोट मिले और वे 248 वोटों से जीते। रूपालो ज़ोन में आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट रणजोध सिंह को 873 वोट मिले और वे 233 वोटों से जीते। सलोदी ज़ोन से कांग्रेस कैंडिडेट सतविंदर कौर को 1108 वोट मिले और वे 364 वोटों से जीतीं। उटाला ज़ोन से आम आदमी पार्टी का कैंडिडेट पहले ही जीत चुका है, क्योंकि आम आदमी को छोड़कर बाकी सभी पार्टियों के पेपर रिजेक्ट हो गए हैं। समसपुर ज़ोन से BJP कैंडिडेट परमजीत कौर को 904 वोट मिले और वे 47 वोटों से जीतीं। सेह ज़ोन से आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट इकबाल सिंह को 1005 वोट मिले और वे 237 वोटों से जीते। 

हेमंत खंडेलवाल की सहमति से अंशुल तिवारी को बीजेपी प्रदेश सह मीडिया प्रभारी नियुक्त

भोपाल मध्य प्रदेश बीजेपी ने एक बड़ी नियुक्ति कर दी है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद  अंशुल तिवारी को भाजपा प्रदेश सह मीडिया प्रभारी का दायित्व सौंपा गया है। भाजपा युवा मोर्चा (भाजयुमो) भोपाल के पूर्व जिलाध्यक्ष अंशुल तिवारी को मध्य प्रदेश भाजपा का सह मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है। अंशुल तिवारी इससे पूर्व भाजयुमो में भोपाल जिला अध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं। वे पार्टी के सक्रिय युवा नेताओं में से एक हैं और संगठनात्मक कार्यों में लंबा अनुभव रखते हैं। इस नियुक्ति से मीडिया विभाग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।   

नितिन नवीन बने वर्किंग प्रेसिडेंट, बीजेपी की नई परंपरा और प्रमोशन के बीच क्या है बड़ा संकेत?

नई दिल्ली बीजेपी ने 45 साल के नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जिसने पार्टी के भीतर और बाहर सभी को चौंका दिया है. 1980 में जन्मे नितिन नबीन अब बीजेपी के इतिहास के सबसे युवा अध्यक्ष हैं. लेकिन उनकी यह नियुक्ति सिर्फ युवा होने के कारण खास नहीं है. अगर आप बीजेपी के मौजूदा मुख्यमंत्रियों और प्रदेश अध्यक्षों की सूची देखें, तो पता चलता है कि नितिन नबीन का कद और उम्र का समीकरण सबसे अलग क्यों है. किसी भी बीजेपी मुख्यमंत्री से छोटे हैं नबीन नितिन नबीन की उम्र महज 45 साल है. अगर हम देश भर में बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सूची देखें, तो एक भी मुख्यमंत्री ऐसा नहीं है जो उम्र में उनसे छोटा हो. बीजेपी के सबसे युवा मुख्यमंत्री अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू हैं, जिनकी उम्र 46 वर्ष है. नितिन नबीन उनसे भी एक साल छोटे हैं. उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ (53), उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी (50) और असम के हिमंत बिस्वा सरमा (56) जैसे फायरब्रांड नेता भी उम्र में नबीन से बड़े हैं. त्रिपुरा के सीएम मणिक साहा (72) और गुजरात के भूपेंद्र पटेल (63) तो उनसे एक पीढ़ी आगे हैं.यह आंकड़ा साबित करता है कि बीजेपी ने नेतृत्व की कमान अब पूरी तरह से ‘नेक्स्ट जेन’ (Next Gen) को सौंप दी है. प्रदेश अध्यक्षों की भीड़ में भी सबसे अलग सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, देश के प्रमुख राज्यों में बीजेपी की कमान संभालने वाले प्रदेश अध्यक्ष भी नितिन नबीन से उम्रदराज हैं. राजस्थान के अध्यक्ष मदन राठौड़ (71) और झारखंड के बाबूलाल मरांडी (67) उम्र में उनसे काफी बड़े हैं. यहां तक कि उनकी खुद की होम स्टेट बिहार के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल (62) और उत्तर प्रदेश के भूपेंद्र चौधरी (57) भी वरिष्ठ हैं. केवल तमिलनाडु के के. अन्नामलाई (41) ही ऐसे नेता हैं जो नबीन से छोटे हैं, लेकिन बीजेपी ने उनकी जगह अब नैनार नागेंथिरन को प्रदेश अध्‍यक्ष बनाया है. लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर 45 साल की उम्र में पहुंचना अपने आप में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है. कर्नाटक के युवा चेहरा माने जाने वाले बी.वाई. विजयेंद्र भी 50 साल के हैं. युवा जोश और अनुभव का अनोखा संगम नितिन नबीन की खासियत यह है कि 45 साल की उम्र में उनके पास वो अनुभव है जो कई 60 साल के नेताओं के पास भी नहीं होता. इतनी कम उम्र में लगातार 5 बार विधायक (MLA) बनना यह दिखाता है कि वे जनता के बीच कितने लोकप्रिय हैं. उन्होंने बांकीपुर जैसी सीट को अपना गढ़ बना लिया है. वे बिहार सरकार में पथ निर्माण जैसे भारी-भरकम मंत्रालयों को संभाल चुके हैं. यानी उनके पास संगठन के साथ-साथ सरकार चलाने का भी हुनर है. वे रातों-रात नेता नहीं बने. उन्होंने 2 दशक संगठन को दिए हैं. भारतीय जनता युवा मोर्चा के बिहार अध्यक्ष से लेकर छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रभारी बनने तक का उनका सफर संघर्ष और सफलता का रहा है. बीजेपी की इस खास परंपरा के नायक बनेंगे नितिन नवीन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बार फिर अपनी ‘युवा चेहरों को प्रमोट करने’ की रणनीति को मजबूत करते हुए बिहार के कैबिनेट मंत्री नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट) नियुक्त किया है. यह फैसला पार्टी के संसदीय बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया है और वर्तमान राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) अरुण सिंह द्वारा जारी आदेश से यह निर्णय सार्वजनिक किया गया है. नितिन नबीन वर्तमा में बिहार सरकार में पथ निर्माण एवं नगर विकास मंत्री हैं, अब वह इस पद (राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष) पर जेपी नड्डा की जगह लेंगे. यह नियुक्ति न केवल बिहार में भाजपा की मजबूती को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करती है, बल्कि पार्टी की उस पुरानी परंपरा को भी जोड़ती है जहां राष्ट्रीय महासचिव या कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पदों पर रहते हुए नेता बाद में पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाते हैं. युवा चेहरा, बड़ा संदेश 45 वर्ष के नितिन नबीन का यह प्रमोशन युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का संकेत है, लेकिन सवाल उठ रहा है- क्या वे अगले पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने की दौड़ में हैं? नितिन नबीन का BJP में सफर संघर्षपूर्ण और तेजी से ऊपर उठने वाला रहा है. पार्टी ने उन्हें हमेशा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं जो उनकी संगठनात्मक क्षमता और चुनावी सफलता का प्रमाण हैं. वे दो बार राष्ट्रीय महामंत्री (युवा मोर्चा) रह चुके हैं जहां उन्होंने युवाओं को पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई. बिहार में वे प्रदेश अध्यक्ष (युवा मोर्चा) के रूप में सक्रिय रहे, जिससे राज्य स्तर पर BJP की युवा शाखा मजबूत हुई. इसके अतिरिक्त वे सिक्किम के प्रभारी और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के प्रभारी के रूप में भी काम कर चुके हैं जहां उन्होंने पूर्वोत्तर और मध्य भारत में पार्टी का विस्तार किया. संगठन से सत्ता तक का संतुलन चुनावी मोर्चे पर नितिन नबीन का रिकॉर्ड भी शानदार है. 2006 में वे पहली बार विधायक बने जब बिहार विधानसभा चुनाव में बांकीपुर (पटना शहर का एक विधानसभा क्षेत्र) जीत दर्ज की. तब से वे लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं-2010, 2015 और 2020 में भी बांकीपुर से ही BJP के टिकट पर सफल रहे. 2021 में नीतीश कुमार सरकार में उन्हें पहली बार पथ निर्माण मंत्री बनाया गया और अब वे पथ निर्माण के साथ-साथ नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इन उपलब्धियों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और आज यह नियुक्ति उनके संगठनात्मक कौशल का इनाम है. BJP की ‘अध्यक्ष परंपरा’ का पैटर्न बिहार के नितिन नबीन की नियुक्ति BJP की उस परंपरा से जुड़ती है जहां राष्ट्रीय महासचिव (जनरल सेक्रेटरी) या कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पदों पर रहते हुए कई नेता बाद में पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं. पार्टी के इतिहास में यह एक साफ पैटर्न दिखता है, जहां RSS पृष्ठभूमि वाले या संगठन प्रबंधक नेता इस ‘ट्रांजिशन’ से गुजरते हैं. प्रमुख उदाहरणों की बात करें तो अमित शाह (Amit Shah) बीजेपी के वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह 2010 में राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बने. इस पद पर रहते हुए उन्होंने 2014 लोकसभा चुनावों में पार्टी को 282 सीटें दिलाने में अहम भूमिका निभाई. उसी वर्ष जुलाई 2014 में वे पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए और … Read more

नितिन नबीन ने बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला, जेपी नड्डा और अमित शाह थे उपस्थित

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार (15 दिसंबर, 2025) को दिल्ली हेडक्वार्टर में अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है. इस दौरान उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद थे. वह थोड़ी देर पहले ही पटना से दिल्ली पहुंचे हैं. भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के दिल्ली आगमन पर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया.  बीजेपी मुख्यालय पहुंचे नितिन नबीन का बड़ी संख्या में पार्टी के सांसद, नेता और कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया. नए कार्यकारी अध्यक्ष के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में नेता बीजेपी मुख्यालय के बाहर खड़े नजर आए. बीजेपी मुख्यालय पहुंचे नितिन नबीन आज पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे.  इससे पहले, दिल्ली एयरपोर्ट पर दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े ने नितिन नबीन का स्वागत किया. बीजेपी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, गिरिराज सिंह, रविशंकर प्रसाद समेत तमाम बड़े नेताओं ने नितिन नबीन का गुलदस्ता देकर स्वागत किया. जेपी नड्डा ने नितिन नबीन को पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया. इसके बाद पार्टी के कद्दावर नेताओं ने उन्हें इस मौके पर बधाई दी, शुभकामनाएं दीं. गौरतलब है कि बीजेपी ने एक दिन पहले ही कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नितिन नबीन के नाम का ऐलान किया था. नितिन नबीन बिहार सरकार के दो बार के मंत्री हैं. वह पांच के विधायक हैं. नितिन नबीन सोमवार की सुबह दिल्ली रवाना होने से पहले पटना के महावीर मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की. महावीर मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद नितिन नबीन पटना से दिल्ली रवाना हुए. दिल्ली एयरपोर्ट पर नितिन नबीन का स्वागत करने पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और विनोद तावड़े समेत बड़ी संख्या में बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता पहुंचे थे. बीजेपी मुख्यालय पहुंचने पर नितिन नबीन का बीजेपी कार्यकर्ताओं ने फूल की पंखुड़ियों से स्वागत किया. नितिन नबीन के कार्यकारी अध्यक्ष का पद संभालने के कुछ ही देर बाद पार्टी ने बिहार प्रदेश अध्यक्ष के नाम का भी ऐलान कर दिया है. संजय सरावगी को बिहार बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है.  नड्डा की राह पर नवीन  जून 2019 में अमित शाह के केंद्रीय गृह मंत्री बनने के बाद जेपी नड्डा को बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। वह लगभग छह महीने तक इस पद पर रहे. इसके बाद जनवरी 2020 में उन्हें औपचारिक रूप से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गये। नड्डा अब लगभग छह साल से पार्टी प्रमुख के रूप में काम कर रहे हैं। बीजेपी के संविधान के अनुसार, कोई भी नेता तीन-तीन साल के दो कार्यकाल के लिए अध्यक्ष के रूप में काम कर सकता है। कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्ति का पूरा प्लान बीजेपी नेताओं के अनुसार, कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति एक अंतरिम व्यवस्था है। एक और कारण है खरमास, जिसे हिंदू अशुभ मानते हैं। मंगलवार से खरमास शुरू हो रहा है। इसी वजह से नवीन को  कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। 14 जनवरी, मकर संक्रांति को खरमास खत्म होने के बाद, नए पार्टी प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।  37 में से 30 राज्यों में चुनाव पूरे  बीजेपी ने पहले ही 37 में से 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठनात्मक चुनाव पूरे कर लिए हैं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने के लिए देश के कम से कम आधे राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे करना जरूरी है। बीजेपी नेताओं के मुताबिक, अध्यक्ष पद के चुनाव में कम से कम चार दिन लगेंगे और यह 14 जनवरी के तुरंत बाद पूरा हो सकता है। हालांकि चुनाव औपचारिक मात्र होगा, लेकिन नवीन का पद पक्का माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी और उसकी वैचारिक संस्था RSS ऐसे मामलों में सर्वसम्मति पर जोर देते हैं। ऐसे में, नवीन बीजेपी प्रमुख बनने से पहले नड्डा की मदद करेंगे और काम सीखेंगे, ठीक वैसे ही जैसे नड्डा ने छह साल पहले शाह से सीखा था। कौन हैं नितिन नवीन 45 साल के नितिन नवीन बिहार में सड़क निर्माण मंत्री हैं। इसके साथ ही पटना के बांकीपुर से पांच बार के विधायक रहे हैं। वह पहली बार 26 साल की उम्र में विधायक बने थे, जब उनके पिता और बीजेपी के दिग्गज नेता नवीन किशोर सिन्हा की मौत के बाद पटना पश्चिम विधानसभा सीट खाली हो गई थी। नवीन बिहार और पूर्वी भारत से पहले बीजेपी प्रमुख बनने वाले हैं। अगर वह अगले साल पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख बनते हैं, तो वह इतिहास में सबसे कम उम्र के बीजेपी अध्यक्ष होंगे, जो नितिन गडकरी का रिकॉर्ड तोड़ देंगे, जिन्होंने 52 साल की उम्र में पद संभाला था।

सियासी घमासान: कांग्रेस की रैली में लगे आपत्तिजनक नारे, BJP ने वीडियो जारी कर जताई नाराज़गी

नई दिल्ली  दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रविवार को वोट चोरी के आरोपों पर बड़ी रैली हो रही है। इसमें भाजपा ने एक वीडियो के हवाले से आरोप लगाया है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी की मौत को लेकर नारे लगाए हैं। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोदी तेरी कब्र खुदेगी की नारेबाजी की है। इसको लेकर न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें कुछ महिलाएं पीएम मोदी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रही हैं।   भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता और महिला मोर्चा के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने नारा लगाया कि मोदी तेरी कब्र खुदेगी। आज यह स्पष्ट हो गया है कांग्रेस की सोच माओवादी वाली सोच है। अतीत में जब इस तरह के नारे लगाए थे, तब देश की जनता ने कहा था कि मोदी तेरा कमल खिलेगा। लेकिन आज पीएम मोदी के खिलाफ देशविरोधी इस तरह की टिप्पणी करते हैं और आज कांग्रसे द्वारा ऐसा बोलने से साफ हो गया है कि कांग्रेस इतनी हताश है। पीएम मोदी देशविरोधियों और भारत के बीच में एक चट्टान के रूप में खड़े हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता यह भी अंदाजा लगा रहे हैं कि जैसे दूसरे देशों में लोग सड़कों पर उतरे और लोकतंत्र को अस्थिर करने की कोशिश की, वैसा ही कुछ भारत में भी हो सकता है। रामलीला मैदान में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा आयोजित 'घुसपैठिया बचाओ रैली' में सिर्फ एक बात कॉमन है: कांग्रेस पार्टी देश की जनता के खिलाफ है… कांग्रेस पार्टी का असली मकसद देश में अस्थिरता पैदा करना है।''   वहीं, भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि एजेंडा क्लियर है। यह एसआईआर के खिलाफ नहीं है, बल्कि संविधान पर वार है। कांग्रेस के नेता नारे लगा रहे हैं, ''कब्र खुदेगी मोदी की, आज नहीं तो कल खुदेगी।'' शहजाद पूनावाला ने आगे लिखा, ''हाल ही में रागिनी नायक ने एआईवीडियो शेयर किया था, जिसमें चायवाले के रूप में दिखाया गया। तो एसआईआर के नाम पर वे पीएम मोदी को खत्म करना चाहते हैं? हाल ही में राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग को धमकी दी थी। अभी तक कांग्रेस ने पीएम मोदी को 150 से ज्यादा बार गालियां दी हैं।''  

मध्यप्रदेश में मंत्री पर सख्त रुख, बीजेपी संगठन ने मांगा जवाब, बढ़ी बेचैनी

भोपाल  मध्यप्रदेश में प्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन विभाग की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी Pratima Bagri इन दिनों सुर्खियों में हैं। उनका परिवार गांजा तस्करी में लिप्त पाया गया है। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के भाई अनिल बागरी और बहनोई शैलेंद्र को पुलिस ने गिरफ़्तार किया है। इस प्रकरण से राज्य की बीजेपी सरकार चिंतित हो उठी है। कांग्रेस राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी से इस्तीफे की मांग कर रही है। इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर भी लगातार प्रहार किए जा रहे हैं। कांग्रेस के बेहद हमलावर रुख को देखते हुए अब बीजेपी संगठन आगे आया है। संगठन नेताओं ने सख्ती दिखाते हुए राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी से मामले पर न केवल सफाई मांगी बल्कि उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि पार्टी के कड़े तेवर से मंत्री की निराशा बढ़ गई है। सतना जिले की रैगांव विधानसभा की विधायक व प्रदेश की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी Pratima Bagri, अपने परिवार के कारण मुश्किलों से घिर गई हैं। उनके भाई व बहनोई को तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। कांग्रेस और मीडिया का दबाव बढ़ा तो राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने दोनों से पल्ला झाड़ लिया और साफ कह दिया कि मेरा उनसे कोई संबंध नहीं है। हालांकि उनकी इस सफाई पर कोई यकीन करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। पार्टी ने सख्त लहजा अपनाते हुए प्रकरण में सफाई मांगी खासकर पार्टी में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी पर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल इस मुद्दे पर बीजेपी विरोधियों के निशाने पर है। पार्टी को जवाब देना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में प्रदेश बीजेपी ने कड़े तेवर अपना लिए हैं। पार्टी नेताओं ने मंत्री प्रतिमा बागरी के प्रति सख्त लहजा अपनाते हुए इस प्रकरण में उनसे सफाई मांगी। बीजेपी संगठन का वरिष्ठ नेतृत्व मंत्री की इस बात से कतई सहमत नहीं है कि तस्करी जैसे अपराधों से उनका कोई वास्ता नहीं है। भाई और बहनोई अपने कृत्यों के लिए खुद जिम्मेदार हैं।    सख्त स्वरों में चेताया सूत्रों के अनुसार बीजेपी के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल और प्रदेश महामंत्री हितानंद शर्मा ने इस मामले में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी से बात की। खुद को पाकसाफ बताने पर दोनों नेताओं ने नाराजगी जताई। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को सख्त स्वरों में चेताया गया।   बता दें कि बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व को पहले ही पूरे मामले की जानकारी दी जा चुकी है। सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा इस संबंध में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी अवगत करा दिया गया था।  

बीजेपी ने तोड़ा LDF का 40 साल पुराना दबदबा, तिरुवनंतपुरम निकाय चुनाव में मिली ऐतिहासिक सफलता

तिरुवनंतपुरम  केरल निकाय चुनाव में कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) को बड़ी जीत मिली है। वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) को करारी हार का सामना करना पड़ा है। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने पहली बार ऐतिहासिक जीत हासिल की है। इसके अलावा पलक्कड़ नगर पालिका चुनाव में बीजेपी ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की।  2020 के चुनाव में बीजेपी ने 28 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अबकी बार तीन सीटें कम आई। सत्तारूढ़ यूडीएफ ने पिछले चुनाव के मुकाबले तीन अधिक सीटें जीती। उसके खाते में 17 सीट आई। एलडीएफ को आठ सीटों पर जीत मिली। बीजेपी ने केरल के स्थानीय निकाय चुनाव में पहली जीत पलक्कड़ में साल 2015 में दर्ज की थी। तब से यहां पार्टी का दबदबा बरकरार है। 2020 में पलक्कड़ में कांग्रेस को 10 और मुस्लिम लीग को चार सीटों पर कामयाबी मिली थी। राजधानी में सत्ता परिवर्तन, वाम मोर्चे को बड़ा झटका तिरुवनंतपुरम न सिर्फ केरल की प्रशासनिक राजधानी है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम मानी जाती है। लंबे समय से यह क्षेत्र कांग्रेस और LDF के प्रभाव वाला रहा है। ऐसे में यहां बीजेपी की जीत को वाम राजनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। शशि थरूर का गढ़, फिर भी बीजेपी की सेंध बता दें कि तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर लगातार चार बार सांसद चुने जा चुके हैं। इस कारण यह इलाका पारंपरिक रूप से गैर-बीजेपी माना जाता रहा है, लेकिन नगर निगम चुनाव परिणाम ने इस धारणा को तोड़ दिया है। पीएम मोदी ने दी बधाई तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहर की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “Thank you Thiruvananthapuram!”  पीएम मोदी ने इस जनादेश को केरल की राजनीति में एक ‘वॉटरशेड मोमेंट’ करार देते हुए कहा कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी-एनडीए को मिला समर्थन इस बात का संकेत है कि राज्य के लोग मानते हैं कि केरल की विकासात्मक आकांक्षाओं को केवल बीजेपी ही पूरा कर सकती है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी तिरुवनंतपुरम जैसे जीवंत शहर के विकास के लिए काम करेगी और आम लोगों के लिए ‘Ease of Living’ को और बेहतर बनाएगी.  शहरी मतदाताओं का बदला रुझान राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो , यह जीत विधानसभा चुनाव में 2-3 सीटें जीतने से कहीं अधिक प्रभावशाली है। शहरी स्थानीय निकाय में सत्ता हासिल करना इस बात का संकेत है कि शहरी मतदाता अब पारंपरिक LDF-UDF ध्रुवीकरण से बाहर निकाल कर बेहतर विकल्प तलाश रहा है। चार नगर निगमों में यूडीएफ का कब्जा केरल की छह में से चार नगर निगमों में यूडीएफ ने जीत हासिल की है। इनमें कोल्लम, कोच्चि, त्रिशूर और कन्नूर शामिल है। इन क्षेत्रों को वामपंथियों का गढ़ कहा जाता है। मगर कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन ने एलडीएफ से कई सीटें छीन ली। तिरुवनंतपुरम में एनडीए ने पहली बार जीत हासिल की है। त्रिपुनिथुरा नगर पालिका पर भी बीजेपी को जीत मिली है। हालांकि थोडुपुझा और कन्हंगड नगरपालिका में उसे मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। एलडीएफ को बड़ा झटका कोझिकोड एकमात्र नगर निगम है, जहां एलडीएफ का जलवा बरकरार है। 2020 में एलडीएफ ने शानदार प्रदर्शन किया था। उसने छह में से पांच नगर निगमों पर अपना कब्जा जमाया था। वहीं यूडीएफ के खाते में सिर्फ कन्नूर नगर निगम सीट आई थी। बीजेपी नेता राजीव चंद्रशेखर का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे केरल में एलडीएफ के एक दशक लंबे शासन के खात्मे में का प्रतीक हैं। 54 नगर पालिकाओं पर यूडीएफ की जीत यूडीएफ ने नगर निगम, नगरपालिका से ब्लॉक और ग्राम स्तर के चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया। सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) भारी नुकसान पहुंचाया। यूडीएफ ने 86 में से 54 नगरपालिकाओं पर जीत हासिल की। 9 और 11 दिसंबर को दो चरणों में केरल के छह नगर निगमों, 14 जिला पंचायतों, 87 नगरपालिकाओं, 152 ब्लॉक पंचायतों और 941 ग्राम पंचायतों में मतदान हुआ। यूडीएफ: मध्य और उत्तरी केरल के बड़े हिस्से में यूडीएफ की पकड़ मजबूत रही। मोर्चा ने एर्नाकुलम, अलाप्पुझा, मलप्पुरम, कोट्टायम और पलक्कड़ जिले में अपना जलवा बरकरार रखा। इसके अलावा इडुक्की और पथानामथिट्टा में अपना प्रदर्शन बेहतरीन किया। एलडीएफ: अबकी चुनाव में एलडीएफ को अपने कुछ गढ़ खोने पड़े। पिछले चुनाव में जहां 5 नगर निगमों पर जीत हासिल की थी। अबकी सिर्फ एक ही सीट खाते में आई। नगर पालिकाओं की बात करें तो पार्टी अपने पारंपरिक गढ़ जैसे तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और कोझिकोड जिलों में अपना दबदबा बरकरार रखने में कामयाबी रही।    

उत्तर प्रदेश बीजेपी में आज खत्म होगा अध्यक्ष पद का सस्पेंस, पंकज चौधरी का नाम तय होने की संभावना

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीजेपी को आज नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है. आज प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में नामांकन होना है. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का नाम लगभग तय माना जा रहा है और अगर उनके अलावा किसी और उम्मीदवार का नामांकन नहीं होता है तो आज ही प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग सकती है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंकज चौधरी का चुनाव लगभग तय माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि आज दोपहर 2 बजे तक उनके नाम का अनौपचारिक ऐलान भी हो सकता है. इसकी वजह यह है कि पंकज चौधरी के अलावा किसी दूसरे नेता के नामांकन की संभावना बेहद कम मानी जा रही है. सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पंकज चौधरी के प्रस्तावक होंगे. अगर अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ एक ही नामांकन होता है और चुनाव की स्थिति नहीं बनती है तो आज ही यह साफ हो जाएगा कि उत्तर प्रदेश बीजेपी का अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा. हालांकि प्रदेश अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा बीजेपी रविवार को करेगी. रविवार दोपहर 12 बजे लखनऊ के एक बड़े सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नाम का भी ऐलान किया जाएगा. ज्यादातर सांसद भी आज लखनऊ में ही रहेंगे. उन्हें राष्ट्रीय परिषद के नामांकन के लिए बुलाया गया है. दूसरे नाम भी रेस में, लेकिन संभावना कम हालांकि पंकज चौधरी के अलावा कुछ और नाम भी चर्चा में रहे हैं. इनमें केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा और पूर्व सांसद निरंजन रंजन ज्योति का नाम भी रेस में बताया जा रहा है. लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन नामों के नामांकन की संभावना फिलहाल बेहद कम है. ओबीसी चेहरे पर बीजेपी का फोकस दरअसल, प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर सस्पेंस बनाए रखकर बीजेपी ने इसे लगभग एक बड़े राजनीतिक इवेंट का रूप दे दिया है. पार्टी ने यह लगभग तय कर लिया है कि इस बार उत्तर प्रदेश में ओबीसी चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा. इसे बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है. पंकज चौधरी ओबीसी वर्ग की कुर्मी बिरादरी से आते हैं और वे सात बार सांसद रह चुके हैं. ऐसे में अगर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है तो यह यूपी की राजनीति में एक बड़ा संदेश होगा. पूर्वांचल फैक्टर… सूत्रों के मुताबिक अगर पंकज चौधरी ही प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों पूर्वांचल से होंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं, जबकि पंकज चौधरी महाराजगंज से हैं. दोनों जिले एक-दूसरे से सटे हुए हैं. ऐसे में जहां एक ओर बीजेपी ओबीसी और खासकर कुर्मी वोटरों को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष का लगभग एक ही इलाके से होना कुछ सवाल भी खड़े कर रहा है. 2024 की नाराजगी साधने की कोशिश? बीजेपी को 2024 के लोकसभा चुनाव में ओबीसी वर्ग और खासकर कुर्मी समाज की नाराजगी का सामना करना पड़ा था. अब पंकज चौधरी के नाम के जरिए पार्टी इस वर्ग को फिर से अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है.

आज से शीतकालीन सत्र: छात्रवृत्ति-धान खरीद जैसे मुद्दों पर हेमंत सरकार घिरीगी बीजेपी के सवालों से

रांची  झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली JMM सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है।BJP ने झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में छात्रवृत्ति और धान खरीद की देरी जैसे मुद्दे उठाने की बात कही है. झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आज (8 दिसंबर) पहला दिन है. पहले ही दिन BJP ने साफ कर दिया है कि वह झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिलने और किसानों के धान खरीद की प्रक्रिया शुरू न होने पर सरकार से जवाब मांगेगी. यह मुद्दा रांची में बीजेपी विधायक दल की बैठक में तय हुआ, जिसकी अध्यक्षता विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने की. सत्र 6 दिसंबर से 11 दिसंबर तक चलेगा .पार्टी नेताओं ने बैठक में कहा कि हजारों छात्रों को अब तक छात्रवृत्ति न मिलना शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है. इसी तरह धान खरीद केंद्र न खुलने से किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बिचौलियों को बेचने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है. BJP के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने संवाददाताओं से कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के विधायकों ने निर्णय लिया है कि वे सरकार को इन “ज्वलंत मुद्दों” पर कठघरे में खड़ा करेंगे. जायसवाल ने कहा कि धान खरीद में देरी से खेतिहर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और यह स्थिति बताती है कि सरकार किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता के कारण बिचौलियों का दबदबा बढ़ गया है. सत्र के पहले दिन विपक्ष ने साफ संकेत दे दिए कि वह सरकार को हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए बाध्य करेगा. भाजपा नेताओं का कहना है कि छात्रों और किसानों से जुड़े ये सवाल केवल राजनीतिक नहीं बल्कि जनजीवन से सीधे जुड़े हैं.पार्टी ने यह भी संकेत दिया कि यदि जरूरी हुआ तो वह सत्र के भीतर विरोध के अलग-अलग तरीके अपनाएगी.

वक्फ और बागी हुमायूं: ममता के ‘खेला’ में BJP को मदद करेगी ये तीन शक्तियां

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अब तक के सबसे मुश्किल हालात का सामना कर रही हैं. उनकी हालत सांप-छछुंदर जैसी हो गई है. न निगलते बन रहा है और न उगलते. हिन्दू तो पहले से ही साथ छोड़ने लगे थे, अब उनकी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति भी खत्म होती दिख रही है. हिन्दू वोटर भाजपा की ओर मुखातिब हो गए हैं. पिछली बार 77 भाजपा विधायकों का निर्वाचन बंगाल में उसके प्रति लोगों के बढ़ते आकर्षण का स्पष्ट संकेत था. अव्वल तो गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) ने वैसे मुसलमानों में उनकी छवि को गहरी चोट पहुंचाई है, जो बांग्लादेश और म्यांमार से आकर पश्चिम बंगाल को सुरक्षित ठिकाना बनाए हुए थे. दूसरा संकट बन कर उभरे हैं उनके ही निलंबित विधायक हुमायूं कबीर. कबीर का खेल कामयाब हुआ तो ममता बनर्जी का सारा खेल चौपट हो सकता है. कबीर का कहना है कि ममता बनर्जी अल्पसंख्यक वोटों के बूते 15 साल से सत्ता में बनी हुई हैं. इस बार अल्पसंख्यक उन्हें सबक सिखाएंगे. हुमायूं कबीर राज्य की अल्पसंख्यक बहुल 90 सीटों पर नजर गड़ाए हुए हैं. वक्फ पर अपने स्टैंड से मुकरीं ममता ममता बनर्जी ने पहले कहा था कि बंगाल में वे वक्फ कानून लागू नहीं होने देंगी. इसे लेकर सड़क से लेकर संसद तक उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बवाल मचाया था. बंगाल के मुस्लिम इस बात से आह्लादित थे कि उनके मुद्दे पर ममता का साथ मिल गया है. पर, ममता अपने स्टैंड से अब मुकर गई हैं. उन्होंने बड़ी आसानी से इसे बंगाल में लागू करा दिया. उन्होंने वक्फ संपत्ति का ब्योरा इसके लिए भारत सरकार द्वारा बनाए गए पोर्टल पर अपलोड करने की इजाजत दे दी. बंगाल के मुसलमानों में उनके प्रति नफरत की यह बड़ी वजह बन गई है. उन्हें लगने लगा है कि ममता भी अब उनके लिए भाजपा से कम खतरनाक नहीं रह गई हैं. बिहार में चुनाव के दौरान आरजेडी नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरा तेजस्वी यादव भी वक्फ कानून को डस्टबिन में डालने की बात कहते थे. चुनाव में महागठबंधन की जैसी दुर्गति हुई, शायद ममता के रुख में उसे देख कर ही बदलाव आया है. SIR से बिगड़ गया है ममता का खेल बंगाल में SIR की चर्चा शुरू होते ही ममता बनर्जी ने आसमान सिर पर उठा लिया था. इसे रोकने के लिए उन्होंने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए. उनके विरोध का सिलसिला अब भी जारी है. SIR के भय से बांग्लादेश भाग रहे घुसपैठियों को वे सांत्वना दे रही हैं कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं. उन्हें वे वापस बुलाएंगी. ममता बनर्जी तो पहले यहां तक कहती थीं कि बंगाल में कोई घुसपैठिया नहीं. आश्चर्य होता है कि अब से ठीक 20 वर्ष पहले ममता बनर्जी ने लोकसभा में घुसपैठियों की बढ़ती आबादी पर जिस तरह बवाल काटा था, वह अब उसके उलट कैसे बोल रही हैं. दरअसल बांग्लादेशी घुसपैठिए बंगाल की राजनीति की रीढ़ रहे हैं. माल्दा, मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती जिलों में इनकी भरमार है. किसी की विधायकी-सांसदी चुने जाने की चाबी बांग्लादेशी घुपैठियों के ही हाथ में है. बहरहाल ममता की लाख बाधा पहुंचाने की कोशिशों पर चुनाव आयोग ने पानी फेर दिया है. ममता कुछ कर नहीं पाईं. अब हुमायूं से पड़ा है ममता का पाला अल्पसंख्यक वोटरों को खुश करने के लिए ममता बनर्जी ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. इमामों को तनख्वाह तय करना हो या धार्मिक जुलूसों का आयोजन हो; ममता हमेशा उनके साथ खड़ी रही हैं. लेकिन, अब स्थिति बदल गई है. ममता बनर्जी की ही पार्टी के एक विधायक हैं हुमायूं कबीर. उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मसिजद का राग छेड़ कर ममता को हलकान कर दिया है. ममता बनर्जी ने उनके इस आचरण के लिए पार्टी से निलंबित तो कर दिया है, लेकिन वे कितने दिनों तक इस पर अमल कर पाएंगी, यह देखने वाली बात होगी. इसलिए कि मूल रूप से कांग्रेसी रहे हुमायूं कबीर के लिए यह दूसरा मौका है, जब उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया है. इससे पहले भी उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किया गया था. फिर 2021 में उनकी वापसी हो गई. टीएमसी ने हुमायूं कबीर के निलंबन पर सफाई दी है कि उन्हें बाबरी मसिजद निर्माण के लिए नहीं, बल्कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित किया गया है. कौन हैं निलंबित MLA हुमायूं कबीर? हुमायूं कबीर 2021में टीएमसी के टिकट पर मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. वे बनर्जी के मंत्रिमंडल में भी शामिल होते रहे हैं. उन्हें पार्टी ने हाल ही में निलंबित किया है. इसके पहले भी उन पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है. इस बार बाबरी मस्जिद प्रकरण को लेकर उन्हें निलंबित किया गया है. पहली बार 2011 में ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद वे उनके मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने थे. वे अक्सर विवादों का केंद्र बनते रहे हैं. 2015 में उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेता ममता बनर्जी पर आरोप लगाया था कि वे अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को ‘राजा’ बनाना चाहती हैं. इसकी प्रतिक्रिया इस रूप में सामने आई कि उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया गया. 2021 में उनका वनवास खत्म हुआ और टीएमसी ने उन्हें भरतपुर से चुनाव लड़ने का मौका दिया. वे विधायक निर्वाचित हुए. हुमायूं ने बाबरी मस्जिद बनाने की ठानी हुमायूं कबीर ने ऐलान किया था कि मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाई जाएगी. उन्होंने इसके लिए आज (6 दिसंबर 2025) का दिन भी मुकर्रर कर दिया था. बाबरी विध्वंस की वर्षगांठ पर नींव रखने की उनकी घोषणा को टीएमसी ने सांप्रदायिक राजनीति करार दिया और इस आरोप में उन्हें सस्पेंड कर दिया है. ममता बनर्जी ने उन्हें आरएसएस का मुखौटा करार दिया है. लोकसभा चुनाव के दौरान भी हुमायूं कबीर को बोल बिगड़े थे. उन्होंने कहा था- ‘हिंदुओं को भागीरथी नदी में डुबो देंगे, क्योंकि मुर्शिदाबाद में 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. उन्होंने तो अब यह भी कहा है कि मुस्लिम बहुल सीटों पर अल्पसंख्यक ममता बनर्जी को पाठ पढ़ा देंगे. वे नई पार्टी बनाने का ऐलान भी कर चुके हैं. बंगाल में सांप्रदायिक राजनीति की नींव वर्ष 2011 में हुई जनगणना के अनुसार बंगाल की 9.13 करोड़ … Read more