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राज्य निर्वाचन आयोग का नया कदम: महापौर/पार्षद चुनाव में ऑनलाइन व्यय सुनवाई की सुविधा

राज्य निर्वाचन आयोग का नवाचार महापौर/पार्षद का चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों के निर्वाचन व्यय लेखा के संबंध में ऑनलाइन सुनवाई भोपाल राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने महापौर, अध्यक्ष एवं पार्षद का चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों के निर्वाचन व्यय लेखा दाखिल करने के संबंध में वीडियो काफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई का नवाचार किया है। अब संबंधित अभ्यर्थियों को सुनवाई के लिये राज्य निर्वाचन आयोग भोपाल नहीं आना पड़ता। सुनवाई प्रत्येक गुरूवार को होती है। इससे अभ्यर्थियों के समय और धन दोनों की बचत हुई है। पूर्व में ऐसे प्रकरणों की सुनवाई राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्यालय भोपाल में होती थी। अब तक 411 अभ्यार्थियों की हुई सुनवाई राज्य निर्वाचन आयुक्त श्रीवास्तव द्वारा फरवरी 2025 से अब तक व्ही.सी. के माध्यम से 411 अभ्यर्थियों की सुनवाई की जा चुकी है। भोपाल, खण्डवा, छिंदवाड़ा, मन्दसौर, धार, सतना, उमरिया, ग्वालियर, अलीराजपुर, राजगढ, नीमच, शाजापुर, डिण्डौरी, सागर एवं हरदा जिले के अभ्यार्थियों की सुनवाई की जा चुकी हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा 97 अभ्यर्थियो के निर्वाचन व्यय लेखे सुनवाई उपरांत एवं दस्तावेज प्रमाण के आधार पर मान्य किये गये। राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा 226 अभ्यर्थियो को व्ही०सी० के माध्यम से सुनवाई उपरांत निरर्हित किया गया। अधिकतम पांच साल तक के लिये निरर्हित किये जाने का प्रावधान है। अभ्यर्थी नियत तारीख प्रत्येक गुरुवार को सायंकाल 4:30 PM से 6:00PM तक जिला मुख्यालय के एन आई सी रूम से जुड़कर राज्य निर्वाचन आयुक्त की व्ही०सी० में सम्मिलित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं। प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये आयोग द्वारा जिले के उप जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।  म.प्र. नगरपालिक निगम एवं मध्यप्रदेश नगर पालिक अधिनियम के तहत निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत किया जाना और लेखा दाखिल करने में असफलता पर निरर्हित घोषित किये जाने के प्रावधान हैं। नैर्सिंगक न्याय के आधार पर लेखा दाखिल करने में असफल अभ्यर्थियों को विलम्ब से लेखा दाखिल करने और विहित रीति में लेखा दाखिल नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को पक्ष समर्थन के लिए राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाता है।  

पैसा, शॉल और गुलदस्ता के साथ तेजस्वी यादव का जन्मदिन, समर्थक जुटे खुशी मनाने

पटना बिहार में चुनावी हलचल तेज है। इस बीच राज्य के नेता प्रतिपक्ष और महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव अपना जन्मदिन भी मना रहे हैं। तेजस्वी यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए उनके समर्थक पटना पहुंचे थे। यह समर्थक गाजे-बाजे के साथ पटना आए थे। चुनावी रैलियों के लिए पटना से निकलने से पहले उनके समर्थकों ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उनके आवास के बाहर सुबह से ही समर्थकों का जमावड़ा था। बैंड-बाजा और मिठाई लेकर तेजस्वी यादव के समर्थक खड़े नजर आए। जन्मदिन पर तेजस्वी के समर्थकों ने उन्हें शॉल और गुलदस्ता भेंट किया। इसके अलावा एक समर्थक नोट उड़ाते भी नजर आए। तेजस्वी यादव ने समर्थकों का धन्यवाद भी किया। अपने नेता के जन्मदिन के मौके पर समर्थक सड़क पर नाचते और पैसे लुटाते भी नजर आए। कई समर्थकों के हाथ में मिठाइयों की टोकरियां थीं। तेजस्वी यादव के घर के बाहर जश्न का नजारा दिखा। तेजस्वी यादव ने परिवार संग मनाया बर्थडे इससे पहले तेजस्वी यादव ने परिवार वालों के साथ भी जन्मदिन मनाया है। जन्मदिन मनाने की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं। तेजस्वी यादव की बहन मीसा भारती ने अपने फेसबुक पेज पर तेजस्वी के जन्मदिन मनाने की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, ‘जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएँ और आशीर्वाद भाई। तुम हमेशा स्वस्थ, प्रसन्न और सफल रहो। जीवन के हर पड़ाव पर तुम्हारी मेहनत, लगन और सच्चाई तुम्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचाए। ईश्वर तुम्हें वो शक्ति दे कि तुम अपने सपनों को साकार कर सको और हर एक आशावान का गर्व बनो। तुम्हारी मुस्कान यूँ ही बनी रहे और हर आने वाला वर्ष तुम्हारे जीवन में नई रोशनी और उपलब्धियाँ लेकर आए। ’ 36 पॉन्ड का केक कटेगा.. बता दें कि महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव रविवार को 36 वर्ष के हो जाएंगे। राजद ने उनके जन्मदिन को मनाने की पूरी तैयारी की है। पार्टी ने प्रदेश कार्यालय में 36 पॉन्ड का केक काटने का निर्णय लिया है। साथ ही गरीब बच्चों के बीच कॉपी, पेंसिल भी वितरित की जाएगी। वहीं पार्टी नेताओं की ओर से कार्यालय के बाहर एक पोस्टर भी लगाया गया है जिसमें तेजस्वी को बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी उपहार स्वरूप भेंट किया गया है। इस बाबत प्रदेश महासचिव भाई अरुण कुमार और सृजन स्वराज की ओर से लगाए गए पोस्टर में पार्टी के अन्य नेताओं की भी तस्वीर है। चुनाव पर क्या बोले तेजस्वी यादव… नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने रविवार को पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि, आज चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है। इस बार माहौल बहुत अच्छा है। बिहार की जनता आशीर्वाद दे रही है और बदलाव के लिए वोट कर रही है। 11 नवंबर को भी करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हो या केंद्र के मंत्री, ये लोग 65% आरक्षण के बारे में कुछ नहीं बोल रहे हैं जो हमारी सरकार ने 17 महीने में बढ़ाया था। प्रधानमंत्री 65 प्रतिशत आरक्षण खाकर बैठ गए हैं। उन्हें बिहार में पढ़ाई, कमाई, सिंचाई की बात करनी चाहिए। बताना चाहिए कि बिहार को क्या दिया गुजरात को क्या दिया। इस पर कोई बात नहीं हो रही है।

BSP सुप्रीमो मायावती आज बिहार दौरे पर, रैली से भरेंगी चुनावी जोश

पटना बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती आज बिहार के कैमूर जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करेंगी। बसपा के एक बयान के अनुसार, रैली दोपहर में भभुआ हवाई पट्टी के पास एक मैदान में आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम में आसपास के जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। पार्टी ने कहा कि बसपा लगभग सभी सीटों पर बिहार विधानसभा चुनाव अकेले लड़ रही है। बयान में कहा गया है कि राज्य में पार्टी के अभियान का नेतृत्व बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक और राज्यसभा सांसद रामजी गौतम, राष्ट्रीय समन्वयक अनिल सिंह और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद कर रहे हैं। 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान बिहार में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होगा, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी। 2025 के बिहार चुनाव (Bihar Election 2025) में मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (Mahagathbandhan) के बीच होगा। एनडीए में भारतीय जनता पार्टी (BJP), जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले महागठबंधन में कांग्रेस पार्टी, दीपांकर भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (सीपीआई-एमएल), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। इसके अलावा, प्रशांत किशोर की जन सुराज ने भी राज्य की सभी 243 सीटों पर दावा ठोका है।

मौसम ने खींची ब्रेक: प्रियंका गांधी की खगड़िया रैली बारिश के कारण स्थगित

खगड़िया खगड़िया जिले के बेलदौर में शनिवार को होने वाली कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की चुनावी रैली खराब मौसम के कारण रद्द कर दी गई। यह जानकारी पार्टी के एक नेता ने दी। इसकी जानकारी बेलदौर के कांग्रेस प्रत्याशी मिथलेश निषाद ने सोशल मीडिया अकाउंट पर दी। बता दें कि बेलदौर विधानसभा क्षेत्र के गांधी इंटर स्कूल मैदान में यह सभा होनी थी, लेकिन भारी बारिश के कारण उनकी सभा स्थगित कर दी गई।गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरण में 06 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान कराया जाना है। 14 नवंबर को मतगणना होगी और चुनाव की प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी हो जायेगी। बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। 2025 के बिहार चुनाव में मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और महागठबंधन के बीच होगा। एनडीए में भारतीय जनता पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले महागठबंधन में कांग्रेस पार्टी, दीपांकर भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (सीपीआई-एमएल), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। इसके अलावा, प्रशांत किशोर की जन सुराज ने राज्य की सभी 243 सीटों पर दावा ठोक दिया है।  

बिहार विधानसभा में चुनावी खर्चे पर पाबंदी, अब नहीं चलेगा कोई अतिरिक्त खर्च

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों के खर्च की सीमा तय कर दी हैं। चुनाव आयोग की तरफ से जारी निर्देश के अनुसार, एक उम्मीदवार अपने चुनाव प्रचार  के लिए 40 लाख रुपये खर्च कर सकता है। सभी प्रत्याशियों को अपने प्रचार के दौरान खर्च की जाने वाली राशि का पूरा लेखा-जोखा भी निर्वाचन आयोग को देना होगा। एक प्रत्याशी के लिए चुनावी खर्चे की अधिकतम सीमा भारत निर्वाचन आयोग  द्वारा 40 लाख रुपये निर्धारित की गई है। बता दें कि प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक सभा, रैली, पोस्टर, बैनर, वाहन व्यय, विज्ञापन और प्रचार सामग्री पर खर्च करते है। चुनाव आयोग के सख्त आदेश है कि  यदि किसी उम्मीदवार के खर्च में अनियमितता या गड़बड़ी पाई गई तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि हर प्रत्याशी को पर्चा भरने से लेकर परिणाम आने तक के बीच किये गये सभी खर्च का ब्योरा रखना अनिवार्य होगा। बता दें कि निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च पर नजर रखने के लिए बैठकों, रैलियों व जनसभाओं की वीडियोग्राफी कराई जाने का भी निर्देश दिया है। साथ ही व्यय की जानकारी सुनिश्चित करने के लिए कई टीमों की तैनाती की गई हैं। चुनाव आयोग के इस ठोस कदम से बिहार में चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूती मिलेगी।

प्रशांत किशोर की रणनीति पर असर? जन सुराज प्रत्याशी के नामांकन वापसी से बढ़ी मुश्किलें

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की हलचल के बीच सीतामढ़ी सीट  से बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद ज्याउद्दीन खान  ने नामांकन वापस ले लिया है। यह फैसला जन सुराज के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इस कदम ने जिले की राजनीति में भूचाल ला दिया है। नामांकन वापसी के बाद ज्याउद्दीन ने फेसबुक पर अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज के हितों को देखते हुए और अपने शुभचिंतकों की परेशानियों को समझते हुए, उन्होंने अपनी दूसरी बार कुर्बानी दी है। ज्याउद्दीन के इस फैसले के बाद वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। अटकलें लगााई जा रही हैं कि पार्टी के भीतर किसी आंतरिक कलह का ही यह नतीजा है या फिर किसी अन्य दल के दबाव में यह फैसला लिया गया है. मोहम्मद ज्याउद्दीन खान को क्षेत्र में एक मजबूत और लोकप्रिय उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा था। उनके मैदान से हटने के बाद पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। साथ ही सीतामढ़ी विधानसभा सीट पर मुकाबला अब सीधे NDA और महागठबंधन के बीच सिमट गया है। पहले जहां मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा था, वहीं अब जन सुराज समर्थक वोट दो प्रमुख गठबंधनों में बंटने की संभावना है। इससे किसी एक बड़े गठबंधन को सीधा फायदा मिल सकता है।

चुनावी रणभूमि की पहली लड़ाई: कौन कितनी सीटों पर दावेदार, लालू-नीतीश की ताकत का हाल

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान छह नवंबर को है। पहले चरण में 18 जिले के 121 सीटों पर चुनाव होना है। अब तक 1698 विभिन्न दलों के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन किया है। 20 अक्टूबर तक नाम वापसी की अंतिम तिथि है। खास बात यह है कि पहले चरण में राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाईटेड की सबसे अधिक सीटें दांव पर लगी है। इस बार महागठबंधन की ओर से राजद ने 71, कांग्रेस ने 25, भाकपा माले 13, वीआईपी और सीपीआई छह-छह, सीपीएम और आईआईपी ने दो प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं एनडीए से जदयू ने 57 उतारे हैं। भाजपा के 48, लोजपा (राम) के 14 और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो से दो प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।   पहले चरण में 36 सीटों पर राजद और जदयू के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। वहीं राजद और भाजपा के बीच 23 सीटों पर आमने सामने हैं। कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों के बीच 23 सीटों पर मुकाबला है। वहीं कांग्रेस और जदयू  12 सीटों पर आमने-सामने हैं। वहीं चिराग और तेजस्वी के बीच 10 सीटों पर मुकाबला होना है। पहले यह संख्या 11 थी। लेकिन, मढ़ौरा से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) सीमा सिंह का नामांकन रद्द होने के कारण यह संख्या अब 10 रह गई। महागठबंधन में पिछले कुछ दिनों से सबसे ज्यादा चर्चा में रहे मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी का मुकाबला पहले चरण की छह में से चार सीटों पर भाजपा और दो सीटों पर जदयू से है। इन दिग्गजों की किस्मत पहले चरण में दांव पर पहले चरण में राजद से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राघोपुर और छपरा से भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह चुनाव लड़ रहे हैं।  भाजपा से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा लखीसराय, सम्राट चौधरी तारापुर से, मंत्री मंगल पांडेय सीवान से, जिवेश मिश्रा जाले से, संजय सरावगी दरभंगा सदर से, राजू सिंह राजू कुमार सिंह,  नितिन नवीन बांकीपुर और लोकगायिका मैथिली ठाकुर अलीनगर सीट, पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा से चुनावी मैदान में हैं। वहीं जदयू से मंत्री विजय कुमार चौधरी सरायगंज से, महेश्वर हजारी कल्याणपुर से चुनावी मैदान में हैं। 

प्रशांत किशोर: चुनाव नहीं लड़ूंगा, जनसुराज की जीत पर भ्रष्ट नेताओं-नौकरशाहों पर होगा एक्शन

पटना जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बुधवार को एलान किया कि वह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला पार्टी ने उसके व्यापक हित में लिया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर जन सुराज पार्टी बिहार चुनाव जीतती है, तो इसका राष्ट्रव्यापी असर होगा। राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल जाएगी। बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पार्टी ने फैसला किया है कि मैं विधानसभा चुनाव न लड़ूं, और इसी कारण राघोपुर से तेजस्वी यादव के खिलाफ हमने किसी और उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। यह फैसला पार्टी के व्यापक हित में लिया गया है। अगर मैं चुनाव लड़ता, तो जरूरी संगठनात्मक कार्यों से मेरा ध्यान भटकता। सरकार बनने के एक महीने के भीतर यह कानून बनाया जाएगा प्रशांत किशोर ने कहा कि हमने बिहार को भू-माफिया, बालू माफिया और तमाम तरह के माफियाओं से मुक्त करने का वादा किया है। इसी दिशा में हमने छह बड़े वादे किए हैं, जिनमें फर्जी शराबबंदी नीति को खत्म करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के एक महीने के भीतर एक कानून बनाया जाएगा, जिसके तहत 100 सबसे भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की पहचान की जाएगी। मुझे पूरा यक़ीन है कि ये लोग अभी से पूजा-पाठ कर रहे होंगे कि हम सत्ता में न आएं। इन भ्रष्ट लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा और उनकी अवैध संपत्ति जब्त कर राज्य के खजाने में जमा की जाएगी, ताकि बिहार के विकास में उसका इस्तेमाल हो सके। यह वही विकास है जो इन लोगों की वजह से रुका पड़ा है, हम या तो भारी जीत दर्ज करेंगे या पूरी तरह हार जाएंगे जब उनसे उनकी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया, तो 48 वर्षीय प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि हम या तो भारी जीत दर्ज करेंगे या पूरी तरह हार जाएंगे। मैंने पहले भी कहा है कि हमें या तो 10 से कम सीटें मिलेंगी या 150 से ज्यादा। बीच का कोई रास्ता नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि अगर बिहार में त्रिशंकु विधानसभा बनती है, तो क्या जन सुराज एनडीए या इंडिया गठबंधन को समर्थन देगा, इस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि त्रिशंकु जनादेश की कोई संभावना नहीं है। पीके ने यह भी कहा कि अगर हमें 150 से कम सीटें मिलती हैं। अगर जनसुराज को 120 या 130 सीटें भी आती हैं तो वह मेरी नजर में हार होगी। अगर हम अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो हमें बिहार को देश के 10 सबसे विकसित राज्यों में शामिल करने का जनादेश मिलेगा। लेकिन, अगर जनता ने हमारे ऊपर पर्याप्त भरोसा नहीं जताया। हम अपनी सड़क और समाज की राजनीति को आगे बढ़ाते रहेंगे। बिहार में सत्ताधारी एनडीए की हार तय है जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दावा किया कि बिहार में सत्ताधारी एनडीए की हार तय है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब सत्ता में वापस नहीं लौटेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन की सीटों और उम्मीदवारों को लेकर असमंजस की स्थिति से साफ है कि हालात उनके पक्ष में नहीं हैं। पीके ने दावा किया एनडीए की विदाई तय है और नीतीश कुमार अब दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। पिछली विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने चुनाव की घोषणा से कुछ दिन पहले ही बगावत कर दी थी और नीतीश कुमार की पार्टी के खिलाफ कई उम्मीदवार उतार दिए थे, जिनमें से अधिकांश प्रभावशाली नहीं थे, लेकिन इसका नतीजा यह हुआ कि जदयू की सीटें घटकर 43 पर आ गई थीं। 

झारखंड की घाटशिला सीट पर उपचुनाव की तैयारी तेज, नामांकन शुरू

रांची झारखंड के घाटशिला (अनुसूचित जनजाति सुरक्षित) विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए सोमवार को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने यह जानकारी दी। नामांकन पत्र पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्वीकार किए जाएंगे। कुमार ने बताया कि नामांकन पत्र दाखिल करने का अंतिम समय 21 अक्टूबर तक है। नामांकन पत्रों की जांच 22 अक्टूबर को होगी जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 24 अक्टूबर है। उपचुनाव के लिए मतदान 11 नवंबर को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी। घाटशिला निर्वाचन क्षेत्र में 2.55 लाख मतदाता हैं, जिनमें 1.30 लाख महिला मतदाता हैं। उल्लेखनीय है कि झारखंड के तत्कालीन शिक्षा मंत्री 62 वर्षीय रामदास सोरेन का 15 अगस्त को नई दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो जाने के कारण घाटशिला सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उपचुनाव के लिए तैयारी कर रहे हैं और इस सप्ताह वे अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर सकते हैं। ज्ञातव्य है कि रामदास सोरेन ने 2024 में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र, भाजपा के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन को हराकर तीसरी बार यह सीट जीती थी। रामदास ने पहली बार 2009 में यह सीट जीती थी। हालांकि 2014 में वह भाजपा के लक्ष्मण टुडू से यह सीट हार गए थे, लेकिन 2019 में उन्होंने इस पर जीत हासिल की थी।  

धर्मेंद्र प्रधान बोले—NDA में सीट बंटवारे पर 99 प्रतिशत सहमति, कुछ सीटों पर चर्चा जारी

पटना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बिहार चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दलों के बीच 99 प्रतिशत सीटों पर यह तय हो गया है कि कौन-सी पार्टी किस सीट से चुनाव लड़ेगी। उनके अनुसार, शेष सीटों पर बहुत जल्द निर्णय लिया जाएगा। NDA के पांचों घटक दलों के बीच बातचीत जारी प्रधान ने यहां एक होटल में भाजपा के मीडिया सेंटर के उद्घाटन के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में कहा, “राजग के पांचों घटक दलों के बीच बातचीत जारी है। लगभग सभी सीटों पर सहमति बन चुकी है।” उन्होंने यह बातें तब कही हैं जब राजग में सीट बंटवारे को लेकर मतभेद के स्वर उभरने लगे हैं। जनता दल यूनाइटेड (जद(यू)) ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी के हिस्से में गई कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह दे दिया है। सूत्रों का कहना है कि राजग में सीट बंटवारे को लेकर सब कुछ ठीक नहीं है, कुछ सीटों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। हालांकि राजग में एक जुटता दिखाने के लिए जद(यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के उपेंद्र कुशवाहा ने ‘एक्स' पर यह जानकारी दी है कि “सीटों की संख्या तय हो गई है, कौन दल किस सीट पर लड़ेगा, इसकी सकारात्मक बातचीत अंतिम दौर में है। मोदी जी और नीतीश जी के नेतृत्व में राजग के सभी दल एकजुटता के साथ पूरी तरह तैयार हैं।” प्रधान ने दावा किया कि विपक्षी दलों को अपनी हार साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा “14 नवंबर के बाद एक बार फिर बिहार में राजग की सरकार बनेगी।” प्रधान ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट मानना है कि पूर्वोत्तर भारत के विकास का मार्ग बिहार से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा, “बिहार देश की राजनीतिक पाठशाला है। बिना बिहार की राजनीति को समझे, कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक रूप से परिपक्व नहीं हो सकता।”