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चीन-नीति पर फिर घिरे पंडित नेहरू: BJP ने उठाए पुराने समझौते, लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार (25 फरवरी) को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने पूरे कार्यकाल में बार-बार 'क्षेत्रीय समझौते' किए और भारत की सीमाओं का हमेशा के लिए 'पुन: निर्धारण' कर दिया। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकार पर कांग्रेस के हमले की पृष्ठभूमि में भाजपा ने विपक्षी दल पर पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता अनिल बलूनी ने 'कम्प्रोमाइज्ड कांग्रेस' हैशटैग के साथ सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखा, ''प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू का पहला कर्तव्य: भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना था लेकिन उन्होंने इसके बजाय अपने पूरे शासनकाल में क्षेत्रीय समझौते किए।" बलूनी ने आगे लिखा, "तिब्बत को टुकड़े-टुकड़े में गंवा दिया गया। अक्साई चिन को लेकर समझौता कर लिया गया। बेरुबारी को लेकर समझौता कर लिया गया। पंजाब के गांवों को लेकर समझौता कर लिया गया। रण के कच्छ को लेकर समझौता किया गया। और कश्मीर को लेकर भी करीब-करीब टुकड़ों में समझौता कर लिया गया।'' भाजपा सांसद ने दावा किया, ''बार-बार समझौते। यह नेहरू का नेतृत्व था। एक व्यक्ति के समझौते करने की वजह से भारत का नक्शा हमेशा के लिए बदल गया।'' ''डाक, टेलीग्राफ और फोन सेवाएं चीन को सुपुर्द कर दी गईं बलूनी ने आरोप लगाया कि नेहरू ने तिब्बत में भारत के अधिकारों को छोड़ दिया। उन्होंने दावा किया, ''डाक, टेलीग्राफ और फोन सेवाएं चीन के सुपुर्द कर दी गईं। तिब्बत को चीन के क्षेत्र के रूप में पहचाना गया। माओ को पूरा बफर जोन मुफ्त में सौंप दिया गया।'' भाजपा नेता ने कहा, ''अक्साई चिन: चीन ने 1951 से सैन्य सड़क बनाना शुरू किया। तत्कालीन आईबी प्रमुख बीएन मलिक ने 1952 में नेहरू को आगाह किया था लेकिन उन्होंने पूरी तरह अनदेखी की। सड़क 1957 में बनकर तैयार हो गई। 1959 में नेहरू ने संसद में कहा: 'इन अफवाहों पर ध्यान मत दो'। आठ साल का झूठ, जबकि भारत की जमीन को हथिया लिया गया।'' पश्चिम बंगाल का आधा क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिया बेरुबारी पर नेहरू-नून के समझौते का जिक्र करते हुए बलूनी ने आरोप लगाया कि प्रथम प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल का आधा क्षेत्र बिना कैबिनेट मंजूरी के पाकिस्तान को दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया, ''कोई कैबिनेट मंजूरी नहीं। पश्चिम बंगाल सरकार से कोई परामर्श नहीं। उच्चतम न्यायालय ने नाखुशी जताते हुए कहा था: प्रधानमंत्री भारतीय जमीन को उपहार में नहीं दे सकते। नेहरू ने अपने समर्पण को कानूनी रूप देने के लिए नौवां संविधान संशोधन कराया।'' जनमत संग्रह का ऐलान पाक को कूटनीतिक हथियार भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि नेहरू ने मंत्रिमंडल की मंजूरी के बिना कश्मीर में 'सार्वजनिक रूप से' जनमत संग्रह का ऐलान कर दिया और पाकिस्तान को ''एक स्थायी कूटनीतिक हथियार'' दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू ने 1960 में सारजा माजरा, रख हरदित सिंह, पठानके और फिरोजपुर के हिस्सों को पाकिस्तान को सौंप दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका समझौते के खिलाफ मंगलवार को आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने 'एपस्टीन फाइल्स' जारी होने की धमकियों के बाहरी दबाव में समझौते को मंजूरी दी।  

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में मप्र का दबदबा, 15 नेताओं को मिला अवसर

भोपाल भाजपा संगठन की राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश के कई चेहरे दिखाई दे सकते हैं। प्रदेश संगठन ने राज्य के ऐसे 15 नेताओं के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे हैं, जो अलग- अलग अंचलों से हैं और अभी सत्ता या संगठन के किसी पद पर नहीं हैं। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का गठन होना है और अन्य मोर्चे भी गठित किए जाने हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने इस बारे में प्रदेश संगठन से सुझाव मांगे थे। वर्तमान में मध्य प्रदेश से सत्यनारायण जटिया (संसदीय बोर्ड सदस्य), ओम प्रकाश धुर्वे (राष्ट्रीय सचिव) और लाल सिंह आर्य (राष्ट्रीय अध्यक्ष, एससी मोर्चा) जैसे नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी 2029 के लोकसभा चुनाव और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखकर अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को भी वरीयता देना चाहती है। पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में मध्य प्रदेश से कैलाश विजयवर्गीय सहित चार नेताओं को स्थान मिला था। उस दौरान कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव थे।   बाद में वर्ष 2023 में वह राज्य में मंत्री बना दिए गए। पार्टी नेताओं का मानना है कि चूंकि पूर्व में राष्ट्रीय संगठन में एक ही समय में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव थावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नितिन नवीन की टीम में भी मध्य प्रदेश का प्रभाव बढ़ सकता है। इस बार भी चार से पांच नेताओं को नितिन नवीन की टीम में स्थान मिलने की संभावना है। इसमें एक या दो महिलाएं भी हो सकती हैं। इसके साथ ही युवा नेताओं को भी अवसर मिल सकता है। बाकी अन्य को मोर्चा- प्रकोष्ठ में शामिल किया जा सकता है। दरअसल, मध्य प्रदेश हमेशा से ही भाजपा के लिए एक प्रयोगशाला की तरह रहा है। हिंदू महासभा हो या जनसंघ, दोनों की जड़ें मध्य प्रदेश में मजबूत रही हैं। यही कारण है कि भाजपा यहां लंबे समय से सत्ता में है। संगठन की मजबूती की दूसरी वजह यहां के कुशल संगठनकर्ता भी माने जा सकते हैं। जिनकी वजह से राष्ट्रीय संगठन के स्तर पर भी यहां के भाजपा कार्यकर्ताओं का दबदबा रहा है।

भाजपा की राष्ट्रीय टीम में दिखेंगे मध्य प्रदेश के कई चेहरे

भोपाल. भाजपा संगठन की राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश के कई चेहरे दिखाई दे सकते हैं। प्रदेश संगठन ने राज्य के ऐसे 15 नेताओं के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे हैं, जो अलग-अलग अंचलों से हैं और अभी सत्ता या संगठन के किसी पद पर नहीं हैं। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का गठन होना है और अन्य मोर्चे भी गठित किए जाने हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने इस बारे में प्रदेश संगठन से सुझाव मांगे थे। युवा और महिला चेहरों को भी वरीयता वर्तमान में मध्य प्रदेश से सत्यनारायण जटिया (संसदीय बोर्ड सदस्य), ओम प्रकाश धुर्वे (राष्ट्रीय सचिव) और लाल सिंह आर्य (राष्ट्रीय अध्यक्ष, एससी मोर्चा) जैसे नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी 2029 के लोकसभा चुनाव और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखकर अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को भी वरीयता देना चाहती है। नड्डा की टीम मेंचार नेताओं को स्थान मिला था पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में मध्य प्रदेश से कैलाश विजयवर्गीय सहित चार नेताओं को स्थान मिला था। उस दौरान कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव थे। बाद में वर्ष 2023 में वह राज्य में मंत्री बना दिए गए। पार्टी नेताओं का मानना है कि चूंकि पूर्व में राष्ट्रीय संगठन में एक ही समय में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव थावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नितिन नवीन की टीम में भी मध्य प्रदेश का प्रभाव बढ़ सकता है। इस बार भी चार से पांच नेताओं को स्थान मिलने की संभावना इस बार भी चार से पांच नेताओं को नितिन नवीन की टीम में स्थान मिलने की संभावना है। इसमें एक या दो महिलाएं भी हो सकती हैं। इसके साथ ही युवा नेताओं को भी अवसर मिल सकता है। बाकी अन्य को मोर्चा- प्रकोष्ठ में शामिल किया जा सकता है। दरअसल, मध्य प्रदेश हमेशा से ही भाजपा के लिए एक प्रयोगशाला की तरह रहा है। हिंदू महासभा हो या जनसंघ, दोनों की जड़ें मध्य प्रदेश में मजबूत रही हैं। यही कारण है कि भाजपा यहां लंबे समय से सत्ता में है। संगठन की मजबूती की दूसरी वजह यहां के कुशल संगठनकर्ता भी माने जा सकते हैं। जिनकी वजह से राष्ट्रीय संगठन के स्तर पर भी यहां के भाजपा कार्यकर्ताओं का दबदबा रहा है।

भोपाल में भाजपा कार्यकर्ताओं का हमला: कांग्रेस कार्यालय में घुसकर तोड़े खिड़कियों के शीशे

​भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज राजनीतिक सरगर्मी उस वक्त हिंसक हो गई, जब कांग्रेस पार्टी के प्रदेश कार्यालय शिवाजी नगर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके प्रदेश कार्यालय (PCC) में घुसकर तोड़फोड़ की। इस घटना के बाद राजधानी में भारी पुलिस बल तैनात है। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ने उनके कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों को फाड़ा और खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मौके पर दोनों गुटों के बीच जमकर नारेबाजी और धक्का-मुक्की भी हुई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। बीजेपी का पूरे प्रदेश में प्रदर्शन दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अर्धनग्न प्रदर्शन के विरोध में भारतीय जनता युवा मोर्चा का पूरे प्रदेश में प्रदर्शन है।  भोपाल संभाग के अंतर्गत शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय शिवाजी नगर चौराहा के पास, भोपाल ग्रामीण में प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही युवा मोर्चा के नेतृत्व में ग्वालियर, मुरैना, सागर, इंदौर, खंडवा, उज्जैन, मंदसौर, रीवा, शहडोल, जबलपुर और छिंदवाड़ा जिलों में कांग्रेस कार्यालयों का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस की घटिया कार्यशैली सामने आई बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने बताया कि आज पूरा विश्व भारत की तकनीकी क्षमता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता एआई में नेतृत्व की सराहना कर रहा था। तब राहुल गांधी के इशारे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी घटिया कार्यशैली का परिचय देते हुए भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के स्थल के अंदर अर्धनग्न प्रदर्शन कर भारत की छवि धुमिल करने का प्रयास किया है। इस प्रकार के प्रदर्शन से पूरे राष्ट्र का सिर शर्म से झुका है, जिसके विरोध में 21 फरवरी को प्रदेश भर में भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा कांग्रेस कार्यालयों का घेराव कर राहुल गांधी एवं कांग्रेस के विरोध में आक्रामक प्रदर्शन किया गया।

राजनीतिक तनाव ने लिया उग्र रूप, भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पथराव

इंदौर दिल्ली में एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन के विरोध में शनिवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन घेरने की घोषणा की थी। लेकिन वहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी विरोध स्वरूप एकत्र होकर उनका सामना किया। दोनों तरफ से पत्थर, पानी की बोतलें और टमाटर एक-दूसरे पर फेंके गए। पुलिस ने आमने-सामने हुए दोनों दलों के प्रदर्शनकारियों को हटाकर स्थिति को नियंत्रित किया। इस पथराव में छह लोगों सहित एक मीडियाकर्मी और एक पुलिस अधिकारी को चोटें आई हैं। एक महिला नेत्री बिंदू चौहान को पथराव में गंभीर चोट आई है। उन्हे निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।   एआई समिट में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद देशभर में भाजपा ने कांग्रेस कार्यालय घेरने की योजना बनाई थी। इसके अलावा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा में दिए गए बयान के विरोध में कांग्रेस के प्रदर्शन प्रदेशभर में जारी थे। इसी कारण कांग्रेस कार्यकर्ता दोपहर एक बजे से गांधी भवन पर भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध में जुट गए थे। पुलिस ने संभावित टकराव को देखते हुए मार्ग के दोनों तरफ बैरिकेड लगा दिए थे। लेकिन जैसे ही भाजपा कार्यकर्ता प्रदर्शन करने गांधी भवन की ओर बढ़े, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। वे विजयवर्गीय के खिलाफ नारे लगा रहे थे। तभी अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। दोनों तरफ से पत्थर, टमाटर और पानी की बोतलें फेंकी गईं। बैरिकेड की वजह से दोनों कार्यकर्ताओं के बीच अधिक निकटता नहीं थी। पथराव के कारण छह से अधिक लोग घायल हुए है। इस घटना के बाद अफरा तफरी मच गई और व्यापारियों ने भी दुकानें धड़ाधड़ बंद कर दी। पुलिस ने स्थिति संभाली और दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को पीछे धकेला। दंगा नियंत्रक वाहन वज्र भी तैनात था और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का उपयोग किया गया, लेकिन पानी का प्रेशर कम होने के कारण यह प्रभावी नहीं हुआ। इस घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ता पढ़रीनाथ थाने का घेराव करने पहुंचे और कांग्रेसजनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराने की मांग की।

प्रियंका गांधी ने असम में खोला BJP के खिलाफ मोर्चा, पेश की 20 सूत्रीय चार्जशीट

असम कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने बृहस्पतिवार को गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली असम सरकार के खिलाफ 20 सूत्री 'आरोपपत्र' जारी किया, जिसमें राज्य प्रशासन पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने और अल्पसंख्यकों में भय पैदा करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है। विपक्षी पार्टी ने विधानसभा चुनावों से पहले यह 'आरोपपत्र' जारी किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक दशक के शासनकाल के बावजूद भाजपा सरकार छह आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलवाने और चाय बागान श्रमिकों की दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 351 रुपये करने के अपने वादे को पूरे करने में विफल रही। असम विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की उम्मीदवार चयन समिति की अध्यक्ष वाद्रा दो दिवसीय असम दौरे पर हैं। कांग्रेस ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर 'व्यापक भ्रष्टाचार' का भी आरोप लगाया। पार्टी ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और उनके करीबी मंत्रियों एव उनके परिवार के सदस्यों पर 'अवैध रूप से संपत्ति जमा करने' का आरोप लगाया।  

सियासी पलटवार: 9 पार्षदों के फैसले से BJP बैकफुट पर, कांग्रेस की मेयर कुर्सी तय

मुंबई  महाराष्ट्र के भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव से पहले सियासी उलटफेर की बड़ी खबर सामने आई है. यहां मेयर के चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. उसके 22 पार्षदों में से 9 ने अलग गुट बनाकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन दिया है. इसके बाद अब कांग्रेस पार्टी के लिए यहां अपना मेयर चुनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. इस महानगरपालिका के चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक 30 सीटें मिली थीं. हालांकि किसी पार्टी को यहां बहुमत नहीं मिला है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कुल 90 सीटें हैं. कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बुधवार (18) को जानकारी देते हुए बताया कि अलग हुए पार्षदों की ओर से गठित भिवंडी सेक्युलर फ्रंट (बीएसएफ) के समर्थन से कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) गठबंधन ने 90 सदस्यीय निकाय में 46 सीटों के बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कांग्रेस का मेयर बनना तय? उन्होंने दावा करते हुए कहा कि 9 पार्षदों ने हमारा समर्थन करने का फैसला किया है और बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं. गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने शिवसेना का समर्थन किया था. पिछले महीने हुए भिवंडी-निज़ामपुर नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस अब अपना मेयर और डिप्टी मेयर नियुक्त करने के लिए तैयार दिख रही है. भिवंडी-निजामपुर में किस पार्टी के पास कितनी सीटें? महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे, जबकि नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए थे. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और इस पार्टी को सबसे अधिक 30 सीटें मिलीं थीं, उसके बाद बीजेपी को 22 सीटें मिली.  वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 12, शरद पवार गुट की एनसीपी-एसपी 12, समाजवादी पार्टी को 6, कोनार्क विकास अघाड़ी 4 और भिवंडी विकास अघाड़ी को 3 सीटों पर जीत मिली थी. यहां एक निर्दलीय उम्मीदवार को जीत हासिल हुई.

BJP से कांग्रेस तक का सरप्राइज, वरिष्ठ नेता की बेटी का पार्टी बदलना मचा रहा हलचल

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक और मध्य प्रदेश खाद एवं ग्रामोद्योग निगम के पूर्व अध्यक्ष सत्यनारायण सत्तन की बेटी कनुप्रिया सत्तन कांग्रेस में शामिल हो गई है। कनुप्रिया ने आज भोपाल में कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष अर्चना जायसवाल की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस कार्यालय में हुआ सदस्यता ग्रहण भोपाल स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कनुप्रिया सत्तन को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत करते हुए संगठन को मजबूत करने की बात कही। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा के वरिष्ठ नेता के परिवार से जुड़ी यह एंट्री इंदौर और प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है। सियासी हलकों में चर्चा तेज कनुप्रिया सत्तन का कांग्रेस में शामिल होना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर तब जब प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। अब देखना होगा कि इस घटनाक्रम पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और कनुप्रिया सत्तन कांग्रेस संगठन में किस भूमिका में नजर आती हैं।

भाजपा उपाध्यक्ष का बगावती कदम: अरविंद खन्ना ने पार्टी छोड़ी, राज्य में राजनीतिक हलचल

चंडीगढ़  भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पंजाब इकाई के उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना  संगरूर में शिरोमणि अकाली दल (SAD) में शामिल हो गए। BJP की पंजाब इकाई में शामिल होने से पहले खन्ना कांग्रेस के विधायक थे। खास बात है कि पंजाब में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। फिलहाल, राज्य में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार है। SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने संगरूर में खन्ना के घर का दौरा किया, जहां उन्होंने पूर्व विधायक को SAD में शामिल किया। बादल ने कहा कि उन्हें अपने मित्र का SAD में स्वागत करते हुए और उन्हें संगरूर विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त करते हुए खुशी हो रही है। पूर्व कांग्रेस विधायक और व्यवसायी खन्ना जनवरी 2022 में BJP में शामिल हुए थे। वह 2002 में संगरूर विधानसभा क्षेत्र से और 2012 में धुरी सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। खन्ना ने 2022 के विधानसभा चुनाव में संगरूर सीट से और 2024 के लोकसभा चुनाव में संगरूर संसदीय क्षेत्र से BJP के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी। पार्टी में शामिल होने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए खन्ना ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत SAD से की थी और पार्टी में दोबारा शामिल होने को उन्होंने 'घर वापसी' बताया। संगरूर विधायक ने भाजपा पर लगाए ऑपरेशन लोटस के आरोप संगरूर सीट से आप विधायक नरिंदर कौर भरज ने गुरुवार को दावा किया था कि भाजपा ने उन्हें टिकट देने की पेशकश की है। उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का नाम लिया था। हालांकि, सैनी ने आरोपों का खंडन किया था। पीटीआई भाषा के अनुसार, जब पत्रकारों ने भरज के दावों पर टिप्पणी के लिए सैनी से संपर्क किया, तो मुख्यमंत्री ने कहा, मैं उन्हें नहीं जानता, न ही उनके निर्वाचन क्षेत्र को जानता हूं जिसका वह प्रतिनिधित्व करती हैं।' संगरूर सीट से आप विधायक ने यह भी दावा किया कि उन्हें बंद कमरे में बैठक की पेशकश की गई थी। दावे पर फरीदाबाद में मीडियाकर्मियों के सवालों पर सैनी ने पूछा, 'कब?' इससे पहले, भरज ने यहां मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए दावा किया कि भाजपा के 'ऑपरेशन लोटस' के तहत सैनी ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की और कुछ दिन पहले उनसे बात भी की थी। उन्होंने दावा किया कि सैनी ने बंद कमरे में एक बैठक का प्रस्ताव रखा।

एपस्टीन फाइल्स को लेकर भाजपा ने कपिल सिब्बल और राहुल गांधी को घेरा

नई दिल्ली. अमेरिका के बदनाम फाइनेंशर और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइल्स ने भारत में भी राजनैतिक बवाल मचाया हुआ है। कांग्रेस की तरफ से पहले केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ऊपर हमला किया गया, अब भाजपा ने भी पलटवार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल पर निशाना साधा है। भाजपा ने राहुल गांधी से जवाब देने की मांग करते हुए दावा किया कि कपिल सिब्बल को एक ऐसे कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार मिला था, जिसे यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने फंड किया था। कपिल सिब्बल से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस दावे के बकवास बताकर खारिज कर दिया। कांग्रेस की तरफ से प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इन आरोपों पर जवाब दिया। मीडिया से बात करते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि उस समय सिब्बल केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री थे। उन्हें ''शिक्षा में वैश्विक सहयोग के प्रति उनके दृढ़ समर्थन' के लिए समारोह में पुरस्कार दिया गया था। खेड़ा ने कहा, ''इसका जेफ्री एप्स्टीन से कोई संबंध नहीं है।'' दरअसल यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ, जब भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट करते हुए कपिल सिब्बल पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "2010 में, जेफ्री एप्स्टीन द्वारा कथित तौर पर वित्त पोषित एक पुरस्कार कांग्रेस के (तत्कालीन) वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल को मिला था। सिब्बल को लंबे समय से गांधी परिवार के करीबी के रूप में देखा जाता रहा है।'' भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की विदेश इकाई के प्रमुख सैम पित्रोदा भी ''उसी गुट'' से जुड़े हुए थे। 2010 में, जेफ्री एप्स्टीन द्वारा कथित तौर पर वित्त पोषित एक पुरस्कार कांग्रेस के (तत्कालीन) वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल को मिला था। सिब्बल को लंबे समय से गांधी परिवार के करीबी के रूप में देखा जाता रहा है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की विदेश इकाई के प्रमुख सैम पित्रोदा भी ''उसी गुट'' से जुड़े हुए थे। आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल 2022 तक कांग्रेस में शामिल थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी, वर्तमान में वह समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा के सांसद हैं। एपस्टीन फाइल्स में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आने पर कांग्रेस लगातार हमलावर बनी हुई है। कांग्रेस की तरफ से पवन खेड़ा ने पुरी पर हमला बोलते हुए कहा था कि वह लगातार झूठ बोल रहे हैं, ऐसे व्यक्ति को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है, उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उनकी काम के सिलसिले में एपस्टीन से जान-पहचान थी, उसके अपराधों से उनका कोई लेना-देना नहीं।