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भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ कांग्रेस का प्रदर्शन, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

चंडीगढ़ कांग्रेस विधायक आज बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा निकालते हुए विधानसभा पहुंचे। सभी विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में विधानसभा का घेराव किया। हाईकोर्ट चौक से विधानसभा तक निकाले गए इस रोष प्रदर्शन में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायकों ने एक हाथ में विभिन्न समस्याओं पर लिखी तख्तियां और दूसरे हाथ में झुनझुना लेकर नारेबाजी की। इस प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दिया कि हरियाणा की जनता तमाम गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, जबकि बीजेपी सरकार केवल झूठे वादों और खोखले दावों का झुंझना बजाने में व्यस्त है। कांग्रेस विधायकों ने सरकार से इन सभी मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की और चेतावनी दी कि यदि जनता की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज होगा। हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस एक जिम्मेदार विपक्ष के नाते जनता के मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक हर मंच पर उठाएगी। बीजेपी जितना अपनी जिम्मेदारी से भागेगी, कांग्रेस उतने पुरजोर तरीके से जनता की पैरवी करेगी। आखिकार सरकार को जवाबदेह बनना ही पड़ेगा। पत्रकारों से बातचीत में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। कानून व्यवस्था से लेकर अर्थव्यवस्था तक, रोजगार से लेकर महंगाई तक, कृषि से लेकर शिक्षा तक, स्वास्थ्य से लेकर स्वच्छता तक, बीजेपी ने सभी क्षेत्रों में अपनी नाकामी और नकारेपन का परिचय दिया है। ये सरकार ना किसानों को एमएसपी व मुआवजा दे पा रही है और ना ही युवाओं को रोजगार दे रही है। ना विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा दे पा रही है और ना ही जनता को सुरक्षा दे रही है। जिस तरह प्रदेश में वारदातें और घोटाले हो रहे हैं, ऐसा लगता है कि यहां सरकार नाम की कोई चीज ही नहीं है। प्रदेश को घोटालेबाज और गैंगस्टर्स के हवाले छोड़ दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने बुजुर्गों की पेंशन काटने पर बोला कि अब सरकार 70 हजार पेंशन रिस्टोर करने का दाव कर रही है। जबकि पहले सरकार कह रही थी कि उसने किसी की पेंशन काटी ही नहीं। अगर काटी नहीं तो रिस्टोर क्यों की जा रही है? पेंशन के साथ साथ, चुनाव से पहले बनाए राशन कार्ड अब काटे जा रहे हैं, जो कि अपने आप में वोट चोरी है। हरियाणा में चुनाव के बाद करीब 14 लाख राशन कार्ड काटे गए हैं। अकेले अंबाला में 54 हजार राशन कार्ड काटे हैं। हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने बुढ़ापा पेंशन को 200 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये किया था, यानी साढ़े 7 गुना की बढ़ोतरी की थी। वहीं भाजपा सरकार ने 11 साल में इसमें सिर्फ 2 गुना ही बढ़ोतरी की है। जबकि महंगाई तीन-चार गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि इस सरकार में किसानों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। अब खाद के कट्टे का वजन भी 50 से घटाकर 40 किलो किया गया है, जबकि रेट पहले जितना ही है। एमएसपी 24 फसलों पर देने का दावा भी झूठा है, हरियाणा में इतनी फसलें नहीं होतीं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से 2000 करोड़ से ज्यादा मुनाफा कमाया गया, लेकिन क्लेम नहीं मिलते, लोग बीमा छोड़ रहे हैं। अभी 10% तक मुआवजा नहीं दिया गया। मनरेगा पर हुड्डा ने कहा कि मनरेगा कांग्रेस की क्रांतिकारी योजना थी। कांग्रेस सरकार के दौरान देश में सबसे ज्यादा मजदूरी हरियाणा में मजदूरों को दी जाती थी। लेकिन बीजेपी ने सत्ता में आते ही मजदूरों के अधिकारों पर कुठाराघात किया। बीजेपी सत्ता में आते मनरेगा को कमजोर करने में जुट गई थी। कांग्रेस द्वारा संसद में पूछे गए सवाल के जवाब से पता चला कि हरियाणा में 8 लाख से अधिक मनरेगा मज़दूर पंजीकृत थे। लेकिन 2024-25 में सरकार ने सिर्फ 2100 परिवारों को ही 100 दिन का काम दिया। सरकार ने मजदूरों को ना को काम दिया और ना ही स्कीम में प्रावधान के तहत मुआवजा दिया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लाडो लक्ष्मी योजना के नाम पर महिलाओं के साथ इस सरकार ने धोखा किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव में सभी महिलाओं को 2100 रुपये मासिक देने का वादा किया गया था, लेकिन अब केवल चंद महिलाओं को ही यह राशि दी जा रही है। जबकि 2024-25 में हरियाणा में 2.13 करोड़ लोग बीपीएल श्रेणी में थे, यानी इस योजना का लाभ लगभग 85 लाख महिलाओं को मिलना चाहिए था। लेकिन वर्तमान में सरकार केवल 8 लाख महिलाओं को ही राशि देने की बात कर रही है। इतना ही नहीं, उसमें भी अब कहा जा रहा है कि महिलाओं को केवल 1100 रुपये मिलेंगे और 1000 रुपये जमा किए जाएंगे। इस पर भी आय की सीमा, बच्चों की शिक्षा तथा कुपोषण जैसी शर्तें थोप दी गई हैं। सरकार जानबूझकर ऐसी शर्तें लगा रही है, जिससे ज्यादातर महिलाएं स्वतः लाभार्थी सूची से बाहर हो जाएं। बाहरियों को नौकरी देने बारे पूछे गए सवाल के जवाब में हुड्डा ने कहा कि बीजेपी हरियाणवी युवाओं के भविष्य पर कुठाराघात कर रही है। देश में कोई भी ऐसा प्रदेश नहीं है, जो अपनी नौकरियों में स्थानीय युवाओं की बजाए, बाहरी लोगों को तरजीह देता हो। हरियाणा में तो आलम ये है कि बीजेपी सरकार 80 में से 78 पद अन्य राज्य के लोगों को दे देती है। यह नाकाबिले बर्दाश्त है। कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी। हुड्डा ने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्षों के इंतजार के बाद एचपीएससी पीजीटी कंप्यूटर साइंस की 1711 पदों की भर्ती का रिजल्ट आया, लेकिन सिर्फ 39 उम्मीदवार ही पास हुए, जबकि बाकी 1672 पद खाली रह जाएंगे। इससे पहले भी अनेक भर्तियों में पदों को खाली रखा गया है।

AI समिट में हंगामा: शर्टलेस प्रोटेस्ट के बाद यूथ कांग्रेस चीफ पर पुलिस की कार्रवाई

नई दिल्ली दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किए गए एआई इंपैक्ट समिट के दौरान शर्टलेस प्रदर्शन के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने आज इंडियन यूथ कांग्रेस चीफ उदय भानु चिब को भी गिरफ्तार कर लिया है। उदय भानु की गिरफ्तारी के मद्देनजर तिलक मार्ग थाने के बाहर भारी सुरक्षा तैनात किया गया है। कांग्रेस ने उदय भानु चिब की गिरफ्तारी का कड़ा विरोध किया है। घंटों चली पूछताछ के बाद गिरफ्तार तिलक मार्ग थाना पुलिस ने सोमवार को युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब को पूछताछ के लिए बुलाया था। करीब 20 घंटे चली पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि वह पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे। उन्हें आज पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा। बता दें कि, शुक्रवार को यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता के एक ग्रुप ने AI इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत मंडपम में घुसकर अपनी शर्ट उतारकर प्रोटेस्ट किया, जिन पर "PM कॉम्प्रोमाइज्ड" के नारे लिखे थे। अब तक कुल 8 लोग गिरफ्तार दिल्ली पुलिस ने पिछले सप्ताह आयोजित 'एआई इम्पैक्ट सम्मेलन' के दौरान युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा शर्टलेस विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में सोमवार को ग्वालियर से तीन और व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। उदय भानु चिब की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दिल्ली पुलिस द्वारा इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 और धारा 197 के तहत मामले दर्ज किए हैं।आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय अखंडता के लिए हानिकारक दावे करने सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार पर बोला हमला उदय भानु चिब की गिरफ्तारी पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "यह शर्म की बात है कि उन्हें किसी के शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट करने से दिक्कत है। तानाशाह उन्हें जेल में डाल देगा जो उन्हें आईना दिखाएगा। क्या पुलवामा, पहलगाम अटैक, लाल किला ब्लास्ट के पीछे के सभी टेररिस्ट गिरफ्तार हो गए हैं…आप टेररिस्ट हमलों के पीछे वालों को गिरफ्तार नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन अगर कोई अपनी शर्ट उतार दे तो आप डर जाते हैं। यह सरकार की असलियत है…" कांग्रेस के सीनियर नेता भूपेश बघेल ने सरकार को तानाशाही बताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ''मैं दिल्ली पुलिस द्वारा IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई उदय भानु चिब जी एवं अन्य युवा साथियों की गैरकानूनी गिरफ्तारी की मैं कड़ी निंदा करता हूं। तानाशाह" सरकार यह भूल रही है कि लोकतंत्र में युवाओं का आवाज उठाना, सवाल पूछना और विरोध करना अपराध नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सबसे मजबूत हथियार है। हमारे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिना किसी हिंसा या उकसावे के, सिर्फ शांतिपूर्ण तरीके से प्रधानमंत्री के समझौतों और युवाओं की अनसुनी पीड़ा को सामने लाया। यह एक साहसी, जायज और लोकतांत्रिक कदम था, जिसे दबाने के लिए अब सरकार के द्वारा पुलिसिया दमन का सहारा लिया जा रहा है। यह कार्रवाई न केवल गैरकानूनी है, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र पर सीधा हमला भी है। हम मांग करते हैं कि उदय भानु चिब जी सहित सभी गिरफ्तार IYC कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और उन पर लगाए गए सभी झूठे आरोप वापस लिए जाएं तथा इस तरह की दमनकारी कार्रवाईयों को तत्काल रोका जाए। लड़ेंगे-जीतेंगे।'' बता दें कि, AI समिट में इस मुद्दे पर बात करते हुए उदय भानु ने कहा था कि देश के युवा "अब चुप नहीं रहेंगे"। उन्होंने कहा, "इंडियन यूथ कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि देश के युवा अब चुप नहीं रहेंगे। 'प्रधानमंत्री कॉम्प्रोमाइज्ड हैं' सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि लाखों बेरोजगार युवाओं का गुस्सा है। अमेरिका के साथ यह ट्रेड डील हमारे किसानों और जनता के हितों के साथ धोखा है, जिससे सिर्फ अमेरिका को फायदा होगा। डेमोक्रेसी में शांतिपूर्ण विरोध हमारा हक है और हम युवाओं की आवाज उठाते रहेंगे।" उदय भानु ने साफ किया कि पार्टी "AI समिट के खिलाफ नहीं है", लेकिन "भारत के हितों के साथ किसी भी तरह के कॉम्प्रोमाइज" का कड़ा विरोध करती है। उन्होंने आगे कहा, "हम भारत के हितों के साथ किसी भी तरह के कॉम्प्रोमाइज़ के ख़िलाफ़ हैं। जब देश के किसानों के साथ कॉम्प्रोमाइज किया जा रहा है, भारत विरोधी ट्रेड एग्रीमेंट साइन किए जा रहे हैं, और युवाओं को बेरोजगार रखते हुए नफरत की पॉलिटिक्स में धकेला जा रहा है, तो क्या हमें चुप रहना चाहिए? यह 140 करोड़ लोगों का देश है।" PM मोदी पर और तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि "प्रधानमंत्री कॉम्प्रोमाइज्ड हैं" और “इसका मतलब यह नहीं है कि जनता चुप रहे।”

दिल्ली पुलिस ने ग्वालियर के कांग्रेस नेता को गिरफ्तार किया, AI समिट में प्रदर्शन में भाग लेने का आरोप

ग्वालियर दिल्ली पुलिस ने मध्यप्रदेश युवक कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव जितेंद्र यादव को ग्वालियर से उठाकर दिल्ली ले गई है. माना जा रहा है कि यादव पर राजधानी दिल्ली में चल रहे AI समिट 2026 के दौरान अर्धनग्न विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का आरोप है. पुलिस ने इस मामले में उन्हें हिरासत में लिया है. प्रदर्शन का मामला जानकारी के अनुसार, 20 फरवरी को दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित AI समिट 2026 में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें 15-20 कार्यकर्ता हाथ में सफेद रंग की टी-शर्ट लिए हुए दिखाई दिए. टी-शर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर के साथ लिखा था-“PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड”. दिल्ली पुलिस ने इन वीडियो के आधार पर युवक कांग्रेस के नेताओं की पहचान कर कार्रवाई शुरू की. माना जा रहा है कि जितेंद्र यादव इसी मामले में हिरासत में लिए गए हैं. परिवार का आरोप परिजनों ने बताया कि जितेंद्र अपने कमरे में थे. अचानक घर के गेट पर किसी की आहट हुई. जब तक परिवार के लोग बाहर आए, पुलिस सीधे उनके कमरे में जाकर उन्हें उठाकर नीचे ले आई. उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें मारते पीटते दिल्ली की स्कॉर्पियो गाड़ी में बैठाकर ले गई. रात में परिजन कुछ नेताओं के साथ थाने गए, लेकिन मिलने नहीं दिया गया. उनके मोबाइल के जरिए ही परिवार को संपर्क कराया गया. पिता केशव यादव का बयान पिता केशव यादव ने बताया कि रविवार सुबह पुलिस के कुछ लोग फिर उनके घर आए और दावा किया कि उनके बेटे ने दिल्ली में उत्पात मचाया है. उन्होंने रात को ही जितेंद्र को ले जाने की जानकारी दी थी. पुलिस ने परिवार के सभी मोबाइल भी ले लिए, बाद में लौटाए. पुलिस ने जितेंद्र के कपड़े भी ले लिए. उसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं है कि उनका बेटा कहां है. ग्वालियर पुलिस इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं और फिलहाल कोई बयान नहीं दे रही है.

राजनीतिक तनाव ने लिया उग्र रूप, भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पथराव

इंदौर दिल्ली में एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन के विरोध में शनिवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन घेरने की घोषणा की थी। लेकिन वहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी विरोध स्वरूप एकत्र होकर उनका सामना किया। दोनों तरफ से पत्थर, पानी की बोतलें और टमाटर एक-दूसरे पर फेंके गए। पुलिस ने आमने-सामने हुए दोनों दलों के प्रदर्शनकारियों को हटाकर स्थिति को नियंत्रित किया। इस पथराव में छह लोगों सहित एक मीडियाकर्मी और एक पुलिस अधिकारी को चोटें आई हैं। एक महिला नेत्री बिंदू चौहान को पथराव में गंभीर चोट आई है। उन्हे निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।   एआई समिट में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद देशभर में भाजपा ने कांग्रेस कार्यालय घेरने की योजना बनाई थी। इसके अलावा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा में दिए गए बयान के विरोध में कांग्रेस के प्रदर्शन प्रदेशभर में जारी थे। इसी कारण कांग्रेस कार्यकर्ता दोपहर एक बजे से गांधी भवन पर भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध में जुट गए थे। पुलिस ने संभावित टकराव को देखते हुए मार्ग के दोनों तरफ बैरिकेड लगा दिए थे। लेकिन जैसे ही भाजपा कार्यकर्ता प्रदर्शन करने गांधी भवन की ओर बढ़े, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। वे विजयवर्गीय के खिलाफ नारे लगा रहे थे। तभी अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। दोनों तरफ से पत्थर, टमाटर और पानी की बोतलें फेंकी गईं। बैरिकेड की वजह से दोनों कार्यकर्ताओं के बीच अधिक निकटता नहीं थी। पथराव के कारण छह से अधिक लोग घायल हुए है। इस घटना के बाद अफरा तफरी मच गई और व्यापारियों ने भी दुकानें धड़ाधड़ बंद कर दी। पुलिस ने स्थिति संभाली और दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को पीछे धकेला। दंगा नियंत्रक वाहन वज्र भी तैनात था और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का उपयोग किया गया, लेकिन पानी का प्रेशर कम होने के कारण यह प्रभावी नहीं हुआ। इस घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ता पढ़रीनाथ थाने का घेराव करने पहुंचे और कांग्रेसजनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराने की मांग की।

भिवंडी में खेला हुआ खेल! बीजेपी के बागी नारायण चौधरी को कांग्रेस ने दिया मेयर पद

भिवंडी महाराष्ट्र के भिवंडी में एक नाटकीय राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली, जहां भाजपा को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके बागी नेता नारायण चौधरी कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  (एसपी) के समर्थन से मेयर बनकर उभरे. इस साल जनवरी में हुए 23 वार्डों और 90 सीटों वाले भिवंडी-निजामपुर नगर निगम (BNMC) चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. इसने इस नगर निगम में नए सियासी समीकरणों और गठबंधनों को जन्म दिया. पार्षदों की खरीद-फरोख्त और राजनीतिक झड़पों के आरोप लगे. विलासराव देशमुख ऑडिटोरियम में शुक्रवार दोपहर 12 बजे हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया हुई, जिसमें नारायण चौधरी को स्पष्ट बहुमत मिला. नारायण चौधरी मेयर चुने गए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मोमिन तारिक बारी डिप्टी मेयर चुने गए. नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 30, भाजपा ने 22, शिवसेना ने 12, समाजवादी पार्टी ने 6, कोणार्क विकास अघाड़ी ने 5 और भिवंडी विकास अघाड़ी ने 3 सीटें जीतीं थीं. नारायण चौधरी ने 46 के जादुई आंकड़े से दो अधिक यानी 48 वोट हासिल करके मेयर पद हासिल किया. भाजपा की स्नेहा पाटिल को 16 वोट मिले, जबकि कोणार्क विकास अघाड़ी के विलास पाटिल (शिंदे की शिवसेना के समर्थन से)  को 25 वोट प्राप्त हुए. कांग्रेस के मोमिन तारिक बारी 43 वोट पाकर डिप्टी मेयर निर्वाचित हुए. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) ने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाकर मेयर चुनाव लड़ा. राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कहा, 'नारायण चौधरी ने पार्टी की नीति का उल्लंघन किया है. उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.' बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस का सेक्युलर फ्रंट एनसीपी (एसपी) के लोकसभा सांसद सुरेश म्हात्रे, जिन्हें बलिया मामा के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने इस जीत को भिवंडी की जनता की जीत बताया. उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के चलते कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) का सेक्युलर फ्रंट बनाना जरूरी था. सपा विधायक रईस शेख ने कहा, 'हमने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाया है.' राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, 'कांग्रेस ने भाजपा या एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया और अपने वैचारिक रुख से कोई समझौता नहीं किया. कुछ भाजपा पार्षदों ने पार्टी और उसकी विचारधारा छोड़कर सेक्युलर फ्रंट में शामिल होने का फैसला किया, जिससे हमें मेयर और डिप्टी मेयर चुनने में सफलता मिली.'   नारायण चौधरी ने बीजेपी से बगावत की और कुछ बीजेपी पार्षदों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र समूह बनाया. उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया. उन्होंने मेयर चुनाव जीतने के बाद कहा, 'स्थानीय राजनीति आप जानते हैं, मैं सिर्फ विकास पर काम करूंगा.' यह राजनीतिक घटनाक्रम भाजपा के उस अंतिम समय में लिए गए फैसले के बाद हुआ, जिसमें पार्टी ने नारायण चौधरी को मेयर पद के उम्मीदवार के रूप में हटाकर उनकी जगह स्नेहा पाटिल को मैदान में उतारा था. बता दें कि भाजपा में शामिल होने से पहले नारायण चौधरी कांग्रेस में थे.

कांग्रेस के संगठन में फेरबदल की तैयारी, AICC महासचिव बनने की है दावेदारी

रायपुर: कांग्रेस जाति जनगणना के मुद्दे को लेकर देशभर में बड़ा अभियान छेड़ने जा रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और पूर्व अध्यक्ष Rahul Gandhi 20 अगस्त से सभी राज्यों का दौरा करेंगे। इसी क्रम में उनका छत्तीसगढ़ दौरा भी प्रस्तावित है। केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी को निर्देश दिया है कि 20 से 31 अगस्त के बीच का विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर भेजा जाए। इसके आधार पर छत्तीसगढ़ में राहुल गांधी और खरगे के दौरे की तिथि तय की जाएगी। संगठन में बदलाव की अटकलें तेज दिल्ली से लौटे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संगठन में बड़े बदलाव की चर्चाओं को खारिज किया है। उनका कहना है कि बैठक में बदलाव को लेकर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel और पूर्व डिप्टी सीएम T. S. Singh Deo को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा जोरों पर है। सूत्रों के अनुसार, बघेल को ओबीसी चेहरे के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर महासचिव की भूमिका दी जा सकती है, जबकि सिंहदेव को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें हैं। हालांकि, सिंहदेव ने इन अटकलों पर कहा कि दिल्ली में केवल चुनावी हार के कारणों पर चर्चा हुई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धनेन्द्र साहू ने भी स्पष्ट किया कि संगठनात्मक बदलाव पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। अभियान की तैयारी शुरू दिल्ली में सभी प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों को जाति जनगणना अभियान की तैयारियों के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली से लौटने के बाद बैठक लेकर जिलों का दौरा करेंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं को जागरूक करने और प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जा रही है, ताकि वे जनता के बीच जाति जनगणना को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर कर सकें। ओडिशा में हाल ही में पूरी प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भंग किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में भी संभावित बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। अब सभी की नजर हाईकमान के फैसले पर टिकी है। 

‘सिफारिश नहीं, बस योग्यता’: MP कांग्रेस में प्रवक्ता खोजने के लिए टैलेंट हंट अभियान

भोपाल मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने प्रवक्ता, शोध कोऑर्डिनेटर और प्रचार-प्रसार कोऑर्डिनेटर के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि इस चयन प्रक्रिया के लिए 28 फरवरी तक आवेदन किए जा सकेंगे। कांग्रेस 'टैलेंट हंट प्रोग्राम' के माध्यम से युवाओं को मौके देगी। जीतू पटवारी ने औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि बदलते राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी को ऐसे ऊर्जावान, वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध और शोधपरक सोच रखने वाले साथियों की आवश्यकता है, जो कांग्रेस की विचारधारा को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचा सकें। जीतू पटवारी ने कहा कि ऐसे लोगों का चयन किया जाएगा जो कांग्रेस की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता एवं स्पष्ट वैचारिक समझ, समसामयिक मुद्दों पर गहन अध्ययन एवं शोध क्षमता, प्रभावशाली संवाद कौशल एवं वाक्पटुता, साथ ही मीडिया प्रबंधन की समझ, तथ्यात्मक एवं प्रमाणिक प्रस्तुति की क्षमता के अलावा संगठनात्मक अनुशासन एवं जनसरोकारों के प्रति संवेदनशीलता रखते हों। बताया गया है कि पार्टी में प्रवक्ता, 'शोध कोऑर्डिनेटर’ और 'प्रचार-प्रसार कोऑर्डिनेटर' का चयन किया जाना है। युवाओं को मौका देगी कांग्रेस यह टैलेंट हंट कार्यक्रम जिला, संभाग, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर तक होगा और प्रतिभाशाली युवाओं को पार्टी मौका देगी। यह आवेदन 28 फरवरी तक जमा होंगे। इसके तहत संभाग स्तर पर इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे। इन इंटरव्यू में एआईसीसी द्वारा नामित कोऑर्डिनेटर, टैलेंट हंट कमेटी के सदस्य, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं संबंधित जिला अध्यक्ष संयुक्त रूप से प्रतिभागियों का मूल्यांकन करेंगे। अंतिम निर्णय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (एआईसीसी) द्वारा लिया जाएगा। योग्यता को मिलेगा मौका जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि विचारों का आंदोलन है। यह टैलेंट हंट कार्यक्रम उसी परिवर्तन की शुरुआत है, जहां अवसर सिफारिश से नहीं, योग्यता से मिलेगा। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह पहल प्रदेश की राजनीति में वैचारिक मजबूती और तथ्याधारित विपक्ष की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कांग्रेस ऐसे युवाओं को मंच दे रही है जो पढ़ें, शोध करें और तथ्यों के साथ जनता की आवाज बनें। यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा और सरकार के दावों की तथ्य प्रदान समीक्षा सुनिश्चित करेगा। 20 प्रदेश प्रवक्ताओं का चयन होगा मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक ने बताया कि इस टैलेंट हंट प्रक्रिया के माध्यम से सीमित एवं गुणवत्ता-आधारित चयन किया जाएगा। इस प्रक्रिया से केवल 20 प्रदेश प्रवक्ताओं का चयन किया जाएगा और कुछ मीडिया पैनलिस्ट, संभाग एवं जिला स्तर पर दो-दो अधिकृत प्रवक्ता, राष्ट्रीय स्तर पर दो पैनलिस्ट तथा एक विशेष अंग्रेजी मीडिया पैनलिस्ट का चयन किया जाएगा।

पीएम मोदी के लिए कांग्रेस का ट्वीटेड सरप्राइज: फ्लाइट टिकट बुक, जनता का ध्यान आकर्षित

  नई दिल्ली असम के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री से हिंसा प्रभावित मणिपुर जाने की अपील की है.  X पर एक पोस्ट में, खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, "चुनाव वाले राज्य हमेशा आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता होते हैं, लेकिन मणिपुर को "छोड़ा नहीं जाना चाहिए. राज्य 2023 से जल रहा है, और अब फिर से जल रहा है." खेड़ा ने दोनों राज्यों के बीच कम दूरी की तरफ इशारा करते हुए लिखा, “आप आज असम में हैं. मणिपुर यहां से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है. कृपया वहां भी जाइए. प्रधानमंत्री की उपस्थिति मणिपुर के लोगों को आश्वस्त करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है.”  'मेरे पास आपका नंबर नहीं था…': कांग्रेस नेता ने फ्लाइट टिकट की फोटो साझा करते हुए लिखा, "आपकी आसानी के लिए हमने गुवाहाटी से इम्फाल का टिकट बुक कर दिया है, आपको बस विमान में सवार होना है. चूंकि मेरे पास आपका नंबर नहीं था, इसलिए मैं टिकट यहीं साझा कर रहा हूं." उन्होंने केंद्र के 'PM CARES' फंड पर कटाक्ष करते हुए संदेश दिया कि प्रधानमंत्री वहां जाकर दिखाएं कि वह वाकई मणिपुर की परवाह करते हैं. मणिपुर में 2023 से जारी हिंसा और बीच-बीच में भड़कती घटनाओं को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर सवाल उठाता रहा है. वहीं सरकार का कहना है कि शांति बहाली के प्रयास जारी हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. इस अनूठे राजनीतिक विरोध ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. जहां कांग्रेस समर्थक इसे मणिपुर की अनदेखी का मुद्दा बना रहे हैं, वहीं आलोचक इसे राजनीतिक नौटंकी करार दे रहे हैं.

कांग्रेस का बड़ा कदम: बंगाल में ममता के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ेगी पार्टी, एजेंडा क्या होगा?

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव अप्रैल-मई में होने वाले हैं. लेकिन, अभी से ही संकेत मिलने लगे हैं कि बंगाल की लड़ाई भी लगभग दिल्ली और बिहार जैसी ही हो सकती है – बंगाल में भी कांग्रेस करीब करीब उसी भूमिका में नजर आ सकती है, जैसा कांग्रेस का रवैया दिल्ली और बिहार में देखा जा चुका है. पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ अपनी मुहिम को धार देने के लिए ममता बनर्जी दिल्ली में हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिल चुकी हैं, और सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने अपने केस की पैरवी भी कर चुकी हैं. साथ ही, ममता बनर्जी चाहती हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस संसद में महाभियोग का प्रस्ताव लाए, और तृणमूल कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल उसको सपोर्ट करें – लेकिन, सपोर्ट के बदले में वो कुछ भी शेयर नहीं करना चाहती हैं.  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो पहले से ही तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर रखा है. अब तो कांग्रेस ने भी पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है – ऐसी सूरत में बंगाल के चुनाव नतीजे दिल्ली और बिहार से कितने अलग होंगे, देखना महत्वपूर्ण होगा. पश्चिम बंगाल की संभावित चुनावी जंग ये तो अब पूरी तरह साफ हो गया है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को चुनावी लड़ाई सिर्फ बीजेपी के खिलाफ नहीं लड़ना है. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी बहुत ज्यादा सीटें तो नहीं जीत पाई थी, लेकिन मुख्य विपक्षी दल तो बन ही गई. कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुल पाया था.  मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के मुद्दे पर विपक्ष का साथ चाह रहीं ममता बनर्जी से दिल्ली में जब कांग्रेस के बारे पूछा गया तो उनका जवाब था कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी. कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के चुनावी गठबंधन की संभावना को नकारते हुए ममता बनर्जी पहले भी कह चुकी हैं, तृणमूल कांग्रेस की रणनीति साफ है, जबकि बाकी पार्टियां टीएमसी के खिलाफ लड़ने की रणनीति बनाती हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर अब कांग्रेस का रुख भी सामने आ गया है. कांग्रेस का कहना है, प्रदेश संगठन और कार्यकर्ताओं की लंबे समय से मांग रही है कि पार्टी राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ चुनावी मैदान में उतरे. पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने आलाकमान के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने बंगाल कांग्रेस की भावनाओं का सम्मान किया और अकेले चुनाव लड़ने के फैसले को मंजूरी दी. बंगाल कांग्रेस की तरफ से एक बयान में कहा गया है, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी, सांसद ईशा खान चौधरी सहित सूबे के सीनियर नेताओं की मौजूदगी में व्यापक विमर्श हुआ – और तय हुआ कि पार्टी 2026 का विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ेगी. बीजेपी के खिलाफ ममता बनर्जी की लड़ाई में कांग्रेस की ही तरह एक और मोर्चा खड़ा हो रहा है. सीपीएम की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने हाल ही में टीएमसी से सस्पेंड विधायक हुमायूं कबीर से मुलाकात की थी. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनवाने की घोषणा करके चर्चा में आए हुमायूं कबीर ने जनता उन्नयन पार्टी बनाई है, और ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने का दावा कर रहे हैं.  बंगाल चुनाव में कांग्रेस की भूमिका 2025 के शुरू में दिल्ली विधानसभा चुनाव और आखिर में बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. पश्चिम बंगाल के 2021 के चुनाव में तो राहुल गांधी की भूमिका रस्मअदायगी जैसी थी. राहुल गांधी एक दिन के लिए पश्चिम बंगाल में कैंपेन करने गए थे, और कोविड के कारण आगे के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए थे.  2025 के पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस की भूमिका का अंदाजा कैसे लगाया जाए? क्या राहुल गांधी दिल्ली और बिहार की तरह बंगाल में भी कांग्रेस को चुनाव लड़ाने वाले हैं या 2021 की ही तरह रस्मअदायगी निभाने की तैयारी है?  दिल्ली में हुई कांग्रेस की मीटिंग में ममता बनर्जी के सबसे बड़े विरोधी अधीर रंजन चौधरी भी शामिल थे, जो 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद से हाशिये पर भेजे जा चुके हैं. और, ये भी ममता बनर्जी के फेवर में ही जाता है. 2024 के चुनाव से पहले ही ममता बनर्जी ने घोषणा कर डाली थी कि वो अकेले चुनाव लड़ेंगी. पहले तो सुनने में आया था कि वो कांग्रेस को दो सीटें गठबंधन के तहत देने के तैयार भी थीं, लेकिन बाद में मना कर दिया. और, भारत जोड़ो न्याय यात्रा के साथ राहुल गांधी के पश्चिम बंगाल में प्रवेश की पूर्व संध्या पर ही 'एकला चलो रे' घोषणा कर दी थी. फिर कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से ममता बनर्जी के प्रति बयानों में सम्मान के भाव ही प्रकट किए जा रहे थे.  दिल्ली और बिहार चुनावों में राहुल गांधी के तेवर को देखें तो अंदाज बिल्कुल अलग था. दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल के खिलाफ राहुल गांधी उतने ही आक्रामक नजर आते थे, जितना बीजेपी के नेता. शीशमहल से लेकर दिल्ली शराब घोटाले तक, राहुल गांधी ने एक एक मामला गिनाकर अरविंद केजरीवाल को कठघरे में खड़ा कर दिया था.  ये भी था कि अरविंद केजरीवाल का भी कांग्रेस के प्रति ममता बनर्जी जैसा ही रवैया था. ममता बनर्जी ने तो विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक में रहते हुए भी अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया था. मतलब, कांग्रेस के खिलाफ. जैसे समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने चुनाव कैंपेन भी किया था.  बिहार चुनाव राहुल गांधी दिल्ली की तरह तो नहीं लड़ रहे थे, लेकिन कोई कमी भी नहीं छोड़ी थी. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ वोटर अधिकार यात्रा करते हुए उनको मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं बताया. तेजस्वी यादव के बड़े भाई और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता देने के बाद भी. बाद में जो हुआ, न होता तो भी नतीजे शायद ही अलग होते.  तृणमूल कांग्रेस के लिए बंगाल … Read more

MP कांग्रेस में बड़ा बदलाव, जंबो कार्यकारिणी को खत्म करने का संगठन का ऐलान

भोपाल  कांग्रेस संगठन के ताज़ा निर्देशों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के सख्त आदेश के बाद प्रदेश कांग्रेस में टेंशन का माहौल बन गया है। अब जिलों में मनमाने तरीके से बड़ी कार्यकारिणी बनाने पर रोक लगा दी गई है। जिला अध्यक्षों को मिला सीधा आदेश कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी राज्यों की इकाइयों और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर साफ निर्देश दिए हैं कि — बड़े जिलों में अधिकतम 55 सदस्य छोटे जिलों में सिर्फ 35 सदस्य ही जिला कार्यकारिणी में शामिल किए जाएंगे। यह फैसला AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में लिया गया। 15 दिन में कार्यकारिणी गठन के निर्देश वेणुगोपाल ने यह भी साफ कर दिया है कि सभी जिलों को 15 दिन के भीतर नई गाइडलाइन के अनुसार जिला कार्यकारिणी का गठन करना होगा। MP में पहले ही तोड़ी जा चुकी है गाइडलाइन मध्य प्रदेश में गुटबाजी को साधने के लिए लंबे समय से जम्बो कार्यकारिणी बनाने की परंपरा रही है। लेकिन नए निर्देश आने से पहले ही 30 जनवरी को कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी कर दी, जिनमें तय सीमा से कहीं ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए। आंकड़े जो बढ़ा रहे हैं संगठन की मुश्किल छिंदवाड़ा: 240 सदस्य सागर: 150 से ज्यादा पदाधिकारी मऊगंज (छोटा जिला): 40 सदस्य भोपाल शहर: 106 नामों की सूची भोपाल ग्रामीण: 85 सदस्यों की सूची तैयार इन आंकड़ों ने अब कांग्रेस संगठन को असमंजस में डाल दिया है।  अब क्या बदलेगी MP कांग्रेस की रणनीति? राष्ट्रीय नेतृत्व के सख्त रुख के बाद सवाल यह है कि— क्या जारी की गई जम्बो कार्यकारिणियों में कटौती होगी? या फिर संगठन और प्रदेश नेतृत्व के बीच टकराव बढ़ेगा? फिलहाल, कांग्रेस के नए फरमान ने मध्य प्रदेश की सियासत में नई बेचैनी और सियासी हलचल जरूर पैदा कर दी है।