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गरियाबंद: मुख्यमंत्री 7 जनवरी को नवनिर्मित श्रीरामजानकी मंदिर में धर्मध्वजा स्थापित करेंगे

गरियाबंद : मुख्यमंत्री सिरकट्टी में 7 जनवरी को करेंगे नवनिर्मित श्रीरामजानकी मंदिर में धर्मध्वजा की स्थापना गरियाबंद चतुर्भुज सिरकट्टी पावन धाम स्थित नव निर्मित भव्य श्रीरामजानकी मंदिर में 51 कुंडीय श्रीराम चरित मानस महायज्ञ का भव्य आयोजन 6 से 12 जनवरी तक किया जा रहा है। इसी क्रम में 7 जनवरी  को दोपहर 12 बजे धर्मध्वजा स्थापना एवं कलश पूजन का पावन कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर नवनिर्मित मंदिर में धर्मध्वज की स्थापना करेंगे। कलेक्टर बीएस उईके, जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर, पुलिस अधीक्षक वेद व्रत सिरमौर ,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र चंद्राकर, एसडीपीओ सुनिशा सिंहा जी ने कार्यक्रम स्थल का  निरीक्षण किया इस दौरान पार्किंग व्यवस्था, हेलीपेड निर्माण स्थल निरीक्षण एवं चयन, मेले की तैयारी,सुरक्षात्मक दृष्टि से दुकानों का आबंटन, आगंतुकों के आवाजाही का नियंत्रण, भंडारा, गौशाला सहित मंचीय स्थल का जायजा लिया । यह मंदिर हजारों श्रद्धालुओं के दान दाताओं के फल स्वरूप 10 सालों में निर्मित हुई है जो कि अयोध्या के राम मंदिर के तर्ज पर बनाया गया है जिसमें लगभग 9 करोड़ रु की लागत से राजस्थान के कारीगर तैयार किए है। इस धार्मिक अनुष्ठान में अनेक आमंत्रित संत-महापुरुषों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी, जिनमें संत 108 रामगोपाल दास जी महाराज (देवरघटा, शिवरीनारायण), पूज्य संत 108 महंत सरजू शरण महाराज (राघवेन्द्र आश्रम, अयोध्या), पूज्य संत रामनारायण शरण महाराज (अयोध्या) तथा पूज्य संत उदयनाथ बाबा महाराज (कांडशर आश्रम, देवभोग) प्रमुख हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री अरुण साव करेंगे। वहीं आत्मीय अतिथि के रूप में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, महासमुंद लोकसभा सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक रोहित साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। आयोजनकर्ता एवं आश्रम के मुख्य पीठाधीश महामण्डलेश्वर संत गोवर्धन शरण व्यास, महंत सिरकट्टी आश्रम कुटेना एवं आश्रम परिवार हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से इस पावन अवसर पर सपरिवार उपस्थित होकर धर्मलाभ ले सकते है।

सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह- 2026 के लिए तय किया गया ‘जीरो फेटेलिटी’ का लक्ष्य

परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज और सूचना विभाग समन्वित रूप से चलाएगा प्रदेशव्यापी अभियान नो हेलमेट, नो फ्यूल का चलेगा प्रदेशव्यापी अभियान, दोपहिया वाहन चालकों को किया जाएगा जागरूक लखनऊ- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्य करने के लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह को ‘जीरो फेटेलिटी माह’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह- 2026, 01 जनवरी से शुरू होकर 31 जनवरी तक चलेगा । इस दौरान प्रदेश का परिवहन, पुलिस, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज और सूचना विभाग सहित सभी संबंधित स्टेकहोल्डर विभागों को समन्वित रूप से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस क्रम में प्रदेश के सभी जनपदों में 25 दिसंबर से जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सड़क सुरक्षा माह के दौरान चलाये जाने वाले विशेष अभियानों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। प्रदेश में 363 हाई रिस्क कॉरिडोर चिह्नित, होगी सख्त प्रवर्तन कार्रवाई सीएम के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह में जीरो फेटेलिटी के लक्ष्य को पाने के उद्देश्य से प्रदेश के परिवहन एवं पुलिस विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस क्रम में प्रदेश में 363 हाई रिस्क कॉरिडोर चिह्नित किये हैं, जहां सख्त प्रवर्तन अभियान चलाये जाएंगे। इसके साथ ही पहले से चल रही जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत चुने गये 20 जनपदों में 233 क्रिटिकल पुलिस थाना क्षेत्रों का चयन किया गया है। जिनमें विशेष अभियान चलाकर दुर्घटनाओं पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने, ओवरस्पीडिंग, लेन उल्लंघन, गलत दिशा में वाहन चलाने, हेलमेट व सीट-बेल्ट न पहनने, रिफ्लेक्टर टेप, फॉग लाइट, बिना परमिट व बिना फिटनेस संचालित वाहनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने के दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। स्वास्थ्य विभाग कर रहा इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल में सुधार   जनवरी माह में “नो हेलमेट, नो फ्यूल” का प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जाएगा, ताकि दोपहिया चालकों में हेलमेट पहनने की आदत विकसित की जा सके। रोड एक्सीडेंट से होने वाली मौतों की संख्या में कमी लायी जा सके। लोक निर्माण विभाग व अन्य रोड ओनिंग एजेंसियों को चिह्नित किये गये 1484 ब्लैक स्पॉट्स पर अल्पकालिक सुधार कार्यों जैसे- रोड मार्किंग, साइनेज और क्रैश बैरियर लगाने का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल सुधारने, एएलएस एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने तथा ट्रॉमा केयर सेंटरों में गैप, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर की कमी दूर करने के जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। शिक्षा और सूचना विभाग चलायेगा जागरूकता अभियान पंचायती राज विभाग, प्रत्येक ग्राम सभा में सड़क सुरक्षा पर बैठकें आयोजित करेगा, जो ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ने वाली सड़कों पर दुर्घटनाओं में कमी लाने के जरूरी इंतजाम को सुनिश्चित करेगीं। तो वहीं शिक्षा विभाग स्कूलों में चित्रकला, भाषण और नाटक प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करेगा, जबकि सूचना विभाग परिवहन विभाग के साथ मिलकर यातायात नियमों के व्यापक प्रचार-प्रसार का कार्य को अंजाम देगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन समन्वित प्रयासों से विशेषकर राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह, जनवरी 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जाए और सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो फेटेलिटी’ के सपने को साकार किया जा सके। साथ ही इस अभियान को आगे भी लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आईटी सेक्टर को मिला नया विस्तार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख आईटी और डिजिटल हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई नीतियों और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था का असर अब धरातल स्टार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रदेश में आईटी कंपनियों का लगातार विस्तार हो रहा है, जो रोजगार सृजन निवेश और तकनीकी नवाचार के नए अवसर पैदा कर रही हैं। इनमें से सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 400 आईटी कंपनियां पंजीकृत हैं।    उत्तर प्रदेश में संचालित आईटी कंपनियों में स्टार्टअप्स, मध्यम उद्यम और वैश्विक स्तर की बड़ी कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटीईएस, क्लाउड सर्विसेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सेवाओं पर कार्य कर रही हैं। आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा देने विज़न से आईटी कंपनियों का उत्तर प्रदेश की ओर रुझान बढ़ रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े आईटी गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुके हैं। जो डेटा सेंटर और नई तकनीकों पर आधारित सेवाएं प्रदान करने का काम कर रही हैं। इसके अलावा कानपुर और वाराणसी जैसे शहर भी तेजी से उभरते डिजिटल केंद्र बन रहे हैं, जिससे प्रदेश के संतुलित विकास को मजबूती मिल रही है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 400 इकाइयां पंजीकृत हैं। ये इकाइयां आईटी निर्यात में अहम भूमिका निभा रही हैं। आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2026  तक प्रदेश में एसटीपीआई पंजीकृत इकाइयों की संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। उत्तर प्रदेश में माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, एचसीएल, विप्रो, इंफोसिस, पेटीएम और एडोब जैसी प्रमुख कंपनियां बड़े स्तर पर संचालन कर रही हैं। इसके साथ ही लगभग 90 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) स्थापित किए जा चुके हैं, जहां रिसर्च और उच्च स्तरीय सेवाओं पर काम हो रहा है। इन कंपनियों की मौजूदगी से प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर पर काम करने का अवसर मिल रहा है। सरकार की स्किल डेवलपमेंट योजनाओं के अंतर्गत युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

लोक प्रशासन में उत्कृष्टता को मान्यता: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 की घोषणा

जिलों और विभागों से प्राप्त 312 प्रविष्टियों में से 10 नवाचारों का चयन — तकनीक, परिणाम और नागरिक-केंद्रित सेवा पर विशेष जोर छत्तीसगढ़ के श्रेष्ठ प्रशासनिक नवाचारों को मिलेगा सम्मान “नागरिकों की बेहतर सेवा के लिए शासन का निरंतर विकसित होना आवश्यक है” : मुख्यमंत्री साय रायपुर, छत्तीसगढ़ में सुशासन की दिशा में हो रहे परिवर्तन और प्रशासनिक संस्कृति के सुदृढ़ होते स्वरूप को रेखांकित करते हुए आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 की घोषणा की । यह पुरस्कार राज्य के विभिन्न जिलों और विभागों द्वारा लागू किए गए उन नवाचारों को सम्मानित करने हेतु दिए जाएंगे, जिन्होंने शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा स्थापित ये पुरस्कार इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि राज्य शासन सार्वजनिक प्रशासन के केंद्र में नवाचार, ठोस परिणाम और नागरिक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि शासन की गुणवत्ता को केवल मंशा या व्यय के आधार पर नहीं, बल्कि उसके वास्तविक, मापनीय प्रभाव, विस्तार-योग्यता और जमीनी समस्याओं के समाधान की क्षमता के आधार पर आँका जाना चाहिए। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार इस नई प्रशासनिक सोच को संस्थागत रूप देने का प्रयास हैं, जहाँ तकनीक, संवेदनशीलता और संस्थागत सुधार मिलकर सार्वजनिक सेवा को सशक्त बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि निरंतर हो रहे नवाचारों से साकार होता है। परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर मनाए जा रहे सुशासन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में जनहित को केंद्र में रखकर विकसित किए गए उत्कृष्ट प्रशासनिक नवाचारों को सम्मानित करने के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के विजेताओं की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शासन में नवाचार कोई विकल्प नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक प्रणालियों को नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप गति, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के साथ निरंतर स्वयं को ढालना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन नवाचारों के सम्मान की आज घोषणा की गई  है, वे केवल व्यक्तिगत उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि भविष्य-उन्मुख शासन के लिए अनुकरणीय और दोहराने योग्य मॉडल हैं। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के लिए एक सुदृढ़ और बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसका उद्देश्य समावेशिता और गुणवत्ता के बीच संतुलन स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कुल 312 नवाचार प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें 275 जिलों से और 37 राज्य स्तरीय विभागों से थे। यह व्यापक सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि शासन के प्रत्येक स्तर पर समस्या-समाधान की नवाचारी सोच विकसित हो रही है। यह प्रवृत्ति समाधान-केंद्रित प्रशासन की ओर हो रहे सांस्कृतिक बदलाव को भी दर्शाती है। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार हेतु दो-स्तरीय चयन प्रक्रिया के अंतर्गत पहले चरण में 55 नवाचारों को शॉर्टलिस्ट किया गया। इसके बाद 13 नवाचारों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया और अंततः 10 विजेता नवाचारों का चयन किया गया, जिनमें जिला और विभागीय श्रेणियों से समान संख्या में प्रविष्टियाँ शामिल रहीं। मूल्यांकन के दौरान परिणामों को 50 अंक, विस्तार-योग्यता को 40 अंक और नवाचार को 10 अंक का भार दिया गया, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि सम्मान केवल विचारों पर नहीं, बल्कि वास्तविक और प्रभावशाली परिणामों पर आधारित हो। जिला श्रेणी के विजेताओं में दंतेवाड़ा जिले की “ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण” पहल एक प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आई। इस नवाचार के माध्यम से मैनुअल और कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर ब्लॉकचेन आधारित छेड़छाड़-रोधी प्रणाली लागू की गई, जिससे भूमि अभिलेख प्राप्त करने का समय हफ्तों से घटाकर कुछ ही मिनटों में संभव हो सका। इस पहल से दस्तावेज़ी धोखाधड़ी पूरी तरह समाप्त हुई और सेवा प्रदाय में अभूतपूर्व तेजी आई, जिसने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन के लिए एक नया मानक स्थापित किया। जशपुर जिले की “निर्माण जशपुर” पहल ने यह दर्शाया कि एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग किस प्रकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बना सकती है। 16 विभागों की 7,300 से अधिक परियोजनाओं और 444 ग्राम पंचायतों को कवर करने वाली इस प्रणाली ने रियल-टाइम निगरानी, जियो-टैग्ड सत्यापन और GIS आधारित योजना को संभव बनाया, जिससे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और विलंब में उल्लेखनीय कमी आई। मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी में लागू संवर्धित टेक-होम राशन (A-THR) नवाचार ने गंभीर कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से विकसित इस पोषण-घन आहार के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों में 77.5 प्रतिशत सुधार दर दर्ज की गई। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि साक्ष्य-आधारित पोषण हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। गरियाबंद जिले की “हाथी ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप” ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने में तकनीक की भूमिका को सशक्त रूप से सामने रखा। AI आधारित ट्रैकिंग और रियल-टाइम अलर्ट व्यवस्था के माध्यम से मानव हताहतों की संख्या लगभग शून्य तक लाई गई, साथ ही फसल क्षति और मुआवजा बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई। राज्य के बाहर भी अपनाई जा चुकी यह पहल संघर्ष-संवेदनशील शासन का एक प्रभावी मॉडल बन चुकी है। नारायणपुर जिले का “इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल” आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में डेटा एकीकरण की उपयोगिता को दर्शाता है। रियल-टाइम, जियो-स्पेशियल और पूर्वानुमान आधारित इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 100 से अधिक नियोजित अभियानों का संचालन संभव हुआ, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में परिस्थितिजन्य जागरूकता को मजबूती मिली। विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग का “विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)” डेटा-आधारित शिक्षा शासन का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। यह AI सक्षम प्लेटफॉर्म 56,000 से अधिक विद्यालयों, 2.83 लाख शिक्षकों और 57.5 लाख विद्यार्थियों की निगरानी करता है, जिससे ड्रॉपआउट की प्रारंभिक पहचान, संसाधनों का बेहतर उपयोग और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना संभव हो सका है। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की “वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम” ने व्यवसाय सुगमता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। 16 विभागों की 136 सेवाओं को एकीकृत करते हुए इस प्रणाली ने अनुमोदन, प्रोत्साहन, शिकायत निवारण और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाया, जिससे विलंब कम हुआ और पारदर्शिता के साथ निवेशकों का विश्वास बढ़ा। वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग की समग्र ई-गवर्नेंस सुधार पहल ने राजस्व संग्रह और अनुपालन … Read more

इतिहास रचेगा पुलिस का सबसे बड़ा पासिंग-आउट परेड, शपथ दिलाएंगे गृहमंत्री अमित शाह : मुख्यमंत्री

पंचकूला हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित यवनिका पार्क से हरियाणा पुलिस के बैच संख्या-93 के जवानों द्वारा आयोजित अटल जनसेवा को समर्पित दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती की स्मृति में आयोजित यह दौड़ एकता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रेरणास्पद प्रतीक है। उन्होंने बताया कि आज सांय केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भारतीय पुलिस के इतिहास के सबसे बड़े पुलिस पासिंग-आउट बैच को सामूहिक शपथ दिलवाएंगे। इस ऐतिहासिक बैच में कुल 5,061 जवान शामिल हैं, जिनमें 4,191 पुरुष एवं 870 महिला जवान हैं। इस प्रकार, इस बैच में 20.75 प्रतिशत महिला भागीदारी सुनिश्चित हुई है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में हरियाणा पुलिस में महिलाओं की भागीदारी मात्र 3 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर 10 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। राज्य सरकार ने इसे आगामी वर्षों में 25 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यह भी कहा कि प्रदेश में नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान में हरियाणा पुलिस की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। नवप्रशिक्षित जवान इस अभियान के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे।  उन्होंने कहा कि यह दौड़ 39 सप्ताह के कठोर प्रशिक्षण की सफल पूर्णता का प्रमाण है तथा पुलिसिंग और कर्मयोगी पाठ्यक्रम के उन मूल्यों को व्यवहार में उतारने की शुरुआत है, जिन्हें जवानों ने प्रशिक्षण के दौरान आत्मसात किया है। इस दौड़ में ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए 4,252 जवान तथा शहरी पृष्ठभूमि के 809 जवान एक साथ कदमताल कर रहे हैं, जो पूरे हरियाणा की सामाजिक एकता और समरसता का सशक्त संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बैच की एक और उल्लेखनीय विशेषता यह है कि लगभग 85 प्रतिशत जवान स्नातक एवं स्नातकोत्तर हैं। इनमें से 2,390 जवान (50 प्रतिशत से अधिक) 26 वर्ष से कम आयु के हैं, जो हरियाणा पुलिस में नई ऊर्जा, आधुनिक दृष्टिकोण और कार्यकुशलता का संचार करेंगे। उन्होंने कहा कि यह दौड़ केवल एक शारीरिक गतिविधि नहीं, बल्कि योग, पी.टी. एवं आत्मरक्षा जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से विकसित आत्मबल और अनुशासन का परिणाम है। उल्लेखनीय है कि इन जवानों ने 9 अप्रैल 2025 को उत्साहपूर्वक 1,356 यूनिट रक्तदान कर समाजसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कालका विधायक शक्ति रानी शर्मा, पूर्व विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता, जिला अध्यक्ष अजय मित्तल, पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह, हरियाणा पुलिस अकादमी के निदेशक डॉ अरशिंदर सिंह चावला, उपयुक्त सतपाल शर्मा, पुलिस महानिरीक्षक पंकज नैन, भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष, बंतो कटारिया, ओम प्रकाश देवीनगर, दीपक शर्मा सहित अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत मिला ऋण, 3000 के लक्ष्य की ओर बढ़ा उद्योग विभाग

कानपुर,  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का 'जॉब क्रिएटर' बनाने का मिशन अब कानपुर में हकीकत बनकर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना ने जिले के युवाओं की सोच को एक नई उड़ान दी है, जिससे कानपुर नगर अब उद्यम का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। जिले में अब तक 1879 युवाओं को उनके नए स्टार्टअप और बिजनेस को विस्तार देने के लिए ऋण वितरित किया जा चुका है। 3000 का लक्ष्य जल्द होगा प्राप्त कानपुर के लिए शासन द्वारा 3000 लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उपायुक्त उद्योग, अंजनीश प्रताप सिंह के अनुसार, इस लक्ष्य को पाने के लिए विभाग और बैंक मिलकर काम कर रहे हैं। वर्तमान में 1879 लाभार्थियों को सीधे आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ा गया है, जिससे न केवल जिले की बेरोजगारी कम हो रही है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। स्वरोजगार से संवर रही तकदीर योजना का लाभ लेकर शहर के युवा अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। इन्ही में से एक हैं अनुभव शुक्ला, जिन्होंने मशरूम उत्पादन जैसे आधुनिक कृषि क्षेत्र को अपना करियर चुना। विभाग ने उनकी मार्जिन मनी भी जारी कर दी है। वहीं, नारी शक्ति का उदाहरण पेश करते हुए प्रभनूर कौर ने बेकरी मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में कदम रखा है। आयुषी चतुर्वेदी ने भी ब्यूटी पार्लर खोलकर स्वरोजगार की राह चुनी है। शहर के खान-पान के शौक को व्यापार बनाने में अनुपम शुक्ला और मोहम्मद अशफाक भी पीछे नहीं हैं। अनुपम ने फास्ट फूड सेवा की शुरुआत की है, तो वहीं मोहम्मद अशफाक ने अपना खुद का फूड रेस्टोरेंट शुरू कर दिया है। उपायुक्त उद्योग ने विश्वास जताया कि यह योजना जल्द ही कानपुर के एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को एक नई और मजबूत पहचान दिलाएगी।

किसानों को बड़ी सौगात: डांगावास में राज्य स्तरीय सम्मेलन, सीएम व शिवराज सिंह चौहान रहेंगे मौजूद

नागौर राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर आज नागौर जिले की मेड़ता सिटी के डांगावास में राज्य स्तरीय उन्नत खेती–समृद्ध किसान सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति में संपन्न होगा। सम्मेलन में प्रदेशभर से 25 हजार से अधिक किसान शामिल हो रहे हैं, जिनमें नागौर जिले के करीब 12 हजार किसान भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर किसानों को बड़ी राहत देने वाली कई महत्वपूर्ण सौगातें दी जाएंगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति दी जाएगी, जबकि राज्य परियोजनाओं के अंतर्गत किसानों को 1 हजार 200 करोड़ रुपये की राशि का हस्तांतरण किया जाएगा। इसके अलावा कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं के तहत 31 हजार 600 किसानों को 200 करोड़ रुपये, कृषि आदान अनुदान योजना के अंतर्गत 5 लाख किसानों को 700 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 18 हजार 500 लाभार्थियों को 100 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना के अंतर्गत 4.50 लाख पशुपालकों को 200 करोड़ रुपये की राशि का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण किया जाएगा। नागौर जिले के लिए विशेष रूप से 351 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया जाएगा। कार्यक्रम में कृषि, ग्रामीण विकास, आपदा प्रबंधन एवं सहायता मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। यह राज्य स्तरीय सम्मेलन राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कृषि अनुदान, पशुपालक सहायता और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभों का वितरण किया जाएगा। राष्ट्रीय किसान दिवस पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर मनाया जाता है, जो किसानों के अधिकारों और हितों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले नेता थे। इस आयोजन से प्रदेश के किसानों में नई उम्मीद जगेगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलने की अपेक्षा है।

विधानसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर साधा निशाना

  कहा: वंदे मातरम पर किया गया समझौता धार्मिक भावना का सम्मान नहीं, बल्कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का सबसे खतरनाक प्रयोग था, जिसने अलगाववाद को जन्म दिया मोहम्मद अली जिन्ना राष्ट्रगीत को मुस्लिम लीग की राजनीति का औजार बनाया और जानबूझकर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस और मोहम्मद अली जिन्ना को सीधे तौर पर भारत के सांस्कृतिक विभाजन और अंततः देश के बंटवारे का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम पर किया गया समझौता किसी धार्मिक भावना का सम्मान नहीं, बल्कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का पहला, सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक प्रयोग था, जिसने अलगाववाद को जन्म दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक मोहम्मद अली जिन्ना कांग्रेस में थे, तब तक वंदे मातरम कोई विवाद नहीं था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इस राष्ट्रगीत को मुस्लिम लीग की राजनीति का औजार बनाया और जानबूझकर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया। कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्र की बजाय वोटबैंक के साथ रहा सीएम योगी ने कहा कि 15 अक्टूबर 1937 को लखनऊ से जिन्ना ने वंदे मातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया, जबकि उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। इसके तुरंत बाद 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू द्वारा सुभाष चंद्र बोस को लिखा गया पत्र, जिसमें कहा गया कि यह मुद्दा मुसलमानों को “आशंकित” कर रहा है, कांग्रेस के तुष्टीकरण की स्पष्ट स्वीकारोक्ति है। उन्होंने कहा कि 26 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस ने वंदे मातरम के कुछ अंश हटाने का निर्णय लिया, जिसे उस समय “सद्भाव” कहा गया, लेकिन वास्तव में यह राष्ट्र चेतना की बलि थी। देशभक्तों ने इसका विरोध किया, प्रभात फेरियां निकाली गईं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्र के साथ खड़ा होने की बजाय वोटबैंक के साथ खड़ा हो गया। वंदे मातरम का विरोध पूरी तरह राजनीतिक मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 मार्च 1938 को जिन्ना ने मांग की कि वंदे मातरम पूरा बदला जाए, लेकिन कांग्रेस ने प्रतिकार नहीं किया। परिणामस्वरूप मुस्लिम लीग का साहस बढ़ता गया, अलगाववाद की धार तेज हुई और सांस्कृतिक प्रतीकों पर पहला समझौता हुआ, जिसने अंततः भारत के दुर्भाग्यपूर्ण विभाजन की नींव रखी। सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि वंदे मातरम का विरोध न तो धार्मिक था और न ही आस्था से जुड़ा, बल्कि यह पूरी तरह राजनीतिक था। उन्होंने याद दिलाया कि 1896 से 1922 तक कांग्रेस के हर अधिवेशन में वंदे मातरम गाया जाता रहा। न कोई फतवा था, न कोई धार्मिक विवाद। खिलाफत आंदोलन तक भी यह गीत हर मंच से गूंजता था। मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेता इसके समर्थक थे। समस्या मजहब को नहीं, बल्कि कुछ लोगों की राजनीति को थी। कांग्रेस का राष्ट्रीय आत्मसमर्पण मुख्यमंत्री ने बताया कि 1923 में कांग्रेस अधिवेशन में मोहम्मद अली जौहर ने पहली बार वंदे मातरम का विरोध किया। यह विरोध धार्मिक नहीं, बल्कि खिलाफत की राजनीति से प्रेरित था। जब विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने पूरा गीत गाया तो जौहर मंच छोड़कर चले गए। मंच छोड़ना उनका व्यक्तिगत निर्णय था, लेकिन कांग्रेस का झुकना उसकी नीति बन गई। सीएम योगी ने कहा कि इसके बाद कांग्रेस ने राष्ट्रगीत के पक्ष में मजबूती से खड़े होने की बजाय समितियां बनाईं और अंततः 1937 में फैसला हुआ कि केवल दो छंद गाए जाएंगे और वह भी अनिवार्य नहीं होंगे। इसे उन्होंने राष्ट्रीय आत्मसमर्पण बताया। वंदे मातरम केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा जिस खंडित वंदे मातरम को मान्यता दी गई, वह भी कांग्रेस की इसी तुष्टीकरण नीति का परिणाम था। राष्ट्र ने गीत को अपनाया, लेकिन कांग्रेस पहले ही उसे काट चुकी थी। सीएम योगी ने कहा कि वंदे मातरम केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। 1905 के बंग-भंग आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक, यह प्रभात फेरियों, सत्याग्रहों और क्रांतिकारियों की अंतिम सांस तक का मंत्र रहा। रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे भारत की आत्मा, अरविंद घोष ने इसे मंत्र कहा। मैडम भीकाजी कामा द्वारा फहराए गए पहले विदेशी तिरंगे पर वंदे मातरम लिखा था, मदनलाल ढींगरा के अंतिम शब्द भी वंदे मातरम थे। राष्ट्रगीत के बाद आज राष्ट्रभाव को कमजोर करने की कोशिश मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम के साथ किया गया समझौता केवल गीत का अपमान नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय दिशा पर किया गया क्रूर प्रहार था। उन्होंने चेतावनी दी कि आज भी कुछ राजनीतिक शक्तियां उसी विभाजनकारी सोच को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही हैं। तब राष्ट्रगीत को निशाना बनाया गया था, आज राष्ट्रभाव को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम का अर्थ केवल मातृभूमि को प्रणाम करना नहीं, बल्कि उसकी रक्षा, समृद्धि और गौरव का संकल्प लेना है। तुष्टीकरण की ऐतिहासिक भूलों से सीख लेकर ही श्रेष्ठ, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने सदन से आह्वान किया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के ‘आनंद मठ’ का अध्ययन कर राष्ट्र चेतना को समझा जाए और वंदे मातरम के 150 वर्ष को भविष्य के संकल्प के रूप में अपनाया जाए।

मेहंदीपुर बालाजी में CM रेखा गुप्ता की विशेष पूजा-अर्चना, परिवार भी साथ

दौसा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शनिवार को अपने पति मनीष गुप्ता के साथ दौसा जिले के प्रसिद्ध सिद्धपीठ आस्थाधाम मेहंदीपुर बालाजी पहुंचीं। मंदिर पहुंचने पर सिद्धपीठ के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री का यह दौरा धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक भावना से जुड़ा रहा।   गर्भगृह के समक्ष विशेष पूजा-अर्चना मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंदिर के गर्भगृह के सामने बैठकर पति मनीष गुप्ता के साथ विशेष पूजा-अर्चना की। महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज के सान्निध्य में पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। पूजा के दौरान मुख्यमंत्री ने बालाजी महाराज से देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।   दर्शन के बाद मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया दर्शन के पश्चात मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मेहंदीपुर बालाजी में उनकी गहरी आस्था है और यहां आकर उन्हें आत्मिक शांति का अनुभव होता है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला मेहंदीपुर बालाजी दर्शन है। इससे पहले वह खाटू श्याम और सालासर बालाजी में भी दर्शन कर चुकी हैं।   भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने किया स्वागत मुख्यमंत्री के मंदिर आगमन पर भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर गोठवाल, करौली जिलाध्यक्ष गोरधन सिंह जादौन, जिला महामंत्री लेखपाल कसाना, विपिन जैन, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रतन तिवाड़ी, खंडार विधायक जितेंद्र गोठवाल, भाजपा एससी मोर्चा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सहित अन्य पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे। जिला अध्यक्ष को लेकर बना असहज माहौल मुख्यमंत्री के स्वागत के दौरान दौसा भाजपा जिला अध्यक्ष लक्ष्मी रेला को मंदिर परिसर में असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। लक्ष्मी रेला अपनी कार्यकारिणी के साथ मंदिर परिसर में मौजूद थीं, जहां मानपुर डीएसपी धर्मराज चौधरी ने उन्हें बाहर भेज दिया। जिला अध्यक्ष लक्ष्मी रेला ने कहा कि उनके पास अनुमति थी, इसके बावजूद उन्हें बाहर निकाला गया। वहीं डीएसपी धर्मराज चौधरी ने बताया कि उन्होंने जिला अध्यक्ष को समझाकर मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए बाहर भेजा था और किसी प्रकार की अनुचित कार्रवाई नहीं की गई।   सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था रही सख्त मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर मेहंदीपुर बालाजी मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रोटोकॉल ड्यूटी में जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार, एसपी सागर राणा, करौली एसपी लोकेश सोनवाल, एडीएम अरविंद शर्मा, सिकराय एसडीएम नवनीत कुमार सहित पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी गई।

झारखंड की ऐतिहासिक जीत: सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी चैंपियन टीम का CM हेमंत सोरेन ने किया अभिनंदन

रांची मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आज सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी- 2025 का खिताब जीतकर इतिहास रचने वाली वाली झारखंड क्रिकेट टीम के सदस्यों ने मुलाकात की। इस अवसर पर टीम के कप्तान और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ईशान किशन ने पूरी टीम के साथ विजेता ट्रॉफी मुख्यमंत्री को सांकेतिक रूप से हैंडओवर कर जीत का जश्न मनाया। CM ने सभी खिलाड़ियों को शॉल ओढ़ाकर किया सम्मानित मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक जीत के लिए सभी खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ्स  तथा जेएससीए को बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में मंत्री सुदिव्य कुमार, विधायक कल्पना सोरेन और मुख्य सचिव अविनाश कुमार की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने सभी खिलाड़ियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। वहीं, टीम के कप्तान ईशान किशन समेत सभी खिलाड़ियों ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के अपने प्रदर्शन और अनुभवों को मुख्यमंत्री के साथ साझा किया। यह पूरे राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि इस दौरान सीएम हेमंत ने कहा कि सैयद मुश्ताक अली टी- ट्वेंटी क्रिकेट टूर्नामेंट जीतकर झारखंड ने डोमेस्टिक क्रिकेट में एक नया कीर्तिमान गढ़ा है। यह पूरे राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि और गौरवान्वित करने वाला पल है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में इस तरह की जीत हासिल होने से राज्य में खेलों को बढ़ावा मिलता है। आज क्रिकेट के साथ हॉकी और तीरंदाजी जैसे कई खेलों में झारखंड के खिलाड़ी राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर देश और राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग किया जाएगा मुख्यमंत्री ने क्रिकेटरों से संवाद के क्रम में राज्य में खेल वातावरण बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेलों का एक ऐसा इकोसिस्टम बने जिसमें राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे आने का मौका मिले। इसके लिए स्कूल और कॉलेज स्तर पर खेलों को जोड़े जाने की मजबूत शुरुआत होनी चाहिए ताकि विभिन्न खेलों के होनहार खिलाड़ी को बेहतर प्लेटफार्म मिले ताकि वे अपने प्रदर्शन को और भी निखार सकें। इस दिशा में राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग किया जाएगा। झारखंड की टीम बेहतर एवं शानदार प्रदर्शन करे मुख्यमंत्री ने जेएससीए से कहा कि खिलाड़ियों को आगे ले जाने में खेल एसोसिएशन की की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में विदेशों में खेलने और प्रशिक्षण देने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की पहल होनी चाहिए। इससे खिलाड़ियों को अलग-अलग माहौल तथा वातावरण में खेलने का अनुभव प्राप्त होगा, जिससे उनके प्रदर्शन में और भी निखार आएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले अन्य प्रतियोगिताओं में झारखंड की टीम बेहतर एवं शानदार प्रदर्शन करे, इसके लिए टीम को मजबूत बनाने का प्रयास लगातार जारी रहना चाहिए। हमें झारखंड को एक ऐसा राज्य बनाना है, जो… मुख्यमंत्री ने कहा कि आज क्रिकेट, हॉकी और फुटबॉल जैसे कई लोकप्रिय खेलों के साथ परंपरागत खेलों का भी दौर नए रूप में लौट रहा है। ऐसे परंपरागत खेलों की कई प्रतियोगिताएं आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हो रही हैं। ऐसे में अगर कोई अगर खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहता है तो उसके लिए कई दरवाजे खुले हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने में सरकार हर तरह का सहयोग करने के लिए हमेशा तैयार है। हमें झारखंड को एक ऐसा राज्य बनाना है, जो खेलों की दुनिया में पूरे देश में अपनी मजबूत तथा दमदार दावेदारी पेश कर सके। मुख्यमंत्री ने झारखंड में खेल प्रतियोगिताएं नियमित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर राज्य स्तर पर विभिन्न खेलों के लिए प्रतियोगिताएं नियमित रूप से होती रहनी चाहिए। इस पहल से खिलाड़ियों को ना सिर्फ अपना खेल कौशल दिखाने का मौका मिलता है, बल्कि कई प्रतिभावान खिलाड़ी सामने आते हैं जो अपने प्रदर्शन से राज्य और देश को नाम रौशन करते हैं।