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मुख्यमंत्री डॉ. यादव: वैश्विक व्यापार में भारत बना पसंदीदा साझेदार

भोपाल रोजगार मूलक व्यवसाय उद्योग स्थापना पर दी जायेगी मदद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसी भी प्रदेश की पहचान उसके केवल नक्शे से नहीं, बल्कि उपलब्धियों से भी होती है। आज मध्यप्रदेश अपनी प्रभावी नीतियों और उनके सफल क्रियान्वयन के कारण न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बना रहा है। प्रदेश औद्योगिक विकास की दिशा में तेजी से अग्रसर है और निवेश के लिए उद्यमियों को आकर्षित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस की वार्षिक बैठक में सहभागिता के बाद जबलपुर में महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के व्यापारियों एवं उद्यमियों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2014 के पहले की स्थिति अब पूरी तरह बदल चुकी है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है और आज दुनिया का हर देश व्यापार और निवेश के लिए भारत से जुड़ने को उत्सुक है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह, महापौर  जगत बहादुर सिंह 'अन्नू', सांसद  आशीष दुबे, विधायक  अशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे सहित व्यापारिक एवं व्यावसायिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में 200 से अधिक देशों ने भाग लिया, लेकिन सबसे अधिक फोकस भारतीय प्रतिनिधिमंडल पर रहा। भारत सरकार के साथ-साथ देश के 10 राज्यों ने भी इस मंच पर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें मध्यप्रदेश विशेष रूप से उभरकर सामने आया। विशेषकर नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा एवं पॉवर सेक्टर के माध्यम से सस्ती बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और मात्र 2 रुपये 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास के लिए आर्थिक समृद्धि अत्यंत आवश्यक है। राज्य यदि आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं होगा तो विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कठिनाई आएगी। मध्यप्रदेश आज एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, जहां सड़क, बिजली, पानी और लैंड बैंक जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराकर हर प्रकार के उद्योग-व्यवसाय को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। वर्ष 2025 को मध्यप्रदेश में उद्योग रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भारत की विकास दर विश्व में सबसे तेज है। इसमें भी मध्यप्रदेश सभी राज्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मध्यप्रदेश जनसंख्या के आधार पर देश में 5वें स्थान पर है। प्रदेश युवा शक्ति के मामले में पहले स्थान पर है। प्रदेश की प्रभावी नीतियों के कारण बेरोजगारी दर के मामले में मध्यप्रदेश देश के उन तीन राज्यों में शामिल है जहां बेरोजगारी की दर सबसे कम है। उन्होंने बताया कि त्रिपुरा और तेलंगाना जैसे छोटे राज्यों की तुलना में, लगभग 9 करोड़ की आबादी होने के बावजूद मध्यप्रदेश में बेरोजगारी दर कम होना प्रदेश की बड़ी उपलब्धि है। साथ ही प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में लगातार वृद्धि हो रही है, जो समृद्धि का संकेत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार रोजगार मूलक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रोत्साहन दे रही है। उद्योगों की स्थापना पर 30 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी प्रदान की जा रही है, वहीं एमएसएमई सेक्टर को 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। राज्य के संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नई नीतियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि देश में सबसे तेज गति से मेडिकल कॉलेज मध्यप्रदेश में खोले जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज खोलने के इच्छुक उद्यमियों को 25 एकड़ भूमि मात्र एक रुपये की दर से उपलब्ध करायी जा रही है। साथ ही निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों में नीट के माध्यम से चयनित छात्रों को फीस भुगतान के लिए राज्य सरकार द्वारा ऋण सुविधा भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्र औद्योगिकीकरण होने से तेजी से आगे बढ़ते हैं। प्रदेश के महानगरों के विकास के लिए औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जबलपुर शहर के समग्र विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें जबलपुर से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी शहरों को शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज यदि देश में कहीं चीता परिवार का विस्तार हो रहा है तो वह मध्यप्रदेश में हो रहा है, जो पूरे एशिया के लिए गर्व की बात है। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश में हेलीकॉप्टर सेवा प्रारंभ की गई है, जिसमें 45 मिनट की यात्रा का किराया मात्र 3500 रुपये रखा गया है, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। इससे प्रदेश में पर्यटन को नई गति मिलेगी।  

महिला पत्रकारों ने अध्ययन भ्रमण में जताया मुख्यमंत्री का आभार

रायपुर. पहली बार छत्तीसगढ़ की महिला पत्रकारों के दल ने किया अध्ययन भ्रमण, खुशियों भरी मुस्कान के साथ जताया मुख्यमंत्री का आभार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गुजरात के अध्ययन भ्रमण से लौटे महिला पत्रकारों के दल ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिला पत्रकार अपने साहस से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत कर रही हैं। मैं उन सभी महिलाओं के साहस को नमन करता हूं जो पत्रकारिता जैसे चुनौतीपूर्ण पेशे में रह कर समाज में सकारात्मक योगदान दे रही हैं।  मुख्यमंत्री को महिला पत्रकारों के दल ने गुजराती अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर पहली बार छत्तीसगढ़ से महिला पत्रकारों के दल को अन्य राज्य के अध्ययन भ्रमण पर भेजने के लिए उनका आभार जताया। महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि विगत वर्ष महिला दिवस पर उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष महिला पत्रकारों को भी अध्ययन भ्रमण पर भेजे जाने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्हें बहुत खुशी है कि मुख्यमंत्री ने उन सभी की इस इच्छा को पूरा किया।  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने महिलाओं से चर्चा के दौरान कहा कि इस अध्ययन भ्रमण के दौरान आप सभी ने गुजरात विधानसभा, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, राजकोट, पोरबंदर सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को समझा है। आने वाले समय में ये अनुभव आपकी कलम को और भी समृद्ध करेगा, जिसका लाभ पत्रकारिता जगत के साथ ही आपके पाठकों भी मिलेगा।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का यह तीसरा वर्ष है। इस वर्ष को हम महतारी गौरव वर्ष के रूप में मना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने महिला पत्रकारों से उनके अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को किताब के रूप संजोने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह ना सिर्फ आपके लिए इस भ्रमण को हमेशा के लिए यादगार बनाएगा बल्कि अन्य लोग भी आपकी किताब को पढ़कर गुजरात के बारे में अपनी जानकारी बढ़ा सकेंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात एक समृद्ध और मॉडल राज्य है। गुजरात की एक खासियत यह भी है कि वहां सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। अमूल सहकारिता का एक जीवंत उदाहरण है, जिसमें मुख्यतः महिलाएं शामिल है। छत्तीसगढ़ में भी हम सहकारिता को बढ़ावा दे रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी देश के सहकारिता मंत्री भी हैं। उनके मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में भी सहकारिता के लिए बहुत कार्य हो रहा है। सहकारिता इस बात का प्रतीक है कि मिलकर करने से बड़ा काम भी आसान होता है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हम सभी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण कर रहे हैं। मंत्रालय में अब ई-फाइल प्रणाली लागू है। मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला पत्रकारों से अपनी गुजरात यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि गुजरात का सीएम डैशबोर्ड देश का सबसे एडवांस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम है जिसके माध्यम से एक जगह बैठकर ही पूरे प्रदेश पर नजर रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के विकास की नींव रखी थी, हम गुजरात जैसी व्यवस्थाओं को यहां भी लागू कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री से महिला पत्रकारों ने गुजरात अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को साझा किया। सुश्री निशा द्विवेदी ने कहा कि इस टूर के माध्यम से उन्हें गुजरात के समृद्ध इतिहास और संस्कृति से रुबरू होने का अवसर मिला। सुश्री दामिनी बंजारे ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके 8 वर्षों के पत्रकारिता के करियर में पहली बार है जब महिलाओं का दल अध्ययन भ्रमण पर गया है। कोरिया की सुश्री नूरजहां ने बताया कि यह पहली बार है जब महिलाओं को इस रूप में प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी महिला पत्रकारों को ये मौका मिलता रहेगा।  मुख्यमंत्री को महासमुंद की पत्रकार सुश्री उत्तरा विदानी ने बताया कि गुजरात विधानसभा के भ्रमण में बहुत अच्छा लगा। वहां की खास बात यह देखने को मिली कि बच्चों सहित आमजन को विधानसभा की कार्यवाही को सुगमता से देखने का अवसर दिया जाता है। दुर्ग की पत्रकार सुश्री कोमल धनेसर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में 25 वर्षों में यह पहला अवसर है जब महिला पत्रकारों को ऐसा मौका मिला है। उन्होंने कहा कि जब हम भ्रमण पर निकले थे तो बहुत सारे अनजाने चेहरे थे और लौटे हैं तो नए दोस्त और नई बॉन्डिंग के साथ।  रायपुर की पत्रकार सुश्री नेहा श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को बताया कि हम सभी पत्रकार अलग- अलग संस्थानों में काम करते हैं। व्यस्तता की वजह से हमारी बात नहीं हो पाती। ये टूर रूटीन से अलग एक अनुभव रहा जिसमें नये दोस्त बने। सुश्री रचना नितेश ने मुख्यमंत्री को बताया कि ये अनुभव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध करने वाला था। उन्होंने कहा कि एक खास बात ये रही कि हमारे दल में महिला पत्रकारों की 3 पीढ़ियां शामिल थीं। हमें बहुत कुछ सीखने को मिला।  बस्तर की पत्रकार सुश्री प्रियंका जायसवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पहचान बस्तर से है। टूर पर जाते समय नए माहौल की वजह से मन में कई आशंकाएं थीं। मगर बाद में यह अनुभव बहुत सुखद रहा। कोरबा की सुश्री राजश्री गुप्ते ने बताया कि 8 दिनों के इस टूर में ऐसा लगा कि हमने अपने बचपन को फिर से जी लिया है।  मुख्यमंत्री श्री साय को महिला पत्रकारों ने बताया कि कई लोगों की यह पहली हवाई यात्रा भी थी। जिस पर मुख्यमंत्री ने बड़ी आत्मीयता से पत्रकारों से कहा कि जो पहली बार हवाई यात्रा करते हैं उन्हें पार्टी देनी पड़ती है। मुख्यमंत्री की बात सुनकर पूरे सभागार में हंसी गूंज उठी।  महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री श्री साय से एक रोचक वाकया भी साझा किया। उन्होंने बताया कि गुजरात भ्रमण के दौरान उनका इंटरेक्शन कुछ फ्रेंच पर्यटकों से हुआ। यह जानने पर की महिला पत्रकार छत्तीसगढ़ से हैं, फ्रेंच पर्यटक ने कहा- ओह सीएम विष्णुदेव छत्तीसगढ़ ! ये सुनकर उन्हें बहुत गर्व हुआ कि छत्तीसगढ़ राज्य को विदेशी नागरिक भी मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नाम से पहचान रहे हैं।  महिला पत्रकारों ने जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों का भी आभार जताया जिन्होंने आठ दिवसीय इस अध्ययन भ्रमण में उनका पूरा ख्याल रखा। इस अवसर पर  आयुक्त जनसंपर्क डॉ रवि … Read more

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साहित्य उत्सव को बताया समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक

रायपुर . साहित्य आशा, साहस और सामाजिक चेतना जागृत करने का सबसे सशक्त माध्यम : उप सभापति श्री हरिवंश राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री विष्णु श्री देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन विनोद कुमार शुक्ल मंडप में किया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा तथा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के करकमलों से छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ तथा राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया। उप सभापति श्री हरिवंश ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है तथा इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है। रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में अत्यंत रचनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कबीर के काशी से गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उप सभापति श्री हरिवंश ने कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं।  उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है, आशा जगाता है, निराशा से उबारता है और जीवन जीने का साहस प्रदान करता है। उपसभापति श्री हरिवंश ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टील, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। देश की आत्मनिर्भरता से दुनिया को नई दिशा मिली है और इस राष्ट्रीय शक्ति के पीछे साहित्य की सशक्त भूमिका रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने देशभर से आए साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का एक महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन के दौरान कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, इसी भाव के अनुरूप इस उत्सव का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में विष और अमृत दोनों निकले, उसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत प्रदान किया। उन्होंने कहा कि हमारे अनेक स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकील भी थे। माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा बिलासपुर जेल में रचित पुष्प की अभिलाषा जैसी रचनाओं ने देशवासियों को प्रेरित किया। माधवराव सप्रे की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है।  मुख्यमंत्री ने पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। राजनांदगांव में त्रिवेणी संग्रहालय का निर्माण इसी भावना का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव के मंडपों को विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव जैसे महान साहित्यकारों को समर्पित किया गया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और साहित्य को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध करना सिखाती है और यही साहित्य की वास्तविक शक्ति है। मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित काव्यपाठ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी। “हार नहीं मानूंगा…” जैसी पंक्तियाँ आज भी जनमानस को संबल देती हैं। मुख्यमंत्री ने इमरजेंसी काल के दौरान साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि आज जब बड़ी संख्या में युवा साहित्यप्रेमी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं, तब यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में साहित्य का वातावरण उजला और सशक्त है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तीन दिवसीय आयोजन एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को भी नमन किया। उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं। वहीं डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संकल्प हमारे उज्ज्वल भविष्य की नींव है। उन्होंने साहित्य को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया तथा भारत को मानवीय संस्कृति की टकसाल कहा। आयोजन के पश्चात अतिथियों एवं साहित्यकारों ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता करते हुए समकालीन साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।  कार्यक्रम के दौरान साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके। बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।

पारंपरिक व्यंजनों को ब्रांडिंग, टेक्नोलॉजी, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ेगी प्रदेश सरकार: मुख्यमंत्री

  गुणवत्ता, स्वच्छता, फूड सेफ्टी और जीआई टैगिंग सर्वोच्च प्राथमिकता; युवाओं की पसंद के अनुसार स्वाद में नवाचार पर ज़ोर ब्रांडिंग, टेक्नोलॉजी, पैकेजिंग और मार्केटिंग के स्तर पर सरकार करेगी प्रोत्साहित लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की समृद्ध और विविधतापूर्ण खान-पान परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ‘एक जनपद-एक व्यंजन (ओडीओसी)’ योजना के शुभारंभ का निर्णय लिया है। ब्रांड यूपी को सशक्त बनाने में एक जनपद-एक उत्पाद  योजना की बड़ी भूमिका के बाद अब उत्तर प्रदेश की पारंपरिक क्यूज़ीन को संगठित ब्रांडिंग के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का हर जनपद अपने विशिष्ट स्वाद, संस्कृति और पहचान के साथ सामने आए, यही ओडीओसी योजना का मूल उद्देश्य है। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मैनपुरी की सोनपापड़ी, मथुरा का पेड़ा, अलीगढ़ की चमचम, हाथरस की रबड़ी, कासगंज का कलाकंद और मूंग का दलमा, एटा की चिकोरी, सुल्तानपुर की कड़ाहा की पूरी और कोहड़े की सब्ज़ी, बाराबंकी की चंद्रकला मिठाई, आज़मगढ़ का सफ़ेद गाजर का हलवा, वाराणसी की लौंगलता, बरेली की सिंवइयां, अमेठी का समोसा, बस्ती का सिरका और सिद्धार्थनगर की रामकटोरी जैसी पारंपरिक मिठाइयां और व्यंजन केवल भोजन नहीं, बल्कि स्थानीय विरासत, कौशल और आर्थिकी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन्हें गुणवत्ता, पहचान और बाज़ार उपलब्ध कराकर प्रदेश की सांस्कृतिक ताकत को आर्थिक शक्ति में बदला जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि ओडीओसी को ओडीओपी की तर्ज पर जमीनी स्तर पर लागू किया जाए, ताकि पारंपरिक कारीगरों, हलवाइयों और छोटे उद्यमियों को स्थायी आजीविका के अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और सभी उत्पादों को खाद सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रमाणित किया जाए। मुख्यमंत्री ने जीआई टैगिंग को प्रोत्साहित करने, स्थानीय व्यंजनों की पहचान सुरक्षित रखने और युवाओं व आधुनिक उपभोक्ताओं की पसंद के अनुसार स्वाद-आधारित विविधता विकसित करने पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओसी के तहत प्रत्येक जनपद के विशिष्ट व्यंजनों की पहचान कर उन्हें क्यूज़ीन क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाए। पारंपरिक व्यंजनों की ब्रांडिंग, टेक्नोलॉजी, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए निर्माताओं और विक्रेताओं को प्रोत्साहन दिया जाए। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि योजनांतर्गत उत्पादों के संरक्षण, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा, खाद्य विविधता का विस्तार, रोजगार सृजन, वैल्यू-चेन और मार्केट लिंकेज को मजबूत करना तथा पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के साथ एकीकरण शामिल है। इसके साथ ही निर्यात क्षमता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं के लिए उत्पादों को तैयार करने की रणनीति पर भी काम किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि ब्रांडिंग रणनीति के तहत ओडीओसी लोगो के साथ जनपद-विशिष्ट रंग, प्रतीक और शैली जोड़ी जाएगी। हर व्यंजन के साथ उसकी संस्कृति, इतिहास और विधि को दर्शाने वाली प्रोडक्ट स्टोरी और पहचान टैग शामिल होगा। बैठक में यह भी बताया गया कि पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। फूड-ग्रेड, इको-फ्रेंडली और सुरक्षित पैकेजिंग के साथ शेल्फ-लाइफ बढ़ाने की उन्नत तकनीकों का उपयोग होगा। क्यूआर कोड, न्यूट्रिशन लेबल, बारकोड और ड्यूल-लैंग्वेज लेबलिंग के माध्यम से ट्रेसबिलिटी और उपभोक्ता जानकारी सुनिश्चित की जाएगी। क्षेत्रीय और त्योहार-थीम आधारित पैकेजिंग डिजाइनों को भी विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ओडीओसी योजना 'वोकल फॉर लोकल' को नई गति देगी और उत्तर प्रदेश की पाक कला की विरासत को वैश्विक फूड मैप पर स्थापित करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि यह पहल केवल योजना न रहकर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार सृजन का मजबूत माध्यम बने, इसके लिए सभी आवश्यक प्रयास किये जाएं।

26 जनवरी को रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में होंगे विशेष आयोजन

रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्यभर में चार चरणों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसके तहत द्वितीय चरण में कार्यक्रमों का आयोजन 19 से 26 जनवरी 2026 तक किया जाएगा। गणतंत्र दिवस के दिन रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। साथ ही राज्य के सभी जिला मुख्यालयों, ब्लॉक मुख्यालयों, ग्राम पंचायतों तथा स्कूल-कॉलेजों में ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के पश्चात बड़े पैमाने पर सामूहिक वंदे मातरम् गायन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, स्थानीय अधिकारी, प्रमुख हस्तियां और नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। द्वितीय चरण में 19 से 26 जनवरी तक राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एवं गाइड की सहभागिता के साथ वंदे मातरम् से संबंधित संगीतमय प्रस्तुतियाँ, विशेष सभाएँ, निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, रंगोली, चित्रकला एवं प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी। राज्य पुलिस बैंड द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम् एवं देशभक्ति गीतों पर आधारित प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। सार्वजनिक एवं निजी सहभागिता के तहत प्रदेश में वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहां नागरिक अपनी आवाज में वंदे मातरम् का गायन रिकॉर्ड कर अभियान के पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर वंदे मातरम् की पूर्व रिकॉर्डेड धुन के साथ गायन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण का आयोजन 7 से 14 नवंबर 2025 को सफलतापूर्वक किया जा चुका है। वही तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 को हर घर तिरंगा अभियान के साथ संचालित किया जाएगा एवं चतुर्थ चरण का आयोजन 1 से 7 नवंबर 2026 को किया जाएगा। भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह आयोजन ग्राम पंचायत, जनपद, जिला एवं राज्य स्तर पर व्यापक जनभागीदारी के साथ कार्यक्रमों को संपन्न कराया जाएगा, जिसका उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रगीत के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है।

मुख्यमंत्री से IFS प्रशिक्षु अधिकारियों की शिष्टाचार भेंट

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मंत्रालय महानदी भवन में भारतीय वन सेवा के 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों को भारतीय वन सेवा में नियुक्ति होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। प्रशिक्षु अधिकारियों में छत्तीसगढ़ के दुर्ग एवं दंतेवाड़ा जिले के दो अधिकारी भी शामिल हैं। प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। यहां न सिर्फ समृद्ध वन्य जीवन है बल्कि वनों से हमारे बहुसंख्यक नागरिकों की आजीविका और सामाजिक जीवन जुड़ा हुआ है। इसीलिए छत्तीसगढ़ में भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए इस स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाएं।   मुख्यमंत्री साय को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव ने बताया कि भारतीय वन सेवा के 06 अधिकारी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून से 16 सप्ताह की ऑन जॉब ट्रेनिंग पर छत्तीसगढ़ भेजा गया है। इन्हें राज्य के वन मंडल बस्तर, रायगढ़, धमतरी, राजनांदगांव, कटघोरा और जशपुर के अंतर्गत पदस्थ किया गया है। यह प्रशिक्षण 05 जनवरी से 25 अप्रैल 2026 तक चलेगा, जिसके अंतर्गत अधिकारी वन सेवा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को जमीनी स्तर पर जान पाएंगे। इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, विधायक भैयालाल राजवाड़े, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रीमती शालिनी रैना, मुख्य वन संरक्षक रायपुर मणि वासगन एस तथा प्रशिक्षु अधिकारी अक्षय जैन, कुणाल मिश्रा,  एम जालिंदर यादव, पारख सारदा,  प्रीति यादव, यशस्वी मौर्या उपस्थित थे।  

योगी सरकार की पहल से रफ्तार पकड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना

योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में 94 नई इकाइयां स्थापित ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश, 2,586 युवाओं को मिला रोजगार 10 लाख रुपये तक बैंक ऋण और ब्याज अनुदान से बढ़ा आत्मनिर्भरता का मार्ग लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की प्राथमिकताओं में ग्रामीण रोजगार और ग्रामीण औद्योगिकीकरण सबसे ऊपर है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना वित्तीय वर्ष 2025–26 में उल्लेखनीय गति से आगे बढ़ रही है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक योजना के अंतर्गत 94 इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिसके तहत ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश संभव हुआ है। इसके माध्यम से 2,586 युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। यह आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष में योजना ने मजबूत प्रगति दर्ज की है और शेष अवधि में लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। योग्य बेरोजगार युवाओं को 10 लाख रुपये तक का ऋण इस योजना ने गांवों में उद्योग स्थापित कराकर स्थानीय युवाओं को उनके ही घर के पास रोजगार उपलब्ध कराने का रास्ता खोला है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षित एवं तकनीकी योग्य बेरोजगार युवक-युवतियों को 10 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। योगी सरकार ने उद्यमियों के लिए ब्याज सब्सिडी की बड़ी सुविधा दी है, जिसमें सामान्य वर्ग के उद्यमियों के लिए 4% से ऊपर का ब्याज सरकार देती है, जबकि आरक्षित वर्ग के उद्यमियों का पूरा ब्याज सरकार वहन करती है। जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से चयन योजना में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष एवं महिला उद्यमी पात्र हैं। चयन प्रक्रिया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से की जाती है। सामान्य वर्ग को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत, जबकि आरक्षित वर्ग को 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान देना होता है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में और अधिक युवाओं को इस योजना से जोड़कर स्व-रोजगार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। योगी सरकार का ग्रामीण विकास मॉडल योगी सरकार ग्रामीण विकास को केवल सड़क और बिजली तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि ग्रामीण उद्योगों का नेटवर्क विकसित कर रही है। पारंपरिक कारीगरों व हस्तशिल्पकारों को सशक्त बना रही है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है और साथ ही, स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार सृजन हो रहा है। सरकार का मानना है कि “गांव मजबूत होंगे तो प्रदेश मजबूत होगा।” इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने किया स्टार्ट-अप प्रदर्शनी का शुभारंभ

नवाचारों को प्रोत्साहन हमारा संकल्प, युवा ही देश को देते हैं नई दिशा 156 स्टार्ट-अप को 2.5 करोड़ प्रोत्साहन राशि और 21 स्टार्ट-अप को 8.17 करोड़ ऋण राशि की अंतरित एमएसएमई और 4 प्रमुख संस्थाओं के बीच हुए लांग टर्म एमओयू रवीन्द्र भवन में हुई मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट-2026 भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राचीन काल से ही हम व्यापार-व्यवसाय की भरपूर समझ रखते हैं, क्योंकि पुरूषार्थ, उद्यमिता, नवाचार और व्यापार हम भारतीयों के संस्कारों में ही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नए-नए अवसरों का प्रदेश है। युवा ही देश को नई सोच और नई दिशा की ओर ले जाते हैं। इनके नवाचार ही विकास का आधार बनते हैं। इसलिए नवाचारों को प्रोत्साहन देना, हमने हमारा संकल्प निहित किया है। भारत में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई है, जो देश की जीडीपी में 30 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं। कुल निर्यात में एमएसएमई की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत तक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में स्टार्ट-अप का योगदान अतुलनीय है। भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इको-सिस्टम बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हमारा देश, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के सबके सहयोग से भारत जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित 2 दिवसीय मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट-2026 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिट के दौरान 156 स्टार्ट-अप को 2.5 करोड़ रूपए से अधिक की प्रोत्साहन राशि तथा मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में 21 स्टार्ट-अप को 8.17 करोड़ रूपए से अधिक की ऋण राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न सफल और विकासशील स्टार्ट-अप के फाउंडर्स और इंक्यूबेटर्स को सम्मानित किया। समिट में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के साथ फेडरेशन ऑफ इंडिया एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन के साथ पंचवर्षीय एमओयू सहित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कार्वी स्टार्ट-अप लैब्स और स्टार्ट-अप मिडिल ईस्ट के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी हस्ताक्षरित किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में स्थापित सफल स्टार्ट-अप पर केंद्रित एक बुकलेट का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से 4 स्टार्ट-अप के फाउंडर्स को मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना एवं म.प्र. स्टार्ट-अप नीति तथा कार्यान्वयन योजना-2025 में क्रमश: बैंक ऋण और निवेश सहायता राशि प्रदान की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि युवा साथियों के स्टार्ट-अप के प्रोत्साहन के लिए यह 2 दिवसीय आयोजन अद्भुत है। अपनी क्षमता और योग्यता के बल पर भारत ने आज नया मुकाम हासिल किया है। इसमें सभी कुशाग्र बुद्धिवाले युवाओं का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि देश के महान वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चंद्र बोस ने सबसे पहले दुनिया को बताया कि पौधों में प्राण होते हैं। उन्होंने कैस्ट्रोग्राफी के माध्यम से पौधों जीवन से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा उठाया था। वैज्ञानिक डॉ. बोस वर्ष 1895 में कलकत्ता में तरंगों की खोज का डेमोस्ट्रेशन किया था। इसके बाद मार्कोनी को इसी खोज के लिए नोबेल पुरस्कार मिला, यद्यपि यह खोज डॉ. बोस ने ही की थी। अंतर सिर्फ इतना था कि उनके स्टार्ट-अप को हमारे लोगों ने पहचान नहीं दिलाई। उनके कार्य को दो-दो वैज्ञानिकों ने अनुसरण किया। लेकिन अब प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में देशभर में सभी तरह के स्टार्ट-अप और रिसर्च को प्रोत्साहन मिल रहा है। वर्ष 2022 में इंदौर से इस कार्य के लिए एक पोर्टल लॉन्च किया गया। नवाचारों और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां मध्यप्रदेश में लागू हैं। आज इंदौर में ही 2200 से अधिक स्टार्ट-अप काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के युवा निरंतर नवाचार कर रहे हैं। राज्य सरकार जीवन की मूलभूल समस्याओं का समाधान करने के साथ सभी प्रकार के नवाचारों को भी प्रोत्साहित कर रही है। भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए केन्द्र सरकार के साथ राज्य सरकारों भी लगातार प्रयास कर रही हैं। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं के दम पर हम बहुत जल्द दुनिया की तीसरी और फिर नंबर-1 अर्थव्यवस्था बनकर रहेंगे।  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि युवा शक्ति अपनी क्षमताओं के बल पर दुनिया को बदल सकती है। स्वामी विवेकानंद ऐसे संत थे, जिन्होंने युवा शक्ति को पहचाना और उन्हें राष्ट्र के विकास के लिए प्रेरित किया। बाल्यकाल में मिलने वाली हार-जीत से हमें भविष्य की सीख मिलती है। राज्य सरकार ने स्टार्ट-अप पॉलिसी 2025में नवाचारों को प्रोत्साहित करने की शुरुआत की है। नए विचारों के साथ स्टार्ट-अप शुरू करने वाले उद्यमियों को इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से 10 हजार रुपए की प्राथमिक सहायता प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार हर वक्त नए स्टार्ट-अप और नए आइडियाज के साथ खड़ी है। प्रदेश में कृषि, उद्यमिता, नगरीय निकायों में नवाचारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश अब नवाचारों और अवसरों का प्रदेश बन चुका है। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए प्रेरणा थे। आज जेन-जी और जेन-अल्फा की दुनिया के युवा स्टार्ट-अप स्थापित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पहली बार 16 जनवरी 2016 को भारत में स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया की शुरुआत की। अब राज्य सरकार की नीतियां ऐसी हैं कि स्टार्ट-अप की सभी समस्याएं इनमें समाहित हो गई हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप को विभिन्न प्रकार के अनुदान दिए जाने के साथ कंपनी स्थापना में भी सहयोग प्रदान किया जाता है। प्रदेश में अब एक दिन में कोई कंपनी शुरू हो सकती है, जबकि जर्मनी जैसे विकसित देश में इसके लिए 22 दिन लगते हैं। देश के युवाओं की कल्पना को आकार देने का काम स्टार्ट-अप ने किया है। युवाओं के सपनों को नए पंख लग गए हैं और वे जॉब क्रिएटर बन चुके हैं। भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इको-सिस्टम है। स्टार्ट-अप ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊड़ान दी है। हमारी समस्याओं को हमारे बीच के नवाचारी उद्यमी ही समझ सकते हैं। युवा उद्यमी समाज की समास्याओं को पहचानें और स्टार्ट-अप के माध्यम से उन्हें सॉल्व करें। तकनीक से स्वयं को हमेशा अपडेट रखें। असफलता से कभी न डरें। राज्य सरकार युवाओं के साथ … Read more

10 युवाओं को ‘विवेकानंद यूथ अवॉर्ड’ से सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री

लखनऊ,  योगी सरकार स्वामी विवेकानंद की जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ पर वृहद आयोजन करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हॉल में होने वाले मुख्य आयोजन में राज्य स्तरीय विवेकानंद यूथ अवॉर्ड (2024-25) प्रदान करेंगे। इस दौरान खेल व युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खेलो इंडिया खेलो योजना के अंतर्गत 21 करोड़ रुपये से निर्मित 5 मल्टीपर्पज हॉल (लखनऊ में दो, हरदोई, कन्नौज व सहारनपुर में एक-एक) का लोकार्पण भी करेंगे। मुख्यमंत्री यहीं से 26 करोड़ से निर्मित होने वाले तीन ग्रामीण स्टेडियम (सुल्तानपुर, कासगंज व फतेहपुर) का शिलान्यास भी करेंगे।    युवा कल्याण विभाग के उपनिदेशक अजात शत्रु शाही ने बताया कि व्यक्तिगत श्रेणी में चयनित 10 युवाओं व मंगल दल श्रेणी में चयनित युवक व महिला मंगल दल के सदस्यों को राज्य स्तरीय विवेकानंद यूथ अवार्ड प्रदान किया जाएगा। व्यक्तिगत श्रेणी में चयनित युवाओं को 50 हजार रुपये, स्मृति चिह्न, अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। वहीं युवक व महिला मंगल दल को राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार स्वरूप एक-एक लाख रुपये, ट्रॉफी, मोमेंटो, शॉल, प्रमाण पत्र आदि प्रदान किया जाएगा। लखनऊ में होने वाले विवेकानंद यूथ अवार्ड वितरण कार्यक्रम में मंगल दल के 1500 से अधिक युवा सम्मिलित होंगे। व्यक्तिगत श्रेणी में इन युवाओं को राज्य स्तर पर सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री 1-    अभिनीत कुमार मौर्य- हरदोई 2-    महिका खन्ना- शाहजहांपुर 3-    देवानंद राय- देवरिया 4-    अभिषेक पांडेय- मऊ 5-    संजना सिंह- बरेली 6-    प्रणव द्विवेदी- गोरखपुर 7-    साक्षी झा- गाजियाबाद 8-    सचिन गौरी वर्मा- गोरखपुर 9-    अवधेश कुमार- लखनऊ 10-    शिखा सहलोद- गाजियाबाद चयनित युवक मंगल दल 1-    संतकबीर नगर- सेमरियावां ग्राम पंचायत- रिजवान मुनीर (अध्यक्ष) 2-    बिजनौर- शहदपुरगुलाल ग्राम पंचायत- घनश्याम सिंह (अध्य़क्ष) 3-    शाहजहांपुर- चौधेरा ग्राम पंचायत- इंद्रजीत लोधी (अध्यक्ष) महिला मंगल दल 1-    बिजनौर- नहटौर विकास खंड- बसेड़ाखुर्द ग्राम पंचायत- ज्योति (अध्यक्ष) 2-    फिरोजाबाद- अरांव विकास खंड- अकबरपुर सराय ग्राम पंचायत- शिवानी चंदेल (अध्यक्ष) 3-    संतकबीर नगर- सांथा विकास खंड- पसाई ग्राम पंचायत- सुमन कुमारी (अध्यक्ष)