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चिराग पासवान बोले — बिहार में एनडीए की प्रचंड बहुमत से सरकार बनेगी

पटना, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के इस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि एनडीए 160 से अधिक सीट जीतकर सरकार बनाएगा। चिराग पासवान ने कहा कि पहले चरण में हुई दमदार वोटिंग इसी ओर इशारा कर रही है। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए दावा किया है पहले चरण के रुझान साफ तौर पर इशारा कर रहे हैं कि एनडीए सरकार बना रही है। हम अपने सभी उम्मीदवारों से फीडबैक ले रहे हैं और उस आधार पर कह रहे हैं कि एनडीए सरकार बना रही है, इसमें कोई शक नहीं है। चिराग ने दावा किया है कि एनडीए बिहार में 175 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि मेरा यह भी मानना है कि दूसरे चरण के मतदान के बाद अगर हम 2010 के रिकॉर्ड को भी पार कर जाएं, तो भी कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी बिहार के लोगों से प्रेम करते हैं। उनके बार-बार बिहार आने और प्रदेशवासियों को सौगात देने से जनता में डबल इंजन सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। राहुल गांधी के वोट चोरी के बयान पर चिराग पासवान ने कहा कि राहुल गांधी लगातार चुनाव हार रहे हैं, उन्हें हार का अनुभव है। इस अनुभव से ही वह चुनाव हारने से पहले बहाने तैयार कर लेते हैं। इस बार भी एसआईआर का बहाना बनाया, लेकिन जनता ने मतदान कर जवाब दिया है। चिराग ने कहा कि पहले यह लोग ईवीएम को दोष देते थे। अब नया बहाना एसआईआर का लेकर आए हैं, लेकिन यह मुद्दा कुछ साल चलेगा। इसके बाद राहुल गांधी कुछ और बहाना लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि एसआईआर जरूरी था और वोटर लिस्ट से उन लोगों के नाम काटे गए जो अवैध थे। वैध मतदाताओं ने पहले चरण में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। चिराग ने पूछा कि अगर वैध मतदाताओं के वोट काटे जाते तो राजनीतिक दलों की ओर से आपत्ति जताई जाती, लेकिन कोई आपत्ति नहीं जताई गई। इससे साफ है कि एसआईआर के मुद्दे पर राहुल गांधी ने सिर्फ झूठ बोला। तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए चिराग पासवान ने कहा कि तेजस्वी यादव सिर्फ भावी मुख्यमंत्री ही रहेंगे, इससे ज्यादा कुछ नहीं बन पाएंगे। राजद के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराएं। अगर ऐसा हो रहा है तो बिल्कुल गलत है और ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। अगर सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे हैं तो हमें इसकी चिंता उनसे ज्यादा है, क्योंकि हम ईमानदारी और निष्ठा से काम करने वाले लोग हैं। ये तो 90 के दशक में बूथ लूटते थे।  

चिराग पासवान का पलटवार — बोले, हमारी सरकार अपराधियों की नहीं करती रक्षा

पटना, जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या के मामले मं  मोकामा विधानसभा क्षेत्र से जदयू उम्मीदवार अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष इस मामले को बेवजह मुद्दा बना रहा है। अगर हमारी सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही होती, तो कल रात हुई कार्रवाई नहीं होती। मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि हमारी सरकार इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है। जैसा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा कहते हैं, हम न किसी को बचाते हैं और न ही किसी को फंसाते हैं। ऐसे में न्याय प्रक्रिया का हिस्सा है। जो घटना घटी, वह दुखद है। अगर एक भी घटना घटती है, तो यह चिंता का विषय हमारे और हमारी सरकार के लिए है। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच चल रही है और दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पीएम मोदी के दौरे को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री जब भी आते हैं, इससे हमारे गठबंधन को फायदा होता है। उनके दौरे लोगों का उत्साह बढ़ाते हैं और हम पर उनका विश्वास मजबूत करते हैं। वहीं, इस घटना पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जब विपक्ष सत्ता में था, तो किसी भी घटना के आरोपी का ठिकाना मुख्यमंत्री आवास हुआ करता था। नीतीश कुमार के सुशासन में, भले ही आरोप लगे हों और जांच चल रही हो, जदयू के प्रत्याशी होने के बाद भी उनकी गिरफ्तारी हो गई है। अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर तेजस्वी यादव का बयान भी चर्चाओं में रहा है, जिस पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि तेजस्वी अच्छी तरह जानते हैं कि अपराधियों को कौन संरक्षण देता है। 1990 से 2005 तक जंगल राज के दौरान अपराधी मुख्यमंत्री आवास में शरण लेते थे। भ्रष्टाचार, लूट और अपहरण का बोलबाला था और अपराधियों का स्वागत और उन्हें मंत्रियों द्वारा पनाह दी जाती थी। अपराधियों को संरक्षण देना, वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देना, लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाना और गरीबों का शोषण करना-यही उन्होंने किया और अब भी कर रहे हैं। वहीं, भाजपा सांसद धर्मशीला गुप्ता ने अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही सच सामने आएगा, लेकिन विपक्ष बौखला गया है। बिहार में एनडीए की सरकार बनने जा रही है, इसी को लेकर विपक्ष में बौखलाहट है। इसके साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव और लालू यादव पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता जंगलराज को नहीं भूली है।  

चिराग पासवान का हमला: असदुद्दीन ओवैसी मुसलमानों को ‘अपनी प्रॉपर्टी’ समझते हैं

पटना  केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के मुसलमानों पर दिए बयान पर जोरदार पलटवार करते हुए कहा कि वे मुसलमानों को अपनी निजी संपत्ति मानते हैं। वह बिहार में आकर धर्म के आधार पर बांटने की राजनीति और डर पैदा करते हैं। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने संबोधन में कहा कि अगर 3 फीसदी वाला उपमुख्यमंत्री बन सकता है, तो 17 फीसदी वाला मुसलमान समाज से उपमुख्यमंत्री क्यों नहीं बन सकता? उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे अपनी नेतृत्व की क्षमता खुद विकसित करें। ओवैसी के बयान पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि इन लोगों ने मुसलमानों को अपनी निजी संपत्ति समझ लिया है। वे किस अधिकार से कह रहे हैं कि मुसलमानों को किसे वोट देना चाहिए या किसे नहीं देना चाहिए। मतदान करना एक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। लोकतंत्र में ओवैसी किस तरह की मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि आप जीत नहीं सकते, सिर्फ इसलिए कि जब आपके विधायक जीतते हैं, तब भी वे आपको छोड़ देते हैं। चिराग ने कहा कि ओवैसी कब तक मुसलमानों में डर फैलाते रहेंगे? आप कब तक डर की राजनीति करते रहेंगे। मैं मुस्लिम समुदाय से कहना चाहता हूं कि आप कब तक डर की राजनीति से इस्तेमाल होते रहेंगे। इन चीजों से बाहर निकलिए। सत्ता में जिसे लाना है, उसे वोट कीजिए, जवाबदेही तय कीजिए। उन्होंने कहा कि बिहार में राजद की 15 साल की सरकार में मुसलमानों ने जवाबदेही तय की होती तो ये हालात नहीं होते। एनडीए सरकार का जिक्र करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि हमारी सरकार बिना भेदभाव के सभी धर्मों को लाभकारी योजनाएं दे रही है। हम भेद नहीं करते। सरकार की लाभकारी योजनाओं का लाभ मुसलमानों को भी मिल रहा है। लेकिन, ओवैसी की सिर्फ धर्म के नाम पर बांटने की राजनीति प्रदेश के लिए सही नहीं है। वे हमारे देश-प्रदेश को किस कगार पर ले जाना चाह रहे हैं। हमारा मंत्र विकास की बात करता है। मैं खुद बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट की बात करता हूं।

चिराग पासवान ने महागठबंधन की नीतियों पर साधा निशाना, कहा- मुस्लिम वोट का सिर्फ उपयोग

पटना केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने शुक्रवार को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव पर आरोप लगाया कि विपक्ष मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करता है, और उनके वास्तविक प्रतिनिधित्व से हमेशा किनारा करता है। मुस्लिम समाज के प्रतिनिधित्व पर खड़े किए ये सवाल पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पासवान ने कहा, “‘इंडिया' गठबंधन यादवों और सहनी समाज के नाम पर राजनीति कर रहा है, लेकिन मुसलमानों की बात वह केवल वोट के समय करता है। मुसलमानों की जनसंख्या बिहार में लगभग 18 फीसदी है, फिर भी ‘इंडिया' गठबंधन ने किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या किसी प्रमुख पद का उम्मीदवार नहीं बनाया।” उन्होंने कहा, “तेजस्वी यादव, यादव समाज से हैं, जिनकी आबादी करीब 13 फीसदी है, जबकि मुकेश सहनी, साहनी समाज से आते हैं, जिनकी आबादी लगभग 2 फीसदी है। लेकिन 18 फीसदी मुस्लिम आबादी के बावजूद, मुसलमानों को सत्ता की भागीदारी से वंचित रखा गया है। ये लोग सिर्फ मुसलमानों को डराकर और भावनात्मक मुद्दों पर भड़का कर वोट लेना जानते हैं, उन्हें असली प्रतिनिधित्व देने की उनकी नीयत कभी नहीं रही।” VIP प्रमुख मुकेश सहनी पर बोला हमला पासवान ने वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा “सहनी समाज के नाम पर राजनीति करने वाले मुकेश सहनी ने अपने समाज को भुला दिया है। उन्होंने केवल अपने लिए उपमुख्यमंत्री का पद मांगा, समाज के अधिकारों के लिए एक शब्द नहीं कहा। अब वह केवल स्वार्थ की राजनीति कर रहे हैं।” लोजपा (रामविलास) प्रमुख ने कहा कि महागठबंधन जाति और धर्म के आधार पर समाज को बांटने की कोशिश कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार सभी वर्गों के लिए समान रूप से योजनाएं चला रही है। उन्होंने कहा, “2005 में मेरे पिता रामविलास पासवान ने कहा था कि बिहार में मुख्यमंत्री मुस्लिम समाज से बनाया जाना चाहिए, लेकिन तब भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। आज भी मुसलमानों को सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।” चिराग पासवान ने दावा किया कि अब मुसलमान भी समझ चुके हैं कि तेजस्वी यादव और उनके सहयोगी केवल चुनाव के वक्त उन्हें याद करते हैं, शासन और सत्ता में उन्हें कोई जगह नहीं देते। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सभी तबकों के विकास के लिए काम कर रही है, जबकि महागठबंधन समाज को जाति और धर्म के आधार पर विभाजित करने की राजनीति कर रहा है।

राजपूत-यादव को सबसे ज्यादा टिकट, चिराग की पार्टी में महिलाओं की भागीदारी कैसी रही?

पटना चिराग पासवान की पार्टी को एनडीए ने 29 सीट दिए हैं, जिसे चिराग पासवान ने 6 महिला, 13 युवा और 10 अनुभवी लोगों को टिकट दिया है। उन 29 सीटों में 5 राजपूत, 5 यादव,4 पासवान,4 भूमिहार,और एक-एक ब्राह्मण, तेली(वैश्य), पासी, सूढ़ी (वैश्य), रौनियार,कानू, रजवार, धोबी, कुशवाहा, रविदास और मुस्लिम को उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने बिहार के लगभग हर समाज को प्रतिनिधित्व दिया जिसमें सवर्ण, पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को मौका दिया। एनडीए ने अब 243 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक कर दी है। सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी ने और फिर जनता दल यूनाइटेड ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। फिर हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की। अब चिराग पासवान ने अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है। चिराग पासवान ने पहली सूची में 14 प्रत्याशियों के नाम जारी किए थे और फिर दूसरी सूची में 15 उम्मीदवारों के नाम हैं। 

नीतीश का सीधा वार चिराग पर, JDU की पहली लिस्ट में उठा सियासी खेल; NDA में खलबली?

पटना बिहार की राजनीति में आज नई हलचल देखी गई जब नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) ने विधानसभा चुनाव 2025 के लिए पहली 57 उम्मीदवारों की सूची जारी की। इस सूची ने चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कुछ प्रमुख दावों पर सीधे चुनौती दी, जिससे गठबंधन के भीतर तनाव और नाराजगी की स्थिति बन सकती है। चिराग पासवान के लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पांच प्रमुख दावों वाली सीटों – मोरवा, सोनबरसा, राजगीर, गायघाट और मटिहानी पर जेडीयू ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। ऐसा बताया जा रहा था कि ये सीटें पहले चिराग की झोली में जाने वाली थीं। एनडीए में बढ़ेगा तनाव? पिछले चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि मोरवा और गायघाट पर 2020 में आरजेडी का दबदबा था, राजगीर और सोनबरसा पर जेडीयू जीता था, जबकि मटिहानी पिछली बार लोक जनशक्ति पार्टी ने जीती थी, लेकिन विजयी राजकुमार सिंह बाद में जेडीयू में शामिल हो गए थे। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के चलते इन सीटों पर सियासी निगाहें खास हैं और उम्मीदवारों की हर चाल का चुनावी मायने बढ़ गया है। इन सीटों पर जेडीयू का उम्मीदवार उतारना गठबंधन में संतुलन बदल सकता है और चिराग समर्थक ताकतों के साथ टकराव के अवसर बढ़ा सकता है जिससे एनडीए की मौजूदा स्थिति जटिल हो सकती है। जेडीयू की लिस्ट में 3 बाहुबली भी शामिल जेडीयू के उम्मीदवारों की सूची में तीन बाहुबली और कई अनुभवी नेता शामिल हैं। विशेष रूप से, मौजूदा सरकार के पांच कैबिनेट मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों से फिर मैदान में उतारे गए हैं। इसमें ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार (नालंदा), जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी (सरायरंजन), सूचना व जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी (कल्याणपुर), समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी (बहादुरपुर) और मद्य निषेध मंत्री रत्नेश सदा (सोनबरसा) शामिल हैं। जेडीयू ने 30 नए चेहरों को उतारा गौरतलब है कि जेडीयू की पहली सूची में 30 नए चेहरे और 27 पुराने प्रत्याशी शामिल हैं। चार महिला उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारा गया है, जिनमें मधेपुरा से कविता साहा, गायघाट से कोमल सिंह, समस्तीपुर से अश्वमेध देवी और विभूतिपुर से रवीना कुशवाहा का नाम शामिल है।  

चिराग को सीटें तो मिलीं, लेकिन क्या पसंदीदा इलाके भी मिलेंगे? NDA में खींचतान तय!

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए में रविवार को सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया गया है. बीजेपी और जेडीयू के बीच बराबर-बराबर सीटों पर लड़ने का फॉर्मूला तय हुआ है, तो चिराग पासवान की मन की मुराद पूरी हो गई है. चिराग की पार्टी एलजेपी (आर) को 29 सीटें मिली हैं. चिराग पासवान को एनडीए में मन के मुताबिक सीटों की संख्या तो मिली, लेकिन क्या पसंदीदा सीटें भी मिल पाएंगी? एनडीए में अभी यह पूरी तरह से तय नहीं हुआ है कि एलजेपी किन 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. 2020 के चुनाव में चिराग एनडीए का हिस्सा नहीं थे, उस समय जेडीयू 115 सीट पर चुनाव लड़ी थी और बीजेपी ने 110 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे. जेडीयू और बीजेपी चिराग को सीटें देने के लिए कम सीटों पर लड़ने को राज़ी हो गई हैं, लेकिन असली मामला अब उन सीटों पर फंसा है, जहां पर जेडीयू, बीजेपी और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा का कब्ज़ा है. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और बीजेपी दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. बाकी सीटें छोटे सहयोगी दलों को दी गई हैं. इनमें सबसे ज़्यादा फ़ायदा चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) को हुआ. एनडीए में चिराग की पार्टी को 29 सीटें मिली हैं. चिराग की पार्टी लगातार 30 से 35 सीटें मांग रही थी और उसी लिहाज़ से उसे 29 सीटें मिली हैं. चिराग पासवान का एनडीए में बढ़ता क़द अब किसी से छिपा नहीं है. बिहार की राजनीति में उन्हें अब 'किंगमेकर' के तौर पर देखा जा रहा है. सवाल ये है कि चिराग पासवान में ऐसी क्या ख़ास बात है कि बीजेपी और जेडीयू दोनों अपनी सीटों का नुक़सान उठाकर भी उन्हें ज़्यादा महत्व देने का काम किया है.  चिराग को पसंदीदा सीटें भी मिलेंगी? एनडीए में सीट शेयरिंग के मामले में चिराग पासवान 30-35 सीटों पर दावेदारी कर रहे थे, लेकिन बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के दख़ल के बाद चिराग पासवान 29 सीटों पर लड़ने के लिए तैयार हुए हैं. इसका ऐलान भी रविवार को केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कर दिया, ऐसे में मामला उन सीटों पर फंस सकता है, जहां पर बीजेपी और जेडीयू ने 2020 में कब्ज़ा जमाया था. चिराग पासवान ने जिन 29 सीटों पर चुनाव लड़ने का अभी तक प्लान बनाया है, उनमें से कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर जेडीयू और बीजेपी का कब्ज़ा है. बीजेपी और जेडीयू क्या अपनी जीती हुई सीटें एलजेपी के लिए छोड़ने को तैयार होंगी? जेडीयू ने जिस तरह से पिछले चुनाव में सीटें जीती थीं, उनमें से छोड़ना उसके लिए आसान नहीं है. माना जा रहा है कि एलजेपी की दावे वाली चार सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा है तो तीन सीटों पर जेडीयू के विधायक हैं. इसके अलावा एक सीट पर जीतनराम मांझी की पार्टी का कब्ज़ा है. चिराग का बढ़ता सियासी क़द चिराग पासवान अपने पिता और बिहार के दिग्गज दलित नेता राम विलास पासवान की सियासी विरासत को संभाल रहे हैं. राम विलास पासवान का बिहार में गहरी जड़ें वाला दलित वोट बैंक था. दलितों में ख़ासकर दुसाध समुदाय में है, यह समुदाय राज्य में एक बड़ा जनसमूह है. एनडीए के लिए इनका साथ जीत में बड़ी भूमिका निभा सकता है.  2020 में चिराग पासवान की पार्टी एनडीए से बाहर रहकर 135 सीटों पर लड़ी थी और सिर्फ़ 1 सीट जीत पाई थी. चिराग पासवान भले ही सीटें जीतने में सफल नहीं रहे, लेकिन एनडीए से बाहर जाकर लड़ने पर नीतीश कुमार की पार्टी को गहरा झटका दिया था. एनडीए में पहली बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.  2025 के विधानसभा चुनाव में चिराग को लेकर 2020 से बिल्कुल अलग रणनीति है। चिराग की पार्टी एनडीए के साथ ही चुनाव लड़ रही है. गठबंधन में उन्हें लड़ने के लिए 29 सीटें मिली हैं, जिस पर वह ख़ुश हैं. चिराग की कैसे बढ़ी अहमियत 2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था. वह पांच सीटों पर चुनाव लड़े थे और सभी पांचों पर जीत दर्ज किए थे. यह नतीजा उनके संगठन और जनाधार की मज़बूती दिखाता है. इसी के बाद से बीजेपी और जेडीयू दोनों को यह समझ में आ गया कि चिराग पासवान अब केवल सहयोगी दल के नेता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक बड़ी ताक़त बन चुके हैं. बीजेपी को बिहार में जहां सवर्ण और शहरी वोटरों का समर्थन मिलता है तो जेडीयू को कुर्मी और पिछड़े वर्ग का. ऐसे में चिराग की पार्टी दलित समुदाय को जोड़ती है, जिससे गठबंधन की सामाजिक पकड़ और मज़बूत होती है. यही वजह है कि उन्हें 29 सीटें तो मिल गई हैं, लेकिन क्या मनमर्ज़ी वाली सीटें भी मिलेंगी? चिराग की सियासी महत्वाकांक्षा चिराग पासवान की सियासी महत्वाकांक्षा अब सिर्फ़ कुछ सीटें जीतने तक सीमित नहीं है. वह ख़ुद को बिहार की अगली पीढ़ी के नेताओं में स्थापित करना चाहते हैं. वह बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हैं, जिससे बीजेपी के साथ उनका रिश्ता और मज़बूत हुआ है. इस बार किंगमेकर बनने का सपना लेकर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं, जिसके लिए एक-एक सीट पर नज़र गड़ाए हुए हैं. बिहार में इस बार के सीट बंटवारे ने यह साफ़ कर दिया है कि एनडीए की रणनीति में चिराग पासवान अब छोटे सहयोगी नहीं, बल्कि मुख्य चेहरा बन गए हैं. चिराग की पार्टी की मज़बूती और दलित वोट बैंक पर पकड़, आने वाले चुनावों में एनडीए के लिए चिराग कितनी रोशनी साबित होते हैं या फिर अपनी सियासी उम्मीदों को उजाला करेंगे?

सीट बंटवारे पर एनडीए में अब तक सहमति नहीं, चिराग पासवान ने पिता की सीख दिलाई याद

पटना बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में सीट बंटवारे का फॉर्मूला अब तक तय नहीं हुआ है। लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के प्रमुख व केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को 35 सीटों से कम मंजूर नहीं है। इधर, भाजपा 28 देने तक ही देने के लिए तैयार है। मंगलवार को बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने चिराग पासवान से बातचीत की। उन्हें समझाने की कोशिश लेकिन बात नहीं बन पाई। बुधवार को चिराग पासवान ने सीट शेयरिंग के सवाल पर कहा कि अभी बातचीत चल रही है। बात फाइनल होने पर आपको जानकारी दे दी जाएगी। इन सब के बीच चिराग पासवान का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। उन्होंने अपने पिता व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की तस्वीर को शेयर करते हुए उन्हें याद किया। कहा कि पापा हमेशा कहा करते थे। जुर्म करो मत, जुर्म सहो मत। जीना है तो मरना सीखो। कदम-कदम पर लड़ना सीखो। अब चिराग पासवान के इस पोस्ट के बाद सियासी गलियारे में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। इससे पहले चिराग पासवान ने एक और पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा कि पापा आपकी पुण्यतिथि पर आपको मेरा नमन। मैं विश्वास दिलाता हूं कि आपके दिखाए मार्ग और आपके विजन “बिहार फ़र्स्ट, बिहारी फर्स्ट” को साकार करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हूं। बिहार के समग्र और सर्वांगीण विकास का जो सपना आपने देखा था, अब समय आ गया है उसे धरातल पर उतारने का। आपने मेरे कंधों पर जो जिम्मेदारी सौंपी थी, उसे निभाना मेरे जीवन का उद्देश्य और कर्तव्य है। चिराग बोले- इस चीज के लिए मैं दृढ़ संकल्पित हूं बिहार में लोकतंत्र का महापर्व शुरू होने जा रहा है। आगामी चुनाव आपके संकल्प को पूरा करने का अवसर है। बिहार को नई दिशा देने, हर बिहारी के सपनों को साकार करने का अवसर है। आपके द्वारा बनाई गई लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कारवां को आगे बढ़ाने के लिए मैं दृढ़ संकल्पित हूं। पार्टी के हर एक कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों का सपना है कि आगामी चुनाव में आपके सपनों को पूरा किया जा सके। पापा आपकी प्रेरणा, आशीर्वाद और आदर्श सदैव मेरे मार्गदर्शक रहेंगे। एनडीए में चिराग-मांझी की जिद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीट बंटवारे का काम 80 फीसदी तक हो चुका है। भाजपा और जदयू दोनों 100 से अधिक पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। केंद्रीय चिराग पासवान की पार्टी को 28, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को आठ और उपेंद्र कुशवाह की पार्टी को करीब पांच सीटें  भाजपा और जदयू देना चाहती है। लेकिन, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा मानने को तैयार नहीं। चिराग 40 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। वहीं जीतन राम मांझी का तर्क है कि राज्य स्तर की पार्टी बनने के लिए आठ विधायक चाहिए। हमारे पास पहले से चार विधायक हैं। ऐसे में 10 से 12 सीटों से कम पर चुनाव हमलोग नहीं लड़ कसते हैं। दोनों पार्टी के नेताओं ने चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान से मिलकर अपनी-अपनी बात रख दी है। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने दावा किया है कि एनडीए के घटक दलों के कहीं कोई मतभेद नहीं है। सबलोग एकजुट हैं। जल्द ही सीट बंटवारे का एलान कर दिया जाएगा।

प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए चिराग पासवान बोले, उनके आरोप तात्कालिक राजनीति में हैं

पटना केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मंगलवार को कहा कि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीति की शैली आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल जैसी है। यहां पत्रकारों से बात करते हुए, लोक जनशक्ति (रामविलास) के अध्यक्ष ने याद दिलाया कि केजरीवाल भी किशोर की तरह राजनीति में पैर जमाने की कोशिश में "एक के बाद एक आरोप" लगाते रहे, लेकिन "दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद चुप हो गए"। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से एक के बाद एक आरोप लगा रहे हैं। केवल एक जांच ही बता सकती है कि उनके आरोप तथ्यों पर आधारित हैं या केवल बदनामी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "जो भी हो, मेरा मानना ​​है कि बिहार में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, वे अपना बचाव करने में पूरी तरह सक्षम हैं। उनमें से एक ने तो मानहानि का नोटिस भी दिया है। समय आने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।" इशारा जेडी(यू) के राष्ट्रीय महासचिव और मंत्री अशोक चौधरी की ओर था, जिन्होंने हाल ही में किशोर को 200 करोड़ रुपये के बेनामी ज़मीन लेनदेन के आरोप में मानहानि का नोटिस भेजा था।  

राहुल गांधी के हाइड्रोजन बम बयान पर चिराग ने साधा निशाना, कहा- ‘आरोप लगाना गलत’

 पटना लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बुधवार को पलटवार किया है। चिराग ने कहा, 'जब वे धमाका करेंगे, तभी हमें पता चलेगा कि यह 'हाइड्रोजन बम' क्या है। लेकिन फिलहाल, जब भी वे आते हैं और बोलते हैं, तो सिर्फ उसी चीज़ पर जोर देते हैं जिससे SIR प्रक्रिया की शुरुआत हुई।' उन्होंने आगे कहा, 'वे बार-बार आकर मतदाता सूची में गड़बड़ियों की बात करते हैं। यही वजह है कि SIR लाया गया है। एक तरफ आप शिकायत करते हैं और दूसरी तरफ उस शिकायत के समाधान से समस्या जताते हैं। यह ठीक नहीं है। अगर इस सिस्टम से आपको दिक्कत है तो उसके लिए कानून मौजूद हैं। लेकिन सिर्फ आरोप लगाना गलत है।' गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को लोकसभा में राहुल गांधी ने बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने जिस हाइड्रोजन बम की बात कही थी, वह अभी आया नहीं है, बल्कि आने वाला है। जिस दिन आएगा, उस दिन सभी को सच्चाई का पता चल जाएगा। राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा संविधान को खत्म करना चाहती है। उन्होंने दावा किया, 'मैं भागीदारी के हिसाब से हिस्सेदारी के लिए गारंटी देता हूं। यह मेरी गारंटी है। क्योंकि, हम संविधान मानते हैं।'