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किसानों को बड़ी सौगात: डांगावास में राज्य स्तरीय सम्मेलन, सीएम व शिवराज सिंह चौहान रहेंगे मौजूद

नागौर राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर आज नागौर जिले की मेड़ता सिटी के डांगावास में राज्य स्तरीय उन्नत खेती–समृद्ध किसान सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति में संपन्न होगा। सम्मेलन में प्रदेशभर से 25 हजार से अधिक किसान शामिल हो रहे हैं, जिनमें नागौर जिले के करीब 12 हजार किसान भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर किसानों को बड़ी राहत देने वाली कई महत्वपूर्ण सौगातें दी जाएंगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति दी जाएगी, जबकि राज्य परियोजनाओं के अंतर्गत किसानों को 1 हजार 200 करोड़ रुपये की राशि का हस्तांतरण किया जाएगा। इसके अलावा कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं के तहत 31 हजार 600 किसानों को 200 करोड़ रुपये, कृषि आदान अनुदान योजना के अंतर्गत 5 लाख किसानों को 700 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 18 हजार 500 लाभार्थियों को 100 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना के अंतर्गत 4.50 लाख पशुपालकों को 200 करोड़ रुपये की राशि का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण किया जाएगा। नागौर जिले के लिए विशेष रूप से 351 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया जाएगा। कार्यक्रम में कृषि, ग्रामीण विकास, आपदा प्रबंधन एवं सहायता मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। यह राज्य स्तरीय सम्मेलन राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कृषि अनुदान, पशुपालक सहायता और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभों का वितरण किया जाएगा। राष्ट्रीय किसान दिवस पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर मनाया जाता है, जो किसानों के अधिकारों और हितों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले नेता थे। इस आयोजन से प्रदेश के किसानों में नई उम्मीद जगेगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलने की अपेक्षा है।

विधानसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर साधा निशाना

  कहा: वंदे मातरम पर किया गया समझौता धार्मिक भावना का सम्मान नहीं, बल्कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का सबसे खतरनाक प्रयोग था, जिसने अलगाववाद को जन्म दिया मोहम्मद अली जिन्ना राष्ट्रगीत को मुस्लिम लीग की राजनीति का औजार बनाया और जानबूझकर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस और मोहम्मद अली जिन्ना को सीधे तौर पर भारत के सांस्कृतिक विभाजन और अंततः देश के बंटवारे का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम पर किया गया समझौता किसी धार्मिक भावना का सम्मान नहीं, बल्कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का पहला, सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक प्रयोग था, जिसने अलगाववाद को जन्म दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक मोहम्मद अली जिन्ना कांग्रेस में थे, तब तक वंदे मातरम कोई विवाद नहीं था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इस राष्ट्रगीत को मुस्लिम लीग की राजनीति का औजार बनाया और जानबूझकर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया। कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्र की बजाय वोटबैंक के साथ रहा सीएम योगी ने कहा कि 15 अक्टूबर 1937 को लखनऊ से जिन्ना ने वंदे मातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया, जबकि उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। इसके तुरंत बाद 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू द्वारा सुभाष चंद्र बोस को लिखा गया पत्र, जिसमें कहा गया कि यह मुद्दा मुसलमानों को “आशंकित” कर रहा है, कांग्रेस के तुष्टीकरण की स्पष्ट स्वीकारोक्ति है। उन्होंने कहा कि 26 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस ने वंदे मातरम के कुछ अंश हटाने का निर्णय लिया, जिसे उस समय “सद्भाव” कहा गया, लेकिन वास्तव में यह राष्ट्र चेतना की बलि थी। देशभक्तों ने इसका विरोध किया, प्रभात फेरियां निकाली गईं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्र के साथ खड़ा होने की बजाय वोटबैंक के साथ खड़ा हो गया। वंदे मातरम का विरोध पूरी तरह राजनीतिक मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 मार्च 1938 को जिन्ना ने मांग की कि वंदे मातरम पूरा बदला जाए, लेकिन कांग्रेस ने प्रतिकार नहीं किया। परिणामस्वरूप मुस्लिम लीग का साहस बढ़ता गया, अलगाववाद की धार तेज हुई और सांस्कृतिक प्रतीकों पर पहला समझौता हुआ, जिसने अंततः भारत के दुर्भाग्यपूर्ण विभाजन की नींव रखी। सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि वंदे मातरम का विरोध न तो धार्मिक था और न ही आस्था से जुड़ा, बल्कि यह पूरी तरह राजनीतिक था। उन्होंने याद दिलाया कि 1896 से 1922 तक कांग्रेस के हर अधिवेशन में वंदे मातरम गाया जाता रहा। न कोई फतवा था, न कोई धार्मिक विवाद। खिलाफत आंदोलन तक भी यह गीत हर मंच से गूंजता था। मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेता इसके समर्थक थे। समस्या मजहब को नहीं, बल्कि कुछ लोगों की राजनीति को थी। कांग्रेस का राष्ट्रीय आत्मसमर्पण मुख्यमंत्री ने बताया कि 1923 में कांग्रेस अधिवेशन में मोहम्मद अली जौहर ने पहली बार वंदे मातरम का विरोध किया। यह विरोध धार्मिक नहीं, बल्कि खिलाफत की राजनीति से प्रेरित था। जब विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने पूरा गीत गाया तो जौहर मंच छोड़कर चले गए। मंच छोड़ना उनका व्यक्तिगत निर्णय था, लेकिन कांग्रेस का झुकना उसकी नीति बन गई। सीएम योगी ने कहा कि इसके बाद कांग्रेस ने राष्ट्रगीत के पक्ष में मजबूती से खड़े होने की बजाय समितियां बनाईं और अंततः 1937 में फैसला हुआ कि केवल दो छंद गाए जाएंगे और वह भी अनिवार्य नहीं होंगे। इसे उन्होंने राष्ट्रीय आत्मसमर्पण बताया। वंदे मातरम केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा जिस खंडित वंदे मातरम को मान्यता दी गई, वह भी कांग्रेस की इसी तुष्टीकरण नीति का परिणाम था। राष्ट्र ने गीत को अपनाया, लेकिन कांग्रेस पहले ही उसे काट चुकी थी। सीएम योगी ने कहा कि वंदे मातरम केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। 1905 के बंग-भंग आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक, यह प्रभात फेरियों, सत्याग्रहों और क्रांतिकारियों की अंतिम सांस तक का मंत्र रहा। रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे भारत की आत्मा, अरविंद घोष ने इसे मंत्र कहा। मैडम भीकाजी कामा द्वारा फहराए गए पहले विदेशी तिरंगे पर वंदे मातरम लिखा था, मदनलाल ढींगरा के अंतिम शब्द भी वंदे मातरम थे। राष्ट्रगीत के बाद आज राष्ट्रभाव को कमजोर करने की कोशिश मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम के साथ किया गया समझौता केवल गीत का अपमान नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय दिशा पर किया गया क्रूर प्रहार था। उन्होंने चेतावनी दी कि आज भी कुछ राजनीतिक शक्तियां उसी विभाजनकारी सोच को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही हैं। तब राष्ट्रगीत को निशाना बनाया गया था, आज राष्ट्रभाव को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम का अर्थ केवल मातृभूमि को प्रणाम करना नहीं, बल्कि उसकी रक्षा, समृद्धि और गौरव का संकल्प लेना है। तुष्टीकरण की ऐतिहासिक भूलों से सीख लेकर ही श्रेष्ठ, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने सदन से आह्वान किया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के ‘आनंद मठ’ का अध्ययन कर राष्ट्र चेतना को समझा जाए और वंदे मातरम के 150 वर्ष को भविष्य के संकल्प के रूप में अपनाया जाए।

मेहंदीपुर बालाजी में CM रेखा गुप्ता की विशेष पूजा-अर्चना, परिवार भी साथ

दौसा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शनिवार को अपने पति मनीष गुप्ता के साथ दौसा जिले के प्रसिद्ध सिद्धपीठ आस्थाधाम मेहंदीपुर बालाजी पहुंचीं। मंदिर पहुंचने पर सिद्धपीठ के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री का यह दौरा धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक भावना से जुड़ा रहा।   गर्भगृह के समक्ष विशेष पूजा-अर्चना मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंदिर के गर्भगृह के सामने बैठकर पति मनीष गुप्ता के साथ विशेष पूजा-अर्चना की। महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज के सान्निध्य में पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। पूजा के दौरान मुख्यमंत्री ने बालाजी महाराज से देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।   दर्शन के बाद मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया दर्शन के पश्चात मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मेहंदीपुर बालाजी में उनकी गहरी आस्था है और यहां आकर उन्हें आत्मिक शांति का अनुभव होता है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला मेहंदीपुर बालाजी दर्शन है। इससे पहले वह खाटू श्याम और सालासर बालाजी में भी दर्शन कर चुकी हैं।   भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने किया स्वागत मुख्यमंत्री के मंदिर आगमन पर भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर गोठवाल, करौली जिलाध्यक्ष गोरधन सिंह जादौन, जिला महामंत्री लेखपाल कसाना, विपिन जैन, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रतन तिवाड़ी, खंडार विधायक जितेंद्र गोठवाल, भाजपा एससी मोर्चा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सहित अन्य पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे। जिला अध्यक्ष को लेकर बना असहज माहौल मुख्यमंत्री के स्वागत के दौरान दौसा भाजपा जिला अध्यक्ष लक्ष्मी रेला को मंदिर परिसर में असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। लक्ष्मी रेला अपनी कार्यकारिणी के साथ मंदिर परिसर में मौजूद थीं, जहां मानपुर डीएसपी धर्मराज चौधरी ने उन्हें बाहर भेज दिया। जिला अध्यक्ष लक्ष्मी रेला ने कहा कि उनके पास अनुमति थी, इसके बावजूद उन्हें बाहर निकाला गया। वहीं डीएसपी धर्मराज चौधरी ने बताया कि उन्होंने जिला अध्यक्ष को समझाकर मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए बाहर भेजा था और किसी प्रकार की अनुचित कार्रवाई नहीं की गई।   सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था रही सख्त मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर मेहंदीपुर बालाजी मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रोटोकॉल ड्यूटी में जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार, एसपी सागर राणा, करौली एसपी लोकेश सोनवाल, एडीएम अरविंद शर्मा, सिकराय एसडीएम नवनीत कुमार सहित पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी गई।

झारखंड की ऐतिहासिक जीत: सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी चैंपियन टीम का CM हेमंत सोरेन ने किया अभिनंदन

रांची मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आज सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी- 2025 का खिताब जीतकर इतिहास रचने वाली वाली झारखंड क्रिकेट टीम के सदस्यों ने मुलाकात की। इस अवसर पर टीम के कप्तान और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ईशान किशन ने पूरी टीम के साथ विजेता ट्रॉफी मुख्यमंत्री को सांकेतिक रूप से हैंडओवर कर जीत का जश्न मनाया। CM ने सभी खिलाड़ियों को शॉल ओढ़ाकर किया सम्मानित मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक जीत के लिए सभी खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ्स  तथा जेएससीए को बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में मंत्री सुदिव्य कुमार, विधायक कल्पना सोरेन और मुख्य सचिव अविनाश कुमार की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने सभी खिलाड़ियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। वहीं, टीम के कप्तान ईशान किशन समेत सभी खिलाड़ियों ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के अपने प्रदर्शन और अनुभवों को मुख्यमंत्री के साथ साझा किया। यह पूरे राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि इस दौरान सीएम हेमंत ने कहा कि सैयद मुश्ताक अली टी- ट्वेंटी क्रिकेट टूर्नामेंट जीतकर झारखंड ने डोमेस्टिक क्रिकेट में एक नया कीर्तिमान गढ़ा है। यह पूरे राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि और गौरवान्वित करने वाला पल है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में इस तरह की जीत हासिल होने से राज्य में खेलों को बढ़ावा मिलता है। आज क्रिकेट के साथ हॉकी और तीरंदाजी जैसे कई खेलों में झारखंड के खिलाड़ी राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर देश और राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग किया जाएगा मुख्यमंत्री ने क्रिकेटरों से संवाद के क्रम में राज्य में खेल वातावरण बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेलों का एक ऐसा इकोसिस्टम बने जिसमें राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे आने का मौका मिले। इसके लिए स्कूल और कॉलेज स्तर पर खेलों को जोड़े जाने की मजबूत शुरुआत होनी चाहिए ताकि विभिन्न खेलों के होनहार खिलाड़ी को बेहतर प्लेटफार्म मिले ताकि वे अपने प्रदर्शन को और भी निखार सकें। इस दिशा में राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग किया जाएगा। झारखंड की टीम बेहतर एवं शानदार प्रदर्शन करे मुख्यमंत्री ने जेएससीए से कहा कि खिलाड़ियों को आगे ले जाने में खेल एसोसिएशन की की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में विदेशों में खेलने और प्रशिक्षण देने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की पहल होनी चाहिए। इससे खिलाड़ियों को अलग-अलग माहौल तथा वातावरण में खेलने का अनुभव प्राप्त होगा, जिससे उनके प्रदर्शन में और भी निखार आएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले अन्य प्रतियोगिताओं में झारखंड की टीम बेहतर एवं शानदार प्रदर्शन करे, इसके लिए टीम को मजबूत बनाने का प्रयास लगातार जारी रहना चाहिए। हमें झारखंड को एक ऐसा राज्य बनाना है, जो… मुख्यमंत्री ने कहा कि आज क्रिकेट, हॉकी और फुटबॉल जैसे कई लोकप्रिय खेलों के साथ परंपरागत खेलों का भी दौर नए रूप में लौट रहा है। ऐसे परंपरागत खेलों की कई प्रतियोगिताएं आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हो रही हैं। ऐसे में अगर कोई अगर खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहता है तो उसके लिए कई दरवाजे खुले हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने में सरकार हर तरह का सहयोग करने के लिए हमेशा तैयार है। हमें झारखंड को एक ऐसा राज्य बनाना है, जो खेलों की दुनिया में पूरे देश में अपनी मजबूत तथा दमदार दावेदारी पेश कर सके। मुख्यमंत्री ने झारखंड में खेल प्रतियोगिताएं नियमित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर राज्य स्तर पर विभिन्न खेलों के लिए प्रतियोगिताएं नियमित रूप से होती रहनी चाहिए। इस पहल से खिलाड़ियों को ना सिर्फ अपना खेल कौशल दिखाने का मौका मिलता है, बल्कि कई प्रतिभावान खिलाड़ी सामने आते हैं जो अपने प्रदर्शन से राज्य और देश को नाम रौशन करते हैं।  

परम् पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती पर मानव सेवा का महाअभियान — रायपुर में 5 दिवसीय निःशुल्क मेगा हेल्थ कैम्प प्रारंभ

सेवा, समरसता और स्वास्थ्य का जीवंत संगम : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परम् पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर में मानव सेवा, सामाजिक समरसता और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में 18 से 22 दिसंबर तक आयोजित 5 दिवसीय निःशुल्क मेगा हेल्थ कैम्प 2025 का भव्य शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए अमन, चैन और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि यह 5 दिवसीय निःशुल्क मेगा हेल्थ कैम्प हजारों लोगों के लिए स्वास्थ्य संजीवनी सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने गठन के रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है और इन 25 वर्षों में स्वास्थ्य सहित सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित कर रही है। वहीं राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गंभीर बीमारियों के उपचार हेतु ₹25 लाख तक की सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि “हेल्थ इज वेल्थ” केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन को बचाने और संवारने का संकल्प है। मुख्यमंत्री ने विधायक श्री राजेश मूणत एवं उनकी पूरी टीम को इस विशाल आयोजन के लिए बधाई दी और कैम्प परिसर में विभिन्न जांच स्टालों का अवलोकन भी किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा कि यह आयोजन मात्र एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय करुणा की सशक्त अभिव्यक्ति है। बाबा गुरु घासीदास जी के “सत्य, अहिंसा और समानता” के संदेश से प्रेरित यह महाअभियान समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने का अनुकरणीय प्रयास है। उन्होंने बताया कि 100 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों की सहभागिता से यह कैम्प केवल प्राथमिक जांच तक सीमित नहीं, बल्कि अंतिम निदान एवं उपचार तक का समग्र समाधान प्रदान कर रहा है। डॉ. सिंह ने आयोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्था और व्यापक प्रभाव की सराहना की। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती पर आयोजित यह स्वास्थ्य महाकुम्भ समाज के हर वर्ग के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग इस कैम्प में स्वास्थ्य लाभ लेने पहुँचे हैं। जिन रोगियों का उपचार कैम्प में संभव नहीं होगा, उन्हें आयुष्मान कार्ड के माध्यम से संबद्ध संस्थानों में निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम के आयोजक एवं विधायक राजेश मूणत ने बताया कि बाबा गुरु घासीदास जी के अमर संदेश “मनखे-मनखे एक समान” से प्रेरित होकर इस मेगा हेल्थ कैम्प का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि एक ही छत के नीचे स्वास्थ्य की सभी प्रमुख विधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं, जहाँ एक्स-रे, ईको, सोनोग्राफी सहित विविध जांचें एवं आवश्यक दवाइयाँ पूर्णतः निःशुल्क दी जा रही हैं। महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर जांच हेतु अत्याधुनिक मशीनों की विशेष व्यवस्था की गई है। एम्स रायपुर, बालाजी, रावतपुरा, गंगा डायग्नोसिस सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थान और देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सक इस सेवा कार्य में सहभागिता निभा रहे हैं। कार्यक्रम को विधायक किरण सिंह देव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा,  डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, महापौर मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा, एम्स रायपुर के निदेशक डॉ. अशोक जिंदल, वरिष्ठ चिकित्सकगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरु घासीदास जयंती पर दी बधाई, सामाजिक समरसता के संदेश को बताया कालजयी

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक बाबा गुरु घासीदास की 18 दिसम्बर को जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास ने अपने दिव्य उपदेशों और आचरण से समाज को सत्य, अहिंसा, समानता और सामाजिक सद्भाव के मार्ग पर अग्रसर किया. उनका अमर संदेश “मनखे-मनखे एक समान” केवल एक विचार नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाला ऐसा जीवन-दर्शन है, जो भेदभाव रहित, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की मजबूत नींव रखता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास ने छत्तीसगढ़ की धरती पर सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागरण की सुदृढ़ आधारशिला रखी. उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, असमानताओं और अंधविश्वासों के विरुद्ध चेतना जगाते हुए नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की और जनमानस को आत्मसम्मान एवं मानवीय गरिमा का बोध कराया. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाबा का जीवन-दर्शन करुणा, सहिष्णुता, प्रेम, सत्यनिष्ठा और परस्पर सम्मान जैसे मानवीय गुणों के विकास का मार्गदर्शक है. उनके विचार और आदर्श समय की कसौटी पर खरे उतरते हुए आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और वर्तमान समाज के लिए प्रेरणा का सशक्त स्रोत बने हुए हैं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे बाबा गुरु घासीदास के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा सामाजिक समरसता, शांति और सौहार्द के साथ एक समृद्ध एवं समावेशी छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं.

मुख्यमंत्री से सतनाम पंथ के पदाधिकारियों ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में विधायक श्री सम्पत अग्रवाल के नेतृत्व में सतनाम पंथ के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को 28 दिसम्बर को परम् पूज्य गुरुघासी दास बाबा की जयंती महोत्सव के अवसर पर महासमुन्द जिले के ग्राम साजापाली में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सतनाम पंथ के पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए आमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया तथा पूज्य बाबा गुरुघासी दास के सामाजिक और आध्यात्मिक संदेशों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। इस अवसर पर श्री लखनमुनि महाराज, श्री अभय घृतलहरे सहित सतनाम पंथ के अन्य प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

दूध उत्पादन सुधार पर फोकस: सीएम ने किया पटना डेयरी प्रोजेक्ट का निरीक्षण

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना डेयरी प्रोजेक्ट, सुधा फुलवारीशरीफ का निरीक्षण किया। इस बीच अधिकारियों को कई आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने प्रोडक्शन हॉल, आइसक्रीम प्लांट, दही कोल्ड रूम सहित विभिन्न यूनिटों का जायजा लिया व उत्पादों की गुणवत्ता एवं क्षमता से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की। बाद में कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित समीक्षा बैठक में कॉम्फेड के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक ने कॉम्फेड की वर्तमान कार्यप्रणाली, आगामी पांच वर्षों की योजना, दुग्ध समितियों, प्रोक्यूरमेंट सिस्टम, इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार और नए उत्पादों के लॉन्च से जुड़े बिंदुओं की प्रस्तुति दी। सीएम ने बताया कि राज्य में 21 हजार से अधिक ग्राम स्तरीय दुग्ध सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जिनसे 7.5 लाख पशुपालक जुड़े हैं, जिनमें लगभग 25% महिलाएं शामिल हैं। ये समितियां प्रतिदिन औसतन 22 लाख किलोग्राम और अधिकतम 30 लाख किलोग्राम दूध का संकलन करती हैं। कॉम्फेड की वर्तमान प्रसंस्करण क्षमता 54 लाख लीटर प्रतिदिन है और इसे और बढ़ाने की योजना है। 'राज्य में दूध उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई' बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2008 से लागू कृषि रोड मैप ने कृषि व इससे जुड़ी गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार किया है। इसकी बदौलत राज्य में दूध उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि डेयरी की उत्पादन इकाइयों, प्रोक्यूरमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर और दुग्ध समितियों का विस्तार तेज किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग जुड़ें, उनकी आमदनी बढ़े और रोजगार के नए अवसर तैयार हों। सीएम ने कहा कि कर्मचारियों के लिए आवास व्यवस्था विकसित करने की भी आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और पशुपालकों की समृद्धि के लिए सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। सुधा ब्रांड के नए उत्पाद बाजार में उपलब्ध कराए जा रहे हैं और यह ब्रांड पूरे देश में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कॉम्फेड की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति वर्ष 1983 में ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम के तहत गठित कॉम्फेड वर्तमान में राज्य के 31 जिलों में 8 दुग्ध संघों के माध्यम से कार्यरत है। 37 हजार से अधिक खुदरा विक्रय केंद्रों और 914 होल-डे-मिल्क बूथ के माध्यम से सुधा दूध और दुग्ध उत्पाद राज्य के लगभग हर प्रखंड व नगर निकाय तक उपलब्ध हैं। टेट्रा पैक दूध की आपूर्ति उत्तरी-पूर्वी राज्यों के साथ भारतीय सेना को भी की जा रही है। साथ ही, दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों में भी सुधा उत्पादों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। मार्च 2025 में कॉम्फेड ने 5 मीट्रिक टन घी अमेरिका और 8 मीट्रिक टन गुलाबजामुन कनाडा निर्यात कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी उपस्थिति दर्ज की है।

मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा में दिए निर्देश

किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच करें सुनिश्चित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लखपति दीदी के समान लखपति बीघा का लक्ष्य रखते हुए एक बीघा से एक लाख रूपए की कमाई करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया जाए। किसानों को बिचौलियों से बचाने और उन्हें बाजार में अपनी उपज का सीधे लाभ दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था हो। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने और अद्यतन तकनीक का इस्तेमाल कर बेहतर उपज लेने के लिए ग्राम स्तर पर सघन गतिविधियां संचालित की जाएं। हर संभाग की नर्सरियों को आदर्श रूप में विकसित किया जाए। नरवाई प्रबंधन के लिए तीन वर्ष की कार्ययोजना विकसित की जाए। साथ ही किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन तकनीक का उपयोग करते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान ये निर्देश दिए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों तथा नवाचारों का प्रस्तुतिकरण किया गया और आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि –     प्रदेश दालो, तिलहन और मक्का उत्पादन में देश में प्रथम तथा खाद्यान्न, अनाज एवं गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है।     उर्वरक वितरण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 38.10 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 21.41 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. वितरित किया गया। वर्ष 2025-26 में 29.77 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 30 नवम्बर तक 19.42 मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. का वितरण हुआ।     प्रधानमंत्री फसल बीमा में वर्ष 2023-24 में 1 करोड़ 77 लाख बीमित कृषकों को 961.68 करोड़ रूपए और वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ 79 लाख बीमित कृषकों को 1275.86 करोड़ रूपए के दावे का भुगतान किया गया।     मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 4,687 करोड़ रूपए, वर्ष 2024-25 में 4,849 करोड़ रूपए और वर्ष 2025-26 में 3,374 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई।     प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना लागू हो चुकी है। इस उपलब्धि के लिए स्कॉच गोल्ड अवार्ड भी प्राप्त हुआ।     मंडी बोर्ड द्वारा एमपी फार्म गेट ऐप से किसान अपने दाम पर, अपने घर, अपने खलिहान और गोदामा से अपनी कृषि उपज बेचने में सक्षम हुआ। इस नवाचार को स्कॉच सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ।     पराली प्रबंधन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 1312, वर्ष 2024-25 में 1757 और वर्ष 2025-26 में 2479 नरवाई कृषि यंत्र वितरित किए गए।     कृषि यंत्रीकरण के अंतर्गत भोपाल और इंदौर में ड्रोन पायलट स्कूल आरंभ हुए।     ई-विकास पोर्टल से उर्वरक वितरण का पायलट प्रोजेक्ट विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में क्रियान्वित किया गया। इसे सम्पूर्ण प्रदेश में लागू करने की योजना है। आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना     प्रदेश के सभी 363 नगरपालिका, नगर पंचायतों में साप्ताहिक जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार लगाए जाएंगे।     पर ड्रॉप मोर क्रॉप – दबाव सिंचाई प्रणाली के तहत वर्ष 2025-26 में 25 हजार, वर्ष 2026-27 में एक लाख और वर्ष 2027-28 में दो लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है।     नरवाई (पराली) प्रबंधन के अंतर्गत पराली जलाने की घटनाओं में वर्ष 2027-28 तक 80 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य रखा है।     आगामी दो वर्षों में सभी मंडियों का हाईटेक बनाया जाएगा।     तिलहन, दलहन फसलों में आत्मनिर्भरता के लिए क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।     कृषि में अनुसंधान कार्ययोजनाओं को प्रोत्साहन देते हुए प्रयोगशाला से खेत की दूरी को कम किया जाएगा। बैठक में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की समीक्षा के दौरान हाईटेक नर्सरी, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कृषकों और उद्यमियों की क्षमता संवर्धन के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के संबंध में जानकारी दी गई।  

मुख्यमंत्री से अखिल विश्व गायत्री परिवार के सदस्यों ने सौजन्य मुलाकात की

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधिमण्डल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमण्डल ने मुख्यमंत्री साय को आगामी 10 दिसंबर से 13 दिसंबर तक जशपुर जिले के अंतर्गत नगर पंचायत बगीचा में आयोजित होने वाले 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में शामिल होने हेतु आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने आमंत्रण के लिए गायत्री परिवार के सदस्यों का धन्यवाद देते हुए आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर भानु यादव, मुक्ता देवी, रीना बरला, मिकलेश यादव एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।